नौ इंच लंड से चुदाई – पत्नी अनामिका की पहली बार की गर्म कहानी

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नौ इंच लंड से चुदाई – क्या आपने कभी अपने पति के नौ इंच लंबे और मोटे लंड को देखा है? इस हॉट हिंदी सेक्स स्टोरी में पढ़िए अनामिका की जुबानी वो सुबह, जब नौ इंच लंड से चुदाई का उसका सपना पूरा हुआ। सुबह-सुबह अपने पति रितेश का खड़ा लंड देखकर वह शर्म से लाल हो गई, लेकिन जल्द ही उसने उस मोटे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसका गर्म जूस निगल लिया। फिर नौ इंच लंड से चुदाई करते हुए उसने अपनी टाइट चूत में वह पूरा लंड समा लिया। अगर आप मोटे लंड की चुदाईपति के लंड का जूस पीना, और पहली बार चूत में लंड लेने की कहानी ढूंढ रहे हैं, तो यह गर्म दास्तान आपके लिए ही है।

भाग 1: सुबह-सुबह बाथरूम से निकली तो देखा पति का नौ इंच लंड

मेरा नाम अनामिका है, मेरा रंग गोरा है और बॉडी एकदम स्लिम है, मैं सूरत की रहने वाली हूँ। एक साल पहले जब मैं तीस साल की थी तभी मेरी शादी रितेश के साथ हो गई थी, उस समय रितेश की उम्र बत्तीस साल की थी। उनका रंग गोरा है और वह बहुत ही हैंडसम हैं। रितेश और मैं एकदम फ्रेंड की तरह रहते हैं और हम एक दूसरे से कुछ नहीं छुपाते। रितेश मुझसे एकदम खुला मजाक करता है, वह बहुत ही प्यारे हैं।

हमने शादी के बाद बस दो बार ही सेक्स किया था। उन्होंने मुझे अभी तक अपना लंड नहीं चुसाया था। रितेश ने मेरी प्यार से धीरे-धीरे चुदाई की थी। सुहागरात को मैं रोने लगी थी, इसीलिए वह मेरी अच्छी चुदाई नहीं कर पाया था। अब मैं अपने पति से अच्छी तरह से चुदना चाहती थी। मैं चाहती थी कि वह मुझे पूरी तरह से चोदे, बिना किसी डर के, बिना किसी झिझक के।

यह शादी के 10 दिन बाद की बात है। मैंने सुबह जब बाथरूम से नहा कर बाहर आई तो मैंने देखा कि रितेश अभी तक सो रहा है। मैंने अभी कपड़े भी नहीं पहने थे, केवल एक टॉवल अपने बदन पर लपेट रखा था। मेरे बाल अभी भी गीले थे, और पानी की बूंदें मेरे कंधों से टपक रही थीं।

मैं उसके रूम में गई। वह एकदम बेखबर सो रहा था – उसकी नींद बहुत गहरी थी, उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे, और वह करवट लिए हुए था।

जब मेरी निगाह उसके ऊपर पड़ी तो मैं शर्म से लाल हो गई। मैंने देखा रितेश का लंड उसकी चड्डी से बाहर निकला हुआ था। उसका लंड खड़ा था – पूरी तरह से तना हुआ, सीधा, और बहुत बड़ा। उसका लंड लगभग नौ इंच लंबा और बहुत मोटा था। मैंने अपनी ज़िंदगी में इतना बड़ा लंड कभी नहीं देखा था।

मैं बहुत ही सेक्सी हूँ, इसलिए इतना मोटा और लंबा लंड देखकर मुझे जोश आने लगा। मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्माहट दौड़ गई, मेरी साँसें तेज़ हो गईं, और मेरी चूत में हल्की सी नमी आने लगी। मैं बहुत देर तक रितेश के लंड को देखती रही। मैं उसे बहुत प्यार करती थी, हम दोनों दोस्त की तरह रहते थे, लेकिन इस पल मैं उसे अपने पति के रूप में और भी ज्यादा चाहती थी।

मैं धीरे से जाकर बेड पर रितेश के बगल में बैठ गई। गद्दे पर बैठते ही वह थोड़ा हिला, लेकिन उसकी नींद नहीं खुली। मैंने अपने हाथों से उसके लंड को पकड़ लिया। वह मेरे हाथ में एकदम फिट नहीं हो रहा था – इतना मोटा था कि मेरी उंगलियाँ उसे पूरी तरह घेर नहीं पा रही थीं। मैंने उसे धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया। उसकी त्वचा मुलायम थी, लेकिन उसके नीचे का लंड लोहे की तरह सख्त था।

थोड़ी देर में उसकी नींद खुल गई। उसने जब मुझे अपना लंड पकड़े हुए देखा तो बोला – “अनामिका, आप ये क्या कर रही हो?”

मैंने कहा, “मैं इसे देख रही हूँ।” उसने शर्म से अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरे हाथ लगाने से उसका लंड और ज्यादा टाइट हो गया – उसकी नसें उभर आई थीं, और उसके सुपारे पर प्री-कम की एक बूँद चमक रही थी।

थोड़ी देर बाद उसने आँखें खोली और बोला, “अनामिका, अब रहने दो, अपना हाथ हटा लो।”

मैंने कहा, “थोड़ा रुक जाओ, मुझे ठीक से देख लेने दो।” वो कुछ नहीं बोला। वह बस वहाँ पड़ा रहा, उसकी आँखें मेरी तरफ देख रही थीं, और उसके चेहरे पर शरम और उत्तेजना का मिश्रण था।

मैं अपने हाथों से उसका लंड सहलाने लगी – ऊपर से नीचे, धीरे-धीरे, दृढ़ता से। थोड़ी ही देर में रितेश का बदन अकड़ने लगा। उसके पैर सीधे हो गए, उसके पेट की मांसपेशियाँ तन गईं, और वह बोला – “अनामिका, अब इसे छोड़ दो, नहीं तो इसका पानी निकल जाएगा।”

मैंने कहा – “मैं इसका जूस अपने मुँह में लेना चाहती हूँ। तुम इसका जूस मेरे मुँह में निकाल दो।”

भाग 2: नौ इंच लंड से चुदाई – पहली बार मुँह में लिया जूस

वो बहुत ज्यादा जोश में आ गया था। उसने मेरे सर को पकड़ कर अपने लंड के पास कर दिया। उसके हाथ मेरे बालों में थे, और वह धीरे-धीरे मेरा सिर नीचे कर रहा था।

मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया। पहले तो सुपारा मुश्किल से अंदर गया – इतना मोटा था कि मेरे होंठ फैल गए। लेकिन मैंने धीरे-धीरे उसे अपने मुँह में समाने दिया। फिर मैं चूसने लगी – ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गी.. की आवाजें आने लगीं।

मेरी जीभ उसके लंड के सुपारे पर घूम रही थी, और मैं उसके हर हिस्से को चाट रही थी – ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर। मैंने उसके लंड की चमड़ी को हल्के से दबाया और सुपारे को पूरी तरह अपने मुँह में ले लिया।

थोड़ी ही देर में उसके लंड ने अपना जूस मेरे मुँह में निकलना शुरू कर दिया। पहले एक धार, फिर दूसरी, फिर तीसरी – उसके लंड का जूस एकदम गरम-गरम था, जैसे कोई गर्म दूध मेरे मुँह में उड़ेल दिया गया हो। मैंने वो सारा जूस निगल लिया – गटक-गटक की आवाज़ें आ रही थीं। उसका स्वाद थोड़ा नमकीन था, लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा।

सारा जूस निगल जाने के बाद मैंने उसके लंड को चाट-चाट कर साफ कर दिया। मेरी जीभ उसके लंड के हर इंच पर घूमी, उसकी हर बूँद को पी लिया।

फिर मैंने उससे कहा – “चलो अब फ्रेश हो जाओ, नौ बज रहे हैं।”

वो मुझसे आँखें नहीं मिला पा रहा था। वह चुप-चाप उठा और बाथरूम चला गया। मैं किचन में चाय बनाने चली गई। मैंने अभी तक केवल टॉवल लपेट रखा था – मेरे स्तन टॉवल के नीचे उभर रहे थे, और मेरी जांघें खुली हुई थीं।

रितेश फ्रेश होने के बाद आकर सोफे पर बैठ गया। उसने रोज की तरह अभी तक केवल टॉवल ही पहना हुआ था – उसका लंड टॉवल के नीचे छिपा हुआ था, लेकिन उसका उभार साफ दिख रहा था।

मैंने उसको चाय लाकर दी। वो अपना सर नीचे किए हुए चुप-चाप चाय पीने लगा। मैं भी उसके साथ ही साथ चाय पीने लगी। कुछ देर तक कमरे में सिर्फ चाय की चुस्कियों की आवाज़ें थीं।

चाय खत्म होने के बाद मैं उसके बगल में आकर बैठ गई। मैंने अपना हाथ उसके लंड पर रख दिया। इस बार उसने कोई विरोध नहीं किया – वह चुप रहा, उसकी साँसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं।

फिर मैंने उसकी टॉवल ऊपर कर दी। उसका लंड बाहर आ गया – पहले से ही थोड़ा सख्त होना शुरू हो गया था। मैंने उसके लंड को सहलाना शुरू कर दिया। मैंने अपनी हथेली से उसके सुपारे को दबाया, फिर अपनी उंगलियों से उसके लंड की लंबाई को सहलाया।

दो मिनट में ही उसका लंड फिर से एकदम टाइट हो गया – नौ इंच का, मोटा, तना हुआ, लोहे की रॉड की तरह।

भाग 3: सोफे पर नंगे हुए और शुरू हुआ प्यार का खेल

मैंने उसका टॉवल खींच कर फेंक दिया। अब वो मेरे सामने एकदम नंगा हो गया – उसका चौड़ा सीना, उसके बालों वाली छाती, उसकी मजबूत जाँघें, और बीच में वह विशाल लंड।

मैंने उसके लंड को फिर से सहलाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद उसका डर कुछ कम हो गया। उसने अपना एक हाथ मेरे बूब पर रख दिया – हल्के से, जैसे वह पहली बार किसी फल को छू रहा हो।

मैंने कहा – “पति जी, इस तरह नहीं, मेरा टॉवल तो खोल दो।”

उसने धीरे से मेरा टॉवल खींच कर अलग कर दिया। टॉवल मेरे शरीर से खिसक कर नीचे गिर गया। अब मैं भी उसके सामने एकदम नंगी हो गई – मेरे दूधिया सफेद स्तन, मेरी पतली कमर, मेरे गोल कूल्हे, और उनके बीच मेरी चिकनी, बाल रहित चूत।

उसने मेरे बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया। वह धीरे-धीरे मेरे निप्पल्स को उँगलियों से मसल रहा था – पहले दाएँ को, फिर बाएँ को, फिर दोनों को एक साथ। मैं और ज्यादा जोश में आने लगी। मैंने उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर सटा दिया।

उसकी हिम्मत और बढ़ गई। उसने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी – धीरे-धीरे, सावधानी से – और अंदर-बाहर करने लगा। “आह.. इह्ह..” की हल्की आवाजें मेरे मुँह से निकल रही थीं। मैं एकदम बेकाबू सी होने लगी।

मैं उठ कर उसके पैरों पर बैठ गई। मेरी चूत उसके लंड के ठीक ऊपर थी। उसने अपना हाथ मेरे पीठ पर फिराना शुरू कर दिया – मेरी रीढ़ की हड्डी को सहलाते हुए, मेरे कंधों को दबाते हुए।

फिर मैंने उसके लंड का टोपा अपनी चूत पर रखा और दबाने लगी। मैंने जैसे ही थोड़ा सा दबाया तो मेरे मुँह से एक सिसकारी सी निकल पड़ी – “स्स्स्स्स…” उसका लंड इतना मोटा था कि छेद में घुसने से पहले ही मेरी चूत के होंठ फैल गए थे।

वो बोला – “क्या हुआ?”

मैंने कहा – “तुम्हारा लंड बहुत मोटा है, इसलिए दर्द हो रहा है।”

मैंने अपना होठ उसके होठ पर रख दिया और उसके होंठों को चूमने लगी। मैंने उसके लंड को अपनी चूत से सटाए हुए थोड़ी देर तक अपनी कमर को हिलाना जारी रखा – आगे-पीछे, गोल-गोल, ताकि मेरी चूत उसकी मोटाई की आदी हो जाए।

थोड़ी ही देर में जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने थोड़ा सा और जोर लगाया। इस बार मेरे मुँह से चीख निकल गई – “आह्ह्ह..!” अब उसके लंड का टोपा मेरी चूत में घुस चुका था। बस टोपा – इतना भर – और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत फट जाएगी।

मैं उसी तरह थोड़ी देर तक रुकी रही। मेरी साँसें तेज़ थीं, मेरे माथे पर पसीना आ गया था। जब मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने अपनी कमर को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। अब उसके लंड का टोपा मेरी चूत में अंदर-बाहर होने लगा। मेरी चूत ने उसके लंड को थोड़ा सा रास्ता दे दिया था।

भाग 4: नौ इंच लंड से चुदाई – पूरा लंड चूत में घुसा

अभी दो मिनट भी नहीं हुए थे कि मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। एक गर्म, चिपचिपी धार – मेरी चूत से निकल कर उसके लंड पर बह गई। मेरी चूत एकदम गीली हो गई और उसका लंड भी एकदम भीग गया। अब किसी ऑयल या क्रीम की जरूरत नहीं थी – हमारे शरीरों ने अपना प्राकृतिक चिकनापन बना लिया था।

मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो इस बार मैं बहुत जोर से चीख पड़ी – “आह ह ह ह ह्हीईई..!” उसका लंड मेरी चूत में दो इंच तक घुस गया था। दर्द असहनीय था – जैसे कोई गर्म लोहे की छड़ मेरे अंदर घुसा रहा हो।

मैं दर्द के मारे रुक गई और चुप-चाप बैठी रही। रितेश भी जोश से एकदम बेकाबू हो रहा था – उसकी आँखें बंद थीं, उसके होंठ काँप रहे थे, उसकी साँसें दहाड़ रही थीं।

उसने अचानक मेरी कमर को पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मेरे मुँह से एक जोरदार चीख निकल गई – “आअह्ह्ह्ह..!” तो उसने अपने होठ मेरे होंठों पर रख दिए। उसका लंड मेरी चूत में तीन इंच तक घुस गया था। मेरी चूत से थोड़ा खून भी आ गया – उसकी झिल्ली टूट रही थी।

रितेश मेरी कमर को पकड़ कर धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। उसके होठ मेरे होंठों पर थे, और मैं उसके मुँह में अपनी चीखों को दबा रही थी। दो-तीन मिनट बाद मेरा दर्द कुछ कम हो गया।

मैं अपना हाथ उसके पीठ पर लपेट कर उसके सीने से एकदम चिपक गई और उसका साथ देना शुरू कर दिया। अब हम दोनों एक साथ चल रहे थे – एक शरीर, एक साँस, एक लय।

मेरे बदन में आग सी लग चुकी थी। मेरी साँसें बहुत तेज होने लगीं और मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया। रितेश का लंड और मेरी चूत दोनों और ज्यादा गीले हो चुके थे। उसका लंड अब तीन इंच तक आराम से मेरी चूत में अंदर-बाहर होने लगा था।

रितेश मेरी कमर को पकड़े हुए मुझे तेजी से आगे-पीछे कर रहा था। मैंने जोश में अपनी आँखें बंद कर ली थीं। तभी रितेश ने मुझे फिर से अपनी तरफ जोर से खींच लिया – मैं फिर से चिल्लाई “आह्ह.. ह्ह..” तो उसने अपने होंठों से मेरे होंठों को सील कर दिया।

मुझे लग रहा था कि किसी ने मेरी चूत में चाकू घुसेड़ दिया हो। उसका लंड अब तक मेरी चूत में पाँच इंच घुस चुका था। रितेश भी बहुत जोश में आ गया था – उसकी आँखें लाल हो गई थीं, उसके पूरे शरीर पर पसीना आ गया था।

उसने मुझे तेजी से आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। मैं भी बहुत ज्यादा जोश में आ चुकी थी और उसका साथ दे रही थी – अपने कूल्हों को उठा-उठा कर, उसके हर धक्के का जवाब देते हुए।

अभी तक रितेश का लंड मेरी चूत में केवल पाँच इंच ही घुस पाया था। पाँच मिनट भी नहीं बीते थे कि रितेश के लंड ने अपने जूस से मेरी चूत को भरना शुरू कर दिया। पहले एक धार, फिर दूसरी, फिर तीसरी – गर्म, गाढ़ा, सफेद वीर्य। उसके साथ ही साथ मेरी चूत ने भी अपना जूस छोड़ना शुरू कर दिया – ऊऊ.. ऊउइ.. “ओह्ह ओह!”

लंड का सारा जूस निकल जाने के बाद भी मैं बहुत देर तक उसका लंड अपनी चूत में डाले हुए बैठी रही। जब उसका लंड एकदम ढीला हो गया तब मैं उसके ऊपर से हट गई।

मैंने देखा कि उसके लंड पर मेरी चूत का जूस लगा हुआ था – सफेद और पतला। उसका लंड जूस की वजह से एकदम गुलाबी दिख रहा था। मैंने रितेश का हाथ पकड़ा और उसे बाथरूम ले गई। मैंने उसका लंड और अपनी चूत को साबुन लगा कर साफ किया।

उसके बाद हम दोनों नंगे ही बेडरूम में जाकर बेड पर लेट गए। मैं उससे एकदम चिपकी हुई थी – मेरे स्तन उसकी छाती पर, मेरी जांघ उसकी जांघ पर। वो मेरी पीठ को सहला रहा था और मैं उसकी पीठ को सहला रही थी।

भाग 5: डॉगी स्टाइल में तीन दिनों तक चुदाई का मज़ा

मैंने कहा – “रितेश, तुम्हारे लंड से चुदवा कर मुझे तो बहुत मजा आया, जबकि अभी मैंने तुम्हारा पूरा लंड अपनी चूत के अंदर नहीं लिया है। तुमने आज के पहले कभी किसी के साथ किया है?”

वो बोला – “नहीं, मैंने आज के पहले किसी के साथ नहीं किया है। ये मेरा पहली बार था, इसलिए मेरा जूस बहुत जल्दी निकल गया। मुझे भी आज पहली बार ये मजा मिला है।”

मैंने कहा – “मैं भी तुमसे चुदवा कर खूब मजा लूँगी और तुम्हें भी खूब मजा दूँगी।”

इतने में रितेश का लंड फिर से खड़ा होने लगा था। वो बोला – “अनामिका, मुझे कहते हुए शर्म आ रही है, अगर तुम्हें एतराज न हो तो मैं फिर से तुमको चोद दूँ?”

मैंने कहा – “मैं तो अब तुम्हारी हूँ, कैसी शर्म? तुम जब चाहो मुझे चोद सकते हो।”

वो बोला – “क्या मैं आपकी चूत को चाट सकता हूँ?”

मैंने कहा – “तुमको इजाजत लेने की क्या जरूरत है? तुम जैसा चाहो करो। अभी तो मुझे तुम्हारा पूरा लंड अपनी चूत के अंदर लेना है।”

रितेश उठ कर मेरे ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गया। उसने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया – जीभ से लिप्स को चाटते हुए अंदर घुसा रहा था। “आह.. ह्ह्ह.. इह्ह..” मैं भी जोश में थी। मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। गों.. गों.. गोग की आवाजें आ रही थीं।

थोड़ी देर बाद उसका लंड एकदम टाइट हो गया। वो मेरे ऊपर से हट गया और मेरे पैरों के बीच आ कर बैठ गया।

मैंने रितेश से कहा – “मेरी कमर के नीचे तकिया रख दो, इससे मेरी चूत ऊपर उठ जाएगी और तुमको चोदने में आसानी हो जाएगी।”

उसने मेरी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए। फिर उसने मेरी चूत के लिप्स को फैलाया और अपने लंड का टोपा बीच में टिका दिया। उसके लंड का टोपा अपनी चूत पर महसूस करते ही मेरे सारे बदन में सुरसुरी सी दौड़ गई।

फिर उसने मेरे पैरों को पंजे के पास से पकड़ कर दूर-दूर फैला दिया। मैंने रितेश से कहा – “रितेश, तुम मेरे पैरों को मेरे कंधे के पास सटा दो।” उसने मेरे पैरों को मेरे कंधे के पास सटा दिया तो मेरी चूत और ऊपर उठ गई।

वो बोला – “अनामिका, तुम्हारी चूत तो एकदम ऊपर उठ गई।”

मैंने कहा – “इससे तुमको अपना लंड मेरी चूत के अंदर घुसाने में आसानी हो जाएगी, और दूसरे जब तुम अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसाने लगोगे तो मुझे बहुत ज्यादा दर्द होगा, तब मैं उस दर्द की वजह से अपनी चूत को इधर-उधर नहीं कर पाऊँगी और तुम आसानी से अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर डाल कर मुझे चोद सकोगे।”

मैंने आगे कहा – “रितेश, मैं तुमसे एक बात और कहना चाहती हूँ। जब तुम अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसाने की कोशिश करोगे तो मुझे बहुत दर्द होगा, मैं बहुत चिल्लाऊँगी और तड़पूँगी, लेकिन तुम इसकी परवाह मत करना। अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल देना और खूब जोर-जोर से धक्के लगाना, रुकना मत।”

रितेश बोला – “ठीक है अनामिका।”

फिर मैंने उसके सिर को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और कहा – “चलो, अब शुरू हो जाओ।”

उसका लंड पाँच इंच तक तो मैं एक बार पहले ही अंदर ले चुकी थी, लेकिन मेरी चूत अभी तक टाइट थी। उसने मेरे पैरों को मेरे कंधे पर दबाते हुए जैसे ही एक धक्का मारा, उसका लंड मेरी चूत के अंदर पाँच इंच तक आसानी से चला गया। मुझे बहुत हल्का सा दर्द हुआ।

मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसके होंठों को चूमने लगी। उसने धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया – थप.. थप.. की हल्की आवाजें आने लगीं। मुझे जोश आने लगा और थोड़ी देर में ही मेरी चूत से पानी निकल गया। अब मेरी चूत एकदम गीली हो गई और रितेश का लंड भी भीग गया।

मैंने रितेश से कहा – “अब पूरी ताकत के साथ अपना लंड मेरी चूत में घुसाना शुरू कर दो। अब रुकना मत। पूरा लंड मेरी चूत में घुसा देना और उसके बाद बिना रुके जोर-जोर से धक्के लगाना।”

रितेश ने मेरी टाँगों को जोर से दबाते हुए एक जोरदार धक्का मारा तो मेरी चीख निकल गई – “आह्ह्ह.. ह्हीईई..” उसका लंड मेरी चूत में और ज्यादा गहराई तक घुस गया।

मैंने पूछा – “क्या हुआ, कितना घुसा है?”

वो बोला – “अभी तो केवल छह इंच ही घुस पाया है।”

मैंने कहा – “रितेश, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूँ। तुम जल्दी से अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दो। मैं तुम्हारा ये लंबा और मोटा लंड जल्दी से अपनी चूत के अंदर लेना चाहती हूँ।”

रितेश ने फिर एक धक्का लगाया तो मैं दर्द के मारे तड़पने लगी और मेरे मुँह से एक जोरदार चीख निकली – “ऊउइ.. ऊई.. उईईई..!” उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ और ज्यादा घुस चुका था और मेरी बच्चेदानी के मुँह को चूम रहा था।

मैंने चिल्लाते हुए ही रितेश से कहा – “जल्दी करो, रुको मत! डाल दो अपना पूरा लंड मेरी चूत में!”

उसने फिर से एक जोरदार धक्का मारा। मुझे इस बार दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ – मेरे मुँह से फिर एक जोरदार चीख निकली “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह..!” मैं किसी मछली की तरह तड़पने लगी और अपने सिर के बाल नोचने लगी। मेरे चेहरे पर पसीना आ गया और आँखों में आँसू भर गए।

रितेश का लंड मेरी चूत में और ज्यादा गहराई तक घुस चुका था। उसका लंड मेरी बच्चेदानी को पीछे धकेल रहा था। मैंने समझा कि अब उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस चुका है। मैंने रितेश से पूछा – “क्या हुआ, पूरा घुस गया?”

वो बोला – “अभी नहीं, थोड़ा सा बाकी है।”

मैंने कहा – “बाकी का लंड भी मेरी चूत में जल्दी से डाल दो।”

उसने पूरी ताकत के साथ एक फाइनल धक्का मारा। मैं दर्द से तड़पने लगी और सिर के बाल नोचने शुरू कर दिए। मेरे आँखों से आँसू निकल रहे थे। वो मेरे चेहरे को देख रहा था और बोला – “अनामिका, अब मेरा लंड तुम्हारी चूत में पूरा घुस चुका है।”

मैं भी उसके दोनों बॉल्स को अपनी चूत पर महसूस कर रही थी – उनकी गर्माहट, उनका दबाव। मैंने कहा – “रितेश, रुको मत! अब जोर-जोर से धक्के लगाओ। अभी मेरी चूत चौड़ी नहीं हुई है। जब तुम जोर-जोर से धक्के लगा कर मुझे चोदोगे तब मेरी चूत चौड़ी हो कर तुम्हारे लंड के साइज की हो जाएगी और मेरा दर्द खत्म हो जाएगा। फिर मैं भी मजा ले सकूँगी।”

उसने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए – थप थप.. फच फच.. की आवाजें गूँजने लगीं। बीस-पच्चीस धक्कों के बाद मेरा दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा और मेरी चूत ने इस बार ढेर सारा पानी छोड़ दिया। अब मेरी चूत और ज्यादा गीली हो चुकी थी।

फिर हमने डॉगी स्टाइल में चुदाई की। मैं जमीन पर डॉगी स्टाइल में हो गई – मेरे हाथ और घुटने ज़मीन पर, मेरी गांड ऊपर उठी हुई। रितेश मेरे पीछे आ गया। उसने मेरी चूत के लिप्स को फैला कर अपने लंड का टोपा बीच में रख दिया तो मैं बोली – “एक झटके से पूरा लंड डाल दो मेरी चूत के अंदर।”

उसने मेरी कमर को जोर से पकड़ा और पूरी ताकत के साथ एक झटका मारा – उसका नौ इंच का लंड सनसनाता हुआ मेरी चूत की गहराइयों में समा गया। इसी तरह तीन दिनों तक रितेश मुझे तरह-तरह के स्टाइल में चोदता रहा। मुझे उससे चुदवाने में बहुत मजा आया।

अब मेरी चूत एकदम चौड़ी हो चुकी थी। रितेश अब चाहे जिस स्टाइल में मेरी चूत में अपना लंड घुसाता, मुझे थोड़ा भी दर्द नहीं होता था और उसका लंड मेरी चूत में एकदम गहराई तक आराम से घुस जाता था। अब हम दोनों ने सेक्स में वह मज़ा पा लिया था जिसकी हमें तलाश थी – बिना किसी डर के, बिना किसी झिझक के, पूरी तरह से खुलकर।

मैं एक खुशकिस्मत पत्नी हूँ – मेरा पति मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, मेरा सबसे अच्छा प्रेमी है, और मेरा सबसे अच्छा चोदने वाला भी।

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