बॉयफ्रेंड को भुलाने वाली सुहागरात – हिंदी सेक्स कहानी

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बॉयफ्रेंड को भुलाने वाली सुहागरात – इस गर्म हिंदी सेक्स कहानी में पढ़िए सपना की जुबानी, जिसने धोखे के बाद शादी कर ली और अपनी सुहागरात में अपने पति के 8 इंच मोटे लंड से चूत और गांड मरवाई। यह सिर्फ एक चुदाई की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसी रात की दास्तान है जहाँ बॉयफ्रेंड को भुलाने वाली सुहागरात में दुल्हन की चूत फट गई और फिर गांड भी मारी गई। अगर आप बॉयफ्रेंड को भुलाने वाली सुहागरात जैसी सच्ची, धमाकेदार और बेरहम हिंदी सेक्स कहानियाँ ढूंढ रहे हैं, तो सपना की यह पूरी दास्तान आपके लिए ही है।

भाग 1: धोखे के बाद नई शुरुआत

मेरा नाम सपना है। मैं एक साधारण सी लड़की हूँ जिसने जिंदगी में उतार-चढ़ाव देखे हैं। बॉयफ्रेंड से धोखा खाने के बाद मेरा दिल टूट गया था। उसने मुझसे झूठ बोला, मेरे प्यार का मजाक उड़ाया, और किसी और संग चला गया। बस यही सोचकर कि अब भरोसा करना बेकार है, मैंने शादी करने का फैसला किया। परिवार वालों ने एक अच्छी जगह देखी और दस दिन बाद ही मेरी शादी तय हो गई।

शादी से पहले के वो दस दिन बहुत तेजी से बीते। मैंने अपने पुराने दर्द को भुलाने की कोशिश की। मेरे मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे – नया घर, नए लोग, नया पति। क्या वो मुझे समझ पाएगा? क्या वो मुझसे प्यार करेगा? और सबसे बड़ा सवाल – मेरी सुहागरात कैसी होगी?

शादी के दिन मैं लाल लहंगे में बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी थी। मेरे माथे पर टिका, हाथों में मेहंदी, गले में मंगलसूत्र – सब कुछ परफेक्ट था। लेकिन मेरे मन में एक डर भी था। मेरा पिछला अनुभव अच्छा नहीं रहा था, और अब एक नए आदमी के साथ बिस्तर साझा करना मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था।

शादी की रस्में खत्म हुईं। विदाई हुई। मैं अपनी ससुराल आ गई। मेरी ससुराल झुमरी गाँव में थी – एक छोटा सा गाँव, जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता था। गाँव में सास-ससुर, और मेरा देवर भी रहता था। घर पक्का था, ऊपर एक अलग कमरा था – वही हमारा सुहागरात का कमरा था।

भाग 2: सुहागरात की तैयारी

रात के नौ बज गए थे। गाँव में अंधेरा छा गया था। बिजली कभी आती, कभी जाती। मैं ऊपर के कमरे में आ गई थी। पूरी सज-धज कर – लाल साड़ी, गहने, मांग में सिंदूर, और दिल में हज़ारों ख्वाब। मैंने अपने बालों को सीधा किया, होंठों पर लिपस्टिक लगाई, और आईने में खुद को देखा। मैं एकदम सही लग रही थी।

लेकिन मेरी चूत में एक अजीब सी सनसनाहट मच रही थी। मेरे मन में तरह-तरह के विचार आ रहे थे। मैं सोच रही थी – इनका लंड कैसा होगा? मेरी चूत अभी भी थोड़ी फटी हुई थी पिछले रिश्ते से, लेकिन अब नया आदमी नया लंड लेकर आएगा। क्या वो समझ पाएगा? क्या वो धीरे से करेगा? क्या मुझे दर्द होगा?

मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। मैं बिस्तर पर बैठ गई। बाहर गाँव की आवाज़ें धीरे-धीरे शांत हो रही थीं। दस बजने वाले थे। और फिर – पैरों की आहट। वो आ रहे थे।

दरवाजा खुला। मेरे पति राजू कमरे में आए। वो गाँव के गबरू जवान थे – मजबूत, गठीला, हाथों में दारू की गिलास। उन्होंने मुझे देखा और एक बड़ी सी मुस्कान दी। मैं शर्म से सिर झुकाए बैठी रही।

भाग 3: चूचियों का खेल और पहली बार

उन्होंने मेरे पास आकर बैठ गए। थोड़ी देर बातें हुईं। फिर उन्होंने धीरे-धीरे मेरे जेवर उतारने शुरू कर दिए – पहले मेरा हार, फिर मेरे झुमके, फिर मेरी चूड़ियाँ। एक-एक करके मेरे गहने उतर रहे थे और मेरा दिल तेज हो रहा था।

फिर उन्होंने मेरी साड़ी को खोला। साड़ी नीचे सरकी और मैं सिर्फ अपने ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई। उन्होंने मेरे ब्लाउज के बटन खोले। अब सिर्फ मेरी ब्रा बाकी थी। उन्होंने ऊपर से दो-तीन बार मेरी चूचियों को दबाया – धीरे से, प्यार से। मेरे स्तन कसकर भरे हुए थे, मोटे और रसीले।

और फिर उन्होंने मेरी ब्रा खोल दी। मेरी दोनों चूचियाँ बाहर आ गईं – सामने, उभरी हुई, कसी हुई, रस भरी। उनकी नजरें फटी रह गईं। वो मेरी चूचियों को देखते ही रह गए।

“सपना रानी, वाह! क्या माल संतरियाँ हैं तुम्हारी!” वो बोले और उन्हें मसलना शुरू कर दिया।

उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। फिर उन्होंने मेरी एक चूची को अपने हाथ से दबाया और दूसरी को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। उनकी जीभ मेरे निप्पल पर घूम रही थी, उसे चाट रही थी, उसे चूस रही थी। मेरे मुँह से “आह्ह्ह…” निकल गया।

लेकिन एक बात थी – उनके मुँह से दारू की बहुत तेज बदबू आ रही थी। व्हिस्की की गंध मेरे चेहरे पर पड़ रही थी, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा। आखिर ये मेरी सुहागरात थी।

मैंने देखा कि उनका लंड अब पूरी तरह से खड़ा हो गया था। वो उठे और उन्होंने अपने सारे कपड़े उतार दिए – पहले शर्ट, फिर बनियान, फिर पैंट। और फिर…

“बाप रे बाप!” मैं मन ही मन चिल्ला उठी।

उनका लंड सामने था – बहुत मोटा, बहुत लंबा। कम से कम 8 इंच का। मेरे पिछले बॉयफ्रेंड का लंड 5-6 इंच का था, लेकिन ये तो उससे दोगुना मोटा और लंबा था। गधे जितना मोटा। मैं हैरान थी – आज तो मैं मर जाऊंगी।

भाग 4: चूत में पहली बार लंड – दर्द और मजा

वो आगे बढ़े और मेरा पेटीकोट उतारने लगे। मैं शर्माने का नाटक करते हुए बोली – “बिजली बंद कर दीजिए ना!”

उन्होंने बत्ती बंद कर दी। अब कमरे में सिर्फ चाँद की हल्की रोशनी थी और मोमबत्ती की लौ। उन्होंने मेरा पेटीकोट नीचे उतार दिया। अब मैं बिल्कुल नंगी थी – मेरी लसलसी, मचलती चूत अब लंड घुसने का इंतज़ार कर रही थी।

मेरी जाँघों को थोड़ा चौड़ा करते हुए, उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरी चूत के दाने – मेरी क्लिट – को जोरों से रगड़ा। मैं सिहर गई। फिर उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी चूत के अंदर घुसा दी और धीरे-धीरे मालिश करने लगे। मेरी चूत पूरी पानी से नहा गई। मेरा रस उनकी उंगली पर चढ़ आया।

इसके बाद वो मेरे ऊपर चढ़ गए। उन्होंने अपने लंड के सुपारे को मेरी चूत के मुँह पर लगा दिया। मैंने अपनी साँसें रोक लीं।

दो-तीन धक्के मारने पर भी उनका मोटा लंड अंदर नहीं घुसा। मेरी चूत बहुत कसी हुई थी। वो बुदबुदाए – “साली, बहन की लौड़ी! बड़ी कसी हो रही है!”

फिर उन्होंने अपने हाथ से लंड पकड़ा, उसे मेरी चूत की फलकों पर रगड़ा – ऊपर-नीचे – और फिर एक तेज झटके से मेरी चूत के अंदर पेल दिया।

“आह्ह्ह्ह्ह!” मेरी चीख निकल गई। दर्द असहनीय था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई चाकू मेरी चूत में घुस गया हो। मेरी आँखों से आँसू निकल आए। लेकिन लंड अब मेरी गुफा के अंदर था – गर्म, मोटा, भारी।

उन्होंने मेरी चूचियाँ मसलते हुए कहा – “बस थोड़ी देर का दर्द है, सहन करो!”

और वो अपना लंड और अंदर घुसाते गए। मुझे लगा जैसे कोई मेरी चूत को खोद रहा हो – चोद नहीं रहा, सच में खोद रहा हो। मेरा चिल्लाना जारी था। थोड़ी देर में लंड पूरा अंदर तक घुस गया। मेरी चूत अब पूरी तरह से भरी हुई थी।

थोड़ी देर बाद उन्होंने धक्के लगाने शुरू किए। धीरे-धीरे, फिर तेज। अब दर्द के साथ-साथ मजा भी आने लगा था। मेरे मुँह से “आह… उह… ऊई… ऊई… उह… उह…” की आवाजें निकलने लगीं। मेरी आनंदमयी आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

20-25 धक्कों के बाद उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। मुझे तिरछा किया – मेरी करवट बदली – और फिर पीछे से मेरी चूत में लंड घुसा दिया। अब वो पीछे से धक्के लगा रहे थे और आगे से मेरी चूचियों को दबा-दबाकर रस निकाल रहे थे।

“शुरू में दर्द होता है! अब तो मजा आ रहा होगा?” उन्होंने मेरे कान में कहा।

मैं चुदाई की मस्ती में नहा रही थी। मैं बेशर्म होते हुए बोल पड़ी – “और करिए ना!”

उन्होंने मेरे गालों को चूमा और मेरी चूत में लंड तेजी से दौड़ाना शुरू कर दिया। मेरे निप्पल्स को उमेठ-उमेठ कर उन्होंने कड़ा कर दिया। मेरी चूत बुरी तरह चुद रही थी।

थोड़ी देर में ही उनका पूरा वीर्य मेरी चूत के अंदर गिर गया – गर्म, मोटा, भरपूर। मेरी पूरी मटकी रस से भर गई। मैं थककर सो गई।

भाग 5: सुबह की बेरहम चुदाई – दूसरा राउंड

सुबह छह बजे ही दरवाजे पर जोरदार खटखट हुई। बाहर से आवाज आई – “मासी जा रही हैं, बाहर आ जाओ!”

हम दोनों नंगे पड़े हुए थे। मैं उठने को हुई तो उन्होंने मुझे रोक लिया। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। लंड पहले से ही सख्त हो चुका था – फिर से तैयार।

“जरा इसको रगड़ो ना!” उन्होंने कहा।

मैंने हाथ में लंड लेकर उसे सहलाया – ऊपर-नीचे, धीरे-धीरे। थोड़ी देर में ही लंड और तन गया। फिर उन्होंने मेरी कमर के नीचे एक तकिया रखा, मुझे उल्टा कर दिया – पेट के बल – और पीछे से मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया।

“उह!” मेरी चीख निकल गई। इस बार एक ही झटके में लंड अंदर घुस गया। मुझे समझ में आ गया कि ये भी एक खेले-खाए मर्द हैं। बहुत अनुभवी हैं।

उन्होंने मुझे पीछे से दबाते हुए मेरी चूत मारना शुरू कर दिया – तेज, जोरदार, बेरहम। मुझे चुदाई का मस्त मजा आ रहा था। मैं तो भूल ही गई थी कि उनका चेहरा जला हुआ है या नहीं, उनकी दारू की बदबू है या नहीं। बस लंड था और मेरी चूत।

दस मिनट तक उन्होंने मुझे उल्टा लेटाकर मेरी चूत चोदी। फिर उठकर उन्होंने मेरी दोनों नंगी चूचियाँ भोंपू की तरह बजाईं – दबाया, छोड़ा, दबाया, छोड़ा।

“अब तो तुम औरत बन गई हो,” उन्होंने कहा। “रोज़ चुदने को तैयार रहना।”

इसके बाद वो बाहर निकल गए। मैं भी अपने कपड़े बदलने लगी और मन ही मन सोच रही थी – लंड तो इनका बड़ा मस्त है। चुदाई का मजा तो बहुत मिलेगा।

भाग 6: मुँह दिखाई और औरतों की शरारतें

दोपहर में मुँह दिखाई का कार्यक्रम था। लंबा घूँघट डालकर मुझे बैठा दिया गया। सारी औरतें एक-एक करके गिफ्ट दे रही थीं। थोड़ी देर बाद सब हँसी-मजाक करने लगे।

तभी औरतों में से एक बोली – “माधुरी, तेरी बहू तो बड़ी चिकनी और रसभरी है!”

मेरी बगल में राजू की मौसी बैठी थीं। उन्होंने मेरी चूचियों पर हाथ फिराया और मेरी सास से बोलीं – “दीदी, रंजना सही कह रही है! बहू की चूचियाँ तो पूरी रसीली हो रही हैं, राजू के तो मजे आ गए। रोज जी भर कर रस पीएगा।”

सब हँसने लगे। एक और औरत बोली – “रस पिलाना पड़ेगा, तभी तो रस निकलेगा!”

मौसी बोली – “अरे राजू तो गाँव का गबरू जवान है, पूरी मटकी रस से भर देगा। तू भी कभी ट्राई कर लिओ!”

हँसी-मजाक जारी रहा। मैं पूरी तरह शर्म से लाल हो गई थी। घूँघट के नीचे मेरा चेहरा जल रहा था।

कार्यक्रम शाम चार बजे खत्म हो गया। मैं गाँव की एक भाभी चंपा के साथ ऊपर के कमरे में आ गई। चंपा राजू के दोस्त की पत्नी थी और बहुत ही समझदार और खुली विचारों वाली औरत थी।

भाग 7: चंपा से मालिश और गाँड की चर्चा

हमने कमरा बंद कर लिया और बातें करने लगे। मैंने अपनी साड़ी उतार दी थी। मैंने चंपा को बताया कि मेरा बदन दुख रहा है।

चंपा ने मेरे गालों पर चुटकी काटी और हँसते हुए बोली – “रात भर आठ इंची लंड से चूत चुदवाई है, दर्द तो होगा ही, रानी!”

उसने तेल की शीशी उठाई और मुझसे बोली – “चल, नंगी हो! तेरी तेल मालिश कर देती हूँ।”

मैंने अपने ब्लाउज को उतारते हुए पूछा – “तुझे कैसे पता कि इनका लंड आठ इंची लंबा है?”

चंपा ने मेरी नंगी चूचियाँ हॉर्न की तरह बजाईं – दबाया और छोड़ा – और हँसते हुए बोली – “ओह महारानी, तू मुझ पर ही शक कर रही है? मेरे पति इसके लंगोटिया यार हैं। मुझे और भी बातें पता हैं – सब बता दूंगी!”

उसने मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया और मालिश करने लगी। तेल गर्म था, उसके हाथ मुलायम थे। उसने मेरे कंधों से शुरू किया, फिर मेरी पीठ, फिर मेरे स्तन। मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

चंपा अब मेरे चूतड़ों की मालिश कर रही थी। उसने मेरी गांड को मसलते हुए कहा – “पहली सुहागरात में तो दर्द कम हुआ है। दूसरी में असली दर्द होगा।”

मैं चौंक गई – “दूसरी? मतलब?”

चंपा हँसी – “दूसरी का मतलब गाँड की चुदाई! चूत तो तेरी कल बज गई, लेकिन गाँड रानी अभी बजनी बाकी है। दर्द क्या होता है, ये तो जब गाँड चुदती है तब पता चलता है। इन्होंने तो दो दिन बाद ही मेरी गाँड मार ली थी। मैं तो बेहोश हो गई थी। तीन दिन गाँड की सिकाई करी तब जाकर दर्द कुछ कम हुआ।”

उसने एक क्रीम निकाली – “जब तक तेरी गाँड की सुहागरात नहीं मनती, तब तक रोज मालिश कर दूंगी। देख लेना, 2-4 दिन में ही तेरे पति तेरी गाँड फाड़ देंगे।”

इसके बाद चंपा ने मेरी गाँड में क्रीम डालकर अपने हाथों से अच्छी मालिश कर दी – धीरे-धीरे, गोल-गोल, अंदर की तरफ।

पाँच बजे हम दोनों सो गए। रात को आठ बजे दरवाजे पर आवाज हुई तब हम उठे। चंपा उठकर अपने घर चली गई और मैं कपड़े पहनकर नीचे आ गई।

भाग 8: दूसरी और तीसरी रात – मस्त चुदाई

अगली दो रातें बड़ी रसभरी थीं। राजू ने मुझे कई आसनों में लिटाया और बैठाया – कभी मिशनरी, कभी डॉगी स्टाइल, कभी मेरे ऊपर बैठकर। उन्होंने मेरी चूत का भरपूर मर्दन किया। बड़ा मस्त मजा दिया उन्होंने चुदाई का! मैं तो उनके लौड़े की गुलाम हो गई।

तीसरी रात उन्होंने मुझे पूरी तरह नंगा किया, फिर अपनी जाँघों पर बैठा लिया। उन्होंने अपना मोटा लंड मेरे हाथ में पकड़ाया तो मैं दंग रह गई – लौड़ा पूरा तेल से नहा रहा था, चिकना और चमकदार।

मैंने उसे अपने हाथ से सहलाते हुए कहा – “आज कालू राम का ज्यादा शैतानी का मन कर रहा है?”

राजू ने मेरी एक चूची मसली और दूसरे हाथ से मेरी चूत के दाने को सहलाते हुए कहा – “रसीली, तुम्हारी जवानी ने तो मुझे पागल कर दिया है।”

मैं उनकी गोद में चिपककर बैठ गई। मेरे स्तन उनके सीने से दब रहे थे। मेरे होंठ उनके होंठ चूस रहे थे। उन्होंने मेरे चूतड़ दबाते हुए अपनी एक उंगली मेरी गांड में घुसा दी।

“बड़ी कसी गांड है, रानी, तेरी तो?” वो बोले।

इसके बाद उन्होंने मेरी चूत में लंड घुसा दिया – एक ही झटके में पूरा अंदर। मैं कराह उठी।

भाग 9: गांड की शामत – मोमबत्ती से शुरुआत

“आज तुम्हें एक चीज दिखाता हूँ,” राजू ने कहा।

उन्होंने पास रखी एक मोटी मोमबत्ती उठाई – लगभग 6 इंच लंबी और एक इंच मोटी। उस पर कॉन्डोम चढ़ाया, फिर उसे मेरी गांड के मुँह पर छुआ दिया। मैं समझ गई – आज मेरी गांड की शामत आने वाली थी।

“ये क्या कर रहे हैं?” मैंने डरते हुए पूछा।

उन्होंने मोमबत्ती मेरी गांड पर लगा दी और थोड़ी सी अंदर घुसा दी। “घबरा क्यों रही हो? बड़ा मजा आएगा!”

और वो उसे अंदर घुसाने लगे। कसी हुई गांड को मोमबत्ती अंदर तक फाड़े जा रही थी। मैं चिल्लाने लगी – “उइ! उह! उह! मर गई! बाहर निकालो!”

लेकिन अब वो कहाँ सुनने वाले थे। उन्होंने पूरी 6 इंच की मोमबत्ती मेरी गांड के अंदर ठूंस दी और गँवारों की तरह हँसने लगे – “सीधे सीधे लंड डाल दूंगा तो बेहोश हो जाएगी!”

वो मोमबत्ती से मेरी गांड चोदने लगे। मेरी चूत पहले से ही उनके लंड से फटी पड़ी थी और अब गांड मोमबत्ती से चुद रही थी। मेरी आँखों से आँसू बहने लगे।

थोड़ी देर बाद उन्होंने तरस खाते हुए मेरी चूत और गांड को आज़ाद कर दिया। मैं कराहते हुए बोली – “बड़ा दर्द हो रहा है!”

वो हँसे – “थोड़ा तेल डाल देता हूँ!”

भाग 10: असली गांड की चुदाई – 8 इंच लंड अंदर

उन्होंने मेरे पेट के नीचे दो तकिये रखकर मेरी गांड में अंदर तक तेल भर दिया – ढेर सारा तेल, गरम तेल। फिर मेरे चूतड़ों को सहलाया और मेरे चूतड़ों के ऊपर लेट गए।

कुछ देर बाद उन्होंने अपना लंड मेरी गांड के मुँह पर लगा दिया। जब तक मैं समझ पाती, तब तक सुपारा गांड के अंदर घुस चुका था।

“उई मर गई! हरामजादे बाहर निकाल! उई मर गई! मर गई, राजू छोड़ो! बहुत दर्द हो रहा है! बहुत दर्द हो रहा है!” मैं चीख पड़ी।

लेकिन अब वो मेरी गांड के ड्राइवर थे। चिल्लाने का कोई फायदा नहीं हुआ। लंड अपने सफर पर चल रहा था – धीरे-धीरे अंदर घुस रहा था। ऐसा लग रहा था कि मेरे दोनों चूतड़ फट जाएँगे।

मेरी गांड का गुदना जारी था। थोड़ी देर में उनका पूरा लंड अंदर घुस गया था। मैं मर सी गई थी। उन्होंने मेरी कमर कसकर पकड़ ली और मेरी गांड चोदना शुरू कर दिया।

शुरू के झटकों ने तो मेरी जान ही निकाल ली। लेकिन जब लंड अच्छी तरह से गांड में दौड़ने लगा, तो उन्होंने मेरे चूचे पकड़ लिए और मसलते हुए बोले – “रानी, प्यार से मार रहा हूँ! मजे लो! अतुल ने तो चंपा की गांड जब मारी थी, वो तो बेहोश हो गई थी।”

मेरी चूचियाँ मसली जा रही थीं और मेरे चीखने-चिल्लाने से बेखबर होकर वो मेरी गांड मारने का मजा ले रहे थे। जब उनका गरम वीर्य मेरी गांड के अंदर गिरा – धार-दर-धार – तब तक मैं अधमरी सी हो गई थी।

गांड फाड़ने के बाद उन्होंने मुझे सीधा किया। मेरे आँसू सीधे मेरी चूचियों तक आ रहे थे।

बेपरवाह होते हुए वो बोले – “अब सो जा! शुरू में तो सबको दर्द होता है।”

भाग 11: दर्द से तड़प और चंपा की मदद

रात भर मैं दर्द से तड़पती रही। राजू ने पहले मोमबत्ती से और फिर अपने विशाल 8 इंच लंड से मेरी गांड मारी थी। सुबह मैं मुश्किल से उठ पाई। मेरी गांड में ऐसा दर्द था जैसे कोई चाकू घुसा हो। मैंने चंपा को बुलाया।

चंपा आई और हँसते हुए बोली – “ओह, तो हमारी दुल्हन की गांड चुद ही गई!”

“बड़ा दर्द हो रहा है,” मैंने आँसू पोंछते हुए कहा।

चंपा ने मुझे सहारा दिया, मुझे उठाया, और कमरे में थोड़ा चलवाया – ताकि खून की रफ्तार सही हो जाए। उसने एक दर्द की गोली खाने को दी और गरम पानी से मेरी गांड की सिकाई कर दी। फिर मेरी चूत और गांड को सहलाते हुए वो मेरे साथ लेट गई।

“अगली बार जब घुसेगा तब दर्द कम होगा,” चंपा ने कहा। “थोड़ी चूत की खिलाड़िन बन, नहीं तो ये मर्द रात को मारेंगे और सुबह भूल जाएंगे।”

मेरी गांड के दर्द को सही होने में तीन दिन लगे। इस बीच उन्हें सताने के लिए मैं चार दिन तक सास के पास सोई।

भाग 12: फिर से चूत चुदवाने की बेचैनी

एक दिन मुझे अकेले देखकर राजू ने दबोच लिया। उन्होंने मेरी चूचियाँ दबाते हुए कहा – “इतना क्यों तड़पा रही हो? आज तो चुदवा लो, लौड़ा तेरी चूत चोदने के लिए पागल हो रहा है।”

मुझे अब चूत की खिलाड़िन का मतलब समझ में आ गया था। मेरी चूत भी चुदने को कुनमुना रही थी। बिना देर किए, मैं ऊपर कमरे में दस मिनट बाद पहुँच गई।

सच कहूँ तो 4-5 दिन तक नई दुल्हन की चूत में लंड न घुसे तो चूत का बुरा हाल हो जाता है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था। मैंने दो बटन वाली मैक्सी पहन ली थी और इनके कमरे में घुसते ही मैं इनसे चिपक गई।

राजू ने मुझे हटाते हुए अपने कपड़े उतार दिए। उन्होंने मुझे नंगा करके अपनी जाँघों पर बैठा लिया। उनका लंड पूरी तरह तना हुआ था। उन्होंने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया और सिगरेट पीने लगे – साथ ही मेरी चूचियाँ उमेठते रहे।

राजू का लंड सहलाते हुए मैं बोली – “चोदो ना! मुनिया में आग लगी हुई है।”

भाग 13: पहली बार लंड चूसा – जन्नत की सैर

राजू मेरे बदन को सहलाते हुए सिगरेट पीने में मस्त थे। उनका लंड चिकना और ऊपर से रसीला हो रहा था।

एक बात – मैंने अभी तक उनका लंड चूसा नहीं था। मुझे लंड चूसना बहुत पसंद था – शादी से पहले मैं अपने यार का लंड चूस चुकी थी। मेरा बड़ा मन कर रहा था कि इनका सुंदर, मोटा, 8 इंच का लंड अपने मुँह में डालूँ। लेकिन मैं चाह रही थी कि राजू खुद बोले।

मेरी मन की इच्छा पूरी हो गई। मेरी चूत के दाने को सहलाते हुए वो बोले – “रसीली, एक बार लौड़ा मुँह में लो ना! बड़ा मजा आएगा।”

मैंने ना-नुकुर का नाटक किया – “नहीं… शर्म आती है…”

राजू मेरे दोनों स्तनों को मलते रहे – “रसीली, एक बार लंड चूसो ना! प्लीज़!”

मन ही मन मेरे लड्डू फूट पड़े। ना-नुकुर करते हुए उठकर मैं उनकी जाँघों के बीच बैठ गई और अपना मुँह खोल दिया। उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया। सब कुछ भूलकर मैं लंड चूसने लगी।

आह! क्या मजा था! उनका 8 इंच मोटा लंड मेरे मुँह में – गर्म, भारी, चिकना। मैं उसे अंदर-बाहर कर रही थी, उसके सुपारे को चाट रही थी, उसे पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। सब भूलकर कभी लंड मुँह के अंदर-बाहर करती, कभी सुपारा चाटने लगती। मेरी चूत से रस की धारा बह निकली थी – वो इतनी गीली हो गई थी कि मेरी जाँघें तर थीं।

राजू से भी नहीं रहा गया। वो बोल ही पड़े – “सच रसीली, मजा आ गया! क्या मस्त लंड चूसा है तुमने!”

इसके बाद उन्होंने मुझे हटाकर बिस्तर पर गिरा दिया और मेरी चूत को अपने लंड से बजाने लगे। 5-6 आसनों से उन्होंने मेरी चूत बजा-बजाकर मेरे बदन के पुर्जे ढीले कर दिए और मेरी चूत अपने वीर्य से नहला दी।

आह! चुदने के बाद मुझे बड़ी शांति मिली।

भाग 14: वादा और आखिरी गांड चुदाई

अगले दो दिन मैंने उनका मस्त होकर लंड चूसा और अपनी चूत कई आसनों से चुदवाई।

तीसरे दिन राजू ने मुझसे कहा – “रसीली, एक बार गांड की खिड़की में और घुसाने दो ना!”

मैं बोली – “पहले आप वादा करो कि आप हमेशा मुझे रानी की तरह रखोगे, हमेशा मुझसे प्यार करोगे। फिर खुशी-खुशी गांड में डलवाऊंगी।”

अगले दिन वो मुझे बाहर घुमाने ले गए – गाँव के बाजार में। उन्होंने मेरे लिए नई चूड़ियाँ खरीदीं, मुझे आइसक्रीम खिलाई, और वादा किया कि वो हमेशा मुझसे प्यार करेंगे, मुझे अपनी रानी की तरह रखेंगे।

अब रात को मुझे फिर से गांड मरवानी थी। बड़ा डर लग रहा था। मैंने चंपा को बताया तो वो हँसते हुए बोली – “दुखेगी, लेकिन मजा भी आएगा! आज और मरवा ले, अगली बार तू खुद इनसे कहकर मरवाएगी।”

रात को उन्होंने मेरी गांड में तेल डाला, मुझे पेट के बल लिटाया, और धीरे-धीरे अपना 8 इंच लंड मेरी गांड में घुसा दिया। इस बार दर्द पहले से कम था। हाँ, दर्द था – लेकिन अब उसमें मजा भी था।

वो मेरी गांड चोदते रहे। मैं “उह… आह… उह… उह… आह…” की आहें भर रही थी। आँखों से आँसू टपक रहे थे, लेकिन अब थोड़ा मजा भी आ रहा था। दस मिनट बाद जब उनका गरम वीर्य मेरी गांड में गिरा – आह! एक जबरदस्त मजा आया।

भाग 15: अंत – बॉयफ्रेंड को हमेशा के लिए भुला दिया

इसके बाद उन्होंने अपनी बाँहों में मुझे सुला लिया। सुबह बदन दुख रहा था और मैं लंगड़ा रही थी – लेकिन मुझे लग रहा था अब आगे गांड चुदवाने में मुझे कोई डर नहीं लगेगा।

अगली तीन रातें मस्त चुदाई में कटीं। चौथे दिन मेरा भाई मुझे लेने आ गया। चूत, गांड, मुँह – सबमें उनका लंड घुस चुका था। मैं पूरी तरह उनकी हो चुकी थी।

अगले दिन घर जाने की खुशी थी – लेकिन चूल भी उठ रही थी। 15 दिन तक उनके 8 इंच मोटे लंड के बिना कैसे रह पाऊंगी? मेरी चूत को उनके लंड की आदत हो गई थी। मेरी गांड उनकी गुलाम हो गई थी। मैं उनकी दीवानी हो गई थी।

लेकिन एक बात तय थी – बॉयफ्रेंड को भुलाने वाली सुहागरात ने मेरी जिंदगी बदल दी थी। मैंने अपने पुराने दर्द को भुला दिया था। उस धोखेबाज बॉयफ्रेंड का नाम तक मेरे दिमाग से निकल गया था। अब मेरी दुनिया में सिर्फ राजू थे – उनका 8 इंच मोटा लंड, उनकी बेरहम चुदाई, और उनका प्यार।

मैं सोच रही थी – 15 दिन बाद वापिस आऊंगी तो उनकी गोद में सोऊंगी, उनका लंड चूसूंगी, अपनी चूत और गांड चुदवाऊंगी। बॉयफ्रेंड को भुलाने वाली सुहागरात ने मुझे एक नई जिंदगी दी थी – एक नया प्यार, एक नया घर, एक नया सुख।

अब मैं पूरी तरह राजू की हूँ – शरीर से, मन से, और आत्मा से। और यही मेरी असली सुहागरात थी।

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