सुहागरात की पहली रात में सील तोड़ना: दीपक और प्रीति की गरम कहानी

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सुहागरात की पहली रात में सील तोड़ना – यह कहानी है एक नवविवाहित जोड़े की सुहागरात की। दुल्हन का रंग दूध से भी गोरा था, बड़ी-बड़ी काली मदमस्त आंखें, गुलाबी होंठ और सेक्सी फिगर। वह सुहाग की सेज पर किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। लेकिन क्या होता है जब एक दुल्हन पहली बार अपने पति का 7 इंच का मोटा लंड अपनी टाइट चूत में लेती है? सुहागरात की पहली रात में सील तोड़ना आसान नहीं होता – दर्द, खून, और फिर चरम सुख का मिलन। क्या वह दर्द सहन कर पाएगी? क्या पति उसकी सील तोड़ पाएगा? जानने के लिए पति पत्नी की इस गरम सुहागरात हिंदी सेक्स स्टोरी को अंत तक ज़रूर पढ़ें।

भाग 1 – मुलाकात और शादी से पहले की कहानी

मेरा नाम दीपक है। मैं एक आम सा लड़का हूं, लेकिन मेरी जिंदगी में एक दिन ऐसा आया जब सब कुछ बदल गया। वो दिन था जब मैंने प्रीति को पहली बार देखा। वो मेरे कॉलेज में नई आई थी और जैसे ही मैंने उसे देखा, मेरा दिल धड़कना भूल गया।

प्रीति का रंग दूध से भी गोरा था, इतना गोरा कि छूने से मैली हो जाए। बड़ी-बड़ी काली मदमस्त आंखें, गुलाबी होंठ, हल्के भूरे रंग के लंबे बाल, बड़े-बड़े गोल-गोल चूचे। नरम चूतड़, पतली कमर, सपाट पेट, पतला छरहरा बदन और फिगर 36-24-36 का था। उनकी आवाज़ मीठी कोयल जैसी थी। उसे देखते ही मुझे प्यार हो गया।

धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी, फिर प्यार हुआ, और फिर हमने शादी करने का फैसला किया। हम दोनों के परिवार वाले भी हमारी शादी के लिए राजी हो गए। शादी से पहले हमने एक-दूसरे को कभी नहीं छुआ था। प्रीति ने शादी से पहले कोई भी शारीरिक संबंध बनाने से मना कर दिया था, और मैंने उसकी इज्जत की। मैं चाहता था कि उसकी पहली रात बहुत खास हो।

भाग 2 – सुहागरात की रात और दुल्हन का स्वागत

आखिरकार वो दिन आ गया – हमारी शादी का दिन। सारी रस्में पूरी हो गईं और अब वक्त था सुहागरात का। वो सुहाग की सेज पर सजी-धजी गहनों और फूलों पर बैठी थीं। आज प्रीति किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं। उन्होंने गुलाबी रंग का लहंगा और ब्लाउज पहना हुआ था और ऊपर लंबी सी ओढ़नी का घूंघट किया हुआ था।

मैं शादी के बाद अपने कमरे में आया। कमरा बहुत खूबसूरती से सजाया गया था। हर तरफ गुलाब के फूल थे, मोमबत्तियां जल रही थीं, और हल्की रोशनी में पूरा कमरा रोमांटिक लग रहा था। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था।

मैं थोड़ा सा आगे होकर बिस्तर पर बैठ गया और उनके हाथ पर अपना हाथ रख दिया। उनका नरम मुलायम हाथ मखमल जैसा था। प्रीति का गर्म हाथ पकड़ते ही मेरा लंड फुफकार मारने लगा और सनसनाता हुआ पूरा 7 इंच बड़ा हो गया।

प्रीति के दूधिया रंग और उनके गुलाबी कपड़ों के कारण पूरा कमरा तक गुलाबी लगने लगा था। उनकी चमड़ी इतनी नरम, मुलायम, नाजुक और मक्खन सी चिकनी थी कि उनकी फूली हुई नसें भी मुझे साफ़ नज़र आ रही थीं।

मैंने एक गुलाब उठा कर उनके हाथों को छू दिया, वो कांप कर सिमटने लगीं। मैंने कहा – “मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ और आपको पाना चाहता हूँ।” उन्होंने मेरी तरफ एक बार देखा और लाज से अपनी नजरें झुका लीं।

मैंने अपनी जेब से निकाल कर एक हार उनको अपनी शादीशुदा जिंदगी के पहले नज़राने के तौर पर दिया। वो बोलीं – “आप ही पहना दीजिए।” इस जरा सी थिरकन से उनके गहने खड़कने लगे – उनकी झंकार से कमरे में मदहोशी छाने लगी।

भाग 3 – पहला स्पर्श और रोमांटिक पल

मैंने उन्हें हार पहनाया, फिर धीरे से उनका घूंघट उठा दिया। मेरी बीवी बन चुकी प्रीति दूध जैसी गोरी, चिट्टी, लाल गुलाबी होंठ वाली हूर थीं। उनकी नाक पर बड़ी सी नथ एक गजब का खुमार जगा रही थी। मांग में टीका (बिंदिया), बालों में गजरा, उनका मासूम सा चेहरा नीचे को झुका हुआ था। ढेर सारे गहनों से और फूलों से लदीं प्रीति अप्सरा सी लग रही थीं।

उनको इतनी सुंदर दुल्हन के रूप में देख कर मेरे मुँह से निकल गया – “वाह… तुम तो बला की क़यामत हो मेरी जान।”

मैंने धीरे से उनके चेहरे को ऊपर किया। प्रीति की आंखें लाज से बंद थीं। उन्होंने आंखें खोलीं और हल्के से मुस्करा दीं।

मैंने बड़े प्यार से प्रीति से पूछा – “क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ?” प्रीति को शर्म आने लगी।

मैंने उसके होंठों पर एक नर्म सा चुम्बन ले लिया और प्रीति के चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके गाल पर किस कर दिया। प्रीति लजाते हुए बोली – “मैं जब से जवान हुई थी, इस दिन का तब से इंतज़ार कर रही थी।” वो ये कह कर शर्माते हुए सिमट कर मुझसे लिपट गई।

मैंने प्रीति को अपने गले से लगा लिया और उसकी पीठ पर हाथ फिराने लगा। उसकी पीठ बहुत नरम, मुलायम और चिकनी थी। उसने बैकलेस चोली पहनी हुई थी, जो सिर्फ दो डोरियों से बंधी हुई थी। पहले की तरह उसने अभी भी ब्रा नहीं पहनी हुई थी। मेरे हाथ उसकी पीठ से फिसल कर कमर तक पहुँच गए थे। उसकी नंगी कमर एकदम रेशम सी चिकनी, नरम और नाजुक थी।

भाग 4 – जोश और उत्तेजना का चरम

अब मैंने उसकी ओढ़नी को उसके सीने से हटा दिया और उसे मदमस्त निगाहों से निहारने लगा। मेरे इस तरह से देखने से प्रीति को शर्म आने लगी और वो पलट गई। उसने अपनी पीठ मेरी तरफ कर दी।

मैं आगे बढ़ गया और उसे अपनी मजबूत फौलाद जैसी बांहों में कस कर जकड़ लिया। मैंने अपने होंठ प्रीति की गर्दन पर रखे और उस पर किस करने लगा। उसके शरीर से पसीने और लेडीज परफ्यूम की महक आ रही थी, जो मुझे मदहोश कर रही थी।

मैंने प्रीति के गले पर किस करते हुए अपना मुँह प्रीति के कान के पास किया और कान में कहा – “आई लव यू जान… तू बहुत अच्छी लग रही है… आज मैं अपनी दुल्हन को प्यार करूंगा और तेरी सील तोड़ दूँगा।”

मेरी ऐसी बातों से प्रीति पागल हो गई, उसकी गर्म बांहों में मेरा शरीर जल रहा था।

मैंने प्रीति को अपनी तरफ किया और अपने होंठों को प्रीति के होंठ पर रख दिए और उन्हें चूसने लगा। मैं बहुत जोश में था और प्रीति के होंठों पर ही टूट पड़ा।

प्रीति के सफ़ेद बड़े-बड़े खरबूजे देख कर मेरी तो जुबान रुक गई। प्रीति ने गहरे गले का चोलीनुमा ब्लाउज पहना हुआ था, इसमें से उसकी आधी चुचियां और क्लीवेज झाँक रही थी।

जैसे ही उसकी ओढ़नी सरकी, मैं प्रीति की आधी नंगी चूची को देख कर मस्त होने लगा। मेरा लंड टाइट हो गया।

मैं प्रीति की जांघें और नंगी चूची को टच करने की कोशिश करने लगा। प्रीति को भी एक्साइटमेंट होने लगा। प्रीति भी मेरे सामने ढीली पड़ने लगी।

मैं उसे अपने सीने में चिपका कर उसकी गांड को सहलाने लगा। साथ ही मैंने प्रीति की चोली के अन्दर हाथ डाल दिया और बारी-बारी से उसकी दोनों मस्त चूचियों को दबा दिया। प्रीति की मदभरी सीत्कार निकल गई।

भाग 5 – नंगापन और चॉकलेट का खेल

मैंने बिना कुछ कहे प्रीति को उठा कर अपनी गोद में घसीटा और उसके लिपस्टिक से रंगे होंठों को बिना लिपस्टिक के कर दिया।

प्रीति भी वासना में पागल सी हो गई थी। वो अपने हाथ मेरी गर्दन पर फिराने लगी। मैंने प्रीति की ढलकी हुई ओढ़नी को पूरी तरह से हटा दिया और चोली की डोरियों को खींच कर तोड़ ही डाला।

वह मुझे पागलों की तरह किस करने लगी और मैं भी उसका पूरा साथ देने लगा था। मैं उसके बड़े-बड़े सफ़ेद मम्मे देख कर पागल हो गया था। उसके मम्मे उत्तेजना से एकदम लाल होने लगे थे। चूचियों के ऊपर घमंड से अकड़े हुए उसके चूचुक गुलाबी रंग के थे।

मैंने एक हाथ से उसका एक दूध पकड़ कर जोर से दबा दिया। वह सिसकार उठी – “अहहह… अम्म्म… ऊऊऊ… मम्मम…” प्रीति कहने लगी – “आह… सनम… और जोर से दबाओ।”

मैंने उसकी इस बात को सुनकर चोली की टूटी पड़ी डोरियों को खींच कर अलग किया और उसका लहंगा भी उतार डाला।

एक-एक करके उसके सारे जेवर जल्दी-जल्दी उतार डाले। हम दोनों को पता भी नहीं चला कि मैंने कब प्रीति को नंगी कर दिया। मैंने उसकी सिर्फ नथ रहने दी – नथ मुझे उकसाने लगती है। सिर्फ नथ में प्रीति बहुत सेक्सी लग रही थी।

फिर मैं उसके होंठों को चूमने लगा और वह भी मेरा साथ देने लगी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और वह मेरी जीभ को चूसने लगी। मैंने भी उसकी जीभ को चूसा। मैं प्रीति को बेकरारी से चूमने लगा। चूमते हुए हमारे मुँह पूरे खुले हुए थे, जिसके कारण हम दोनों की जीभ आपस में टकरा रही थीं। हमारे मुँह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था।

कम से कम 15 मिनट तक मैं उसका होंठ किस करता रहा। मुझे इस वक्त उसके तन पर किसी अन्य अंग को छूने या सहलाने का होश ही नहीं था।

फिर अचानक प्रीति ने मेरा हाथ पकड़ा। मैंने अपना हाथ उठा दिया और उसके चूचियों को दबाने लगा। मैं उसके चूचों को बड़ी नजाकत से मसल रहा था। वो भी मेरा साथ देने लगी।

फिर मैंने अपना लाया हुआ गिफ्ट प्रीति को दिया और उसे खोला। उसमें चॉकलेट्स थीं। प्रीति बहुत खुश हो गई, क्योंकि उसे चॉकलेट्स बहुत पसंद थीं।

मैंने एक चॉकलेट का पैकेट फाड़ा, चॉकलेट को अपने मुँह में रखा और अपने मुँह को प्रीति के मुँह के पास लाया। चॉकलेट देख प्रीति के मुँह में पानी आ गया और प्रीति आगे बढ़ कर मेरे मुँह से चॉकलेट खाने लगी।

अब मैंने मुँह से सारी चॉकलेट अपने और प्रीति के मुँह पर लगा दी। मैं प्रीति के मुँह पर लगी चॉकलेट खाने लगा, प्रीति भी मेरे मुँह पर लगी चॉकलेट चाटने लगी, हमने चाट-चाट कर एक दूसरे का मुँह साफ किया।

भाग 6 – चूचियों का दीवानापन और प्यार के निशान

पहले तो मैंने प्रीति के गले पर बेतहाशा किस किया और काट कर निशान सा बना दिया। फिर उसके कंधों पर किस किया और चूस-चूस कर दांत लगा दिए।

वह कराह उठी – “आआह्ह धीरे… मुझको प्लीज काटो मत… निशान पड़ जाएंगे।”

पर मैं कहां रुकने वाला था। मैंने उसके दोनों कंधों पर काट लिया और वहां लव बाईट्स के निशान पड़ गए। फिर मैं उसके गालों पर टूट पड़ा। उसके गाल बहुत नर्म, मुलायम, सॉफ्ट और स्वाद में मीठे थे। वहां भी मैंने दांतों से काटा। वह कराहने लगी – “आअह्ह… आई… ऊह्ह… मर गई… मार डाला… प्लीज प्यार से करो… काटो मत… दर्द होता है।”

उसकी कराह से मेरा जोश और बढ़ जाता।

मैं पूरा सेक्स में डूब चुका था, मैं अपने हाथ उसके पीछे ले गया और उसकी मुलायम नर्म पीठ को कस कर पकड़ लिया। कुछ देर बाद मैंने उसे थोड़ा ऊपर किया और प्रीति की एक चुची पर जानवरों की तरह टूट पड़ा। उसके जैसे निप्पलों को आज तक किसी ने नहीं काटा होगा। अब मैं उसके दाएं निप्पल को चूस रहा था और काट रहा था। जब मैं प्रीति के बाएं निप्पल को चूस और काट रहा था, तब मैं उसकी दाएं तरफ वाली चूची को हाथ से दबोच रहा था। उसकी चूची बहुत फूल चुकी थी।

मैंने बोला – “प्रीति… तू बहुत मीठी है… मैं तुझे खा जाऊंगा।”
प्रीति बोली – “अगर खा जाओगे तो कल किसे प्यार करोगे?”

मेरा सर पकड़ कर प्रीति ने मुझे हटाना चाहा, लेकिन मैं टस से मस नहीं हुआ और दोनों चुची को एक साथ चूसने और काटने लगा।

प्रीति बहुत चीख रही थी – “आआहह… ओमम्म्म… चाटो ना जोर से… सस्स्सस्स… हहा…”

वो और भी ज्यादा मचलने लगी और अपनी गांड को इधर-उधर घुमाने लगी। अब उसकी मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं। वो मेरे लगातार चूसे जाने से तेज स्वर में ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ कर रही थी।

उसके ऐसा करने से मेरे लंड में भी सनसनी होने लगी थी।

प्रीति की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। लेकिन उसकी मदद को आने वाला वहां कोई नहीं था। मीठे दर्द के मारे प्रीति के आंसू निकल आए थे, पर मैं इसकी परवाह किए बिना लगा रहा।

फिर थोड़ी देर के बाद उसका शरीर अकड़ गया और फिर वो झड़ गई।

कुछ देर बाद मैं वहां से हटा। मैंने ध्यान से देखा कि प्रीति की चुचियां फूल गई थीं और उसके नर्म मुलायम स्तन एकदम टाइट हो गए थे। उसके दोनों चूचे सुर्ख लाल हो गए थे। उन पर मेरे दांत के निशान पड़े हुए थे।

जब मैंने उसे रोते हुए देखा, तो मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया और किस करने लगा।

भाग 7 – लंड चूसना और पहली बार का डर

मैंने प्रीति के कान में कहा – “जानेमन, रोती क्यों है, मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगा।”

यह कह कर मैं प्रीति की चुची को सहलाने लगा। मैंने प्रीति के नमकीन आंसू पी लिए और उठ कर अपने कपड़े उतार दिए। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था। मैं प्रीति के करीब आ गया। मैं उसके मुँह के पास अपनी अंडरवियर लाया और उसे नीचे कर दिया।

प्रीति ने अपना चेहरे को ऊपर किया, मेरा लंड 7 इंच लम्बा और तीन इंच मोटा था। वो मेरा मूसल लंड देख कर एकदम से डर गई। वह बोली – “उई माँ… यह तो बहुत तगड़ा है… मुझे तो मार देगा।”
मैं बोला – “नहीं मेरी रानी, यह तुम्हें पूरे मजे देगा… बस आज थोड़ा दर्द होगा, फिर तो तुम इसे छोड़ोगी नहीं।”

मैंने अपने हाथों से प्रीति का मुँह खोला और अपना लंड प्रीति के मुँह में दे दिया। उसके मुँह में मेरा लंड बहुत मुश्किल से गया।

वह लंड निकाल कर सुपारा चाटते हुए बोली – “जब मुँह में इतनी मुश्किल से जा रहा है… तो चूत में कैसे जाएगा?”
प्रीति को काफी डर लग रहा था क्योंकि लंड काफी लम्बा और मोटा था।

मैं बोला – “मेरी रानी फ़िक्र मत करो, तुम्हें लंड बहुत मजे देगा।”
अपना लंड मैं उसके मुँह में आगे-पीछे करने लगा, उसके मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं।

मैं भी अब लंड चुसाई का मजा लेने लगा। चूसने से लंड बिल्कुल लोहे की रॉड की तरह कड़क हो गया था।

भाग 8 – चूत की तैयारी और उंगलियों का खेल

मैंने अब प्रीति की पेंटी नीचे सरका दी, उसकी चूत बिल्कुल नर्म, चिकनी और साफ़ थी, कोई बाल भी नहीं था।

मैंने उसकी चूत को सहलाया तो प्रीति बोली – “अभी ही तुम्हारे लिए साफ़ की है।”

मैंने अपनी उंगली पर थूक लगाया और उंगली चूत के छेद पर रख दी। मैं चूत को गीली करने लगा। मैंने उसको उठाकर उसकी चूत में अपनी एक उंगली पूरी डाल दी। उसकी सिसकारी निकल गई। फिर मैंने एक जोर का झटका दिया, अब मेरी दो उंगलियां उसकी चूत में जा चुकी थीं।

फिर जब मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली आगे-पीछे की, तो वो मेरे लंड को ज़ोर से आगे-पीछे करने लगी और ज़ोर से सीत्कार करने लगी।

वो ज़ोर से चिल्लाई – “उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहह… अब लंड डाल दो… अब और इंतज़ार नहीं होता… आह प्लीज जल्दी करो ना… प्लीज… आहहह…”

इधर मैं प्रीति को उंगली से लगातार चोदे जा रहा था और वो ज़ोर से सीत्कार कर रही थी – “ये तूने क्या कर दिया… आह… अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है… जल्दी से चोद दो… मेरी चूत में आग लग रही है।”
वो ज़ोर-ज़ोर से हांफ रही थी और ‘आहह… एम्म… ओह… डालो ना अन्दर…’ जैसी आवाजें निकाल रही थी।

मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया और फिर से उंगली से जोर-जोर से चोदने लगा। कोई 5 मिनट तक तो मैं ऐसे ही उंगली से चोदता रहा। फिर जब चूत ढीली हो गई तो मुझे लगा कि अब इसका छेद मेरे लंड को झेल लेगा।

अब तक वो भी अब बहुत गर्म हो गई थी और बार-बार बोल रही थी – “अब डाल दो… रहा नहीं जाता।”

भाग 9 – सील तोड़ना – लंड का चूत में प्रवेश

मैंने अपना लंड उसकी चिकनी चुत में डालना चाहा… मेरा लंड फिसल कर बाहर ही रह गया। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और चूत के छेद पर सैट करके उसके दोनों पैरों को फैला दिया। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।

जैसे ही मैंने लंड फंसाया, उसी वक्त मैंने प्रीति की कमर पकड़ कर एक जोरदार धक्का दे मारा। वो एकदम से उछल पड़ी। मगर तब तक मेरे लंड का टोपा चूत में फंस चुका था।

सुहागरात की पहली रात में सील तोड़ना शुरू हो चुका था। मैंने अगले ही पल एक और जोरदार धक्का दे मारा।

पूरा कमरा प्रीति की चीख से भर गया। मैंने रुक कर प्रीति की चुची को दबाना चालू कर दिया। मैंने प्रीति के दर्द की परवाह किए बगैर दूसरा झटका दे दिया। इस बार मैंने अपना दो इंच लंड चूत में घुसेड़ दिया था।

इस बार प्रीति पहले से ज्यादा तेज़ चिल्ला उठी थी। प्रीति के आंसू निकल आए थे।

मेरे रुकने से उसने एक राहत की सांस ली, पर मैं अभी भी कहां मानने वाला था। मैंने फिर एक और जोर से धक्का मारा। इस बार करीब 3 इंच लंड अन्दर घुस गया था।

जैसे ही लंड घुसा… वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी – “आह… मेरी फट गई… आहह… आआअहह… प्लीज़ इसे बाहर निकालो… मैं मर जाऊंगी… उफ़फ्फ़… आहह… आआहह…”

उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे थे, लेकिन मैं नहीं रुका। मुझे लगा मेरा लंड उसकी झिल्ली से टकरा गया था। मैंने अवरोध भी महसूस किया था। मैंने हल्का ज़ोर लगाया, लेकिन लंड अन्दर नहीं जा रहा था।

इधर प्रीति चीखने-चिल्लाने में लगी थी।

मैं प्रीति के अन्दर उस गहरायी में हो रहे उस अनुभव को लेकर बहुत आश्चर्यकित था। वो मेरे लंड को अपनी चुत की दीवारों पर महसूस कर रही थी। एक बार फिर मैं थोड़ा सा पीछे हटा और फिर अन्दर की ओर दबाव दिया। मैंने थोड़ा सा लंड पीछे किया, उठा और फिर से धक्का दिया। ज्यादा गहराई तक नहीं, पर लगभग आधा लंड अन्दर चला गया था। मुझे महसूस हुआ कि मेरे लंड को प्रीति के चुत रस ने भिगो दिया था, जिसकी वजह से लंड आसानी से अन्दर और बाहर हो पा रहा था।

अगली बार के धक्के में मैंने थोड़ा दबाव बढ़ा दिया। मेरी सांसें जल्दी-जल्दी आ जा रही थीं। प्रीति ने अपनी टांगें मेरे चूतड़ों से और बाहें मेरे कंधे पर लपेट दी थीं। उसने अपने नितम्बों को ऊपर की ओर उठा दिया था। मुझे अन्दर अवरोध महसूस होने लगा था। लंड झिल्ली तक पहुँच चुका था। मेरा लंड उसकी हायमन से टकरा रहा था।

जब मेरे लंड ने उसे भेदकर आगे बढ़ना चाहा, तो प्रीति चिल्लाने लगी कि दर्द के मारे मैं मर जाऊँगी।

मैंने पूरी ताकत के एक धक्का लगा दिया। प्रीति की टांगों ने भी मेरे चूतड़ों को नीचे की ओर कस लिया।
प्रीति के मुँह से निकला – “ओह मम्मी… मर गई…”

प्रीति के स्तन ऊपर की ओर उठ गए और शरीर में ऐंठन आ गई। जैसे ही मेरा 7 इंची गर्म… आकार में बड़ा लंड पूरी तरह से गीली हो चुकी चुत में अन्दर घुस गया। फिर अन्दर… और अन्दर वो चलता चला गया… प्रीति की चूत की फांकों को पूरी तरह से चीरते हुए, उसके क्लिटोरिस को छूते हुए मेरा पूरा 7 इंच का लंड अन्दर जड़ तक घुसता चला गया था।

प्रीति की चुत मेरे लंड के सम्पूर्ण स्पर्श को पाकर व्याकुलता से पगला गई थी। उधर मेरे चूतड़ भी कड़े होकर दबाव दे रहे थे। मेरा लंड अन्दर तक जा चुका था।

सुहागरात की पहली रात में सील तोड़ना पूरा हो चुका था। प्रीति अब पूरी तरह मेरी हो चुकी थी।

भाग 10 – दर्ष के बाद सुख और चरमसुख

प्रीति भी दर्द के मारे चिल्लाने लगी थी। वो छटपटा रही थी – “आहहहह… आई… उउउइइइ… ओह्ह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज इसे बाहर निकाल लो… मुझे नहीं चुदना तुमसे… तुम बहुत जालिम हो… यह क्या लोहे की गर्म रॉड घुसा डाली है तुमने मुझमें… आह… निकालो इसे… प्लीज बहुत दर्द हो रहा है… मैं दर्द से मर जाऊंगी… प्लीज निकालो इसे…”

उसकी आंखों से आंसू की धारा बह निकली। मैं उन आंसुओं को पी गया। मैं उसे चूमते हुए बोला – “मेरी रानी, बस इस बार बर्दाश्त कर लो… आगे से मजा ही मजा है।”

प्रीति की चूत बहुत टाइट थी। मुझे खुद से लगा कि मेरा लंड उसमें जैसे फंस सा गया हो, छिल गया हो। मेरी भी चीख निकल गई थी।
हम दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे – “ऊह्ह्हह्ह… मर गए…”

मैंने एक बार फिर पूरी ताकत लगा कर पीठ उठा कर लंड को बाहर खींचने की कोशिश की, लेकिन लंड टस से मस नहीं हुआ। प्रीति की चूत ने मेरा लंड जकड़ लिया था। मैंने बहुत आगे-पीछे होने की कोशिश की, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।

फिर मैंने पूरी ताकत से एक और धक्का लगाया और लंड पूरा अन्दर समां गया और हम दोनों झड़ गए।

मैं प्रीति के ऊपर गिर गया। फिर मैं कुछ देर के लिए उसके ऊपर ही पड़ा रहा। कुछ देर के बाद वो शांत हुई।

मेरा लंड प्रीति की चूत के अन्दर ही था। मैंने चूत पर हाथ लगाया, तो वह सूज चुकी थी। उसकी चूत एकदम सुर्ख लाल हो गई थी।

प्रीति दर्द से कहने लगी – “क्या हुआ?”
मैंने कहा – “झड़ने के बाद भी लंड बाहर नहीं निकल रहा है।”
प्रीति की चूत ने मेरे लंड को जैसे जकड़ लिया था।

प्रीति रोने लगी – “उह्ह… मर गई… मेरी चूत फाड़ डाली और लंड फंसा डाला… जालिम ने मुझे बर्बाद कर दिया… अब तो मैं मर ही जाऊंगी… अब मैं क्या करूंगी…”

कुछ देर बाद जब मुझे लगा कि झड़ने के बाद भी मेरा लंड खड़ा है और प्रीति सुबक रही थी, तो मैंने उसके होंठों से अपने होंठ सटा कर एक जोरदार धक्का मारा और मेरा लंबा और मोटा लंड पूरा अन्दर चला गया। इस बार के झटके से उसकी चीख उसके गले में ही रह गई और उसकी आंखों से तेजी से आंसू बहने लगे। उसके चेहरे से ही लग रहा था कि उसे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने प्रीति को धीरे-धीरे चूमना, सहलाना और पुचकारना शुरू कर दिया।

भाग 11 – प्यार से चुदाई और अंत में संतुष्टि

मैं बोला – “मेरी रानी, डर मत, कुछ नहीं होगा… थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा।”

मैंने उसे लिप किस किया। मैं उसे लिप किस करता ही रहा। वह भी कभी मेरा ऊपर का होंठ चूसती, तो कभी नीचे का होंठ चूसती रही। मैंने उसके होंठों पर काटा, तो उसने मेरे होंठों को काट कर जवाब दिया। वो इस वक्त इस चूमाचाटी में अपना दर्द भूल चुकी थी।

फिर मैं उसके होंठों को चूमने लगा और वह भी मेरा साथ देने लगी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और वह मेरी जीभ को चूसने लगी। मैंने भी उसकी जीभ को चूसा। प्रीति मुझे बेकरारी से चूमने-चाटने लगी और चूमते-चूमते हमारे मुँह खुले हुए थे, जिसके कारण हम दोनों की जीभ आपस में टकरा रही थीं और हमारे मुँह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था।

फिर मैंने उसकी चूची सहलानी और दबानी शुरू कर दी। वह सिसकारियां लेकर मजे लेने लगी। मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत पर अपनी दूसरी उंगली से उसके क्लिटोरिस को सहलाना शुरू कर दिया। प्रीति गर्म होने लगी। धीरे-धीरे चूत ढीली और गीली होनी शुरू हो गई।

मेरे लंड पर चूत की कसावट भी कुछ ढीली पड़ गई। एक मिनट रुकने के बाद मैंने धक्का लगाना शुरू किया।

फिर कुछ देर में ही वो भी मेरा साथ देने लगी। अब उसकी चुदाई में मुझे जैसे जन्नत का मज़ा आ रहा था। तभी प्रीति ने ढेर सारा पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया। चूत अन्दर से रसीली हो गई थी।

लंड को आने-जाने में सहूलियत होने लगी थी।

कुछ ही देर में प्रीति ने फिर से स्पीड पकड़ ली थी। वो फिर से जोश में आ गई थी।

अब वो मजे से चिल्लाने लगी थी – “अहाआअ… राजा… मर गई… आईसीई… और जोर से… और जोर से चोदो… आज मेरी चूत को फाड़ दो… आज कुछ भी हो जाए, लेकिन मेरी चूत फाड़े बगैर मत झड़ना… आआआआ… और ज़ोर से… उउउईईईई माँ… आहहहां…”

उसकी इन आवाजों ने मुझे जैसे जान दे दी हो। मैं पूरी ताकत से प्रीति को चोदने में लग गया। कुछ ही मिनट बाद हम दोनों फिर से चरम पर आ गए थे। मैंने उसकी चूत में ही अपना रस छोड़ दिया।

वो भी एकदम से झड़ कर मुझसे लिपट गई थी।

भाग 12 – सुबह का प्यार और सुहागन बन चुकी दुल्हन

मैं झड़ने के बाद भी उसे किस करता रहा। करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ही साथ में झड़ चुके थे। दो-तीन झटकों के बाद मैंने लंड निकाल लिया।

कुछ देर बाद जब हम लोग उठे और चादर को देखा, तो उस पर खून लगा हुआ था। वो मुस्कुराने लगी और मुझसे चिपक गई। प्रीति मेरी सुहागन बन चुकी थी।

उसने कहा – “तुमने मेरी जिंदगी की सबसे खास रात को और भी खास बना दिया। दर्ष सहना मुश्किल था, लेकिन तुम्हारा प्यार उससे भी बड़ा था।”

मैंने उसे कसकर गले लगाया और कहा – “यह सिर्फ शुरुआत है, मेरी रानी। आने वाली हर रात हम ऐसे ही एक-दूसरे को प्यार करेंगे।”

सुहागरात की पहली रात में सील तोड़ना एक कठिन प्रक्रिया थी, लेकिन अंत में प्यार और विश्वास की जीत हुई। आज प्रीति मेरी पत्नी है और हम दोनों एक-दूसरे के लिए दीवाने हैं।

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