हनीमून पर 6 दिन की ज़बरदस्त चुदाई – पत्नी की चूत, गांड और मुँह चोदा

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हनीमून पर ज़बरदस्त चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक पति अपनी नई-नवेली दुल्हन को हनीमून पर किसी बेहद ठंडे इलाके में ले जाए, पहली रात को रोमांटिक माहौल बनाकर उसकी साड़ी और ब्लाउज फाड़ दे, उसके पूरे शरीर को चाटे, उसकी चूत में उंगलियाँ डाले, फिर अपना लंड उसकी कुँवारी चूत में डालकर ज़ोरदार चुदाई करे, और फिर अगले दिनों में उसकी गांड और मुँह भी चोदे, तो वो हनीमून कितना यादगार बन सकता है? यह हिंदी सेक्स कहानी हनीमून पर ज़बरदस्त चुदाई की है जहाँ पति ने अपनी पत्नी रागिनी को 6 दिन के हनीमून पर हिमाचल के एक सुनसान हिल स्टेशन पर ले जाकर उसकी बॉडी के हर छेद को चोदा — चूत, गांड, और मुँह। पहली रात रोमांटिक फोरप्ले के बाद ज़ोरदार चूत चुदाई हुई, दूसरे दिन सुबह पत्नी ने खुद लंड चूसा और काउगर्ल स्टाइल में चुदवाया, फिर उसी रात गांड चुदाई की। 6 दिनों तक लगातार चुदाई चलती रही। घर लौटने के बाद पत्नी प्रेग्नेंट हो गई, बच्चा होने के बाद उसके स्तन और गांड और भी बड़े हो गए, और पति ने उसे दूध पिलाते वक्त भी चोदा। अगर आपको हनीमून, पहली चुदाई, गांड चुदाई, प्रेग्नेंसी और शादीशुदा सेक्स वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।

भाग 1: हनीमून पर ज़बरदस्त चुदाई – शादी के बाद का इंतज़ार और सुहागरात की तैयारी

हमारी शादी हो गई थी और सुहागरात को थके होने के कारण हमने कुछ नहीं किया। शादी की रस्मों ने हम दोनों को पूरी तरह निचोड़ लिया था — सुबह से लेकर रात तक फेरे, पूजा-पाठ, फोटोशूट, मेहमानों का स्वागत। जब तक हम अपने कमरे में पहुँचे, हम दोनों इतने थक चुके थे कि एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराने के अलावा कुछ नहीं कर पाए। मैंने उसका हाथ पकड़ा, उसके माथे पर एक प्यार भरा किस किया, और हम एक-दूसरे की बाहों में सो गए।

अब शादी को 4 दिन हो गए और मैं उसको हाथ भी नहीं लगा रहा था। मेरी पत्नी का नाम रागिनी है — गोरी रंगत, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, और एक मुस्कान जो मेरा दिल पिघला देती है। उसका फिगर 34-28-34 का था, बिल्कुल परफेक्ट। लेकिन मैं जानबूझकर उससे दूरी बनाए हुए था। मैं चाहता था कि जब हम साथ हों, तो वो पल खास हो, यादगार हो, बिल्कुल परफेक्ट हो। मैं चाहता था कि हमारी पहली बार किसी खूबसूरत जगह पर हो, किसी रोमांटिक माहौल में, बिना किसी जल्दबाज़ी के।

वो रात को मस्त सेक्सी-सेक्सी नाइटी डाल कर, परफ्यूम लगा कर और गजरा लगा कर मुझे उत्तेजित करती, पर मैं अपने अंदर के शैतान पर बहुत काबू रख रहा था। उसकी नाइटी इतनी पारदर्शी होती कि उसमें से उसके स्तनों की गोलाई और निप्पल्स की सख्ती साफ दिखाई देती। उसके बालों में लगा गजरा पूरे कमरे को मोगरे की खुशबू से भर देता। वो मेरे पास आकर लेटती, अपनी नंगी जाँघें मेरी जाँघों से रगड़ती, और मेरे कान में फुसफुसाती — “कब तक इंतज़ार करवाओगे? मैं तुम्हारी पत्नी हूँ… तुम्हारी अपनी…”

लेकिन मैं हर बार मुस्कुराकर कहता, “जल्द ही, जानेमन। अभी थोड़ा सब्र करो। मैं चाहता हूँ कि हमारी पहली बार हमें हमेशा याद रहे।”

वो थोड़ी चिंता हो गई। फिर उसके घर से फोन आए और वो मेरे घर वालों से इस बारे में पूछने लगे। उसकी माँ ने मेरी माँ से सीधे पूछ लिया — “रागिनी और आपका बेटा… सब ठीक है ना? अभी तक कुछ हुआ नहीं क्या? रागिनी तो बहुत परेशान है।”

माँ ने मुझे बुलाकर बोला और आखिरकार 2 दिन बाद हम हनीमून पर निकल गए। मैंने सब कुछ पहले से प्लान कर रखा था। मैं उसको एक बहुत ज़्यादा ठंड वाले इलाके में लेकर गया था — हिमाचल का एक छोटा सा हिल स्टेशन, जहाँ बर्फ से ढकी पहाड़ियाँ थीं, देवदार के ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे, और सन्नाटा इतना गहरा कि सिर्फ हवा की आवाज़ सुनाई देती। वो ऐसी जगह थी, जहाँ कोई हनीमून के लिए नहीं जाता था — सब लोग शिमला, मनाली, या गोवा जाते थे। लेकिन मुझे भीड़-भाड़ से दूर, सिर्फ हम दोनों का साथ चाहिए था।

वहाँ बहुत ठंड थी और जाते वक्त ही मैंने उसको बोल दिया था, अगले 6 दिन तक उसकी कोई भी नौटंकी नहीं चलेगी। मैंने उसको बोला — “तुम ना फोन इस्तेमाल करोगी और ना ही नखरे करोगी। आज से घर जाने तक सिर्फ तांडव होगा। सिर्फ तुम और मैं।”

वो भी मेरी बात अच्छे से समझ गई थी और अब वो भी पूरे जोश में थी। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी — डर, उत्तेजना, और प्यार का मिश्रण। जैसे ही हम वहाँ पहुँचे, मैंने पहली सुबह उसको सब जगह घुमाया, शॉपिंग कराई और सब किया। उसे लोकल मार्केट ले गया, उसके लिए गर्म कपड़े खरीदे, उसे गर्मागर्म मोमोज़ खिलाए। वो बहुत खुश थी, लगातार हँस रही थी, और बार-बार मेरा हाथ पकड़ रही थी। लेकिन मेरे दिमाग में तो सिर्फ एक ही चीज़ चल रही थी — रात का इंतज़ार।

भाग 2: ठंडे इलाके में हनीमून – पहली रात का रोमांटिक फोरप्ले

रात को जब हम कमरे पर आ गए, तो पूरे कमरे में गुलाब के फूलों से महक रहा था। मैंने पहले से ही होटल वालों से कहकर कमरा सजवा दिया था — बिस्तर पर लाल गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी हुई थीं, हर कोने में मोमबत्तियाँ जल रही थीं, और हवा में चमेली की खुशबू घुली हुई थी। कमरे में अँधेरा था और मोमबत्तियाँ एकदम मस्त रोशनी कर रही थीं। उनकी हल्की-हल्की लौ से पूरा कमरा जगमगा रहा था। फिर मैंने उसको एक पतली सी साड़ी और ब्लाउज दिया और पहन कर आने को बोला। मैंने वो साड़ी खास उसके लिए खरीदी थी — लाल रंग की, बिल्कुल दुल्हन जैसी।

वो नहा कर और सज कर आई। जब वो बाथरूम से बाहर निकली, तो मैं उसे देखता रह गया। उसने लाल साड़ी पहनी हुई थी, माथे पर लाल बिंदी, गले में मंगलसूत्र, हाथों में चूड़ियाँ, पैरों में पायल। उसने हल्का मेकअप किया था और अपने बालों में गजरा लगाया था। वो बिल्कुल किसी अप्सरा जैसी लग रही थी। फिर मैंने एक रोमांटिक गाना लगा दिया। ऐसा लग रहा था, जैसे पिक्चर चल रही थी और उसमें गाना चल रहा था। फिर मैं उसके साथ थोड़ा नाचा और उसकी साड़ी निकाल कर फेंक दी।

अब मैं उसको गरम करने लगा। मैंने उसका ब्लाउज फाड़ कर फेंक दिया — कपड़े के फटने की आवाज़ ने कमरे को भर दिया। रागिनी चौंकी, लेकिन उसकी आँखों में उत्तेजना थी। और फिर पेटीकोट भी फाड़ दिया। अब वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी — सिर्फ अपनी चूड़ियाँ, पायल, बिंदी और मंगलसूत्र पहने हुए। उसका गोरा बदन मोमबत्तियों की रोशनी में चमक रहा था। मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसका अंग-अंग चाटने लगा।

वो मज़े से कराह रही थी। मैं उसके पैरों से होते हुए उसकी जाँघ पर आ गया। उसके पैरों की उंगलियाँ चूसीं, उसकी एड़ियाँ चाटीं, उसकी पिंडलियों पर किस किए। फिर जाँघ से नाभि, नाभि से स्तन, स्तन से बगल, बगल से गला और फिर मुँह चूमने लगा। मैंने उसके पूरे शरीर को अपनी जीभ से नहला दिया था। उसकी त्वचा पर मेरी लार की पतली सी परत जम गई थी, और वो उसमें चमक रही थी।

अब वो सातवें आसमान पर थी। उसकी आँखें बंद थीं, उसके होंठ खुले हुए थे, और उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं। मैंने बोला — “अभी तो शुरुआत है जानेमन, आगे देखो क्या-क्या होता है।”

मैंने उसकी जाँघें फैलाईं और चूत के दाने को मसलने लग गया। यह वो कसमसा उठी। उससे ये सहन नहीं हो रहा था, लेकिन मैं कहाँ सुनने वाला था। मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाली और फिर 2 उंगली डाली। उसकी चूत बहुत टाइट थी — बिल्कुल कुँवारी। मैं ऐसे ही उंगली उसकी चूत में अंदर-बाहर करने लगा। उसकी चूत से हल्का सा खून निकलने लगा — शायद हाइमन टूट गया था, या शायद मेरी उंगलियों का दबाव ज़्यादा था। फिर मैंने उसको थोड़ी देर ऊपर-ऊपर से चुम्मा-चाटी करके गरम रखा।

फिर मैंने उसके हाथ में अपना लंड दिया और वो मेरे लंड को मसलने लग गई। मेरा लंड 6.5 इंच का था — मोटा, सख्त, और धड़कता हुआ। लंड को पूरा तैयार देख कर वो घबरा गई और बोली, कि वो इतना बड़ा लंड लेकर मर जाएगी। मैंने कहा — “ऐसे कैसे मरने देंगे तुम्हें जानेमन। तुम तो मेरी जान हो।”

और मैंने उसको लंड चाटने को बोला। मैंने उसे लंड चुसवाया — उसने पहले तो झिझकते हुए, फिर धीरे-धीरे अपना मुँह खोला और मेरा लंड अंदर ले लिया। उसकी जीभ मेरे टोपे पर घूम रही थी, और मैं कराह उठा। फिर मैंने अपने लंड पर तेल लगाया। फिर मैंने उसकी चूत भी तेल से भर दी। मैंने नारियल तेल की बोतल उठाई और उसकी चूत पर उदारता से तेल डाला, फिर अपनी उंगलियों से उसे अंदर तक फैलाया। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सेट किया और धक्का देने लगा।

भाग 3: पहली चुदाई – चूत में लंड, दर्द, आँसू और ज़बरदस्त ऑर्गेज़्म

जब लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के अंदर गया, तो उसने चिल्लाना चालू कर दिया। “आआआह्ह्ह… दर्द हो रहा है… प्लीज़… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…” मैंने वैसे ही सुपाड़ा अंदर-बाहर करने लगा — बहुत धीरे-धीरे, बहुत प्यार से। उसकी चूत मेरे लंड के चारों ओर कसी हुई थी, जैसे कोई गर्म मखमली दस्ताना। मैंने उसके आँसू चूमे, उसके माथे पर किस किया, और धीरे से फुसफुसाया — “श्श्श… बस थोड़ी देर और… दर्द कम हो जाएगा… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…”

फिर थोड़ी देर में उसको मज़ा आने लगा और वो गांड उछाल कर पूरा लंड अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। मैं समझ गया था, कि अब वो नॉर्मल हो गई है। मैंने उसके दोनों जाँघें अपने कंधे पर रखीं और उसको थोड़ा उठा कर घपा-घप पूरा लंड उसकी चूत के अंदर-बाहर करने लगा।

वो चिल्लाने लगी — “आआ.. आ.. आआओह्ह्ह… हाँ… और… और ज़ोर से… मुझे चोदो…”

मैं कहाँ उसको बक्शने वाला था। मैंने उसको बिस्तर से उठाया और खड़े-खड़े ही उसको चोद रहा था। मैंने उसे दीवार से सटाया, उसकी टाँगें अपनी कमर पर लपेट लीं, और उसे हवा में उठाकर चोदने लगा। आवाज़ें बाहर न जाएँ, इसलिए मैंने उसके मुँह में अपना मुँह डाल दिया। उसको पता चल चुका था, कि मैं क्या चीज़ हूँ।

उसकी आँखों में पानी भरा था, लेकिन मैं उसको वैसे ही चोदता रहा, क्योंकि मेरा अभी हुआ नहीं था। लेकिन उसकी और सहने की हालत नहीं थी। फिर मैंने वैसे नंगे ही उसको अपनी बाहों में लिया और हम एक-दूसरे से लिपट कर सो गए। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था, और हम दोनों पसीने से तर थे।

भाग 4: हनीमून पर ज़बरदस्त चुदाई – दूसरे दिन सुबह की चुदाई और गांड की तैयारी

सुबह उसको एहसास हो गया था, कि मैं रात की वजह से खुश नहीं था — क्योंकि मैं झड़ा नहीं था। सुबह मैं उठा, तो मैंने देखा, कि वो मेरे लंड को चूस रही थी। उसका मुँह मेरे लंड पर था, उसकी जीभ मेरे टोपे पर घूम रही थी, और उसकी आँखें मुझसे मिल रही थीं। मैंने उसको कहा — “रहने दे, अभी मत कर। तू अभी भी दर्द में है।”

तो उसने कहा — “पानी गिराए बिना मैं नहीं छोड़ने वाली। तुम मेरे पति हो, और मैं तुम्हें पूरा संतुष्ट करूँगी।”

उसका जोश देख कर मैंने उसका सिर पकड़ा और उसके मुँह को चोदने लगा। उसने लंड पर तेल लगाया और अब वो लंड के ऊपर बैठ गई। फिर वो मेरा लंड अंदर लेने लग गई। अब वो घोड़ी की तरह उछल-उछल कर चुद रही थी और चिल्ला रही थी। उसकी आँखें बंद थीं और उसको मज़ा आ रहा था। मुझे भी काफी अच्छा महसूस हो रहा था। उसने आखिरकार अपनी चूत में मेरा पानी निकल ही दिया। मेरा गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया, और वो मेरे ऊपर ही ढेर हो गई।

फिर वो मेरे ऊपर ही लेटी रही। ऐसे ही 15-20 मिनट लेट रहने के बाद, मैंने उसको वैसे ही गोदी में उठाया और बाथरूम में लेकर गया। फिर हम दोनों ने एक साथ स्नान लिया। गर्म पानी, साबुन के बुलबुले, और एक-दूसरे की बाहों में।

उसको अब चलने में भी दिक्कत हो रही थी। फिर जब हम दोपहर को बाहर खाना खा गए, तब मैंने उसके लिए दर्द की गोली ली। वो खाना खाने के बाद, मुझे कमरे पर चलने के लिए कह रही थी, लेकिन मैंने ही ज़ोर नहीं दिया ज़्यादा। मैंने उसको आराम करने दिया।

फिर रात को उसने काली पारदर्शी नाइटी पहनी थी। उसकी नाइटी घुटनों के ऊपर तक थी। उसकी पायल और कंगन छन-छन बज रहे थे। वो मुझे गरम कर रही थी। वो मेरे बाजू में लेट कर अपनी नंगी जाँघ मेरे लोड़े पर रगड़ रही थी। वो जानबूझ कर अपने स्तनों को मेरे हाथ की कोहनी से दबा रही थी। मुझसे भी अब कहाँ सब्र हो रहा था। मैंने उसकी नाइटी फाड़ फेंकी और उसको उल्टा करके अपनी गोद में ले लिया। फिर मैं उसकी गांड पर थप्पड़ मारने लगा।

फिर मैंने अपने हाथों से उसकी गांड को खोला और उसकी गांड के छेद में जीभ डालने लगा। मेरी जीभ उसकी गांड के छेद के चारों ओर घूम रही थी, और वो कराह रही थी। फिर वो बोली — “उउइइइ माँ, और कितना तड़पाओगे। ऐसे तो मैं मर जाऊँगी।”

फिर मैं उसकी गांड में उंगली डालने लगा। उसकी गांड टाइट थी, तो मैंने गांड के छेद पर तेल लगाया और फिर उंगली डालनी शुरू कर दी। वो अब समझ चुकी थी, कि उसका बचना मुश्किल था। वो मुझे बोली — “जी आराम से करिएगा, कहीं मार मत देना मुझे। मुझे प्यार से लीजिए।”

भाग 5: गांड चुदाई का दर्द और आनंद – पूरे 6 दिन की चुदाई

मैंने उसको उल्टा किया और उसकी चूत पर लंड रगड़ने लग गया। अब वो काफी गरम हो चुकी थी। मैंने उसको अच्छी तरह से झुकाया और उसके दोनों चूतड़ पकड़ कर खोल दिए। फिर मैंने उसकी गांड के छेद पर अपना लंड सेट किया और अंदर डालने की कोशिश की। लंड अंदर जा नहीं रहा था और वो कसमसा रही थी।

फिर वो बोली — “छोड़ दीजिए मुझे, जाने दीजिए। मुझसे नहीं होगा।”

लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने ज़ोर लगाया और अपना सुपाड़ा उसकी गांड में घुसा दिया। उसने अपना मुँह तकिये में दबा लिया। फिर मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए। मुझे ध्यान ही नहीं आया, कि मैं उसको कितनी बेरहमी से चोद रहा था और वो बेहोश हो चुकी थी।

मैंने उसको अपना माल निकलने तक नहीं छोड़ा और अंत में उसकी गांड में ही अपना सारा माल निकल दिया। वो अभी भी बेहोश ही थी। उसको बेहोश देख कर मेरी फट गई थी। फिर वो आधे घंटे के बाद उठी और अगले दिन मुझे अपने करीब भी नहीं आने दे रही थी।

तो हमारा तीसरा दिन ऐसे ही बर्बाद हो गया, लेकिन चौथे दिन वो सामान्य हो गई थी। वो आकर मेरी गोद में बैठ गई थी और लंड को खुद ही अपनी गांड में लेने की कोशिश कर रही थी। इस बार उसने खुद तेल लगाया, खुद अपनी गांड को फैलाया, और धीरे-धीरे मेरे लंड पर बैठ गई। और इस बार उसे दर्द नहीं हुआ — सिर्फ आनंद हुआ। “अब मुझे मज़ा आ रहा है,” उसने मुस्कुराकर कहा।

उन 6 दिनों में मैंने उसकी बॉडी के हर छेद को चोद दिया। चूत, गांड, मुँह — कोई जगह नहीं छोड़ी। हर रात कुछ नया होता, हर सुबह एक नई शुरुआत। हनीमून पर ज़बरदस्त चुदाई का वो 6 दिन हमारी ज़िंदगी का सबसे यादगार समय बन गया।

भाग 6: घर वापसी, प्रेग्नेंसी और माँ बनने के बाद की चुदाई

फिर जब हम अपने घर वापस आए, तो वो कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई। अभी उसको वहाँ 7 दिन भी नहीं हुए थे, कि उसको उल्टी आने लगी। फिर मुझे उसको उसके घर जाकर लाना पड़ा। डॉक्टर को दिखाया तो पता चला — वो प्रेग्नेंट थी। हम दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। हमारा अपना बच्चा — हमारे प्यार का सबूत।

1 साल के बाद जब बच्चा हुआ, तो वो घर वापस आ गई। अब उसके स्तन आम की तरह बड़े हो गए थे और लटक रहे थे। उसकी गांड बाहर निकल आई थी और कमर में भी चर्बी भर गई थी। अब वो एकदम आंटी हो गई थी — लेकिन मुझे वो पहले से भी ज़्यादा सेक्सी लगती थी।

जब वो बच्चे को दूध पिला रही होती थी, तो मैं उसको चोद देता था। एक तरफ बच्चा उसका दूध पी रहा होता, दूसरी तरफ मैं पीछे से उसकी चूत या गांड चोद रहा होता। उसने गोली खानी चालू कर दी थी, ताकि अगला बच्चा भी जल्दी न हो जाए।

मुझे मस्त चुदाई की साथी मिली है, जो उतने ही जोश से मैदान में टिकी रहती है। उससे चूत, गांड जो माँगो दे देती है। और मैं भी उसे उतना ही प्यार देता हूँ, जितना वो मुझे देती है। हनीमून पर ज़बरदस्त चुदाई की यादें आज भी हमारे चेहरे पर मुस्कान ला देती हैं, और हमारी ज़िंदगी प्यार और चुदाई से भरी हुई है।

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