पति-पत्नी की प्रेम कहानी भाग 2 – पति की गांड की चुदाई सरप्राइज़

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पति-पत्नी की प्रेम कहानी भाग 2 – उदयपुर की उस जादुई रात के बाद, मीरा और विक्रम का रिश्ता एक नई ऊँचाई पर पहुँच चुका था। लेकिन मीरा के मन में एक और ख्याल आया। इस बार उसने तय किया कि वो विक्रम के लिए एक ऐसा सरप्राइज़ तैयार करेगी जो उसने पहले कभी नहीं देखा होगा। पति-पत्नी की प्रेम कहानी भाग 2 में पढ़िए कैसे मीरा ने अपने बेडरूम को एक रहस्यमयी अड्डे में बदल दिया, सिल्वर बॉडीसूट पहना, और फिर विक्रम के साथ की वो सब कुछ जो उसने कभी सिर्फ सपनों में सोचा था। यह कहानी है प्यार, भरोसे और एक-दूसरे को पूरी तरह समर्पित होने की।

भाग 1: उदयपुर के बाद – एक नई शुरुआत

उदयपुर से लौटने के बाद हम दोनों की ज़िंदगी में कुछ बदल सा गया था। बाहर से सब कुछ वैसा ही था – मैं अपने इंटीरियर डिज़ाइन के प्रोजेक्ट्स में बिज़ी थी, विक्रम अपने एक्सपोर्ट बिज़नेस में। लेकिन अंदर से, हमारे बीच एक नई आज़ादी आ गई थी। वो शर्म, वो झिझक जो कभी-कभी अपनी गहरी इच्छाओं को शेयर करने में होती थी, अब लगभग खत्म हो चुकी थी।

रातें अब और भी गर्म होती थीं। कभी-कभी डिनर करते-करते ही विक्रम मेरी जाँघों पर हाथ फेरने लगता, तो कभी मैं सुबह-सुबह उसके लंड को मुँह में लेकर उसे जगा देती। हमने एक-दूसरे के साथ जो कम्फर्ट लेवल हासिल किया था, वो किसी खज़ाने से कम नहीं था।

मुझे स्वीकार करना होगा कि अक्सर, मैं ही होती हूँ जो नए एक्सपेरिमेंट का सुझाव देती हूँ। मेरा दिमाग हमेशा कुछ न कुछ नया सोचता रहता है – कभी शॉवर में सेक्स, कभी किचन काउंटर पर, कभी बालकनी में रिस्की क्विकी। और विक्रम, मेरा प्यारा विक्रम – वो हमेशा तैयार रहता है। कभी मना नहीं करता, कभी जज नहीं करता। शायद यही वजह है कि मैं उससे इतना प्यार करती हूँ।

शादी के दो सालों में हमने बहुत कुछ ट्राई किया था। मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल – ये तो रोज़ की बात थी। ओरल सेक्स हम दोनों को बेहद पसंद था – विक्रम जब मेरी चूत चाटता है ना, तो मुझे लगता है जैसे स्वर्ग धरती पर उतर आया हो। और मैं भी उसका लंड चूसने में कोई कसर नहीं छोड़ती – गहराई तक गले में लेकर, उसे पागल कर देती हूँ।

हमने एनल सेक्स भी एक-दो बार किया था – मेरी गांड में उसका लंड। पहली बार थोड़ा दर्द हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे मुझे वो भी पसंद आने लगा। और विक्रम? वो तो मेरी गांड का दीवाना था। हर बार कहता – “तेरी गांड इतनी टाइट है, जैसे पहली बार हो।”

लेकिन एक चीज़ थी जो हमने कभी नहीं की थी – रोल प्ले। मैंने कई बार सोचा था, लेकिन समझ नहीं आता था कि कैसे शुरू करूँ। और फिर एक दिन, ऑफिस से लौटते हुए कार में, मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। ऐसा आइडिया जिसने मुझे खुद उत्तेजित कर दिया।

मैंने सोचा – क्यों न एक ऐसा सीन क्रिएट किया जाए जहाँ मैं एक रहस्यमयी, कमांडिंग औरत बनूँ और विक्रम मेरा सबमिसिव पार्टनर? जहाँ मैं उसे कंट्रोल करूँ, उसके साथ वो सब करूँ जो मैं चाहती हूँ, और वो बस समर्पण करता रहे?

ये सोचते ही मेरी चूत गीली हो गई। मैंने उसी शाम प्लानिंग शुरू कर दी।

भाग 2: तैयारी – जब मीरा ने बनाया अपना खास सीन

मैंने तय किया कि ये सरप्राइज़ होगा। विक्रम को कुछ नहीं पता चलेगा। मैंने पूरा एक हफ्ता तैयारी में लगाया।

सबसे पहले, मैंने ऑनलाइन शॉपिंग की। मुझे कुछ ऐसा चाहिए था जो सेक्सी भी हो और कमांडिंग भी। बहुत ढूँढ़ने के बाद मुझे एक वन-पीस सिल्वर मैटेलिक बॉडीसूट मिला – स्किन टाइट, चमकदार, और इतना सेक्सी कि पहनने के बाद शरीर का हर कर्व उभरकर सामने आता। सूट के साथ मैंने सिल्वर हील्स भी ऑर्डर कीं – पतली स्ट्रैप वाली, जो मेरी टाँगों को और लंबा दिखाएँ।

फिर मैंने एक स्ट्रैप-ऑन डिल्डो खरीदा। ये हमारे लिए बिल्कुल नया था। मैंने सोच-समझकर एक ऐसा चुना जो ज़्यादा मोटा या डरावना न हो – करीब सात इंच लंबा, मीडियम मोटाई का, स्किन कलर का, एकदम असली लंड जैसा दिखने वाला। मैं चाहती थी कि विक्रम को ये पहला एक्सपीरियंस अच्छा लगे, डरावना नहीं।

साथ ही मैंने एक छोटा सा एनल टॉय भी खरीदा – स्टेनलेस स्टील का, चिकना और चमकदार, करीब पाँच इंच लंबा। और हाँ, एक बड़ी सीरिंज – लुब्रिकेंट डालने के लिए।

मैंने पार्लर जाकर मणि-पेडी करवाया। अपने नाखूनों को क्रोम सिल्वर कलर करवाया – बॉडीसूट से मैच करते हुए। अपने बालों को भी नए स्टाइल में कटवाया।

घर आकर मैंने बेडरूम को तैयार किया। मैंने अपने बेडरूम के लैंप के बल्ब बदलकर ब्लैक लाइट वाले लगा दिए – वो जो नीली-बैंगनी रोशनी देते हैं, जिसमें सब कुछ रहस्यमयी और सेक्सी लगता है। मैंने बिस्तर पर सफेद साटन की चादर बिछाई, कुछ सुगंधित मोमबत्तियाँ जलाईं, और कमरे का तापमान एकदम परफेक्ट रखा।

विक्रम को मैंने बस इतना बताया – “शनिवार रात को घर जल्दी आना। मेरे पास तुम्हारे लिए एक सरप्राइज़ है।”

उसकी आँखों में वो चमक आ गई जो मुझे बहुत पसंद है। “कैसा सरप्राइज़?”

“बस इंतज़ार करो। और हाँ, डिनर करके आना। तुम्हें सारी एनर्जी की ज़रूरत पड़ेगी।”

भाग 3: शनिवार की रात – जब मीरा ने किया खुलासा

शनिवार का दिन मैंने पूरी तैयारी में बिताया। शाम को मैंने लंबा शॉवर लिया, अपने पूरे शरीर की वैक्सिंग की, और अपनी पसंदीदा परफ्यूम लगाई। फिर मैंने वो सिल्वर बॉडीसूट पहना – ये इतना टाइट था कि पहनने में ही दस मिनट लग गए, लेकिन जब मैंने शीशे में खुद को देखा, तो मेरी साँसें थम गईं। मैं बिल्कुल किसी फैंटेसी की रानी लग रही थी – चमकदार सिल्वर बॉडीसूट में लिपटी, लंबी टाँगें, और वो स्ट्रैप-ऑन डिल्डो जो मेरी कमर के नीचे लटक रहा था – एकदम असली लग रहा था।

मैंने ब्लैक लाइट ऑन की। पूरा कमरा नीली-बैंगनी रोशनी में नहा गया। सफेद चादरें चमकने लगीं। मोमबत्तियों की लौ थिरक रही थी।

रात के 9 बजे, मैंने विक्रम की कार की आवाज़ सुनी। मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। मैं बेडरूम में गई और दरवाज़े के पीछे खड़ी हो गई।

“मीरा? मैं आ गया!” विक्रम ने अंदर आते ही आवाज़ लगाई।

“बेडरूम में आओ,” मैंने धीमी, भारी आवाज़ में कहा। “लेकिन तैयार रहना। आज रात कुछ खास होने वाला है।”

दरवाज़ा खुला। विक्रम ने जैसे ही कमरे में कदम रखा, उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। ब्लैक लाइट की नीली रोशनी, मोमबत्तियाँ, और मैं – सिल्वर बॉडीसूट में, सिल्वर हील्स में, और मेरी कमर से लटकता हुआ वो सात इंच का स्ट्रैप-ऑन डिल्डो।

“होली शिट… मीरा… ये…” वो कुछ और बोलने ही वाला था कि मैंने अपनी उंगली उसके होंठों पर रख दी।

“श्श्श… आज रात, तुम मेरे हो। पूरी तरह से। मैं बोलूँगी, तुम सुनोगे। मैं करूँगी, तुम महसूस करोगे। समझे?”

विक्रम ने धीरे से सिर हिलाया। उसकी आँखों में उत्तेजना, थोड़ी घबराहट, और बहुत सारा प्यार – तीनों एक साथ थे। मैं जानती थी कि वो इसके लिए तैयार है।

“अपने कपड़े उतारो,” मैंने कमांड किया। “पूरे। अभी।”

विक्रम ने बिना एक पल गँवाए अपनी शर्ट के बटन खोले, अपनी जींस उतारी, अपना बॉक्सर उतारा। कुछ ही सेकंड में वो मेरे सामने पूरी तरह नंगा खड़ा था। उसका शरीर – चौड़ी छाती, मजबूत बाहें, सपाट पेट, और वो लंड जो अभी से आधा खड़ा हो चुका था। ब्लैक लाइट में उसकी त्वचा और भी खूबसूरत लग रही थी।

“बिस्तर पर जाओ। आराम से लेट जाओ। और आँखें बंद कर लो।”

उसने वैसा ही किया। मैं धीरे-धीरे बिस्तर की तरफ बढ़ी, मेरी हील्स की आवाज़ फर्श पर गूँज रही थी। मैं उसके पैरों के पास खड़ी हो गई और कुछ पल बस उसे देखती रही – मेरा पति, नंगा, मेरे लिए पूरी तरह समर्पित।

भाग 4: मीरा का खेल शुरू – लंड चूसा और गांड चाटी

मैं बिस्तर पर चढ़ी और विक्रम की फैली हुई टाँगों के बीच बैठ गई। मेरा स्ट्रैप-ऑन डिल्डो उसकी जाँघों पर टिका हुआ था। मैंने आगे झुककर उसके लंड को अपने हाथ में लिया – वो अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था, गर्म और सख्त।

“आज मैं तुम्हारे साथ कुछ नया करूँगी,” मैंने फुसफुसाकर कहा। “तुम बस आराम करो और महसूस करो।”

मैंने उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे चूसना शुरू किया – पहले सिर्फ टोपा, फिर आधा लंड, फिर पूरा। मेरी जीभ उसके लंड की हर नस पर फिर रही थी। विक्रम कराह उठा।

“मीरा… बेबी…”

मैंने अपना मुँह हटाया। “चुप। मैंने बोला था – सिर्फ महसूस करो।”

फिर मैंने उसके लंड को फिर से अपने मुँह में लिया और इस बार और गहराई तक ले गई। मेरा गला खुला और उसका पूरा लंड अंदर चला गया। मैंने उसका लंड चूसते हुए उसके बॉल्स को भी अपनी उंगलियों से मसला। विक्रम की साँसें तेज़ हो गईं।

कुछ देर बाद मैंने अपना मुँह हटाया और नीचे की ओर सरक गई। अब मेरा चेहरा उसके बॉल्स के पास था। मैंने एक-एक करके दोनों बॉल्स को अपने मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसा। विक्रम का शरीर काँप रहा था।

और फिर मैं उसकी गांड तक पहुँच गई। मैंने उसके घुटनों को उसकी छाती की तरफ धकेला और उसकी टाँगें ऊपर उठा दीं। विक्रम का गांड का छेद – छोटा, टाइट, अभी तक अनछुआ – मेरे सामने था।

“आज मैं यहाँ भी जाऊँगी,” मैंने फुसफुसाकर कहा। “डरना मत। मैं बहुत धीरे-धीरे करूँगी।”

मैंने झुककर उसके गांड के छेद पर अपनी जीभ रख दी। विक्रम का शरीर झटके से काँप उठा।

“ओह फक… मीरा…”

मैंने उसके गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया। गोल-गोल, धीरे-धीरे, अपनी जीभ की नोक से। फिर मैंने अपनी जीभ को छेद के अंदर धकेला। विक्रम ज़ोर से कराह उठा।

“ये… ये बहुत अच्छा लग रहा है…”

मैंने उसकी गांड चाटना जारी रखा – कभी जीभ अंदर डालकर, कभी हल्का सा चूसकर। मेरी अपनी चूत अब पूरी तरह भीग चुकी थी। मैंने अपनी लार उसके छेद पर लगाई और अपनी उंगली से हल्का सा मसाज किया।

“आज मैं तुम्हें चोदूँगी,” मैंने उसके कान में फुसफुसाकर कहा। “अपनी बीवी का लंड अपनी गांड में लोगे?”

विक्रम ने आँखें खोलीं और मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में प्यार, भरोसा और एक जानवर जैसी हवस थी। “हाँ… मैं तुम्हारा हूँ, मीरा। पूरी तरह।”

भाग 5: पैरों का खेल और लुब्रिकेंट की तैयारी

अब मैं थोड़ा पीछे हटी और पोज़िशन बदली। मैं विक्रम की फैली हुई टाँगों के बीच बैठ गई और अपना दाहिना पैर उसके लंड की तरफ बढ़ाया। मेरी सिल्वर हील्स अब भी पहनी हुई थीं।

मैंने अपने पैर के अंगूठे से उसके लंड के सिरे को छुआ। विक्रम ने गहरी साँस ली। मैंने अपने पैर की उंगलियों से उसके लंड को सहलाना शुरू कर दिया – ऊपर से नीचे, धीरे-धीरे। फिर मैंने अपने दूसरे पैर को भी आगे बढ़ाया और दोनों पैरों के तलवों के बीच उसके लंड को दबाकर रगड़ने लगी।

“तुम्हें मेरे पैर बहुत पसंद हैं ना?” मैंने मुस्कुराकर पूछा।

“हाँ… बहुत…” विक्रम की आवाज़ भारी हो चुकी थी।

मैंने अपने पैरों से उसका हस्तमैथुन करना शुरू कर दिया – ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे। मेरे तलवे उसके गर्म लंड पर रगड़ खा रहे थे। ये देखना कितना हॉट लग रहा था – मैं, सिल्वर बॉडीसूट में, अपने पैरों से अपने पति का लंड सहला रही थी।

फिर मैंने अपने पैर उसके चेहरे की तरफ बढ़ाए। “चूमो इन्हें,” मैंने कहा।

विक्रम ने मेरी पैर की उंगलियों को अपने मुँह में ले लिया और उन्हें चूसना शुरू कर दिया। एक-एक करके, हर उंगली। उसकी जीभ मेरे पैर की उंगलियों के बीच फिर रही थी। मैं कराह उठी। ये एहसास अविश्वसनीय था।

अब समय आ गया था अगले कदम का। मैंने अपनी सीरिंज उठाई जिसमें मैंने सिलिकॉन-बेस्ड लुब्रिकेंट भरा था। मैंने विक्रम को दिखाया।

“ये थोड़ा ठंडा लगेगा,” मैंने कहा। “लेकिन ज़रूरी है।”

मैंने उसके गांड के छेद पर सीरिंज की नोज़ल रखी और धीरे-धीरे प्लंजर दबाया। चिकना, ठंडा जेल उसके छेद पर फैल गया। विक्रम ने एक गहरी साँस ली। मैंने अपनी उंगली से लुब्रिकेंट को उसके छेद के आस-पास और अंदर फैलाया। फिर मैंने अपनी एक उंगली धीरे-धीरे उसकी गांड के अंदर डाली।

“आह…” विक्रम कराह उठा।

“आराम करो,” मैंने फुसफुसाकर कहा। “बस अपनी मांसपेशियाँ ढीली छोड़ो।”

मैंने अपनी उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की – बहुत धीरे-धीरे, बहुत प्यार से। विक्रम की साँसें अब तेज़ थीं, लेकिन वो दर्द से नहीं – उत्तेजना से। मैंने दूसरी उंगली भी डाल दी। उसका गांड का छेद अब ढीला होने लगा था।

फिर मैंने अपना स्टील का एनल टॉय उठाया। “अब ये,” मैंने कहा। “थोड़ा ठंडा लगेगा, लेकिन अच्छा लगेगा।”

मैंने टॉय का सिरा उसके छेद पर रखा और धीरे-धीरे दबाव डालना शुरू किया। थोड़े से प्रतिरोध के बाद, सिरा अंदर चला गया। विक्रम ज़ोर से कराह उठा। मैंने धीरे-धीरे पूरा टॉय उसकी गांड में डाल दिया और फिर उसे अंदर-बाहर करना शुरू किया। चिकनी स्टील उसके अंदर आसानी से स्लाइड कर रही थी।

भाग 6: पेगिंग – जब मीरा ने विक्रम को चोदा

अब विक्रम पूरी तरह तैयार था। मैंने एनल टॉय निकालकर एक तरफ रख दिया और अपनी पोज़िशन ली। मैं उसकी फैली हुई टाँगों के बीच थी, और मेरा स्ट्रैप-ऑन डिल्डो – सात इंच लंबा, लुब्रिकेंट से चमकता हुआ – उसकी गांड के छेद पर टिका हुआ था।

“तैयार हो?” मैंने पूछा। मेरी आवाज़ में प्यार और चिंता दोनों थे।

विक्रम ने मेरी आँखों में देखा। “हाँ। मैं तुम पर पूरा भरोसा करता हूँ।”

मैंने धीरे-धीरे अपने कूल्हों को आगे बढ़ाया। डिल्डो का सिरा उसके छेद के अंदर गया। विक्रम ने गहरी साँस ली। मैंने थोड़ा और दबाव डाला – एक इंच, दो इंच, तीन इंच। मैं बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी, उसे हर पल का एहसास करने का मौका दे रही थी।

“ठीक है?” मैंने पूछा।

“हाँ… और अंदर डालो…”

मैंने और धक्का दिया। चार इंच, पाँच इंच, छह इंच। अब आधे से ज़्यादा डिल्डो उसकी गांड के अंदर था। मैंने अपने कूल्हों को पीछे खींचा और फिर आगे बढ़ाया – बहुत धीमी, बहुत प्यार भरी रिदम में।

“ओह मीरा… ये… ये बहुत अलग है…” विक्रम की आवाज़ काँप रही थी।

“अच्छा लग रहा है?”

“बहुत… बहुत अच्छा…”

मैंने अपनी रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। अब मैं पूरे सात इंच अंदर-बाहर कर रही थी। मेरे कूल्हे उसके कूल्हों से टकरा रहे थे। मैंने अपना एक हाथ उसके लंड पर रखा और उसे सहलाने लगी।

“अपनी बीवी का लंड अपनी गांड में ले रहे हो,” मैंने फुसफुसाकर कहा। “कैसा लग रहा है?”

“बहुत… बहुत हॉट… मीरा… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…”

“मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ,” मैंने कहा और अपने कूल्हों की रफ्तार और तेज़ कर दी।

मैं उसकी गांड चोद रही थी और साथ ही साथ उसका लंड भी सहला रही थी। विक्रम अनियंत्रित रूप से कराह रहा था। उसका शरीर पसीने से चमक रहा था, ब्लैक लाइट में वो किसी दूसरी ही दुनिया का लग रहा था।

“मैं… मैं झड़ने वाला हूँ…” विक्रम ने चेतावनी दी।

“झड़ जाओ,” मैंने कहा। “मेरे हाथ पर। अभी।”

और फिर वो हुआ। विक्रम का शरीर अकड़ गया, उसकी पीठ बिस्तर से ऊपर उठ गई, और उसके लंड से गर्म, गाढ़े वीर्य की धारें निकलकर मेरे हाथ और उसकी अपनी छाती पर फैल गईं। वो ज़ोर-ज़ोर से कराह रहा था – एक लंबा, गहरा ऑर्गेज़्म जो शायद उसने पहले कभी अनुभव नहीं किया था।

मैंने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार कम की और आखिरकार रुक गई। मैंने अपना डिल्डो उसकी गांड से बाहर निकाला – बहुत धीरे-धीरे, बहुत प्यार से।

भाग 7: प्यार का समापन – 69 और ऑर्गेज़्म

विक्रम कुछ पल तक बस वहीं लेटा रहा, साँसें भरता हुआ। मैंने जल्दी से अपना स्ट्रैप-ऑन खोला, अपना बॉडीसूट उतारा – अब मैं भी पूरी तरह नंगी थी। मैं उसके पास लेट गई और उसे एक गहरा चुंबन दिया।

“कैसा लगा?” मैंने फुसफुसाकर पूछा।

“मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा एक्सपीरियंस,” उसने हाँफते हुए कहा। “लेकिन मेरा सबसे अजीब सपना था… एक खूबसूरत रानी आई और उसने मेरे साथ बहुत कुछ किया…”

मैं हँस पड़ी। “वो सपना नहीं था, पति जी। वो मैं थी।”

“मुझे पता है।” वो मुस्कुराया और मुझे कसकर पकड़ लिया।

लेकिन मेरी चूत अब भी गीली थी, अब भी तड़प रही थी। और मैं अभी और चाहती थी।

मैं पलटी और 69 पोज़िशन में आ गई – मेरी चूत और गांड ठीक विक्रम के चेहरे के सामने थी, और उसका लंड – जो अब फिर से हल्का सख्त हो रहा था – मेरे मुँह के सामने।

“अब मेरी बारी,” मैंने कहा।

विक्रम ने कोई समय बर्बाद नहीं किया। उसने अपनी जीभ के चौड़े स्वाइप से मेरी चूत के होंठों को चाटना शुरू कर दिया। मेरी चूत पहले से ही पूरी तरह भीगी हुई थी, और उसकी जीभ का हर स्पर्श मेरे शरीर में बिजली दौड़ा रहा था।

मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। हम 69 के उन्माद में थे – एक-दूसरे को चाटते, चूसते, उंगलियाँ डालते। विक्रम ने मेरी गांड के छेद में अपनी जीभ डाली और मैं लगभग चीख पड़ी।

“विक्रम… बेबी… मत रुको…”

उसने मेरी क्लिट पर अपनी जीभ फिराई और मैं अपने ऑर्गेज़्म के करीब पहुँच गई। मैंने उसका लंड और ज़ोर से चूसा और अपनी उँगलियाँ उसकी गांड में डाल दीं।

“मीरा… मैं… मैं फिर से झड़ रहा हूँ…” विक्रम चीखा।

“मैं भी… मैं भी…”

और फिर हम दोनों एक साथ झड़े। मेरी चूत सिकुड़ रही थी, मेरा शरीर काँप रहा था, और विक्रम का गर्म वीर्य मेरे मुँह और गले में भर रहा था। मैंने लालच से सब पी लिया – हर बूँद। मेरा ऑर्गेज़्म लंबा और तीव्र था, शायद मेरी ज़िंदगी का सबसे तीव्र।

भाग 8: सुबह और प्यार का वादा

हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे थे – नंगे, पसीने से तर, पूरी तरह संतुष्ट। ब्लैक लाइट की नीली रोशनी अब भी कमरे को रोशन कर रही थी। मोमबत्तियाँ बुझ चुकी थीं।

“मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ,” विक्रम ने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा। “आज की रात… मैं कभी नहीं भूलूँगा।”

“मैं भी,” मैंने उसकी छाती पर सिर रखते हुए कहा। “तुमने मुझ पर भरोसा किया। अपना सबसे वल्नरेबल पार्ट मुझे सौंप दिया। ये मेरे लिए दुनिया का सबसे बड़ा गिफ्ट है।”

विक्रम ने मुझे चूमा। “तुम्हारे साथ मैं कुछ भी कर सकता हूँ, मीरा। क्योंकि मुझे पता है – तुम मुझे कभी चोट नहीं पहुँचाओगी।”

“कभी नहीं,” मैंने वादा किया।

हम देर रात तक बातें करते रहे – अपनी फैंटेसीज़ के बारे में, अपने डर के बारे में, अपने प्यार के बारे में। और जब आखिरकार नींद आई, तो हम एक-दूसरे की बाहों में थे – जहाँ हम हमेशा रहना चाहते थे।

सुबह जब मेरी आँख खुली, विक्रम पहले से जाग रहा था और मुझे देख रहा था। उसकी आँखों में वही प्यार था – लेकिन अब उसमें कुछ और भी था। एक गहरा सम्मान। एक नया भरोसा।

“गुड मॉर्निंग, मेरी रानी,” उसने कहा।

“गुड मॉर्निंग, मेरे राजा।” मैं मुस्कुराई।

“अगली बार,” उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “अगली बार मैं तुम्हारे लिए कुछ खास करूँगा।”

मेरी दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। “जैसे?”

“बस इंतज़ार करो।” उसने मेरी ही लाइन दोहराई और शरारत से मुस्कुराया।

– भाग 2 समाप्त –


आने वाले भाग 3 में:

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