मेरी पत्नी नये तरीके से चुदवाती है – क्या आपने कभी सोचा है कि एक राजपूत परिवार की संस्कारी बहू बेडरूम में कितनी जंगली और सेक्स की भूखी हो सकती है? यह हिंदी सेक्स कहानी मेरी पत्नी नये तरीके से चुदवाती है की है जहाँ निशांत सिंह की पत्नी नीलम रोज़ ब्लू फिल्में और सेक्स कहानियाँ देखती है, नए-नए सेक्स स्टाइल सीखती है, अकेले में खीरे से अपनी चूत चोदती है और पति का नाम लेकर चिल्लाती है। जब पति ने सरप्राइज देकर उसे पकड़ लिया तो उसने गुस्से में पति की छाती पर दाँतों से काटा, गालों पर थप्पड़ मारे, और ज़ोर-ज़ोर से गालियाँ दीं। फिर देहरादून के एक फ्लैट में दोनों ने नंगी ज़िंदगी जी — बारिश में चुदाई, दोबारा सुहागरात, और सेक्सुअल मसाज। एक रात पति ने पत्नी की आँखों पर पट्टी बाँधी, हाथ बाँधे, और एक साथ दो लंड — एक असली और एक रबर का — उसकी चूत और गांड में डालकर ज़ोरदार चुदाई की जिससे खून निकल आया। पत्नी ने गुस्से में पति की पिटाई की, लेकिन आखिर में पति को एहसास हुआ कि वो दुनिया का सबसे खुशनसीब आदमी है। अगर आपको सेक्स एडिक्ट पत्नी, खीरा चुदाई, डबल पेनेट्रेशन, गांड चुदाई, बीडीएसएम और हार्डकोर सेक्स वाली धमाकेदार कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।
भाग 1: मेरी पत्नी नये तरीके से चुदवाती है – नीलम की सेक्स की भूख और सरप्राइज
मेरा नाम निशांत सिंह है। मैं राजस्थान के अलवर जिले का रहने वाला हूँ और एक राजपूत परिवार से हूँ। हमारा परिवार इलाके में इज़्ज़त और रुतबे के लिए जाना जाता है — बड़ी हवेली, खानदानी परंपराएँ, त्योहारों पर पूरे गाँव को खाना खिलाना, और समाज में एक अलग पहचान। मेरे दादाजी इस इलाके के सबसे इज़्ज़तदार आदमियों में गिने जाते थे, और मेरे पिताजी भी अपनी साख के लिए मशहूर हैं। ऐसे परिवार में पैदा होकर मैंने हमेशा मर्यादा और संस्कारों को सबसे ऊपर रखा।
मेरी पत्नी का नाम नीलम है। मेरी उम्र 28 साल और उसकी 27 साल है। नीलम से मेरी शादी अरेंज मैरिज थी — परिवार वालों ने रिश्ता तय किया, हमने एक-दूसरे को एक बार देखा, और शादी हो गई। पहली ही नज़र में मुझे लग गया था कि यह लड़की कुछ अलग है — उसकी आँखों में एक शरारत थी, उसके चलने में एक अदा थी, और उसकी मुस्कान में एक राज़ था। शादी के बाद मैंने जाना कि वो राज़ क्या था।
मेरी पत्नी एक बहुत ही खूबसूरत, सेक्सी और आधुनिक औरत है। उसका रंग गोरा है — दूध जैसा — बाल लंबे, घने और काले हैं, और शरीर ऐसा कि कोई भी मर्द देखकर पागल हो जाए। उसके स्तन — 36 साइज़ के, गोल, भरे हुए, और रसीले — और उसकी गांड — मोटी, उभरी हुई, और चलने पर लहराती हुई — किसी भी आदमी की रातों की नींद उड़ा सकती है। जब वो साड़ी पहनती है और पल्लू को थोड़ा सा सरकाती है, तो मेरा लंड अपने आप खड़ा हो जाता है।
इसका पता मुझे मेरी शादी के कुछ समय बाद ही चल गया था। सुहागरात पर तो वो थोड़ी शरमाई थी — घूँघट में, लाल साड़ी में, आँखें नीची किए हुए। मैंने सोचा था कि वो भी वैसी ही शरीफ और संस्कारी पत्नी होगी जैसी मेरी माँ हैं। लेकिन जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, वो बिल्कुल बदल गई। उस रात उसने मुझे जो दिखाया, वो मैं कभी नहीं भूल सकता — उसकी भूख, उसका जुनून, उसकी बेबाकी।
वह बेड पर सेक्स का भरपूर मज़ा लेती है और मुझे भी खूब मज़ा देती है। वह एक दिन भी बिना सेक्स किए नहीं रह पाती है — चाहे सुबह हो या शाम, चाहे वो बीमार हो या थकी हुई, चाहे त्योहार हो या व्रत, उसे रोज़ चाहिए। मेरी पत्नी नये तरीके से चुदवाती है — कभी डॉगी स्टाइल, कभी काउगर्ल, कभी मिशनरी, कभी कुछ ऐसा जो मैंने न कभी देखा था, न सुना था। वो मुझे हर रात एक नया सरप्राइज देती है।
यहाँ तक कि कई बार तो वह दिन में 2-3 बार मुझसे सेक्स करवाती है। मैं काम से थका-हारा घर आता हूँ, सोचता हूँ आज आराम करूँगा, लेकिन जैसे ही घर में घुसता हूँ, वो मुझे पकड़ लेती है। कभी दरवाज़े पर ही घुटनों पर बैठकर मेरी पैंट खोल देती है, कभी किचन में ही मेरे साथ चिपक जाती है। वह काम के बाद भी, वह समय निकालकर हमेशा नेट पर सेक्सुअल स्टोरी और सेक्स वीडियो देखती ही रहती है। उसका लैपटॉप हमेशा ऑन रहता है, और उसमें सेक्स वीडियोज़ का कलेक्शन मेरे देखे हुए किसी भी कलेक्शन से बड़ा है। उसका कहना है कि मुझे इसी में आराम मिलता है और यही सब करने से मेरी थकन दूर होती है। आप इसी से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मैं कितना भाग्यशाली हूँ।
वह रोज़ सेक्स वीडियो देखती है और हमें दिखाई जाने वाली नई-नई स्टाइल में मुझसे सेक्स करती है। मेरी पत्नी सेक्स वीडियो देख कर इतना ज़्यादा सेक्स के नए तरीके और स्टाइल सीख गई है कि आप सोच भी नहीं सकते। सच मुझे भी इसमें बहुत ज़्यादा मज़ा आता है। वह इतना बढ़िया लंड चूसती थी कि मेरी तो आँखें पीछे हो जाती थीं — उसकी जीभ मेरे लंड की हर नस पर घूमती थी, उसके होंठ कसकर बंद होते थे, और उसका गला मेरे लंड को पूरा निगल जाता था। और जब मैं उसके स्तनों के बीच में अपना लंड रख कर उसके स्तन चोदता हूँ तो ऐसा लगता है कि मैं स्वर्ग में पहुँच गया हूँ — वो नरम, गर्म, और दूधिया स्तन मेरे लंड को चारों तरफ से दबाते हैं, और उसकी आँखें मुझसे मिलती हैं।
भाग 2: दिल्ली से सरप्राइज वापसी – खीरे से चूत चोदती नंगी पत्नी
ये कुछ दिनों पहले की बात है। मुझे कुछ काम से 1 हफ्ते के लिए दिल्ली जाना पड़ा। हमारे बिज़नेस का कुछ ज़रूरी काम था — कागज़ात, मीटिंग्स, सब कुछ। नीलम का रो-रोकर बुरा हाल था। “जान, तुम्हारे बिना मैं कैसे रहूँगी? मेरी चूत की आग कौन बुझाएगा? पूरे सात दिन?” उसकी आँखों में सचमुच आँसू थे। मैंने उसे चूमकर चुप कराया, उसे समझाया कि यह ज़रूरी है, और निकल गया।
वापसी के वक्त मैंने सोचा कि अपनी पत्नी को अचानक आकर सरप्राइज़ दूँगा। मैंने उसे बताया नहीं कि मैं कब आ रहा हूँ। सोचा, देखता हूँ वो अकेली क्या कर रही है, मेरे बिना कैसे रह रही है।
मैं अचानक रात में 10 बजे घर पहुँचा। अलवर की सर्द रात थी, हवा में ठंडक थी, और गलियों में सन्नाटा था। मैंने अपने पास की एक्स्ट्रा चाबी से गेट खोला और सीधे पहली मंजिल पर अपने कमरे के पास पहुँचा। मेरे कदम हल्के थे, मैं चुपचाप था। मैं रूम का गेट नॉक करने ही वाला था कि तभी मुझे मेरे रूम से मेरी पत्नी की सिस्कारियों की आवाज़ सुनाई दी। वो आवाज़ — “आह… हाँ… और… और ज़ोर से… चोदो मुझे…” — साफ सुनाई दे रही थी। मैं एकदम चौंक गया। मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा। क्या कोई और तो नहीं है उसके साथ? क्या वो… मेरे दिमाग में तरह-तरह के ख्याल आने लगे।
मुझे ऊपर वाली खिड़की खुली नज़र आई। खिड़की से झाँकने लगा, और जो देखा उसने मेरी साँसें रोक दीं। कंप्यूटर पर एक ब्लू फिल्म चल रही थी — एक हार्डकोर गैंगबैंग — जिसमें तीन लड़के एक लड़की को बुरी तरह से बेरहमी से चोद रहे थे। एक का लंड उसकी गांड में घुसा हुआ था, दूसरे का उसकी चूत में, और तीसरे का उसके मुँह में। लड़की बुरी तरह से चीख रही थी, लेकिन वो चीखें दर्द की नहीं, आनंद की थीं।
और मेरी पत्नी — मेरी नीलम — एकदम नंगी होकर बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसके सारे कपड़े फर्श पर बिखरे हुए थे। वो अपने हाथों से अपनी चुचियों को कस-कस के दबा रही थी — अपने निप्पलों को मरोड़ रही थी — और दूसरे हाथ से एक खीरा अपनी चूत में ज़ोर-ज़ोर से घुसा रही थी। वो खीरा — मोटा, लंबा, और उसकी चूत के रस से चमक रहा था — अंदर-बाहर, अंदर-बाहर हो रहा था। पूरा खीरा उसकी चूत में गायब हो जाता और फिर बाहर निकलता। मेरी पत्नी खीरे से अपनी चूत चोद रही थी और मेरा नाम लेकर चिल्ला रही थी — “हाँ निशांत… चोदो मुझे… और ज़ोर से… आह… निशांत… आह…” ये सीन देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया, मेरी पैंट में तनाव बढ़ गया, मैं भी पागल सा हो गया।
मैंने खिड़की से ही अपनी पत्नी को आवाज़ दी — “नीलम!” एक बार तो वो हड़बड़ा गई, खीरा हाथ से छूट गया, और उसने घबराकर इधर-उधर देखा। उसका चेहरा डर और शर्म से लाल हो गया। लेकिन जब उसने मुझे देखा तो खुशी से झूम उठी। उसने तुरंत गेट खोला — पूरी नंगी ही — और मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरे लंड को पागलों की तरह चूसने लगी। मेरी पैंट की ज़िप खोली, मेरा लंड बाहर निकाला, और सीधे अपने मुँह में ले लिया। उसका मुँह मेरे लंड पर था, और वो गालियाँ दे रही थी — “साले कुत्ते, मुझे ऐसे तड़पती हुई छोड़कर मत जाया कर नहीं तो मर जाऊँगी! कुत्ते, मेरे बदन की आग क्या तेरा बाप शांत करेगा? सात दिन तक मुझे अकेला छोड़ दिया!”
वह चूसती जा रही थी और मुझे गालियाँ बकती जा रही थी। उसकी जीभ मेरे लंड पर नाच रही थी, उसके होंठ कसकर बंद थे, और उसकी आँखों में आँसू और गुस्सा दोनों थे। मैं ये सब देखकर इतना ज़्यादा उत्साहित हो गया था कि तुरंत ही उसके मुँह में झड़ गया। मेरा वीर्य उसके मुँह में भर गया — गर्म, गाढ़ा, बहुत सारा।
वह गुस्से में आ गई और उसने मेरी छाती पर ज़ोर से अपने दाँतों से काट लिया — इतनी ज़ोर से कि निशान पड़ गया, लाल हो गया — और मेरे गालों पर कस-कस कर थप्पड़ मारने लगी। धप! धप! धप! एक के बाद एक, हर थप्पड़ ज़ोरदार। और बोली, “साले कुत्ते, जब अपनी पत्नी की आग शांत ही नहीं कर सकता तो क्यों लंड लिए घूमता है? अब मेरी चूत की आग कौन शांत करेगा? तू तो मुँह में ही झड़ गया!”
मैं उसके इस रौद्र रूप को देखकर शॉक हो गया। ये वही नीलम थी जो सबके सामने इतनी शरीफ और संस्कारी बनती थी? ये वही औरत थी जो मंदिर में घंटों बैठकर पूजा करती थी, सास-ससुर के पैर छूती थी? उसका ये रूप — जंगली, बेकाबू, और हवस से भरा — मुझे डरा भी रहा था और उत्तेजित भी कर रहा था। मेरी पत्नी में एक नहीं, दो औरतें थीं — एक दिन में, और एक रात में।
वह दोबारा से मेरे लंड को चूस-चूस कर खड़ा करने लगी। उसकी जीभ, उसके होंठ, उसका पूरा मुँह मेरे लंड पर था। वो मेरे अंडकोषों को भी चूस रही थी, अपनी जीभ से सहला रही थी। और जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ, वो मेरे ऊपर चढ़ गई और चुदवाने लगी। उसके कूल्हे मेरे ऊपर तेज़ी से घूम रहे थे, उसके स्तन उछल रहे थे, और वो चिल्ला रही थी — “हाँ… अब… और ज़ोर से… मुझे चोदो… साले… मुझे चोदो…” उस रात मैंने उसे 2 बार चोदा, तब कहीं जाकर उसकी आग शांत हुई और वो खुश होकर मुझसे लिपट कर सो गई।
मैं उसके इस रूप को देखकर चौंक गया था। मुझे काफी देर तक नींद नहीं आई, क्योंकि आज मैं अपनी पत्नी के इस रूप को देखकर बहुत ज़्यादा खुश था लेकिन थोड़ा डर भी गया था। क्या मैं उसकी भूख को पूरा कर पाऊँगा? क्या मैं उसके लिए काफी हूँ?
खैर, सुबह मेरी पत्नी ने मेरे गालों को सहलाते हुए — जो अब भी लाल थे — कहा, “जान, डरो मत। ये सच है कि मैं एक दिन भी बिना चुदवाए हुए नहीं रह सकती, लेकिन मैं तुम्हारे अलावा किसी और से नहीं चुदवाऊँगी। तुम मेरे पति हो, मेरे मालिक हो, और मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ।” उसकी आवाज़ में इतना प्यार और सच्चाई थी कि मैं पिघल गया। मैं संतुष्ट हो गया, लेकिन अब मेरी पत्नी का काम बढ़ता ही जा रहा था।
हम रोज़ खुलकर ब्लू फिल्में देखते हैं, सेक्स कहानियाँ पढ़ते हैं और खूब चुदाई करते हैं। मैं उसके लिए 2 रबर के लंड और बहुत सारा सेक्स का सामान ले आया — वाइब्रेटर, ल्यूब्रिकेंट, क्रीम, बट प्लग, सब कुछ। मेरी पत्नी आजकल ब्लू फिल्म देखते हुए रबर का लंड अपनी चूत में डालकर रखती है, और साथ में मेरा लंड मुँह में लेती है। एक दिन मैंने भी उसके साथ देखा, और मुझे भी बहुत मज़ा आया — उसे देखना, उसकी कराहें सुनना, और फिर उसे चोदना।
भाग 3: देहरादून का फ्लैट – नंगी ज़िंदगी, बारिश में चुदाई और दोबारा सुहागरात
दूसरे दिन मुझे कुछ बिज़नेस काम से 1 महीने के लिए देहरादून जाना पड़ गया। ये सुनकर मेरी पत्नी ने रोना शुरू कर दिया — “जान, मैं तुम्हारे बिना मर जाऊँगी! इतने दिन कैसे रहूँगी? एक महीना?” उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, और वो मुझसे चिपक गई थी। मैंने उसे किसी तरह समझाया, चूमा, और निकल गया। जब वहाँ पहुँचा तो पता चला कि मुझे यहाँ 2-3 महीने रुकना पड़ेगा।
ये सुनकर मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। 3 महीने? मैंने वहाँ एक फ्लैट किराए पर ले लिया — एक छोटा सा, शांत फ्लैट, पहाड़ों की तराई में, हरियाली के बीच। यहाँ का मौसम ठंडा था, हरियाली थी, और शाम को बारिश होती थी — रिमझिम, सुहानी बारिश। 1 हफ्ता ही बीता था कि मेरी वासना भड़कने लगी। उधर मेरी पत्नी भी फोन पर मुझे गालियाँ देने लगी — “साले, तू मुझे छोड़कर चला गया? मेरी चूत में आग लगी है! मैं यहाँ पागल हो रही हूँ!” सेक्स की आग मुझे भी पागल कर रही थी। हर रात मैं उसकी आवाज़ सुनता, और मेरा लंड दर्द करने लगता।
मैंने अपनी पत्नी को बुला लिया। जिस दिन वह आई — हवाई जहाज़ से, सिर्फ एक छोटे से बैग के साथ — उस दिन हमने खूब चुदाई की। एयरपोर्ट से उसे लेकर आते ही, गाड़ी में ही हमारी चुदाई शुरू हो गई। मैं गाड़ी चला रहा था, और वो मेरी पैंट खोलकर मेरा लंड चूस रही थी।
यहाँ चुदाई करने में हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। हम दोनों यहाँ शाम को 6 बजे से लेकर सुबह 7 बजे तक नंगे ही रहते थे। अपना मेन गेट लॉक करने के बाद हमें किसी का डर नहीं था — न पड़ोसी, न रिश्तेदार, न कोई। हम सेक्स के दौरान अब खूब चीखते और चिल्लाते, एक-दूसरे की बाहों में नंगे ही खाना खाते, और जी भर के चुदाई करते थे। मैं उसकी चूत और गांड दोनों की खूब चुदाई करता था — बारी-बारी से, कभी चूत, कभी गांड। जब बारिश पड़ती, तब खुले आसमान के नीचे भीगते हुए चुदाई करते — बालकनी में, ठंडी बारिश की बूँदों के बीच, हमारे नंगे शरीर एक-दूसरे से लिपटे हुए।
एक दिन जब मैं शाम को घर आया तो मैंने देखा कि मेरी पत्नी ने पूरे घर को सजा रखा है — फूल, मोमबत्तियाँ, और धूप — और बहुत ही हाई मेकअप और सोलह श्रृंगार करके मेरा इंतज़ार कर रही है। माथे पर लाल बिंदी, माँग में सिंदूर, गले में सोने का मंगलसूत्र, हाथों में लाल चूड़ियाँ, पैरों में चाँदी की पायल, और लाल रंग की बनारसी साड़ी। उसने कहा, “जान, आज फिर से सुहागरात मनाएँगे।” वाह, बहुत ज़्यादा सेक्सी और खूबसूरत लग रही थी — बिल्कुल वैसे ही जैसे हमारी शादी की रात।
उस दिन मेरी पत्नी ने मुझे चुदाई का वो सुख दिया कि मैं शब्दों में बता नहीं सकता। सारी रात न वो खुद सोई, न उसने मुझे सोने दिया। रात भर अलग-अलग स्टाइल में उसने मुझसे 3 बार चुदवाया — पहले मिशनरी में, फिर डॉगी में, फिर काउगर्ल में। चौथी बार मेरा लंड ही खड़ा नहीं हुआ, फिर भी वो मेरे लंड को 1 घंटे तक चूसती रही। हम दोनों ने एक-दूसरे की बॉडी की सेक्सुअल मसाज भी की — तेल से, धीरे-धीरे, हर इंच को सहलाते हुए। मैंने उसकी गांड की मालिश की, उसने मेरे लंड की।
भाग 4: मेरी पत्नी नये तरीके से चुदवाती है – आँखों पर पट्टी, डबल लंड और गांड-चूत की बेरहम चुदाई
एक दिन हम दोनों ने एक हार्डकोर सेक्स की वीडियो देख रहे थे जिसमें एक लड़की को एक साथ दो लंड लेते हुए दिखाया गया था — एक चूत में, एक गांड में। डबल पेनेट्रेशन। लड़की चीख रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर आनंद साफ दिख रहा था। नीलम की आँखें चमक गईं। “जान, मुझे भी ऐसा चाहिए। मुझे एक साथ दो लंड चाहिए,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में लालच था।
मेरे दिमाग में एक प्लान आया। मैंने सोचा, क्यों न आज उसे वो मज़ा दूँ जो वो हमेशा से चाहती थी? मैंने अपनी पत्नी की आँखों पर पट्टी बाँध दी — काली, मोटी पट्टी, जिससे उसे कुछ न दिखे। उसके बाद बिस्तर के दोनों तरफ की दोनों विंडो से उसके दोनों हाथों को पूरा लंबा करके कस कर बाँध दिया और उसे पीठ के बल सुला दिया। वो बिल्कुल बेबस थी — हाथ फैले हुए, आँखें बंद, शरीर नंगा और खुला हुआ।
फिर मैंने उसकी गांड में सिरिंज से खूब सारा नारियल तेल डाल दिया। सिरिंज — बिना सुई की — मैंने उसकी गांड के छेद में डाली और तेल अंदर धकेल दिया। सिरिंज से डालने के कारण तेल एकदम गहरे अंदर तक चला गया, उसकी आँतों तक। वो शायद समझ गई कि मैं आज उसकी गांड मारने वाला हूँ, और वह चिल्लाने लगी — “निशांत… आह… धीरे… क्या कर रहे हो…” फिर मैंने बहुत सारी क्रीम उसकी गांड में भर दी — ठंडी, चिकनी क्रीम।
उसके बाद मैंने रबर का मोटा लंड पहन लिया — एक स्ट्रैप-ऑन, जो मेरे कूल्हों पर बँध गया। अब मेरे पास 2 लंड हो गए: एक असली, ऊपर वाला, और एक नकली, नीचे वाला। दोनों एक साथ, एक के ऊपर एक। मैंने दोनों लंड पर कंडोम लगाया और बहुत सारी क्रीम लगाई।
अब मेरी पत्नी का ध्यान भटकाना ज़रूरी था। मैं उसके बदन को चाटने लगा — उसकी गर्दन से लेकर उसके पेट तक — चुचियाँ चूसने लगा, उसके निप्पलों को अपने दाँतों से हल्के-हल्के काटने लगा, और उसकी चूत को चाटने लगा। मेरी जीभ उसकी चूत के होंठों पर घूम रही थी, उसकी क्लिट पर फिर रही थी। मैं काफी देर तक ऐसा करता रहा — शायद आधा घंटा। मेरी पत्नी की चूत में जैसे आग लग गई हो — वो चुदवाने के लिए तड़पने लगी, उसकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। “जान… प्लीज़… अब डालो… मैं और नहीं सह सकती…”
तभी मैंने रबर का लंड उसकी चूत में घुसा दिया। लंड बहुत मोटा और लंबा था — लगभग 8 इंच — और उसकी चूत ने उसे लालच से निगल लिया। मैंने उसकी चूत में रबर का लंड थोड़ा सा ही घुसाया — बस आधा — उसके बाद मैंने उसकी दोनों टाँगें पूरी ऊपर उठा दीं और उसकी गांड के नीचे 2 तकिया लगा दिया, जिससे उसकी चूत और गांड का मुँह पूरा खुल गया — दोनों छेद मेरे सामने थे।
तभी मैंने अपना असली लंड उसकी गांड में घुसा दिया और एक ज़ोरदार शॉट मारा। एक साथ दोनों लंड उसकी गांड और चूत में सनसनाते घुस गए। वह दर्द के कारण रोने लगी और बिस्तर पर अपना सर पटकने लगी। “आआआह… निशांत… मैं मर जाऊँगी… बहुत दर्द हो रहा है…”
मैंने तुरंत उसके मुँह में उसकी पैंटी घुसा दिया, और मैं फुल स्पीड में चोदने लगा। दोनों लंड एक साथ अंदर-बाहर हो रहे थे — एक चूत में, एक गांड में। थप-थप-थप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। उसकी आँखों से आँसू बहते जा रहे थे, लेकिन आज मैंने एक साथ दो लंड का मज़ा देना चाहा था जो वो हमेशा से चाहती थी। बीच-बीच में मैं और क्रीम और तेल अपने लंड पर लगाता जा रहा था, इस कारण शायद उसका दर्द अब कम हो रहा था।
उसने मुँह से पैंटी निकालने का इशारा किया, मैंने उसके मुँह से पैंटी निकाल दिया। पैंटी निकलते ही वो मुझे गालियाँ देने लगी — “साले मादरचोद, तूने मेरी गांड और चूत दोनों फाड़ दी! कुत्ते! मैं तुझे नहीं छोडूंगी!” और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने और रोने लगी। लेकिन धीरे-धीरे उसका दर्द कम हो गया, और अब वह इस चुदाई का मज़ा लेने लगी। उसकी चीखें कराहों में बदल गईं।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे और ज़ोर से चोदने को कहा — “और… और ज़ोर से… मुझे चोदो… दोनों तरफ से… आह… हाँ…” मैं पूरी ताकत से चोदने लगा, और तभी मैं उसकी गांड में ही झड़ गया। मेरा गर्म वीर्य उसकी गांड में भर गया। उसने अपने दाँत मेरे कंधों पर गाड़ दिए और मैं दर्द से चिल्ला उठा। उसने इतने ज़ोर से दाँत गड़ाए थे कि मेरे कंधे से खून निकलने लगा — लाल, गर्म खून।
थोड़ी देर बाद जब मैंने लंड बाहर निकाला तो देखा कि दोनों लंड पर खून लगा हुआ था। मैंने उसके हाथ खोल दिए, आँखों से पट्टी हटाई। जैसे ही उसने खून देखा — अपनी जाँघों पर, बिस्तर पर — गुस्से में आ गई और मुझे गालियाँ देने लगी और मुझे मारने लगी। “साले! तूने मुझे घायल कर दिया!” उसकी मुक्के मेरी छाती पर बरस रहे थे, उसके थप्पड़ मेरे चेहरे पर। मैं चुपचाप उससे मार खा रहा था — हिला नहीं, कुछ बोला नहीं। मार-मार कर उसने मेरा चेहरा और मेरी पीठ सुजा दी, और फिर थक कर रोते-रोते सो गई।
भाग 5: पत्नी का गुस्सा, खून, मारपीट और पति का खुशनसीबी का एहसास
मैंने नींद में ही उसकी गांड और चूत पर लगे खून को साफ किया और दवा लगा दी। धीरे-धीरे, प्यार से, ताकि उसकी नींद न टूटे। मेडिकल स्टोर से लाया हुआ एंटीसेप्टिक क्रीम मैंने उसकी गांड के छेद पर लगाया, उसकी चूत पर लगाया। वो नींद में भी सिहर उठी। उस दिन वो ठीक से न मुझसे बात की और न ही मुझसे चुदवाया। पूरे दिन चुप रही, मुँह फुलाए रही।
अगली सुबह मैंने उसके लिए चाय बनाई, नाश्ता बनाया, और उसके पास गया। मैंने कहा — “तुम ही तो दोनों तरफ से ज़बरदस्त तरीके से चुदना चाहती थी। वीडियो में देखकर तुमने ही कहा था कि मुझे भी चाहिए। अब तुम मुझसे नाराज़ क्यों हो? मैंने तो तुम्हारी ख्वाहिश पूरी की।”
वो कुछ नहीं बोली, बस मुझे घूरती रही। फिर उसकी आँखों में आँसू आ गए, और वो मुझसे लिपट गई। “जान, मुझे माफ कर दो। मुझे गुस्सा नहीं आना चाहिए था। तुमने तो मेरे लिए ही किया। लेकिन इतना दर्द हुआ न… मुझे लगा मैं मर जाऊँगी।”
मैंने उसे चूमा और कहा, “अगली बार थोड़ा धीरे करूँगा। और ज़्यादा तेल डालूँगा।”
वो हँस पड़ी — आँसुओं के बीच हँसी — और बोली, “अगली बार? तुझे लगता है मैं फिर से करूँगी?”
मैं मुस्कुराया और बोला, “हाँ, तुम ज़रूर करोगी। क्योंकि तुम्हें मज़ा आया था — दर्द के बाद जो मज़ा आया, वो मैंने तुम्हारी आँखों में देखा।”
वो शरमा गई और मेरी छाती में मुँह छुपा लिया। फिर उसने धीरे से कहा, “हाँ, मज़ा आया था। बहुत ज़्यादा।”
मैं बाहर घूमने चला गया, और सोचने लगा अपनी पत्नी के बारे में। पहाड़ों की ठंडी हवा में चलते हुए, दूर बर्फ से ढकी चोटियों को देखते हुए, मैंने अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचा। आखिरकार मेरी समझ में यही आया कि शायद ही इस धरती पर मेरे जैसा कोई खुशनसीब हो जिसे इतना प्यार करने वाली और इतना यौन संतुष्ट करने वाली पत्नी मिली हो।
क्या धरती पर शायद ही कोई ऐसा मर्द हो जिसकी पत्नी इतना यौन मज़ा देती हो? आज के मॉडर्न ज़माने में हर मर्द यही चाहता है कि उसकी पत्नी बिस्तर पर उसके साथ इतना सेक्स करे, लेकिन इतना भाग्यशाली पति करोड़ों में कोई एक होता है। और आज मैं इतना खुश हूँ कि मैं बता नहीं सकता।
नीलम — मेरी पत्नी, मेरी प्रेमिका, मेरी रंडी, मेरी देवी — वो सब कुछ है जो एक मर्द कभी चाह सकता है। वो बाहर वालों के सामने एक संस्कारी राजपूत बहू है, और बेडरूम में एक जंगली शेरनी। और मैं — निशांत सिंह — उसका पति, उसका मालिक, उसका प्रेमी — सब कुछ हूँ। और मैं हर दिन उसके लिए शुक्रगुज़ार हूँ कि उसने मुझे चुना। मेरी पत्नी नये तरीके से चुदवाती है — और मैं हर नए तरीके का स्वागत करता हूँ, खुले दिल से, खुले शरीर से।