शादी में जाने से पहले चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि जब पति-पत्नी को गाँव में किसी शादी में जाना हो और उससे पहले ही चुदाई की आग भड़क उठे, तो वो पल कितने गर्म और जुनूनी हो सकते हैं? यह हिंदी सेक्स कहानी शादी में जाने से पहले चुदाई की है जहाँ पति ने साड़ी पहनी अपनी सेक्सी पत्नी को पकड़ा, साड़ी ऊपर उठाई, और डॉगी स्टाइल में जोरदार चूत चुदाई की। फिर मिशनरी स्टाइल में चोदा, और तीन दिन बाद गाँव से लौटकर गांड चुदाई का वादा पूरा किया। अगर आपको साड़ी में चुदाई, डॉगी स्टाइल, गांड चुदाई, और पति-पत्नी के जुनूनी सेक्स वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।
भाग 1: शादी में जाने से पहले चुदाई – गाँव की शादी और सुबह की तैयारी
गाँव में शादी थी। पूरा घर तैयारियों में लगा हुआ था — बाहर आँगन में रिश्तेदारों की चहल-पहल थी, हल्दी की महक हवा में घुली हुई थी, और हर कोई किसी न किसी काम में व्यस्त था। मेरे पति का भतीजा दूल्हा बनने वाला था, इसलिए हमारी ज़िम्मेदारी और भी बढ़ गई थी। सुबह के 7 बज चुके थे, हम सब शादी में जाने के लिए रेडी हो रहे थे। तीन दिन का कार्यक्रम था — हल्दी, मेहंदी, बारात, और फिर विदाई। मतलब, तीन दिन तक हम दोनों को एक-दूसरे से दूर रहना पड़ सकता था, क्योंकि गाँव के घर में प्राइवेसी नाम की कोई चीज़ नहीं थी।
मैं अपनी सबसे पसंदीदा लाल रंग की बनारसी साड़ी पहनकर तैयार हुई थी। लाल साड़ी — जो मेरी गोरी त्वचा पर ऐसे चमक रही थी जैसे सूरज की पहली किरण बर्फ पर पड़ रही हो। ब्लाउज हल्का टाइट था, जिससे मेरे 36 साइज़ के बड़े-बड़े बूब्स और भी उभरकर दिख रहे थे — गोल, रसीले, और बाहर आने को बेताब। पेटीकोट कमर पर कसा हुआ था, जो मेरी पतली कमर और मोटी गांड की खूबसूरती को और उभार रहा था। मैंने माथे पर गोल लाल बिंदी लगाई थी, माँग में गहरा सिंदूर भरा था, गले में सोने का चमचमाता मंगलसूत्र पड़ा था, दोनों हाथों में लाल चूड़ियाँ खनक रही थीं, और पैरों में चाँदी की पायल छन-छन कर रही थी। नाखूनों पर लाल नेल पॉलिश, आँखों में काजल की गहरी लकीर, होंठों पर हल्की लाल लिपस्टिक — मैं एकदम माल लग रही थी। शीशे में खुद को देखकर मुझे खुद पर गर्व हो रहा था।
मेरे पति अभी तक तैयार नहीं हुए थे। वो बेडरूम में थे, और जब मैं शीशे के सामने से मुड़कर बेडरूम में गई, तो देखा कि वो बिलकुल नंगे हो गए थे। हाँ, पूरे नंगे। उनका मोटा लंड तना हुआ खड़ा था — 7 इंच लंबा, नसों से भरा, टोपा लाल और चमकदार। उन्होंने मुझे देखते ही एक गहरी साँस ली और उनकी आँखों में वो चमक आ गई जो मैं बखूबी पहचानती थी — हवस, प्यार, और मालकियत का मिश्रण।
“इधर आओ,” उन्होंने धीमी और भारी आवाज़ में कहा।
मैं मुस्कुराई और धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ी। लेकिन इससे पहले कि मैं कुछ कहती, उन्होंने मुझे पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और मेरे सिर को नीचे की ओर धकेल दिया। मैं समझ गई कि वो क्या चाहते हैं। शादी में जाने से पहले चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।
भाग 2: शादी में जाने से पहले चुदाई – साड़ी में कुत्तिया बनकर डॉगी स्टाइल
पति ने अपना लंड मेरे मुँह में देकर चुसाया। मैं घुटनों के बल बैठ गई और उनके मोटे लंड को अपने मुँह में ले लिया। मेरी जीभ उनके लंड की हर नस पर फिर रही थी, मेरे होंठ उसे कसकर पकड़ रहे थे। मैंने उनका लंड चूसना शुरू किया — पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़, फिर और तेज़। पति की साँसें तेज़ हो गईं, उनके हाथ मेरे बालों में थे और वो मेरा सिर पकड़कर अपनी तरफ धकेल रहे थे। “आह… बहुत अच्छा, रानी… बहुत अच्छा…” वो कराह रहे थे।
कुछ मिनट तक लंड चूसने के बाद, पति ने मुझे उठाया और बिस्तर की तरफ घुमाया। मैं साड़ी पहने हुई थी, लेकिन उन्होंने मेरी साड़ी ऊपर कमर तक उठा दी — लाल साड़ी का पल्लू और घेर अब मेरी पीठ पर इकट्ठा हो गया था। फिर उन्होंने मेरा ब्लाउज खोल दिया — सामने से नहीं, पीछे से — और मेरे बूब्स बाहर आ गए, लटकते हुए, भारी और गोल। मेरी पैंटी, जो मैंने साड़ी के नीचे पहनी थी, उसे भी उन्होंने एक झटके में नीचे खींच दिया और मेरे घुटनों तक सरका दिया।
अब मैं कुत्तिया बनकर घुटनों पर थी — बिस्तर पर हाथ टिकाए, कमर ऊपर उठाए, गांड हवा में। मेरी गोरी-गोरी मोटी गांड पूरी तरह खुली हुई थी, चूत के होंठ गीले हो चुके थे और चमक रहे थे। मेरे बड़े-बड़े बूब्स नीचे लटक रहे थे, निप्पल सख्त और उभरे हुए। माथे पर बिंदी, माँग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र, हाथों में चूड़ियाँ, पैरों में पायल — सब कुछ अपनी जगह पर था। मैं बिलकुल सेक्सी अप्सरा लग रही थी, लेकिन इस वक्त मैं पति की रंडी बन चुकी थी।
पति पीछे से आए, उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और बिना किसी चेतावनी के अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। “आआआह…” मेरी सिसकारी निकल गई। उनका मोटा लंड मेरी गीली चूत में पूरी तरह समा गया था। पति ने मेरी कमर कसकर पकड़ी और जोरदार धक्के मारने शुरू कर दिए — थप-थप-थप की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँजने लगीं।
“आह… उफ्फ… हाँ राजा, ऐसे ही चोदो!” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
पति मेरी गांड को दोनों हाथों से दबा-दबा के मसल रहे थे, और साथ में कमर को पकड़कर लंड को अंदर-बाहर, अंदर-बाहर कर रहे थे। हर धक्के के साथ मेरे बड़े-बड़े बूब्स लटक कर हिल रहे थे, जैसे कोई पेंडुलम। मेरी चूड़ियाँ खनक रही थीं, पायल छन-छन कर रही थी, और मेरी सिसकारियाँ तेज़ होती जा रही थीं। शादी में जाने से पहले चुदाई का यह नज़ारा किसी हॉट सेक्स फिल्म से कम नहीं था।
पति ने अब मेरे बूब्स पकड़ लिए — दोनों हाथों से, पीछे से आगे की तरफ — और डॉगी स्टाइल में और तेज़ चोदने लगे। उनकी स्पीड बढ़ती जा रही थी, उनके धक्के गहरे और ज़ोरदार होते जा रहे थे। मेरी चूत से रस टपक रहा था और मेरी जाँघों पर बह रहा था। लंड और चूत के टकराने की गीली आवाज़ — चुचु… चुचु… — इतनी हॉट थी कि मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी।
“और ज़ोर से, राजा… और ज़ोर से चोदो मुझे…” मैं चीख रही थी।
हम दोनों मज़े से चुदाई कर रहे थे, जैसे दुनिया की कोई फिक्र नहीं। बाहर रिश्तेदार इंतज़ार कर रहे थे, शादी का कार्यक्रम शुरू होने वाला था, लेकिन हमारे लिए इस वक्त सिर्फ हम दोनों थे — और हमारी चुदाई।
भाग 3: मिशनरी स्टाइल में चूत चुदाई और पति का पहला माल
थोड़ी देर बाद मेरे पति ने लंड बाहर निकाला और बेड पर लेट गए। उनकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, उनके चेहरे पर पसीने की बूँदें थीं, लेकिन उनका लंड अभी भी पूरी तरह कड़ा था — तेल की तरह चमकता हुआ, मेरे रस से भीगा हुआ। मैं उठी, मेरे चेहरे पर भी पसीना था, मेरी साड़ी अस्त-व्यस्त हो चुकी थी, ब्लाउज खुला हुआ था, बाल बिखरे हुए थे — लेकिन मेरी आँखों में वो सेक्सी मुस्कान थी जो सिर्फ एक संतुष्ट औरत की होती है।
मैं पति के बगल में लेट गई। पति ने मुझे अपनी तरफ घुमाया, अपनी बाईं तरफ। उन्होंने मेरी एक टांग उठाकर अपनी कमर पर रख ली — मेरी टांग हवा में थी, मेरी चूत पूरी तरह खुली हुई थी। और फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया। यह साइडवेज़ पोज़िशन थी — आरामदायक, लेकिन बेहद कामुक।
“ओह मेरी जान, तेरी चूत कितनी टाइट है!” पति बोले, और मेरे बूब्स दबाने लगे।
मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर पति की गांड पर रखा और दबाते हुए बोली, “हाँ, चोदो मुझे जोर से, राजा!”
दोनों स्वर्ग का मज़ा ले रहे थे — चूमते हुए, दबाते हुए, एक-दूसरे के शरीर में खोते हुए। पति की जीभ मेरे मुँह में थी, उनके हाथ मेरे बूब्स पर, और उनका लंड मेरी चूत में। यह सिर्फ चुदाई नहीं थी — यह प्यार था, जुनून था, और सालों के रिश्ते की गहराई थी।
लेकिन जल्दी ही पति उठे, मैं लेटी रही — अब अपनी पीठ के बल, पैर फैला लिए। पति ऊपर चढ़ गए और मिशनरी स्टाइल में चोदने लगे। अब स्पीड और तेज़ थी — पति मेरे बूब्स पकड़कर दबा रहे थे, मैं पति के चूतड़ों को मसल रही थी। उनके धक्के ताबड़तोड़ थे, बिना रुके, बिना थके।
“आह… उफ्फ… चोदो… हाँ!” मेरी सिसकारियाँ तेज़ हो गईं।
पति बूब्स चूसते हुए, चूमते हुए ताबड़तोड़ धक्के मार रहे थे। मेरे निप्पल उनके मुँह में थे, उनकी जीभ उन्हें गोल-गोल घुमा रही थी, और उनका लंड मेरी चूत को बुरी तरह चोद रहा था। तभी पति की स्पीड और बढ़ी — वो अपने चरम पर पहुँच रहे थे। उनकी साँसें तेज़ हो गईं, उनका शरीर तन गया, और फिर वो मेरे ऊपर गिर पड़े — उनका गर्म, गाढ़ा माल मेरी चूत के अंदर निकल गया।
धीरे से हटे, और मैंने नीचे देखा। मेरी चूत में पति का सफेद माल साफ दिख रहा था — गाढ़ा, चमकदार, और मेरी चूत के होंठों से बाहर रिसता हुआ। चूत हल्की खुली हुई थी, जैसे भयंकर चुदाई हुई हो। मैंने अपनी उंगली से वो माल छुआ और अपने मुँह में डाल लिया — नमकीन, गर्म, और मेरे पति का स्वाद।
पति बोले, “अच्छा हुआ हमने चुदाई कर ली, वरना तीन-चार दिन गाँव में कहाँ मिलता मौका।”
मैं हँसी, “हाँ, लेकिन अब गांड की बारी कब?”
पति ने कहा, “गाँव से लौटकर तेरी गांड जरूर चोदूँगा। कुछ दिन आराम दे दे अपनी गांड को।”
हम दोनों हँसे। पति ने मेरी चूत रगड़ी — अपनी उंगलियों से, धीरे-धीरे, मेरे बचे हुए रस और उनके माल को मिलाते हुए। फिर उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह में डाला। मैंने चूसा — उनका लंड, जो अब मेरे रस और उनके अपने माल से भीगा हुआ था, मैंने पूरा साफ कर दिया। फिर दोनों ने कपड़े पहने। मैंने अपनी साड़ी ठीक की, ब्लाउज के हुक लगाए, बाल संवारे, और लिपस्टिक दोबारा लगाई। बाहर निकलकर मैं ऐसी लग रही थी जैसे कुछ हुआ ही न हो — परफेक्ट हाउसवाइफ, परफेक्ट बहू, परफेक्ट रिश्तेदार।
भाग 4: गाँव से लौटने के बाद – गांड चुदाई का वादा पूरा हुआ
तीन दिन बाद शादी खत्म हुई, और हम घर लौट आए। तीन दिन की थकान, तीन दिन का इंतज़ार, और तीन दिन की छुपी हुई चाहत — सब कुछ अब बाहर आने को बेताब था। गाँव में हम एक-दूसरे को छू भी नहीं पाए थे, क्योंकि घर में हर वक्त कोई न कोई मौजूद रहता था। लेकिन अब हम अपने घर में थे, अपने बेडरूम में, अपनी दुनिया में।
रात के करीब 10 बजे थे। बच्चे सो चुके थे, घर में सन्नाटा था। पति बेड पर नंगे बैठे थे — पूरे नंगे, जैसे वो हमेशा रहते थे जब हम अकेले होते। उनके हाथ में एक छोटी सी शीशी थी — वही स्पेशल जेल जो वो अपने लंड पर लगाते थे ताकि लंड लंबे समय तक हार्ड रहे और और मज़बूत हो जाए। उन्होंने जेल अपनी हथेली में लिया, दोनों हथेलियों को रगड़कर गर्म किया, और फिर अपने लंड पर लगाना शुरू किया — जड़ से लेकर टोपे तक, हर नस, हर सिलवट पर। उनका लंड तेल से चमक रहा था, और मुझे देखते ही दनदना उठा।
मैं आई, कपड़े उतारे — पहले साड़ी, फिर ब्लाउज, फिर पेटीकोट, फिर ब्रा और पैंटी — और बिलकुल नंगी हो गई। मेरे बड़े-बड़े बूब्स, मेरी मोटी गोरी गांड, मेरी चूत पर हल्के बाल — सब कुछ पति के सामने था। दोनों चूमने लगे — गहरी, जोशीली फ्रेंच किस, जीभ से जीभ का खेल। पति ने मेरी गांड पकड़कर अपनी तरफ खींची, और अपनी बीच वाली उंगली मेरी गांड के छेद में पूरा डाल दिया।
“आह… स्लो राजा!” मैं बोली, लेकिन मुस्कुरा रही थी।
पति ने उंगली बाहर निकाली, फिर जेल की शीशी उठाई और अपनी उंगलियों पर जेल लगाकर मेरी गांड में डाला। ठंडक का एहसास हुआ, और मेरी गांड का छेद धीरे-धीरे ढीला होने लगा। पति ने मेरी पीठ चूमी — रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ, कंधों से लेकर कमर तक। फिर उन्होंने मेरे चूतड़ों पर ज़ोर से थप्पड़ मारे — धप! धप! — और मेरी गांड लाल हो गई।
भाग 5: गांड में माल, फिर चूत चुदाई और मुँह में वीर्य
पति ने मेरी कमर पकड़ी, अपना लंड मेरी गांड के छेद पर लगाया, और एक ज़ोरदार धक्के के साथ पूरा लंड मेरी गांड में घुसेड़ दिया। “आआआह…” मेरी चीख निकल गई। दर्द और आनंद का ऐसा मिश्रण कि मेरी आँखों से आँसू निकल आए।
“ओह… कितनी टाइट है तेरी गांड!” पति बोले, पूरे मज़े से धक्के मार रहे थे।
मैं हल्की दर्द भरी सिसकारियाँ ले रही थी, लेकिन मज़ा आ रहा था — बहुत ज़्यादा मज़ा। पति ने गांड पर थप्पड़ मारा — धप! — और मैं खरगोश स्टाइल में हो गई, गांड हवा में। पति ने मेरे चूतड़ फैलाए और ताबड़तोड़ चोदना शुरू। “आह… उफ्फ… चोदो… हाँ!” कमरा आवाज़ों से भर गया।
पति ने पूरा माल गांड में निकाला। उनकी साँसें तेज़ थीं, उनका शरीर काँप रहा था। फिर वो बैठ गए, और मैंने उनका लंड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मेरी गांड से उनका सफेद माल टपकता दिख रहा था — मेरे चूतड़ों के बीच से, मेरी चूत से होता हुआ, मेरी जाँघों तक।
लेकिन पति का लंड अभी भी रेडी था। जेल का कमाल। अब चूत की बारी थी। मैं सीधी लेटी, पैर सीधे किए। पति ऊपर चढ़े, मेरे बूब्स पकड़े, और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। 10 मिनट तक चोदते रहे — तेज़, ज़ोरदार, बेरहम। “तेरी चूत कितनी जूसी है!” पति बोले।
फिर पति बेड पर खड़े हुए, मैं बैठकर उनका लंड मुँह में लिया, चूसा। पति ने मेरे बाल पकड़े और अपना दूसरा माल मेरे मुँह में निकाल दिया। गर्म, गाढ़ा, और बहुत ज़्यादा। मैंने पूरा पी लिया — एक-एक बूँद। फिर दोनों चूम-चूम के नंगे सो गए, एक-दूसरे की बाहों में, थके हुए लेकिन पूरी तरह संतुष्ट।
शादी में जाने से पहले चुदाई और फिर गाँव से लौटकर गांड चुदाई — ये तीन दिन मेरी ज़िंदगी के सबसे गर्म और सबसे यादगार दिन बन गए थे।
साड़ी वाला look और husband-wife की chemistry दोनों next level लगे 😍
शुरुआत से ही story में excitement बनी हुई थी, खासकर wedding function जाने की जल्दी के बीच वाला romance काफी hot लगा 🔥
Doggy style वाला scene honestly बहुत visual और cinematic feel दे रहा था 😅