हनीमून पर पहली चुदाई – गलती से गांड में लंड जाने से दर्द और दूसरा मौका

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हनीमून पर पहली चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि एक नई-नवेली दुल्हन का हनीमून कितना दर्दनाक हो सकता है जब उसका पति गलती से उसकी गांड में लंड डाल दे, खून बहने लगे, पत्नी बेहोश हो जाए, और पूरा हनीमून बर्बाद हो जाए? और फिर पति कैसे अपनी गलती सुधारे, माफी माँगे, और दूसरी बार दुबई ले जाकर पत्नी को असली प्यार और सच्ची चुदाई का अनुभव दे? यह हिंदी सेक्स कहानी हनीमून पर पहली चुदाई की है जहाँ पूजा नाम की 21 साल की दुल्हन, जिसका फिगर 34B-28-34 है, अपने पति विशाल के साथ शिमला हनीमून पर गई। होटल के कमरे में विशाल ने मोमबत्तियाँ जलाकर रोमांटिक माहौल बनाया, पूजा के ब्रेस्ट चूसे, उसकी चूत को गीला किया, लेकिन जब चुदाई का समय आया, तो अनाड़ीपन और जल्दबाज़ी में गलती से पूजा की गांड में लंड डाल दिया। पूजा बेहोश हो गई, बिस्तर खून से भर गया, और पूरा हनीमून दर्द और गुस्से में बीत गया। लेकिन विशाल ने अपनी गलती मानी, रो-रोकर माफी माँगी, और फिर दुबई ले जाकर पूजा को प्यार से चोदा — इस बार सही जगह, सही तरीके से। अगर आपको हनीमून, पहली चुदाई, गलती से गांड चुदाई, दर्द, माफी और रोमांटिक सेक्स वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।

भाग 1: हनीमून पर पहली चुदाई – शादी की तैयारी और विशाल से मुलाकात

मेरा नाम पूजा है और मेरा फिगर 34B 28″ 34″ है। ये बात तब की है, जब मैं 21 साल की थी — जवानी का जोश, शादी का उत्साह, और सेक्स के बारे में ढेर सारी उत्सुकता। मैंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली थी और एमसीए में एडमिशन ले लिया था। तब मेरे माता-पिता ने मेरी शादी पक्की कर दी थी। मुझे याद है, मैं अपनी किताबों में डूबी हुई थी जब माँ ने आकर कहा, “पूजा, तेरे लिए एक बहुत अच्छा रिश्ता आया है।”

जिसकी मेरी शादी पक्की हुई थी, उस लड़के का नाम विशाल था। वो दिखने में ठीक-ठाक था — लंबा, गोरा, चौड़ी छाती, और अच्छे खानदान से था। उसके पिताजी एक बड़े बिज़नेसमैन थे, और हमारे परिवारों के बीच पहले से जान-पहचान थी। तो मेरे पास मना करने के लिए कुछ नहीं था और मेरे माता-पिता ने मेरी शादी उसके साथ फिक्स करवा दी।

विशाल ज़्यादा रोमांटिक नहीं थे। वो मुझे कभी फोन नहीं करते थे और शादी से पहले हमेशा मैं ही उनको सामने से फोन करती थी। मुझे लगता था कि शायद वो शर्मीले हैं, या शायद उन्हें ज़्यादा दिलचस्पी नहीं है। लेकिन बाद में पता चला कि वो बस अपनी फीलिंग्स ज़ाहिर करना नहीं जानते थे। कुछ दिनों के बाद हमारी सगाई और शादी दोनों ही फरवरी में फिक्स हो गई। फरवरी — प्यार का महीना, और मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा बदलाव।

शादी को लेकर मैं काफी एक्साइटेड थी। मैं अपने मन में सेक्स के बारे में सोचती रहती थी — कैसा होगा, कितना दर्द होगा, कितना मज़ा आएगा। मैंने शादी से पहले कभी सेक्स नहीं किया था, लेकिन कई बार ओरल सेक्स किया था अपने बॉयफ्रेंड के साथ। वो मेरे कॉलेज टाइम में मेरा सीनियर था — राहुल नाम था उसका। ग्रेजुएशन के बाद, वो अपने होम टाउन चला गया, फिर हमारे बीच बातें कम होने लगीं और कुछ वक्त बाद ब्रेक-अप हो गया। लेकिन मैंने सोच लिया था, मैं अपने पति को वो सब कुछ दूँगी, जो मैंने अब तक संभाल कर रखा था — मेरी वर्जिनिटी, मेरा प्यार, मेरा शरीर।

मेरा फिगर उतना सुडौल नहीं था। यह 30″ 26″ 30″ था। मैं काफी दुबली-पतली थी। मेरी सहेली नेहा मुझसे मज़ाक करती थी कि मेरा पति मुझे ठीक से चोदकर मोटी कर देगा। मैं भी मन ही मन यही चाहती थी। मैं शादी के लिए पूरी तरह से तैयार थी, खास कर पहली रात के लिए। मैं कई बार रात को उसी के बारे में सोच कर गीली हो जाती थी। मेरी सहेली मुझे काफी कुछ बताती थी सेक्स के बारे में — कैसे चूसना है, कैसे चुदवाना है, क्या-क्या करना होता है। मैं थोड़ी नर्वस और एक्साइटेड भी थी। मेरे मन में पहले सेक्स के दर्द का डर और उसके बाद के मज़े की सोच थी। मैंने सेक्स के लिए काफी सेक्सी ड्रेस और अंडरगारमेंट्स लिए थे, जो मैंने अपनी सहेलियों के साथ मार्केट जाकर लिए थे।

आखिरकार वो दिन आ ही गया, जिसका मुझे इंतज़ार था। हमारी शादी के दिन, कई बार रस्मों के वक्त विशाल मुझे टच कर रहे थे। ये सब मुझे काफी एक्साइट कर रहा था। वो भी कुछ कम नहीं थे। फोटो के समय उन्होंने पीछे से मेरी गांड को पकड़ लिया और मैं थोड़ा चौंक गई थी। लेकिन मैंने कुछ नहीं बोला। मुझे उनकी तड़प का थोड़ा आइडिया हो गया था। मैं भी इसी चीज़ का इंतज़ार कर रही थी।

फिर बिदाई के बाद मैं और विशाल दोनों कार में बैठ गए थे और वो चुपके से मेरी जाँघों पर हाथ लगा रहे थे। मैं उनका हाथ हटा रही थी और फिर हम उनके घर पहुँच गए। मैं उनके रूम में उनका इंतज़ार कर रही थी। मैंने कुछ 2-3 घंटे तक उनका इंतज़ार किया और मैं सो गई। मुझे बहुत बुरा लग रहा था कि वो नहीं आए।

जब सुबह मैं बाहर ताज़ा होने आई और पूछा, तो मेरी सास ने बताया — “हमारे किसी रिश्तेदार का एक्सीडेंट हो गया है, इसलिए विशाल हॉस्पिटल में है।”

फिर दोपहर में पग-फेरे की रस्म के लिए मुझे घर ले जाने के लिए, मेरे घर से कज़िन भाई आया और मैं उसके साथ चली गई। फिर मैं लगभग एक सप्ताह अपने घर रही। बीच में 2 बार मैं कुछ रस्म करने के लिए अपना ससुराल भी गई और उनसे थोड़ी सी बात भी हुई थी। उस वक्त मेरी चूत में आग लगी हुई थी, लेकिन मैंने खुद को काफी रोक कर रखा था। अब मैं बस हमारे हनीमून की प्रतीक्षा कर रही थी, जो कुछ दिनों के बाद ही था।

भाग 2: शिमला होटल में रोमांटिक माहौल और ज़बरदस्त फोरप्ले

मैं सीधे अपने घर से उनके साथ निकलने वाली थी, क्योंकि मेरा घर एयरपोर्ट के काफी नज़दीक था। मैंने अपना सारा सामान भी पैक कर लिया था। मैंने सफेद जींस और नीली कुर्ती पहनी थी। वो मुझे लेने आए थे और मैं उनके साथ कार में बैठ गई। वो मुझसे ज़्यादा एक्साइटेड लग रहे थे हनीमून के लिए।

मैंने पैंट के ऊपर से उनका टेंट देख लिया था। मैं उसे देखकर शरमा रही थी और उत्साहित भी थी। हम दोनों कार के अलग-अलग साइड बैठे थे, क्योंकि कार उनके अंकल चला रहे थे और फिर वो हमें एयरपोर्ट छोड़ कर चले गए।

अंदर पहुँचते ही विशाल ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मैंने उनके कंधे पर सिर रख दिया। फिर कुछ देर के बाद हम फ्लाइट से शिमला पहुँच गए। वहाँ पर बहुत सर्दी थी और मुझे बहुत ज़्यादा ठंड लग रही थी। फिर विशाल ने अपनी जैकेट मुझे दे दी। कुछ देर के बाद हम होटल से पिकअप के लिए कार आई। कार में जाते समय उन्होंने मेरी गांड को ज़ोर से दबाया। मैं थोड़ी शॉक्ड थी उनकी इस हरकत से। मैंने उनको दूर किया और उनका हाथ पकड़ लिया।

कार में मैंने उनके हाथ को इसलिए पकड़ा था, क्योंकि उनका हाथ बार-बार मेरे शरीर के अंगों को छू रहा था। मुझे डर लग रहा था कि कहीं ये सब ड्राइवर न देख ले। लेकिन विशाल बार-बार कभी मेरी जाँघों पर, या फिर स्तन पर स्पर्श करने की कोशिश करता रहा। तो मैंने उनका हाथ पकड़ कर रख लिया और मैं मुस्कुरा रही थी। मैंने उनको बोला — “कृपया थोड़ा इंतज़ार करो।”

फिर हम होटल में पहुँच गए, तब भी वो बार-बार मुझे यहाँ-वहाँ टच कर रहे थे। फिर जैसे ही हम हमारे कमरे में पहुँचे, उन्होंने दरवाज़ा बंद करके मुझे दीवार के साथ खड़ा कर दिया। फिर वो मुझे किस करने लगे। बगल में सामान था और वो मुझे स्मूच किए जा रहे थे।

अब मैं बस एन्जॉय कर रही थी। मुझे पता ही नहीं चला, कब मैं टॉपलेस हो गई और वो मेरे स्तन दबाने लगे। जब वो मेरी जींस उतारने लगे, तब मैं थोड़े होश में आई और बोली — “विशाल तुम भी ना, थोड़ा तो सब्र करो। मुझे फ्रेश तो हो जाने दो ना प्लीज़।”

लेकिन वो फिर किस करने लगे। मैंने फिर उनको अपने से अलग किया और बोला — “प्लीज़ कुछ देर और रुक जाओ और मुझे फ्रेश हो जाने दो। बाद में तुम्हें नहीं रोकूँगी।”

फिर वो मेरी बात मान गए। मैंने उनको कुछ खाना ऑर्डर करने के लिए बोला और मैं फ्रेश होने चली गई। मैं बाथरूम में नहाने चली गई अपना पाउच लेकर। मैंने सबसे पहले अपने कपड़े उतारे और मिरर के सामने खड़े होकर अपने आप को देखने लगी। फिर मेरी नज़र मेरे कंधे पर पड़ी जहाँ पर लाल-लाल हो गया था। ये विशाल के स्मूच के कारण से हुआ था। मैं मन ही मन में सोचने लगी कि आज मुझे ऐसे काफी निशान मिलने वाले हैं।

मैंने पाउच से वीट क्रीम निकाल कर अपनी चूत को साफ करने लगी। फिर उसको धोने के बाद, मैंने शॉवर लिया और मैंने वो सेक्सी नाइटी पहन ली, जो मेरी सहेली ने सुझाव दिया था। उसमें पेटी थी, जिससे मेरी पूरी गांड खुली थी और सिर्फ एक पतली रस्सी थी, जो सिर्फ मेरी चूत को छुपा रही थी। मेरी ब्रा पैडेड थी और उस पर जो पारदर्शी बेबी डॉल पहनी थी, उसको पहनने का कोई फायदा नहीं था — उसमें से मेरी पूरी बॉडी दिख रही थी। फिर मैंने वो नाइटी पहन ली और मैंने थोड़ा हल्का मेकअप भी किया। मैंने रेड लिपस्टिक लगा ली।

फिर जब मैं रोब वाला गाउन पहन कर बाथरूम से बाहर आई, तो मैंने देखा, कमरे में हल्की सी लाइट थी और काफी रोमांटिक माहौल था। बिस्तर पर फूलों से सजा था और एक ट्रे भी थी। उस ट्रे पर खाना और वाइन की बोतल थी। लेकिन वो मुझे नज़र नहीं आ रहे थे। फिर मैंने इधर-उधर देखा, तो विशाल कहीं नहीं थे। मैंने उनको फोन किया तो वो बोले — “मैं नीचे हूँ और 5 मिनट में आता हूँ।”

तो मैं उनका इंतज़ार करने लगी। फिर कुछ समय बाद जब वो आए, तो मैंने उनको बोला — “आप भी फ्रेश हो जाओ। फिर खाना खा लेते हैं।”

फिर वो ताज़ा होकर आए। उसके बाद हमने खाना खाया। मैंने थोड़ा सा ही खाना खाया। फिर उन्होंने मुझे ड्रिंक ऑफर किया, लेकिन मैंने मना कर दिया। फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे हाथ को किस करने लगे। मैं उनके चुम्बन से मदहोश हो गई। उन्होंने मेरा गाउन निकाल दिया और फिर मुझे किस करने लग गए। उन्हें मैंने कस कर पकड़ लिया था और मैं पिघल रही थी।

फिर उन्होंने मुझे उठा लिया और बिस्तर पर लिटा दिया। अब वो मेरे ऊपर आ गए। मेरी साँसें बहुत तेज़ चल रही थी और मेरा दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा था। उन्होंने मेरी नाइटी ऊपर करके उतार दी और अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। वो मेरे स्तन बहुत ज़ोर से मसल रहे थे और मुझे काफी दर्द हो रहा था। मैं भी उनका साथ दे रही थी। फिर उन्होंने मेरी ब्रा उतार कर मेरे स्तनों को अपनी जीभ से छूना शुरू किया। उनकी जीभ के टच से मेरी पूरी बॉडी में बिजली दौड़ गई।

वो मेरे एक स्तन को चूसते थे और दूसरे को मसलते थे। बारी-बारी मेरे दोनों स्तनों को काफी मसला। मैं इतनी गरम हो गई थी कि मेरी चूत नदी बन गई थी और वो भी चुदाई के पहले ही।

फिर उन्होंने अपना लोअर निकाला और मेरे हाथ में अपना लंड दे दिया और बोले — “इसके साथ खेलो।”

मैंने शादी के पहले कई बार अपने बॉयफ्रेंड को हैंडजॉब और ब्लो जॉब दिया था, इसलिए मुझे लंड के बारे में काफी कुछ पता था। उनका लंड मेरे बॉयफ्रेंड के लंड की तरह ही था, बस थोड़ा सा मोटा था। उनका लंड साइज़ 5.5 इंच था। मैंने शर्माते हुए उनका लंड पकड़ा और फिर वो मेरा हाथ पकड़ कर बोले — “इसको ऐसे हिलाओ।”

तब मैं अंजान बन कर ऐसे ही करने लगी, जैसे मुझे लंड के बारे में कुछ पता ही नहीं हो। मैं उनका लंड हिलाने लगी और फिर वो बोले — “जानू तुम इसको किस नहीं करोगी?” मैंने उन्हें मना कर दिया उसके लिए। फिर वो काफी कुछ बोलने लगे — “जानू प्लीज़ कर दो मेरे लिए।”

फिर मैंने लंड को छोटा सा किस किया। फिर वो बोलने लगे — “ये क्या जानू? थोड़ा ठीक से करो ना, मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ।” फिर मैंने थोड़ी देर और लंड पर किस किया और बोल दिया — “बस विशाल जी, अब और नहीं।” फिर वो बोले — “ठीक है जानू।”

और वो मुझे फिर से किस करने लगे और मेरे हाथ में अपना लंड दे दिया। उनका लंड काफी कड़क था, बिल्कुल किसी गरम लोहे की तरह, जो मेरी चूत आज फटने वाला था। फिर उन्होंने मुझे बोला — “जानू प्लीज़ घोड़ी बन जाओ।”

भाग 3: गलती से गांड में लंड – दर्द, आँसू, खून और बेहोशी

और मैं घोड़ी बन गई और वो मेरे पीछे आ गए। फिर मैंने बिस्तर को कस के पकड़ लिया था। मैंने इस पोज़ के बारे में सुना था, तो मैं रेडी थी इसके लिए। फिर उन्होंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और अब मैं उनका इंतज़ार कर रही थी कि कब वो अपना लंड मेरी चूत में डालेंगे, क्योंकि मेरी चूत गीली थी लंड लेने के लिए।

लेकिन फिर मैंने महसूस किया कि वो कहीं और डालने की कोशिश कर रहे थे और मैं कुछ बोलती, उससे पहले ही उन्होंने मेरी गांड में लंड डाल दिया था। उनके इस धक्के से मेरी पूरी जान निकल गई। मेरी आँखों से आँसू निकल गए और मैं ज़ोर से चिल्लाने लगी — “आआआह्ह्ह… विशाल… वो नहीं… वो मेरी गांड है… दर्द हो रहा है… बहुत दर्द… प्लीज़ निकालो…”

मैंने उनको दूर करने की कोशिश की, लेकिन मैं कुछ कर नहीं पाई। वो मुझसे काफी मज़बूत थे। उनका पूरा लंड मेरे अंदर डाल दिया और मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी। मैं अब रो भी नहीं पा रही थी। मेरी गांड का छेद फट गया था, और खून बहने लगा था। मेरे पूरे शरीर में ऐसा दर्द हो रहा था जैसे किसी ने चाकू घोंप दिया हो।

मैं कुछ देर में बेहोश हो गई, लेकिन वो रुके नहीं और किसी जानवर की तरह चोदते रहे। जब मैं होश में आई, तब मैंने देखा कि वो मेरे बगल में सोए थे और मेरे बिस्तर के हिस्से पर पूरा खून पड़ा हुआ था। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मैं हिल भी नहीं पा रही थी।

फिर मैं वैसे ही सो गई और सुबह मुझसे उठा भी नहीं जा रहा था। फिर जब वो मुझे मदद करने आए, तो मैंने उनको रात के व्यवहार के लिए काफी खरी-खोटी सुनाई। “तुमने मेरे साथ क्या किया? मैं तुम्हारी पत्नी हूँ, कोई जानवर नहीं! तुमने मेरी गांड में लंड डाल दिया! मुझे बहुत दर्द हो रहा है!”

अब मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी और मुझे काफी दर्द भी हो रहा था। मुझे दर्द की वजह से बुखार भी हो रहा था। विशाल भी मेरी हालत देख कर डर गए थे। फिर वो मुझसे माफी माँगने लगे और बोलने लगे — “मुझे सच में खेद है, मैंने गलती से वहाँ डाल दिया। मुझे पता नहीं चला… मैं बहुत एक्साइटेड था… प्लीज़ मुझे माफ कर दो, पूजा…”

लेकिन मैंने उनकी कोई बात नहीं मानी। उन्होंने खाना ऑर्डर किया, लेकिन मैंने नहीं खाया। फिर शाम को मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ, तो मैं बाथरूम गई और शॉवर ले लिया। जब मैं कपड़े पहन कर बिस्तर पर आई, तो मैंने देखा, बिस्तर पर काफी खून था। मैंने उनको खून साफ करने के लिए बोला। उन्होंने रूम सर्विस को बोल कर ये सब करवाया और फिर उन्होंने मुझे बुखार और दर्द निवारक गोली दी। फिर मैंने दवा ली और मुझे थोड़ा बेहतर महसूस हुआ, लेकिन मैंने उनको फिर से मुझे छूने तक नहीं दिया।

मेरी हालत 3-4 दिन के बाद सामान्य हो गई। फिर हमने शिमला की स्थानीय जगहों पर जाकर कुछ खरीदारी भी की — मॉल रोड, कुफरी, और जाखू मंदिर। इस बीच उन्होंने हज़ारों बार मुझसे माफी माँगी, लेकिन मैंने उनको माफ नहीं किया। ऐसा ही हमारा हनीमून पूरा हो गया और हम वापस घर आ गए।

भाग 4: हनीमून पर पहली चुदाई का दूसरा मौका – दुबई में सच्चा सेक्स

फिर मैं कुछ दिन अपने मायके रही और कुछ दिनों के बाद विशाल मुझे लेने आए और मैं उनके साथ चली गई। उन्होंने मेरे लिए कार का दरवाज़ा खोला, मेरा बैग उठाया, और पूरे रास्ते मेरा हाथ पकड़े रखा। घर पहुँचकर, वो मुझसे रो कर माफी माँगने लगे — सच में रोए, उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। “पूजा, मैंने तुम्हारे साथ जो किया, वो मैं कभी भूल नहीं सकता। मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता। प्लीज़, मुझे एक और मौका दो। मैं तुम्हें दिखाऊँगा कि मैं कितना बदल गया हूँ।”

तब मैंने उनको माफ कर दिया और बोला — “ठीक है, लेकिन दोबारा ऐसा मत करना। मुझे प्यार चाहिए, दर्द नहीं।”

फिर हम नॉर्मल हो गए। उसके बाद से वो हर चीज़ के लिए मुझसे पूछते, जैसे चुंबन के लिए और स्पर्श करने के लिए। मैं ये सब सुन कर काफी शरमा जाती थी। फिर मैंने उनको बताया — “विशाल, मैं आपकी ही हूँ और मुझ पर आपका पूरा हक है। बस मैं इंसान हूँ, कोई जानवर नहीं। मुझे प्यार दीजिए, दर्द मत दीजिए।” और मैंने उनको सेक्स के लिए हामी भर दी।

दुबई की तैयारी और नई शुरुआत

फिर उन्होंने इस बार दुबई प्लान किया। शिमला की ठंडक के बाद, दुबई की गर्माहट हमारे रिश्ते में एक नई गर्मी लाने वाली थी। उन्होंने मुझे बताया, “पूजा, इस बार मैं तुम्हारे साथ वो सब करूँगा जो मुझे करना चाहिए था। इस बार सब कुछ तुम्हारी मर्ज़ी से होगा।”

हम दुबई के एक शानदार होटल में पहुँचे। बुर्ज खलीफा के पास, 25वीं मंज़िल पर हमारा कमरा था — खिड़की से पूरा शहर दिखता था, रात में रोशनियाँ जगमगाती थीं। कमरे में एक बड़ा सा बिस्तर था, और बाथरूम में जकूज़ी। विशाल ने कहा, “इस बार कोई जल्दबाज़ी नहीं, पूजा। इस बार सब कुछ तुम्हारी रफ्तार से।”

पहली रात – फोरप्ले और विश्वास की जीत

हमारी पहली रात को, विशाल ने कमरे में मोमबत्तियाँ जलाईं और मेरे लिए रेड वाइन लेकर आए। मैंने थोड़ी सी वाइन पी, बस इतनी कि मेरा शरीर रिलैक्स हो जाए। फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बिस्तर तक ले गए। उन्होंने मुझसे पूछा, “क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ?” मैंने मुस्कुराकर सिर हिलाया।

उन्होंने धीरे-धीरे, बहुत प्यार से, मेरे होंठों को चूमना शुरू किया। कोई जल्दबाज़ी नहीं थी, कोई ज़ोर नहीं था — बस कोमलता, प्यार, और इज़्ज़त। उनके होंठ मेरे होंठों पर थे, और मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। उन्होंने मेरी गर्दन पर किस किया, मेरे कंधों पर, मेरी बाँहों पर। हर किस के साथ वो पूछते, “क्या ये ठीक है?” और मैं हर बार जवाब देती, “हाँ… और करो…”

उन्होंने मेरा टॉप धीरे-धीरे उतारा, फिर मेरी ब्रा। मेरे स्तन बाहर आए, और उन्होंने एक पल के लिए उन्हें निहारा। “तुम बहुत खूबसूरत हो, पूजा,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। फिर उन्होंने अपना मुँह मेरे बाएँ निप्पल पर रखा और धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। उन्होंने मेरे दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से सहलाया, और मैं कराह उठी। “आह्ह… विशाल… ये बहुत अच्छा लग रहा है…”

वो बारी-बारी से मेरे दोनों स्तनों को चूसते रहे, और मैं पूरी तरह गीली हो गई। फिर उन्होंने मेरी पैंट उतारी, मेरी पैंटी उतारी, और अपना चेहरा मेरी चूत के पास ले गए। उन्होंने मेरी तरफ देखा और पूछा, “क्या मैं…?” मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और सिर हिला दिया।

उनकी जीभ मेरी चूत पर लगी, और मैं चीख पड़ी। वो मेरी क्लिट को चूस रहे थे, मेरी चूत के होंठों को चाट रहे थे, और मेरी चूत के अंदर अपनी जीभ डाल रहे थे। मैंने उनके बाल पकड़ लिए और उनका सिर अपनी चूत पर दबा लिया। “हाँ… वही… विशाल… प्लीज़ मत रुको…” कुछ ही मिनटों में, मैं झड़ गई — मेरी चूत से रस की धार निकली, और विशाल ने उसे चाट लिया।

पहला सच्चा प्रवेश – मिशनरी में प्यार

फिर विशाल ने मुझसे पूछा, “क्या तुम तैयार हो?” मैंने सिर हिलाया। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेला। इस बार वो सही जगह पर था। मैंने उनके लंड को अपनी चूत में जाते हुए महसूस किया — गर्म, मोटा, और धड़कता हुआ। लेकिन इस बार दर्द नहीं हुआ। सिर्फ आनंद हुआ। मेरी चूत गीली थी, और उनका लंड आसानी से अंदर चला गया।

“आआह्ह… विशाल… ये… ये बहुत अच्छा लग रहा है…” मैंने कराहते हुए कहा।

उन्होंने धीरे-धीरे धक्के देना शुरू किया। हर धक्के के साथ वो मेरी आँखों में देखते और पूछते, “क्या तुम ठीक हो?” और मैं हर बार जवाब देती, “हाँ… और करो… प्लीज़…”

हमने मिशनरी पोज़िशन में करीब 15 मिनट तक सेक्स किया। विशाल ने मेरे स्तनों को सहलाया, मेरे होंठों को चूमा, और मेरी आँखों में देखते हुए धक्के दिए। मुझे दूसरी बार ऑर्गेज़्म हुआ, और इस बार विशाल ने भी अपना वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। हम दोनों एक साथ झड़ गए। वो मेरे ऊपर गिर पड़े, हाँफते हुए, और मैंने उनकी पीठ पर हाथ फेरा।

“आई लव यू, पूजा,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा।

“आई लव यू टू, विशाल,” मैंने जवाब दिया।

दूसरी रात – डॉगी स्टाइल और जकूज़ी में रोमांस

दूसरी रात, हमने डॉगी स्टाइल ट्राई किया। विशाल ने मुझसे पूछा, “क्या मैं पीछे से कर सकता हूँ?” मैं थोड़ी नर्वस थी — शिमला की यादें ताज़ा थीं — लेकिन मैंने भरोसा किया। मैंने हाँ कह दी।

मैंने घुटनों और हाथों के बल बिस्तर पर झुक गई, और विशाल मेरे पीछे आए। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर लगाया और धीरे-धीरे अंदर डाला। इस बार कोई गलती नहीं हुई। उनका लंड मेरी चूत में गया, और मैंने राहत की साँस ली। उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगे। मेरे स्तन झूल रहे थे, मेरी साँसें तेज़ थीं, और मैं कराह रही थी — “आह्ह… विशाल… और ज़ोर से… प्लीज़…”

डॉगी स्टाइल में करीब 10 मिनट तक चुदाई के बाद, हम दोनों फिर से झड़ गए। उसके बाद, विशाल मुझे जकूज़ी में ले गए। गर्म पानी के बुलबुलों के बीच, हमने एक-दूसरे को सहलाया, किस किया, और एक बार फिर प्यार किया — इस बार पानी में, धीरे-धीरे, आराम से।

तीसरी रात – काउगर्ल और पूरा नियंत्रण

तीसरी रात, विशाल ने मुझसे कहा, “आज तुम मेरे ऊपर रहोगी। मैं चाहता हूँ कि तुम पूरी तरह कंट्रोल में रहो।” तो मैं उनके ऊपर चढ़ गई, उनका लंड अपनी चूत में डाला, और खुद ऊपर-नीचे होने लगी। ये मेरे लिए बिल्कुल नया था — मैं खुद तय कर रही थी कि कितनी तेज़ी से, कितना गहराई तक। विशाल ने मेरे स्तनों को पकड़ा और मुस्कुराकर बोले, “तुम बहुत सेक्सी लग रही हो, पूजा।”

मैं उनके ऊपर उछलती रही, और कुछ ही मिनटों में मैं झड़ गई। फिर विशाल ने मुझे नीचे लिटाया और मिशनरी में आकर खुद को मेरे अंदर डाला और कुछ ही देर में वो भी झड़ गए। हम दोनों हाँफ रहे थे, पसीने से तर, और एक-दूसरे की बाहों में।

चौथी रात – स्पून पोज़िशन और सुबह का प्यार

चौथी रात, हमने स्पून पोज़िशन ट्राई की। विशाल मेरे पीछे लेटे, मेरी पीठ उनकी छाती से सटी हुई थी, और उन्होंने पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाला। ये पोज़िशन बहुत आरामदायक थी — हम दोनों लेटे हुए थे, और विशाल धीरे-धीरे धक्के दे रहे थे। उनका एक हाथ मेरे स्तन पर था, दूसरा मेरी क्लिट पर। हम करीब 20 मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे, प्यार करते रहे, और फिर एक साथ झड़ गए।

अगली सुबह, जब मेरी आँख खुली, तो विशाल मेरे बगल में लेटे हुए मुझे ही देख रहे थे। “गुड मॉर्निंग, मेरी जान,” उन्होंने कहा। और फिर हमने सुबह का प्यार किया — धीमा, आराम से, और बेहद प्यार भरा। उन्होंने मुझे मिशनरी में लिटाया, मेरी आँखों में देखा, और बहुत धीरे-धीरे मुझे चोदा। हर धक्के के साथ वो कहते, “आई लव यू।” और मैं जवाब देती, “आई लव यू टू।”

हनीमून पर पहली चुदाई का असली मज़ा हमें दुबई में ही मिला। और इस बार, कोई दर्द नहीं था — सिर्फ प्यार था, विश्वास था, और एक-दूसरे के लिए गहरी इज़्ज़त थी।

भाग 5: प्यार और विश्वास की नई शुरुआत – गांड चुदाई का प्यार भरा वादा

दुबई से लौटने के बाद, विशाल और मेरा रिश्ता पूरी तरह बदल गया। वो अब मुझसे और भी ज़्यादा प्यार करने लगे, और मैं भी उनसे। हनीमून पर पहली चुदाई भले ही दर्दनाक रही थी, लेकिन उसने हमें एक-दूसरे के और करीब ला दिया। अब हम एक-दूसरे को समझते हैं, एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं, और एक-दूसरे से बेइंतहा प्यार करते हैं।

शादी के कुछ महीने बीत गए थे। हमारी सेक्स लाइफ अब बहुत अच्छी चल रही थी — विशाल ने मुझे कभी दर्द नहीं दिया, हमेशा प्यार से, धीरे-धीरे, मेरी मर्ज़ी से सब कुछ किया। मैंने भी उनके लिए अपना सब कुछ खोल दिया — अपना शरीर, अपना दिल, अपनी रूह।

एक रात, जब हम बिस्तर पर लेटे हुए थे और अभी-अभी प्यार किया था, विशाल ने मुझे अपनी बाहों में भरकर धीरे से कहा, “पूजा, मुझे तुमसे कुछ कहना है।”

“क्या?” मैंने पूछा, उनकी छाती पर अपना सिर रखते हुए।

“वो… शिमला वाली रात… मुझे पता है कि वो तुम्हारे लिए बहुत बुरी थी। लेकिन… मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि उस रात के बाद भी… मुझे एनल सेक्स बहुत पसंद है। मैंने पहले कभी किसी को नहीं बताया, लेकिन तुम मेरी पत्नी हो, और मैं तुमसे कुछ नहीं छुपाना चाहता।”

मैं चुप रही। मेरा दिल थोड़ा तेज़ धड़कने लगा। शिमला की उस रात की याद आते ही मेरी गांड में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। लेकिन इस बार डर नहीं था — क्योंकि ये विशाल था, मेरा पति, जो मुझसे प्यार करता था।

विशाल ने मेरी खामोशी को गलत समझा और जल्दी से बोले, “लेकिन मैं तुमसे कभी ऐसा करने के लिए नहीं कहूँगा। मैं जानता हूँ कि तुम्हें बहुत दर्द हुआ था। मैं बस तुमसे सच कह रहा हूँ, क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।”

मैंने उनकी तरफ देखा। उनकी आँखों में प्यार था, लेकिन साथ ही एक चाहत भी थी — एक ऐसी चाहत जो वो छुपा नहीं पा रहे थे। और मैंने सोचा — यही तो शादी है। एक-दूसरे की इच्छाओं को समझना, एक-दूसरे की ज़रूरतों को पूरा करना।

मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और धीरे से कहा, “विशाल, मैं जानती हूँ कि तुम्हें एनल सेक्स पसंद है। और मैं चाहती हूँ कि तुम खुश रहो। मैं तुम्हें अपनी गांड दूँगी। लेकिन एक शर्त पर।”

विशाल की आँखें चमक उठीं। “कोई भी शर्त, पूजा। बोलो।”

“प्यार से करना। धीरे-धीरे करना। मुझे तैयार करना। और कभी दर्द नहीं देना। जैसे तुमने शिमला में किया था, वैसे नहीं। जैसे तुमने दुबई में मेरी चूत के साथ किया था, वैसे — प्यार से, इज़्ज़त से।”

विशाल की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने मुझे कसकर गले लगा लिया और बोले, “पूजा, तुम दुनिया की सबसे अच्छी पत्नी हो। मैं वादा करता हूँ, मैं तुम्हें कभी दर्द नहीं दूँगा। मैं हमेशा प्यार से करूँगा।”

और फिर हमने वो किया। पहली बार, असली एनल सेक्स — प्यार से, तैयारी के साथ, एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए। विशाल ने पहले मुझे घंटों फोरप्ले किया — मेरी चूत चाटी, मेरे ब्रेस्ट चूसे, मुझे कई बार ऑर्गेज़्म दिया। फिर उन्होंने नारियल तेल लाकर मेरी गांड पर बहुत प्यार से लगाया। एक उंगली, फिर दो, धीरे-धीरे मेरी गांड को फैलाया। और जब मैं पूरी तरह तैयार थी, तब उन्होंने अपना लंड मेरी गांड में डाला — बहुत धीरे-धीरे, बहुत प्यार से।

और इस बार दर्द नहीं हुआ। इस बार सिर्फ आनंद हुआ।

उस रात के बाद से, मैं विशाल को महीने में 2-3 बार अपनी गांड देती हूँ। वो बहुत एन्जॉय करते हैं, और सच कहूँ तो, अब मैं भी एन्जॉय करती हूँ। क्योंकि जब प्यार से किया जाए, तो शरीर का हर हिस्सा आनंद दे सकता है। और विशाल से प्यार पाकर, मैंने अपना सब कुछ उन्हें दे दिया — अपनी चूत, अपनी गांड, अपना दिल, अपनी ज़िंदगी।

हनीमून पर पहली चुदाई की यादें अब हमारे लिए एक सबक बन गई हैं — कि प्यार बिना समझदारी के अधूरा है, और समझदारी बिना प्यार के बेमानी है। हमने दोनों को पा लिया है, और हम हमेशा एक-दूसरे के साथ हैं।

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