शादी की पहली रात में चुदाई – मेरा नाम राघव है और मैं नागपुर, महाराष्ट्र में रहता हूँ। मेरी यह फर्स्ट नाइट स्टोरी लगभग आठ वर्ष पहले शुरू हुई थी। उस समय घर वालों की पसंद से मेरा विवाह रायपुर में हो गया। मेरी पत्नी भाविका की हाइट 5’7″ है और वो गदराए बदन की है। उस रात का वो कमरा, वो बिस्तर, वो खुशनुमा माहौल, उस पर एक जवान, सुंदर पत्नी को पाने की लालसा—सच में मैं बहुत ही उत्तेजित था। यह कहानी है मेरी और भाविका की शादी की पहली रात की, जब उसने पहली बार मेरी चूत चाटी, मैंने उसका लंड चूसा, फिर 69 पोजीशन में मस्ती की, और आखिर में उसने मेरी कुंवारी चूत में अपना लंड घुसाकर मेरी सील तोड़ दी। पढ़िए राघव और भाविका की यह यादगार और सच्ची कहानी।
भाग 1: शादी का दिन और पहली मुलाकात
मेरा नाम राघव है और मैं नागपुर, महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करता हूँ। मेरी यह कहानी लगभग आठ साल पुरानी है, जब मेरी उम्र तीस साल थी और मैं अपने जीवन के सबसे खूबसूरत दौर में प्रवेश करने वाला था। मेरे माता-पिता ने मेरे लिए रायपुर में एक रिश्ता ढूंढा था। लड़की का नाम था भाविका। जब मैंने पहली बार उसकी तस्वीर देखी, तो मेरी नजरें वहीं थम गईं। भाविका की लंबाई 5’7″ थी और उसका शरीर एकदम गदराया हुआ और सुडौल था। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ, और उसकी मुस्कान—सब कुछ मुझे अपनी ओर खींच रहा था। मैंने तुरंत ही इस रिश्ते के लिए हाँ कर दी।
शादी की तैयारियाँ जोर-शोर से शुरू हो गईं। दोनों परिवारों के बीच बातचीत हुई और शादी की तारीख तय हो गई। मैं हर रात सोने से पहले भाविका की तस्वीर को देखता और सोचता कि कैसी होगी वो पहली रात, जब मैं उसे अपनी बाहों में भरूंगा। मेरे दोस्त मुझे चिढ़ाते थे और कहते थे कि पहली रात का मजा ही कुछ और होता है। उनकी बातें सुनकर मेरी उत्तेजना और भी बढ़ जाती थी।
आखिरकार वो दिन आ ही गया। मेरी और भाविका की शादी धूमधाम से संपन्न हुई। शादी की सारी रस्में पूरी होने के बाद, रात के करीब ग्यारह बजे मुझे मेरे कमरे में भेज दिया गया। कमरा बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया था। बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं, हल्की रोशनी में मोमबत्तियाँ जल रही थीं, और पूरे कमरे में एक मीठी सी खुशबू फैली हुई थी। वह माहौल इतना रोमांटिक था कि मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
कमरे में जाते ही मैंने दरवाजा बंद किया और सीधा बिस्तर पर बैठी अपनी पत्नी भाविका के पास जाकर बैठ गया। वह मरून कलर की साड़ी में सजी-संवरी बैठी थी। उसके माथे पर सिंदूर, मांग में टीका, हाथों में मेहंदी, और पैरों में पायल—वो सच में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। उसे देखकर मेरी सांसें थम गईं। मैं सोच रहा था कि मैं कितना खुशनसीब हूँ जो ऐसी खूबसूरत पत्नी मुझे मिली है।
मैंने सबसे पहले उसके होंठों को चूमा। उसके रसीले होंठों को चूमता चला गया, चूमता ही चला गया। मैं अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं रख पा रहा था और उसे बहुत जोर से चूम रहा था। तभी भाविका ने झटके से मुझे अपने से अलग किया। मैं समझ ही नहीं पाया कि क्या हो गया। पता चला कि ज्यादा जोर से चूमने से उसके होंठों में दर्द होने लगा था। वह बोली, “धीरे से चूमिए, नहीं तो सूज जाएंगे।”
मैं तो पूरी तरह से उत्तेजित था, लेकिन उसके कहने पर मैंने थोड़ा धीरे चूमना शुरू कर दिया। उसके बाद मैं उसके गुलाबी गालों को चूमने लगा। मेरा एक हाथ सरककर उसके सुडौल चूचियों पर चला गया और मैं उन्हें दबाने लगा। उसकी चूचियाँ बहुत ही मुलायम और भरी हुई थीं। उन्हें दबाने में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी। मेरा लंड मेरी पैंट के अंदर बाहर निकलने के लिए फुंफकार मार रहा था।
मैंने धीरे से भाविका का ब्लाउज खोल दिया। अंदर लाल रंग की एक डिजाइनर ब्रा थी, जिसमें उसके दोनों कबूतर बाहर आने को फड़फड़ा रहे थे। मैंने ब्रा न खोलते हुए ऊपर से ही उसके चूचियों को सहलाना शुरू रखा और उसके साथ-साथ उसकी गर्दन और कंधों को चूमता रहा। वो भी इसका आनंद ले रही थी। इसके साथ ही कभी-कभी भाविका की सिसकारी निकल जाती थी, जो मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी।
चूमते-चूमते मैं उसकी पीठ की ओर गया और उसकी पीठ को चूमने लगा। मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स को पकड़कर दबा रहे थे। उसकी सिसकारियाँ बढ़ रही थीं, तो मेरी उत्तेजना भी बढ़ गई थी। मेरा लंड अब पूरी तरह से टाइट और सख्त हो गया था। तभी पीठ को चूमते हुए मैंने उसकी ब्रा की हुक खोल दी। उसके दोनों कबूतर बाहर निकलकर आ गए। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स को दबाना शुरू रखा। ऐसा करते हुए मैंने उसे बिस्तर पर खड़ा कर दिया।
अब मैं बिस्तर पर बैठकर ही उसके बड़े प्यारे चूचियों को बारी-बारी से चूस रहा था। जैसे ही मैंने अपनी जीभ से उसके गुलाबी निप्पल को छुआ, वो पीछे की ओर सरक गई। मैंने उसकी पीठ को सहलाते हुए उसे आगे खींचा और मेरा हाथ उसकी भरी हुई गांड पर घूमने लगा। मैं अब थोड़ी ताकत से उसकी गांड दबाने लगा। उसकी गांड बहुत ही मुलायम और उभरी हुई थी। इतने में ही वह भी कसमसाने लगी। उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया और मेरे कपड़े भी निकालकर मुझे पूरा नंगा कर दिया।
नंगा होते ही मेरा फनफनाया हुआ लंड झटके मारने लगा था। मेरा लंड देखकर भाविका की आँखें फैल गईं। वो शायद पहली बार किसी मर्द का लंड देख रही थी। उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और मुझे खड़े-खड़े ही चूमने लगी। उसका हाथ मेरे लंड पर बहुत नर्म और मुलायम लग रहा था। काफी देर तक खड़े रहकर इसी तरह की चूमा-चाटी करने के बाद हम दोनों फिर से बिस्तर पर बैठ गए।
भाग 2: पहली बार चुदाई – दर्द और खून
मैंने धीरे से उसकी पैंटी उतार दी। अब मेरे सामने उसकी फूली हुई एकदम चिकनी चूत थी। वो पूरी तरह से क्लीन शेव थी और गुलाबी रंग की थी। मैंने धीरे से उसकी चूत को छुआ, तो वो सिहर उठी। मेरे स्पर्श मात्र से ही उसका पूरा शरीर काँप गया। मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू रखा। वो सिसकारियाँ भरने लगी और उसके हाथ का दबाव मेरे लंड पर बढ़ गया। वो मेरे लंड को जोर-जोर से पकड़ने और सहलाने लगी।
वो कहने लगी, “अब और मत तड़पाओ, जल्दी से इसे अंदर डाल दो।”
मैंने उसे और तड़पाने के लिए शरारत से कहा, “किसे डाल दूँ और कहाँ डाल दूँ?”
तो उसने हाथ से अपनी चूत की ओर इशारा किया। मैंने फिर पूछा, “ये क्या है?”
तब उसने शर्माते हुए कहा, “मेरी चूत है।”
मैंने इस सिचुएशन का फायदा उठाते हुए अपने लंड को उसके मुँह के पास ले आया, लेकिन उसने लंड चूसने से साफ मना कर दिया। वो बोली, “नहीं, ये मैं नहीं कर सकती। मुझे उल्टी जैसा लगेगा।” मैंने सोचा कि आज पहली बार है, इसे आगे मनवा लेंगे। आज उस पर जबरदस्ती करना ठीक नहीं होगा।
मैंने बिना क्रीम के ही अपना लंड उसकी चूत में डालने का प्रयत्न किया, लेकिन मैं असफल रहा। उसकी चूत वाकई बहुत टाइट थी। मेरे लंड का सुपारा भी उसमें नहीं जा पा रहा था। मैंने जितना भी जोर लगाया, लंड बाहर ही रह गया। भाविका भी दर्द से कराह रही थी।
फिर मैंने पास रखी कोल्ड क्रीम उठाई और अपने लंड के सुपारे पर अच्छे से लगाई। थोड़ी सी क्रीम मैंने उसकी चूत में भी लगा दी। अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद के पास रखकर धीरे से धक्का दिया, तो मेरा सुपारा ‘सटाक’ से उसकी चूत में चला गया। उसको थोड़ा सा दर्द हुआ। सही में बहुत ही टाइट चूत थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे लंड का सुपारा किसी बोतल में पैक हो गया हो। उसकी चूत की गर्माहट और कसावट ने मुझे पागल कर दिया था।
मैंने धीरे से उसके होंठों को चूमते हुए एक अच्छी पोजीशन ली और एक जोरदार धक्का लगा दिया।
“हाय राम… मर गई… आह निकालो इसे… आंह दुख रहा है।” ऐसा कहते हुए वो छटपटाने लगी। वो तो मेरे होंठों से वह दबी थी, अन्यथा उसकी चीख की आवाज पूरे घर में चली जाती। उसकी आँखों से आंसू निकल आए थे और उसका चेहरा दर्द से भर गया था।
मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में घुस चुका था। उसकी चूत की झिल्ली भी शायद फट चुकी थी, क्योंकि उसके खून का गीलापन भी मेरे लंड को महसूस हो रहा था। लेकिन मैं उसी पोजीशन में उसके ऊपर पड़ा रहा, उसे चूमता रहा। मैं उसके आंसू पोंछ रहा था और उसे प्यार से सहला रहा था।
वह छटपटाती रही और करीब दो मिनट बाद वह थोड़ी शांत हो गई। मैंने उसी पोजीशन में धीरे-धीरे धक्के देना शुरू कर दिए। अब शायद उसका दर्द भी कम हो चुका था और वो भी इस चुदाई का आनंद लेने लगी थी। उसकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं।
मौका देखकर मैंने फिर अपनी पकड़ मजबूत की और पोजीशन लेकर एक और जोरदार धक्का दे दिया। इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जड़ तक चला गया। वो मेरी पकड़ से निकलने के लिए जोर लगाने लगी, कसमसाने लगी। उसकी आँखों से फिर से आंसू निकल गए। मैं उसके होंठ, गाल, गर्दन—सब कुछ चूमता जा रहा था। उसी पोजीशन में तीन-चार मिनट के बाद उसका दर्द कम होने लगा।
मैंने धीरे-धीरे धक्के देना शुरू किया। कुछ धक्कों के बाद उसका दर्द भी शायद काफूर हो गया था, क्योंकि उसने भी अपनी गांड उठाकर मेरे धक्कों का साथ देना शुरू कर दिया था। अब वो भी चुदाई का आनंद लेने लगी थी। हम दोनों ही इसका आनंद ले रहे थे, लेकिन उत्तेजना के कारण अगले पांच मिनट में ही हम दोनों का पानी निकल गया।
मैंने अपना लंड उसकी चूत में से बाहर नहीं निकाला। मैं उसी तरह उसके ऊपर लेटा रहा। मेरे लंड के मुरझाने के कारण उसकी चूत का पानी, मेरे वीर्य के साथ मिलकर बहकर थोड़ा बाहर आने लगा था। मैं उसी पोजीशन में था। जब लगभग दस मिनट में मेरे लंड ने फिर से हिलोरें लेना शुरू कर दिया, तो लंड उसकी चूत के अंदर ही टाइट होने लगा।
मेरे लंड के टाइट होते ही उसकी चूत भी कसमसाने लगी। मैंने उसके चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। वो उत्तेजित होने लगी। मैंने उसी पोजीशन से दूसरी बार उसकी चुदाई शुरू कर दी। इस बार उसकी चूत पहले से ही गीली थी और मेरे वीर्य से चिकनी भी हो गई थी, इसलिए उसे कम तकलीफ हुई। वो भी नीचे से अपनी गांड उठाकर मेरे धक्कों का जवाब देने लगी। उसके मुँह से ‘आहहह… ओहह…’ निकलने लगा। उसके हाथों की पकड़ मेरी पीठ पर थी और उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे।
लगभग आठ-नौ मिनट में हम दोनों फिर से झड़ गए। इतने में ही मैं पूरी तरह से थक चुका था। मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चूत में से निकाला, तो हमारे वीर्य के साथ-साथ थोड़ा खून भी बाहर निकलने लगा। मैंने पेपर नैपकिन से उसे साफ किया।
भाविका बाथरूम जाने के लिए खड़ी हुई तो लड़खड़ा सी गई। मैंने तुरंत उसे पकड़ा और बाथरूम तक ले गया। उसकी चाल में थोड़ी लड़खड़ाहट आ गई थी। पहली बार चुदाई के बाद ऐसा होना स्वाभाविक था। हम दोनों पेशाब करने के बाद कमरे में आ गए। अब मेरी इच्छा एक बार और चुदाई करने की थी, लेकिन उसकी हालत देखकर उसने मना कर दिया। मैंने भी उसकी बात मान ली।
सुबह घरवालों के सामने उसकी किरकिरी न हो, इसलिए फर्स्ट नाइट के बाद हम दोनों ही चुम्मा-चाटी करके नंगे ही एक-दूसरे से चिपककर सो गए। सुहागरात को अपनी प्यारी बीवी के कौमार्य को रौंदने के बाद मुझे बहुत गहरी नींद आई।
भाग 3: सुबह की शर्म और दूसरी रात
सुबह 9 बजे भाविका ने ही मुझे उठाया। वो नहा-धोकर एकदम फ्रेश लग रही थी। उसका चेहरा भी चमक रहा था। उसके बाल गीले थे, उसी के पानी को छिटककर उसने मुझे नींद से उठाया था। मैंने लेटे हुए ही उसे अपने ऊपर खींच लिया और उसे चूमने लगा।
एक मिनट बाद वो बोली, “ये चुम्मा-चाटी बाद में कर लेना, अभी नीचे सब तुम्हारी राह देख रहे हैं। दोपहर में मोहल्ले की लेडीज भी आने वाली हैं, कुछ कार्यक्रम है।” ये कहकर वो चली गई।
मैं बेमन से उठा, फ्रेश होकर नीचे आया। बुआजी, भाई, भाभी, मेहमान—सभी मुझे देख रहे थे। मैं थोड़ा झेंप गया। बुआजी बोलीं, “बाबू बहुत देर तक जागे थे क्या… बड़े लेट उठे हो!” मैं कुछ कह नहीं पाया। तभी भाविका ने चाय लाकर दी, मैंने चाय पी ली और नहाने चल दिया। दिन भर तो कार्यक्रम में ही बीत गया।
रात को भोजन के बाद मैं जल्दी ही अपने कमरे में चला गया। भाविका मम्मी और बहन के साथ काम कर रही थी, इसलिए उसे आने में थोड़ी देर हो गई। उसके आते ही मैंने उसे पकड़कर बिस्तर पर लिटा दिया और चुम्मा-चाटी करने लगा। वो भी मेरे ही समान उत्तेजित थी।
कई मिनट तक चुम्मा-चाटी के पश्चात वो बोली, “कपड़े बदल लूं!” मैंने कहा, “नहीं, कपड़े निकाल दो।” मैंने तुरंत ही उसे नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया।
आज मैं उसे ऊपर से नीचे तक निहार रहा था। गदराया बदन, सुडौल बूब्स, गहरी नाभि, उभरी हुई गांड, फूली हुई चिकनी चूत, भरी हुई जांघें—यह सब देखते ही लंड महाराज फनफनाने लगे। भाविका मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी। मैंने प्यार से उसे बिस्तर पर बैठाया और उसके मस्तक, गाल, होंठ, गर्दन को चूमने लगा। एक हाथ से मैं आराम से उसका बूब दबाने लगा। वो भी इन कोमल स्पर्श से आनंदित होने लगी।
मैं धीरे से उसकी पीठ को चूमने लगा और दोनों हाथों से उसके चूचियों को, निप्पलों को दबाने और मसलने लगा। फिर धीरे से मैं सरककर उसके सामने आ गया और एक हाथ से एक दूध को दबाता और दूसरे को चूसता था। दोनों चूचियों को इसी तरह से सहलाते और चूसते ही वह गर्मा गई और सिसकारियाँ भरने लगी।
आज उसने अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी। मैंने धीरे से उसे अपने लंड को प्यार करने को कहा। उसने शर्माते हुए मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसके सुपारे की चमड़ी को बार-बार आगे-पीछे करने लगी। मैं अपने लंड को उसके मुँह के पास ले गया, तो उसने मेरे लंड को अपने गालों से सहलाया, अपने हाथों से मसला, लेकिन मुँह में नहीं लिया। मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया।
मैं अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाता जा रहा था। उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो गई थी। भाविका बोली, “अब अपने महाराज को हमारी चूत में डाल दो, बहुत बेचैन हो रही है।”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और पोजीशन लेकर अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया। मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस चुका था। आज बिना क्रीम के लंड के जाने के कारण उसे थोड़ा दर्द तो हुआ, लेकिन वह उसे सह गई। मैंने उसी स्थिति में धीरे-धीरे धक्के देना शुरू किया और मौका देखकर पोजीशन लेकर एक जोरदार धक्का देकर अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया।
“अरे माँ री… मैं मर गई।” ये कहते हुए उसने अपने होंठ भींच लिए। लेकिन कुछ ही देर में वो नॉर्मल हो गई और मैंने चुदाई शुरू कर दी। पांच मिनट बाद मैंने उसे घोड़ी बनने के लिए कहा और पीछे से लंड डालकर चुदाई शुरू कर दी। थोड़ी ही देर में वो झड़ गई। मैंने धीरे से उसे फिर नीचे लिटाया और चोदने लगा।
अब मैं पूरी ताकत से उसे चोद रहा था। उसे भी अब मजा आ रहा था। आज मुझे चुदाई करने में ज्यादा मजा आ रहा था और कुछ देर बाद वो भी नीचे से झटके देने लगी। थोड़ी देर बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए। पांच मिनट तक हम दोनों वैसे ही पड़े रहे। दोनों का रस उसकी चूत से बहकर बाहर आ रहा था। आज भाविका ने नैपकिन से अपनी चूत और मेरे लंड को साफ किया।
दिन भर कार्यक्रम के कारण वो थकी हुई थी। अब उसकी इच्छा सोने की थी। लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था। मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया, बाद में उसके कान की लौ को चूमने लगा। उसके बूब्स और निप्पलों को सहलाने, खींचने और चूमने लगा। इससे वह भी मुझसे लिपट गई और चूमने लगी।
आज मैं उसके निप्पलों को जोर से चूस रहा था, दांतों से उसे दबाकर धीरे से काट भी लेता था, तब उसकी सिसकारी निकल जाती थी। ऐसा करते-करते मैं और नीचे आकर उसकी गहरी नाभि को चूमने लगा। वो कमर हिलाने लगी। मैं एक हाथ से उसकी चूत को सहलाते जा रहा था। उसकी चूत पनिया गई थी।
आज मैं उसे पूरी तरह से उत्तेजित करने वाला था। मैंने धीरे से अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। वो चिहुंक उठी और बोलने लगी, “अब ज्यादा मत तरसाओ, अपने लंड महाराज को मेरी फुद्दी में डाल दो।”
मैंने उसकी नाभि छोड़ दी और नीचे आ गया। मैं उसकी भरी-पूरी जांघों को चाटने लगा, चूत की फांकों को मसलने लगा। वो तड़फने लगी और अपनी जांघों से ही मुझे पकड़ने लगी, बार-बार अपनी कमर उठाने लग गई, मेरे लंड को पकड़ने का प्रयत्न करने लगी। मैंने देखा कि लोहा गर्म है, तो मैंने धीरे से उसकी चूत की फांकों को चाटना शुरू किया। वह सिहर उठी। उसने अपने हाथों से मुझे अलग करने का प्रयत्न किया, लेकिन मैं डटा रहा। अंत में उसने हार मान ली और फुदक-फुदककर अपनी चूत चटवाने लगी।
अब वो पूरी तरह से पनिया गई थी और झड़ने के करीब आती जा रही थी। तभी मैंने चाटना बंद कर दिया। वो तड़फने लगी। वो मेरे लंड को सहलाने लगी और कहने लगी, “ये क्या आग लगाकर छोड़ दिया… जल्दी से मेरी फुद्दी की आग को शांत कर दो।”
तब मैंने कहा, “पहले मेरे लंड को प्यार करो, तभी ये सब हो पाएगा।”
उसने कहा, “मैं नहीं कर सकती, उल्टी हो जाएगी।”
मैंने कहा, “चोकोबार चूसती हो ना, वैसे ही चूसो।”
थोड़ी ना-नुकुर के बाद मजबूरन उसने मेरे लंड के सुपारे को पहले अपने होंठों से छुआ, फिर मेरे लंड के सुपारे को अपने होंठों पर फिराने लगी। फिर अपनी जीभ से उसे छुआ और जीभ को सुपारे पर घुमाने लगी, फिर सुपारे को धीरे से चूसने लगी। मुझे अलौकिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी। मैंने भी धीरे से थोड़ा-थोड़ा करके अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और सरक-सरककर 69 की पोजीशन ले ली। अब मेरा लंड उसके मुँह में और उसकी चूत मेरे मुँह में थी।
उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। मैं अपनी जीभ से उसकी गीली चूत को चूस रहा था। मैंने अपने हाथों से उसकी चूत की फांकों को अलग किया और उसकी चूत के भगनासे पर अपनी जीभ घुमाने लगा। वो काँपने लगी और जोर से मेरे लंड को चूसने लगी। अब भाविका को भी लंड चूसने में मजा आ रहा था। वह चटखारे लेकर मेरे लंड को पूरे मुँह में घुसाकर चूस रही थी। यूं ही चूसते-चाटते पांच मिनट में ही हम दोनों झड़ गए। उसने मेरा वीर्य पी लिया और मैंने उसका रस चाट लिया।
दिन भर के कार्यक्रम और दो बार की चुदाई से हम दोनों ही पूरी तरह से थक गए थे और हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से चिपककर वैसे ही सो गए।
भाग 4: हनीमून की तैयारी और महाबलेश्वर का सफर
तीसरे दिन भी मैं देर तक सोता रहा। सुबह 9 बजे भाविका ने आकर मुझे उठाया। वो नहाकर आई थी, उसके बाल गीले थे। मैंने उसे खींच लिया और चूमने लगा। फिर मैंने नीचे आकर चाय पी और नहाकर अपने दोस्तों से मिलने चला गया। दोपहर में सबके साथ लंच किया और फिर कमरे में तैयारी करने चला गया। हमें हनीमून मनाने के लिए महाबलेश्वर जाना था।
थोड़ी देर में भाविका आ गई और हमने साथ में ही सफर की तैयारी की। मैं बहुत उत्साहित था क्योंकि अब हम दोनों घर से दूर, बिल्कुल अकेले होंगे। हमें किसी के देखने या सुनने का कोई डर नहीं होगा। हम पूरी आजादी से एक-दूसरे के साथ रह सकते थे।
महाबलेश्वर के होटल में चेक-इन करते ही हमने खाने का ऑर्डर दिया और साथ में नहाने चल दिए। खाना खाने के बाद दोनों पूरे नंगे हो गए, फिर वही चुम्मा-चाटी शुरू हो गई। आज हम घर से बाहर होने के कारण भाविका भी ज्यादा खुलकर मुझे चूम रही थी। उसकी झिझक पूरी तरह से खत्म हो गई थी।
एक-दूसरे को चूमते-चूमते हम फिर से 69 की पोजीशन में आ गए। आज उसने मेरा लंड मुँह में लेने में ज्यादा संकोच नहीं किया। वो बड़े आराम से और मजे से मेरा लंड चूस रही थी। थोड़ी देर इस पोजीशन में रहने के बाद मैंने उसे बिस्तर पर नीचे लिटा दिया और एक तकिया उसकी गांड के नीचे लगा दिया, जिससे उसकी चूत उभरकर ऊपर की ओर आ गई।
अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रखा और एक ही झटके में अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया। उसे दर्द भी हुआ और अच्छा भी लगा। अब मैं उसे जोर-जोर से चोदने लगा। न जाने क्यों, आज मैं भी निसंकोच होकर पूरी ताकत से भाविका को चोद रहा था। और उसे भी शायद ज्यादा मजा आ रहा था, क्योंकि वह भी नीचे से अपनी गांड उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे, लेकिन मुझे उस समय इसका पता ही नहीं चला।
कुछ ही देर में उसका शरीर अकड़ने लगा। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों ही झड़ गए और उसी स्थिति में पड़े रहे। उठने के बाद हम नहाकर बाहर घूमने चले गए। रात में नीचे होटल के रेस्टोरेंट में खाना खाकर ही ऊपर कमरे में गए।
भाग 5: पहली बार गांड चुदाई – दर्द और समर्पण
कमरे में जाते ही भाविका प्यार भरी नजरों से मुझे देखने लगी। मैंने पूछा, “क्या बात है, बड़ी रोमांटिक मूड में हो?” वह बोली, “हाँ जानू, मैंने सोचा भी नहीं था कि तुम मुझे इतना प्यार करोगे।” मैंने उसे अपने आगोश में ले लिया और चूमने लगा। हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतार दिए और पूरे नंगे हो गए।
आज मेरे मन में कुछ और चल रहा था। अब भाविका भी थोड़ी फ्री हो गई थी। मैंने उसके होंठ, गर्दन, पीठ, बूब्स, निप्पल—सब कुछ चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में वो गर्म हो गई और मेरे लंड को जोर से पकड़ने लगी। कुछ ही देर में हमने 69 की पोजीशन ले ली और एक-दूसरे को बुरी तरह से चाटने और चूसने लगे।
थोड़ी देर में मैंने उसे घोड़ी बनने के लिए कहा और पीछे से चोदने लगा। वहीं मैंने देखा कि उसकी गांड का छेद तो बहुत ही छोटा है। तब मैंने उसकी गांड को सहलाना और दबाना शुरू कर दिया और उसके छेद में धीरे से एक उंगली डाल दी। वह एकदम से उचक गई और घबराकर बोलने लगी, “वहाँ कुछ मत करना।”
लेकिन मैंने उसकी गांड में उंगली डालना शुरू ही रखा। इस पोजीशन में चुदाई करने का अलग ही मजा आ रहा था। मैंने अब एक हाथ से उसके कंधे को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसका बूब दबाने लगा। इससे मुझे जोर से झटके लगाने में आसानी हो गई थी। इस तरह की चुदाई से भाविका का शरीर अकड़ने लगा और वो झड़ने लगी। मैंने और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए और कुछ ही देर में मैं भी झड़ गया और बिना सफाई किए हम दोनों वैसे ही एक-दूसरे से चिपककर सो गए।
रात में नींद खुली तो देखा कि भाविका निश्चिंत होकर बेसुध सो रही है। मेरे मन का शैतान जाग गया। मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया। वो कसमसाई, उसकी नींद खुल गई। मैं उसे चाटता ही रहा। उसके उठने के बाद भी मैं उसके बूब्स दबाता रहा, चूसता रहा, उसके दोनों निप्पलों को चूसता, चाटता और काटता रहा।
धीरे-धीरे वो गर्म हो गई। उसने मेरे लंड को जोर से पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी। मैंने उसको पलट दिया और उसकी गर्दन, कंधे, पीठ, कमर और गांड को चूसता और चाटता रहा। उसकी गांड को मैंने जोर-जोर से दबाया और चार-पाँच जगह दांतों से काटा भी। हर बार वो सिहर जाती थी। उसे भी मजा आ रहा था। मैं नीचे उसकी जांघों को चाटने लगा।
फिर मैंने उसे पलट दिया। अब मैं उसके पेट और नाभि को चाट रहा था। वो बार-बार अपनी हथेलियों में मेरे चेहरे को भरकर सहला रही थी। उसके हाथों के कंपन से उसकी उत्तेजना का पता चल रहा था। बाद में वो उत्तेजित होकर बैठ गई और मेरा लंड चूसने लगी।
मैंने प्यार से उसे उठाया और अपने आगोश में ले लिया और उसके होंठों को चूसने लगा। मैंने कहा, “भाविका, तुम मुझे कितना प्यार करती हो?” वह बोली, “बहुत ज्यादा।” मैंने कहा, “मेरा कहा मानोगी?” उसने हाँ कहा।
तब मैंने कहा, “आज मुझे तुम्हारी गांड मारनी है।”
वो एकदम घबरा गई और मना करने लगी। मैं उसे समझा रहा था कि ज्यादा दर्द नहीं होगा। फिर मैंने उसे सुहागरात की चूत चुदाई की याद दिलाई कि दर्द तो वहाँ भी हुआ था, लेकिन अब मजा आता है ना। थोड़ी ना-नुकुर के बाद वो मान गई, लेकिन दर्द होने पर तुरंत लंड निकाल लेने की शर्त पर!
पहले तो मैं उसे बाथरूम में ले गया और जेट स्प्रे से उसकी गांड में पानी भरकर साफ की। फिर उसे बेडरूम में ले आया। मैंने कोल्ड क्रीम लेकर उसकी गांड में अंदर-बाहर तक अच्छे से लगाई। बाद में क्रीम को अपने लंड पर भी अच्छे से लगाया। क्रीम लगाते समय ही मुझे अहसास हो गया था कि उसकी गांड का छेद बहुत छोटा है।
मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा। वह बहुत घबराई हुई थी। मैंने उसकी गांड को चाटना शुरू कर दिया। उसकी घबराहट को दूर करने के लिए मैंने उसकी गांड को फैलाकर उसे रिलैक्स होने को कहा। उसके रिलैक्स होने के बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखकर धीरे-धीरे दबाने लगा। इस दबाव से और क्रीम के कारण मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में घुस गया। उसे बहुत दर्द हुआ।
वो चिल्लाने ही वाली थी, इससे पहले ही मैंने अपने एक हाथ से उसका मुँह बंद कर दिया। वो दर्द के कारण कसमसा रही थी, मैं दूसरे हाथ से उसका बूब दबा रहा था। मैंने सोचा कि यदि इसने एक बार लंड बाहर निकाल लिया, तो फिर ये उसे वापस गांड में डालने ही नहीं देगी, इसलिए मैंने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए एक जोरदार झटका मारकर आधे से ज्यादा लंड को उसकी गांड में घुसा दिया।
वो तड़फ गई और छटपटा रही थी। इसी छटपटाहट में मैं उसके ऊपर गिर पड़ा। वो मेरे चंगुल से छूटने का प्रयास कर रही थी, लेकिन मैंने उसको दबाए रखा और उसकी गर्दन, गाल और कान चूमता रहा। एक हाथ से उसका बूब दबाता रहा। उसकी गांड फट चुकी थी, लेकिन मेरा लंड अभी भी दो-ढाई इंच बाहर था। हम वैसी ही स्थिति में पड़े रहे।
थोड़ी देर में वो शांत हुई, तो मैंने बड़े प्यार से उसे घोड़ी वाली पोजीशन में लाकर धीरे-धीरे वहीं पर धक्के मारना शुरू किया। इस प्रयास से उसके दर्द में बढ़ोतरी न होने से वो और रिलैक्स हुई, तो मैंने धक्कों की स्पीड थोड़ी बढ़ा दी। इन बड़े हुए धक्कों को भी उसने सहन कर लिया, तो मैंने मौका देखकर एक जोरदार झटके से अपना पूरा लंड उसकी गांड में डाल दिया।
इस बार वो थोड़ा ही चिल्लाई और अपने होंठों को भींचकर अपने दर्द को सहन करने लगी। उसकी आँखों में आंसू आ गए थे, वो दर्द के कारण कराह रही थी। सही में, उसके शरीर की तुलना में उसकी गांड का छेद कुछ ज्यादा ही छोटा था। मुझे भी अपने लंड को अंदर-बाहर करने में तकलीफ हो रही थी। शायद कहीं न कहीं मेरा लंड भी छिल गया था।
मैं उसकी गांड चोदता रहा और अगले पांच मिनट में ही मेरा वीर्य उसकी गांड में ही निकल गया। इतना चोदने के बाद वो निश्चल सी पेट के बल बिस्तर पर लेटी रही। मैं उसे ऊपर से नीचे तक चूमता रहा। तभी वो बाथरूम जाने के लिए उठी, लेकिन लड़खड़ाकर बैठ गई। मैं उसे पकड़कर बाथरूम में ले गया। फर्स्ट एनल सेक्स के कारण वो ठीक से चल नहीं पा रही थी।
बाथरूम में मैंने उसकी गांड और चूत को गर्म पानी से बहुत देर तक सेंका। उसे अच्छा लगा। बाद में उसे बिस्तर पर बैठाकर मैंने दर्द की दवा दी, उसे पुचकारते हुए सुला दिया और मैं भी सो गया।
भाग 6: हनीमून का आखिरी दिन और प्यार भरी विदाई
दूसरे दिन हम दोनों ही देर तक सोते रहे। उठने के बाद भाविका मुझसे थोड़ी नाराज थी, क्योंकि मैंने उसकी गांड फाड़कर रख दी थी। दवा के कारण उसका दर्द काफी कम हो गया था। हमने एक साथ स्नान किया और मैंने फिर से उसकी चूत और गांड को गर्म पानी से अच्छे से सेंका, जिससे उसे अच्छा लगा और वह नॉर्मल हो गई।
हमने दोपहर का खाना होटल के रेस्टोरेंट में ही खाया और घूमने चले गए। आज मैं भाविका से बहुत ही नरमी से पेश आ रहा था। मुझे पता था कि मैंने उसकी गांड मारकर उसे बहुत दर्द दिया था। अब मुझे उसे नॉर्मल मूड में ही रखना था।
होटल में आने के बाद भी मैं शांत बैठा था। तभी वो मेरे पास चलकर आई और बड़े प्यार से मेरे सिर के बालों में हाथ फेरते हुए बोली, “क्यों, क्या हो गया… एकदम चुपचाप से क्यों हो गए हो। क्या आज प्यार नहीं करोगे?”
मैंने उठकर उसे अपनी बाहों में भर लिया और चूमते हुए कहा, “रागी, मुझे माफ करना, तुम्हारी गांड मारकर बहुत दर्द दिया।”
उसने कहा, “जो हो गया, सो हो गया। आओ अब प्यार करो।”
मैंने खड़े-खड़े ही उसके होंठों को, गर्दन को, बूब्स को चूमना शुरू कर दिया। उसने भी मेरी चुम्मियों का उत्तर देते हुए अपने हाथों से खुद को और मुझको नंगा कर दिया। अब तो मैं उसके ऊपर से नीचे तक बस चूमते ही जा रहा था और वह सिसकारियाँ लेती जा रही थी। उसने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया था और उसे आगे-पीछे करती जा रही थी।
मैंने जब देखा कि वो पूरी तरह से गर्म हो गई है, तब मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया, जिससे उसकी चूत और उभरकर सामने आ गई। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया और एक ही झटके में अंदर डाल दिया। उसे दर्द तो हुआ, लेकिन उसने दोनों होंठों को भींचकर उसे सह लिया।
मैंने धीरे से धक्के लगाना शुरू कर दिया। अब उसे भी आनंद आ रहा था, वो सिसकारियाँ ले रही थी। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी, वो नीचे से अपनी गांड उठाकर पूरे लंड को अपनी चूत में ले रही थी। हम दोनों ही चुदाई का भरपूर आनंद ले रहे थे। अचानक ही उसका बदन अकड़ने लगा, वो जोर से उछलने लगी और झड़ गई।
मैं रुका नहीं, बल्कि अपनी स्पीड और बढ़ा दी, जिससे मैं भी कुछ झटकों के बाद झड़ गया और भाविका के ऊपर ही लेट गया। काफी देर तक इसी स्थिति में रहने से वो नींद के आगोश में जाने लगी थी, लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था।
मैंने उसके बालों को सहलाना शुरू कर दिया और उसके होंठों, गालों को कोमलता से चूमने लगा। वो मुस्कुरा रही थी, लेकिन उसे नींद भी आ रही थी। मैं नीचे सरकते हुए उसके बूब्स को चूसने लगा, दूसरे हाथ से मैंने उसके निप्पलों को दबाना और मसलना भी शुरू कर दिया। अब वो भी मजा लेने लग गई थी। उसने अपने हाथ से मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया। लंड फनफनाकर खड़ा हो गया।
मैं मुँह से उसका बूब चूस रहा था, एक हाथ से उसका निप्पल मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत सहला रहा था। उसकी चूत पनिया गई थी। अचानक उसने मुझे रुकने के लिए कहा, मैं असमंजस में पड़ गया। तभी उसने मुझे नीचे लेटने को कहा और मेरे ऊपर बैठकर पूरे लंड को धीरे से अपनी चूत में घुसा लिया। अब वो ऊपर-नीचे होकर झटके मार रही थी।
इस पोजीशन में हम दोनों को ही अधिक मजा आ रहा था। एक तरह से आज भाविका मुझे चोद रही थी। मेरे लिए ये एक नया अनुभव था। वो उचक-उचककर मेरे लंड को अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी। उचकने के कारण उसके बूब्स भी बाउंस हो रहे थे, मैंने दोनों हाथों से उसके बूब्स पकड़ लिए थे और उन्हें दबाता जा रहा था। उसे भी इस पोजीशन में मजा आ रहा था। सात-आठ मिनट की चुदाई में हम दोनों ही झड़ गए।
उस रात हम दोनों ने एक बार और चुदाई की, क्योंकि हमें दूसरे दिन वापस नागपुर आना था।
भाग 7: वापसी और प्रेग्नेंसी की खुशखबरी
नागपुर में घर के सभी मेहमान जा चुके थे। मुझे भी सोमवार से ऑफिस ज्वाइन करना था। घर में रात के अलावा सुबह-शाम, जब भी मौका मिलता, मैं भाविका को चोद देता था। नागपुर में वो केवल दो सप्ताह ही रही और इतने दिनों में हमने बार-बार अलग-अलग तरीके से चुदाई की। एक बार उसकी इच्छा से मैंने उसकी गांड भी मारी और इस बार उसे बहुत कम दर्द हुआ।
अगले दिन बड़े साले साहब उसको रायपुर ले गए। भाविका के रायपुर जाने के बाद से मेरा मन किसी काम में नहीं लगता था। दिन भर तो ऑफिस में और दोस्तों के साथ गुजर जाता था, लेकिन कमरे में आते ही मेरा ही कमरा मुझे खाने को दौड़ता था। भाविका से केवल फोन पर बात होती थी और वो बदमाश फोन पर सेक्सी बातें करके मुझे और तरसाती थी, भड़काती थी। कभी-कभी वो बाथरूम में जाकर कपड़े उतारकर अपने बूब्स और चूत के दर्शन कराकर मेरी उत्तेजना को चरम पर पहुंचा देती थी।
एक दिन अचानक ही भाविका ने मुझे सबसे बड़ी खुशखबरी सुनाई कि वो प्रेग्नेंट हो गई है। यह सुनकर उसके और मेरे घर वाले भी बहुत खुश हुए और मैं भाविका से मिलने रायपुर चला गया। मैं उसे अपने पास वापस लेकर आया। अगले सात महीनो तक मैंने अपनी गर्भवती पत्नी का देखभाल किया। हमने एक-दो महीने तक जमकर चुदाई की। धीरे-धीरे उसका पेट बढ़ता गया और उसकी चूत चुदाई कम होने लगी। मैं अब उसकी और देखभाल करने लगा। मैं उसकी चुदाई भी बहुत ही प्यार और नर्मी से करता था। 6 महीने बाद उसकी चूत चुदाई करना बंद कर दिया। अब मैं सिर्फ उसकी चूत को अपने मुँह से चाटता और उसे प्यार करता था।गर्भवती पत्नी के लिए अपने पति का वीर्य पीना अच्छा होता है इसलिए वह भी मेरा लंड खूब चूसती थी और मेरा सारा वीर्य पी जाती थी। बच्चा होने के चार महीने बाद तक हमारी चुदाई नहीं हो सकती थी क्योकि बच्चा होने के बाद पत्नी की गर्भाशय और चूत को ठीक होने में समय लगता है। मुझे चूत की कमी कभी नहीं महसूस हुयी। वो मुझे अपने मुँह से ही खुश कर देती थी।
हमारा बच्चा होने के बाद भी हमारे सेक्स में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि हम दोनों का प्यार और गहरा ही हुआ है। मैं भाविका को हमेशा उस पहली रात का एहसास देने की कोशिश करता हूँ। आज भी जब हम उस रात को याद करते हैं, तो हमारे चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान आ जाती है। वो पहली रात, वो हनीमून, और वो सब कुछ—हमारी जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादें हैं। उम्मीद करता हूँ कि आपको हमारी यह कहानी पसंद आई होगी।