पहली बार चोदने वाले पति ने सुहागरात में दुल्हन की चूत फाड़ी – हिंदी सेक्स कहानी

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पहली बार चोदने वाले पति ने सुहागरात में दुल्हन की चूत फाड़ी – क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई लड़का जिसने शादी से पहले कभी किसी लड़की को चूमा तक नहीं हो, वह अपनी सुहागरात की रात अपनी दुल्हन के सामने जाता है, तो उसके मन में क्या चल रहा होता है? यह हॉट हिंदी सेक्स स्टोरी राहुल की जुबानी है, जिसने शादी से पहले कभी सेक्स नहीं किया था, 2 महीने तक मुठ मारना बंद रखा था, और फिर पहली बार चोदने वाले पति ने सुहागरात में दुल्हन की चूत फाड़ी। इस कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे उसने घूंघट उठाया, हाथ चूमा, गालों पर किस की, और फिर धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी कसी हुई चूत में डाला। जब दुल्हन की चूत से खून निकलने लगा, वह दर्द से चीखी और रोई, लेकिन राहुल नहीं रुका। अगर आप पहली बार चोदने वाले पति ने सुहागरात में दुल्हन की चूत फाड़ी जैसी सच्ची और धमाकेदार कहानी ढूंढ रहे हैं, तो यह पूरी दास्तान आपके लिए ही है।

भाग 1: शादी से पहले की बेचैनी और चार साल का इंतज़ार

मेरा नाम राहुल है। मेरी उम्र 25 साल है और मेरी शादी को अब 4 साल हो चुके हैं। लेकिन आज मैं आपको अपनी शादी की पहली रात की कहानी सुनाने जा रहा हूँ – वह रात जो मेरी ज़िंदगी की सबसे यादगार और बेचैन कर देने वाली रात थी।

मैं बता दूँ कि शादी से पहले मैंने कभी किसी लड़की को चूमा तक नहीं था। सेक्स करने की तो बात ही छोड़ दीजिए। मैं बहुत शर्मीला स्वभाव का इंसान हूँ। लड़कियों से बात करने में मेरी गांड फट जाती थी। कॉलेज के दिनों में मेरे सारे दोस्त गर्लफ्रेंड बनाते थे, डेट्स पर जाते थे, लेकिन मैं बस किताबों में ही खोया रहता था। मैं देखने में ठीक-ठाक हूँ – न ज्यादा हैंडसम, न बदसूरत। बस इतना है कि लड़की पटाना मेरे बस की बात नहीं थी।

लेकिन मेरे अंदर सेक्स की इच्छा बहुत तेज़ थी। मैं रात-रात भर पोर्न देखता था, हाथ से मूठ मारता था, और सोचता था कि काश मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड होती। लेकिन हर बार यह सोचकर कि मैं किसी से बात नहीं कर सकता, मैं निराश हो जाता था।

फिर एक दिन मेरे घर पर शादी की बात चलने लगी। मैं 21 साल का था तब। मेरे माता-पिता ने मेरे लिए रिश्ते ढूंढने शुरू कर दिए। मैं बहुत खुश था, क्योंकि अब आखिरकार मुझे एक लड़की मिलने वाली थी – और वह सिर्फ मेरी होगी। मैं उसे चूम सकता था, उसे छू सकता था, और हाँ – उसे चोद सकता था।

करीब 2 महीने बाद मेरी सगाई तय हो गई। लड़की का नाम था – लेकिन वह मेरी प्राइवेसी है, इसलिए मैं उसका नाम नहीं बताऊँगा। बस इतना कहूँगा कि जब मैंने उसकी फोटो देखी, तो मेरा दिल धड़कने लगा। वह बहुत खूबसूरत थी। गोरी, पतली-दुबली, बड़ी-बड़ी आँखें, और मुस्कान तो जैसे किसी परी जैसी थी।

सगाई के बाद हम फोन पर बात करने लगे। पहले-पहल तो मुझे बहुत डर लगता था। क्या बोलूँ? कैसे बोलूँ? अगर कुछ गलत बोल दिया तो? लेकिन धीरे-धीरे मुझे आत्मविश्वास आने लगा। वह बहुत अच्छी लड़की थी – समझदार और प्यार करने वाली। वह मुझसे मिलना चाहती थी, लेकिन मैं टाल देता था। सच कहूँ तो, मैं डरता था। मुझे लगता था कि अगर वह मुझे रियल लाइफ में देख लेगी, तो शायद उसे मैं पसंद नहीं आऊँगा।

वह कहती थी, “चलो कहीं घूमने चलते हैं। कॉफी पीते हैं।”

और मैं कहता, “अभी नहीं, शादी के बाद सब कुछ हो जाएगा।”

सच में, मैं बहुत बेवकूफ था। लेकिन अब सोचता हूँ तो लगता है कि शायद यही अच्छा था। क्योंकि शादी की पहली रात का इंतज़ार ने मेरे अंदर एक अलग ही जुनून पैदा कर दिया था।

शादी से 2 महीने पहले मैंने एक बहुत बड़ा फैसला किया – मैंने मूठ मारना बंद कर दिया। मैंने सोचा कि अगर मैं 2 महीने तक अपने लंड को हाथ नहीं लगाऊँगा, तो सुहागरात के दिन वह बिल्कुल जंगली साँड जैसा हो जाएगा। मैं अपनी पत्नी को इतनी जोरदार चुदाई दूँगा कि वह ज़िंदगी भर मुझे नहीं भूल पाएगी।

मैंने रोज़ व्यायाम करना शुरू कर दिया। प्रोटीन शेक पीने लगा। अपनी डाइट में सुधार किया। मैं चाहता था कि मेरा शरीर एकदम तगड़ा हो जाए, ताकि मैं पूरी रात चल सकूँ।

दो महीने किसी तरह कटे। मेरे दोस्तों को पता चल गया था कि मेरी शादी हो रही है, तो वे मुझे ताने मारने लगे। “अरे भैया, तू तो कुँवारा मर रहा था। अब साली की जितनी मर्जी चोद लियो।” “कंडोम ले लिया? मैं दे दूँगा। बस फाड़ दियो उसकी।”

मैं शर्म से पानी-पानी हो जाता था, लेकिन अंदर ही अंदर बहुत उत्तेजित होता था। मेरा लंड अक्सर खड़ा हो जाता था, और मैं उसे टांगों के बीच दबाकर रखता था।

भाग 2: शादी का दिन – मंडप से लेकर विदाई तक

शादी का दिन आखिरकार आ ही गया। पूरा घर जलमग्न था। बारात आई, ढोल बजे, और मैं घोड़ी पर चढ़कर अपनी दुल्हन को लेने गया। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं बार-बार सोच रहा था कि वह कैसी लग रही होगी आज।

जब मैं मंडप में पहुँचा, तो वह वहाँ बैठी थी – घूंघट डाले हुए। उसके हाथ में मेंहदी थी, गले में गहने, और वह बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी थी। मैं उसके बगल में बैठ गया। जब हमारे हाथ मिले, तो मैं काँप गया। उसके हाथ भी काँप रहे थे। हम दोनों उत्तेजित थे – लेकिन डर से ज्यादा।

मेरे दोस्त मंडप में बैठे मुझे इशारे कर रहे थे। “ओए भैया, आज रात वाला मूड बन गया क्या?” एक दोस्त ने आवाज़ लगाई। मैंने उसे घूर कर देखा और मुँह फेर लिया।

शादी की रस्में चलती रहीं। फेरे लिए, कन्यादान हुआ, और फिर विदाई का वक्त आया। जब मैं उसे विदा करा के ले जा रहा था, तो वह मेरे साथ कार में बैठी थी। हम दोनों बगल-बगल थे, लेकिन कुछ बोल नहीं पा रहे थे। मैंने उसकी तरफ देखा – वह शर्म से सिर झुकाए बैठी थी। मैंने सोचा, “यह वही लड़की है जिसे मैं आज रात चोदूँगा।”

यह सोचते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने उसे अपनी जांघों के बीच दबा लिया, और कार की खिड़की से बाहर देखने लगा।

हम घर पहुँचे। वहाँ भी कुछ रस्में बाकी थीं। फिर हमें कमरे में भेज दिया गया। लेकिन अभी रात नहीं हुई थी। मुझे पूरा दिन इंतज़ार करना था। मैं अपने दोस्तों से मिला नहीं, क्योंकि वे मेरा मज़ाक उड़ाते। मैंने अपने कमरे में जाकर आराम किया। कंडोम चेक किए – सब ठीक थे। बस रात होने का इंतज़ार था।

भैया-भाभी सब मुझे मुस्करा कर देख रहे थे। मैं शर्म से पिघल रहा था। मैंने सोचा, “ये सब जानते हैं कि आज रात क्या होने वाला है।”

भाग 3: रात हुई – कमरे में पहला कदम

रात के 11 बज गए थे। मैं दालान में खड़ा था, और मेरी भाभी ने मुझे आवाज़ लगाई। “राहुल, अब क्या कर रहे हो? जाओ कमरे में।”

मैं हकलाया, “भाभी, मैं पानी पी कर आता हूँ।”

भाभी हँसी, “जो पीना है, अन्दर पी लेना। बहू इंतज़ार कर रही है।”

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और कमरे के दरवाज़े तक ले गईं। दरवाज़ा खोला, मुझे अंदर धकेला, और बाहर से बंद कर दिया। मैंने अंदर से कुंडी लगा ली और पर्दा भी खींच लिया। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था – इतना तेज़ कि मुझे लगा वह छाती फाड़कर बाहर आ जाएगा। मेरा दिमाग पूरी तरह बंद हो चुका था। मैं क्या करूँ? कैसे करूँ? कुछ समझ नहीं आ रहा था।

कमरे में हल्की रोशनी थी। एक बड़े बेड पर मेरी पत्नी बैठी थी – सिर पर घूंघट डाले हुए। उसके आसपास गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं। कमरे में खुशबू फैल रही थी। उसके बगल में एक ट्रे पर दूध के दो गिलास रखे थे।

मैं उसके पास गया और धीरे से उसके बगल में बैठ गया। मेरे हाथ पसीने से तर थे। मैंने सोचा, कुछ तो बोलूँ। “तुम पानी लोगी?” मैंने बेवकूफी भरे अंदाज में पूछा।

उसने ‘ना’ में सर हिला दिया।

मैंने हिम्मत करके उसका घूंघट उठा दिया। अल्लाह कसम – वह गज़ब लग रही थी। उसके गालों पर शराबीपन था, उसकी आँखों में चमक थी, और उसके होंठ गुलाबी थे। मैं एक बार में ही उससे प्यार कर बैठा। उसने शरमाते हुए मुस्कुरा कर गर्दन झुका ली।

मैं कुछ बोलता, उससे पहले ही उसने मुझे दूध का गिलास थमा दिया। मैंने आधा गिलास एक ही बार में पी लिया, और आधा उसे दे दिया। वह चुपचाप पी गई। शायद वह भी उतनी ही डर रही थी जितना मैं डर रहा था। शायद उससे भी ज्यादा।

अब मेरी थोड़ी हिम्मत बढ़ी। मैं उससे चिपक कर बैठ गया। उसका शरीर गर्म था। उसकी खुशबू ने मुझे दीवाना कर दिया। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा – उसके हाथ पर मेंहदी थी, और वह ठंडा था। मैंने उसके हाथ को अपने होठों से लगाया और चूम लिया।

उसने एक लंबी साँस ली – जैसे उसकी साँसें रुक गई हों।

मैंने उसके गाल चूम लिए। यह मेरा पहला किस था – किसी लड़की के साथ। मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह इतना मीठा होता है। उसके गाल नर्म थे, गुलाब की पंखुड़ी की तरह। मैं उन्हें चूसता रहा। वह पहले तो स्थिर रही, फिर वह भी पिघलने लगी।

भाग 4: किस करते हुए कपड़े उतरे और जोश बढ़ा

मैंने उसे पकड़ कर पलंग पर लिटा दिया। वह धीरे से पीठ के बल लेट गई। उसने कहा, “गहने तो उतार लेने दे।” मैंने उतार दिए। उसने कुछ खुद उतारे, कुछ मैंने। एक मिनट में सारे गहने एक तरफ हो गए।

मैं फिर उसके ऊपर लेट गया। मैं उसके गाल चूम रहा था, उसकी गर्दन को अपने होठों से सहला रहा था। वह धीरे-धीरे पिघल रही थी। उसके मुँह से “आआ…” जैसी हल्की सी आवाज़ निकल रही थी। मैंने उसके होठों को चूमा – धीरे से, पहले ऊपर वाले होंठ, फिर नीचे वाले। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और मेरे होठों को जवाब दिया। यह हमारा पहला लिप किस था।

पहले तो वह चुपचाप लेटी रही। फिर कुछ देर बाद उसे जोश आ गया। वह भी मुझे चूमने लगी। मेरा डर अब पूरी तरह खत्म हो चुका था। मैं पूरे जोश में था। मैं उसके होंठ चूस रहा था, और वह भी मेरा साथ दे रही थी। हम दोनों दीवानों की तरह एक-दूसरे को चूस रहे थे। हमारी जीभें आपस में लड़ रही थीं।

मैंने धीरे से उसके उभारों पर हाथ रखा। उसने चूमना बंद कर दिया और सिहर उठी। मैं उसे चूमता रहा – उसकी गर्दन, उसके कान, उसके गाल। एक हाथ से मैं उसके स्तनों को दबाता रहा। वह अब सिर्फ आँखें बंद किए मज़े ले रही थी। उसके हाथ मेरी पीठ पर थे, और वह मुझे अपनी तरफ खींच रही थी।

मेरी नज़र उसके ब्लाउज के बटनों पर थी। मैंने एक-एक करके सारे बटन खोल दिए। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसकी साँसों की गर्माहट मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। यह सब मुझे पूरी तरह पागल कर रहा था। मैं पागलों की तरह उसको चूस रहा था। उसकी ब्रा साफ दिख रही थी – ब्लैक कलर की, जिसमें से उसके स्तन बाहर झांक रहे थे।

मैंने पीछे हाथ डाला और उसकी ब्रा खोल दी। वह शर्म से मुझसे चिपक गई। उसका ब्लाउज मैंने उतार दिया, फिर ब्रा भी।

और फिर – उसके स्तन मेरे सामने नंगे थे।

हाय रे! वह गोरे, मोटे, भरे हुए स्तन! उनके नीपल हल्के गुलाबी थे और सख्त हो चुके थे। मैंने उन्हें अपने हाथों में लिया – बिल्कुल मुलायम, बिल्कुल गर्म। मैं उन रस भरे यौवन कलशों को चूसने लगा। मैंने एक स्तन को अपने मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसा। मेरी जीभ उसके निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी। उसने कराहना शुरू कर दिया – “आह… आह…” वह मेरे बालों में हाथ डालकर मेरा सिर अपने स्तनों से लगाए हुए थी।

मैं उन स्तनों को चूसता रहा, काटता रहा। वह पागल हो रही थी। मैंने सोचा कहीं मेरा पानी न निकल जाए – 2 महीने की तपस्या के बाद, यह सब बहुत ज्यादा था। लेकिन मैंने खुद को काबू में रखा। मैंने आराम से काम लिया। अपने हाथों से ही उसके स्तनों को दबाता रहा, रगड़ता रहा। उसके स्तनों के निप्पल और ज्यादा सख्त हो गए थे।

मैंने उसका पेटीकोट का नाडा खोल दिया। अपनी शर्ट भी उतार दी। अब मैं नंगी छाती था। उसने मुझे देखा और फिर से शर्म से मुझसे चिपक गई। वह मेरे पूरे शरीर पर चूमने लगी – मेरे कंधे, मेरी छाती, मेरे पेट। उसके होंठ मेरी त्वचा पर आग लगा रहे थे। मुझे लगा मेरा पानी निकलने वाला है। मेरा लंड खड़ा होकर चड्डी में जेलखाने की तरह कैद था।

मैंने सब संभाला। मैंने उसका पेटीकोट पूरी तरह उतार दिया। अब वह सिर्फ अपनी चड्डी में थी। उसका दूधिया जिस्म कमरे की हल्की रोशनी में चमक रहा था। उसकी जांघें मोटी और गोल थीं। उसकी कमर पतली थी। वह बिल्कुल किसी परी की तरह दिख रही थी।

मैं उसके पूरे शरीर को चूमने लगा। उसकी गर्दन, उसके कंधे, उसकी बाहें, उसका पेट, उसकी जांघें – हर जगह। मैं उसकी चड्डी के ऊपर से उसकी चूत को चूम रहा था। वह और जोर से कराह रही थी। मैंने अपनी पैंट भी उतार दी। अब मैं भी सिर्फ चड्डी में था – और मेरी चड्डी में मेरा लंड खड़ा होकर बाहर निकलने को बेताब था।

उसने मेरी चड्डी में खड़े लंड को देखा और शर्म से अपनी गर्दन नीचे झुका ली। उसका चेहरा लाल हो गया था।

अब मैं सोच रहा था – पहले अपनी चड्डी उतारूँ या उसकी? मैंने उसकी चड्डी उतारने का फैसला किया। उसने पहले हाथ पकड़कर मना किया, लेकिन फिर धीरे-धीरे हाथ छोड़ दिए। मैंने उसकी चड्डी उतार दी।

अब वह पूरी तरह नंगी थी। मेरे सामने।

उसकी चूत पर बहुत कम बाल थे – साफ-सुथरी। उसकी चूत के होंठ मोटे और गुलाबी थे। मैं उसे देखकर पागल हो गया। मेरा लंड गीला हो चुका था – प्री-कम से चमक रहा था। मुझे लगा कि बिना कुछ किए ही मेरा पानी निकल जाएगा।

भाग 5: लंड डालना – दर्द, खून और पहली चुदाई

मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैंने अपनी चड्डी नहीं उतारी। मैं उसे चूमता रहा, उसके शरीर को अपने हाथों से सहलाता रहा। फिर मैंने उसकी चूत में उंगली डाली – वह पूरी तरह गीली थी। उसका रस मेरी उंगली पर लग गया। मैंने उस रस को सूंघा – उसकी खुशबू ने मुझे और दीवाना कर दिया।

अब मैंने कंडोम निकाला। मैंने अपने लंड पर कंडोम लगाया। मेरा लंड 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है – सीधा, सख्त, और लाल सिरे वाला। मैंने कंडोम लगाते ही उसके ऊपर लेट गया और फिर से किस करने लगा। मैं अपने पूरे शरीर को उसके शरीर पर रगड़ता रहा। उसकी गर्म त्वचा मेरी छाती से चिपक रही थी।

वह तेज़-तेज़ साँसें ले रही थी। वह पागलों की तरह मुझे चूम रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर गड़ रहे थे। अब वक्त आ गया था।

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा। मुझे लगा – चूत गीली है, लंड आसानी से जाएगा। लेकिन नहीं गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैंने हल्का सा जोर लगाया। लंड का सिरा अन्दर गया – बस थोड़ा सा। और वह चीख उठी – “आआआ!”

मैं डर गया। मैंने तुरंत अपना लंड बाहर निकाल लिया। उसके चेहरे पर दर्द था। उसकी आँखों में पानी आ गया था। मैंने पूछा, “कुछ हुआ तो नहीं? दर्द हो रहा है?”

उसने सिर हिलाया – हाँ।

अब मैं समझ गया था कि मेरी पत्नी यह सब पहली बार कर रही थी। वह कुँवारी थी। इस बात से मैं बहुत खुश हुआ। लेकिन साथ ही, थोड़ा डर भी लग रहा था। अगर वह और चीख गई तो?

मैंने दिमाग से काम लिया। मैंने उसे बैठाया, फिर लिटाया। मैंने उसके चूतड़ों के नीचे एक तकिया लगा दिया – ताकि उसकी चूत ऊपर की तरफ उठ जाए और मैं नीचे खड़े होकर आसानी से लंड डाल सकूँ। मैंने बेड के किनारे खड़े होकर उसके पैरों को अपने कंधों पर उठा लिया।

मैंने अपने हाथ से अपना लंड पकड़ा और उसकी चूत पर रखा। मैंने अपनी दूसरे हाथ की हथेली उसके मुँह पर रख दी – ताकि अगर वह चीखे, तो आवाज़ बाहर न जाए।

मैंने धीरे से लंड अन्दर धकेला। इस बार मैं और जोर से दबाव डाल रहा था। लंड का सिरा अन्दर गया – फिर थोड़ा और। और फिर – मैंने देखा कि उसकी चूत से खून निकलने लगा था। उसे पता नहीं था। उसकी आँखें बंद थीं, और वह दर्द से हो रही थी।

मैं धीरे-धीरे लगाता रहा। धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके। उसकी चीखें अब बंद हो गई थीं। उसे अब मज़ा आने लगा था। उसके मुँह से “आह… आह…” की आवाज़ें निकल रही थीं।

मैंने लंड थोड़ा और अन्दर किया। उसकी चीख फिर निकली। लेकिन मैंने रुकना नहीं था। मैंने अपनी हथेली उसके मुँह पर और जोर से दबा दी। अब मैं नहीं रुकने वाला था। मैं लगातार धक्के देता रहा। वह दर्द से कराह रही थी, लेकिन अब उसकी आवाज़ दब गई थी। उसके चेहरे पर आँसू थे। मेरा दिल टूट रहा था, लेकिन साथ ही मैं बहुत उत्तेजित था।

करीब दस मिनट तक मैं चोदता रहा। मैंने अपना पूरा लंड तो नहीं डाला – सिर्फ आधा। क्योंकि पूरा लंड वह शायद ही झेल पाती। लेकिन इतने भर से ही उसकी चूत से खून आ गया था। और फिर – मैं झड़ गया। मेरा सारा वीर्य कंडोम में भर गया। मैंने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला।

मैंने कपड़े से उसका खून साफ किया। वह लेटी ही रही – थकी हुई, दर्द से बेहाल, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। उसे पता ही नहीं था कि उसका खून निकल रहा है। मैंने सब साफ किया और फिर उसके बगल में लेट गया।

मैंने उसे फिर से चूमना शुरू कर दिया। उसकी गर्दन, उसके कंधे, उसके होंठ। वह भी मुझे चूमने लगी। हम दोनों थे तो थके हुए, लेकिन हमारे बीच एक अजीब सा प्यार था – एक ऐसा प्यार जो शायद सिर्फ सुहागरात की रात ही होता है।

हम सुबह 4 बजे तक जागते रहे। उस रात मैंने उसे दो बार और चोदा। हर बार धीरे-धीरे, हर बार थोड़ा आराम से। उसे अब दर्द कम होता जा रहा था। और मुझे भी समझ आ गया था कि मैं अपनी पत्नी को कैसे चोदूँ ताकि उसे दर्द न हो, सिर्फ मज़ा आए।

सुबह जब मैं उठा, तो वह नहा रही थी। मैं चुपचाप तैयार हुआ, बिना किसी की नज़र में आए, घर से बाहर निकल गया। मैं पूरे दिन सिर्फ यही सोचता रहा कि रात कब होगी। क्योंकि अब मैं जान गया था कि चुदाई क्या होती है। और मैं हर रात यही करना चाहता था।

तो यह थी मेरी सुहागरात की रात की कहानी – जहाँ पहली बार चोदने वाले पति ने सुहागरात में दुल्हन की चूत फाड़ी, और उस दर्द के बीच भी प्यार का असली मतलब समझा। पूरी रात की चुदाई, खून और आँसू, और फिर एक-दूसरे की बाहों में सो जाना – यह सब कुछ शब्दों से बयान करना मुश्किल है। लेकिन उम्मीद है आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी।

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