दिन में गांड चूत चुदाई का खेल – लॉकडाउन के बाद पति-पत्नी की धमाकेदार चुदाई

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दिन में गांड चूत चुदाई का खेल – क्या आपने कभी सोचा है कि लॉकडाउन के बाद जब बेटी पहली बार कॉलेज जाए और घर में सिर्फ पति-पत्नी अकेले हों, तो दिन में कैसी धमाकेदार चुदाई हो सकती है? यह हिंदी सेक्स कहानी दिन में गांड चूत चुदाई का खेल की है जहाँ पत्नी ने रात को जानबूझकर चुदाई नहीं की ताकि अगले दिन पूरा मज़ा आए, सुबह बिना ब्रा-पैंटी के सिर्फ पेटीकोट और मैक्सी में तैयार हुई, और पति ने पहले उसके बूब्स चूसे, चूत चाटी और उंगली से क्लिट मसला, फिर डॉगी स्टाइल में ज़ोरदार चूत चुदाई की, फिर मिशनरी और साइडवेज़ पोज़ीशन में चोदा जिससे पत्नी दो बार झड़ गई, और फिर गांड चुदाई की बारी आई — पहले थूक से चिकनाई करके धीरे-धीरे लंड डाला, फिर पूरा 7 इंच का मोटा लंड गांड में घुसाकर ज़ोरदार चोदा, कई पोज़ीशन में गांड मारी, और आखिर में काउगर्ल स्टाइल में पत्नी ने अपनी गांड चुदवाई और पति ने अपना गर्म वीर्य उसकी गांड में भर दिया। अगर आपको लॉकडाउन सेक्स, चूत और गांड दोनों की चुदाई, डॉगी, मिशनरी और काउगर्ल स्टाइल, और पति-पत्नी के जुनूनी सेक्स वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।

भाग 1: दिन में गांड चूत चुदाई का खेल – लॉकडाउन, बेटी का कॉलेज और तैयारी

मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ, क्यों न करूँ… वो भी मुझे प्यार करते हैं। हमारी शादी को बीस साल हो गए हैं, लेकिन आज भी जब मैं उन्हें देखती हूँ, तो मेरा दिल वैसे ही धड़कता है जैसे सुहागरात वाली रात को धड़का था। तब मैं 21 साल की थी, और वो 25 के। आज मैं 41 की हूँ, और वो 45 के। लेकिन हमारी चुदाई की भूख में ज़रा भी कमी नहीं आई है — बल्कि समय के साथ और बढ़ी है।

वो मेरी चुदाई तो ऐसे करते हैं कि हर रोज़ चुदकर भी मैं उनसे चुदने के लिए बेकरार रहती हूँ। जब भी वो मुझे छूते हैं, तो ये सोचकर ही मेरी चूत पानी छोड़ने लगती है कि न जाने अब मेरे पति मुझे कैसे चोदेंगे — कभी डॉगी स्टाइल में, कभी मिशनरी में, कभी काउगर्ल में, कभी कुछ ऐसा जो मैंने सोचा भी न हो। वो हर बार कुछ नया लेकर आते हैं, और मैं हर बार उनके लिए पूरी तरह तैयार रहती हूँ।

लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद था और हमारी बेटी का कॉलेज भी बंद था तो मैं घर में ही रहती थी। मेरी बेटी — जो अब 19 साल की हो गई है, बिल्कुल मेरी कॉपी, गोरी और सुंदर — ऑनलाइन लेक्चर्स ज्वाइन करती थी इसलिए पति से मेरी दिन की चुदाई तो बंद ही थी। पूरे दिन बेटी घर में रहती, इधर-उधर घूमती, कभी किचन में आ जाती, कभी हमारे कमरे में। तो हम कुछ कर नहीं पाते थे। पर रात में ज़रूर ज़बरदस्त चुदाई होती थी — जब बेटी अपने कमरे में सो जाती, तब हमारी बारी आती। चुपके से, दबे पाँव, आवाज़ दबाकर। जब तक मैं अपने पति का लंड चूत में लेकर चुदवा न लूँ, मुझे नींद आती ही नहीं थी। यह मेरी आदत बन गई थी — उनके बिना मुझे नींद नहीं आती थी, जैसे किसी को दवा के बिना नींद नहीं आती।

एक दिन मेरी बेटी ने कहा — “मम्मी, मुझे कल कॉलेज जाना पड़ेगा। प्रैक्टिकल एग्ज़ाम हैं, ऑनलाइन नहीं हो सकते। सुबह नौ बजे निकलूँगी, शाम चार बजे तक वापस आ जाऊँगी।” मेरा दिल खुशी से उछल पड़ा। मैंने बाहर से तो गंभीर रहने की कोशिश की — “ठीक है बेटा, ज़रूर जाओ, पढ़ाई ज़रूरी है” — लेकिन अंदर ही अंदर मैं बहुत खुश हो गई और अपने प्यारे पति की तरफ देखकर मुस्कुराई। पति समझ गए कि कल दिन में चुदाई का खेला होगा। उनकी आँखों में वही चमक आ गई जो मैंने बीस साल में हज़ारों बार देखी है — वो चमक जो सिर्फ एक चीज़ के लिए होती है।

रात को हम दोनों ने चुदाई नहीं की क्योंकि कल दिन में मेरी चूत-गांड की जमकर चुदाई होना तय थी। और मैं चाहती थी कि कल ही पूरा मज़ा आए तो उस रात मैंने बिना चुदे ही सो जाना ठीक समझा। हालाँकि मेरी चूत गीली थी — वो अपने आप गीली हो रही थी, बस यह सोचकर कि कल क्या होने वाला है — और मेरे पति का लंड भी खड़ा था, लेकिन हमने खुद को रोक लिया। कल का इंतज़ार हमें और भी उत्तेजित कर रहा था। हम दोनों एक-दूसरे से चिपककर सो गए, लेकिन नींद बेचैनी भरी थी — जैसे कोई बच्चा क्रिसमस की सुबह का इंतज़ार कर रहा हो।

सुबह उठकर मैं नहा ली और सिर्फ पेटीकोट और मैक्सी पहन ली। अंदर न ब्रेज़ियर पहनी और न चड्डी। मेरे 36 साइज़ के बूब्स मैक्सी के नीचे स्वतंत्र थे, हर कदम पर हिल रहे थे, और मेरी चूत पेटीकोट के नीचे खुली हुई थी। मुझे यह एहसास बहुत अच्छा लग रहा था — जैसे मैं अपने पति के लिए हमेशा तैयार हूँ, जैसे मेरा शरीर उनके लिए ही बना है।

हमारी बेटी सब तैयारी करके 9 बजे कॉलेज निकल गई। उसने जाते-जाते कहा — “मम्मी, मैं शाम चार बजे तक आ जाऊँगी।” मैंने कहा — “ठीक है बेटा, आराम से आना।” और जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, मैंने राहत की साँस ली। मतलब, हमारे पास पूरे सात घंटे थे — सिर्फ हम दोनों, बिना किसी रुकावट के। कोई फोन नहीं, कोई डोरबेल नहीं, कोई बेटी नहीं।

मैंने अपने प्यारे पति को भी नहाने के बाद चड्डी पहनने नहीं दी। वो भी नंगे ही घूम रहे थे, और उनका लंड हर कदम पर हिल रहा था — अभी भी आधा खड़ा, तैयार। मैं तो अपने प्यारे पति से चुदने के लिए उतावली हुई जा रही थी। मेरा शरीर उनके लिए तड़प रहा था।

मैंने पति को पीने के लिए दूध दे दिया — गर्म दूध, शहद के साथ। सब काम 10 बजे खत्म करके मैं अपने पति के पास आ गई और उनसे लिपट गई। हमारे होंठ एक हो गए। हम दोनों में होंठ चूसने की जैसे होड़ लगी थी — कौन किसको ज़्यादा ज़ोर से चूमता है। उनकी जीभ मेरे मुँह में थी, मेरी जीभ उनके मुँह में। हमारी लार मिल रही थी, हमारी साँसें एक हो रही थीं।

भाग 2: सुबह की शुरुआत – बूब्स चूसे, चूत चाटी और पहली चुदाई

मेरे रसीले होंठों को चूसते-चूसते मेरे प्यारे पति पीछे से पेटीकोट उठाकर मेरे मोटे गोरे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगे और आगे हाथ लाकर मेरी चूत सहलाने लगे। उनकी उंगलियाँ मेरी चूत के होंठों पर फिर रही थीं — हल्के-हल्के, गोल-गोल घुमाकर — और मैं सिहर उठी। उनकी उंगलियाँ मेरी चूत की दरार में सरक रही थीं, मेरे गीलेपन को महसूस कर रही थीं। मुझे मालूम था कि आज मेरी नाज़ुक चूत की धज्जियाँ उड़ना पक्का है। मैं और मेरी चूत इसके लिए तैयार थी। हम दोनों बेसब्री से इस पल का इंतज़ार कर रहे थे।

मेरे प्यारे पति ने मुझे धीरे से बेड पर लिटाया और मेरी पूरी मैक्सी उठाकर गले तक ला दिया। अब मेरे स्तन पूरी तरह नंगे थे — 36 साइज़ के, गोरे, भरे हुए, और निप्पल सख्त हो चुके थे। वो मेरे मोटे-मोटे गोरे चूचियों के साथ छेड़खानी करने लगे, उंगलियों से निप्पल दबाने लगे, हाथ से हल्का-हल्का दबाने लगे। इससे मेरे बदन में चींटियाँ रेंगने लगीं — वो सिहरन जो सिर्फ उनकी उंगलियाँ पैदा कर सकती थीं। बीच-बीच में वो मेरी नमकीन चूत पर हाथ फेर देते, उससे मेरी आग और भड़क रही थी।

अब वो मेरा एक निप्पल मुँह में लेकर धीरे-धीरे चूसने लगे। मेरे प्यारे पति ने मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी पर हमला कर दिया था। एक हाथ की उंगली से मेरी चूत का दाना मसल रहे थे — मेरी क्लिट, जो अब सख्त और फूली हुई थी। मेरी नाज़ुक चूत चुलबुला उठी, मेरी चूत से रस बहने लगा। मैं “आह… आह… इस्स्स…” की आवाज़ें निकालने लगी।

मैंने प्यारे पति की पैंट निकालकर उनका सात इंच का मस्त लंड हाथ में ले लिया और उसे मसलने लगी। वो गर्म था, सख्त था, और मेरे हाथ में धड़क रहा था — जैसे कोई ज़िंदा चीज़ हो। मैंने उसे ऊपर-नीचे किया, उसकी नसों को महसूस किया। अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मेरी चूत प्यारे पति का लंड अंदर लेने के लिए तड़फ रही थी। मैंने अपने प्यारे पति को अपनी तरफ खींच लिया और उनका तना हुआ लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। मेरी जीभ उनके लंड की हर नस पर घूम रही थी, मेरे होंठ कसकर बंद थे। मैंने लंड चूसकर पूरा गीला कर दिया — अपनी लार से, अपनी भूख से, अपनी चाहत से।

फिर मैंने पति का लंड मुँह से निकाला और घूम गई। मैंने अपनी मदमस्त गोरी गांड बेड के किनारे रखकर अपने दोनों पैर अपनी तरफ उठा लिए। मेरे प्यारे पति नीचे खड़े हो गए थे और लंड चूत की फाँकों में घिसने लगे। उनका लंड मेरी चूत के होंठों पर ऊपर-नीचे हो रहा था, मेरी क्लिट को रगड़ रहा था। मेरी नाज़ुक गुलाबी चूत भी पति के लंड को अंदर आने की अनुमति दे रही थी — उसका गीलापन, उसका खुलापन, सब कुछ कह रहा था कि वो तैयार है।

फिर वो पल आ गया जब मेरे प्यारे पति का तगड़ा लंड मेरी कोमल गुलाबी नाज़ुक चूत को चीरता हुआ अंदर दाखिल होने के लिए झटके मारने लगा था। तभी मेरे प्यारे पति ने लंड हटाया और अपने हाथ की दो उंगलियों से मेरी चूत की फाँकों को अलग करके अपने होंठ मेरी चूत पर लगाकर उसे चूम लिया। उन्होंने मेरी चूत के दाने को अपने होंठों में पकड़कर खींचकर छोड़ दिया, फिर जीभ से हल्का-हल्का कुरेदने लगे।

हाय रब्बा, मेरा पूरा शरीर थरथरा गया, मैं बड़बड़ाने लगी — “आहा… इस्स… चूसो… और चूसो ज़ोर से…” मैं अपनी गोरी गांड ऊपर उठाने लगी और अपने प्यारे पति से कहा — “मेरी जान, अब मत तरसाओ… अपना लंड मेरी चूत में उतार दो… आंह जल्दी से चोद दो मुझे… आह ऊई माँ…”

मेरे प्यारे पति ने लंड का सुपारा चूत पर रखकर दबा दिया, तो लंड का सुपारा मेरी चूत के अंदर सट से घुस गया। मैंने अपने होंठ दाँत के नीचे दबा लिए। मुझे कुछ समझती इसके पहले पति ने और एक झटका मारा और उनका पूरा 7 इंच का तगड़ा लंड मेरी नाज़ुक चूत की दीवार को चीरता हुआ अंदर दाखिल हो गया। मेरी चूत चिकनी थी — पहले से ही गीली और तैयार। लंड को अंदर जाने में ज़रा भी दिक्कत नहीं हुई थी। फिर भी मेरे मुँह से हल्की चीख निकल गई।

पहले धक्के से मैं अभी संभली भी नहीं थी कि पति ने अपना लंड मेरी चूत से पूरा बाहर निकाला और फिर से ज़ोर का झटका मारकर पूरा लंड चूत में पेल दिया। मेरे मुँह से चीख निकली — “हाय माँ, थोड़ा धीरे से चोदो न, मैं कहाँ भागी जा रही हूँ… मुझे दर्द हो रहा है।” लेकिन पति ने मेरी एक न सुनी और ऐसे ही ज़ोर-ज़ोर के झटके मारते रहे।

भाग 3: दिन में गांड चूत चुदाई का खेल – डॉगी स्टाइल और मिशनरी में ज़ोरदार चुदाई

मेरे पति का लंड मेरी बच्चेदानी को ठोक रहा था। हर धक्के के साथ मेरा पूरा शरीर हिल रहा था, मेरे स्तन उछल रहे थे, मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं। मेरे प्यारे पति का तगड़ा लंड मेरी बच्चेदानी से जब पहली बार टकराया तो उसी वक्त मेरी नाज़ुक चूत ने पानी बहा दिया था — गर्म, गाढ़ा रस जो मेरी जाँघों पर बहने लगा। मैं अपने हाथ से पति के पेट को पीछे धकेलने लगी तो पति ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और मुझे कुतिया बनाकर मेरे पीछे से अपने घुटनों पर खड़े होकर मेरी कोमल सी चूत में अपना लंड पेल दिया।

फिर वो धीरे-धीरे से लंड चूत में अंदर-बाहर करके मुझे चोदने लगे। ये पोज़ मुझे बहुत पसंद है और मेरे पति को ये पता है। मेरी गांड हवा में थी, मेरी चूत पूरी तरह खुली हुई थी, और उनका लंड मेरी चूत में गहराई तक जा रहा था। हर धक्के के साथ मेरी गांड पर उनकी जाँघें टकरा रही थीं — थप-थप-थप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। पंद्रह मिनट तक मुझे यूँ ही चोदने के बाद पति देव ने मुझे पीठ के बल लेटने के लिए कहा।

मेरे सीधे लेटने के बाद पति मेरी कमर के दोनों बाजू पैर रखकर खड़े हो गए। मैं तो डर गई क्योंकि अब असली चूत की चुदाई होनी थी। यह पोज़ीशन — जहाँ वो मेरे ऊपर खड़े होते और उनका लंड सीधा ऊपर से नीचे मेरी चूत में आता — सबसे गहरी चुदाई देती थी। मैं पति से विनती करने लगी — “प्लीज़ धीरे से चोदना।” तो पति ने कहा — “अरे लंड चूत में डालने तो दो।” मैंने कहा — “डालो, लेकिन मुझ पर रहम करके चोदना।”

उन्होंने हँसते हुए मुझे देखा और मेरी चूत पर नीचे बैठते चले गए। मैंने भी अपने पैर खोलकर बेड पर फैला दिए, तो पति ने अपनी गांड पीछे ले जाकर अपना तगड़ा लंड हाथ से मेरी चूत में घुसा दिया। लंड का सुपारा चूत में दाखिल होते ही पति ने एक झटके में ही पूरा लंड चूत में पेल दिया। उनके लंड ने अंदर घुसते हुए मेरी बच्चेदानी पर ही हमला कर दिया।

“उई माँ मैं मर गई… कितना ज़ोरदार झटका मारा तुमने, मुझे दर्द हो रहा है थोड़ा बाहर निकालो।” लेकिन पति कहाँ कुछ सुनने वाले थे; उन्होंने फिर से एक और तगड़ा हमला मेरी बच्चेदानी पर कर दिया, तो मैं दर्द से चिल्ला उठी। मैं उनकी जाँघों को पकड़कर उनको पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी पर मेरे पति अपनी ही रफ्तार में मेरी नाज़ुक कोमल चूत को चोदकर मज़ा ले रहे थे। अब तो मेरे पेट में दर्द हो रहा था।

मेरे प्यारे पति को मुझ पर तरस आ गया, तो उन्होंने अपना मूसल लंड चूत से बाहर निकाला। मुझे बेड पर सीधा लिटाकर मेरे ऊपर चढ़ गए। उन्होंने मेरा एक पैर उठाकर अपने दोनों पैरों के बीच ले लिया और अपना एक पैर मेरे दोनों पैरों के बीच में कर दिया। सच बताऊँ दोस्तो… इस पोज़ में मेरी चूत में पति के लंड के ज़बरदस्त स्ट्रोक लगते हैं और पति का पूरा लंड मेरी चूत में घुस जाता है। मेरे दूध पीते-पीते मेरे पति मेरी चूत मस्त चोद रहे थे — मेरे निप्पल उनके मुँह में, उनका लंड मेरी चूत में। दोनों तरफ से मुझे आनंद मिल रहा था।

कुछ देर चुदाई के बाद फिर से मुझे दर्द का एहसास होने लगा, तो मैंने फिर से एक चाल चली। मैंने पति से कहा — “मेरी चूत ही चोदोगे… तो मेरी गांड कब मारोगे।” मेरे प्यारे पति मेरी तरफ देखकर मुस्कुराए और बोले — “गांड तो मैं तुम्हारी चोदूँगा और जमकर चोदूँगा।” मैंने कहा — “तो चोदो न मेरी गांड… देर क्यों कर रहे हो।”

वो मुस्कुरा दिए। मुझे उनके मुस्कुराने पर कुछ शक हुआ। मेरे पति एक-दो गिनने लगे, तो मैं समझ गई कि अब ये क्या करने वाले हैं — वो चूत से लंड निकालने का अपना सिग्नेचर मूव करने वाले थे। मैंने झट से अपनी टाँगों से उनकी गांड को दोनों तरफ से पकड़ लिया और कहने लगी — “प्लीज़ अपना लंड धीरे से निकालना, एकदम से मत निकालना।”

लेकिन मेरे पति कहाँ कुछ सुनने वाले थे, उन्होंने अपना मोटा तगड़ा लंड पूरा जड़ तक मेरी चूत में घुसा दिया और एक-दो-तीन करने लगे। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और पति की चूतड़ों को कसकर पकड़कर रखा। तीन कहते ही पति ने अपना लंड एक ही झटके में मेरी चूत से पूरा निकाल दिया। “हाय दइया, मैं मर गई रे…” मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरी पूरी चूत अंदर से पति के लंड के साथ बाहर आ गई हो। मैंने पति की गांड पर एक चपत लगाई, तो वो हँसने लगे।

दोस्तो, इस चुदाई के दौरान मेरी चूत ने दो बार पानी छोड़ दिया था। दो बार मैं झड़ चुकी थी, और मेरा शरीर अब पूरी तरह गर्म और तैयार था।

भाग 4: गांड चुदाई की तैयारी – थूक से चिकनाई और धीरे-धीरे लंड अंदर

अब मेरे पति बेड के नीचे खड़े थे। उन्होंने मुझे फिर से घुमाकर मेरे मोटे और गोरे चूतड़ों को बेड के किनारे रख दिया। मैंने भी अपने पैर अपनी तरफ खींचकर फैला दिए। अब मेरी चूत और गांड के छेद मेरे प्यारे पति के सामने थे — दोनों खुले हुए, दोनों तैयार। मेरी चूत अभी भी गीली थी और उसमें से रस टपक रहा था, और मेरी गांड का छेद टाइट और सिकुड़ा हुआ था। अब मेरी गांड मेरे पति के लंड से चुदने वाली थी।

पति ने अपना मोटा लंड हाथ में पकड़कर मेरी गांड की छेद पर रखकर लंड पर थूक दिया और हल्का सा दबा दिया। पति महोदय का लंड का सुपारा मेरी नाज़ुक गांड में प्रवेश कर गया। मेरे प्यारे पति का अभी सिर्फ सुपारा ही गांड में गया था कि वो उसी को गांड में अंदर-बाहर करके मुझे चोदने लगे। पहले तो मुझे दर्द हुआ — गांड का छेद टाइट था, और लंड मोटा था — फिर मुझे भी अच्छा लगने लगा।

उन्होंने फिर से लंड पर थूक कर लंड को अंदर-बाहर किया और यही करते-करते थोड़ा सा ज़ोर लगा दिया। उन्होंने इस तरह का धक्का मारकर अपना आधा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। आधा ही लंड डालकर अंदर-बाहर करके चोदने लगे। अब मैं भी उनका साथ देने लगी — अपनी गांड को पीछे धकेलकर, उनके लंड को और अंदर लेने की कोशिश करते हुए।

फिर अचानक एक धक्का मारकर पूरा सात इंच का लंड मेरी गांड में घुसा दिया, तो मैं चीख पड़ी। “आआआह… धीरे… धीरे…” लेकिन अब मेरे पति का तगड़ा लंड मेरी गांड में पूरा अंदर-बाहर हो रहा था। वो अपनी उंगली से मेरी चूत के दाने को रगड़ रहे थे — एक हाथ से मेरी कमर पकड़कर, दूसरे हाथ की उंगली से मेरी क्लिट मसलते हुए। मैं मस्ती में चुदाई करवाने लगी। दिन में गांड चूत चुदाई का खेल अब अपने चरम पर था।

कुछ देर मेरी गांड चोदने के बाद पति ने मुझे मेरे दोनों पैर के पंजे बेड के बाहर करके मेंढक की तरह बिठाया और पीछे से मेरी गांड में अपना लंड डालकर चोदने लगे। मैं भी अपने चूतड़ आगे-पीछे करके पति जी का लंड अंदर तक लेते हुए चुदाई में उनका साथ देने लगी। अब तो मेरी गांड खुल गई थी और मेरे पति का तगड़ा लंड मेरी गांड में अंदर तक जाकर चोद रहा था।

पति लंड गांड में ही रखवाए हुए मैंने बेड से नीचे उतरकर ज़मीन पर पैर रख दिए और अपना शरीर बेड पर रख दिया। मैं झुक गई। अब पति जी अपना लंड गांड में रखकर मेरी गांड मार रहे थे और अपने हाथ आगे लाकर मेरे दोनों चूचियों को हल्का सा दबाते हुए मसल रहे थे। मैं तो बस हवा में झूल रही थी — उनके लंड पर टिकी हुई, उनके हाथों में सुरक्षित। मेरे स्तन उनकी हथेलियों में थे, मेरी गांड उनके लंड पर थी, और मेरी साँसें उनकी साँसों के साथ चल रही थीं।

फिर पति ने अपना लंड मेरी गांड में ही रखकर मुझे खड़ा कर दिया। मैं उनसे चिपक गई — मेरी पीठ उनकी छाती से सटी हुई, मेरी गांड उनकी जाँघों से सटी हुई। अब वो बड़े आराम से मेरे मम्मे दबाते हुए मेरी गांड मारने लगे। यार… मैं तो मदहोश होकर उनका साथ देने लगी। काफी ज़्यादा वक्त हो गया था। मेरे पति मुझे धकापेल चोद रहे थे। उनका लंड अभी तक खड़ा ही था — मुरझाया नहीं था, थका नहीं था।

भाग 5: काउगर्ल स्टाइल में गांड चुदाई और पति का वीर्य

मैंने अपने प्यारे पति से कहा — “अब तुम नीचे लेट जाओ, मैं तुम्हारे ऊपर बैठकर अपनी गांड चुदवा लूँगी।” पति ने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और बेड के ऊपर सीधा पीठ के बल सो गए। उनका लंड आसमान की तरफ इशारा कर रहा था — गीला, चमकदार, और अभी भी पूरी तरह सख्त। सात इंच का मोटा लंड, मेरी गांड के रस से चमक रहा था।

मैं उनकी दोनों साइड पैर रखकर नीचे बैठ गई। फिर अपनी मुट्ठी में पति का तगड़ा लंड लेकर अपनी गांड के छेद पर सेट करके धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी। उनका मूसल लंड भी धीरे-धीरे मेरी गांड में घुसता चला गया — इंच-इंच करके, गर्म और मोटा। मैंने अपने पति का लंड पूरा गांड में ले लिया और अंदर-बाहर करने लगी।

अब मैं लंड को अपनी गांड में लेकर उछल-उछल कर चुदाई करवा रही थी। मेरे स्तन उछल रहे थे, मेरी साँसें तेज़ थीं, और मेरी गांड उनके लंड को बार-बार निगल रही थी। मेरे पति अपने हाथों से मेरे चूतड़ पकड़ रखे थे — मेरी गांड को सहला रहे थे, दबा रहे थे, और कभी-कभी हल्के से थप्पड़ भी मार रहे थे।

कुछ दस मिनट हो गए थे तो मेरे पति की मदभरी आवाज़ें निकलने लगीं और वो कहने लगे — “आहा… और चोदो ज़ोर से… मेरा पानी निकलने वाला है… आंह ज़ोर से…” मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी — और तेज़, और ज़ोर से — और कुछ धक्के मारने के बाद ही मेरे प्यारे पति ने अपने लंड पर से मुझे ऊपर उठने नहीं दिया। उनका पूरा लंड मेरी गांड में था और तभी मेरे प्यारे पति के लंड ने गर्म-गर्म लावा मेरी गांड में छोड़ दिया। मेरी पूरी गांड पति के वीर्य से भर गई — गर्म, गाढ़ा, और बहुत सारा। मैंने महसूस किया कि उनका लंड मेरी गांड में धड़क रहा है, फड़फड़ा रहा है, और हर धड़कन के साथ मेरे अंदर और वीर्य भर रहा है।

मैं भी वैसे ही पति के सीने पर लेट गई। मेरी गांड अभी भी उनके लंड पर टिकी हुई थी, लेकिन मैं हिल नहीं रही थी। हम दोनों थक गए थे। हमारी साँसें तेज़ थीं, हमारे शरीर पसीने से तर थे, और हमारे दिल एक साथ धड़क रहे थे।

कुछ देर बाद मेरे प्यारे पति का लंड मुरझाकर मेरी गांड से बाहर आ गया था और इसी के साथ उनका वीर्य भी बहकर बाहर आकर मेरी चूत के ऊपर से बहकर पति के अंडों पर गिरने लगा। वो गाढ़ा सफ़ेद वीर्य — ढेर सारा — मेरी जाँघों पर, बेड की चादर पर फैल रहा था। मैंने रस पोंछने के लिए उठना चाहा तो पति ने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया। उनकी बाँहें मेरे चारों ओर थीं, मज़बूत और गर्म। मैं भी पति की बाँहों में लेट गई। मैं आज बहुत खुश थी। बहुत दिनों बाद भरी दुपहर में मेरी चूत और गांड की मस्त चुदाई जो हुई थी।

दिन में गांड चूत चुदाई का खेल ने मुझे याद दिलाया कि मेरे पति सिर्फ मेरे शौहर नहीं, मेरे सबसे अच्छे दोस्त, मेरे प्रेमी, और मेरे मालिक भी हैं। और मैं हर दिन उनके साथ ऐसे ही खेल खेलना चाहती हूँ — चाहे दिन हो या रात, चाहे बेटी घर पर हो या न हो। क्योंकि जब प्यार और चुदाई का ऐसा संगम हो, तो ज़िंदगी से बेहतर क्या हो सकता है?

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