पति पत्नी की रात भर चुदाई: दो महीने बाद मिले दीवाने पति ने चूत और गांड मारी

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पति पत्नी की रात भर चुदाई – ये कहानी कल रात की है, जब दो महीने बाद मैं अपने मायके से वापस अपने घर आई। मेरा नाम सुनीता है और मेरे पति हिमांशु मेरे दीवाने हैं। दो महीने की दूरी ने उनमें इतनी हवस भर दी थी कि उन्होंने मुझसे पहली बार इतनी जबरदस्त चुदाई की कि सुबह मैं ठीक से चल भी नहीं पाई। इस पति पत्नी की रात भर चुदाई कहानी में आप पढ़ेंगे कैसे उन्होंने मेरी चूत में 8 इंच का लंड घुसाया, मेरे स्तनों को जोर से दबाया, मेरे मुँह में वीर्य निकाला, और फिर मेरी गांड भी चोदी।

भाग 1 – दो महीने की जुदाई और वापसी का इंतज़ार

ये कहानी कल रात की है। दो महीनों बाद मैं अपने मायके से अपने घर आई थी। मेरा नाम सुनीता है, और मैं 24 साल की हूँ। मेरा फिगर 36-24-36 का है – बिल्कुल परफेक्ट घंटे के आकार जैसा। मेरा रंग गोरा है, इतना गोरा कि चाँद भी शरमा जाए। मेरे बाल लंबे और काले हैं, और मेरी आँखें काजल से सजी हुई। मेरे पति मेरे दीवाने हैं। शादी के दिन उन्होंने जब मुझे पूरा नंगा किया, तो वो मुझे देखते ही दीवाने हो गए। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं थीं, और उनके मुँह से बस “वाह” निकल पड़ा था। उस दिन से लेकर आज तक, वो मुझसे बेइंतिहा प्यार करते हैं और मेरे शरीर की हर इंच की पूजा करते हैं।

आज तक उन्होंने मुझे कई बार चोदा है – कभी धीरे-धीरे प्यार से, तो कभी जोर-जोर से जुनून से। उनका नाम हिमांशु है, पर मैं उन्हें प्यार से ‘हिम’ कहती हूँ। उनकी उम्र 25 साल है, चौड़े कंधे, गठीला शरीर, और आँखों में वो शैतानी चमक जो मुझे पागल कर देती है। और हमारी शादी को सिर्फ 6 महीने ही हुए हैं – बस छह महीने। हम अभी भी नवविवाहित हैं, हमारे शरीर में अभी भी वो जवानी का जोश है, हमारी रातें अभी भी चुदाई से भरी होती हैं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

4 महीने साथ रहने के बाद ही मेरे पिता की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, और मैं उनकी सेवा करने के लिए मायके चली गई। माँ अकेली थीं, और पिताजी को नर्सिंग की ज़रूरत थी। मेरे पति हिमांशु ने खुद मुझे जाने के लिए प्रोत्साहित किया – उन्होंने कहा, “जाओ, पिताजी की सेवा करो, मैं यहाँ हूँ।” उनकी इस सोच ने मुझे और भी प्यार में डुबो दिया।

मैं 2 महीनों तक मायके में ही थी। दो महीने – यह समय मेरे लिए बहुत लंबा था। मैं अपने पति से बहुत दूर थी, उनके शरीर की गर्मी से, उनके प्यार से, उनकी चुदाई से। हर रात मैं उनके बारे में सोचती हुई सोती थी, अपनी चूत में उनके लंड की कल्पना करती थी, और तकिए में मुँह दबाकर कराहती थी। मेरे पति भी मेरे लिए बहुत तरसते थे। रोज़ शाम को हम फोन पर बात करते थे और वो मुझे बताते थे कि वो कैसे मुझे मिस कर रहे हैं। वो रोज़ फोन करके कहते थे कि जब मैं वापस आऊँगी, तो वो मुझे किस तरह छोड़ेंगे – कैसे वो मेरी चूत चोदेंगे, कैसे मेरी गांड मारेंगे, कैसे वो मुझे पूरी रात जगाए रखेंगे। उनकी बातें सुनकर मेरी चूत गीली हो जाती थी और मैं बेचैन हो जाती थी।

और फिर परसों मैं वापस आ गई। मेरे पति ने मुझे एयरपोर्ट पर लेने आए थे। जैसे ही मैं बाहर निकली, उन्होंने मुझे देखा और उनकी आँखों में एक अलग ही चमक थी – भूखे भेड़िये की तरह। उन्होंने मुझे गले लगाया, इतनी ताकत से कि मेरी साँसें रुक गईं, और मेरे कान में धीरे से कहा, “आज रात तुझे छोड़ूंगा नहीं, सुनीता। तैयार रहना।” उनकी आवाज़ में इतनी हवस थी कि मैं सिहर गई। हम घर आए, थोड़ा आराम किया, और फिर वो काम पर चले गए। मैं पूरे दिन बेचैन रही, सोचती रही कि आज रात क्या होगा।

भाग 2 – शाम की तैयारी और पहला जोश

शाम को उनके काम से आने से पहले, मैं नहाने चली गई। मैंने बाथरूम में जाकर गर्म पानी से अच्छी तरह स्नान किया। मैंने अपने पूरे शरीर को महंगे साबुन से रगड़ा, अपने बालों में शैम्पू लगाया, और अपने शरीर को बिल्कुल चिकना और मुलायम बना लिया। मैं जानती थी कि हिम आज मेरी गांड भी लेंगे – क्योंकि जब मैं मायके में थी, तो उन्होंने फोन पर कई बार कहा था, “जब तुम आओगी, पहले काम तुम्हारी गांड चोदूंगा।” इसलिए मैंने अपनी गांड को भी तैयार कर लिया। मैंने पानी की तेज़ धार से अपनी गांड के छेद को अच्छे से साफ किया। फिर मैंने थोड़ी सी वैसलीन ली और अपनी गांड के छेद पर हल्के-हल्के लगा ली – ताकि जब वो डालें, तो ज्यादा दर्द न हो। मैंने अपनी चूत को भी अच्छे से साफ किया, उसके बालों को संवारा, और हल्का परफ्यूम लगाया।

मैंने एक सॉफ्ट, पीले रंग की साड़ी पहनी – वही साड़ी जिसे पहनकर हिम मुझे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। वह साड़ी बहुत पतली है, उसमें से मेरे शरीर का आकार साफ झलकता है। नहाकर जब मैं बाथरूम से बाहर आई, तो क्या देखती हूँ – हिम बिस्तर पर पहले से बैठे हुए थे। वो शायद कुछ देर पहले ही आ गए थे और कमरे में बैठे मेरा इंतज़ार कर रहे थे। उनकी आँखें चमक रही थीं, और उनके हाथ बेचैनी से अपनी जाँघों को रगड़ रहे थे। जैसे ही उन्होंने मुझे देखा, वो उठे। उन्होंने तुरंत कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया – क्लिक की आवाज़ के साथ। फिर वो मेरे पास आए, मुझे उठाकर दीवार से सटा दिया। मेरी पीठ ठंडी दीवार से लगी हुई थी, और मेरे सामने हिम का गर्म, भारी शरीर था।

उन्होंने मेरे कंधों को मज़बूती से पकड़ लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रखना चाहा। पहली बार ऐसा लगा जैसे वो मुझे चूमने के लिए आई हुई चीज़ को पकड़ रहे हों। उनकी साँसें भारी थीं। मैंने उन्हें रोका – अपने हाथ उनकी छाती पर रखकर थोड़ा सा दूर किया। मैंने कहा, “हिम… रुको थोड़ा…” पर वो मानने वाले नहीं थे। उन्होंने मेरी बात काटते हुए कहा – हिमांशु बोले: “अभी मत रोको मेरी रानी। सुबह से इंतज़ार कर रहा हूँ इस वक़्त का। इतने दिनों बाद तो मिली हो। मैं तड़प उठा हूँ तुम्हारे लिए।” उनकी आवाज़ में एक दर्द था – एक अलग ही तरह का दर्द – जो मैंने कभी नहीं सुना था। मैं पिघल गई।

मैं बोली, “थोड़ी देर रुक जाओ ना। फिर तुम जो कहोगे मैं करूंगी।” पर मेरी बातों का उन पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने अपने अगले शब्द कहे, और वो शब्द मुझे चौंका गए। हिमांशु बोले: “आज तो मैं तुम्हें खा जाऊंगा। तुम्हारी चूत फाड़ दूंगा और गांड मारूंगा। सुबह तक मेरी जान की चुदाई करूँगा।” यह सुनकर मैं शॉक हो गई। क्योंकि ऐसी गंदी, ऐसी हवस भरी, ऐसी जबरदस्त बातें पहले कभी उनके मुँह से सामने नहीं निकली थीं। हाँ, फोन पर उन्होंने चैट करते हुए कहा था – पर सामने आकर, मेरी आँखों में देखकर, पहली बार ऐसा कहा था। मैं समझ गई थी कि आज का हिम कोई और है – आज का हिम दो महीने की भूखा हुआ जानवर है। आज वो मुझे चोद कर ही मानेंगे।

बिल्कुल वक़्त ज़ाया न करते हुए, उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। और इस बार वो कोमल नहीं थे। उन्होंने बड़ी ही बेरहमी से मेरे होठों को दबाया, जैसे वो मुझमें समा जाना चाहते हों। उनकी जीभ ने मेरे दाँतों को धक्का दिया और अंदर घुस गई। वो मेरे होठों का रस पी रहे थे, मेरी जीभ को अपनी जीभ से घेर रहे थे, उसे अपने मुँह में खींच रहे थे और चूस रहे थे। उनके दाँत मेरे निचले होंठ को हल्के से काट रहे थे। मैं पूरी तरह से उनके काबू में थी।

फिर उन्होंने मेरे होठों को छोड़ा और मेरी गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया। उनके होंठ मेरी गर्दन की नसों पर दब रहे थे, और साथ ही उनका एक हाथ मेरे स्तनों पर था – इतनी ज़ोर से दबा रहा था कि मुझे लगा मेरे निप्पल फट जाएंगे। उनकी उंगलियाँ मेरे स्तनों के कोमल मांस को मसल रही थीं, उन्हें कस रही थी, और छोड़ रही थीं। मेरे मुँह से बिना रुके आवाज़ें निकलने लगीं – मैं बोली: “आहह – आअहह – हिम, धीरे करो ना। दर्द हो रहा है। अह्ह्ह – अह्ह्ह – प्लीज़…” मेरी आँखों में पानी आ गया था। लेकिन हिम मानने वाले नहीं थे। उन्होंने और भी जोर से मेरे स्तन दबाए और बोले: “अभी तो शुरूवात है जानेमन। आज तो तुझे खा जाऊंगा। सुनो ना जानू। मैं तुम्हे नंगा देखना चाहता हूँ।”

भाग 3 – नंगा होना और चूत चाटना

उनकी इस डिमांड को मैं मना नहीं कर पाई – उनकी आँखों में वो जुनून था कि जी हुज़ूर करना पड़ेगा। उन्होंने मुझे बेडरूम के बीचों-बीच ले जाकर खड़ा कर दिया। मेरे पैर नीचे जमे हुए थे, पर मेरा दिल तेज़-तेज़ धड़क रहा था। उन्होंने पहले मेरे कंधे से साड़ी का पल्लू खींचकर उतार दिया – रेशम फिसला और एक तरफ गिर गया। फिर वो मेरे पीछे गए और मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगे। एक-एक हुक खुलने की आवाज़ मैं सुन सकती थी। पाँच हुक थे – सब खुल गए। उन्होंने ब्लाउज को मेरे कंधों से खींचकर निकाल दिया। फिर आया ब्रा का नंबर। उन्होंने मेरी ब्रा को भी खींचकर ही निकाल दिया – जैसे वो बहुत गुस्से में हों। ब्रा के कपड़े फटने की आवाज़ आई, पर उन्हें परवाह नहीं थी।

मेरे दोनों गोरे-गोरे, मुलायम, और बड़े स्तन उनके सामने नंगे झूलने लगे। साड़ी पेटीकोट सहित नीचे गिर चुकी थी। अब मैं सिर्फ अपनी पैंटी में थी। हिम मेरे सामने आया और मेरे स्तनों को ताड़ने लगा – जैसे कोई कलाकार अपनी कलाकृति को निहार रहा हो। पहली बार मैंने उनकी आँखों में इतनी तीव्र हवस देखी थी – एक ऐसी हवस जो किसी जानवर को शिकार करते देखो तो उसकी आँखों में होती है। वो मेरे पास आए और अपने दोनों हाथों से मेरे स्तनों को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगे – इतने ज़ोर से कि मैं चिल्ला उठी। “आह्ह्ह!” मेरी चीख से कमरा गूँज उठा। पर हिम को मेरी एक न सुनी। वो अपने मुँह में मेरे स्तनों को लेकर चूसने लगे और फिर मेरे निप्पल को अपने दाँतों से काटने लगे – हल्का नहीं, बल्कि असली वजह से दबाकर। “धीरे करो ना जान… अह्ह्ह – अह्ह्ह्ह… मैं कहाँ भागी जा रही हूँ,” मैं रोती और कराहती रही। पर हिम ने कहा: “आज तो मैं दूध पी कर ही मानूंगा मेरी रानी।”

कुछ देर यूँ ही मेरे स्तनों का मज़ा लेने के बाद, वो पीछे हटे और मेरी साड़ी और पेटीकोट को पूरी तरह खींचकर निकालने लगे। उन्होंने मुझे आगे-पीछे घुमाया, और एक ही झटके में मेरी पूरी साड़ी और पेटीकोट नीचे गिरा दी। अब मैं उनके सामने सिर्फ अपनी पतली, नाजुक पैंटी में थी। फिर उन्होंने झट से मुझे अपनी तरफ खींचा और अपने होठों को मेरे पेट पर और मेरी चूत के ऊपर रख दिया। वो बैठे-बैठे ही मेरे पेट और चूत के ऊपर चाटने लगे। उनके हाथ मेरी नंगी जाँघों पर थे, कभी वो मेरी जाँघों के बीच की कोमल चमड़ी पर उँगलियाँ फेर रहे थे, तो कभी पैंटी के ऊपर से मेरी गांड को सहला रहे थे। और फिर जोश-जोश में, उन्होंने मेरी गांड पर एक थप्पड़ मारा – जोरदार थप्पड़ – जिससे मेरा पूरा नितंब हिल गया और मेरे मुँह से “आह!” निकल गया।

फिर उन्होंने एक ही झटके में मेरी पैंटी को मेरी कमर से नीचे खींच लिया – पैंटी घुटनों तक आई और फिर पैरों से निकलकर ज़मीन पर गिर गई। अब मैं पूरी तरह से नग्न थी – बिल्कुल वैसे ही जैसे उन्होंने शादी के दिन मुझे देखा था। मेरे शरीर पर कपड़े का एक भी धागा नहीं था। उन्होंने अपनी जीभ सीधा मेरी चूत पर लगा दी और चाटने लगे। उनकी गर्म जीभ मेरी चूत के लिप्स पर घूम रही थी, ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर, गोल-गोल। मैंने अपनी टाँगें और चौड़ी कर लीं, और उनके सिर को अपनी चूत में दबाने लगी। मैं पागल हो रही थी। उनका एक हाथ मेरे स्तनों को दबा रहा था और दूसरा मेरी गांड को – वो उस पर थप्पड़ मार रहे थे और साथ ही दबा भी रहे थे।

फिर अचानक उन्होंने मुझे पकड़ा और बिस्तर पर जोर से पटक दिया – एक ऐसा धक्का कि मेरे शरीर का हर हिस्सा गद्दे पर उछल गया। मैं चीखी, “हिम… दर्द!” पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। वो मेरे सामने बिस्तर पर खड़े हो गए। उन्होंने पहले अपनी पैंट उतारी – बेल्ट खोली, बटन खोला, जिपर खोला – और फिर अपनी अंडरवियर उतार कर फेंक दी। अब वो भी पूरी तरह नग्न थे। और फिर… फिर उन्होंने अपना 8 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा लंड मेरे सामने हिलाना शुरू कर दिया। वो लंड सख्त था, खड़ा था, और उसके मुंड पर पानी चमक रहा था। उन्होंने मेरा सिर पकड़ा और अपना लंड मेरे मुँह में डालने लगे। मैं तो डर गई थी – इतना बड़ा लंड मेरे छोटे से मुँह में कैसे जाएगा? मैंने मना करने की कोशिश की, अपना सिर दूसरी तरफ घुमाने लगी। लेकिन हिम बोले: “आज तो मैं तेरी कुछ नहीं सुनने वाला, मेरी जान। चलो, इसे चुसो।”

हिमांशु की उत्तेजना को मैं समझ सकती थी। वो अपने आप में नहीं थे। इसलिए मैंने हार मान ली। मैंने पहले धीरे से अपने हाथों में उनका गर्म, सख्त लंड पकड़ा – उसकी बनावट, उसकी गर्मी, उसकी सख्ती – सब कुछ मेरे हाथ में था। फिर मैंने उसे चूमा – पहले मुंड पर, फिर लंड की लंबाई पर। धीरे-धीरे मैंने उसे अपने मुँह में लेना शुरू किया। पहले सिर्फ मुंड, फिर थोड़ा और, फिर थोड़ा और। मैंने आधा लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया – ज़ोर-ज़ोर से, अपने होठों को उसके चारों ओर बंद करके। उनका लंड इतना बड़ा था कि मैं एक बार में पूरा लंड नहीं ले पा रही थी – मेरा छोटा सा मुँह बस उतना ही ले पाता था। कुछ देर बाद उन्होंने मेरा सिर पकड़ा और खुद ही अपना लंड अंदर-बाहर करने लगे। उनके खुद के थ्रस्ट्स के कारण उनका पूरा लंड मेरे मुँह के अंदर घुसने लगा – गहरा, और गहरा, और गहरा। उसका अंतिम सिरा अब मेरे गले को छू रहा था। मुझे उल्टी जैसा महसूस हो रहा था, पर मैंने रुकने नहीं दिया।

कुछ देर बाद उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा दी – तेज़, तेज़, और तेज़। मैंने उनकी गांड पर अपना हाथ रख दिया – ताकि खुद को संभाल सकूँ। कुछ ही देर में मेरी आँखों से पानी आने लगा, मेरे मुँह से थूक बहने लगा, और मेरा चेहरा लाल हो गया। पर हिम रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने मेरा मुँह चोदना जारी रखा। और फिर – एक तेज़ थ्रस्ट के साथ – उन्होंने अपना पूरा वीर्य मेरे मुँह के अंदर निकाल दिया। गर्म, गाढ़ा, और ढेर सारा। निकलने के बाद भी उनका लंड मेरे मुँह से बाहर नहीं निकला। उन्होंने मेरा सिर कसकर पकड़ लिया और पूरा लंड गले तक अंदर डाल दिया – जैसे वो आखिरी बूंद भी मुझमें डालना चाहते हों। मजबूरन मुझे उनका सारा पानी निगलना पड़ा। मैंने एक-एक बूंद पी ली।

भाग 4 – चूत चुदाई और गांड मारना

कुछ देर बाद उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से निकाला, और कुछ वक़्त मेरे बाजू में लेट गए। मैं अभी भी हाँफ रही थी, अपनी साँसें संभालने की कोशिश कर रही थी। मेरे चेहरे पर आँसू और थूक बिखरे हुए थे। हिम मुझे देख रहे थे – मुस्कुरा रहे थे। उस पल में वो जानवर जैसे गायब हो गया था और मेरा प्यारा हिम वापस आ गया था। मैंने सोचा, इसी डर से मैं उनका लंड पहले नहीं लेना चाहती थी – क्योंकि मुझे पता था कि वो मुझे रुला देंगे। पर मैंने बुरा नहीं माना। अपने पति के लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ – चाहे वो मेरी चूत चोदें, मेरी गांड मारें, या मेरा मुँह। उनकी खुशी ही मेरी खुशी है।

मैं अभी भी अपने मुँह में उनके लंड का एहसास महसूस कर रही थी – वो गर्माहट, वो भारीपन, वो मेरे गले को छूने का एहसास। कुछ देर आराम करते ही उनका लंड वापस खड़ा हो गया – जैसे उसे कुछ हुआ ही नहीं था। उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटाया और अपने दोनों कंधों पर मेरे पैर रख दिए। अब मेरी चूत पूरी तरह से उनके सामने खुली हुई थी – गीली, गुलाबी, और चमकती हुई। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में डाला और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। इस बार मैंने भी उनका साथ दिया – अपने हिप्स को उनके थ्रस्ट्स के साथ ऊपर उठाया।

फिर उन्होंने मुझे खड़ा किया और दीवार से लगा दिया। अब मेरी पीठ दीवार से लगी हुई थी, मेरे नितंब दीवार से चिपके हुए थे, और मेरे स्तन उनकी छाती से दबे हुए थे। उन्होंने अपना लंड फिर से मेरी चूत में डाला और चुदाई करने लगे। चप-चप-चप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। मैं जोर-जोर से चिल्ला रही थी – “आह! आह! हिम!” – मेरी आवाज़ें पूरे कमरे में फैल रही थीं। 15-20 मिनट तक उन्होंने इसी तरह चोदा।

फिर थोड़ा आराम – और वो फिर आए। उन्होंने मुझे टेबल पर बिठाया और मेरी चूत पर अपना लंड रखा। एक झटके में वो अंदर घुस गए – पूरा 8 इंच – एक ही बार में। मैं चिल्लाई – “उइइइ!” – पर उन्होंने मेरी दोनों जाँघें पकड़ लीं, उन्हें खोल दिया, और मेरी चूत में अपना लंड जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगे। हिम ने कहा: “आह मेरी जानेमन, क्या माल है तू। तेरा दीवाना हो गया मैं तो। आज तेरी चूत फाड़ डालूंगा।”

मैं उनकी बातें सुनकर और भी गीली हो रही थी, और चिल्ला रही थी। “आह आह आह, मेरे राजा। ये चूत तुम्हारी है। मारो इसे – आह – धीरे-धीरे करो ना – जान निकालोगे क्या?” हमारी चुदाई का वो दौर चलता रहा, और आखिरकार हम दोनों ने साथ में पानी छोड़ा। हम थक कर एक-दूसरे से लिपट गए – दोनों नंगे, दोनों पसीने से तर, दोनों संतुष्ट। और ऐसे ही हम सो गए – चिपके हुए, उनका लंड अभी भी मेरी चूत में था।

आधी रात को मुझे मेरी चूत पर उनका हाथ सहलाता हुआ महसूस हुआ। उनकी उंगलियाँ मेरे चूत के लिप्स पर घूम रही थीं। मेरी नींद खुली तो वो मुझे देखकर मुस्कुराए – वही प्यारी मुस्कान। उन्होंने मुझे फ्रेंच किस दी – धीरे, प्यार से। फिर उन्होंने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया और अपनी उंगलियाँ मेरी चूत के अंदर डाल दीं। मैंने अपनी दोनों टाँगें फैला दीं। कुछ देर मेरी चूत को फिंगरिंग करने के बाद, उन्होंने मुझे कुत्ते की तरह चारों पैरों पर लिटा दिया – घोड़ी बनाकर। फिर उन्होंने अपना सख्त लंड मेरी गांड पर रख दिया।

मैं डर गई – दिल की गहराइयों से डर गई। मैंने अपने हाथ से अपनी गांड छुपाने की कोशिश की, पर आज हिम कुछ सुनने के मूड में नहीं थे। मुझे पता था कि वे मेरी गांड जरूर चोदेंगे – उन्होंने तो फोन पर वादा कर रखा था। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा, एक तरफ किया, और अपना लंड मेरी गांड में घुसाने लगे। पहले थोड़ी दिक्कत हुई – मेरी गांड का छेद बहुत छोटा था और उनका लंड बहुत बड़ा। पर फिर धीरे-धीरे उनका लंड का मुंड मेरी गांड में चला गया। मैं चिल्लाई – “उइइइ – माँ! आआह्ह्ह – दर्द हो रहा है – निकालो इसे – प्लीज़!” मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। पर हिम ने कहा: “मेरी कुतिया, तेरी गांड को आज मैं मारूंगा। बड़े दिनों बाद मिली है तू।”

उन्होंने धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके, पूरा लंड मेरी गांड के अंदर डाल दिया। मैं रो रही थी, चीख रही थी, पर मैं हिल भी नहीं सकती थी। और फिर उन्होंने चुदाई शुरू कर दी। शुरू में मुझे बहुत दर्द हुआ – जैसे कोई गर्म लोहे की छड़ मुझमें घुसाई जा रही हो। पर थोड़ी देर बाद – जैसे-जैसे उनके धक्के बढ़ते गए – मेरी गांड ने उनके लंड को स्वीकार कर लिया और दर्द की जगह एक अजीब सा सुख आने लगा। हिम को मेरी गांड मारने में बड़ी खुशी मिल रही थी – उनकी आँखें बंद थीं, वो केवल महसूस कर रहे थे। और साथ में, वो मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे – जोरदार थप्पड़ – जिससे मेरे नितंब झनझना रहे थे।

फिर 2-3 बार गांड की चुदाई करने के बाद, उन्होंने अपना गर्म, गाढ़ा माल – अपना वीर्य – मेरी गांड के अंदर ही निकाल दिया। मैंने महसूस किया कि कैसे मेरी गांड के अंदर गर्म तरल फैल रहा है। उसके बाद हम दोनों साथ में बाथरूम में गए – नग्न ही – और एक साथ स्नान किया। उन्होंने अपने हाथों से मेरी गांड और चूत को साफ किया, और मैंने उनके लंड को। हम एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। फिर हमने सूखे कपड़े पहने, बिस्तर पर गए, और एक-दूसरे से लिपट कर सो गए।

भाग 5 – संतुष्टि और सुबह का प्यार

सुबह जब मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा कि हिम मुझे अपनी बाहों में कसकर जकड़े हुए हैं। उनकी आँखें खुली थीं और वो मुझे देख रहे थे। उनके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि और प्यार की मुस्कान थी। उन्होंने मेरे माथे पर एक प्यार भरा किस किया और बोले, “गुड मॉर्निंग, मेरी जान। रात कैसी गुजरी?”

मैंने शरमाते हुए कहा, “बहुत अच्छी। लेकिन मेरी चूत और गांड में अभी भी दर्द है। तुमने तो बहुत जोर से चोदा।”

वो हँसे और बोले, “तुम खुद तो चिल्ला रही थी कि और जोर से चोदो। अब दर्द हो रहा है तो मैं क्या करूँ?”

मैंने उनके सीने पर मुक्का मारा और बोली, “तुम शैतान हो।”

फिर उन्होंने मुझे उठाया और बोले, “चलो, साथ में नहाते हैं। फिर मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बनाऊंगा।”

हम दोनों बाथरूम में गए। उन्होंने शॉवर चालू कर दिया। गर्म पानी हमारे शरीर पर गिर रहा था। उन्होंने मेरे शरीर पर साबुन लगाया – बड़े प्यार से, धीरे-धीरे। उनके हाथ मेरे स्तनों पर, मेरी कमर पर, मेरी गांड पर फिर रहे थे। मैं भी उनके शरीर पर साबुन लगा रही थी – उनकी चौड़ी छाती पर, उनके मजबूत कंधों पर, उनके लंड पर।

जब उन्होंने मेरे शरीर पर साबुन लगाया, तो उनका लंड फिर से सख्त हो गया। मैंने देखा और मुस्कुरा दी। उन्होंने कहा, “तुम्हारी वजह से ही होता है।”

मैंने कहा, “नहीं, अब नहीं। सुबह-सुबह फिर से शुरू मत करो।”

उन्होंने हँसते हुए कहा, “ठीक है, आज तुम्हें आराम देता हूँ। पर कल फिर से…”

हमने नहा लिया और बाथरूम से बाहर आए। उन्होंने मुझे तौलिया पकड़ाया और खुद भी सूख गए। फिर वो रसोई में चले गए। मैंने कपड़े पहने और हॉल में आकर बैठ गई।

थोड़ी ही देर में हिम नाश्ता लेकर आए – मेरी पसंद का आमलेट, टोस्ट, और एक कप गर्म चाय। उन्होंने मेरे सामने प्लेट रखी और बोले, “खाओ, आज बहुत एनर्जी लगी है तुम्हारी।”

मैंने शरमाते हुए नाश्ता किया। फिर हम दोनों सोफे पर बैठकर बातें करने लगे। उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और बोले, “सुनीता, तुम्हारे बिना ये दो महीने बहुत मुश्किल थे। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।”

मैंने उनके कंधे पर सिर रख दिया और कहा, “मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, हिम।”

उसके बाद, हर दिन वो मुझे चोदते हैं। कभी जोश में, कभी प्यार में। कभी चूत में, कभी गांड में। कभी मुँह में। पर उस रात की चुदाई – दो महीने बाद की वो पहली रात – वह मेरी ज़िंदगी की सबसे गर्म, सबसे तीखी, और सबसे यादगार चुदाई थी। आज भी जब मैं उस रात को याद करती हूँ, मेरी चूत गीली हो जाती है और मेरे निप्पल खड़े हो जाते हैं।

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