बचपन की दोस्त साक्षी की चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि जब बचपन की दोस्त से शादी हो, सुहागरात पर उसकी कुंवारी चूत चोदी जाए, हनीमून पर दस दिन तक बिना पैंटी के रखा जाए, और फिर डिलीवरी के बाद जब वो दूध से भरी चूचियाँ लेकर लौटे, तो पति उसका दूध पिए, उसकी कुंवारी गांड चोदे, और बाथरूम में दोनों एक-दूसरे के ऊपर पेशाब करें? यह हिंदी सेक्स कहानी बचपन की दोस्त साक्षी की चुदाई की है जहाँ पति ने साक्षी से बचपन की दोस्ती को शादी में बदला, सुहागरात पर उसकी चूत चोदी, हनीमून पर खूब चुदाई की, प्रेगनेंट किया, और फिर डिलीवरी के बाद उसके दूध से भरे स्तनों को चूसा, कुंवारी गांड में लंड डालकर बेरहमी से चोदा, और आखिर में दोनों ने एक-दूसरे का पेशाब पीकर प्यार का इज़हार किया। अगर आपको बचपन की दोस्त से शादी, सुहागरात, ब्रेस्ट मिल्क सेक्स, कुंवारी गांड चुदाई, पेशाब पीना और पति-पत्नी के गहरे प्यार वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।
भाग 1: साक्षी की चुदाई – बचपन की दोस्त से शादी और सुहागरात
साक्षी मेरी बचपन की दोस्त थी। हम दोनों एक ही मोहल्ले में बड़े हुए थे, एक ही स्कूल में पढ़े थे, और बचपन से ही हमारे बीच एक अनकहा रिश्ता था। मैं साक्षी को जान से भी ज़्यादा प्यार करता था। मैं हमेशा उसी के बारे में सोचता था — सुबह जब उठता, रात को जब सोता, हर वक्त बस वही मेरे दिमाग में रहती थी। उसकी हँसी, उसकी आँखें, उसके बाल — सब कुछ मुझे पागल बनाए रखता था। मैंने उसे शादी के लिए तैयार कर लिया था — हालाँकि यह आसान नहीं था, क्योंकि हमारे परिवार अलग-अलग बिरादरी से थे, लेकिन आखिरकार हमने सबको मना लिया।
वो शादी से पहले मुझे चुम्मा के अलावा कुछ नहीं करने देती थी। हमेशा कहती — “शादी के बाद जो करना है कर लेना।” और मैं उसकी इस शर्त का सम्मान करता था, हालाँकि मेरा लंड हर बार जब वो मेरे पास होती, पैंट में तम्बू बना लेता था। आखिरकार हमारी शादी हो गई। शादी का दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत दिन था — वो लाल साड़ी में, घूँघट में, बिल्कुल किसी अप्सरा जैसी लग रही थी।
वह सुहागरात को दुल्हन बन कर बिस्तर पर बैठी थी। लाल साड़ी में लिपटी, हाथों में मेंहदी, पैरों में आलता, माथे पर लाल बिंदी, और माँग में सिंदूर। वो अलग ही कामुक लग रही थी — जैसे कोई देवी धरती पर उतरी हो। मैंने सुहागरात के दिन ही अपनी दोस्त साक्षी की जबरदस्त चुदाई की थी।
मैंने उसकी घूँघट उठाया और उसके माथे पे चूमा — वो पहला चुंबन जो मैंने उसे अपनी पत्नी के रूप में दिया। फिर उसे गले लगा लिया। उसका शरीर काँप रहा था — डर, उत्तेजना, और प्यार का मिश्रण। मैंने उसको लिटाया और धीरे-धीरे उसे सहलाते हुए, उसके बूब्स दबाते हुए उसे चूमने लगा। उसके स्तन — 34 साइज़ के, गोल और मुलायम — मेरे हाथों में आ गए। वो भी साथ दे रही थी, अपनी बाँहें मेरे गले में डालकर।
मैंने धीरे-धीरे उसकी साड़ी खोलकर हटा दी। एक-एक करके साड़ी की तहें खुलती गईं, और उसका गोरा शरीर मेरे सामने आता गया। मैंने उसकी पैंटी खोलकर उसकी चूत से खेलना चालू कर दिया। उसकी चूत — कुंवारी, गुलाबी, और बेहद टाइट — मेरी उंगलियों के नीचे थी। उसकी चूत को चूसने लगा — मेरी जीभ उसकी नाज़ुक कली पर घूम रही थी। मैंने पहले एक उंगली डाली, वो नहीं जा रही थी। इतनी टाइट कि एक उंगली भी मुश्किल से जा रही थी।
मैंने साक्षी की ड्रेसिंग टेबल पर नज़र घुमाई, तो उसकी आँवले के तेल की शीशी नज़र आई। मैंने तेल की शीशी उठा कर उसकी चूत के छेद पर डाल दिया। तेल की ठंडी धार उसकी चूत पर गिरी, और वो सिहर उठी। चूत में तेल लगाने के बाद मैंने अंदर उंगली डाली। इस बार मेरी उंगली आराम से अंदर चली गई… पर वो चिल्लाने लगी — “आह… दर्द हो रहा है…”
मैंने उंगली को अंदर बाहर करना चालू कर दिया। कुछ देर बाद वो उंगली के मज़े लेने लगी। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, उसके कूल्हे हिलने लगे। फिर मैंने लंड घुसेड़ना चालू किया, पर वो जा ही नहीं रहा था। मेरा लंड — 6 इंच लंबा और मोटा — उसकी कुंवारी चूत में नहीं जा पा रहा था।
मैंने उसकी दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और फिर से घुसाया। इस बार मेरा लंड एक इंच ही अंदर गया होगा कि वो रोने लगी। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे, और मैंने लंड घुसाना छोड़ कर उसे किस करना जारी रखा। उसके आँसू पोंछे, उसके माथे को चूमा।
कोई 5 मिनट बाद वो थोड़ी सही हुई, तो मैंने एक ज़ोर का झटका दे मारा। इस बार मेरा आधा लंड अंदर चला गया। वो रोने लगी और गिड़गिड़ाने लगी। साक्षी कराहते हुए कहने लगी — “प्लीज़ मुझे छोड़ दो… मैं मर जाऊँगी।”
मैं डर गया और रुक गया। कुछ देर उसको फिर से चूमने चाटने के बाद मैंने फिर से झटका मारा, तो इस बार मेरा पूरा लंड अंदर चला गया। वो बहुत तेज़ रोने लगी और चिल्लाने लगी… पर मैंने इस बार उसकी एक न सुनी और झटके मारता रहा… वो रोती रही।
करीब दो मिनट बाद उसकी हालत मुझे थोड़ी सही लगी। अब वो मेरा साथ देने लगी थी। हम दोनों धकापेल चुदाई करने लगे। आधे घंटे की चुदाई में वो दो बार झड़ चुकी थी। उसकी चूत से रस बह रहा था, और मेरा लंड अभी भी खड़ा था।
दो बार चोदने के बाद भी मेरा लंड खड़ा ही था। वो दर्द में थी इसीलिए मैं उसकी चूत चाटने लगा ताकि उसका दर्द कम हो जाए और मैं 69 पोज़िशन में आकर अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। धीरे-धीरे वो मेरा लंड चूसकर उसने मेरे लंड की प्यास बुझा दी। फिर हम दोनों लिपट कर सो गए।
भाग 2: हनीमून, प्रेगनेंसी और पुणे में इंतज़ार
मैंने उसे गोवा हनीमून पे ले जाकर 10 दिनों तक उसको खूब तड़पाया था। गोवा के बीच पर, समुद्र की लहरों के बीच, हमारी चुदाई का दौर चलता रहा। दस दिनों तक मैंने उसे पैंटी नहीं पहनने दिया था — वो सिर्फ साड़ी या स्कर्ट में रहती, और मैं जब चाहता उसकी चूत को छू लेता। जब मैं उसे नहीं चोदता, मैं उसकी चूत में ऊँगली डालकर सहलाते रहता और उसको प्यार करता रहता था। मैं रोज़ दिन में उसे गोवा के समुद्र के बीच पर ले जाकर गोद में बैठाकर उसकी चूत ऊँगली से चोदता और फिर उसे बेडरूम में लाकर जबरदस्त चुदाई करता था। उसे चोदने के बाद मैं उसको अपना लंड खूब चुसाता।
दस दिन की लगातार चुदाई के बाद वो प्रेगनेंट हो गई थी। जब उसने मुझे बताया, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा — मैं बाप बनने वाला था। वो प्रेगनेंसी के दौरान घर ही रहना चाहती थी। उसके मम्मी-पापा का घर भी नज़दीक ही था, वो लोग भी मिलने आ जाते थे।
मैं जॉब के लिए पुणे आ गया। मेरी नौकरी के कारण मैं उसके पास नहीं जा पाया। मैंने इस साल बहुत छुट्टी पहले ही ले ली थी, इसलिए मजबूरी थी। हर रात मैं उसे याद करता, उसकी तस्वीरें देखता, और सोचता कि कब मैं उसे फिर से अपनी बाहों में भर लूँगा।
मैं साक्षी के बच्चे का बाप बन गया था। साक्षी की डिलीवरी के बाद एक बार उसने कहा — “मैं तुम्हारी बच्ची की माँ बन गई हूँ। तुमने मेरा सपना सच कर दिया है। अब मैं तुम्हारा सपना सच करूँगी। जैसे ही मैं वापस आती हूँ, फिर तुम जितना चाहे दूध पी लेना और साथ ही मेरी गांड भी अब तुम्हारी अमानत है, तो तुम उसे भी मार सकते हो।”
यह सुन कर तो मेरे लंड के मुँह से पानी निकल कर बाहर आ गया। मैंने अभी तक उसकी गांड नहीं चोदी थी — यह हमारी शादी का आखिरी बचा हुआ राज़ था। एक महीने बाद वो बोली कि वो पुणे आ रही है। मैं साक्षी के पुणे आने का इंतज़ार करने लगा।
शाम को मुझे साक्षी का ख्याल आने लगा कि परसों मैं उसके चूचों से सारा दूध पी लूँगा और फिर उसकी गांड भी मारूँगा। ये सब सोच कर मैं काफी गर्म हो गया था। बस ऐसे सोचते सोचते मैं सो गया। पूरे दिन बस मैं साक्षी के साथ चुदाई की बात ही सोचता रहा था।
कुछ मिनट के बाद साक्षी का कॉल आया — “कहाँ हो… मैं आ गई हूँ।”
मैं रूम के दरवाज़े पर खड़े होकर उसका इंतज़ार करने लगा। वो आई और मैं उसे देखते ही स्माइल करने लगा। उसकी मादक जवानी को देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया। साथ ही साथ लंड मेरे पैंट में तम्बू बनाकर खड़ा हो गया था। हमारी लड़की अभी सोई थी।
भाग 3: साक्षी की चुदाई – दूध से भरी चूचियाँ और ब्रेस्ट मिल्क सेक्स
फिर वो जैसे ही मेरे करीब आई, मैंने झटके से उसे अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया। साक्षी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी और कहने लगी — “अरे अरे आराम से यार… मैं अभी-अभी तो आई हूँ। थोड़ा रुको, बैठने तो दो।”
मगर मैंने उसे ज़ोर से अपनी बाँहों में भर लिया और उसके होंठों को चूसने लगा। फिर बोली — “रुको बाथरूम से आती हूँ।” वो एक घंटे बाद बाथरूम से नहाकर और साड़ी पहनकर आ गई। मैं समझ गया कि आज तैयारी करके आई है।
मैंने फिर से उसे ज़ोर से अपनी बाँहों में भर लिया और उसके होंठों को चूसने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी। मैंने किस करते करते उसकी एक चूची दबा दी। उसके मुँह से “आह्ह” की आवाज़ निकली जो मेरे होंठों में दब गई।
फिर मैंने जल्दी से उसका ब्लाउज खोलना शुरू कर दिया। साक्षी की चूचियाँ भर गई थीं और उसके भरे हुए आमों से दूध की सुगंध आ रही थी। उसकी गांड भी बड़ी हो गई थी — डिलीवरी के बाद औरतों का शरीर और भी भर जाता है। साक्षी के बदन से दूध की खुशबू से मेरा लंड और कड़क हो गया और मेरी पैंट में ही उसमें से पानी आना शुरू हो गया था।
मैंने जल्दी-जल्दी उसका ब्लाउज खोला और उसकी एक चूची को मुँह में ले लिया। वो भी मस्त हो गई। मैं ज़ोर-ज़ोर से उसके एक दूध को पीने लगा। जैसे ही साक्षी का चूचुक मेरे होंठों में दबा, मैंने ज़ोर से मींज दिया। उसके मुँह से “आह आह… धीरे राजा” निकला और मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया।
उसकी चूची को मुँह में दबा कर चूसते हुए पीछे बिस्तर पर गिर गया। अब मैं साक्षी को अपने ऊपर लिए लेटा हुआ था और जैसे ही मैंने उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर खींचा, साक्षी के मुँह से फिर से “आह सस्स… मर गई” की आवाज़ निकली और वो मेरे बालों में हाथ घुमाते हुए मुझे दूध पिलाने लगी।
मैं भी उसकी चूची को पूरा मुँह में लेकर दोनों निप्पल्स को बारी-बारी से काटने लगा था। साक्षी “आह इस्स…” करने लगी और मेरे मुँह में साक्षी की चूची से दूध की धार आने लगी। औरत का दूध टेस्ट में बहुत मस्त लगता है — हल्का मीठा, पीले रंग का, और थोड़ा गाढ़ा। मुझे अपनी लाइफ में ऐसा अनुभव आज पहली बार हो रहा था, तो मैं और ज़ोर से साक्षी की चूचों को अपने मुँह में अंदर लेकर ज़ोर से चूस काट रहा था।
जितनी तेज़ी से मैं दूध खींचता, उतनी ही तेज़ी से उसकी चूची से दूध की धार मेरे मुँह में आने लगती थी। साथ ही साक्षी की “आह आह इस्स्स…” की तेज़ और कामुक सिसकारियाँ निकलने लगती थीं। साक्षी ने मुझसे कहा — “आह इस्स… थोड़ा धीरे… मैं कहाँ भागी जा रही हूँ।”
लेकिन मैं था कि साक्षी के चूचों की खुशबू और निप्पलों से निकलते दूध को पीने में एकदम खो सा गया था। मुझे अपनी जवानी में इतने दिनों के बाद ऐसा सुख पहली बार अनुभव हो रहा था। मैं और ज़ोर-ज़ोर से साक्षी की चूची को अपने मुँह में और अंदर तक खींच लेता और ज़ोर-ज़ोर से निप्पल को अपने होंठों में दबा कर अंदर भींच लेता। इससे चूची से ज़्यादा दूध अंदर आ जाता।
अब साक्षी भी इतना ज़्यादा गर्म हो गई थी कि उसने मेरी शर्ट के बटन खोले और मेरे सीने पर हाथ घुमाने लगी। धीरे-धीरे उसका हाथ मेरी पैंट में चला गया। मैंने भी उसकी चूची चूसते चूसते उसे पैंट खोलने का इशारा किया। उसने मेरा कमर का बेल्ट खोला और मेरे पैंट के हुक निकाल कर मेरी ज़िप खोल दी। मेरा लंड तो पहले से पैंट में खड़ा था।
साक्षी ने देखा कि मेरे लंड के मुँह से पानी मेरी अंडरवियर पर लगा हुआ है, तो वो ये देख कर हँसने लगी। वो कहने लगी — “लगता है मेरी चूची से निकलता दूध देख कर तुम्हारे केले के मुँह में पानी आ गया है।” ये सुन कर मैं मुस्कुराने लगा और मैंने उसी वक्त ज़ोर से साक्षी के निप्पल को काट लिया।
मैं इतनी ज़ोर से चूचे चूस रहा था कि तीन बार अंदर तक चूची खींचने से साक्षी का दूध मेरे मुँह में पूरा भर जाता था। उधर साक्षी भी मेरे लंड को हाथ से मसल रही थी और मैं उसकी चूची चूस रहा था।
दस मिनट के बाद शायद उसकी चूची से दूध आना बंद हो गया था। मैंने साक्षी से पूछा — “दूध क्यों नहीं निकल रहा है?” तो साक्षी हँस कर बोली — “लगता है इस वाली चूची का दूध खत्म हो गया है। जिस तरह से तुम दूध पी रहे थे, मुझे लगा था कि अब तुम कहीं मेरी चूची को ही न खा जाओ। तुम दूसरा वाला पी लो।”
फिर साक्षी ने कहा — “मैं भी तो प्यासी हूँ। मुझे भी अब तुम्हारे लंड का रस पीना है। कब से तुम अकेले ही मज़ा ले रहे हो।”
मैंने कहा — “ठीक है।” मैं उसकी चूची से मुँह हटा कर उठा और अपनी पैंट उतार दी। उसने कहा तो मैंने अपनी शर्ट भी उतार कर बाजू में रख दी। उधर से साक्षी भी अपनी साड़ी उतार चुकी थी और अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल रही थी। अब साक्षी मेरे सामने सिर्फ चड्डी में थी। उसने अपनी लाल रंग की चड्डी उतारी तो मैंने देखा कि उसकी चूत थोड़ी साँवली सी हो गई थी।
फिर वो बेड पर आ गई और मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया और किस करने लगा। वो भी ज़ोर-ज़ोर से मेरे होंठों को किस करने लगी। मैं किस करते करते उसको ज़ोर से गले से लगा कर उसकी चूचियों को अपने सीने पर गड़ता हुआ महसूस कर रहा था। साथ ही मैं उसकी गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था।
फिर साक्षी से न रहा गया तो वो सीधा मेरे लंड पर आ गई और उसने मेरे लंड की चमड़ी को पीछे कर दिया। लंड खुल गया था तो उसने लंड को सीधा मुँह में ले लिया। मैं अपना हाथ उसके सर पर रख कर उसके मुँह को अपने लंड पर दबा रहा था। साक्षी भी मस्ती से लंड चूस रही थी।
फिर साक्षी ने कहा — “अब मैं भी और ज़्यादा रुक नहीं सकती। अब तुम सीधा बेड पर लेट जाओ। मैं तुम्हारे ऊपर तुम्हारे लंड पर आकर बैठ जाती हूँ और तुम मुझे चोदते हुए मेरी चूची से दूध पी लो।”
साक्षी मेरे खड़े लंड के ऊपर आ गई। उसने अपनी चूत में लंड सेट कर लिया और बैठ गई। वो चूत फँसा कर मेरे मुँह की तरफ अपनी चूचियाँ लटका कर झुक गई। मैंने जल्दी से उसकी एक चूची मुँह में भर ली और उसे पीने लगा। लेकिन उसकी चूची से अभी भी कम दूध ही निकल रहा था। मैं समझ गया कि शायद मैंने ये वही वाली चूची मुँह में ले ली है, जिसे मैंने पहले खाली किया था। फिर मैंने दूसरी चूची को मुँह में ले लिया।
उधर साक्षी मेरे लंड को अपनी चूत में रख कर उस पर अपनी कमर हिलाकर लंड की रगड़ से चूत की खुजली मिटा रही थी। उसकी आँखें मस्ती में बंद थीं। एक तरफ उसकी चूत में मेरा मोटा लंड मज़ा दे रहा था और दूसरी तरफ मैं उसकी चूची चूसकर उसके आनंद को चौगुना कर रहा था।
अपनी चूत में पूरा लंड लेते ही साक्षी की मादक कराहें निकलने लगी थीं — “आह राजा इस्स्स…” कुछ ही पलों में साक्षी की चूत से रस छूटने लगा था, जिससे अब मुझे फच-फच की आवाज़ आ रही थी। साक्षी झड़ गई और मेरे लंड पर निढाल बैठी रही। हम दोनों पसीने से भीग गए थे।
कुछ देर बाद उसने मुझसे आसन बदलने का इशारा किया। मैं रुक गया और मैं साक्षी से कहा — “अब तुम घोड़ी बन जाओ। अब मैं सीधा तुम्हारी गांड में लंड पेल कर गांड मारना चाहता हूँ। मुझे अपने लंड का सारा माल भी तुम्हारी गांड में ही डालना है।”
भाग 4: साक्षी की कुंवारी गांड चुदाई – तेल, उंगली और लंड का पहला प्रवेश
ये सुनकर साक्षी मेरे लंड से उतर कर बाजू हो गई और घोड़ी की तरह गांड ऊपर करके झुक गई। उसकी गांड — गोल, मोटी, और चिकनी — हवा में थी, और उसकी चूत अभी भी पिछली चुदाई से गीली और सूजी हुई थी। उसकी साँसें तेज़ थीं, और मैं देख सकता था कि वो थोड़ी डरी हुई थी, लेकिन साथ ही उत्तेजित भी थी। यह पहली बार था जब कोई मर्द उसकी गांड चोदने वाला था — और वो मर्द मैं था, उसका बचपन का दोस्त, उसका पति, उसकी बच्ची का बाप।
मैंने पास पड़ी अपनी पैंट की जेब से तेल की बॉटल निकाली और साक्षी की गांड के छेद पर तेल की शीशी का मुँह लगा दिया। तेल की धार गांड में जाने लगी — ठंडा, चिकना, और भरपूर। साक्षी के मुँह से “आह्ह आह…” की मधुर ध्वनि आने लगी। उसका शरीर सिहर उठा, और उसने अपनी गांड को थोड़ा और ऊपर उठाया, मानो तेल को और अंदर जाने का न्योता दे रही हो।
फिर मैंने जैसे ही उसकी गांड के छेद पर अपनी उंगली रखी, उसकी गांड का छेद और टाइट होने लगा। वो छोटी सी गुलाबी कली — जो अब तेल से चमक रही थी — मेरी उंगली के नीचे सिकुड़ गई। मैंने गांड के छेद पर लगा तेल मलते हुए अपनी एक उंगली गांड के अंदर घुसाई, तो साक्षी की “आउच” की आवाज़ आई। उसका शरीर तन गया, और उसने अपने हाथों से चादर को कसकर पकड़ लिया।
“धीरे, राजा… धीरे…” वो फुसफुसाई।
मैंने उसकी बात मानी और थोड़ा सा तेल अपनी घुसी हुई उंगली पर डाला और उसकी गांड के छेद में धीरे-धीरे चलाने लगा। अंदर-बाहर, अंदर-बाहर — मेरी उंगली उसकी गांड की नली को ढीला कर रही थी। उस वक्त साक्षी की आँखें बंद थीं और वो थोड़ी डरी सी लग रही थी क्योंकि मेरा लंड छह इंच लंबा और तीन इंच मोटा था और साक्षी की गांड अभी तक कुंवारी थी। मैंने उसकी गांड में अपनी उंगली को घुमाया, हर कोण से उसके छेद को फैलाने की कोशिश की। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं, और उसके मुँह से हल्की-हल्की कराहें निकल रही थीं।
फिर मैंने साक्षी की गांड से उंगली निकाल कर उस पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा — धप! — तो साक्षी चिहुँक उठी। उसकी गांड का मांस हिल गया, और एक लाल निशान उभर आया। मैंने फिर से थप्पड़ मारा — धप! धप! — और हर थप्पड़ के साथ साक्षी की कराह तेज़ होती गई।
अब मैंने अपने लंड को हाथ से पकड़ कर उसके ऊपर बहुत सारा तेल लगाया। मेरा लंड तेल से चमकने लगा — मोटा, लंबा, और धड़कता हुआ। साक्षी ने लंड देख कर कहा, “प्लीज़… थोड़ा धीरे से करना…”
मैंने कहा, “हाँ मेरी जान, तू डर मत। बस अब तू मेरा लंड अपनी कसी हुई गांड में महसूस कर और मज़ा ले।”
ये कह कर मैंने अपने दोनों हाथों से साक्षी की कमर को पकड़ा। मेरा लंड साक्षी की गांड पर जाकर लग गया था। मैंने सुपारे से उसकी गांड को चूमा — पहले हल्के से, फिर ज़ोर से — और थोड़ा पीछे को सरक कर अपने लंड के सुपारे को साक्षी की गांड पर सेट करने लगा। मेरे लंड का टोपा उसकी गांड के छेद पर दब रहा था, और मैंने महसूस किया कि वो छेद कितना टाइट था।
फिर जैसे ही लंड छेद पर सेट हुआ, मैंने साक्षी की कमर को ज़ोर से पकड़ कर पीछे से अपना लंड अंदर धकेलने लगा। पर लंड पर ज़्यादा तेल होने के कारण वो इधर-उधर फिसल रहा था। मैंने एक हाथ से साक्षी की कमर को पकड़ा और एक हाथ से अपने लंड के सुपारे को साक्षी की गांड के छेद पर दबाने लगा। साक्षी की साँसें बढ़ गई थीं और धीरे-धीरे से वो अपनी गांड मेरी पकड़ से आगे को ले लेती क्योंकि वो थोड़ा सा डर रही थी।
“राजा… प्लीज़… डर लग रहा है…” उसने फुसफुसाकर कहा।
“श्श्श्श… आराम कर… मैं हूँ ना…” मैंने उसकी पीठ को सहलाते हुए कहा।
मैं अपना लंड उसकी गांड के छेद पर दबा कर अंदर घुसाने लगा। जैसे ही मेरे लंड के आगे का हिस्सा साक्षी की गांड में घुसा, उसके मुँह से “आह आह… मर गई…” निकली। वो गांड आगे करके लंड निकलने के लिए छटपटाने लगी। सच में साक्षी की गांड बहुत ज़्यादा टाइट थी। मेरे लंड के आगे का टोपा ही बड़ी मुश्किल से अंदर फँस सका था। उसकी गांड की मांसपेशियाँ मेरे लंड के टोपे को ऐसे जकड़ रही थीं जैसे कोई शिकंजा हो।
साक्षी ज़ोर-ज़ोर से आह भरने लगी और आगे की तरफ झुकने लगी। वो दर्द से बोली, “प्लीज़ निकाल लो ना… मेरी गांड में दर्द हो रहा है। तुम मेरी चूत जितनी चाहे, उतनी चोद लो, मैं कुछ नहीं बोलूँगी। तुम जैसे चाहो वैसे चूत को चोद दो, लेकिन गांड से निकालो ना… बहुत मोटा लंड है तुम्हारा… मुझे दर्द हो रहा है।”
लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने अपने दोनों हाथों से साक्षी की कमर को ज़ोर से पकड़ा हुआ था और उसे समझाने में लगा था, “बस अब हो गया। मेरा लंड अंदर चला गया है, अब कुछ नहीं होगा, बस मज़ा आएगा। मैं धीरे-धीरे से तुम्हारी गांड में लंड अंदर-बाहर करता हूँ, तो तुम्हें भी बहुत मज़ा आएगा। तुम बस थोड़ी देर के लिए मेरा साथ दो और मज़ा लो।”
ये कह कर मैं साक्षी की गांड के ऊपर प्यार से हाथ घुमाने लगा और धीरे से अपना लंड साक्षी की गांड के अंदर पेलने लगा। साक्षी दर्द से तड़प रही थी — “आहा आआह… निकाल लो… बहुत दर्द हो रहा है।” लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और ज़ोर से एक झटका उसकी गांड में दे मारा।
इस बार करीब-करीब मेरा पूरा लंड साक्षी की गांड में घुस गया था। साक्षी के मुँह से “आह… मर गई… मेरी फट गई… आह… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो न प्लीज़…” निकलने लगा था। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, और उसका शरीर काँप रहा था। लेकिन मैंने साक्षी की गांड को ज़ोर से पकड़ कर रखा था क्योंकि मैं जानता था कि अगर इस बार मैंने साक्षी की गांड में पूरे ज़ोर से अपने लंड को डालूँगा तो वो ये धक्का सहन नहीं कर पाएगी और गांड आगे सरका कर लंड बाहर निकाल देगी। उसके बाद ये मुझे गांड मारने का मौका नहीं देगी।
वो चिल्लाती रही और मैंने ज़ोर से लंड को गांड में पेल दिया। दोस्तों, आपको क्या बताऊँ, लेकिन मेरा लंड साक्षी की गांड में सच में फँस सा गया था क्योंकि साक्षी की गांड कुँवारी थी और बहुत ज़्यादा टाइट थी। मेरे मोटे लंड के गांड में पेलने से साक्षी को दर्द बहुत ज़्यादा हो रहा था और उसकी आँखें भर आई थीं। वो मेरी पकड़ से छूटने के लिए छटपटा रही थी, लेकिन मैंने उसे बहुत ज़ोर से पकड़ा हुआ था।
मैंने साक्षी के ऊपर लेटे हुए ही उसकी गर्दन को किस करना शुरू कर दिया और साथ ही साथ उसके कान की लौ को चूसना शुरू रखा। मैंने उसके कान में फुसफुसाकर कहा, “आई लव यू, साक्षी… तुम मेरी हो… बस मेरी…” इससे साक्षी कुछ शांत होने लगी और गर्म-गर्म आहें भरने लगी। अब वो अपनी आँखें बंद करके गांड को हिला रही थी। ये देख कर मुझे भी लगा कि साक्षी का दर्द खत्म होने लगा है।
कुछ ही देर बाद वो थोड़ी गर्म भी हो गई थी, तो सही मौका देख कर मैंने भी धीरे-धीरे अपना लंड गांड में पेलना शुरू कर दिया। साक्षी अपने मुँह से “स्स्स आह…” करने लगी और वो भी नीचे गांड उठा कर मेरे लंड को अपनी गांड में लेने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर ऐसे ही मैं उसकी गांड के ऊपर चढ़ा रहा और अपना लंड उसकी गांड में पेलता रहा, सेक्स का मज़ा लेता रहा। फिर मैंने बाजू की दीवार में लगे आईने में साक्षी और अपने नंगे बदन को एक-दूसरे से लगा हुआ देखा, तो मुझे सेक्स का नशा चढ़ने लगा। मैंने साक्षी को शीशा देखने को कहा और उससे अपनी गांड उठाने को कहा। मैं उसकी एक चूची को मसलने लगा। साक्षी भी थोड़ा खुल गई थी और उसके ऊपर भी सेक्स का नशा चढ़ गया था।
फिर मैंने साक्षी को डॉगी स्टाइल से थोड़ा और नीचे झुकाया और उसकी गांड में लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। बीच-बीच में मैं गांड और लंड में तेल टपकाता जा रहा था। इससे मुझे और उसे हम दोनों को ही बहुत मज़ा आ रहा था। उसकी गांड अब मेरे लंड को आसानी से ले रही थी, और हर धक्के के साथ साक्षी की कराहें तेज़ होती जा रही थीं।
मैं साक्षी के ऊपर चढ़ा था और उसकी गांड में लंड पेल कर उसके नंगे बदन को रौंद रहा था। उसकी गांड मारने के साथ ही मेरा एक हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी चूत के ऊपर दाने को सहला रहा था। उस वक्त मेरा एक हाथ साक्षी के गले को पकड़ कर उसके कंधे को चूम रहा था। मैं ये गर्मागर्म सीन आईने में देख कर मज़ा ले रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई नाग अपनी नागिन को पीछे से चोद रहा हो और वो दोनों मदहोश हो कर चुदाई का मज़ा ले रहे हों।
हम दोनों दस मिनट तक ऐसे ही चुदाई करते रहे। अब तक मेरा हाथ साक्षी की चूत को सहलाते हुए पूरा गीला हो गया था। उसकी चूत से लगातार कामरस बह रहा था। उसकी कामुक आवाज़ें मुझ पर सेक्स का नशा चढ़ाती जा रही थीं। मैं कुछ और ज़ोर से साक्षी की गांड मारने लगा और साक्षी भी अपनी तरफ से कुछ और ज़्यादा गांड उछाल-उछाल कर साथ देने लगी।
दो ही मिनट के बाद मेरा लंड अपने चरम पर आ गया था और अब लंड से रस साक्षी की गांड में कभी भी छूटने वाला था। मैंने साक्षी से कहा, “अब मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है। मैं तुम्हारी गांड में आज सारा लावा छोड़ना चाहता हूँ।” साक्षी ने हामी भर दी — “हाँ… हाँ… मेरी गांड में डाल दो… सब भर दो…”
बस दस-एक झटके लगाने के बाद मेरा लंड साक्षी की गांड में रस छोड़ने लगा। साक्षी भी ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड पर अपनी गांड आगे-पीछे करने लगी। मेरा वीर्य — गर्म, गाढ़ा, और बहुत सारा — उसकी गांड में भर गया। लंड रस निकल जाने के बाद भी साक्षी की गांड का छेद मेरे लंड को बहुत टाइटली कसे हुए था। मैं ऐसे ही साक्षी के बदन के ऊपर ढेर हो गया। साक्षी की और मेरी दोनों की साँसें तेज़-तेज़ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
भाग 5: गांड में माल, बाथरूम में पेशाब से नहाना और सुबह का प्यार
ऐसे ही मैं साक्षी की गांड में अपना लंड फँसाए हुए बिस्तर पर लुढ़क गया। मैंने साक्षी को अभी भी अपनी बाँहों में जकड़ा हुआ था। मैं अपनी पीठ के बल बिस्तर पर लेट गया और साक्षी मेरे ऊपर आ गई थी। अभी भी मेरा लंड साक्षी की गांड में ही था — अब मुरझा रहा था, लेकिन फिर भी उसकी गर्माहट में धड़क रहा था।
मैंने साक्षी की गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया और साथ ही साथ अपने हाथ को उसकी चूत के ऊपर फेरने लगा। मैंने महसूस किया कि साक्षी की चूत बहुत ज़्यादा झड़ी थी और मेरी उंगलियाँ बहुत ज़्यादा चिपचिपी हो गई थीं। ऐसे ही साक्षी की चूत में मैंने अपनी उंगली फिर से घुसा दी तो साक्षी के मुँह से मादक “आह” निकल गई।
मैं नीचे से साक्षी की गांड में अपना फँसा हुआ लंड ढीला होता देख रहा था। लंड पर लगा हुआ कामरस धीरे-धीरे निकल रहा था। कामरस मेरे लंड से मेरे लंड की गोलियों से होता हुआ मेरी जाँघों में जाता हुआ मुझे साफ महसूस हो रहा था।
फिर साक्षी ने कहा, “जान… अभी मुझे थोड़ा छोड़ो। मैं इसे साफ करके आती हूँ। ये कुछ ज़्यादा ही टपक रहा है।”
मैंने उसे गोद में उठा लिया और उसे बाथरूम में ले गया। बाथरूम की गर्म रोशनी में, हम दोनों नंगे खड़े थे — हमारे शरीर पसीने और कामरस से चमक रहे थे। मैंने शॉवर चालू किया और गर्म पानी की धार हम दोनों पर गिरने लगी। मैं नहाते हुए उसे चूमने लगा और प्यार करने लगा। उसके होंठ, उसकी गर्दन, उसके स्तन — मैंने सब कुछ चूमा।
मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। साक्षी की नंगी बदन को गीला देखकर, उसके स्तनों से पानी टपकता देखकर, मेरा लंड एक बार फिर सख्त हो गया। मैंने उसे दीवार में चिपकाकर फिर फर्श पर लिटाकर दो बार उसकी गांड चुदाई की। इस बार वो चिल्लाई नहीं — बल्कि उसने अपनी गांड को मेरी तरफ धकेला और मेरे हर धक्के पर कराहती रही। उसकी गांड अब मेरे लंड की आदी हो चुकी थी।
उसकी चूत बहुत ही ज़्यादा उत्तेजित थी तो मैं उसे खुश करने के लिए चूत को चाटने लगा। वो खड़ी थी और मैं उसके नीचे था — मेरे घुटने बाथरूम के गीले फर्श पर, मेरा मुँह उसकी चूत पर। मैंने उसकी चूत के होंठों को अपनी जीभ से अलग किया, उसकी क्लिट को चूसा, और उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ डाली। साक्षी की कराहें बाथरूम में गूँज रही थीं।
जैसे ही उसका पानी निकलने वाला था, उसने मेरे मुँह को अपनी जाँघों में जकड़ लिया और पहले तो अपना सारा माल मेरे मुँह पर छोड़ दिया — गर्म, गाढ़ा, और बहुत सारा — फिर उसने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया और मेरे ऊपर मूतने लगी। उसकी पेशाब की गर्म धार मेरे मुँह पर, मेरे चेहरे पर, मेरी छाती पर गिरी। उसने मूत से मेरे मुँह, चेहरे से लेकर नीचे तक मुझे नहला दिया।
मुझे भी अब पेशाब की तलब हो रही थी। मैंने उसकी तरफ देखा, और वो बिना कुछ कहे समझ गई। वो खुद ही नीचे बैठ गई — अपने घुटनों पर, मेरे सामने। मैंने उसके चेहरे पर मूतने लगा। वो बार-बार मुँह खोल देती थी और मेरे मूत को मुँह में ले रही थी। उसकी आँखें बंद थीं, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। फिर जब मैंने मूतना बंद कर दिया, तो उसने मेरे लंड को चाट-चाट कर अच्छे से साफ कर दिया — हर बूँद, हर कोना।
फिर हम दोनों नहाकर बेडरूम में आ गए। हमारी बच्ची भी जग चुकी थी। उसकी नन्ही-नन्ही आँखें खुली हुई थीं, और वो अपने पालने में हाथ-पैर चला रही थी। साक्षी ने उसे उठाया और अपनी गोद में ले लिया। वो बच्ची को दूध पिलाने लगी — वही चूची जिसे मैंने कुछ देर पहले चूसा था, अब हमारी बेटी को दूध दे रही थी।
मैं बिस्तर पर लेटा हुआ ये सब देख रहा था, और मेरी आँखों में आँसू आ गए। मैं बहुत खुश था कि मेरी बचपन की दोस्त — वही साक्षी जिसके साथ मैंने गलियों में खेला था, जिसे मैंने पहली बार स्कूल यूनिफॉर्म में देखा था, जो मुझे चुम्मा के अलावा कुछ नहीं करने देती थी — अब मेरी बच्ची की माँ बन गई थी। और वो मुझे पहले से भी ज़्यादा प्यार देने लगी थी।
बचपन की दोस्त साक्षी की चुदाई — ये सिर्फ एक चुदाई नहीं थी। ये हमारे प्यार का, हमारे भरोसे का, और हमारे रिश्ते की गहराई का सबूत थी।