सुहागरात में कुंवारी दुल्हन की चूत में लंड घुसने का दर्द और सुख – सुहागरात की वो पहली रात – जब मेरे पति रोहित ने मेरी चूत में पहली बार अपना लंड घुसाया, तो दर्द और सुख का ऐसा अहसास हुआ कि मेरे शरीर की हर नस शूली पर नाच उठी। यह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि मेरे कौमार्य को तोड़ने की वह घड़ी थी जब मेरी योनी में उनके गर्म वीर्य ने पहली बार प्रवेश किया। उस रात मेरी चूत से रस बहा, मेरे स्तनों से दूध नहीं बल्कि उत्तेजना की नमी छलकी, और मैं एक कुंवारी दुल्हन से उनकी पत्नी बन गई। अगर आप भी वर्जिन वाइफ सेक्स कहानी पढ़ना चाहते हैं, जहां एक नई दुल्हन अपनी सुहागरात की रात अपनी चूत में लंड लेने के पहले अनुभव को बयां करती है – जिसमें दर्द, उत्तेजना, किस्से, निप्पल चूसना, क्लिटोरिस का रगड़ा जाना, हायमन टूटना, और आखिर में चूत के अंदर वीर्य निकलना सब कुछ है – तो यह कहानी आपके लिए ही है।
भाग 1 – शादी का दिन और सुहागरात की तैयारी
मेरी सुहागरात की कहानी – यह उस रात की दास्तान है जो मैं कभी नहीं भूल सकती। वो मेरी सुहागरात थी और सारी लड़कियाँ और भाभियाँ मुझे फूलों से सजे हुए उस खूबसूरत कमरे में छोड़ कर चली गयीं। कमरा बिल्कुल स्वर्ग जैसा लग रहा था – हर तरफ गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं, रंग-बिरंगी रोशनियाँ झिलमिला रही थीं, और हवा में चंदन, गुलाब और इत्र की बहुत ही मादक खुशबू घुली हुई थी। बिस्तर पर लाल रंग के फूल बिछे हुए थे और कमरे में एक अजीब सी शांति और रोमांटिक सी रौनक थी। शादी के बाद की थकान में मैं खुद को बहुत भारी महसूस कर पा रही थी। सारा दिन की रस्में, फेरे, विदाई, और फिर यहाँ आना – सब कुछ इतना जल्दी-जल्दी हुआ था कि मेरे शरीर का हर अंग दर्द कर रहा था। इसलिए मैंने नहाने का सोचा।
मैं उठी और बाथरूम की तरफ चल दी। बाथरूम में जाकर मैंने गर्म पानी से अच्छी तरह स्नान किया। गर्म पानी की धाराएँ जब मेरी थकी हुई मांसपेशियों पर गिरीं, तो मुझे बहुत आराम मिला। मैंने अपने बालों को अच्छे से धोया, अपने शरीर पर महंगा साबुन लगाया, और अपने शरीर के हर हिस्से को अच्छे से साफ किया। मैं जानती थी कि आज की रात बहुत खास है, इसलिए मैंने खुद को बिल्कुल परफेक्ट बनाने की कोशिश की। मैंने अपनी चूत के आसपास के बालों को भी अच्छे से साफ किया और पानी की तेज धार से उस जगह को कई बार धोया। नहाने के बाद जब मैं बाहर आई, तो मेरा शरीर बिल्कुल तरोताजा महसूस कर रहा था। मैंने एक सॉफ्ट और हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहनी – वही साड़ी जो मेरी माँ ने मुझे सुहागरात के लिए दी थी। वह साड़ी बहुत पतली और रेशमी थी, और मेरे शरीर पर बिल्कुल खुलकर लिपट रही थी। मैंने अपने बाल सुखाए, थोड़ा हल्का सा परफ्यूम लगाया, और फिर से तैयार होकर उस फूलों से सजे पलंग के किनारे बैठ गई।
जैसा कि आप सभी जानते ही होंगे, सुहाग रात की एहमियत बहुत होती है एक पति और पत्नी के लिए। यह वह पवित्र रात होती है जब दो शरीर एक होते हैं, दो रूहें आपस में मिलती हैं। मैं यह भी जानती थी कि मेरे पति रोहित भी मेरी तरह ही कुंवारे थे। हमने पहले कभी भी पूरी तरह से किसी और के साथ ऐसा कुछ नहीं किया था। मेरे मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे – क्या वो सही से कर पाएंगे? क्या मुझे दर्द होगा? क्या सब ठीक होगा? मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। मैं अपनी साड़ी के पल्लू को बार-बार समेट रही थी, अपने हाथों को देख रही थी, और बार-बार दरवाजे की तरफ नज़र दौड़ा रही थी।
भाग 2 – पहला स्पर्श और रोमांटिक पल
जैसे ही मैं पलंग पर बैठी अपनी सांसों को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी, मेरे पति रोहित कमरे में आ गए। वो एक सफेद रेशमी कुर्ते और पायजामे में बहुत हैंडसम लग रहे थे। उनके शरीर से चंदन, गुलाब और परफ्यूम की बहुत ही सुगंधित और मादक महक आ रही थी। उनके बाल अभी-अभी नहाए हुए थे, चेहरे पर एक मीठी-सी मुस्कान थी, और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी – वह चमक जो सिर्फ एक नए दूल्हे की आँखों में होती है। मैं थोड़ी सी घबरा रही थी, मेरे हाथ-पैर काँप रहे थे। जैसे ही वो मेरे पास आए, मैं उठकर खड़ी हो गई। मेरी साड़ी का पल्लू सरक गया और मेरा कंधा थोड़ा खुल गया, लेकिन मैंने संभाल लिया। वो भी पलंग पर मेरे साथ बैठ गए और हमने शादी से सम्बंधित बातें कीं – कैसे फेरे हुए, कैसे सबने हमें आशीर्वाद दिया, और जो गिफ्ट्स हमें मिले थे उनके बारे में थोड़ी-बहुत बातें भी हुईं। हम हँसे, हमने एक-दूसरे को देखा, और धीरे-धीरे वह घबराहट कम होने लगी।
और फिर बड़े प्यार से उन्होंने मुझसे पूछा, “क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ?” यह सवाल सुनकर मेरे चेहरे पर शरम की लाली दौड़ गई। मैंने बस अपना सिर हिलाकर हाँ कर दी, क्योंकि मेरे मुँह से कुछ निकल नहीं रहा था। वो खड़े हुए और मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में बड़े प्यार से लेकर पहले मेरे गाल पर बेहद हल्का और गर्म किस किया। उनके होंठ गर्म और मुलायम थे, जैसे रुई का गद्दा। उनके होंठों के स्पर्श मात्र से मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। फिर उन्होंने मेरे बहुत नज़दीक आकर बैठ गए। उनकी जांघ मेरी जांघ से लग रही थी, और मैं उनके शरीर की गर्मी को महसूस कर सकती थी। बैठने के बाद उन्होंने मेरी आँखों को भी बड़े ही संजीदगी से किस किया – पहले दाहिनी आँख, फिर बायीं। ऐसा लगा जैसे वो मेरी पलकों को अपने होंठों छू रहे हों। और फिर उन्होंने मुझे बताया कि इस दिन का वो तब से इंतजार कर रहे थे जबसे वो मुझसे पहली बार मिले थे – जब हमारी मुलाकात उस कॉफी शॉप में हुई थी। उनकी आवाज़ में सच्ची भावना थी, और मेरी आँखें नम हो गईं।
उन्होंने मेरे हाथों को अपने हाथों में बड़े प्यार से लेकर मुझसे पूछा कि क्या मैं थकी हुई महसूस कर रही हूँ। उन्होंने कहा, “अगर तुम बहुत थकी हो तो हम यहाँ सो जाते हैं। कोई जल्दी नहीं है।” उनकी इस बात ने मुझे और भी प्यार में डुबो दिया। वो मेरे बारे में इतना सोच रहे थे। जिसे सुनकर मैंने एक मुस्कराहट के साथ यह कहकर जवाब दिया कि अगर वो भी थके हों तो हम सो जाते हैं। मैंने थोड़ी शरारत से यह बात कही थी, और मेरी बात का मतलब वो समझ गए। यह सुनकर उन्होंने मुझे आँख मारी और मुस्कुराते हुए मेरे और नज़दीक आकर मुझे फिर से किस करने लगे। अब किस ज्यादा गहरे और ज्यादा गर्म होने लगे थे।
मैं व्याकुलता महसूस कर रही थी और वैसे भी यह उनका पहला किस नहीं था। ऐसा वो पहले भी शादी से पहले कर चुके थे। हमारी सगाई के बाद, जब भी हम अकेले होते थे, चाहे घर पर हो या कहीं बाहर जहाँ हम घूमने जाते थे – उन्होंने हर बार मुझे बड़े प्यार से किस किया था। पर शादी के बाद किया जाने वाला किस – पता नहीं क्या जादू करता है। उसमें एक अलग ही ताजगी, एक अलग ही गर्मी, एक अलग ही पवित्रता होती है। जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। मैं अपनी सुहागरात को लेकर बड़ी उत्सुक थी और न जाने मेरे मन में क्या-क्या चल रहा था। क्या होगा? कैसा होगा? क्या वो मुझे पसंद करेंगे? क्या मैं उन्हें पूरा सुख दे पाऊंगी?
भाग 3 – चूचियाँ चूसना और चूत सहलाना
हम लोग एक दूसरे को देर तक किस करते रहे। उनकी जीभ मेरे होंठों से खेल रही थी, धीरे-धीरे मेरे दांतों को छू रही थी। उन्होंने मेरी पीठ, मेरी कमर पर अपनी उंगलियाँ फेरनी शुरू कर दीं। उनकी उंगलियाँ गर्म और मुलायम थीं, और जहाँ-जहाँ वो छूतीं, वहाँ-वहाँ मेरा शरीर जलने लगता था। मेरे हाथ उनके कंधों पर थे और मैं उन्हें अपनी तरफ और भी जोर से धकेल रही थी। हम दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपक गए थे।
मैंने महसूस किया कि उनकी जीभ मेरे होंठों को धीरे-धीरे खोलते हुए मेरे मुँह के अंदर जाना चाह रही थी। मैंने अपने होंठ थोड़े खोल दिए, और उनकी जीभ अंदर चली गई। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी, एक अजीब सा मीठा संगीत बन रहा था। उसी बीच उनके हाथ मेरे साड़ी के पल्लू में से होते हुए मेरी पीठ, मेरी कमर पर होते हुए धीरे-धीरे मेरे स्तनों तक पहुँच गए। मैंने उनका हाथ रोकने की कोशिश नहीं की। उनका हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे स्तनों को दबा रहा था – पहले हल्के से, फिर थोड़ा जोर से। मेरे स्तन बिल्कुल पके फलों की तरह थे, सख्त और गोल। उनके दबाने से मेरे निप्पल तुरंत खड़े हो गए और सख्त हो गए। मेरी आँखें पूरी तरह से बंद थी, और मैं उनके हर प्रयास को अनुभव कर रही थी और उसका पूरा मजा ले रही थी।
जब उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए तो मैं बहुत उत्तेजित थी, क्योंकि आज मैं पहली बार किसी लड़के के सामने बिना कपड़ों के होने वाली थी। मेरे जीवन में ऐसा पहली बार हो रहा था। आज मैं पहली बार एक पुरुष को पूर्ण रूप से नग्न देखने वाली थी। उन्होंने मेरे पल्लू को मेरे कंधों से धीरे-धीरे हटाया, और वो साड़ी का वो हिस्सा एक तरफ गिर गया। फिर साड़ी का दूसरा हिस्सा जो पेटीकोट में घुसा हुआ होता है, उसे भी बाहर की तरफ खींच कर निकाल दिया। साड़ी पूरी तरह से निकल कर एक तरफ बिखर गई। मैं अब उनके सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी। मेरे स्तन ब्लाउज के अंदर अठखेलियाँ कर रहे थे। उन्होंने एक बार फिर से मुझे अपनी बाहों में भर लिया और हम दोनों एक दूसरे की आँखों में बहुत देर तक देखते रहे। साथ ही, उन्होंने मेरे ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने शुरू कर दिए। एक-एक हुक खुलने की आवाज़ मुझे जंगल में बारिश की बूँदों की तरह सुनाई दे रही थी।
सारे हुक खुल गए, और फिर उन्होंने उस ब्लाउज को मेरे कंधों पर से होते हुए धीरे-धीरे उतार दिया। अब मैं सिर्फ नरम और सेटिन की ब्रा में थी। उन्होंने मुझे पलंग पर लिटा दिया और मेरी ब्रा के हुक भी खोल दिए। मेरे स्तन पूरी तरह से खुल गए – बिल्कुल सफेद और कोमल, दो कबूतरों की तरह। मेरे निप्पल गुलाबी रंग के थे, उत्तेजना से पूरी तरह से खड़े और सख्त हो चुके थे। उनके हाथों ने मेरे स्तनों को अपनी गर्म हथेलियों में भर लिया। उन्होंने पहले मेरे दोनों स्तनों को धीरे-धीरे गोल-गोल घुमाकर मसलना शुरू किया, फिर उन्हें हल्के से दबाया और छोड़ा। उसके बाद उन्होंने मेरे स्तनों को किस करना शुरू कर दिया। हम दोनों की साँसें तेज़-तेज़ चलने लगी थीं।
वो मेरे निप्पल के साथ खेल रहे थे। उन्होंने एक निप्पल अपने मुँह में लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगे। हे भगवान… नहीं बता सकती उस पल क्या अनुभूति हुई। उनकी जीभ मेरे निप्पल की नोक को घेर रही थी, गोल-गोल घुमा रही थी, और साथ ही वो हल्का चूस रहे थे। फिर उन्होंने दूसरे निप्पल को भी वैसे ही चूसना शुरू कर दिया। मैंने अपना सिर उत्तेजना और आनंद के मारे पीछे की तरफ कर लिया था, और मेरी आँखें बंद हो गई थीं।
वो बार-बार मेरे बाएँ और दाएँ निप्पल को चूसना जारी करे रहे, जब तक कि मेरे पूरे शरीर में एक आग सी न लग गई। तभी पता नहीं क्या हुआ, मेरे शरीर में एक उफान सा आया। मैं पूरी तरह से निढाल सी हो गई और मुझे अपनी योनी में बहुत तेज गीलापन महसूस हुआ। वो मेरा पहला ऑर्गेज्म था उस सुहागरात में और मुझे लगा कि मैंने पेशाब कर दिया है। मैं बहुत शर्मिंदगी महसूस करने लगी। वो मेरे चेहरे की तरफ देख रहे थे और मेरे मन की बात समझ गए। उन्होंने बड़े ही प्यार से पूछा, “क्या हुआ? क्या तुम्हें ऑर्गेज्म हुआ?” मैं शर्म से पानी-पानी हो गई।
फिर उन्होंने मेरे स्तनों पर से अपने हाथ नीचे की तरफ बढ़ाए और मेरे पेटीकोट को खोल दिया। उनकी उंगलियों का मेरी पैंटी पर स्पर्श हुआ, और मेरे बदन में एक और सिहरन दौड़ गई। उन्होंने मेरी कमर पर किस करना शुरू किया, मेरी नाभि पर, मेरे पेट के निचले हिस्से पर, और फिर मेरी नम हो चुकी पैंटी पर भी। फिर उन्होंने धीरे से अपनी उंगलियाँ मेरी पैंटी की इलास्टिक में डाली और उसे नीचे करना शुरू कर दिया। मैंने अपनी टाँगे और फैला दीं और उन्होंने पूरी पैंटी को मेरे पैरों से निकालकर एक तरफ फेंक दिया। अब मैं पूरी तरह से नग्न थी।
भाग 4 – पहली बार कुंवारी दुल्हन की चूत में लंड घुसना और कौमार्य टूटना
तब रोहित को लगा कि उन्होंने अपने कपड़े तो उतारे ही नहीं। वो उठे और धीरे-धीरे अपने कुरते और पायजामे को उतार दिया। अब वो सिर्फ अपने अंडरवियर में थे। वो मेरे ऊपर लेट गए – अभी भी अंडरवियर पहने हुए। मेरे स्तन उनके सीने के नीचे दबे हुए थे, और मैं उनके शरीर की गर्मी को पूरी तरह से महसूस कर सकती थी। उनके हाथ मेरे बदन को महसूस कर रहे थे – कभी मेरी पीठ पर, कभी मेरे कमर पर, कभी मेरे नितंबों पर।
उनके कहने पर मैंने अपना हाथ बढ़ाकर उनके अंडरवियर पर रखा। मैंने अपनी उंगलियाँ उनके अंडरवियर के इलास्टिक बैंड के नीचे डालीं और धीरे-धीरे उसे नीचे किया। और फिर मैंने उनका लंड पकड़ लिया। मैंने उसे अपनी सारी उंगलियों में लपेट लिया। वह बहुत बड़ा था। उनके हिप्स भी अब हरकत करने लगे थे। वो खड़े हुए और अपना अंडरवियर पूरी तरह उतारकर एक तरफ फेंक दिया। अब हम दोनों पूरी तरह से नग्न थे – एक दूसरे के सामने बिल्कुल खुले हुए।
उन्होंने मेरी चूत को देखा – एक पल के लिए वो रुके, जैसे किसी बहुत खूबसूरत चीज को देख रहे हों। फिर उन्होंने मेरी चूत को बड़े प्यार से सहलाना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी चूत के लिप्स के बीच में डाली। उंगली पर मेरी चूत का पानी चमक रहा था। उन्होंने वह उंगली अपने मुँह में डाली और मेरा रस चाट लिया। फिर उन्होंने मेरी क्लिटोरिस को रगड़ना शुरू कर दिया। मेरे मुँह से जोर-जोर से आहें निकल रही थीं। उन्होंने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं, और मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियों को अंदर जाने में कुछ रुकावट आ रही है – मेरी हायमन। उन्होंने कहा, “शायद तुम्हारी हायमन है जो रोक रही है। कोई बात नहीं।”
हम दोनों पूरी तरह से आउट ऑफ कंट्रोल हो चुके थे। वो मेरी चूत के गीले और गर्म लिप्स को महसूस कर पा रहे थे। फिर वो नीचे गए और मेरी चूत को चूमने और चूसने लगे। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। और आखिरकार मुझसे रहा नहीं गया। मैं बोल पड़ी, “रोहित, प्लीज मुझे प्यार करो।” उन्होंने पूछा, “क्या तुम इसके लिए तैयार हो?” मैंने कहा, “हाँ, मैं पूरी तरह से अब आपकी ही हूँ।”
वो मुस्कुराए और मेरी टांगों के बीच में घुस गए। मैंने अपनी टाँगें और चौड़ी कर दीं। उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया। सिर्फ मुंड ही अंदर गया था। उन्होंने धीरे-धीरे थोड़ा और अंदर डालना शुरू किया। मेरे अंदर एक अवरोध महसूस होने लगा था – वो हायमन थी। उन्होंने एक तेज धक्का दिया। मेरा लंड उसकी हायमन से टकराया। और फिर एक और धक्का – मेरी साँसें जल्दी-जल्दी आ रही थीं। मैंने अपनी बाहें उनके कंधों पर लपेट दीं और अपने नितंबों को ऊपर की ओर उठा दिया।
और फिर कुंवारी दुल्हन की चूत में लंड घुसना हुआ – पूरी तरह से। मेरे पति का गर्म, और आकार में बड़ा लंड पूरी तरह से मेरी गीली हो चुकी योनी के अंदर घुस गया। अन्दर, और अन्दर वो चलता गया, मेरी चूत के लिप्स को खुला रखते हुए, मेरी क्लिटोरिस को छूता हुआ वो गहराई तक चला गया था। मेरी योनी मेरे पति के लंड के सम्पूर्ण स्पर्श को पाकर व्याकुलता से पगला गई थी। मैंने अपनी सारी हायमन खो दी थी। आँखों से आंसू भी आ गए थे। मैं अब पूरी तरह से उनकी हो चुकी थी।
रोहित रुका, मेरे आंसुओं को देखा, पर मैंने रुकने को नहीं कहा। इसके बजाय, मैंने अपने हिप्स को ऊपर की ओर उठाकर उनके लंड को और अंदर तक ले लिया। हम दोनों एक-दूसरे को किस कर रहे थे – पागलों की तरह, और मैंने महसूस किया कि उनके हिप्स आगे-पीछे हो रहे हैं। उन्होंने एक लय में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। जब-जब उनका लंड मेरी योनी की दीवारों से टकराता हुआ मेरी गहराइयों में जाता, तो उसके स्पर्श मात्र से मेरे पूरे शरीर में सनसनाहट दौड़ जाती। अब दर्द कम हो रहा था, और उसकी जगह एक अजीब सा सुख बढ़ रहा था।
“मैं ज्यादा देर नहीं रुक सकता… मेरा यह पहला समय है… मुझे जल्दी हो रही है,” उन्होंने कहा। मैंने तुरंत कहा, “कोई बात नहीं, मेरे अंदर ही निकाल दो… मैं भी यही चाहती हूँ।”
उन्होंने अपनी गति बढ़ा दी। और बड़ी जल्दी ही, मैंने महसूस किया कि उनके लंड में हलचल हुई और फिर एक गर्म, गाढ़ा तरल पदार्थ मेरी योनी के अंदर फूटने लगा – उनका वीर्य। एक बार, फिर दो बार, फिर कई बार। मैं उस गर्माहट को महसूस कर सकती थी। मैं भी उसी समय चरम पर पहुँच गई। कुछ देर बाद रोहित ने धीरे-धीरे अपने लंड को मेरी योनी से बाहर निकाल दिया। वो रस और वीर्य से रंगा हुआ था – लाल और सफेद रंग का मिश्रण। चादर पर भी खून के छोटे-छोटे धब्बे थे – मेरे कौमार्य के प्रमाण।
भाग 5 – संतुष्टि और सुबह का प्यार
कुछ मिनटों तक हम दोनों साथ-साथ बस ऐसे ही लेटे रहे – थके हुए, तरोताजा, और संतुष्ट। मेरा सिर उनके सीने पर था, और मैं उनके दिल की धड़कनें सुन सकती थी। उन्होंने मेरे बालों को सहलाते हुए मुझसे पूछा, “कैसा लगा?” मैंने उन्हें प्यार से एक लंबा किस किया और कहा, “बहुत दर्द हुआ, लेकिन बाद में बहुत अच्छा लगा। मैं इस पल को कभी नहीं भूलूंगी।”
फिर हम लोग बाथरूम में चले गए। हमने एक-दूसरे की मदद करते हुए अपने-अपने शरीर को साफ किया – गर्म पानी से। उन्होंने मेरी चूत को बहुत प्यार से साफ किया, और मैंने उनके लंड को। हमने उस रात के हर निशान को कमरे से साफ कर दिया। फिर लगभग एक घंटे तक हम दोनों बिल्कुल नंगे ही एक-दूसरे से लिपटे रहे – बातें करते रहे, एक-दूसरे को छूते रहे, किस करते रहे। और फिर धीरे-धीरे नींद आ गई। हम दोनों नंगे ही सो गए, एक-दूसरे की बाहों में।
अगली सुबह हम उठकर तैयार हुए। बीच-बीच में हम एक-दूसरे को देखकर शर्माते और मुस्कुराते, और चुपके-चुपके एक-दूसरे को किस करते रहे। अभी हमने कपड़े पहने भी नहीं थे कि दरवाजे पर दस्तक हुई। अगली सुबह रोहित की बहन – मेरी ननद – हम लोगों को उठाने आई। मैं शर्म से पानी-पानी हो गई। मैं उनसे आँखें नहीं मिला पा रही थी। मेरा चेहरा लाल हो गया था, और मैं चादर ओढ़कर बैठ गई। वो सब समझ गई। उन्होंने अपना सिर थोड़ा हिलाया और मुझे चिढ़ाने के अंदाज़ में बोली, “क्यूँ भाभी? भैया ने ज्यादा परेशान तो नहीं किया न?” मैं कुछ नहीं बोली – मेरे मुँह से कोई शब्द नहीं निकला। मैं बहुत शरमा गई। मैंने बस अपना चेहरा छुपा लिया और उठकर जल्दी-जल्दी वहाँ से निकल गई, दूसरे कमरे में जाकर कपड़े पहनने। लेकिन दिल में बहुत सुकून था, बहुत खुशी थी, और यह याद आज भी जब आती है, तो मेरी चूत आज भी गीली हो जाती है। वह सुहागरात मेरे जीवन की सबसे यादगार रात थी, जिसने मुझे एक कुंवारी लड़की से एक पूर्ण स्त्री बना दिया।