गला दबाकर बीवी की घमासान चुदाई की वो रात जब 50 साल के राजेश ने अपनी 45 साल की बीवी छवी को ऐसे चोदा जैसे बीस साल के लड़के चोदते हैं। इस हिंदी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कैसे एक बाथरूम के हादसे ने सालों से ठंडी पड़ी सेक्स लाइफ में आग लगा दी। कैसे राजेश ने छवी की मैक्सी फाड़ी, उसके बड़े-बड़े निप्पल चूसे, चूत पर थप्पड़ बरसाए और फिर गला दबाकर बीवी की घमासान चुदाई करते हुए उसे बेहोशी के कगार पर पहुंचा दिया। यह सिर्फ चुदाई नहीं, बल्कि एक पति की अपनी बीवी के प्रति दबी हुई जंगल जैसी भूख की कहानी है। गला दबाकर चुदाई, एनल सेक्स, फिस्टिंग, और गांड में तेल की बोतल – यह सब कुछ है इस एक रात में। अगर आप असली घमासान चुदाई की कहानी ढूंढ रहे हैं, तो यह आपके लिए ही है।
भाग 1: बाथरूम का वो हादसा जिसने जगाई भूखी जवानी
मेरा नाम राजेश है। उम्र 50 साल। मैं एक साधारण आदमी हूँ, जैसा कोई भी पिता या पति होता है। मेरी बीवी का नाम छवी है, और वो 45 साल की है। हमारी शादी को 25 साल से ज़्यादा हो गए हैं। हमारे बच्चे बड़े हो गए हैं – एक की शादी हो चुकी है और दूसरा पढ़ाई के लिए बैंगलोर गया है। घर में अब हम दोनों ही रहते हैं। हमारे रिश्ते में सब कुछ ठीक था – हम एक-दूसरे से प्यार करते थे, एक-दूसरे का ख्याल रखते थे। लेकिन एक चीज़ थी जो धीरे-धीरे बुझने लगी थी – हमारी सेक्स लाइफ।
हाँ, मैं साफ कह रहा हूँ। शादी के शुरुआती सालों में तो हम दिन में तीन-चार बार चोदते थे। छवी के साथ मेरी वो दीवानगी थी कि ऑफिस जाने से पहले भी एक बार चूत जरूर चोदता था। लेकिन धीरे-धीरे बच्चे, ज़िम्मेदारियाँ, शरीर थकान – सब कुछ इकट्ठा होता गया और हमारी चुदाई महीने में सिर्फ 3-4 बार रह गई। मैं अभी भी अपनी पत्नी से उतना ही प्यार करता था, लेकिन वो आग जो पहले थी, वो शांत पड़ गई थी। छवी का शरीर भरा-पूरा है – 5 फुट की ऊंचाई, गोल-मटोल कूल्हे, भारी भरकम स्तन, और सावंला रंग जो उसे और भी सेक्सी बनाता है। पर मैं उसे रोज़ देखता था फिर भी अंदर से वो तरकश नहीं होता था जो पहले हुआ करता था।
जब तक एक दिन ऐसा नहीं हुआ जिसने मेरी 50 साल की उम्र में भी जवानी लौटा दी।
वो दिन सामान्य था। छवी को किट्टी पार्टी में जाना था। मुझे ऑफिस जाना था। मैं कमरे में कपड़े पहनने की जल्दी में था और छवी बाथरूम में नहा रही थी। वो बहुत देर कर रही थी, मैं ऑफिस के लिए लेट हो रहा था। मैंने आवाज़ लगाई, “कितनी देर लगाएगी? मुझे भी तो जाना है।” उसने अंदर से कहा, “बस बस, एक मिनट।” और फिर अचानक बाथरूम का दरवाज़ा खुला और छवी बाहर भागती हुई आई – तौलिये में लिपटी हुई, बालों से पानी टपक रहा था। उसके पैर फिसले और वो दरवाजे से टकरा गई। उसी झटके में उसका तौलिया खुल गया। वो पूरी तरह नंगी थी – मेरे सामने।
हे भगवान। मैं वहीं का वहीं ठिठक कर रह गया। उसके स्तन – इतने बड़े, गोल, और नीचे लटकते हुए। उसके निप्पल मोटे और काले थे – ठीक वैसे ही जैसे हमारी शादी के पहले साल में थे। मेरी साँसें थम गईं। मैं उसे देख ही रहा था। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया – इतने सालों बाद ऐसा तुरंत और जोरदार खड़ा हुआ। छवी ने देखा कि मैं कहाँ देख रहा हूँ, तो उसने जल्दी से तौलिया उठाकर ओढ़ लिया और कमरे की तरफ भाग गई। लेकिन मेरे मन में वो तस्वीर घर कर गई। पूरे दिन ऑफिस में मैं कुछ नहीं कर पाया। मेरे सामने बस छवी के वो नंगे स्तन, वो गोलाई, वो निप्पल की मोटाई – सब कुछ घूम रहा था। मैंने तय कर लिया कि आज रात कुछ करना है।
भाग 2: 50 साल बाद फिर वही दीवानगी – किसिंग से शुरू हुआ तांडव
शाम को जब मैं ऑफिस से लौटा, तो छवी किचन में खाना बना रही थी। उसने एक साधारण सी मैक्सी पहनी हुई थी। पर मेरी नज़र हट ही नहीं रही थी। उसकी मैक्सी के अंदर उसके स्तन हिल रहे थे, उसकी गांड मोटी थी और मुझे वही नंगा शरीर याद आ रहा था। मैं उसे ऐसे देख रहा था जैसे कोई भूखा जानवर शिकार को देखता है। उसने मेरी नज़रों को महसूस किया और प्यार से मुस्कुराते हुए पूछा, “ऐसे क्या देख रहे हो राजेश? बुड्ढे हो गए हो, अब ये सब नहीं होता।”
उसकी इस बात ने मुझे और भड़का दिया। मैं उसके पास गया, उसका हाथ पकड़ा और खींचते हुए लिविंग रूम में ले आया। मैंने उसकी ठुड्डी पकड़ी, उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो वो हल्की सी शरमाई, “पागल हो गए हो? रोशनी जली है।” लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया – धीरे-धीरे नहीं, बल्कि भूखे भेड़िये की तरह। मेरी जीभ ने उसके मुंह का दरवाज़ा खोला और मैंने उसकी जीभ को अपने मुंह में खींच लिया। वो भी अचानक गर्म हो गई। उसने मेरी गर्दन पकड़ ली और दोनों हाथों से मुझे कसकर बांध लिया। हम ऐसे चूम रहे थे जैसे एक-दूसरे को खा जाना चाहते हों।
कुछ देर बाद हम एक-दूसरे से अलग हुए, लेकिन हमारी नज़रें अब भी मिल रही थीं। मैंने पूछा, “अब भी कहती हो बुढ़ापा?” वो मुस्कुराई और बोली, “नहीं। आज तो तुम सच में जवान लग रहे हो।” यह सुनते ही मैंने उसकी मैक्सी के कॉलर को दोनों हाथों से पकड़ा और एक ही झटके में फाड़ डाला। कपड़ा चीरते हुए दोनों तरफ खुल गया। छवी की साँसें तेज हो गईं। उसके स्तन उसकी ब्रा के अंदर कैद थे – लेकिन ब्रा भी उन्हें छुपा नहीं पा रही थी। मैंने पीछे से ब्रा की हुक खोली और उसे फाड़ कर एक तरफ फेंक दिया। छवी के 38 साइज के बूब्स आज़ाद होकर सामने आए – बड़े, मुलायम, और थोड़े नीचे लटकते हुए। उनके सिरे काले और मोटे थे। मैंने उन्हें अपने दोनों हाथों में भर लिया – एक हाथ में पूरा बूब्स नहीं आ रहा था। फिर मैंने उन्हें जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया। “आह्ह्ह… राजेश… जोर से… और जोर से,” वो कराह उठी।
भाग 3: चूत चाटने और थप्पड़ों का खेल
मैं उसे उठाकर बेडरूम ले गया। उसे बिस्तर पर पटका – बिल्कुल बीच में। उसका शरीर गर्म हो चुका था, उसकी स्किन पर पसीना आ रहा था। मैंने उसकी दोनों टांगें खोल दीं। उसकी चूत पहले से ही गीली थी – इतनी गीली कि उसकी पैंटी (जो अब भी बची थी) पूरी भीग चुकी थी। मैंने उसकी पैंटी भी फाड़ दी और फिर उसके ऊपर लेट गया। मैंने पहले उसके स्तनों को चूसना शुरू किया। मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसा – इतना जोर से कि वो दर्द से चिल्ला उठी। “आह्हा… काट मत… उम्म्म… पर बहुत अच्छा लग रहा है…” मैंने उसके निप्पल को दांतों से काटा, खिंचोरी की, और फिर चूसा। उसकी पूरी छाती पर मेरे दांतों के निशान बन गए। फिर मैं दूसरे स्तन पर झपटा। उसके निप्पल मेरे मुंह में सख्त हो गए थे, जैसे छोटी उंगलियाँ हों। मुझे अब भी भूख नहीं मिटी थी।
फिर मैं नीचे की तरफ सरका। मैंने उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं। उसकी चूत पूरी तरह खुल चुकी थी – गीली, गुलाबी, और पहले से ही फड़फड़ा रही थी। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसकी चूत को बीच से ऊपर से नीचे तक चाटा। वो पूरे शरीर से कांप उठी। फिर मैंने उसकी चूत के होंठों को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा – जैसे कोई कोल्ड ड्रिंक चूसता है। उसकी चूत का पानी मेरे मुंह में आ रहा था – हल्का मीठा और नमकीन। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा। उसी समय मैंने अपने हाथ से उसके स्तनों को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया – धीरे-धीरे एक, फिर दूसरा। “थपाक-थपाक” की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं। वो पागलों की तरह आँहें भर रही थी, “आह्ह्ह… हाँ… और मारो… और चाटो… मेरी चूत… धत् तेरे की…” उसने मेरा सिर अपनी चूत के ऊपर दबा दिया और खुद ऊपर-नीचे होने लगी। मेरा पूरा चेहरा उसकी चूत के पानी से भीग चुका था। मैंने उसकी चूत को और जोर से चूसा और साथ ही अपनी उंगलियाँ अंदर डाल दीं – एक, फिर दो। अब वो चीखने लगी थी।
भाग 4: गला दबाकर बीवी की घमासान चुदाई – दम घोंटते हुए चरम सुख
अब मैंने अपना मुंह हटाया। मेरी ठुड्डी तक उसका रस लगा हुआ था। मैंने उसे किस किया ताकि वो अपना स्वाद खुद चखे। फिर मैंने उसे नीचे की तरफ धकेला। वो मेरे लंड को चूसने लगी। मेरा लंड 6.5 इंच का है और मोटा है। उसने पहले तो सुपारी को चूसा, फिर पूरे लंड को अपने मुंह में लेकर गर्दन तक उतारने की कोशिश करने लगी। वो मेरे लंड को चूस रही थी और मैं उसके बाल पकड़े हुए था। फिर मैंने उसका सिर पकड़ा और अपने लंड पर जोर से दबाया – पूरा लंड उसके गले में चला गया। वो घुटने लगी, लेकिन मैंने उसे छोड़ा नहीं। मैंने उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया। “चुप-चुप-चुप” की आवाजें और उसकी सिसकियाँ। कुछ देर बाद उसने मुझे धक्का देकर अलग किया। उसके मुंह से लार टपक रही थी, पर उसके चेहरे पर खुशी थी। वो हाँफ रही थी, “तुम… तुम तो पागल हो गए हो राजेश।”
उसके बाद मैंने अपने बैग से लंड मोटा करने वाला तेल निकाला। यह तेल मैंने कई महीने पहले खरीदा था, पर कभी इस्तेमाल नहीं किया था। मैंने छवी को पकड़ा दिया। उसने अपने हाथों में तेल लगाकर मेरे लंड की मालिश करनी शुरू कर दी। उसकी गर्म हथेलियों का स्पर्श, तेल की चिकनाहट – मेरा लंड और मोटा होता गया। वह अब लोहे की रॉड जैसा खड़ा था, नसें उभर आई थीं, सुपारी बैंगनी पड़ गई थी। छवी ने देखा तो उसकी आँखें फैटी रह गईं – यह पहले से ज़्यादा मोटा था। उसने अपने मुंह में लेने की कोशिश की, लेकिन मुश्किल से सुपारी ही अंदर जा पाई। तो मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया, उसके पैर ऊपर उठाए और अपने लंड को उसकी चूत पर रखा। पहली बार में नहीं घुसा – इतनी टाइट थी या लंड मोटा था। फिर मैंने पूरे जोर से धक्का मारा – “आह्ह्ह्ह्ह!” छवी की चीख निकल गई, लेकिन मेरा लंड अंदर जा चुका था। मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाला। उसकी चूत पसीने और तेल से गीली थी। फिर मैंने धक्के मारने शुरू किए – शुरू में धीरे, फिर तेज। वो “आह-आह-आह” करने लगी।
और अब आया वो पल जो इस कहानी का असली क्लाइमेक्स है। गला दबाकर बीवी की घमासान चुदाई – यही वह फ़ेटिश है जिसने हमारी सेक्स लाइफ को नई जान दी। मैंने अपना हाथ बढ़ाया और छवी के गले को चारों तरफ से पकड़ लिया। उसने मेरी तरफ देखा – उसकी आँखों में डर और उत्तेजना दोनों थी। मैंने धीरे-धीरे अपनी उँगलियाँ दबानी शुरू कर दीं। उसकी साँसें कटने लगीं, उसका मुंह खुल गया, उसकी आँखों से पानी आ गया – लेकिन उसने मुझे रोका नहीं। उसने अपने हाथों से मेरे हाथ को और जोर से दबाने के लिए प्रोत्साहित किया। मैंने उसका गला और जोर से दबाया और उसी समय अपने लंड से उसकी चूत को बेरहमी से चोदता रहा। थप-थप-थप की आवाजें, उसकी घरघराहट, और उसकी चूत के पानी की आवाजें – सब कुछ मिलकर एक जंगल जैसा माहौल बना रहा था। वो झड़ने के कगार पर आ गई। उसका पूरा शरीर काँपने लगा, उसकी चूत ने मेरे लंड को और जोर से पकड़ लिया, और फिर वो चरम पर पहुँच गई। बीवी की घमासान चुदाई – गला दबाकर चुदाई का असर यह था कि वो पूरी तरह बेहोश होने के कगार पर पहुँच गई थी।
भाग 5: गांड में लंड और नारियल तेल की बोतल
मैंने उसका गला छोड़ा। वो हाँफ रही थी, उसकी साँसें लौट रही थीं। उसने धीरे से कहा, “और। और करो। मुझे यह चाहिए।” तो मैंने उसे पलट दिया। डॉगी स्टाइल में। उसकी गोरी गांड मेरे सामने थी। मैंने अपना बेल्ट निकाला। पहला थप्पड़ – “सटाक!” उसकी गांड पर लाल निशान बन गया। वो चिल्लाई, “आह्ह!” मगर उसके मुंह से निकला, “और मारो!” मैंने 10 और थप्पड़ मारे – बाएं गाल पर, दाएं गाल पर, बीच में। उसकी गांड पूरी तरह लाल हो गई थी और वो हर थप्पड़ पर “आह-आह” करती जा रही थी। फिर मैंने नारियल तेल निकाला और उसकी गांड के छेद पर अच्छी तरह लगाया। पहले एक उंगली अंदर डाली – टाइट थी। फिर दूसरी उंगली – गांड ने खिंचाव दिखाया। मैंने 5 मिनट तक उसकी गांड में उंगलियाँ अंदर-बाहर कीं। फिर मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और उसकी गांड के छेद पर रख दिया। मैंने धक्का मारा – आधा लंड अंदर चला गया। वो चीखी नहीं, बल्कि जोर से “उउउउफ्फ” किया। फिर दूसरा धक्का – पूरा लंड अंदर। उसकी गांड की दीवारें मेरे लंड को इतनी कसकर पकड़ रही थीं जैसे कोई मुट्ठी हो। मैंने पीछे से उसके बाल पकड़े और उसे खींचते हुए जोर-जोर से गांड मारने लगा। “तुम्हारी गांड बहुत टाइट है छवी… बहुत अच्छी चूत से भी ज्यादा मजा आ रहा है…” वो सिर्फ “हाँ-हाँ-हाँ” कर रही थी।
फिर मैंने नारियल तेल की 300 मिलीलीटर वाली बोतल उठाई। प्लास्टिक की बोतल थी, नरम। मैंने उस पर तेल लगाया और उसकी गांड के छेद पर रखा। छवी ने पीछे देखा तो उसकी आँखें फट गईं, “क्या कर रहे हो?” “चुप रह।” मैंने धीरे-धीरे बोतल को अंदर धकेलना शुरू किया। उसकी गांड का छेद बोतल को खींच रहा था। आधा बोतल, तीन-चौथाई, और फिर पूरा बोतल – सिर्फ ढक्कन बाहर दिख रहा था। छवी बस “हाय हाय हाय” कर रही थी। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया – अब उसकी चूत आराम से मेरा लंड ले रही थी, क्योंकि पीछे बोतल के कारण आगे का रास्ता सिकुड़ गया था। मैंने उसकी चूत को पागलों की तरह चोदा और साथ ही उसकी गांड पर थप्पड़ मारता रहा। जैसे ही उसका दूसरा ऑर्गेजम आया, उसके गांड के अंदर का दबाव बोतल को बाहर निकाल लिया – बोतल गिरी, और उसके गांड से तेल का फव्वारा निकल गया। वो मछली की तरह छटपटा रही थी।
भाग 6: मुट्ठी से फिस्टिंग और लावा की तरह निकला वीर्य
अब मैंने उसे फिर से मिशनरी में लिटा दिया। मैंने अपने चारों उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं – आराम से चली गईं। पांचवीं उँगली भी डाल दी। वो पूरी मुट्ठी सिकोड़कर – धीरे-धीरे उसकी चूत में डालनी शुरू की। पहले नहीं घुसी। मैंने उसकी चूत के होंठों को फैलाया, और फिर एक जोरदार धक्के से पूरी मुट्ठी अंदर कर दी। छवी की आँखें बंद थीं, उसका मुंह खुला था, लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी – ऐसा आघात लगा था। मैंने अपनी मुट्ठी को घुमाना शुरू किया, अंदर-बाहर करना शुरू किया। “छवी… देख क्या हो गया है तुझसे… तेरी चूत ने मेरी मुट्ठी पी ली है…” वो अब रो रही थी – खुशी से। मैंने 5 मिनट तक फिस्टिंग की।
फिर मैंने अपना हाथ निकाला और उसकी गांड में अपना लंड डाल दिया। उसकी गांड अब पहले से कहीं ज्यादा ढीली थी – बोतल और लंड से वो पूरी तरह खुल चुकी थी। मैंने उसके गाल पर तीन थप्पड़ मारे। उसने मेरा हाथ पकड़कर अपने गले पर रख दिया और बोली, “फिर से… गला दबाओ और चोदो।” यही तो मैं चाहता था। मैंने उसका गला दबा दिया – और इस बार पूरी ताकत से। साथ ही मैंने उसकी गांड में लंड मारा – जोर-जोर से, पागलों की तरह। उसके चेहरे का रंग बदलने लगा, उसकी आँखें लाल हो गईं, उसके मुंह से लार टपक रही थी – और उसी समय हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने अपना पूरा माल उसकी गांड के अंदर निकाल दिया – इतना गर्म और गाढ़ा कि मुझे लगा मानो पानी नहीं, लावा निकल रहा हो। जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला, तो छवी के गांड से मेरा वीर्य – सफेद, चिपचिपा, गाढ़ा – लावा की तरह बाहर बहने लगा। वो बेड पर फैल गया। छवी बेहोशी और होश के बीच में थी।
करीब 5 मिनट बाद जब उसे होश आया, तो उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “जानू, तुम तो जवान हो गए हो।” मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया। उस रात हमने 3 राउंड और किए। असली गला दबाकर बीवी की घमासान चुदाई का यह अनुभव हमारी सेक्स लाइफ में एक नया अध्याय लेकर आया था।