2 महीने बाद बेरहम चुदाई – पति ने मायके से आई बीवी को ऐसे चोदा

⏱️ 19 min read

2 महीने बाद बेरहम चुदाई – क्या आपने कभी दो महीने बाद अपने पति से मिलने पर ऐसी चुदाई का अनुभव किया है? इस हॉट हिंदी सेक्स स्टोरी में पढ़िए सान्वी की जुबानी वो सुबह, जब 2 महीने बाद बेरहम चुदाई ने उसकी ज़िंदगी में नया रंग भर दिया। मायके में दो महीने बिताकर जब वह ससुराल लौटी, तो उसके पति ने उसे घर में घुसते ही पकड़ लिया और उसकी गीली चूत में अपना मोटा लंड डाल दिया। 2 महीने बाद बेरहम चुदाई करते हुए पति ने उसे घोड़ी बनाया, पीछे से पेला, और ऊपर बैठाकर सवारी करवाई। अगर आप बेरहम चुदाईपति से दूरी के बाद सेक्स, और मोटा लंड चूत में डालने की कहानी ढूंढ रहे हैं, तो यह गर्म दास्तान आपके लिए ही है।

भाग 1: 2 महीने मायके में – पति से दूरी और बढ़ती बेचैनी

मैं 2 महीने के लिए अपने मायके गई थी। साल के 10 महीने मैं अपने ससुराल में ही रहती थी। गरमी में 2 महीने के लिए गरमी की छुट्टियाँ हो जाती थी, तब मुझे मायके जाने का मौका मिलता था। मैं अपने मायके चली गई थी और 20 दिन बीत चुके थे। माँ के घर का अपना ही मजा था – मेरे भाई-बहन, मेरे पुराने दोस्त, वो गली-मोहल्ले, वो बचपन की यादें। मैं सबके साथ समय बिता रही थी, लेकिन दिल में एक खालीपन था।

फिर पति का फोन आया।

“सान्वी जान… जल्दी से घर आ जाओ। 20 दिन से मुझे तुम्हारी चूत नहीं मिली है!!” पति बोले। उनकी आवाज़ में बेचैनी साफ झलक रही थी। मैं जानती थी कि वो दिन-रात मेरे बारे में सोच रहे हैं, हमारी रातों के बारे में, हमारी चुदाई के बारे में।

“सुनिये जी!! मैं कम से कम 2 महीने माँ के पास रहूँगी। तब तक आप हाथ से मुठ मार कर काम चला लीजिये!!” मैंने कहा। मैंने यह मजाक में कहा था, लेकिन पति के दिल पर लग गया।

“अरे… जान, तुम जानती हो कि मुठ मारने में वो मजा कहाँ आता है जो चूत चोदने में आता है। प्लीज जल्दी से लौट आओ!!” पति बोले। पर मैंने उनकी सब बातें काट दी और अपनी माँ के पास मायके में ही रहने लगी। क्योंकि मुझे घर की बहुत याद आती थी और ससुराल में ज़रा भी अच्छा नहीं लगता था।

दोस्तों, मेरे पति बहुत ही सेक्सी आदमी थे और एकदम जवान थे। उनकी छाती चौड़ी थी, हाथ मजबूत थे, और उनका लंड – भगवान – नौ इंच से कम नहीं था। वो दिन-रात मेरी चूत लेते थे। उनको सेक्स करना बहुत पसंद था और इधर मैं भी कुछ इसी तरह की औरत थी कि मुझे रोज़ मोटा लंड खाना बहुत पसंद था। हम दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने थे – वो चोदने वाला, मैं चुदने वाली।

अब मुझे मायके आए 1 महीना बीत चुका था, इसलिए मैं भी लंड खाने को तरस रही थी। मैं रातों-रात अपने कमरे में लेटकर पति के बारे में सोचती थी – उनके हाथ, उनके होंठ, उनका वो मोटा लंड जो मेरी चूत को फाड़ देता था। मैं अपनी चूत में डिल्डो डाल के मजा ले लेती थी, लेकिन वो असली लंड जैसा एहसास नहीं देता था। डिल्डो ठंडा था, बेजान था। मुझे पति की गर्माहट चाहिए थी। इसके अलावा मैं अपनी उंगलियों से भी काम चला लेती थी – अपनी क्लिट को रगड़ते हुए, अपनी चूत में दो उंगलियाँ डालते हुए। लेकिन वो सब अधूरा सा लगता था।

उधर मेरे पति आजकल अपने हाथ से काम चला रहे थे, पर उनको वो चूत वाला मजा नहीं मिल रहा था। वो रोज़ फोन करते, “सान्वी, कब आ रही हो? मेरा लंड तुम्हारी चूत के बिना पागल हो जाएगा।” मैं उनकी बातें सुनकर मुस्कुराती थी, लेकिन दिल में मैं भी उतनी ही बेचैन थी।

धीरे-धीरे 2 महीने कट गए और मेरे बच्चों का स्कूल खुल गया। माँ के घर से आने का दिल तो नहीं कर रहा था – माँ के हाथ का खाना, भाई-बहनों की शरारतें, वो पुरानी यादें – सब कुछ छोड़ना मुश्किल था। पर क्या कर सकता है, हर शादीशुदा लड़की को एक दिन अपने ससुराल तो आना ही पड़ता है। इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे अपने पति के पास लौटना पड़ा। मेरा दिल तो वहीं माँ के पास रुक गया था, लेकिन मेरी चूत पति के लंड के लिए तरस रही थी।

बच्चों को लेकर मैंने ट्रेन पकड़ ली और फिर ससुराल आ गई। ट्रेन का सफर लंबा था – लगभग 12 घंटे। मैं पूरे रास्ते सोचती रही कि पति कैसे मुझे देखेंगे, क्या बोलेंगे, और सबसे ज्यादा – क्या वो मुझे तुरंत चोदेंगे? मेरी चूत में पानी आ रहा था, सिर्फ सोचकर। मैंने अपनी जांघों को एक-दूसरे से रगड़ा, और उस एहसास को दबाने की कोशिश की।

भाग 2: ससुराल लौटते ही पति ने पकड़ा हाथ

जैसे ही मैं घर में घुसी, मेरी सास, ननद, देवर और ससुर मुझसे बात करने लगे और पूछने लगे कि ट्रेन से आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई। मेरी सास ने मेरे लिए तुरंत चाय बनाई। उनके चेहरे पर मुस्कान थी – वो भी मुझसे बहुत प्यार करती थीं। मैंने चाय पी ली और सबके साथ बैठ कर मैं बात कर रही थी।

मेरे बच्चे अपने दादा के पास खेलने चले गए। मैंने अभी कपड़े भी नहीं बदले थे कि पति ने आवाज लगाई। उनकी आवाज़ में वही जुनून था, वही बेचैनी, लेकिन इस बार उसमें एक हल्का सा गुस्सा भी था – 2 महीने के इंतज़ार का गुस्सा।

“सान्वी… इधर आना!!” पति ज़ोर से बोले। मैं सास और ननद के पास से उठकर पीछे पति के कमरे में चली गई। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था – मुझे पता था कि आगे क्या होने वाला है।

जैसे ही मैं कमरे में पहुँची, उन्होंने तुरंत मुझे पकड़ लिया और किस करने लगे। उनके होंठ मेरे होंठों पर थे – सूखे हुए, लेकिन बहुत जोरदार। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई, और उनके हाथ मेरी पीठ पर थे।

“सान्वी!! मुझे अभी चूत दे। तू नहीं जानती कि मैंने 2 महीने कैसे गुजारे हैं बिना तेरी गदराई चूत के!!” पति बोले। उनकी आँखों में आग थी, उनकी साँसों में ज्वाला थी।

“अभी मैं सास और ननद से बात कर रही हूँ। अभी कुछ देर में आती हूँ!” मैंने कहा तो पति ने मेरा हाथ पकड़ लिया और दरवाजा बंद कर लिया – क्लैक की आवाज़ ने पूरे कमरे में सन्नाटा भर दिया।

“देख सान्वी… नाटक मत कर। मैं 60 दिन बिना तेरी चूत मारे गुज़ारे हैं। अब मेरा काम नहीं चल रहा है। पहले मुझे चूत दे दे, फिर घर में सबसे बात कर लेना!!” पति गुस्से में बोले। उनकी बातों में दर्द भी था और जुनून भी।

“अरे यार… ऐसे दिन में अच्छा नहीं लगता। सब लोग घर में क्या सोचेंगे!!” मैंने झुलते हुए कहा, पर पति ने मेरी एक भी बात नहीं सुनी। उन्होंने मेरी साड़ी की गाँठ खोल दी, और साड़ी मेरे शरीर से खिसक कर नीचे गिर गई। फिर ज़बरदस्ती मुझे बिस्तर पर लिटा लिया और मेरा ब्लाउज खोल दिया – एक-एक बटन, जल्दी-जल्दी। फिर मेरी ब्रा और पैंटी भी निकाल दी – मेरे शरीर की सारी कपड़े हटा दी।

भाग 3: 2 महीने बाद बेरहम चुदाई – सुबह-सुबह नंगा किया

अब मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी। पति कपड़े निकाल कर मेरे ऊपर लेट गए थे और मेरे दूध मुँह में लेकर पीने लगे। मुझे चुदाई बहुत पसंद है। पति का मोटा लंड खाना बहुत पसंद है, पर अभी सुबह के 11 बजे थे और घर में सब लोग मुझसे बात करने के लिए मेरा इंतजार कर रहे थे। इधर पति को मेरी चूत मारने की तलब लगी थी। वो मेरे दूध पीने लगे – मेरे बाएँ स्तन को पहले, फिर दाएँ को, फिर बाएँ को फिर से।

“सुनो जी, घर में सब लोग मेरा इंतज़ार कर रहे हैं। कृपया मुझे छोड़ दीजिए और जाने दीजिए!!” मैंने कहा, लेकिन मेरी आवाज़ में कोई जोर नहीं था। असल में, मैं भी उनकी बाहों में पिघल रही थी।

“बस 10 मिनट रुक जा। मैं तेरी चूत मार लूँगा। बस 10 मिनट लगेंगे!!” पति बोले। उन्हें क्या पता था कि 10 मिनट की बात आधे घंटे में बदल जाएगी।

सुबह-सुबह मुझे चुदाई बड़ी अजीब लग रही थी। अभी मुझे मायके से आए 5-10 मिनट भी नहीं हुए थे और पति मुझे चोदने लगे। पर वो मेरे पति थे, मैं कैसे उनको मना सकती थी? और सच कहूँ तो, मैं मना भी नहीं करना चाहती थी। मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी – उनके स्पर्श से, उनके चुंबन से, उनकी बेचैनी से। इसलिए मैं खुलकर दोनों टाँगें फैलाकर लेट गई।

“अच्छा ठीक है – आप छोड़ दीजिए, पर जल्दी करिए। उधर घर में सब लोग मेरा इंतज़ार कर रहे हैं!!” मैंने कहा, और अपनी आँखें बंद कर लीं।

फिर मेरे पति मेरे मस्त-मस्त दूध पीने लगे। दोस्तों, मैं बहुत सुंदर औरत थी। मेरा रंग बहुत साफ था और चेहरे की छाप बिल्कुल करीना कपूर जैसी थी। मुख्य नायिका जैसी लगती थी। बहुत खूबसूरत औरत थी मैं। मेरा जिस्म तो बहुत ही सुंदर था और मैं 5 फुट 6 इंच लंबी औरत थी। मेरा फिगर 38-36-34 था – 38 के स्तन, 36 की कमर, 34 के कूल्हे। मेरा जिस्म एकदम भरा हुआ था और मैं खाने, चोदने और पेलने लायक एक मस्त आइटम थी। इसलिए मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते थे। मैं भी अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ।

मेरे पति मेरी इसी ख़ूबसूरती पर फ़िदा थे और इस वक़्त मेरे 38″ के स्तन मुँह में लेकर चूस रहे थे। मेरी चूचियाँ बहुत बड़ी-बड़ी, गोल-गोल, भारी-भारी थीं जो किसी आम जैसी लगती थीं – कच्चे आम की तरह दृढ़, लेकिन पके आम की तरह रसीली। मेरे पति इस वक़्त मेरे आम को मुँह में लेकर चूस रहे थे। उनको पूरा मज़ा मिल रहा था। धीरे-धीरे मुझे भी मजा मिलने लगा।

फिर उन्होंने अपना मोटा लंड मेरी चूत में डाल दिया। एक ही झटके में – बिना किसी चेतावनी के। मेरे मुँह से “आह्ह्ह!” निकल गई। उनका लंड मेरी चूत में समा गया – पूरा नौ इंच, मोटा, लोहे की तरह सख्त।

और फिर वो मेरी बुर चोदने लगे। मुझे मजा आने लगा। हालांकि मुझे सुबह-सुबह चुदवाने में बड़ी शर्म आती है। क्योंकि जब मेरा कमरे का दरवाजा बंद हो जाता है तो घर में सब लोग जान जाते हैं कि अंदर मैं और पति देव चुदाई का मजा ले रहे हैं। पर आज मैं 60 दिन बाद लौटकर ससुराल आई थी, इसलिए पति मुझे घपाघप बजा रहे थे।

मैं चुद रही थी। मैं पूरी तरह से बिस्तर पर नंगी थी और पति का लंड जल्दी-जल्दी मेरी चूत में आ-जा रहा था। मेरे पति तो बिल्कुल चूत के पुजारी हैं। बिना चूत मारे उनका काम ही नहीं चलता। इसलिए आज जैसे ही मैं मायके से आई, तो मुझे बजाने लगे। मैं “आअह्ह्ह… ईईईई… ओहोह्ह… अई… अई… अई… अई… मम्मी…” की आवाज निकलने लगी, क्योंकि मैं चुद रही थी और बहुत ज्यादा उत्तेजना में आ गई थी।

मैंने दोनों हाथों से पति को पकड़ लिया था – मेरे नाखून उनकी पीठ पर गड़ रहे थे। वो मेरे नंगे, चिकने, कामुक और बेहद सेक्सी बदन पर लेट गए। मेरे दूध को वो चूस रहे थे और मुझे जल्दी-जल्दी ठोक रहे थे। मुझे बड़ा मजा आ रहा था और मेरी आँखें चुदाई के नशे से बंद हो रही थीं।

पति का लौड़ा मेरी चूत में जल्दी-जल्दी किसी ट्रेन की तरह सरक रहा था और मुझे बजा रहा था। थप-थप-थप की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। मैं उनकी हर थाप को अपनी चूत के अंदर महसूस कर रही थी।

कुछ देर बाद पति मुझे जल्दी-जल्दी पेलने लगे और मैं “…मम्मी…मम्मी…सी सी सी… हा हा हा… उउउउ… उंघ उंघ… उंह… उन्न्ह…” की आवाजें निकलने लगी। पति का लंड मेरी चूत को बहुत जल्दी-जल्दी चोद रहा था और मेरे गुलाबी चूत को फाड़ रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था – वो मजा जो मैंने 2 महीने में पहली बार महसूस किया था।

फिर पति अचानक से तेज़-तेज़ झटके मेरी रसीली चूत में मारने लगे। मैंने अपनी चिकनी टाँगों को पति की कमर में गोल-गोल लपेट दिया। मैंने पति को कस कर पकड़ लिया और सीने से चिपका लिया। पति मुझे कमर मटका-मटकाकर बजा रहे थे और मेरी चूत को अपने मोटे लौड़े से फाड़ रहे थे। मैं जन्नत का मजा ले रही थी।

भाग 4: घोड़ी बनाकर पीछे से चोदा और माल गिराया

इसी तरह मुझे बजाते-बजाते 20 मिनट हो गए और उधर मेरी सास मुझे आवाज देने लगी।

“अरी बहू-कहाँ गई… तेरी चाय ठंडी हो रही है। बहू… बहू…” मेरी सास आवाज देने लगी। मैं घबरा गई – उनकी आवाज़ दरवाजे के पास आ रही थी।

“सुनिये जी, 20 मिनट से आप मुझे पेल रहे हैं। बस अब छोड़िये, माँ जी बुला रही हैं… प्लीज़ मुझे छोड़िये!!” मैंने कहा, पर पति ने मुझे नहीं छोड़ा और मुझे घपाघप बजाते रहे। उनका माल ही नहीं झड़ रहा था। 60 दिन से उनको चूत चोदने को नहीं मिली थी, शायद तभी उनका माल भी गिर नहीं रहा था। 20 मिनिट हो चुके थे, पति मेरी चूत में अपने लौड़े से बैटिंग किए जा रहे थे।

फिर उन्हें अपना लंड निकाल लिया और मेरे दूध पीने लगे। इधर अब मैं भी गरम हो चुकी थी और ठुकाई का मजा ले रही थी। पति मेरे खूबसूरत स्तन का अमृतपान कर रहे थे। मेरी निप्पल्स को मुँह में लेकर चूस रहे थे।

मेरी निप्पल्स बहुत खूबसूरत थीं। उनके चारों तरफ़ बड़े-बड़े काले-काले घेरे थे जो बहुत सेक्सी और कामुक लग रहे थे। पति देव तो आज ऐसे मेरी चूचियाँ पी रहे थे जैसे जन्मों के बाद उनको मिली हों। वो मेरी निप्पल्स को कामुक तरीके से काट देते थे, फिर अपनी जीभ से उन्हें चाटते थे। मैं “…उई…उई…उई…माँ…ओह्ह्ह्ह माँ…अह्ह्ह्ह…” बोलकर अपनी कमर उठा देती थी।

पति ने मुझे नहीं छोड़ा और मेरे मम्मे पीते रहे। उधर मेरी सास मुझे आवाज दे-देकर थक गई। इधर मेरे पति मुझे बजा रहे थे। फिर पति ने मेरी दोनों रसीली चूचियों को चूसना जारी रखा। मुझे भी दूध पिलाने में खूब मजा आ रहा था।

फिर पति ने मेरी दोनों टाँगों को खोल दिया और मेरी चूत में 2 उंगलियाँ डाल दीं। मैं पागल हो रही थी – उनकी उंगलियाँ मेरी चूत की गीली दीवारों को छू रही थीं, मेरी क्लिट को दबा रही थीं। मुझे बहुत ज़्यादा उत्तेजना हो रही थी। पति आज तो कामदेव की तरह लग रहे थे। आज मुझे चोदकर वो पूरा मजा लेना चाहते थे। वो जल्दी-जल्दी मेरी रसीली और नम बुर को अपनी उंगलियों से चोदे जा रहे थे। मैं पागल हो रही थी।

मैंने पति के हाथ को पकड़ कर रोकने ली, पर वो नहीं रुके और अपनी 2 उंगलियाँ अंदर गहराई तक मेरी चूत में उतार दी थीं। मैं बार-बार अपनी गांड उठाती थी। पति तो जैसे आज मेरे गुलाबी चूत को फाड़ ही देना चाहते थे। मेरी तो यहाँ उत्तेजना से जान जा रही थी।

मैं मजा ले रही थी। पति ने आधे घंटे मेरी बुर फेटी तो मेरी चूत से उसका सफ़ेद मक्खन निकलने लगा जो पति के हाथ में छुप गया। पति मेरी चूत का पूरा माल पी गए – वो अपनी उंगलियों को मुँह में लेकर मेरा सारा मक्खन चाट गए। मैंने उन्हें देखा और मेरे अंदर और भी उत्तेजना बढ़ गई।

फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया। मैं उलटी घूमकर अपने घुटनों को मोड़कर घोड़ी बना दिया और मैंने अपना पिछवाड़ा माउंट एवरेस्ट पहाड़ की तरह ऊंचा उठा दिया। मेरे 34″ के गोल-मटोल पुट्ठे हवा में थे, और मेरी चूत पूरी तरह खुली हुई थी।

पतिदेव मेरे पिछवाड़े पर आ गए और मेरे 34″ के चिकने, गोल पुट्ठे सहलाने लगे और छूने लगे। मैं “उ उ उ उ ऊऊऊ… ऊँ—ऊँ…ऊँ अह्ह्ह्हह्ह सी सी सी… हा हा हा… ओ हो हो…” करने लगी।

आज पूरे 60 दिनों के बाद मुझे भी सेक्स करने का मौका मिला था, इसलिए मुझे भी काफी खुशी मिल रही थी और मजा आ रहा था। पति बड़े प्यार से मेरे गोल-मटोल गांड को हाथ से सहला रहे थे और दबा रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

“सान्वी… जान, बाय गॉड!! तुमसे हसीन औरत मैंने आज तक नहीं देखी!!” पति बोले और मेरी तारीफ करने लगे। मैं खुश हो गई। बड़ी देर तक वो मुझे घोड़ी बनाए रखे और मेरे मुलायम गांड को सहलाते और चूमते रहे। उनके होंठ मेरे पुट्ठों पर थे, उनकी जीभ मेरे गांड के बीच में घुस रही थी।

फिर वो पीछे से मुँह लगाकर मेरे चूत को पीने लगे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। पति अपने होठों से मेरी रसीली चूत की एक-एक कली को चाट रहे थे। मैं अपने पिछवाड़े को ऊपर उठाए हुए थी और पूरा मजा ले रही थी। पतिदेव मेरी चूत के भीतर अपनी जीभ डाल रहे थे। मैं सिसक रही थी और कराह रही थी।

कुछ देर बाद पति ने मेरे चूत में अपना मोटा लंड डाल दिया और किसी कुत्ते की तरह मुझे चोदने लगे। दनादन धक्के – थप-थप-थप – मेरी गांड उनकी जांघों से टकरा रही थी। मुझे बहुत मजा मिल रहा था।

कामवासना में आकर मैं अपने रसीले होठों को अपने दाँत से काट रही थी और होठ चबा रही थी। मेरा पूरा शरीर जल रहा था। पति पीछे से दनादन मुझे चोद रहे थे। मैं घोड़ी बनी हुई थी। मेरे पति को मुझे घोड़ी बनाकर चोदना बेहद प्रिय था। हर रात वो मुझे घोड़ी जरूर बनाते थे और इस तरह खूब जी भर कर मेरी चूत बजाते थे। मुझे भी इस पोज़ में सेक्स करना बेहद पसंद था।

पति ने मेरे चिकने और सफेद पुट्ठों को हाथ में कस कर पकड़ रखा था और किसी कुत्ते की तरह मुझे पीछे से पेल रहे थे। मैं “उ उ उ उ ऊऊऊ….ऊँ—ऊँ…ऊँ अह्ह्ह्हह्ह सी सी सी…हा हा हा…ओ हो हो…” कह-कह कर चिल्लाने लगी थी।

इस तरह पति ने मुझे 35 मिनट तक चोदा, फिर भी उनका माल नहीं गिरा। उनका स्टेमिना देखते ही बनता था – 60 दिन की भूख ने उन्हें और भी ताकतवर बना दिया था।

भाग 5: सवारी करते हुए आधे घंटे में शहीद हुए पति

फिर वो सीधे बिस्तर पर लेट गए और मुझे अपने कमर पर लौड़े पर बैठा लिया।

“जान… अब तुम मेरे लौड़े की सवारी करो!!” पति बोले। मैं उनके ऊपर बैठ गई – उनके मोटे लंड को अपनी गीली चूत के अंदर लेकर।

धीरे-धीरे मैं उनकी कमर पर बैठ कर उनके लौड़े की सवारी करने लगी। पहले धीमे-धीमे, फिर तेज़। मैं अपने कूल्हों को आगे-पीछे कर रही थी, गोल-गोल घुमा रही थी। मेरे 38 के स्तन उछल रहे थे, मेरे बाल बिखर रहे थे।

कुछ ही देर में मैं तेज़-तेज़ अपनी कमर को चलाने लगी। मैं अच्छे से चुद रही थी। पति के लौड़े को मैंने अपने रसीले चूत में ले रखा था। फिर वो भी नीचे से मुझे धक्के मारने लगे – जब मैं नीचे आती, वो ऊपर उठते, और हमारे शरीर फच-फच की आवाज़ों से गूँज उठते।

और इस तरह आधे घंटे बाद वो मेरी चूत में ही शहीद हो गए। उनके लंड ने अपना गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरी चूत की गहराइयों में छोड़ दिया – एक, दो, तीन, चार धारें। मैंने उस गर्माहट को अपने अंदर महसूस किया, और मैं भी उसी पल झड़ गई।

हम दोनों हाँफ रहे थे – थके हुए, पसीने से भीगे हुए, लेकिन पूरी तरह से संतुष्ट। पति ने मुझे अपने सीने से लगा लिया, और मैं उनके दिल की धड़कन सुन सकती थी – तेज़, जोरदार, एक सैनिक की तरह।

मैं कपड़े पहनकर सास के पास पहुँची। ननद भी कॉलेज पढ़ने चली गई थी। सास ने मुझे देखा और मुस्कुराईं – उन्हें शायद अंदाज़ा था कि इतनी देर क्यों लगी। उन्होंने मेरी चाय फिर से गरम करके दी। मैं चाय पी रही थी, और मेरे शरीर में अभी भी उस चुदाई की गर्माहट बाकी थी।

2 महीने की जुदाई के बाद, उस दिन हमने एक-दूसरे को जिस तरह से चोदा था, वह भूलने लायक नहीं था। पति की बेरहम चुदाई, मेरी गीली चूत, हमारी चीखें, हमारे पसीने – सब कुछ उस दिन हमारे प्यार की निशानी बन गया।

अब हर रात वो मुझे याद दिलाते हैं कि कभी 2 महीने के लिए मायके मत जाना, नहीं तो फिर से ऐसी बेरहम चुदाई होगी। और मैं मुस्कुराती हूँ, क्योंकि मुझे तो यही बेरहम चुदाई पसंद है।

📲 इस कहानी को अपने करीबी दोस्तों के साथ शेयर करें 😉

Leave a Comment