पति की जंगली चुदाई से बेड टूट गया – यह कहानी उस रात की है जब मेरे पति ने मुझे इतनी बेरहमी से चोदा कि टेबल तोड़ दी, और आखिर में पति की जंगली चुदाई से बेड टूट गया। मैं 25 साल की इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ, स्लिम ट्रिम फिगर, दूध जैसी गोरी त्वचा, तने हुए बूब्स और सख्त गांड। उस रात मेरे पति सांड बनकर टूट पड़े – पहले टेबल पर मिशनरी पोज, फिर टूटी टेबल पर चुदाई, फिर बेड पर गांड चुदाई, और अंत में बेड तोड़कर चुदाई जारी रखी। अगर आप जंगली सेक्स, रफ मिशनरी पोजिशन, गांड चुदाई, टूटते फर्नीचर के बीच चुदाई, और रात भर की रफ चुदाई जैसी गर्म हिंदी सेक्स कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं, तो यह कहानी आपके लिए ही है।
भाग 1: मेरा परिचय – एक सेक्सी इंटीरियर डिज़ाइनर की जिंदगी
मैं एक इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ। उम्र 25 साल। मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी और स्लिम ट्रिम है – इतना स्लिम कि लोग पूछते हैं कि बच्चे के बाद भी तुमने अपना फिगर कैसे बचा रखा है। मैं दूध की तरह गोरी हूँ – उत्तर भारत की तरह गोरी नहीं, बल्कि उससे भी ज्यादा – जैसे कोई परी। पूरे बदन के कटाव एकदम सेक्सी हैं – कमर इतनी पतली कि दो हाथों में समा जाए, पेट पूरा सपाट है, तोंद तो है ही नहीं। मेरे बूब्स और चूतड़ तने हुए बड़े बड़े हैं – बूब्स 34D – इतने बड़े कि एक हाथ में नहीं आते, और गांड – गोल, सख्त, चिकनी – जैसे कोई तरबूज हो। मेरे पति कहते हैं कि जब भी मैं सलवार कमीज पहनती हूँ, तो मेरी गांड देखकर उनका लंड खड़ा हो जाता है।
मेरा एक छोटा बच्चा भी है, जो अभी 15 महीने का ही है। चार महीने के उस मासूम को पता भी नहीं है कि उसके माँ-बाप क्या करते हैं जब वह सो जाता है। ऐसे तो मेरे पति मुझे रोज चोदते हैं और ऐसे वैसे नहीं, एकदम किसी जंगली जानवर की तरह चोदते हैं – जैसे कोई भूखा शेर अपने शिकार पर टूटता है, बिल्कुल वैसे। मगर उस दिन – उस रात – तो अलग ही किस्म के जानवर या कहूँ कि सांड बन गए थे वो। उस रात उन्होंने मुझे इतनी बेरहमी से चोदा कि टेबल टूट गई, बेड टूट गया, सब कुछ तहस-नहस हो गया। लेकिन उस चुदाई में जो मजा आया, वह शायद ही कभी आता है।
भाग 2: ऑफिस की बातों से बेडरूम तक – शुरुआत फोन से हुई
हुआ यूं कि उस दिन मेरे पति ऑफिस में थे और मैं घर पर रह कर अपना काम कर रही थी। आजकल मेरा वर्क फ्रॉम होम चल रहा था – कोरोना के बाद से ही ऑफिस ने हाइब्रिड मॉडल अपना रखा था। दिन भर मैं क्लाइंट्स के लिए डिज़ाइन बना रही थी – लिविंग रूम, बेडरूम, किचन – हर कमरे के लिए कलर पैलेट, फर्नीचर, लाइटिंग – सब कुछ। लेकिन मेरा दिमाग उस दिन काम में नहीं लग रहा था – क्योंकि पिछले दो दिनों से हमने सेक्स नहीं किया था। मैं उसके लंड के लिए तरस रही थी – मेरी चूत में हल्की हल्की गर्मी उठ रही थी – बस एक बार वो मुझे अंदर ले ले।
उसी समय मेरे पति का मुझे कॉल आया। मैंने फोन उठाया – उनकी आवाज़ सुनते ही मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। उनकी आवाज़ में उस दिन कुछ अलग था – और गहरा, और भारी, और ज़्यादा मर्दाना।
“क्या कर रही हो?” उन्होंने पूछा।
“वर्क फ्रॉम होम,” मैंने कहा – “डिज़ाइन बना रही हूँ।”
“तुम मेरे डिज़ाइन बना दो,” उन्होंने कहा – “मेरे लंड का डिज़ाइन – तुम्हारी चूत में कैसे फिट बैठता है।”
मैं हँस पड़ी – उनकी ये शरारतें, ये बातें – यही तो वजह है कि मैं उनसे इतना प्यार करती हूँ।
हम दोनों के बीच मजाक मस्ती की बातें होने लगीं। वो बोले – “आज रात मैं अलग ही जोश में हूँ। आज पूरी रात इतनी ज़ोर से चुदाई करूँगा कि पूरा घर हिलने लगेगा। सबको पता चल जाएगा कि मैं अपनी बीवी को कैसे चोदता हूँ।”
उनकी आवाज़ में वो जोश – वो आग – मेरी चूत में पानी ला रही थी। मेरे निप्पल सख्त हो गए थे – मेरे ब्लाउज के अंदर तनी हुई कलियाँ – बस किसी के स्पर्श की प्रतीक्षा में। अब मेरे होंठ मुश्किल से बोल पा रहे थे – मेरी उत्तेजना इतनी बढ़ गई थी।
मैं भी जोश में बोली – “ठीक है मेरे पति देव… पहले घर तो आ जाओ। क्या फोन से ही चोदोगे? फोन से थोड़ी ना चूत फटती है।”
वो बोले – “काश, मेरा लंड इतना लम्बा होता कि फोन से घुस कर ही तुम्हारी चूत में पहुँच जाता – तो मैं जरूर तुम्हारी चुदाई फोन से ही कर देता। लेकिन अभी – अभी निकला हूँ ऑफिस से। बस आधे घंटे में घर। तब तक तैयार रहना – बिल्कुल नंगी, बिना कपड़ों के।”
मैं हंस पड़ी – उसकी बातें मुझे और गीली कर रही थीं। मैंने सोचा – आज तो कुछ खास करना पड़ेगा। आज उनके लिए एक सरप्राइज रखती हूँ।
भाग 3: रात के दस बजे – इंतज़ार और बढ़ती बेचैनी
हम दोनों की बातें खत्म हुईं और मैंने घड़ी में देखा तो रात के दस बज चुके थे। मैंने जल्दी से अपना काम निपटाना शुरू किया। लैपटॉप पर आखिरी डिज़ाइन सेव किया – एक बेडरूम का डिज़ाइन था – कल किसी क्लाइंट को दिखाना था। काम करते करते मैंने टेबल पर खाना लगा दिया था – सब्जी, रोटी, चावल, दाल – सब कुछ। थालियाँ सजा दीं – दो थालियाँ – एक मेरे लिए, एक उनके लिए। पानी के गिलास भर दिए।
इंतज़ार करते करते मैंने फ्रेश होने का सोचा। मैं बाथरूम गई – गर्म पानी से नहाई – अपनी चूत को अच्छे से साफ किया – अपने बूब्स को धोया – अपनी गांड को – हर जगह। फिर मैंने वह परफ्यूम लगाया जो मेरे पति को सबसे ज्यादा पसंद है – वेनिला और चंदन की खुशबू – जो उन्हें बेहोश कर देती है। मैंने अपने बाल खुले छोड़ दिए – लंबे, भूरे, घने – जो मेरे कंधों तक आते हैं। बिना ब्रा के – सिर्फ एक हल्का सा स्लीपर पहना – जो इतना पारदर्शी था कि उसमें से मेरे स्तनों के निप्पल साफ दिख रहे थे – और नीचे कुछ नहीं – बिल्कुल नंगी।
फिर मैं अपनी ड्राइंग टेबल पर बैठ गई – कुछ पेपर लगाने थे, डिज़ाइन प्रिंट करने थे। टेबल पर बहुत सारा खाने का सामान रखा था – थालियाँ, कटोरे, गिलास – साथ ही मेरे काम की चीज़ें भी थीं – कुछ पेपर्स, लैपटॉप, पेन्सिल बॉक्स।
मैं उन पेपर्स पर डिज़ाइन के नोट्स लिख रही थी – तभी दरवाजे की घंटी बजी। दिल तेज़ धड़कने लगा – वो आ गए।
भाग 4: घर आते ही – बातों का सिलसिला और बढ़ती उत्तेजना
मैंने दरवाजा खोला। मेरे पति अंदर आए – एक दिन भर की थकान के बावजूद उनके चेहरे पर वह चमक थी – वह चमक जो मुझे पता थी – वो सिर्फ मेरा इंतज़ार कर रहे थे – और मेरी चूत का। उन्होंने मुझे देखा – स्लीपर में, बिना ब्रा के – और उनकी आँखें मेरे स्तनों पर टिक गईं – और उनकी पतलून में लंड हिलने लगा – मैंने देखा।
वो मुझे किस करना चाहते थे – उनके होंठ मेरे होठों तक पहुँचने ही वाले थे – उनकी गर्म साँस मेरे गालों पर पड़ रही थी – लेकिन मैंने उनको करने नहीं दी। क्योंकि ठीक उसी समय मेरा एक काम बाकी था – एक फाइल भेजनी थी। मैंने कहा – “प्लीज, अभी कुछ देर रुक जाओ। मुझे एक आखिरी फाइल भेज देने दो।”
मगर वो माने ही नहीं। उनके हाथ मेरे स्तनों से नीचे उतर गए – मेरे पेट पर – मेरी कमर पर – और फिर मेरी गांड पर। उन्होंने मेरी गांड को दबाया – जोर से – उसकी चिकनाई को महसूस किया – क्योंकि मैंने नीचे कुछ नहीं पहना था – सिर्फ वो पारदर्शी स्लीपर। उनकी उंगलियाँ मेरी गांड के गालों के बीच घुस गईं – और उसने मेरी चूत के लिप्स को छुआ – जो पहले से ही गीले थे – रस से भरे हुए।
मैं भी सनसनी में आने लगी – मेरी साँसें तेज़ हो गईं – मेरे हाथ में से पेन गिर गया – फाइल भेजना भूल गई। अब सिर्फ वो थे – और उनका लंड – और मेरी जलती हुई चूत।
उन्होंने एक हाथ से अपने पजामा को खोल दिया – एक झटके में नीचे – और जल्द ही टी-शर्ट खोल कर सिर्फ अंडरवियर में रह गए। मैंने देखा – उनका अंडरवियर पहले से ही गीला हो चुका था – उनके लंड से टपकते प्रीकम से। मैंने हंस कर कहा – “ये भी क्यों रह गया, इसे भी हटा दो।”
इस पर उन्होंने अपना अंडरवियर भी खोल दिया – और मेरे सामने उनका लंड खड़ा था – काला, मोटा, सख्त – कम से कम 7 इंच – नसों से भरा हुआ – सुपाड़ा बैंगनी रंग का हो गया था – उत्तेजना से – और उस पर पानी चमक रहा था।
भाग 5: टेबल पर पहली चुदाई – रफ मिशनरी से टेबल तक
उन्होंने मुझे गोद में उठाया – अपनी मजबूत बाँहों में – और मुझे टेबल पर ही लेटा दिया। टेबल पर बहुत सारा खाने का सामान रखा था – थालियाँ, कटोरे, गिलास – साथ ही मेरे काम की चीज़ें – लैपटॉप, पेपर्स, पेन्सिल बॉक्स – सब कुछ बिखरा हुआ था। मेरे पति ने मुझे टेबल पर उन सबके ऊपर ही लेटा दिया – और फिर मैंने देखा – उनके हाथों ने मेरे स्लीपर को पकड़ा और एक जोरदार झटके से फाड़ दिया – कपड़ा चीरने की आवाज़ – और अब मैं पूरी तरह नंगी थी – टेबल पर – खाने के सामान के बीच – बिखरे पेपर्स पर।
वो मिशनरी पोजीशन में मेरे ऊपर आ गए – उनका भारी शरीर मेरे ऊपर था – उनका बड़ा पेट मेरे सपाट पेट पर – उनके बूब्स मेरे बूब्स पर – और उनका गर्म, सख्त लंड मेरी चूत के ठीक सामने – जहाँ से रस टपक रहा था। उन्होंने अपने बदन से मेरे बदन को ज़ोर से दबाया – इतना जोर कि मेरी साँसें रुक गईं – और फिर बिना किसी और देरी के – अपना काला लंड मेरी चूत में ज़ोर से घुसा दिया – एक ही धक्के में – पूरा – जड़ तक।
मैं चिल्ला उठी – “आह्ह्ह्ह!” – इतनी तेज़ आवाज़ में कि अगर पड़ोसी जगा होता तो सुन लेता। मेरी चूत इतनी तंग थी – और उनका लंड इतना मोटा – कि पहला एंट्री हमेशा दर्द देता है – एक अच्छा दर्द – वह दर्द जो बताता है कि अब शुरू होने वाला है।
मैंने उन्हें धीरे चोदने के लिए कहा – “धीरे… धीरे… प्लीज़… अभी दर्द हो रहा है…”
लेकिन वो माने ही नहीं। वो पहले ही खुद को रोक चुके थे – पूरे दिन ऑफिस में – पूरे दिन तड़पते रहे – अब उनका जानवर जाग चुका था – अब वो रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने फुल स्पीड से चुदाई शुरू कर दी – धक्के इतने जोरदार थे – कि मेरा पूरा शरीर टेबल पर पीछे की तरफ सरक रहा था – हर धक्के के साथ मैं ऊपर उठ रही थी – मेरे बूब्स हवा में उछल रहे थे – मेरे निप्पल उनके सीने से रगड़ खा रहे थे।
मैं चिल्ला चिल्ला कर कामुक सिसकारियां ले रही थी – “ऊऊओ … ऊऊ … जान आई मर गई … थोड़ा आराम से … आह्ह्ह… बहुत जोर से रे बाबा… मेरी चूत फट जाएगी… आह्ह्ह…”
लेकिन वो मान ही नहीं रहे थे। मेरी चीखों ने उन्हें और भी ज्यादा जोश में ला दिया। उन्होंने मेरी सिसकारियां सुनकर और ज्यादा वजन डाल दिया – अपने पूरे शरीर का वजन मेरे ऊपर – और मुझे और स्पीड से चोदने लगे – मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी – उनके लंड के लिए – उसका रस बह रहा था – मेरी जांघों पर, टेबल पर, पेपर्स पर – सब कुछ भीग गया।
पूरी टेबल “धप धप धाप” की आवाज कर रही थी – उनके लंड के मेरी चूत में अंदर जाने की आवाज – गीली, तेज़, बेकाबू – और हम दोनों के वजन से टेबल ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी। मेरे पति पूरे जोश में वाइल्ड सेक्स के नशे में थे – उनकी आँखें बंद थीं – उनका मुँह खुला था – उनके होंठ काँप रहे थे – और वो कूद कूद कर मुझे चोद रहे थे – जैसे कोई रेसिंग कार हो – जैसे दुनिया में और कुछ है ही नहीं – सिर्फ मेरी चूत और उनका लंड।
जब वो मेरे ऊपर कूद कूद कर चुदाई कर रहे थे – तो पूरी टेबल आगे पीछे होती हुई इतनी ज़ोर से हिलने लगी थी मानो अभी ही टूट जाएगी। खाने का सारा सामान नीचे जमीन पर गिरता जा रहा था – एक-एक करके – थालियाँ बजती थीं – गिलास टूटते थे – चम्मच छिटकते थे – पानी फर्श पर बिखरता था – और देखते ही देखते – टेबल टूट गई।
एक तेज़ “चर्र्र्र” की आवाज़ – और फिर “धड़ाम” – हम लोग चुदाई करते हुए ही खाने के ऊपर गिर गए – टूटी हुई टेबल के टुकड़ों पर – बिखरे हुए खाने के साथ – रोटियाँ, सब्जी, दाल – सब कुछ हमारे शरीर पर लग गया। प्लास्टिक की चम्मचें इधर उधर छिटक गईं – कुछ मेरे बालों में फंस गईं – कुछ मेरे स्तनों पर चिपक गईं।
फिर भी – उन्होंने मुझे चोदना नहीं रोका। हम फर्श पर गिरे हुए थे – टूटी टेबल के मलबे पर – मेरी पीठ पर लकड़ी के टुकड़ों के निशान बन गए थे – थोड़ी चोट लगी थी – लेकिन उनके लंड की गर्मी ने सब कुछ भुला दिया। वो मुझे किसी जंगली जानवर की तरह चोदे जा रहे थे – बिना रुके – बिना शर्म के – बिना किसी रहम के।
मैं चिल्ला रही थी – “आह अय मांआ … मर गयी … अह रुको तो यार … आह सीइ सीई… तुम तो कमर ही तोड़ दोगे मेरी… आह्ह्ह… बस करो ना प्लीज़…”
वो नॉनस्टॉप चुदाई करने में लगे रहे – उनका लंड मेरी चूत में अंदर जा रहा था – बाहर आ रहा था – अंदर – बाहर – जैसे कोई पिस्टन चल रहा हो – तेज़ – बहुत तेज़ – और मेरी चूत अब पूरी तरह फैल चुकी थी – उसके लिप्स सूज गए थे – लाल हो गए थे – लेकिन फिर भी – उनके हर धक्के पर एक अजीब सा सुख मिल रहा था – वह सुख जो सिर्फ तभी आता है जब एक औरत अपने पति की पूरी ताकत से चुद जाए।
जब उनका माल निकल गया – तब वो रुके – और मुझे राहत मिली। उनका गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरी चूत की गहराई में जा गिरा – एक बार, दो बार, तीन बार – मैंने अपने अंदर उसकी गर्मी को महसूस किया – और मेरा शरीर भी काँप उठा – मैं भी झड़ गई – उनके साथ, उसी पल, उसी मलबे के बीच।
वो मेरे ऊपर लेटे रहे – साँसें ले रहे थे – उनकी छाती मेरी छाती पर – उनका चेहरा मेरे बालों में – और धीरे-धीरे सामान्य हो रहे थे। फिर बोले – “मजा आया?”
मैंने कहा – “मजा तो तुम्हें आया होगा। मेरी तो गांड छिल गई – और टेबल भी तोड़ दी तुमने – सब बिगाड़ दिया।”
वो हंसने लगे – उनकी हँसी में वह मासूमियत थी – जो मुझे प्यारी लगती थी। उन्होंने मेरे माथे पर चूमा और कहा – “तेरे चोदने का मजा ही कुछ और है… टेबल छोड़ दे – मैं नई ले दूंगा।”
मैं अपनी गांड सहलाने लगी – सच में दर्द हो रहा था – उनके जोरदार धक्कों से – लेकिन दिल में एक अजीब सी संतुष्टि थी – पूर्णता – जैसे दुनिया की सारी भूख मिट गई हो। मैं अपने पति के मोटे लंड से चुदकर मजा आया था – मगर औरतों की आदत होती है – वो कभी संतुष्ट नहीं होतीं – हमेशा और चाहिए – और गहरा – और तेज़।
फिर जब हम लोग उठे तो मैंने नीचे देखा – पूरा सत्यानाश हो चुका था – टेबल के चारों टाँगे टूट चुकी थीं – ऊपर का शीशा टूट गया था – खाने का सामान बिखरा था – पानी, सब्जी, दाल, चावल – सब फर्श पर – पेपर्स गीले हो गए थे – लैपटॉप धूल से भर गया था। मैंने सोचा – कल तो डिज़ाइन फिर से बनाने होंगे – और एक नई टेबल भी।
भाग 6: फ्रेश होकर दूसरे दौर की शुरुआत
मैं फ्रेश होने बाथरूम गई – गर्म पानी से नहाई – अपनी चूत को धोया – जो अभी भी लाल और सूजी हुई थी – उनके लंड के जोर से। अपनी गांड को भी धोया – जहाँ उनके लंड ने हर बार वार किया था – उसकी दीवारें अभी भी सिहर रही थीं। एक अजीब सा दर्द था – अच्छा दर्द – वह दर्द जो बताता है कि तुमने अच्छी चुदाई की है। मैंने फिर से वही पारदर्शी स्लीपर पहना – लेकिन अब वह और भी पारदर्शी लग रहा था – शायद उनके हाथों से घिस गया था या फट गया था।
मेरे फ्रेश होने के बाद मेरे पति भी फ्रेश होकर आए। उनकी आँखों में अभी भी वही चमक थी – वही भूख – लेकिन थोड़ी शांत – अभी संतुष्ट थे – लेकिन मैं जानती थी – देर नहीं लगेगी – फिर से जाग जाएगा उनका सांड।
हम दोनों कमरे में आ गए और बेड पर लेट कर सोने लगे। बेडरूम में अंधेरा था – पर्दे पूरी तरह बंद – सिर्फ रात की हल्की चाँदनी कमरे में झाँक रही थी।
एक घंटा बाद – मैं करवट बदल ही रही थी कि मुझे महसूस हुआ – मेरे पीछे उनका लंड – फिर से खड़ा – सख्त – गर्म – मेरे गांड पर दब रहा था। मेरा दिल फिर से तेज़ धड़कने लगा – क्योंकि मैं जानती थी – अब एक नया दौर शुरू होने वाला है।
भाग 7: बेड पर दूसरा दौर – गांड चुदाई का जंगली खेल
मेरे पति का लंड फिर से खड़ा हो गया था – और वो फिर से मेरे ऊपर चढ़ गए – बिना कुछ कहे – बिना कोई शब्द बोले – बस उसी सन्नाटे में – जहाँ सिर्फ हमारी साँसें थीं। फिर से मिशनरी पोज़ीशन में – जो उनको सबसे ज्यादा पसंद है – वो मेरी बॉडी को अपने जिस्म से ज़ोर से दबाए हुए थे। उनके हाथ मेरे हाथों को पकड़े हुए थे – उंगलियाँ मेरी उंगलियों में लिपटी हुईं – उनके पैर मेरे पैरों पर – पूरा शरीर एक-दूसरे से चिपका हुआ।
मेरी तो जान ही निकल रही थी – उनके भारी शरीर के नीचे – उनके पेट ने मेरे सपाट पेट को कुचल दिया था – मेरी साँसें रुक रही थीं – लेकिन उनकी आँखों में वह आग थी – वह बेरहमी – और मैं जानती थी – अब रुकने वाले नहीं हैं। मैंने समझ लिया कि ये बिना लंड पेले मानेंगे नहीं – तो मैंने अपनी टांगें खोल दीं – जितनी हो सके उतनी चौड़ी – उनके मोटे लंड के लिए – ताकि उन्हें आसानी रहे।
उन्होंने अपना लंड ज़ोर से मेरी चूत में घुसा दिया – इस बार वो पहले जैसी तेज़ी नहीं थी – वो और भी तेज़ थी। उन्होंने धक्के देने शुरू कर दिए – ज़ोर ज़ोर से – पूरी रफ़्तार में – मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहे थे – बिना किसी लय के – पूरी तरह बेकाबू – जैसे कोई पागल हो। पूरा बेड ज़ोर ज़ोर से हिलने लगा – उसकी चरमराहट की आवाज़ – चूं छुं छुं – कमरे में गूंजने लगी।
मैं सिसकारियां ले रही थी – मगर धीरे-धीरे – दबी आवाज़ में। अपने दाँतों को निचले होंठ पर रखकर – दर्द और सुख को एक साथ चूस रही थी।
मैं – “अया अयाया अयाया बस करो… फीलिक्स… आराम से… आउच आह अयाया अया… प्लीज़… आराम से…”
लेकिन मेरे पति मान ही नहीं रहे थे। मेरी दबी चीखें उनको और ज्यादा उत्तेजित कर रही थीं – उनके धक्के और जोरदार हो गए – और उनकी गति और तेज़ हो गई। बेड अब खतरनाक तरीके से हिल रहा था – हमारा सर हेडबोर्ड पर बार-बार टकरा रहा था – धक-धक-धक की आवाज़ आ रही थी।
कुछ देर बाद उन्होंने मुझे उल्टा कर दिया – अब मैं पेट के बल थी – और उन्होंने मेरी गांड पर लंड सैट कर दिया। मैं कांप गई – मेरा पूरा शरीर काँप उठा – क्योंकि अब गांड भी मारी जाएगी। हालांकि मैं गांड तरफ से भी चुदती हूँ – लेकिन उन महिलाओं को मालूम होगा कि गांड में लंड लेना कितना दुरूह कार्य होता है – उस छेद में – उतना लचीला नहीं होता। और फिर मेरे पति का लंड तो गधे के लंड से मैच करता है – मोटा, लंबा, नसों से भरा – बिल्कुल किसी घोड़े के लंड जैसा।
वही हुआ जिसका डर था – मेरे पति ने मेरी गांड में पूरी ताकत से अपना मूसल लंड घुसा दिया – एक ही धक्के में – बिना किसी लुब्रिकेंट के – सिर्फ मेरी चूत के रस से – जो अब तक मेरी गांड पर आ चुका था। मैं चीख उठी – “आह्ह्ह्ह्ह! मर गई! बहुत दर्द!”
लंड घुसा और वो कूद कूद कर गांड चुदाई करने लगे – मेरी गांड के अंदर उनका लंड जा रहा था – बाहर – अंदर – और अब दर्द के साथ एक अजीब सा सुख भी आने लगा था – वह सुख जो तब आता है जब तुम्हारी गांड तुम्हारे पति के लंड को पूरी तरह स्वीकार कर लेती है। पूरा बेड अब और ज़ोर से हिल रहा था – उसकी चरमराहट – थप-थप की आवाज़ – और मेरे मुँह से निकलती दबी-दबी कराहें – सब कुछ मिलकर एक अजीब संगीत बना रहे थे।
भाग 8: पति की जंगली चुदाई से बेड टूट गया – और फिर चुदाई नहीं रुकी
काफी देर बाद मेरे पति ने मुझे फिर से सीधा लेटा दिया – और इस बार मिशनरी पोज़ में वापस आ गए। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं – उनका चेहरा पसीने से तर – उनकी आँखें बंद थीं – और वो फिर से वही दोहरा रहे थे – जो उन्हें सबसे अच्छा लगता था – मेरी चूत में अपना लंड डालकर पूरी ताकत से चोदना। उन्होंने मुझे अपने से चिपका लिया – इतना कसकर कि मेरी पसलियाँ दब गईं – और फिर धक्के देने लगे – तेज़, जोरदार, बेरहम।
मेरे पति अपने जिस्म का बोझ मेरे ऊपर इतना ज़ोर से दबाए हुए थे कि मेरी जान ही निकल रही थी। वो फिर से मिशनरी पोज़ीशन में जंगली जानवर की तरह मेरी चुदाई करने लगे – उन्होंने मेरे जिस्म को एकदम कसके पकड़ा हुआ था – मेरे पैरों को अपने पैरों से दबाए हुए थे – और वो कूद कूद कर – रगड़ रगड़ कर – जंगली सांड की तरह मुझे चोदने लगे।
मैं लगातार चिल्लाए जा रही थी – “आआह आआ… फीलिक्स… धीरे… आराम से… आह… बस करो… मेरी चूत फट गई… प्लीज़…”
मगर उनको चुदाई के समय कुछ होश नहीं रहता – न सुनते हैं – न देखते हैं – बस चोदते जाते हैं। हमारा बेड बहुत ज़ोर से आगे पीछे हिल रहा था – और चूं छुं छुं कर रहा था – धाप धाप की आवाज़ आने लगी थी – और फिर मुझे किसी चीज़ के टूटने की आवाज़ आई – “क्रैक” की आवाज़ – एक बार, दो बार, तीन बार।
फिर वही हुआ जिसका डर था।
उनकी इस तरह की जंगली चुदाई से – उनके जोरदार धक्कों से – बेड – जो पहले से ही चरमरा रहा था – बेड टूट गया। हेडबोर्ड का एक साइड टूटा – फिर दूसरा – और फिर पूरा बेड एक तरफ झुक गया – और हम लोग ज़मीन पर – टूटे हुए बेड के टुकड़ों के ऊपर गिर गए।
उसी समय – उसी पल – उसी धमाके के साथ – मेरे पति का स्पर्म निकल गया – उनका गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरी चूत की गहराई में जा गिरा – उनके शरीर में ऐंठन थी – और मैं उनके नीचे दबी हुई थी – टूटे हुए बेड पर – बिखरे हुए सामान के टुकड़ों के बीच – और वो चोदते जा रहे थे – बिना रुके – उनका वीर्य मेरी चूत से बाहर बह रहा था – मेरी जांघों पर, टूटे बेड पर – सब कुछ गीला हो गया।
जब उनका पूरा स्पर्म निकल गया – तब वो रुके। उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं – उनके माथे पर पसीना था – उनकी आँखें धुंधली थीं। हम दोनों टूटे हुए बेड पर पड़े थे – नंगे – पसीने से तर – वीर्य से सने – चारों तरफ टूटे लकड़ी के टुकड़े बिखरे हुए थे।
भाग 9: आपदा के बाद – सुबह तक की कहानी
मैं अपने पति के नीचे से निकली – मेरे पैर काँप रहे थे – मेरा लंड से भरी चूत अभी भी टपक रही थी – मेरी गांड में अभी भी दर्द था – मेरी चूत के लिप्स सूजे हुए थे। मैं उठी – टूटे हुए बेड के टुकड़ों को एक तरफ किया – उनके लंड से भीगी हुई चादर उतार दी – जिस पर मेरे रस और उनके वीर्य के धब्बे थे – और उसे कोने में फेंक दिया।
फिर मैं बाथरूम गई – अपने शरीर को धोया – अपनी चूत को साफ किया जो अभी भी जल रही थी – और एक साफ नाइटी पहन ली।
जब मैं वापस आई – मेरे पति अभी भी वहीं थे – टूटे बेड पर – नंगे – पसीने से तर – अपने चेहरे पर हाथ रखे हुए – शायद सोच रहे थे कि क्या हो गया। मैं उनके पास गई – और उनके बगल में बैठ गई – चुपचाप – हमने एक-दूसरे को देखा – और फिर दोनों हँस पड़े – एक जोरदार हँसी – वह हँसी जो आपदा के बाद आती है – वह हँसी जो बताती है कि हम एक साथ हैं – चाहे कुछ भी हो जाए।
“बेड टूट गया,” मैंने कहा।
“हाँ,” उन्होंने कहा – “टेबल भी पहले टूट गई थी।”
“तो कल नया फर्नीचर खरीदना पड़ेगा,” मैंने कहा – और उनके बालों को सहलाया।
“तुम एक जंगली सांड हो,” मैंने कहा – और उनके कंधे पर सिर रख दिया।
“तुम एक हॉट रांड हो,” उन्होंने कहा – और फिर दोनों हँसे।
फिर वो फ्रेश होने चले गए – बाथरूम गए – गर्म पानी से नहाए – शरीर से पसीना और वीर्य साफ किया। मैंने उनके आने का इंतज़ार किया – और फिर हम दोनों दूसरे बेड पर लेट गए – जो पहले से ही कमरे के दूसरी तरफ रखा था – एक पुराना बेड – लेकिन मजबूत। मैं अपने पति के सीने पर सिर रखकर लेट गई – और उनका हाथ मेरे बालों में – और हमने बातें की – कैसे टेबल टूटी – कैसे बेड टूटा – कल नया कहाँ से लाएँगे – कितने का होगा – क्या डिज़ाइन होगा – मैं इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ तो मेरा खुद का बेड भी अच्छा होना चाहिए – और फिर बातें बंद हो गईं – और हम सो गए – एक-दूसरे से लिपटे हुए – एक-दूसरे की साँसें सुनते हुए।
भाग 10: सुबह का सूरज और फिर से शुरुआत
जब सुबह हुई – सूरज की पहली किरण कमरे में आई – और मेरे पति फिर से मेरे ऊपर थे – उनका लंड फिर से खड़ा था – मेरे बगल में – मेरी जांघ पर रगड़ खा रहा था। उन्होंने मुझे देखा – मैंने उन्हें देखा – और एक मुस्कान के साथ – मैंने अपनी टांगें खोल दीं – बिना कुछ कहे – बिना मनाही की – क्योंकि यह हमारी रोज़ की सुबह थी – मॉर्निंग रफ मिशनरी सेक्स।
उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में डाला – जो अभी भी रात से सूजी हुई थी – और वो फिर से वही शुरू कर दिया – धक्के – जोरदार – तेज़ – लेकिन इस बार थोड़े धीरे – शायद रात के सबक सीख चुके थे। मैंने सिसकारियां लीं – लेकिन चुपचाप – अपने दाँतों को होंठों में दबाकर। उनका वीर्य मेरी चूत में जा गिरा – और वो मेरे ऊपर से हट गए – और मैंने उनके होठों पर चूमा।
उसके बाद मैं ऑफिस चली गयी – मेरी जींस पहनते ही दर्द हुआ – मेरी चूत अभी भी सूजी हुई थी – मैं सही से चल भी नहीं पा रही थी – लंगड़ा रही थी – जैसे कोई घोड़ी जिसने रात भर दौड़ लगाई हो। ऑफिस में मेरे क्लाइंट्स ने पूछा – “मेम, आपको क्या हुआ? पैर में चोट लग गई?” मैंने मुस्कुराकर कहा – “जिम में मसल्स में खिंचाव हो गया।” सच तो बस मैं जानती थी – और मेरे पति जानते थे।
उपसंहार: आज भी वैसे ही – बस फर्नीचर मजबूत है
मेरे पति मुझे रोज हर रात ऐसे ही चोदते हैं – रफ मिशनरी सेक्स – कभी-कभी गांड चुदाई – कभी मुँह – और कभी तीनों एक साथ। अब फर्क बस इतना है कि जिस कमरे में हम चुदाई करते हैं – हमने कमरा ही बदल दिया है। नया बेड – शुद्ध शीशम की लकड़ी से बना – मैंने खुद डिज़ाइन किया – चारों टाँगों में मज़बूत लोहे का फ्रेम – बीच में मोटी लकड़ी की पट्टियाँ – ताकि कभी न टूटे। टेबल भी नई – मार्बल की टॉप के साथ – बहुत भारी – इतना भारी कि उठाने में दो लोग लगते हैं।
लेकिन मेरे पति की रफ चुदाई से वो बेड भी हिलने लगता है – चूँ चूँ की आवाज आने लगती है – और कभी-कभी मुझे डर लगता है – कहीं फिर से न टूटे – लेकिन तब तक – तब तक मैं मजे करती हूँ – उनकी रफ़्तार में – उनकी बेरहमी में – उनके सांड बनने में।
अपने पति के लंड से रोज़ चुदने के बाद – मुझे बहुत मस्त नींद आती है – और बाद में मुझे मीठा मीठा सपना आता है – उनके लंड का सपना – उनकी चुदाई का सपना – और सुबह उठते ही मैं फिर से तैयार हो जाती हूँ – क्योंकि एक अच्छी पत्नी – वही जो चुदती भी है – और प्यार भी करती है – और टूटते फर्नीचर की चिंता भी रखती है।