सुहागरात की पहली रात में चुदाई: जुगनी-मयंक की प्यार भरी कहानी

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सुहागरात की पहली रात में चुदाई – मैं जुगनी, हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। मेरा रिश्ता मयंक कुमार से आया, जो हमारे दूर के रिश्तेदार भी थे। मयंक ने मेरे हसीन, उफनते फिगर पर अपना दिल खो दिया था। शादी से पहले मैं बहुत डरी हुई थी, लेकिन मेरी सहेली निशा ने मुझे समझाया कि पहली रात का डर सबको होता है, लेकिन बाद में सब मज़ेदार हो जाता है। और फिर आखिरकार वो रात आ ही गई – मेरी और मयंक की सुहागरात की पहली रात। उस रात उन्होंने पहले मेरी चूत चाटी, फिर मैंने उनका 8 इंच का लंड चूसा, फिर 69 पोजीशन में मस्ती की, और आखिर में उन्होंने मेरी कुंवारी चूत में लंड घुसाकर मेरी सील तोड़ दी। यह कहानी है उसी पहली रात की, उसके बाद के दिनों की, और हमारे प्यार भरे जंगली सफर की। पढ़िए जुगनी और मयंक की यह खूबसूरत और बेबाक सच्ची कहानी।

भाग 1: शादी से पहले – डर, उम्मीदें और सहेली की सलाह

मेरा नाम जुगनी है। यह नाम मुझे मेरी माँ ने दिया था, क्योंकि बचपन में मैं बहुत चंचल और शरारती थी, बिल्कुल एक जुगनू की तरह। और यह नाम मुझ पर बिल्कुल सटीक बैठता भी था। मैं हमेशा हंसती-खिलखिलाती रहती थी, मेरी आँखों में एक अलग ही चमक थी, और मेरा शरीर भी बिल्कुल वैसा ही था—चंचल, लचीला और भरा हुआ। मैं अपनी स्कूल की पढ़ाई हॉस्टल में रहकर कर रही थी। हॉस्टल की जिंदगी अपने आप में एक अलग ही दुनिया थी—दोस्तों के साथ रात भर बातें, परीक्षा के समय की भागदौड़, और लड़कों को लेकर चलने वाली वो अंतहीन गपशप। उन्हीं दिनों मेरी सबसे अच्छी सहेली निशा की शादी हो गई थी और वो हॉस्टल छोड़कर अपने पति के साथ रहने चली गई थी। मैं उसके बिना बहुत अकेला महसूस करती थी, लेकिन हम फोन पर रोज बातें करते थे।

इसी बीच मेरे लिए एक रिश्ता आया। लड़के का नाम था मयंक कुमार। मयंक हमारे दूर के रिश्तेदार भी थे, इसलिए घरवालों को इस रिश्ते पर कोई आपत्ति नहीं थी। मुझे बाद में पता चला कि मयंक ने मुझे किसी फैमिली फंक्शन में देखा था और मेरे इस हसीन, उफनते फिगर ने उन्हें अपना दीवाना बना लिया था। उन्होंने खुद ही अपने माता-पिता से कहकर मेरे लिए रिश्ता भिजवाया था। यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा। मेरे मन में एक गर्व की भावना जागी कि कोई तो है जो मुझे इतना चाहता है।

मैंने भी मयंक की तस्वीर देखी थी। तस्वीर में वो एक लंबा, गठीला और मजबूत शरीर वाला नौजवान लग रहा था। उनकी चौड़ी छाती, उनके मांसल हाथ, और उनकी गहरी आँखें—सब कुछ देखकर मेरा दिल भी थोड़ा डोल गया। मुझे मयंक से शादी करना अच्छा लग रहा था। मैंने अपने मन में कल्पना करनी शुरू कर दी कि मेरा होने वाला पति कैसा होगा, वो मेरे साथ कैसे पेश आएगा, और हमारी जिंदगी कैसी होगी।

जैसा कि हर लड़की अपनी शादी से पहले सोचती है, मैंने भी कल्पना की कि मयंक का लंड शायद पांच-छह इंच का ही होगा। मैंने कभी किसी लड़के का लंड नहीं देखा था, लेकिन निशा ने मुझे बताया था कि आमतौर पर लड़कों का लंड इतना ही होता है। मैंने भी बिना ज्यादा सोचे-समझे शादी के लिए हां कर दी। मेरे माता-पिता बहुत खुश थे और शादी की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गईं।

लेकिन फिर न जाने क्यों, जैसे-जैसे शादी का दिन करीब आता गया, मेरे मन में एक अनजाना डर घर करने लगा। मुझे रात को नींद नहीं आती थी। मैं बस सोचती रहती थी कि पता नहीं मेरा पति मेरे साथ क्या-क्या करेगा, क्या मैं उसे खुश रख पाऊंगी, क्या मुझे बहुत दर्द होगा। ये सब सवाल मेरे दिमाग में चक्कर काटते रहते थे और मैं परेशान हो जाती थी। आखिरकार, मैंने अपनी सहेली निशा को फोन किया और अपनी ये उलझन उससे साझा की।

निशा ने मेरी बात सुनकर जोर से हंसना शुरू कर दिया। फिर वो बोली, “देख जुगनी, शादी से पहले हर किसी को डर लगता है। मुझे भी लगा था। मैं तो अपनी सुहागरात वाली रात से इतना डर रही थी कि मैंने अपने पति से कह दिया था कि मुझे अभी नहीं करना। लेकिन बाद में जब हमने किया, तो सब कुछ इतना मजेदार हो गया कि मेरा सारा डर काफूर हो गया। तुम्हें भी धीरे-धीरे सब अच्छा लगने लगेगा।”

फिर निशा ने मुझे बताना शुरू किया कि वो अपने पति के साथ क्या-क्या करती है। वो बोली, “जुगनी, तू यकीन नहीं करेगी, लेकिन मेरे पति तो मेरी मुँह, गला, चूत और गांड—सब कुछ चोदते हैं। कभी-कभी तो वो मुझे रस्सियों से बांधकर भी चोदते हैं। शुरू-शुरू में थोड़ा अजीब लगता है, तुम्हें दर्द भी होगा, पर जब तुम अपने पति के साथ देने लगोगी और उन पर भरोसा करने लगोगी, तो तुम्हें भी बहुत मजा आने लगेगा।”

निशा की ये बातें सुनकर मैं हैरान तो बहुत हुई, लेकिन साथ ही मेरा डर भी कुछ हल्का हो गया। मैंने सोचा कि अगर निशा ये सब कर सकती है और उसे इसमें मजा भी आता है, तो शायद मेरे साथ भी सब अच्छा ही होगा। मैंने भगवान से प्रार्थना की कि मुझे भी एक समझदार और प्यार करने वाला पति मिले, जो मेरा ख्याल रखे और मुझे कभी दुखी न करे।

फिर वक्त के साथ शादी का दिन भी आ गया। आखिरकार मेरी और मयंक की शादी हो गई। शादी की सारी रस्में बड़ी धूमधाम से पूरी हुईं। मैं लाल रंग के भारी लहंगे में बहुत खूबसूरत लग रही थी। सब लोग मेरी तारीफ कर रहे थे। लेकिन मेरा मन अंदर ही अंदर बहुत घबराया हुआ था। शादी की रस्में खत्म होने के बाद मुझे मेरे कमरे में भेज दिया गया।

भाग 2: सुहागरात की पहली रात – डर, प्यार और पहली चुदाई

मैं अपने कमरे में अकेली बैठी थी। कमरा बहुत खूबसूरती से सजाया गया था। बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं, हल्की रोशनी में मोमबत्तियाँ जल रही थीं, और पूरे कमरे में एक मीठी सी खुशबू फैली हुई थी। लेकिन यह सब देखकर भी मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं घबराई हुई-सी बिस्तर पर बैठी थी, सोच रही थी कि पता नहीं मेरे पति मयंक मेरे साथ क्या-क्या करने वाले हैं। मैंने अपना घूंघट अच्छी तरह से कर लिया और सिर झुकाकर बैठी रही।

तभी दरवाजा खुला और मयंक अंदर आए। मेरी सांसें थम गईं। वो धीरे-धीरे मेरे पास आए। उनके कदमों की आहट मेरे दिल की धड़कनों को और तेज कर रही थी। उन्होंने बड़े प्यार से मेरा घूंघट उठाया और मुझे अपनी मजबूत बाहों में भर लिया। उनका स्पर्श बहुत गर्म और सुरक्षित लगा। मेरे साथ प्यार भरी बातें करते हुए उन्होंने मेरा घूंघट पूरी तरह से हटा दिया और धीरे-धीरे मेरे कपड़े उतारने लगे।

मैं घबरा गई। मेरा पूरा शरीर कांपने लगा। मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा, “नहीं, ये ठीक नहीं है। मैंने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं किया। मुझे डर लग रहा है।” मेरी आवाज कांप रही थी और मेरी आँखों में आंसू आ गए थे।

मयंक ने मेरे गालों को चूमते हुए बहुत प्यार से कहा, “जुगनी, मेरी जान… तुम बेकार में डर रही हो। मैं तुम्हारा पति हूं, तुम्हारा अपना। मैं सब कुछ इतने प्यार और आराम से करूंगा कि तुम्हें दर्द नहीं, बल्कि सिर्फ मजा आएगा। बस तुम मुझ पर भरोसा रखो। हां, अब तुम मुझे राजा कहकर बुलाया करो, और मैं तुम्हें अपनी रानी कहूंगा।”

उनकी बातों में इतना अपनापन और प्यार था कि मेरा डर कुछ कम हुआ। मैंने शर्माते हुए कहा, “ठीक है मेरे राजा, मैं तैयार हूं।”

फिर मयंक ने धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिए। पहले उन्होंने मेरा दुपट्टा हटाया, फिर मेरा लहंगा खोला, और फिर मेरा ब्लाउज। अब मैं उनके सामने सिर्फ अपनी चड्डी में थी। मेरे गोरे और भरे हुए शरीर पर सिर्फ एक छोटी सी चड्डी थी। उन्होंने मेरे पूरे बदन को चूमना शुरू कर दिया। उनके होंठ मेरे कंधों पर, मेरी गर्दन पर, मेरी बाहों पर—हर जगह घूम रहे थे। उनके हर चुंबन के साथ मेरे जिस्म में एक जलती हुई आग सी फैलने लगी। यह एक अजीब सा एहसास था, जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। मैंने अनायास ही उन्हें अपनी छाती से कसकर चिपका लिया और उनकी पीठ पर अपने हाथ फेरने लगी।

फिर मयंक ने मेरी चड्डी भी उतार दी। मैं अब उनके सामने पूरी तरह से नंगी थी। मुझे बहुत शर्मिंदगी हो रही थी। मैंने अपनी लाडो रानी यानी अपनी चूत को अपने दोनों हाथों से ढक लिया। मैं उनकी तरफ देख भी नहीं पा रही थी। मयंक ने मेरे हाथों को चूमते हुए बहुत धीरे से हटा दिया। उन्होंने मेरे होंठों पर एक गहरा और प्यार भरा चुंबन देते हुए कहा, “मेरी रानी, तुम्हें कुछ नहीं होगा। मैं तुम्हारे साथ हूं।”

मेरी क्लीन शेव चूत बहुत हसीन और मासूम लग रही थी। वो गुलाबी, मुलायम और पूरी तरह से बंद थी। मयंक ने मेरे दोनों पैरों को धीरे से फैलाया। मैंने विरोध नहीं किया। उन्होंने मेरी चूत पर थोड़ा-सा शहद लगाया। शहद की ठंडक और उनकी उंगलियों का स्पर्श मेरी चूत पर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर रहा था। फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत की फांकों में डाल दी। उनकी गर्म और गीली जीभ मेरी चूत के हर हिस्से को चाट रही थी। उनकी नुकीली मूंछें मेरी जांघों को गुदगुदा रही थीं।

मेरे मुँह से अनायास ही ‘आह… उह… सीस…’ जैसी मदहोश कर देने वाली आवाजें निकलने लगीं। पहली बार किसी ने मेरी चूत को छुआ था, और वो भी इस तरह से। मुझे बहुत अजीब-सा मजा आ रहा था। ऐसा लग रहा था मानो मेरी चूत में हजारों चींटियां रेंग रही हों और मेरा पूरा शरीर झनझना रहा हो। मैंने अनायास ही मयंक का सिर पकड़कर अपनी चूत में और गहराई तक दबा दिया। मैं चाहती थी कि वो और अंदर तक जाएं, और मेरी इस बेचैनी को शांत करें।

थोड़ी देर बाद मैं झड़ गई। मेरी चूत से पानी की एक तेज धार निकली और मैं पूरी तरह से भीग गई। यह मेरी जिंदगी का पहला ऑर्गेज्म था। मैं हांफ रही थी और मेरा पूरा शरीर शिथिल पड़ गया था। उन्होंने मेरी चूत का सारा रस अपनी जीभ से चाटकर पी लिया और थोड़ा-सा अपनी उंगली पर लगाकर मुझे भी चखाया। दोस्तो, पहली बार मुझे अपनी चूत के रस का स्वाद पता चला। वो एकदम मीठा और हल्का-सा खट्टा था।

उन्होंने मेरी चूत में अपनी एक मोटी उंगली डाली और उसे अंदर-बाहर करके और भी रस बाहर निकालने लगे, जैसे मेरे जिस्म की हर नस को निचोड़ देना चाहते हों। मैं बार-बार कराहती हुई कहती रही, “आह जानू… मेरे राजा, मुझे दर्द हो रहा है।” लेकिन उन्होंने मेरी एक भी नहीं सुनी। उनके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी, जैसे वो मेरे होंठों से निकली हर सिसकी को और भड़काना चाहते हों। मैं समझ गई कि ये मुझे पूरी तरह से तृप्त करके ही दम लेंगे। तो मैंने भी अपने जिस्म को पूरी तरह से उनके हवाले कर दिया और हार मान ली।

मैंने देखा, जहां मैं अपनी नाजुक चूत में बस एक उंगली डालकर संतुष्ट हो जाती थी, वहीं मयंक ने अपनी दो मोटी, सख्त और लंबी उंगलियां एक साथ मेरी चूत में घुसेड़ दीं। उनकी उंगलियां इतनी लंबी और ताकतवर थीं कि मेरी तो सांसें ही थम गईं। मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी चूत अभी फट जाएगी और मेरा सारा जिस्म बिखर जाएगा। उनकी हर हरकत मेरे बदन में बिजली-सी दौड़ा रही थी… और फिर आखिरकार, एक जोरदार झटके के साथ मैं फिर से झड़ गई। इस बार मेरी चूत का रस बेकाबू होकर पूरे बिस्तर पर फैल गया, जैसे कोई नदी उफान पर आ गई हो।

हम दोनों ने हंसते हुए जल्दी से बिस्तर बदला क्योंकि गीली चादर अब और बर्दाश्त नहीं हो रही थी। बिस्तर साफ करने के बाद मयंक ने मुझे शरारत भरी नज़रों से देखा। अब पानी निकालने की बारी उनकी थी और मेरे दिल में एक नई उत्तेजना जाग उठी थी। मैं इतने में ही पूर्ण रूप से संतुष्ट हो गई थी और अब मैं बहुत खुश थी कि अब मुझे इनके लंड के दर्शन होंगे। मुझे अब भी लग रहा था कि इनका लंड सिर्फ पांच या छह इंच का ही होगा।

मैंने जल्दी से मयंक की पैंट और चड्डी को उतारा, लेकिन ये क्या… मयंक का लंड तो मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा, मोटा और तगड़ा था। वो पूरा काला और डरावना लग रहा था। उसकी मोटी-मोटी नसें उभरी हुई थीं और ऊपर का सुपारा लाल और चमकदार था। इनका लंड देखकर मेरी तो गांड ही फट गई। मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। मयंक का लंड मेरी उम्मीद से लगभग दुगना था, जबकि मेरी चूत की फांक शायद चार इंच की ही रही होगी। मैं बुरी तरह डर गई।

मैंने डरते हुए कहा, “मयंक… मैं आपका इतना बड़ा लंड अपने मुँह में नहीं ले पाऊंगी। मेरा मुँह फट जाएगा। ये तो बहुत बड़ा है!”

मयंक ने मेरे होंठों को चूमते हुए मुझे तसल्ली दी, “जुगनी मेरी जान, तुम बेकार में डर रही हो। तुम फिक्र मत करो, तुम्हें कुछ भी नहीं होगा। हां, तुम्हारा पहली बार है इसलिए थोड़ा सा दर्द होगा। लेकिन फिर बाद में मजा भी बहुत आएगा। बस मुझ पर भरोसा रखो।”

मैं किसी तरह तैयार हो गई। मेरे पास तैयार न होने का कोई विकल्प भी नहीं था। मैं उनकी पत्नी थी और मुझे ये सब करना ही था। दोस्तो, आप लोग यकीन मानिए, मुझे पता तक नहीं चला कि कब इन्होंने मेरा हाथ अपने उस मोटे और गर्म लंड पर रख दिया। मयंक ने मेरे हाथ को मजबूती से पकड़ रखा था ताकि मैं कहीं अपना हाथ हटा न दूं। अब मुझे भी धीरे-धीरे करके मयंक के लंड को मसलने में मजा आने लगा। उनका लंड मेरी हथेली में गर्म और सख्त महसूस हो रहा था।

उन्होंने मेरी ठुड्डी को ऊपर उठाया और अपने मुँह को गोल करके मुझे लौड़े को मुँह में भरने का इशारा किया। फिर मैंने उनकी आँखों में देखते हुए ही धीरे से अपने होंठों को उनके लंड से छुआ दिया। हालांकि मैं अभी भी डर रही थी। मुझे लग रहा था कि कहीं इनका लंड मेरे गले तक न घुस जाए और मेरा दम न घुट जाए।

जब लौड़े के चिकने सुपारे के रस ने मेरी जीभ के स्वाद को मजा दिया तो मैंने उनकी आँखों से अपनी आँखें हटाईं और अपना पूरा ध्यान उनके लंड को चूसने में लगा दिया। तब भी मैं डर रही थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, डर और उत्तेजना दोनों एक साथ मेरे जिस्म में दौड़ रहे थे। इन्होंने मेरे डर को भांप लिया और मुझसे कहा, “तुम फिक्र मत करो, तुम्हें जरा भी दर्द नहीं होगा। बस आराम से करो।”

उनकी बातों से हिम्मत लेकर मैंने धीरे से उनके लंड को अपने मुँह में ले लिया। ये मेरा पहला मौका था जब मैंने किसी लंड को अपने मुँह में लिया। शुरू-शुरू में तो ये सब कुछ अजीब-सा लगा, जैसे मेरे होंठ और जीभ को समझ ही न आए कि क्या करना है। लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे अपने पहले ओरल सेक्स एक्सपीरियंस में मजा आने लगा। मैं उनके लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी, धीरे-धीरे उसकी गर्मी और स्वाद को महसूस करते हुए।

तभी अचानक मयंक ने मेरे सिर के पीछे जोर से धक्का दिया। उनका पूरा लंड मेरे मुँह में गले तक उतर गया। मेरी सांसें रुक गईं, मुझे घबराहट होने लगी। मैं अपना सिर पीछे हटाकर उनके लंड को बाहर निकालना चाहती थी, लेकिन उन्होंने मेरे सिर को पीछे से कसकर पकड़ रखा था। मैं बस ‘गु… गु…’ की आवाज निकाल पा रही थी और मेरी आँखों से पानी निकल रहा था।

फिर धीरे-धीरे मुझे उनके लंड को चाटने और चूसने में मजा आने लगा। मैं खुद ही उसे अपने मुँह में अंदर-बाहर करने लगी, जैसे मेरे होंठ उसकी हर नस को सहला रहे हों। मैं उनके लंड के सुपारे को अपनी जीभ से चाट रही थी और उसे अपने होंठों में लेकर जोर-जोर से चूस रही थी।

थोड़ी देर बाद मयंक ने अपनी पोजीशन बदली। उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद मेरे मुँह पर बैठ गए। उन्होंने फिर से अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया और वे खुद बड़े मजे से मेरी चूत चाटने लगे। उनकी जीभ मेरी चूत की फांकों में ऐसे घूम रही थी जैसे कोई जादू कर रही हो। हम दोनों पति-पत्नी इस नशे में डूब चुके थे… मजा अपने चरम पर था। यह 69 पोजीशन थी और मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा था।

लगभग आधे घंटे की इस चूसम-चुसाई के बाद मैं फिर से झड़ गई। मेरी चूत का पानी मेरी गांड तक बहने लगा और बिस्तर को फिर से तर कर दिया। लेकिन मयंक अभी तक नहीं झड़े थे। मेरे होंठ सूख गए थे, मेरे जबड़े में दर्द होने लगा था। आखिरकार मयंक ने धीरे से अपना लंड मेरे मुँह से निकाला और कहा, “अब तुम अपने हाथों से इसे हिलाओ और मेरा पानी निकालो।”

मैंने उनके उस विशाल लंड को अपने नाजुक हाथों में थाम लिया और जोर-जोर से हिलाने लगी। उनकी सांसें तेज होने लगीं और वो कराहने लगे। आखिरकार जब वे झड़ने वाले थे, उन्होंने अपना लंड एक बार फिर मेरे मुँह में डाल दिया। उनका सारा गर्म और गाढ़ा माल मेरे मुँह में भर गया। मेरा मुँह उनके वीर्य से पूरी तरह भर गया था।

लंड बाहर निकालते ही मैंने कहा, “छी, ये आपने क्या किया? ये तो बहुत गंदा है!”

मयंक ने मुझे चूमते हुए पूछा, “मेरा रस कैसा लगा?”

मैंने शर्माते हुए और अपने होंठ चाटते हुए कहा, “बहुत मीठा-मीठा था, थोड़ा खट्टा भी। अजीब सा स्वाद था।”

उन्होंने अपना कुछ माल मेरे चूचियों पर भी गिरा दिया। मैंने उनके लंड को अपनी जीभ से चाटकर पूरी तरह से साफ कर दिया और उन्होंने भी मेरे चूचियों से अपने रस को अपनी जीभ से चाटकर साफ किया। मैंने देखा कि झड़ने के बाद उनका नाग यानी उनका लंड मुरझा गया था और छोटा हो गया था।

मैंने हिम्मत करके उनके टट्टों को सहलाया, उनकी गांड को भी हल्के से छुआ। उनके टट्टे बहुत बड़े और भारी थे। मेरे ऐसा करने से उनका लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया। अब वो घड़ी आ ही गई थी, जब मुझे असली चुदाई का सामना करना था। मेरे दिल में डर की लहरें उठ रही थीं और उत्तेजना भी अपने चरम पर थी।

मयंक ने फिर से अपनी पोजीशन बदली और मेरे गालों पर प्यार से चुंबन करते हुए कहा, “मेरी जान जुगनी, अब मैं तुम्हारी चुदाई करूंगा।”

मैंने घबराते हुए कहा, “नहीं, आपका ये बहुत बड़ा है। अभी रहने देते हैं। कल कर लेंगे।”

मयंक ने मुझे होंठों पर चूमते हुए तसल्ली दी, “तुम डरो मत, मैं इसे धीरे-धीरे ही अंदर डालूंगा। मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा।”

मैंने थोड़ा हिचकते हुए कहा, “ठीक है।”

फिर मयंक ने अपने लंड को मेरी चूत पर सेट किया और उसे मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगे। उनके लंड का गर्म सुपारा मेरी चूत के होंठों को चीर रहा था। लेकिन दोस्तो, जैसा मैंने आपको बताया था, मेरी चूत की साइज अभी चार इंच की थी और इनका लंड उससे कहीं ज्यादा बड़ा था। उनका लंड मेरी चूत के अंदर जाने का सवाल ही पैदा नहीं हो रहा था, ऐसा मुझे लग रहा था।

मयंक ने इधर-उधर नजर दौड़ाई और उन्हें पास में रखी एक तेल की शीशी दिख गई। उन्होंने ढेर सारा तेल मेरी चूत में उड़ेल दिया और उसे अच्छे से चिकना कर दिया। थोड़ा-सा तेल उन्होंने अपने लंड पर भी लगा लिया। फिर मेरे राजा ने मेरी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिससे मेरी चूत उनके सामने पूरी तरह से खुल गई।

मयंक ने धीरे से अपने लंड को मेरी चूत में डालना शुरू किया। इस बार दो-चार धक्कों के बाद उनका लंड थोड़ा-सा अंदर घुस गया। मेरे मुँह से एक जोरदार ‘आह’ निकल पड़ी। मैं जोर से चिल्लाने वाली थी, लेकिन मयंक ने फुर्ती से मेरे मुँह पर अपना हाथ रख दिया, जिससे मेरी आवाज दब गई। उन्होंने मेरे चूचियों को भी अपने दूसरे हाथ से कसकर पकड़ रखा था।

धीरे-धीरे मेरा दर्द कुछ कम हुआ और मजा आने लगा। मैं अब मीठे दर्द वाले मजे से उनके लंड को अपने अंदर महसूस कर रही थी। मेरे मुँह से कामुक सिसकारियां निकलने लगीं। मैंने कहा, “आह मेरे राजा, मयंक डार्लिंग, प्लीज फक मी… उह आह… या फक-फक मी प्लीज!”

मेरी इन बातों से उनके अंदर का जोश और भड़क गया। उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा और उनका पूरा लंड मेरी चूत को चीरता हुआ जड़ तक अंदर चला गया। मेरी चूत जैसे फट सी गई थी। मुझे ऐसा लगा जैसे उनका लंड मेरे फेफड़ों तक पहुँच गया हो। दर्द इतना तेज था कि मैं चीख भी नहीं पा रही थी। मैंने हिलने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे इतने ताकतवर थे कि मैं हिल भी नहीं पाई। मेरी आँखों में आंसू छलक आए, लेकिन मयंक ने इसकी परवाह नहीं की। वे बस मेरे ऊपर पड़े रहे और मेरे गालों व होंठों को चूमने लगे, जैसे मेरे दर्द को अपने प्यार से दबाना चाहते हों।

मेरी चूत में दर्द की लहरें उठ रही थीं। मेरी आँखें आंसुओं से भीग गई थीं, लेकिन मयंक रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वे ‘हम्म हम्म हम्म हम्म…’ की आवाजें निकालते हुए मेरे ऊपर चढ़े रहे। मेरे पति मयंक को मेरी तंग चूत को चोदने में खासी मेहनत करनी पड़ रही थी। उन्होंने मुझे चूमते हुए कहा, “जुगनी मेरी जान, थोड़ी देर और बर्दाश्त कर लो। अभी धीरे-धीरे मजा आना शुरू हो जाएगा।”

मैं गीली आँखों से बेबस सी दबी हुई थी और उनकी आँखों में देख रही थी। मैं बस ‘स्सस्स श्सश स्सस्स…’ की सिसकारियां लेती रही। वे अपने लंड को अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करते हुए धक्के मारते रहे। मैंने अपने होंठ दांतों से दबा रखे थे, दर्द को किसी तरह सहन कर रही थी।

फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला और मेरे साइड में लेट गए और हांफने लगे। मैं भी हांफ रही थी, मेरी सांसें जैसे गले में अटक गई हों। धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा। मैंने उठकर देखा तो मयंक का लंड मेरे खून से सना हुआ था। मेरी चूत पर भी खून लगा था और चादर पर कुछ लाल बूंदें बिखरी पड़ी थीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मुबारक हो… अब तुम्हारी चूत कुंवारी नहीं रही। अब तुम पूरी तरह से मेरी पत्नी बन गई हो।”

मैं शर्मा गई और चुपचाप उनकी बात सुनती रही। मैंने अपनी चूत का जायजा लिया… अंदर सब गीला था और वो काफी चौड़ी हो गई थी। अब पहला इंटरकोर्स पति के साथ करके भी चौड़ी न होती तो कब होती! इनका लंबा और मोटा लंड अपना कमाल जो दिखा चुका था।

फिर हम दोनों करीब दो घंटे तक कमरे में नंगे ही बैठे रहे, एक-दूसरे से बातें करते रहे। उसके बाद मयंक मुझे सहारा देते हुए बाथरूम ले गए। मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। हम दोनों साथ में नहाने लगे। जब उन्होंने मेरे गोरे, नंगे जिस्म पर पानी की बूंदें फिसलते देखीं, तो उनका लंड फिर से तन गया। हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। मेरे अंदर फिर से चुदने की चाहत जाग उठी। मैंने शरारत से पूछा, “दोबारा चोदोगे?”

उन्होंने तुरंत खड़े-खड़े ही मेरी चूत में अपना लंड ठोक दिया। मैं ‘आह… सीईईई…’ की आवाज के साथ उनकी बाहों में ढेर हो गई। मयंक ने मुझे बाथरूम की ठंडी दीवार से सटाया और मेरी चुदाई शुरू कर दी। मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं—’आहह आहह आहह…’ की आवाजें बाथरूम में गूंज रही थीं। गीले जिस्म से गीले जिस्म के टकराने की ‘पट पट पट पट’ की थपकियां और लंड के चूत में धक्कों की आवाज पूरे माहौल को मदहोश कर रही थी।

दूसरी बार चुदने में मुझे गजब का मजा आ रहा था। फिर उन्होंने कहा, “घूम जाओ।” मैं दीवार की तरफ मुड़ गई। उन्होंने पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डालकर मुझे चोदना शुरू कर दिया। करीब पंद्रह मिनट तक चोदने के बाद मैं कांपती हुई एक तेज ‘आह’ के साथ झड़ गई। लेकिन वे रुके ही नहीं, चोदते रहे। थोड़ी देर बाद वे भी मेरी चूत में ही झड़ गए। हम दोनों ने शॉवर में साथ नहाया और बाहर आए।

मयंक ने कहा, “अभी कपड़े मत पहनना!” मैंने हंसते हुए पूछा, “अब क्या आज ही तीसरी बार भी चोदोगे?” मयंक ने शरारती अंदाज में कहा, “अच्छा ठीक है, अगली बार चोद लूंगा, पर तुम नंगी ही रहो।” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है जान!” फिर हम दोनों नंगे ही रहे, एक-दूसरे के साथ वक्त बिताते हुए मस्ती करते रहे। कभी वे मेरे दूध चूसते तो कभी मैं उनके लौड़े से खेलती। मस्ती जरूर कर रही थी, लेकिन मेरी चूत में एक मीठी सी कुलबुली हो रही थी, जिसे चुदने की खुजली ही कहा जा सकता है। फिर हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।

अगले दो दिन तक मैंने इन्हें अपने आपको छूने तक नहीं दिया, क्योंकि उस तगड़ी चुदाई के बाद मुझे बहुत दर्द हो रहा था। लेकिन सच कहूं, मयंक के साथ चुदाई का मजा भी मुझे भरपूर मिला था।

भाग 3: दूसरी मुलाकात – बुधवार की सेक्स डेट

हमारी अगली सेक्स डेट बुधवार को फिक्स हुई। मैं सुबह उठी, नहा-धोकर तैयार होने लगी। मैंने वही सेक्सी रेड टॉप और ब्लैक स्कर्ट वाली ड्रेस पहनी, जो मयंक मेरे लिए लाए थे। मैंने मेकअप किया, रेड लिपस्टिक और रेड नेल पॉलिश लगाई, अपने बालों को खूबसूरती से स्टाइल किया। अब मैं एकदम रेड हॉट लग रही थी। सारा काम-काज निपटाकर मैं अपने रूम में आई।

मयंक ने मुझे देखकर कहा, “अब अंदर आ गई हो, तो अपनी जैकेट तो उतार दो!” मैंने अपनी जैकेट उतारकर साइड में टांग दी। अब उनके सामने एक क्यूट और शरीफ-सी लड़की खड़ी थी, वो भी पूरे सेक्सी अवतार में। मैंने शरारत से कहा, “ठीक है, तो शुरू करें?” इन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, “कर रहे हैं यार…” मैं हंस पड़ी।

फिर मयंक ने मुझे जूस पिलाया और कहा, “पी ले रानी… आज बहुत दर्द होगा।” मैंने मजाक में कहा, “तुम भी पियो।” अब मैं मयंक से सचमुच रंडियों की तरह बात कर रही थी और इनका जोश बढ़ता जा रहा था। मयंक ने कहा, “तो शुरू करते हैं, आओ बेड पर चलते हैं।” हम दोनों बेड पर चले गए। मयंक ने सॉफ्ट म्यूजिक चला दिया और माहौल पूरी तरह से रोमांटिक हो गया। हम दोनों बेड पर बैठे थे, एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे।

मैंने चुटकी लेते हुए कहा, “आज सिर्फ देखते रहने का इरादा है क्या?” इन्होंने जवाब दिया, “यार जुगनी, तुम इतनी स्वीट और प्यारी हो। हमेशा ऐसे ही रहना।” मैं मुस्कुराई, उनके पास सरक गई और अपने रसीले लाल होंठ उनके होंठों पर रख दिए। हम दोनों ने आँखें बंद कर लीं और करीब दो मिनट तक एक-दूसरे को चूमते रहे।

फिर मैंने उनका हाथ अपने बूब्स पर रख दिया और अपने हाथ से उनके लंड को सहलाने लगी। दोस्तो, अब मुझे जरा भी डर नहीं लग रहा था, बल्कि मजा अपने चरम पर था। उनके पजामे में हलचल शुरू हो गई। मयंक मेरे बूब्स को प्यार से मसल रहे थे और मैं उनके लंड को सहला रही थी। हम दोनों जोश में होश खोते जा रहे थे। चुंबन तोड़ने के बाद हमारा जोश सातवें आसमान पर था।

मैंने कहा, “आज मेरे कपड़े नहीं उतारोगे?” मयंक ने शरारती अंदाज में कहा, “आज तुम डांस करो और नाचते-नाचते अपने कपड़े उतारो!” फिर वे तकिया लेकर साइड में ऐसे लेट गए जैसे किसी लड़की का मुजरा देखने आए हों। मैं भी उस पल को एंजॉय करने के मूड में थी। मैंने ‘उम्म्हह उम्म्हह’ की कामुक आवाजें निकालते हुए डांस शुरू कर दिया। वे मेरा ऐसा रूप देखकर खुश भी थे और हैरान भी। मैं लहराती हुई नाच रही थी और वे बस देखे जा रहे थे।

मैंने अपना रेड टॉप उतार दिया, पर ब्रा को अभी रहने दिया। फिर मैं उनके पास गई और उनका चेहरा अपने उभारों के बीच दबा दिया। मैं जोर-जोर से ‘आहें’ भरने लगी, जैसे उन्हें और उकसाना चाहती हूं। वे भी मेरी इस अदा से मदहोश होने लगे थे और मेरे चूचियों को बार-बार अपने मुँह में भरने की कोशिश कर रहे थे। फिर मेरे पति मयंक ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया और बेड पर लेट गए। मैं चूमती हुई उनका मन बहलाने लगी और उनसे अलग होकर बेड से नीचे आ गई।

अपनी जवानी को छलकाती हुई मैं धीरे-धीरे अपने सारे कपड़े उतारने लगी। अब मैं सिर्फ चड्डी और ब्रा में थी। इन्होंने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया। मैं उनके करीब गई। थोड़ी देर तक मयंक मेरे बूब्स के बीच चूमते-चाटते रहे और आहें भरते रहे। फिर मैं अलग हुई और मैंने उनके कपड़े उतार दिए। उनका कच्छा भी उतार कर फेंक दिया।

इनका लंड अभी पूरी तरह खड़ा नहीं हुआ था, तो मैंने उन्हें उत्तेजित करने के लिए थोड़ा और सेक्सी डांस किया। कमरे में एक पूरी तरह नंगा लड़का था और उसके सामने एक जवान, सेक्सी लड़की रेड बिकनी में नाच रही थी। लेकिन शायद मयंक मूड में नहीं आ पा रहे थे, क्योंकि उनका लंड अभी भी ढीला-सा था। मैंने कहा, “पैर लटका कर बेड पर बैठ जाओ!” वे बैठ गए।

मैं डांस करती हुई उनके पास गई और उनके लंड को सहलाने लगी। मैं जल्दी ही समझ गई कि आज इसे मुँह से चूसकर ही खड़ा करना पड़ेगा। मैंने उनके लंड के टोपे को चूमा और हाथ से पकड़कर हल्के-हल्के हिलाने लगी। फिर मैंने उनके आधे से ज्यादा लंड को अपने मुँह में लेकर ऐसे चूसना शुरू कर दिया जैसे कोई कुल्फी चूस रहा हो। मयंक जोर-जोर से आहें भरने लगे। उनका लंड अब अपने पूरे उफान पर आ गया था, एक मोटा डंडा बनकर तन गया।

इन्होंने कहा, “प्लीज जुगनी, ऐसे ही चूसती रहो, बहुत मजा आ रहा है!” मैं और जोश से चूसने लगी। मयंक का जोश सातवें आसमान पर था। उनका मुँह छत के पंखे की तरफ था, आँखें बंद थीं। मेरा ऐसा चूसना उन्हें पागल कर रहा था। लेकिन मुझे डर था कि कहीं वे ऐसे ही झड़ न जाएं, वरना मेरी चुदाई अधूरी रह जाती। मैंने कहा, “अब बहुत हुआ, अब तुम मेरी चूत जीभ से चाटो।” मैंने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। मेरी चिकनी, गोरी टांगें देखकर मयंक का जोश बढ़ता जा रहा था।

मयंक ने कहा, “खड़ी हो जाओ।” मैं खड़ी हो गई। उन्होंने उंगली के इशारे से नजदीक आने का कहा। तो मैंने अपनी चूत उनके मुँह के पास ले जाकर टिका दी और उनका मुँह अपनी टांगों के बीच दबा दिया। मुझे बड़ा सुख मिला। वे मेरी चूत को किसी कुत्ते की तरह अपनी जीभ से चाटने लगे। कुछ पल बाद मयंक ने मुझे बेड पर टांगें लटका कर बिठाया और मेरी चूत का द्वार खोलकर अपनी जीभ से अंदर-बाहर करने लगे। मुझे गजब का मजा आ रहा था। मैं ‘आआ आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआह’ की सिसकारियां भरने लगी और वे अपनी जीभ मेरी चूत की दरार में फिराते रहे।

मेरी चूत पूरी तरह से गीली और चिकनी हो चुकी थी। मैं उनके मोटे लंड को लेने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। मैंने कहा, “अब डाल दो जान… बर्दाश्त नहीं हो रहा!” वे मेरे सामने खड़े हो गए और अपने लंड को मेरी चूत के द्वार पर रखकर डालने की कोशिश करने लगे। मयंक ने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर सेट कर दिया। हालांकि पिछले हफ्ते ही मेरी सील टूटी थी और उस दिन चुदते-चुदते मेरी चूत थोड़ी बड़ी भी हो गई थी, लेकिन तीन दिन के गैप की वजह से वो फिर से टाइट सी हो गई थी। इनके लंड का मुँह बड़ा था, तो एकदम से अंदर नहीं जा पा रहा था।

इन्होंने कहा, “उफ्फ… साली, तेरी चूत बड़ी शैतान है। इतनी टाइट है कि मेरा लंड आसानी से नहीं जा पा रहा है!” मैंने कहा, “कोई बात नहीं जानू… तुमसे आठ-दस बार चुदने के बाद ये खुल जाएगी।” इन्होंने कहा, “ये ऐसे नहीं खुलेगी। इसके लिए रोज कम से कम एक बार या तो चुद लिया कर।” मैंने हंसते हुए कहा, “बाद की बाद में देखेंगे, अभी तुम ही रंडी की तरह चोदो।”

मयंक ने कहा, “ठीक है जान, थोड़ा दर्द बर्दाश्त करना!” मैंने कहा, “ऐसा करो, उस दिन की तरह एकदम से डाल दो। धीरे-धीरे दर्द सहने से अच्छा है कि एक झटके में सारा दर्द दे दो।” इन्होंने कहा, “आज तेल नहीं लगाया है, तो मुश्किल से जा रहा है। चलो, कोशिश करता हूं।” मैंने खुद ही अपनी कमर के नीचे एक तकिया लगाया और अपनी टांगें चौड़ी करके अपनी चूत को उनका लंड लेने के लिए पूरी तरह से तैयार कर लिया।

मयंक ने मेरी चूत पर एक हल्का सा थप्पड़ मारते हुए कहा, “अरे वाह जुगनी, तुम तो एक ही दिन में रंडी बन गई!” मैंने शर्माकर अपनी नजरें झुका लीं। मयंक मेरे ऊपर आया, मेरी बगल में अपने हाथ रखकर अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर सेट किया और बोला, “तैयार हो?” मैंने हां में सिर हिलाया।

फिर एकदम से, पूरी ताकत लगाकर इन्होंने अपना गर्म और सख्त लंड मेरी चूत में उतार दिया। मेरा मुँह दर्द से खुल गया। एक पल के लिए लगा जैसे मयंक का लंड मेरी बच्चेदानी तक पहुँच गया हो। मेरे मुँह से एक जोरदार ‘आआ आआआह’ की सिसकारी निकली। दर्द से मेरी आँखों में आंसू आ गए। मैंने अपने होंठ दांतों से दबा लिए और सारा दर्द चुपचाप सह लिया। इन्हें भी दर्द हुआ था। वे भी ‘आआआह’ करके ऊपर देख रहे थे।

थोड़ा शांत होने के बाद मयंक ने मेरी आँखों में देखा और कहा, “सॉरी जान, पर तूने ही कहा था कि एकदम से घुसेड़ दो।” मैंने कहा, “हम्म… कोई नहीं। अभी ऐसे ही रहो, दर्द थोड़ा कम हो जाने दो।” लगभग आधे मिनट बाद मैंने कहा, “अब ठीक है, अब धक्के लगाओ।” इन्होंने अपने लंड को पूरा बाहर निकाले बिना ही धक्के मारना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा। मैं और मयंक एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। मैं ‘आआह आआ आह…’ की सिसकारियां ले रही थी और मयंक का कंठ ‘हम्म हम्म’ कर रहा था। मेरे खुले बाल धक्कों के साथ जोर-जोर से हिल रहे थे। वे मेरे चेहरे के पास ‘उम्म उम्म’ सांसें ले रहे थे और मेरे गालों को चूम भी रहे थे। इनके चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ गई थी, हालांकि मैं अभी भी हल्के दर्द के साथ चुद रही थी। मैंने पूछा, “हंस क्यों रहे हो?”

इन्होंने कहा, “यार, मैं कितना लकी हूं जो तुम्हें सच में चोद रहा हूं।” मैंने कहा, “तो लकी मैं हूं। थोड़ी स्पीड बढ़ा दो यार। धक्के जोर से लगाओ… और जोर से!” इन्होंने ‘उम्म ऊन्ह ऊन्ह ऊन्ह…’ की आवाजें निकालते हुए अपने धक्के तेज कर दिए। पूरा बेड हिलने लगा। मैं सुख के आसमान में उड़ने लगी। मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकल रही थीं। ‘उम्म्ह… अआ हह… हय… हाँह… आह अह अहह… मयंक और जोर से… येस येस… और तेज और तेज!’

मयंक मुझे तेजी से चोदे जा रहे थे। न वे झड़ने का नाम ले रहे थे, न मैं। फिर वे थकने लगे। इनकी और मेरी सांसें फूल गई थीं। वे कुछ देर के लिए रुक गए, लेकिन इनका लंड मेरी चूत में ही पड़ा रहा। मैंने आह भरे स्वर में पूछा, “आह मयंक डार्लिंग, क्या हुआ?” मयंक चिढ़कर बोला, “साली, इंसान हूं, मशीन नहीं। सांस फूल गई है, थोड़ा तो रहम कर!” मैंने कहा, “ठीक है, कर लो। लंड निकालकर साइड में लेट जाओ।” वे मेरे साइड में ढेर हो गए और हम दोनों हांफते हुए अपनी सांसों को काबू में करने लगे।

लेटे-लेटे ही उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा, “इतनी आग है तुझमें चुदने की… मैं सोच भी नहीं सकता था कि तू इतनी सेक्स क्रेजी हो जाएगी?” मैंने हंसते हुए जवाब दिया, “तुमने ही मेरी जवानी की चिंगारी को हवा दी है, अब आग तो भड़केगी ही!” यह कहकर मैं खिलखिलाकर हंस पड़ी। ये भी हंसने लगे और ऊपर छत की तरफ देखने लगे। हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे के बगल में करीब पांच मिनट तक पड़े रहे। मैं उनके लंड को प्यार से सहलाती रही और हम इधर-उधर की बातें करते रहे।

मैंने कहा, “चलो, फिर शुरू करें!” मयंक मुस्कुरा दिए और बोले, “अब तुम मेरे लंड पर आकर बैठो और उछल-कूद करो।” मैंने उनके लंड को अपने मुँह में लिया और थोड़ा-सा चूसा ताकि वो चिकना हो जाए। फिर मैं मयंक के लंड के ऊपर बैठ गई और उसे अपनी चूत में ले लिया। मयंक की तरफ मुँह करके मैंने उनकी छाती पर अपने हाथ रखे और उनके लंड पर ऊपर-नीचे होने लगी। मेरे पति मयंक का लंड इतना लंबा था कि वो मेरे अंदर बहुत गहराई तक जा रहा था। तब मुझे एहसास हुआ कि धक्के मारने में कितनी मेहनत लगती है। मैं उनके लंड पर कूद रही थी और उनकी आँखों में देख रही थी। मैं जोर-जोर से ‘आह आह आहह आहह’ चिल्ला रही थी। उन्हें भी मेरे कूल्हों पर थप्पड़ मारने में बड़ा मजा आ रहा था। वे मुझे हवस भरी नजरों से निहार रहे थे। हम दोनों एक-दूसरे को देखकर शैतानी हंसी हंस रहे थे।

लगभग पांच-छह मिनट तक ऐसे ही चुदने के बाद मैं मयंक की छाती पर लेट गई, अपने बूब्स उनकी छाती से सटाकर। कुछ देर तक मैं उनकी बाहों में चूत में उनका लंड लिए शांति से पड़ी रही। फिर इन्होंने मुझे उसी हालत में अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया और अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैं भी पड़ी-पड़ी चुदती रही, चुदाई का सुख लेती रही। मेरे बाल बिखर गए थे और वे उनमें हाथ फेरते हुए मुझे प्यार से देख रहे थे।

तकरीबन सात-आठ मिनट तक ऐसे ही चोदने के बाद मयंक ने कहा, “अब उलटी लेट जा!” मैं डॉगी स्टाइल में उलटकर लेट गई। फिर मयंक ने मेरी चूत को ऊपर उठाने के लिए मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे खींचा और मेरे पेट के नीचे एक तकिया रख दिया। अब मेरी चूत मयंक के सामने पूरी तरह से खुली हुई थी और मैं सामने लगे शीशे में खुद को और उन्हें देख पा रही थी। वे मेरे पीछे आए और अपने लंड को मेरी चूत और गांड के छेद पर रगड़ने लगे। मैंने कहा, “ओये… थप्पड़ मारूंगी अगर उसमें डाला तो!” वे पहली बार मुझे यूं बोलते देखकर हंसने लगे और बोले, “अभी नहीं डाल रहा, डरो मत मेरी कुतिया!”

उसके बाद इन्होंने अपने हाथ से अपना लंड पकड़कर मेरी चूत के छेद पर रखा और मेरे ऊपर झुक गए। मयंक ने मुझे कसकर पकड़ा और अपने लंड को मेरी चूत में रगड़ना शुरू कर दिया। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। तभी इन्होंने मेरे गाल पर चूमते हुए कहा, “चल मेरी कुतिया, अब तू मेरा लंड लेने के लिए तैयार हो जा।” बस, अब इन्होंने अपने लंड को धकेलना शुरू कर दिया। मेरे मुँह से एक लंबी ‘आआआ ऊऊऊ’ निकली और उनका लंड मेरी चूत में आसानी से चला गया। इन्होंने जोर-जोर से अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैं आगे-पीछे हिलने लगी, बेड के सॉफ्ट गद्दे में डूबती-उतरती रही। इस पोजीशन में मुझे गजब का मजा आ रहा था। मैं शीशे में उन्हें देख रही थी और खुद को धक्के खाते हुए महसूस कर रही थी। मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो रही थी, जिससे ‘फच फच फच’ की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। मैं ‘आह आहह आह’ कर रही थी।

कुछ ही देर में मेरी सांसें तेज हो गई थीं और मैं झड़ने वाली थी। मैंने कहा, “आह जान लगे रहो… अब मैं झड़ने वाली हूं!” उन्होंने भी कहा, “आह मैं भी!” वे धकाधक धक्के मारते रहे। हम दोनों हांफ रहे थे। मैं सेक्स के चरम सुख पर पहुँचने वाली थी। मेरी सिसकारियां तेज हो गई थीं। मेरा बदन अकड़ने लगा। मयंक को ये महसूस हो गया और फिर उन्होंने रुक-रुककर तेज झटके मारने शुरू कर दिए। हर झटके में वे अपना पूरा लंड बाहर निकालते और झटके से अंदर डाल देते। मेरे आनंद की कोई सीमा नहीं थी। कमरे में मेरी ‘आह आह’ और उनकी जांघों के मेरे चूतड़ों से टकराने की ‘पट पट पट’ की आवाज गूंज रही थी।

आखिरकार एक लंबी ‘आआहह…’ के साथ मेरी चूत से पानी ‘फच्च’ करके छूट गया। एक-दो झटके बाद ही मयंक का वीर्य भी झड़ गया। उन्होंने अपना लंड बाहर नहीं निकाला और अपना सारा गर्म वीर्य मेरी चूत में ही गिरा दिया। फिर वे मेरी कमर पर ‘आह’ के साथ ढेर हो गए। हम दोनों के चेहरों पर एक-दूसरे को संतुष्ट करने की खुशी थी। हम करीब बीस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे।

जब मैंने कहा, “उठो यार!” तब ये उठे। अब तक इनका वीर्य थोड़ा सा सूख चुका था और हमारे शरीर के बीच चिपक गया था। चुदाई पूरी होने के बाद मैंने अपनी चूत का जायजा लिया। वो फिर से काफी खुल चुकी थी। मयंक ने कहा, “देखा, रोज एक बार चुदवा लिया कर! तभी तेरी चूत खुली रहेगी। वरना इतने दिनों बाद चोदने में तुझे भी दर्द होता है और मुझे भी लंड डालने में दिक्कत होती है।” मैंने कहा, “ठीक है यार… चुदवा लिया करूंगी।” फिर मैं उठकर बाथरूम चली गई और अपने शरीर को पानी से साफ किया।

भाग 4: गांड चुदाई – पहली बार का दर्द और मजा

मैं बाहर आई, लेकिन मैंने कपड़े नहीं पहने और नंगी ही हॉल में जाकर बैठ गई। मयंक आए और बोले, “क्या बात है? मेरे घर में नंगी ही घूमती रहती हो!” मैंने हंसकर कहा, “थोड़ी देर में फिर उतारने पड़ेंगे। इससे अच्छा अभी पहनूं ही न!” वे मुस्कुराए और मेरे पास आकर बैठ गए।

फिर इन्होंने कहा, “एक बात कहूं?” मैंने कहा, “बोलो न?” मयंक बोले, “जुगनी, इस बार मैं तेरी गांड में चोदना चाहता हूं!” मैंने तुरंत कहा, “बिल्कुल नहीं, अपनी नई दुल्हन की गांड में कौन चोदता है?” मयंक ने कहा, “कोई मूर्ख ही होगा जो इतनी खूबसूरत गांड को नहीं चोदेगा।” मैंने हंसते हुए कहा, “धत!” इन्होंने कहा, “प्लीज जुगनी, मेरी जान… एक बार गांड मार लेने दो!”

मैं अड़ी रही और मना करती रही। मयंक ने मुझे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैं गांड चुदाई के लिए तैयार नहीं हुई। मैंने कहा, “मुझे मालूम है, उधर चुदवाने में बहुत दर्द होता है।” फिर मेरे पति मयंक ने मेरी सिर्फ चूत की ही चुदाई की। चुदाई के दौरान मैंने देखा कि मयंक कुछ सोच रहे थे। इन्होंने मुझे बेड के किनारे से लगाकर फिर से घोड़ी बना दिया और मेरी चूत चोदने लगे। लेकिन इनकी नजर मेरी फूली हुई गांड पर टिक गई थी।

इन्होंने पास रखी तेल की कटोरी में अपनी उंगली डुबोई और मेरी गांड के छेद में डाल दी। मयंक की आधी उंगली मेरी गांड में चली गई। अचानक हुए इस हमले से मैं दर्द के मारे ‘आउच’ करके बेड पर लेट गई। “रुकिए, मैं आपके लिए अपनी गांड को तैयार करके आती हूं,” यह कहकर मैं बाथरूम में गई और अच्छे से अपनी गांड को अंदर से साफ किया। फिर वापस आकर बिस्तर पर लेट गई।

मयंक भी मेरे ऊपर बेड पर आ गए। फिर इन्होंने कटोरी उठाई और अपने लंड पर तेल टपकाकर मेरी चूत में आगे-पीछे करना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मेरी गांड से अपनी उंगली निकाली और उस पर और तेल डालकर अपनी उंगली से मेरे गांड के छेद को ढीला करने लगे। मुझे लगा कि मयंक बस यूं ही मेरी गांड में उंगली कर रहे हैं, तो मैंने अपनी गांड का छेद ढीला छोड़ दिया। मयंक ने उसी पल तेजी से एक्शन लिया। उन्होंने मेरी चूत से अपना लंड निकाला और मेरी गांड में डाल दिया। इनका आधा सुपारा मेरी गांड में घुस गया था।

मैं चीखने को हुई, लेकिन इन्होंने बड़ी फुर्ती से मेरा मुँह दबा दिया और अपने लंड को धीरे-धीरे मेरी गांड में पेलते चले गए। मयंक ने मेरी छोटी-सी गांड में अपना आधे से ज्यादा लंड घुसेड़ दिया था। मैं जोर-जोर से रोने लगी और इनके लंड को बहुत जोर से दबाने लगी। फिर ये एक मिनट के लिए रुक गए और अपने लंड को मेरी गांड में जगह बनाने का मौका दिया। मैं अब भी सुबक रही थी। लेकिन मुझे महसूस हुआ कि उनके लंड ने मेरी गांड में अपनी जगह बना ली थी। ये महसूस होते ही मयंक ने फिर से अपने लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।

अब मयंक कुछ देर तक सिर्फ आधे लंड से ही मेरी गांड मारने लगा। मैं इनके हर धक्के पर चिल्लाने लगी। मयंक बिना कुछ ध्यान दिए मेरी छोटी-सी गांड को गड्ढा बनाते रहे। करीब दस मिनट बाद मैंने अपनी गांड को थोड़ा ढीला किया। मयंक भी जोश में आकर जोर-जोर से धक्के लगाने लगे। मैं अभी भी सिसकारियां ले रही थी। मेरे पति मयंक के लंड के हर धक्के के साथ मेरी ‘आह’ निकल जाती थी।

फिर इन्होंने मेरी गांड से अपना लंड निकाला और मेरी चूत में पेलकर मेरी चूत चोदने लगे। अब मैं चुप हो गई। इन्होंने देखा कि मेरी गांड का छोटा-सा छेद अब बड़ा हो गया था और बहुत लपलपा रहा था। इन्होंने फिर से मेरी चूत से अपना लंड निकाला और मेरी गांड में पेल दिया। इस बार मुझे दर्द नहीं हुआ। मेरे पति मयंक के लंड ने मेरी गांड में अपने लिए पूरी तरह से जगह बना ली थी। शायद मेरी गांड को भी अब इनका लंड पसंद आने लगा था। अब इन्होंने बारी-बारी से मेरी चूत और गांड मारनी शुरू की। मैं भी पहली बार गांड मरवाकर मजा लेने लगी थी। आखिर में मयंक ने मेरी गांड में ही अपने लंड का सारा पानी छोड़ दिया और मेरे ऊपर ढेर हो गए।

झड़ने के बाद मयंक ने मुझे कसकर पकड़ कर अपने बगल में लेटा लिया। इनका लंड अभी भी मेरी चूत को छू रहा था। मैंने कुछ देर आराम किया। मेरी चूत और गांड दोनों सूजकर बड़ा पाव की तरह हो गई थीं। सूजन की वजह से मैं अपनी टांगें भी ठीक से मोड़ नहीं पा रही थी। मैं इनसे नाराज थी। इन्होंने कहा, “अभी दो बार ही हुआ है। धीरे-धीरे तुम्हें इसकी आदत पड़ जाएगी। तू देख, कल तक मैं तुझे आठ बार कैसे चोदता हूं।” मैंने दोनों हाथ जोड़े और माफी मांगने लगी।

फिर मयंक ने मुझे आराम करने के लिए बिस्तर पर लेटा दिया। वे खुद भी मेरे साथ चादर ओढ़कर सो गए। हम दोनों चादर के अंदर नंगे थे। मैं अपनी टांगें चौड़ी करके सो गई थी, क्योंकि अभी तक मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

भाग 5: रात की चोरी-छिपे चुदाई और सुबह का प्यार

रात को मयंक पेशाब करने के लिए उठे। मैं वैसे ही नंगी सो रही थी। इन्होंने धीरे से मेरे ऊपर से चादर हटा दी। मुझे नंगी और बेखबर सोता देखकर इनका लंड फिर से गर्म हो गया। मेरी खुली हुई चूत उन्हें लुभाने लगी। इन्होंने वैसे ही मेरी चूत में अपना लंड पेलकर चोदना शुरू कर दिया। चोदते हुए इन्होंने थोड़ी-सी पेशाब भी मेरी चूत में कर दी। लंड घुसते ही मैं जाग गई और छटपटाने लगी। मुझे अपनी चूत में कुछ गीला-गीला महसूस हुआ, लेकिन बहुत अच्छा भी लग रहा था।

मयंक ने तब तक मेरी चूत में बीस धक्के मार दिए थे। मुझे अब चूत में उनके लंड से जलन होने लगी थी। मैंने कहा, “आप आगे रहने दो… पीछे कर लो, मेरी गांड मार लो। आगे कल कर लेना।” मयंक ने मुझे समझाया और बहुत सहलाते हुए मेरी चूत ही चोदते रहे। कुछ देर बाद मेरी चूत में भी पानी आने लगा और मैं चुदने का मजा लेने लगी। मयंक ने मुझे दस मिनट तक और चोदा, फिर मेरी चूत में ही अपना पानी निकाल दिया।

वो मुझे उठाकर शावर में ले गए। उन्होंने मुझे नहलाया, मेरी चूत और गांड को अच्छे से साफ किया और फिर मेरी सूजी हुई चूत और गांड पर बर्फ लगाई। उन्होंने मेरे चेहरे और बूब्स पर भी बर्फ लगाई और मुझे आराम दिया, क्योंकि उन्होंने सेक्स के दौरान मेरे गाल पर थप्पड़ मारकर और मेरे बूब्स को मसलकर लाल कर दिया था। हम दोनों ने नहाकर आए और बिना कपड़ों के एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। हम रात को ही सफाई कर चुके थे, इसलिए अभी मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं थी।

सुबह मैं पहले उठी थी और उनके ऊपर चढ़कर लेट गई थी। मेरी हरकतों से मयंक भी जाग गए। जैसे ही इनका लंड खड़ा हुआ, इन्होंने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया और धीरे से अपने लंड को मेरी चूत में पेल दिया। मैं सेक्स की भूखी हो चुकी थी… मैं आराम से मयंक की गोद में ऊपर-नीचे हो रही थी। थोड़ी देर बाद मयंक ने मुझे उठा लिया और उठा-उठा कर चुदाई करने लगे। मैं उनसे बातें करने लगी, “कल तुमने मुझे किसी मुजरिम की तरह सजा दी थी। मेरी गांड मारी। भला कोई ऐसा करता है यार?” मयंक बस मुस्कुरा दिए।

हम दोनों की चुदाई अब जोरों पर चलने लगी। मैं झड़ने के करीब पहुँच गई थी। एक मिनट बाद मैंने मयंक के लंड पर कूदना बंद कर दिया। मयंक समझ गए कि मैं झड़ गई हूं। तभी मैं उठने लगी और बोली, “मुझे पेशाब लगी है, मैं मूत कर आती हूं।” मयंक ने कहा, “मगर मैं अभी झड़ा नहीं हूं।” यह कहकर इन्होंने मुझे पकड़ लिया और खींचकर बेड के किनारे पर ले आए। मैं कुछ समझ पाती, इससे पहले ही इन्होंने पीछे से आकर मेरी चूत में अपना लंड पेल दिया और जोर-जोर से चोदने लगे। मैं बस ‘आह ओह आह’ ही कर पा रही थी।

हंसते हुए मैंने कहा, “अब पेशाब तो कर आने दो!” मयंक बोला, “लंड से चुदते-चुदते यहीं पर कर ले।” मैं नहीं मानी। मैंने अपनी पेशाब रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन इन्होंने चुदाई की स्पीड तेज कर दी। मयंक इस बार फुल स्पीड में पांच-छह धक्के मारकर अपना पूरा लंड मेरी चूत से बाहर निकाल रहे थे। चार-पांच बार ऐसा करने के बाद मैं जोर-जोर से पेशाब करने लगी। मेरा पूरा शरीर किसी वाइब्रेटर की तरह हिलने लगा। इन्होंने वैसे ही धकापेल चोदना जारी रखा। इस वक्त मैं पूरी चुदासी लड़की की तरह आहें निकाल-निकालकर चुद रही थी।

इन्होंने पूछा, “चूत में दर्द है?” मैं बोली, “नहीं, आज तो मजा आ रहा है।” अब इन्होंने मेरी एक टांग को पूरा ऊपर उठाया और मेरी चूत में अपना लंड दे दिया। इनका दूसरा पैर बेड के नीचे था। वे मुझे पूरी रफ्तार से चोद रहे थे। मेरा ऊपरी हिस्सा हवा में जोर-जोर से हिल रहा था और मेरी चूत से ‘पच-पच’ की जोरदार आवाज आ रही थी। इस आवाज के साथ हमारे शरीर के टकराने की ‘थप-थप’ की आवाज भी गूंजने लगी थी। मयंक मुझे जोर-जोर से चोदते हुए मेरी चूत के दाने को अपनी उंगली से रगड़कर मसल दे रहे थे। इससे मैं चिल्लाने लगी, ‘आह… ओह और तेज चोदो… और फास्ट और जोर से… आह फक मी!’

मैं चरम पर पहुँच गई थी और झड़ने लगी। मेरी सांसें पूरी तरह से फूल रही थीं और मैं बिस्तर पर गिरने लगी। हम दोनों इतनी ठंड में भी पसीने से तर-बतर हो गए थे। मयंक एक मिनट रुके रहे और मुझे संयत होने का मौका दिया। फिर मयंक मेरे ऊपर लेट गए। इन्होंने मेरी दोनों टांगें मोड़ दीं और मुझे किसी कुर्सी की तरह उठा लिया। अब मयंक मुझ पर पूरी ताकत से पिल पड़े और मेरी चूत में धक्के मारते हुए चोदने लगे। इस समय इनका लंड भी पूरा गीला था। इन्होंने फुर्ती से अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मेरी गांड में पेल दिया। मैं एक पल के लिए चिहुंकी, “आपने अपना लंड गलत जगह पेल दिया है!” मयंक ने कहा, “हां जान, मुझे मालूम है। कभी-कभी उधर का मजा भी ले लेना चाहिए!”

वे मेरी गांड को जबरदस्त तरीके से मारने लगे। मुझे अच्छा लगने लगा। मेरी गांड अब तक काफी खुल चुकी थी। फिर मैंने उनसे कहा, “आप कल जैसी चुदाई करो। आगे-पीछे बारी-बारी से मुझे पेलो।” मयंक समझ गया कि लौंडिया मस्त हो गई है। अब ये कभी मेरी चूत में अपना लंड पेल देते, तो कभी मेरी गांड मारने लगते। कुछ ही देर की इस मस्ती भरी चुदाई के बाद ये भी अपने आखिरी दौर में आ गए और झड़ने के करीब थे। मयंक ने इस बार अपना पूरा पानी मेरी चूत और गांड दोनों को पिलाया। मेरी चूत की बच्चेदानी तक इनका लंड पानी छोड़ने लगा था। इनका पानी महसूस करके मैं भी फिर से झड़ गई। मेरी चूत ने इनके लंड से सारा पानी निचोड़ लिया था।

जब मयंक का लंड मेरी चूत से निकला, तो इस बार मुझे हल्का-सा दर्द होने लगा। मैंने इनके लंड को अपने मुँह में डाल दिया और चूसने लगी। इस समय मेरी चूत इनके मुँह पर थी। मयंक ने मेरी चूत को चाटकर पूरी तरह से साफ कर दिया। मुझे भी चूत चटवाने से बहुत राहत मिल गई। फिर इन्होंने अपने मोबाइल से मेरी फटी हुई चूत और गांड की फोटो खींची।

करीब दो घंटे बाद मैं नहाने गई। फिर से अपनी गांड को अच्छी तरह से साफ किया, क्योंकि वो मुझे आज दिन भर चोदने वाले थे। नहाकर तौलिया लपेटकर जैसे ही मैं बाहर निकली, इन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और वहीं पास में रखी एक छोटी-सी बेंच टाइप की टेबल पर लेटा दिया। मैं हंसने लगी। इन्होंने मेरी टांगें चौड़ी कीं और मेरी खुली हुई चूत में पूरे जोर से अपना लंड पेल दिया। मैं जैसे-तैसे इनके लंड को झेल गई और कराहने लगी। इनके लंड को उस वक्त न जाने क्या हुआ था कि मयंक ने वहीं पर मेरी चूत में गधे की तरह अपना लंड पेलकर मुझे चोदता रहा। उस छोटी-सी टेबल की वजह से मेरा सिर पीछे की तरफ लटक गया था। इन्होंने मुझे वो भी ठीक नहीं करने दिया… बस मुझे चोद-चोदकर पूरा खोल दिया था।

झड़ने के वक्त मयंक ने मेरे मुँह में अपना पूरा लंड डाल दिया और मेरे मुँह को चोदने लगे। जब पानी निकलने वाला था, तो इन्होंने मेरे मुँह में अपना पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया। मेरा सांस लेना भी मुश्किल हो गया था। जब तक उनका लंड पूरी तरह से खाली नहीं हुआ, मयंक वैसे ही धक्के मारते रहे। पूरा पानी निकालने के बाद मयंक उठकर नहाने चले गए।

मैं अभी भी उस बेंच पर वैसे ही लेटी थी। मेरी तबीयत थोड़ी बिगड़ी-सी लग रही थी। मेरा पूरा शरीर दर्द कर रहा था, पर मुझे मजा भी बहुत आया था। फिर मैंने उठकर अपनी दोनों टांगें चौड़ी कीं और आईने में देखते हुए खुद से बोली, “ये क्या किया आपने… आपने मेरी छोटी-सी चूत का भोसड़ा बना दिया और गांड भी देख… साला गड्ढा-सा खोद दिया।” मयंक हंसने लगा और बोला, “तुझे बड़ी खुजली थी न… अब मजा ले।” मैं वहीं कुर्सी पर बैठ गई।

ये मुझे पीछे से चूमने लगे और मेरी चूत में अपनी उंगली करने लगे। मेरे छोटे-छोटे दूध, जो अब काफी बड़े नजर आ रहे थे, उनको दबोच-दबोचकर मसलने लगे। मेरे दूध इस समय टमाटर की तरह लाल-लाल हो गए थे। कुछ ही देर में मैं फिर से गर्म हो गई, मतलब उनका लंड लेने के लिए पूरी तरह से तैयार थी।

मयंक ने मुझे डॉगी स्टाइल में किया और अपना लंड मेरी चूत में डालकर मुझे टोकते हुए आईने के करीब ले गए। मैं आईने में खुद को चुदते हुए देखने लगी। मयंक कभी मेरी चूत में अपना लंड डाल रहे थे, तो कभी मेरी गांड में। मैंने इस समय अपनी चूत और गांड को पूरी तरह से ढीला छोड़ा हुआ था। इनके लंड ने अब मेरी चूत और गांड में अपने लिए पूरी तरह से जगह बना ली थी, इसलिए बड़ी आसानी से इनका लंड मेरी चूत और गांड में जा रहा था। इन्होंने मुझे अपने लंड का मेरी चूत में अंदर-बाहर होना भी आईने में दिखाया। फिर मैं भी उसी पोजीशन में खुद आगे-पीछे होने लगी और हर धक्के को आईने में देखकर चुदाई का मजा लेने लगी। मैं बोली, “कितना हसीन पल है। कल तक मैं अपनी चूत को आईने में देखती थी और सोचती थी कि कब इस चूत में लंड जाएगा… और आज देखो, कैसे आपने मेरी चूत सुजा दी।”

इन्होंने हंसकर मुझे उठाया और अपनी गोद में बिठाकर चोदने लगे। फिर बोले, “कोई बात नहीं जान, मैं तुम्हें रोज ऐसे ही चोदा करूंगा।” मैं शर्मा गई और बोली, “धत!” कुछ देर बाद हम दोनों झड़ गए। अब दोनों में से किसी में भी जान नहीं बची थी।

भाग 6: सुबह की विदाई और प्यार भरी जिंदगी

कल सुबह उन्हें काम पर जाना था। उन्होंने मुझसे कहा था कि सुबह छह बजे जगा देना। सुबह मैं पांच बजे ही उठ गई थी। मैंने उनके लिए खाना बनाया। छह बजे मैं उन्हें उठाने गई, तो देखा कि उनका लंड फिर से पूरी तरह से खड़ा है। सुबह-सुबह सभी लड़कों का लंड खड़ा होता है। मैंने बिना कुछ सोचे-समझे उनके लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। इससे वो भी जाग गए। मुझे सुबह-सुबह उनका लंड चूसते देखकर वो बहुत खुश हुए। उन्होंने मेरा सिर पकड़कर अपने लंड को मेरे गले तक घुसा दिया और मेरा मुँह चोदने लगे। वो अपने लंड से मेरा गला घोंट रहे थे। जब मैं छटपटाने लगती, तब वो मुझे सांस लेने देते।

बीस मिनट बाद वो अपना लंड मेरे गले में दबाए हुए मुझे बाथरूम में ले गए और अपना पूरा पानी मेरे मुँह में निकालकर मुझे पिला दिया। फिर वो मेरे चेहरे पर मूतने लगे। उन्होंने मेरा मुँह खोलकर मुझ पर मूतना शुरू कर दिया। जब मेरा मुँह उनके मूत से भर गया, तो उन्होंने मेरा मुँह बंद कर दिया और वो घूंट मुझे पिला दिया। उन्होंने मुझे अपने गर्म मूत से नहला दिया। फिर हम दोनों ने साथ में नहाया और बाहर आकर कपड़े पहनने लगे।

उन्होंने मुझे साड़ी पहनाई। मेरी मांग में सिंदूर भरा। मैंने उनका पैर छुआ। उन्होंने मुझे उठाया और कसकर गले लगाया। फिर हम साथ में बैठकर खाना खाया। मैंने उनका टिफिन पैक किया। काम पर जाते समय उन्होंने मेरे होंठों को बहुत प्यार से चूमा। मैंने कहा, “शाम को जल्दी घर आना।”

मेरी शादी के अब एक साल हो गए हैं। मैं दिन भर उनका इंतजार करती रहती हूं। अब तो उनके बिना एक पल भी नहीं रहा जाता। अब तो बस यही इच्छा रहती है कि वो मुझे जो करना है करें, लेकिन हर समय मुझे अपनी बाहों में रखें। मैं उन्हें सब कुछ करने देती हूं, जो भी वो चाहें। हम दोनों रोज कुछ नई चीजें करते हैं। अब मैं उन्हें बताती हूं कि वो मुझे कैसे चोदें, और वो मुझे वैसे ही चोदते हैं। कभी वो मुझे प्यार से चोदते हैं, जैसे मैं एक कोमल फूल हूं। कभी वो एकदम बेरहमी से चोदते हैं, बिल्कुल किसी जानवर की तरह मुझे नोचते-खसोटते हैं। कभी मुझे रस्सियों से बांधकर तड़पाते हैं। कभी वो मुझे इतना दर्द देते हैं कि मैं रोने लगती हूं।

पर इन सबके बावजूद, वो मुझे बहुत प्यार करते हैं। वो मुझे हमेशा खुश रखते हैं। हम दोनों एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त बन गए हैं। बहुत भाग्य से मुझे ऐसा पति मिला है जो मुझे बेहिसाब चोदता है, पर बेहिसाब प्यार भी करता है। वो मुझे बिस्तर में खूब रुलाता है, पर खूब हंसाता भी है। वो मुझे दर्द भी देता है, पर मुझे हमेशा खुश रखता है। वो मुझे कुछ भी करने की आजादी देता है। वो मुझे कभी किसी चीज से नहीं रोकता। वो मुझ पर कभी चिल्लाता नहीं है, बल्कि प्यार से समझाता है। वो मेरी हर बात सुनता है और मानता भी है। लेकिन चोदते समय वो मुझे खुलकर प्यार करता है और अपना पूरा जोश दिखाता है।

मुझे पहले नहीं पता था कि मुझे कैसी जिंदगी चाहिए, कैसा पति चाहिए। पर अब पता चल गया है। मुझे ऐसी ही जिंदगी चाहिए—प्यार, जुनून, दोस्ती और आजादी से भरी हुई। और मुझे ऐसा ही पति चाहिए—मयंक जैसा।

मेरी शादी के एक साल हो गए हैं। मैं दिन भर उनका इंतजार करती रहती हूं। अब तो उनके बिना एक पल भी नहीं रहा जाता। अब तो बस यही इच्छा रहती है कि उन्हें जो करना है करें, लेकिन हर समय मुझे अपनी बाहों में रखें। मैं उन्हें सब कुछ करने देती हूं जो भी वो चाहें। हम दोनों रोज कुछ नई चीजें करते हैं। अब मैं उन्हें बताती हूं कि वो मुझे कैसे चोदें, और वो मुझे वैसे ही चोदते हैं। कभी प्यार से, कभी बेरहमी से, कभी रस्सी से बांधकर, कभी दर्द देकर। पर इन सबके बावजूद वो मुझे बहुत प्यार करते हैं। वो मुझे हमेशा खुश रखते हैं। बहुत भाग्य से मुझे ऐसा पति मिला जो मुझे बेहिसाब चोदता है पर बेहिसाब प्यार करता है।

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