पहली बार पति से गांड चुदवाई : दर्द भरी और मजेदार कहानी

⏱️ 20 min read

पहली बार पति से गांड चुदवाई – हमारी शादी हुए अभी दो महीने ही पूरे हुए हैं, लेकिन हमारी सेक्स लाइफ इतनी शानदार है कि जैसे हम सालों से एक-दूसरे को जानते हों। सच कहूं तो, ऐसा एक भी दिन नहीं निकलता जिस दिन हम दोनों ने चुदाई न की हो। मेरे पति का नाम प्रवीण है। वो दिखने में बहुत हैंडसम हैं—लंबा कद, चौड़ी छाती, और मजबूत बाहें। लेकिन उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो मुझे नई-नई पोजीशनों में काफी देर तक चोदते हैं। एक दिन उन्होंने मेरी गांड चोदने की इच्छा जाहिर की। मैं डर गई क्योंकि मेरी गांड बहुत टाइट थी और उनका लंड सात इंच का मोटा था। पहली कोशिश में दर्द से चीख निकल गई और हम रुक गए, लेकिन अगले दिन मैंने पूरी हिम्मत जुटाई और पहली बार पति से गांड चुदवाई। यह कहानी है उस दिन की, जब दर्ष से भरा यह सफर एक यादगार मज़े में बदल गया। पढ़िए इस पूरी कहानी को।

भाग 1: दो महीने की शानदार जिंदगी और गांड चुदाई की पहली कोशिश

हमारी शादी हुए अभी दो महीने ही पूरे हुए हैं, लेकिन हमारी सेक्स लाइफ इतनी शानदार है कि जैसे हम सालों से एक-दूसरे को जानते हों। सच कहूं तो, ऐसा एक भी दिन नहीं निकलता जिस दिन हम दोनों ने चुदाई न की हो। मेरे पति का नाम प्रवीण है। वो दिखने में बहुत हैंडसम हैं—लंबा कद, चौड़ी छाती, और मजबूत बाहें। लेकिन उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो मुझे नई-नई पोजीशनों में काफी देर तक चोदते हैं, जो मुझे बहुत पसंद है। मैं हर दिन उनके साथ कुछ नया सीखती हूं, कुछ नया महसूस करती हूं। उनके साथ बिस्तर पर होना मेरे लिए किसी रोमांच से कम नहीं है।

मेरे पति की एक और खासियत है जो मुझे बहुत पसंद है—जब तक वो नहीं चाहते, तब तक उनका वीर्य उनके लंड से बाहर नहीं आता। यह सुनने में भले ही छोटी बात लगे, लेकिन यह हमारी चुदाई को बहुत खास बना देता है। इसका मतलब यह है कि वो मुझे घंटों तक चोद सकते हैं, बिना झड़े, और मैं बिना किसी रुकावट के उनके लंड का पूरा मजा ले सकती हूं। इसलिए मेरी चूत उनसे चुदने के लिए हमेशा तैयार रहती है। मैंने अपनी चूत को उनके लिए हमेशा साफ और तैयार रखा है, क्योंकि मुझे पता है कि वो कभी भी, कहीं भी मुझ पर चढ़ सकते हैं।

मेरे मोटे-मोटे चूतड़ों के बीच कसी हुई मेरी गांड और मेरी फूली हुई चूत मेरे पति के लिए सबसे पसंदीदा जगहें हैं। वो अक्सर मुझसे कहते हैं कि मेरी गांड उन्हें पागल कर देती है—इतनी गोल, इतनी मोटी, और इतनी मुलायम। जब भी मैं उनके सामने से गुजरती हूं, वो मेरी गांड पर एक थप्पड़ जरूर मारते हैं और मुस्कुराते हुए कहते हैं, “यह तो मेरी है।” साथ ही मेरे बड़े-बड़े मम्मे भी मेरे पति को बहुत ही ज्यादा पसंद हैं। वो कहते हैं कि मेरे मम्मे उनके हाथों के लिए ही बने हैं—इतने नर्म और भरे हुए कि वो घंटों इनसे खेल सकते हैं।

चूत को हर तरह से बजाने के बाद, एक दिन मेरे पति ने मेरी गांड की चुदाई करने की इच्छा जाहिर की। हम दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे, अभी-अभी एक जोरदार चुदाई खत्म की थी, और मैं उनकी बाहों में सिमटी हुई थी। तभी उन्होंने धीरे से मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए कहा, “जान, मैं तुम्हारी गांड चोदना चाहता हूं।” उनकी बात सुनकर मैं एकदम से डर गई। क्योंकि उस वक्त तक मेरी गांड का उद्घाटन नहीं हुआ था, जिस वजह से मेरी गांड एकदम टाइट थी। मैंने कभी किसी को अपनी गांड में उंगली भी नहीं डालने दी थी, तो पूरा लंड कैसे जाएगा?

और ऊपर से, मेरे पति का लंड काफी मोटा है। मैंने उसे अपनी आंखों से देखा है, अपने हाथों से महसूस किया है, और अपनी चूत में झेला भी है। वो सात इंच लंबा और इतना मोटा है कि मेरी मुट्ठी भी उसे पूरी तरह से नहीं घेर पाती। जब उन्होंने अपने मोटे लंड से मेरी गांड मारने की इच्छा जाहिर की, तो मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल आया—ये मूसल मेरी गांड को फाड़ देगा। मैंने सोचा कि मेरी चूत तो फिर भी गीली हो जाती है और फैल जाती है, लेकिन गांड तो सूखी और टाइट होती है। भला इतना मोटा लंड वहां कैसे जाएगा?

मैं डर गई थी, लेकिन फिर भी मैंने अपने पति को मना नहीं किया। क्योंकि मुझे मालूम था कि मेरे पति मुझसे बहुत प्यार करते हैं और वे अपनी जवान बीवी को किसी भी तरह का दर्द नहीं होने देंगे। मैंने उनकी आंखों में देखा और उन्हें वहां सिर्फ प्यार और चाहत दिखी, कोई जबरदस्ती नहीं। मैं जानती थी कि अगर मैं मना कर दूंगी, तो वो नहीं करेंगे। लेकिन मैं उन्हें निराश भी नहीं करना चाहती थी। मैं चाहती थी कि वो मेरे शरीर के हर हिस्से का मजा लें, और मैं उन्हें वो सब कुछ दूं जो वो चाहते हैं।

मैंने उनसे कहा, “ठीक है, लेकिन मुझे थोड़ा वक्त दो।” मैं उठी और बाथरूम में गई। मैंने अपनी गांड को अंदर से अच्छी तरह से साफ किया। मैंने गर्म पानी से कई बार धोया, ताकि वहां कोई भी गंदगी न रहे। मैं चाहती थी कि यह अनुभव हम दोनों के लिए जितना हो सके, उतना साफ और अच्छा हो। जब मैं वापस कमरे में आई, तो मेरे पति ने मुझे गले लगा लिया और मेरे माथे पर चूम कर कहा, “क्या तुमको मुझ पर भरोसा नहीं है?” उनकी इस बात से मैं चुप हो गई। उनकी आवाज में इतना प्यार और अपनापन था कि मेरा सारा डर गायब हो गया। मैंने उनको गांड मारने के लिए हामी भर दी।

पति ने सबसे पहले मुझे बिस्तर पर पेट के बल लिटा दिया। उन्होंने मेरी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिससे मेरी गांड थोड़ी ऊपर उठ गई। फिर उन्होंने पास रखी तेल की शीशी उठाई और अपनी उंगली पर तेल लगाकर मेरी गांड में धीरे से डालना शुरू किया। शुरू में मुझे थोड़ा दर्द हुआ—एक अजीब सी चुभन, जैसे कुछ गलत हो रहा हो। लेकिन तेल से सनी उंगली ने मेरी गांड में अंदर तक जाकर मुझे गुदगुदी करना शुरू कर दिया। वो धीरे-धीरे अपनी उंगली को अंदर-बाहर कर रहे थे, और हर बार थोड़ा और अंदर जा रहे थे। मुझे भी ठीक लगा कि चलो, धीरे-धीरे लंड जाने लायक रास्ता भी हो ही जाएगा। मैंने अपनी गांड को ढीला छोड़ने की कोशिश की, ताकि उन्हें आसानी हो।

इसके बाद मेरे पति ने दो बार मेरी गांड में अपना लंड घुसाने की कोशिश की। उन्होंने अपने लंड पर काफी सारा तेल लगाया था, और मेरी गांड भी तेल से चिकनी हो चुकी थी। उनके प्रयासों से मेरी गांड में उनके लंड का सुपारा घुस भी गया था। लेकिन जैसे ही उन्होंने थोड़ा और अंदर धकेलने की कोशिश की, मुझे इतना जबरदस्त दर्द हुआ कि मैं चीख पड़ी। मुझे लगा जैसे कोई मेरी गांड को चीर रहा है। मेरी आंखों से पानी निकल आया और मैंने अपने पति का हाथ पकड़कर उन्हें रोक दिया। उन्होंने तुरंत अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। वो बोले, “कोई बात नहीं, हम दूसरे दिन ट्राई करेंगे। आज के लिए बहुत हुआ।”

उन्होंने उस दिन मेरे दर्द को समझते हुए अपने लंड से मेरी चूत का भी मजा नहीं लिया। वो बस मुझे प्यार से सहलाते रहे और मेरे बालों में हाथ फेरते रहे, जब तक मैं सो नहीं गई। मुझे बड़ा बुरा लग रहा था कि मैं अपने पति को गांड चोदने का मौका नहीं दे पा रही थी। मैं सोचती रही कि वो मेरे लिए इतना कुछ करते हैं, मुझे इतना प्यार देते हैं, और मैं उनकी एक छोटी सी इच्छा पूरी नहीं कर पा रही। मैंने उस रात ठान लिया कि कल चाहे कुछ भी हो जाए, मैं उन्हें अपनी गांड जरूर चुदवाऊंगी।

भाग 2: दूसरे दिन की तैयारी और पहली सफल गांड चुदाई

अगले दिन रविवार था। मेरे पति आज घर पर ही रहने वाले थे। सुबह से ही मेरे मन में एक बेचैनी थी—एक तरफ डर था, तो दूसरी तरफ एक अजीब सी उत्तेजना भी थी। मैं जानती थी कि आज मैं वो करूंगी जो कल नहीं कर पाई। हमेशा की तरह मैंने अपनी साड़ी और पेटीकोट कमर तक उठाकर, कमर का ऊपर वाला हिस्सा यानी मेरा पेट, मम्मे और सिर बेड पर रखकर लेट गई। मैंने अपना दायां पैर फर्श पर रखा था और बायां पैर घुटनों में मोड़कर बेड पर रख दिया था। यह मेरी पसंदीदा पोजीशन थी, क्योंकि इसमें मेरी चूत और गांड दोनों पूरी तरह से खुल जाती थीं।

मैं आपको बता दूं कि हम दोनों पति-पत्नी दिन में कभी भी, किसी भी समय, मूड बन जाने पर शौक से चुदाई कर लेते हैं। इसलिए मैं अक्सर चड्डी पहनती ही नहीं हूं। पता नहीं कब मेरी जान का चुदाई का मूड बन जाए और वे मुझ पर चढ़ने को आतुर हो जाएं। या फिर पता नहीं कब मेरा मूड बन जाए और मैं अपने पति के सामने अपना छेद खोलकर औंधी हो जाऊं। इसलिए चड्डी पहनना मुझे फालतू का काम लगता था। इस तरह कभी भी मूड बन जाने पर अपने पति से चुदवाने में मुझे बहुत मजा आता था।

उस दिन मेरा मूड पहले से ही बना हुआ था और मैं चुदाई की पोजीशन में पड़ी थी। मैंने अपने पति को आवाज देकर अंदर आने को कहा। मेरे पति अंदर आए और उन्होंने देखा कि मेरी गोरी गांड और दोनों कूल्हों के बीच से मेरी चूत चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। मेरी चूत की फांकें साफ दिख रही थीं, और वो पहले से ही थोड़ी गीली थी।

यह देखकर मेरे पति का लंड तनकर सात इंच का हो गया। उनकी पैंट में ही उनका लंड एक तंबू की तरह खड़ा हो गया था। मेरे पति ने पीछे से आकर अपनी पैंट और चड्डी एक साथ निकाल दी और अपना मोटा लंड मेरी चूत की दरार पर रख दिया। उनके लंड की गर्माहट मेरी चूत पर पड़ रही थी, और मैं सिहर उठी। वे अपने हाथ को मेरी गांड पर हल्का-हल्का फेरने लगे। उनके कामुक और मादक स्पर्श से मेरी चूत में हलचल मच गई। मेरी चूत से पानी टपकने लगा।

मैंने अपने पति को लंड चूत में घुसाने के लिए कहा, तो उन्होंने अपना लंड थूक से गीला किया और मेरी गांड को दोनों हाथों से फैलाकर अपना मोटा लंड मेरी चूत में घुसाने के लिए चूत की दरार पर रख दिया। लंड चूत की फांकों में जैसे ही सैट हुआ, मेरे पति ने एक हल्का सा धक्का मार दिया। इस झटके से मेरे पति का आधा लंड मेरी चिकनी चूत में ‘सट’ से घुस गया। तभी दूसरा करारा धक्का मारकर मेरे पति ने अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया।

मेरे पति का लंड चूत में घुसते ही मेरे मुंह से हल्की चीख निकल गई। उनका आज यह धक्का जरा जोर से लग गया था। यह तो अच्छा हुआ कि वहां मेरी चीख सुनने वाला कोई नहीं था। मेरे पति आज पता नहीं किस जोश में थे। उन्होंने मेरी चीख को नजरअंदाज किया और वे मुझे इसी पोज में दस मिनट तक चोदते रहे। उनका लंड मेरी चूत में जोर-जोर से अंदर-बाहर हो रहा था, और मेरी चूत से ‘पच-पच’ की आवाजें आ रही थीं।

मुझे चूत में लंड के झटके तो मस्त लग रहे थे। मेरी चूत की खुजली भी मिट रही थी, लेकिन इस पोजीशन में ताबड़तोड़ लंड के झटकों से मेरे पैर में दर्द होने लगा था। मैंने अपने पति से कहा, “यार, पैर में दर्द हो रहा है… जरा अपनी शंटिंग रोको।” इस बात को सुनकर मेरे प्यारे पति ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल दिया।

मैंने राहत की सांस ली और अब मैं बेड के किनारे अपनी गोरी गांड रखकर सीधी लेट गई। मैंने दोनों पैर उठाकर घुटनों के जोड़ से फैला दिए। पैरों को सहारा देने के लिए पीछे से हाथ डालकर मैंने अपने पैर फैलाकर रख लिए। अब मेरी चूत और गांड दोनों पूरी तरह से खुली हुई थीं और मेरे पति के सामने थीं।

भाग 3: पहली बार गांड में लंड – दर्द से मज़ा तक का सफर

अब मेरे पति अपना लंबा और मोटा लंड हाथ से हिलाते हुए मेरी चूत में डालने के लिए करीब आए, तो मैंने उनको मेरी चूत में लंड डालने के लिए मना कर दिया। मेरे पति ने मुझसे सवालिया शक्ल से पूछा, “क्या हुआ? साली चूत तो खोलकर रखी हो, और चूत में लंड न डालने की कह रही हो?”

आज मैं पहले से ही तैयार थी। मैंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, “चूत चोदना बाद में… अब तुम आज अपना लंड मेरी गांड में डालकर चोदो।”

पति ने थोड़ा झिझकते हुए कहा, “तुम्हें दर्द होगा।”

मैंने दृढ़ता से कहा, “दर्द सह लूंगी… लेकिन तुम्हारे लंड से आज गांड चुदवाकर ही मानूंगी। मुझे कितना भी दर्द हो, आज तुम मत रुकना।”

मेरी बात सुनकर मेरे पति की आंखें चमक उठीं। वो समझ गए कि आज मैं पूरी तरह से तैयार हूं। फिर क्या था… पति ने वैसलीन की डिब्बी उठाई और थोड़ी सी वैसलीन लेकर अपनी उंगली के जरिए मेरी गांड में डाल दी। उन्होंने अपनी उंगली को मेरी गांड में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, जिससे मेरी गांड खुलने लगी और मेरे पति की उंगली मेरी गांड में आसानी से अंदर-बाहर होने लगी। आज मैंने भी अपनी पूरी गांड ढीली कर दी थी, जिससे गांड का छेद पहले से ज्यादा खुल गया था। मैंने गहरी सांसें लीं और अपने शरीर को रिलैक्स किया, जैसा कि मैंने कहीं पढ़ा था।

अब मेरे पति ने थोड़ी सी वैसलीन को अपने लंड के सुपारे के सामने लगा दिया। उन्होंने अपने पूरे लंड पर भी वैसलीन लगाई, ताकि वो अच्छी तरह से चिकना हो जाए। इसके बाद उन्होंने अपने दाएं हाथ से मेरी गांड को फैलाकर अपना लंड बाएं हाथ में पकड़कर गांड के छेद पर सैट कर लिया। फिर लंड को हाथ में ही पकड़कर वे मेरी गांड में घुसाने लगे।

आहिस्ता-आहिस्ता पति के लंड का सुपारा मेरी गांड में घुसता जा रहा था। वैसे मुझे थोड़ा सा दर्द हो रहा था—एक जलन और खिंचाव का एहसास—लेकिन मैं दांत पर दांत दबाए हुए गांड मरवाने पर तुली हुई थी। मैंने अपने हाथों से चादर को कसकर पकड़ लिया और अपनी सांसें धीमी कर दीं। मैं खुद को समझा रही थी कि यह दर्द बस कुछ ही पलों का है, फिर तो मजा ही मजा होगा।

कुछ ही देर की मशक्कत से मेरे पति के लंड का सुपारा मेरी गांड में पूरी तरह से घुस गया था। उधर मेरे पति बिना रुके अपने लंड को मेरी गांड में सरकाते जा रहे थे। वे उंगली में वैसलीन लेकर लंड के बाहर रहने वाले हिस्से में लगाते जा रहे थे। वैसलीन की चिकनाहट की वजह से उनका लंड मेरी गांड में फिसलता हुआ आसानी से घुसता जा रहा था। मेरी गांड की दीवारें इस वक्त मेरी हिम्मत के कारण शांत होकर दर्द सहन कर रही थीं। मैंने अपने दिमाग को दर्द से हटाकर सिर्फ अपने पति के चेहरे पर ध्यान केंद्रित किया—उनकी आंखों में जो प्यार और चाहत थी, वो मुझे ताकत दे रही थी।

अब तक मेरे पति का आधा लंड मेरी गांड में घुस चुका था। लंड को और अंदर न घुसेड़कर इस बार मेरे पति अपना लंड बाहर निकालने लगे। तो मेरी गांड में गुदगुदी सी होने लगी। मेरे पति ने अपना लंड सुपारे तक बाहर निकाला और फिर गांड में घुसाने लगे। अब यह खेल मुझे अच्छा लगने लगा था। मेरे पति अपना आधा लंड ही मेरी गांड में अंदर-बाहर करके मेरी गांड चोदने लगे।

अब मुझे भी मजा आने लगा। मैं दर्द को भूलकर मदमस्त होकर गांड चुदवा रही थी। मेरे मुंह से हल्की-हल्की कराहें निकलने लगीं—”आह… उम्म… हां… ऐसे ही…” मेरा पूरा शरीर झनझना रहा था। आप विश्वास नहीं करोगे कि आधे घंटे से ज्यादा देर तक मैं अपनी गांड चुदवाती रही थी। मेरे पति बीच-बीच में रुककर मेरी गांड पर वैसलीन लगाते और फिर से शुरू हो जाते।

फिर मेरे पति ने अपना लंड मेरी गांड में से निकाल लिया और मुझे बेड के किनारे मेंढक जैसा बना दिया, जिससे मेरी गांड बेड के किनारे से बाहर को आ गई। मैं अपने घुटनों और हाथों के बल थी, और मेरी गांड हवा में थी। यह पोजीशन गांड चुदाई के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। मेरे पति ने फिर से थोड़ी सी वैसलीन अपनी उंगली पर लेकर मेरी गांड में डाल दी और थोड़ी वैसलीन अपने लंड के सुपारे के सामने लगा दी। फिर उन्होंने वही क्रिया दोहराई। अपने बाएं हाथ से मेरी गांड को थोड़ा फैलाया, दाएं हाथ में अपना लंड पकड़कर मेरी गांड के छेद पर सैट किया और लंड को मेरी गांड में घुसाने लगे।

मेरी गांड वैसलीन से बहुत ही चिकनी हो गई थी और अब गांड का छेद भी लंड की मोटाई के मुताबिक खुल गया था। इस बार मेरे पति का लंड आसानी से मेरी गांड में घुस रहा था। आधा लंड मेरी गांड में एकदम से घुस गया था। लेकिन मेरे पति बिना रुके लंड को मेरी गांड में घुसाते रहे। उन्होंने मेरे कूल्हों को पकड़ रखा था और धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे।

कुछ ही देर की कोशिशों के बाद मेरे प्यारे पति का पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था। मुझे एक पल के लिए लगा कि मेरी सांसें रुक जाएंगी—इतना भरा हुआ एहसास, इतनी गहराई तक कुछ जाना। लेकिन फिर वो एहसास बदलने लगा। सच में मुझे अपनी गांड में अपने पति का लंड लेकर बहुत मजा आ रहा था। मेरे मुंह से लगातार आवाजें आ रही थीं—”आह… और… और अंदर… हां… ऐसे ही…”

मेरे पति अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को फैलाकर अपना मोटा लंड मेरी गांड में डालकर धकापेल चोद रहे थे। मैं अपनी गांड चुदवाने का भरपूर आनंद उठा रही थी। पति देव अपना पूरा लंड मेरी गांड में डालकर फिर से पूरा लंड बाहर निकाल लेते थे, सिर्फ सुपारा ही मेरी गांड में रहता था। फिर वो जोर से अंदर धकेलते। यह एहसास बहुत ही अद्भुत था। मुझे दर्द की जगह आज जन्नत का मजा मिल रहा था।

भाग 4: बारी-बारी से चूत और गांड और आखिरकार वीर्य

करीब पंद्रह मिनट तक मेरी गांड चोदने के बाद, उन्होंने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और मेरी कुलबुलाती चूत में घुसेड़ दिया। मेरी चूत पहले से ही पूरी तरह से गीली थी, इसलिए उनका लंड एकदम आसानी से अंदर चला गया। पांच मिनट तक मेरी चूत चोदने के बाद, उन्होंने फिर से अपना लंड मेरी गांड में डालकर मेरी गांड मारने लगे। वो इस तरह बारी-बारी से मेरी चूत और गांड चोद रहे थे, और मैं दोनों छेदों से चुदवाने का मजा ले रही थी।

मैं तो जन्नत में सैर कर रही थी। मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था, मेरे बाल बिखर चुके थे, और मेरी आवाज भारी हो गई थी। लेकिन मैं रुकना नहीं चाहती थी। मैं चाहती थी कि यह पल कभी खत्म न हो।

पूरे एक घंटे तक मेरे पति मेरी गांड और चूत अदल-बदल कर चोदते रहे। मेरे पति का बहुत दिनों का सपना था कि वे मेरी चूत और गांड बदल-बदल कर चोदें। आज उनका वो सपना पूरा हो गया था। मेरे पति आज बहुत खुश थे। मेरी गांड चोदने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी। वो बार-बार मुझे चूम रहे थे और कह रहे थे, “थैंक यू, जान। तुम नहीं जानती कि तुमने आज मेरे लिए क्या किया है।”

आखिरकार, उन्होंने मेरी गांड में ही अपना गर्म-गर्म वीर्य छोड़ दिया। मुझे अपनी गांड के अंदर उनके वीर्य की गर्माहट महसूस हुई, और वो एहसास बहुत ही अजीब और अच्छा था। मैंने पहले भी बताया था कि मेरे पति की खासियत है कि जब तक वो नहीं चाहते, तब तक उनका वीर्य लंड से बाहर नहीं आता। आज उन्होंने चाहा, और मेरी गांड को अपने प्यार से भर दिया।

चुदाई खत्म होने के बाद, वो मुझे उठाकर बाथरूम ले गए। उन्होंने गर्म पानी से मेरी गांड और चूत को अच्छी तरह से साफ किया। मुझे अभी भी थोड़ा दर्द हो रहा था, लेकिन वो दर्द अब मीठा लग रहा था। उन्होंने मुझे तौलिये से पोंछा और फिर बिस्तर पर लिटाकर मेरे पास लेट गए। वो मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरे बालों में हाथ फेरने लगे।

मेरे पति से अपनी गांड चुदवाकर मैं बहुत खुश थी। ऐसा लग रहा था कि मैंने पहले ही अपने पति से अपनी गांड क्यों नहीं चुदवाई। पहली बार पति से गांड चुदवाई का यह अनुभव मेरे लिए जीवन भर याद रखने वाला था—दर्द था, पर उससे कहीं ज्यादा प्यार था, अपनापन था, और एक-दूसरे में घुलने का वह एहसास था जो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।

अब तो मैं अपने प्यारे पति को अपनी गांड हफ्ते में एक-दो बार चोदने के लिए ऑफर करती हूं। और हर बार का मजा पहली बार से भी ज्यादा होता है, क्योंकि अब न तो मुझे डर लगता है, न ही उतना दर्द होता है। बस होता है तो सिर्फ शुद्ध आनंद, और अपने पति को खुश देखने की संतुष्टि। उम्मीद करती हूं कि आपको मेरी यह कहानी पसंद आई होगी।

📲 इस कहानी को अपने करीबी दोस्तों के साथ शेयर करें 😉

Leave a Comment