खाना बनाते हुए मुँह चोदना – किचन में पति ने बीवी का मुँह चोदा

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खाना बनाते हुए मुँह चोदना – यह अनोखी और बेहद गर्म हिंदी सेक्स कहानी है जहाँ पति ने किचन में ही बीवी का मुँह चोदते हुए पूरा खाना बना डाला। शाम को रोटी बनाते समय जब पति ऑफिस से घर आए और किचन में घुसकर बीवी से लिपट गए, तो शुरू हुआ एक अलग ही अंदाज़ का सेक्स। इस खाना बनाते हुए मुँह चोदना के किस्से में आप पढ़ेंगे कैसे पति ने बीवी को नीचे बैठाकर अपना लंड उसके मुँह में दिया, और फिर एक हाथ से सब्जी बनाते हुए दूसरे हाथ से उसका मुँह चोदता रहा। खाना बनाते हुए मुँह चोदना का यह अनुभव इतना मादक था कि बीवी का मुँह वीर्य से भर गया, सर पर अंडे फोड़े गए, ऑमलेट बना, और फिर प्यार से खाना खिलाया गया। अगर आप किचन में होने वाली सच्ची और बेहद हॉट चुदाई की कहानियाँ ढूंढ रहे हैं, तो यह आपके लिए ही है।

भाग 1: शाम की रोटी और अचानक पति का आना

उस दिन शाम का समय था। बाहर हल्की ठंडी हवा चल रही थी और सूरज डूबने को था। मैं किचन में खाना बना रही थी – अपने पति के लिए। वह रोज़ ऑफिस से शाम को छह-सात बजे के करीब आते हैं, और मैं हमेशा कोशिश करती हूँ कि उनके आने से पहले खाना तैयार हो जाए। उस दिन मैंने रोटी बनाना शुरू कर दिया था। आटा गूंथा हुआ था, बेलन और चकला लगा हुआ था, और गैस पर तवा गर्म हो रहा था। मैंने एक-एक करके रोटियाँ बनानी शुरू कर दीं – गोल-गोल, सॉफ्ट, और दोनों तरफ से अच्छे से सिकी हुई।

मैं अपनी ही दुनिया में थी – एक हाथ से रोटी पलट रही थी, दूसरे हाथ से चिमटा पकड़ रखा था। मेरे मन में बस यही था कि जब तक पति आएँ, खाना तैयार हो जाए। तभी अचानक मैंने आवाज़ सुनी – घर का मुख्य दरवाज़ा खुला। मेरे पति आ गए थे। मैंने आवाज़ लगाई – “आ गए? मैं किचन में हूँ, रोटी बना रही हूँ। थोड़ा रुको, बस दस मिनट में खाना तैयार हो जाएगा।”

मैंने सोचा कि वह कमरे में जाकर कपड़े बदलेंगे या टीवी देखेंगे – लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने उनके कदमों की आहट सुनी – वह सीधे किचन की तरफ आ रहे थे। जल्दी से मैंने अपने हाथ पोंछे और उनका इंतज़ार करने लगी।

भाग 2: किचन में घुसते ही शुरू हुआ प्यार और छेड़छाड़

जैसे ही मेरे पति किचन में आए, उनके चेहरे पर वही प्यारी सी मुस्कान थी जो मुझे बहुत पसंद है। लेकिन उस मुस्कान में कुछ और भी था – एक चमक, एक शरारत, एक भूख। वह सीधे मेरे पास आए, और बिना कुछ कहे उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया। उनकी बाँहों ने मेरी कमर को चारों तरफ से घेर लिया। उन्होंने अपना चेहरा मेरी गर्दन में दबा दिया और गहरी साँस ली – जैसे वह मेरी खुशबू को अपने अंदर समो रहे हों।

मैंने हल्के से विरोध किया – “अरे, अभी तो मैं रोटी बना रही थी। देखो, आखिरी रोटी बाकी है। प्लीज़, थोड़ा रुको, खाना खत्म कर लेने दो।”

लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी। उन्होंने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो हल्का सा चुम्बन – फिर गहरा, फिर और गहरा। उनकी जीभ ने मेरे होंठों को अलग किया और मेरे मुँह में घुस गई। मैंने भी अपनी जीभ को आगे बढ़ाया और हमारी जीभें एक दूसरे से लड़ने लगीं। मुझे पता था कि अब खाना बनाना मुश्किल है – जब पति इस मूड में हों, तो कोई भी चीज़ उन्हें रोक नहीं सकती।

चुम्बन के साथ-साथ उनके हाथ मेरे शरीर पर घूम रहे थे। पहले उन्होंने मेरी पीठ को सहलाया, फिर मेरी कमर को दबाया, और फिर उनके हाथ मेरे बूब्स पर आ गए। मैंने उस दिन घर पर सूती कमीज पहनी हुई थी – अंदर से कोई ब्रा नहीं थी। मैं घर पर कभी ब्रा नहीं पहनती, क्योंकि मुझे आराम पसंद है। उन्होंने मेरी कमीज के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया – पहले धीरे-धीरे, फिर जोर से। मेरे बूब्स उनके हाथों में कैद हो गए और वह उन्हें मसल रहे थे, दबा रहे थे, उनके आकार का आनंद ले रहे थे।

“आह्ह्ह… जानू… छोड़ो ना… रोटी जल जाएगी…” मैंने उनके होंठों के बीच से कहा।

लेकिन वह तो मानने वाले थे ही नहीं। उन्होंने मेरी कमीज ऊपर चढ़ा दी और मेरे नंगे बूब्स को अपने हाथों में ले लिया। उनके हाथ सीधे मेरे निप्पल पर थे – उन्होंने उन्हें अपनी उँगलियों के बीच दबाया और घुमाया। मेरे निप्पल तुरंत तन गए। वह सख्त हो गए, जैसे छोटी उंगलियाँ हों। मैंने अपना सिर पीछे की तरफ झुका दिया और अपनी आँखें बंद कर लीं – मैं पिघल रही थी।

भाग 3: पति ने कहा – मैं सब्जी बनाता हूँ, तुम आराम करो

मैंने फिर से कोशिश की – “सुनो, प्लीज़… अभी मुझे सब्जी बनाने दो। बस पाँच मिनट और। फिर तुम जो चाहो करना।”

मेरे पति ने मेरी तरफ देखा और एक शरारती मुस्कान के साथ बोले – “कोई बात नहीं, बेबी। मैं बनाता हूँ न। तुम चिंता मत करो। आज मैं खाना बनाऊँगा और तुम बस… मेरे पास रहो।”

मैं हैरान रह गई – मेरे पति खाना बनाते हैं, यह कोई नई बात नहीं थी। वह कभी-कभी बहुत अच्छा खाना बना लेते हैं – खासकर जब उनका मन करता है। लेकिन उस दिन उनके स्वर में कुछ और ही था – एक अलग ही तरह का इरादा। मैंने सोचा, “ठीक है, जैसे उनकी मर्जी। मैं थोड़ा आराम कर लेती हूँ।”

उन्होंने अपने हाथ मेरे बूब्स से हटाए और सब्जी काटने वाले बोर्ड की तरफ बढ़े। मैंने देखा कि मैंने पहले ही सब्जी धोकर काटने के लिए रख दी थी – आलू, टमाटर, फूलगोभी, मटर – सब कुछ। उन्होंने चाकू उठाया और सब्जी काटने लगे – एकदम एक्सपर्ट की तरह, बराबर-बराबर टुकड़े। मैं उन्हें देख रही थी – उनके हाथ कितनी तेज़ी से चल रहे थे। उन्होंने देखा कि मैं उन्हें देख रही हूँ, तो मुस्कुरा दिए।

मैंने रोटी बनाना पूरा कर लिया था। पाँच रोटियाँ हो गई थीं – गोल, सॉफ्ट, एकदम परफेक्ट। मैंने उन्हें रोटी के बास्केट में रख दिया और उस पर कपड़ा डाल दिया ताकि वह ठंडी न हों। सब्जी के लिए मैंने कढ़ाई गैस पर रखी थी – तेल गर्म हो रहा था। मैंने सोचा कि अब मैं सब्जी बनाना शुरू कर दूँ, क्योंकि पति सिर्फ सब्जी काट रहे थे, बनाने में अभी वक्त था।

मैंने कहा – “चलो, मैं सब्जी बना लेती हूँ। तुम बैठो, आराम करो। तुम थक कर आए हो।”

लेकिन मेरे पति ने मेरा हाथ पकड़कर रोक लिया। वह बोले – “नहीं, तुम नहीं बनाओगी। मैं बनाऊँगा। और तुम… तुम यहाँ आओ। मेरे पास।”

भाग 4: रोटी बन चुकी, अब पति का मूड बना

मैंने उनकी बात मानी। मैं थोड़ा आगे बढ़ी और उनके सामने खड़ी हो गई। मेरे पति ने एक हाथ से मेरी कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से मुझे नीचे की तरफ धकेल दिया। मुझे समझने में देर नहीं लगी कि वह क्या चाहते हैं। मैं अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गई – किचन के फर्श पर, जो थोड़ा ठंडा था। उनके पैरों के सामने। मेरे पति ने एक हाथ से अपने पैंट का हुक खोला और जिप खोल दी। उनकी पैंट नीचे खिसक गई, और उनके अंदर की काली चड्डी दिखाई देने लगी। फिर उन्होंने अपनी चड्डी भी नीचे उतार दी।

मेरे सामने उनका लंड था – अभी पूरी तरह खड़ा नहीं हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे अपना आकार ले रहा था। उनका लंड करीब साढ़े छह इंच लंबा है – मोटा, मजबूत, और देखने में बहुत आकर्षक। सुपारी गुलाबी और चमकदार है, और नसें उभरी हुई हैं। मैंने अपने हाथों से उनके लंड को पकड़ा और सहलाना शुरू किया। उनके अंडे नीचे लटक रहे थे – भारी और गर्म। मैंने उन्हें भी अपनी उँगलियों से छुआ।

मेरे हाथ लगते ही उनका लंड फनफनाने लगा। सेकंड भर में ही वह पूरी तरह खड़ा हो गया – कड़क, मोटा, और तैयार। सुपारी पर प्री-कम की हल्की नमी आ गई थी। मैंने अपना मुँह आगे बढ़ाया और उनके लंड की सुपारी को अपने होंठों के बीच ले लिया। उसका स्वाद हल्का नमकीन था – मैंने उसे चूसना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, प्यार से, अपनी जीभ को सुपारे के चारों तरफ घुमाते हुए।

भाग 5: खाना बनाते हुए मुँह चोदना शुरू – एक हाथ में लंड, एक हाथ में सब्जी

और फिर मेरे पति ने वह किया जो उस दिन को इतना यादगार बना गया। उन्होंने अपना एक हाथ मेरे सिर पर रखा और अपने लंड को मेरे मुँह में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया – धीरे-धीरे, पर लयबद्ध तरीके से। मेरे मुँह से “चुप-चुप-चुप” की आवाज़ आने लगी। और उसी समय, अपने दूसरे हाथ से, उन्होंने कढ़ाई में तेल डालना शुरू कर दिया। तेल गर्म हो गया – उसकी चटकने की आवाज़ आने लगी। फिर उन्होंने उसमें जीरा डाला – जीरा तड़कने लगा। फिर प्याज डाला – प्याज की सुनहरी होने की आवाज़।

खाना बनाते हुए मुँह चोदना शुरू हो चुका था। मेरे पति एक साथ दो काम कर रहे थे – एक हाथ से मेरे मुँह में अपना लंड चला रहे थे और दूसरे हाथ से सब्जी पका रहे थे। उनका पूरा कंट्रोल था – दोनों काम एक साथ, पूरी सटीकता के साथ।

मैं अपने घुटनों पर थी, मेरा मुँह उनके लंड से भरा हुआ था, और मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं। मैं महसूस कर रही थी कि उनका लंड मेरे मुँह के अंदर जा रहा है और बाहर आ रहा है। हर बार जब वह अंदर जाता, मैं उसे अपनी जीभ से दबाती, अपने होंठों से उसे चूसती। मेरी लार उनके लंड पर टपक रही थी – उसे और गीला, और चिकना कर रही थी। मेरे पति अपने लंड को मेरे गले तक उतार रहे थे – पूरा लंड, जितना हो सके उतना अंदर। मैंने मुश्किल से उनका पूरा लंड अपने मुँह में लिया – घुटन हो रही थी, लेकिन उस घुटन में एक अलग ही मज़ा था।

उधर, कढ़ाई में प्याज सुनहरी हो गई थी। उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया और उसमें लहसुन-अदरक का पेस्ट डाला – चम्मच से नहीं, सीधे हाथ से। फिर उन्होंने मसाले डाले – हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च, गरम मसाला। कढ़ाई में मसालों की खुशबू आने लगी – वह खुशबू जो अच्छे खाने की पहचान होती है। और उसी समय, उनके लंड की गहरी खुशबू – मेरे मुँह में, मेरे चेहरे पर, मेरे बालों में – सब कुछ मिल रहा था। किचन में दो तरह की खुशबूएँ थीं – एक मसालों की, एक चुदाई की। दोनों ही मादक थीं, दोनों ही मुझे पागल कर रही थीं।

फिर उन्होंने कटी हुई सब्जी डाल दी – आलू, फूलगोभी, मटर, सब कुछ एक साथ। सब्जी को अच्छे से भूनने के लिए उन्होंने चम्मच चलाया – एक हाथ से चम्मच, एक हाथ से मेरा मुँह। उनका ध्यान दोनों जगह एक जैसा था। उनका लंड मेरे मुँह में अन्दर-बाहर हो रहा था – उसी लय में जैसे वह चम्मच चला रहे थे। एक ताल, एक सुर, एक लय – मेरा मुँह और कढ़ाई।

मैं उनके पैरों के पास घुटनों पर थी, मेरा मुँह उनके लंड से भरा था, मेरे होंठ लाल हो गए थे, मेरी लार बह रही थी, और मैं केवल “म्म्म्म… मम्म्म… म्म्म्म” की आवाज़ें निकाल पा रही थी। मेरा सिर पूरी तरह उनके हाथों में था – वह जैसे चाहते थे, वैसे मेरा मुँह चला रहे थे। मुझे पूरी तरह उनके हवाले कर दिया गया था – मेरी इच्छाएँ, मेरी सीमाएँ, मेरी हर चीज़।

भाग 6: मुँह वीर्य से भर गया – पहला राउंड खत्म

अब सब्जी पकने के करीब थी। उन्होंने उसमें नमक डाला, थोड़ा पानी डाला, और ढक्कन बंद कर दिया। सब्जी दम पर आ गई थी – उसे पकने में अब कुछ मिनट और लगेंगे। मेरे पति का ध्यान अब पूरी तरह मेरे मुँह पर था। उन्होंने दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़ लिया और अपने लंड को तेज़ी से मेरे मुँह में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। अब कोई लय नहीं थी – बस जंगली गति थी, बस बेरहमी थी। “चुप-चुप-चुप” की आवाज़ अब “खचपच-खचपच” में बदल गई थी। मेरा सिर उनके हाथों में झूल रहा था, मेरे बाल बिखर गए थे, मेरे चेहरे पर उनके लंड के साथ मेरी लार और उनके प्री-कम का मिश्रण फैल रहा था।

और फिर – मैंने महसूस किया कि उनका लंड मेरे मुँह के अंदर धड़कने लगा। तेज़-तेज़ धड़कनें – जैसे कोई अलग दिल हो। उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह के अंदर गहराई तक डाला और रुक गए। मैं जानती थी कि अब वह आ रहे हैं। मैंने उनके लंड को अपने होठों से और जोर से पकड़ा, अपनी जीभ से उसे सहलाया, और अपना मुँह पूरी तरह बंद कर लिया – ताकि एक बूंद भी बाहर न जाए।

उन्होंने अपना गर्म, गाढ़ा, सफेद वीर्य मेरे मुँह के अंदर छोड़ दिया। पहली धार – गर्म और तेज़, सीधे मेरे गले पर। दूसरी धार – मेरी जीभ पर। तीसरी धार – मेरे होंठों के अंदर, मेरे गालों के पीछे। मेरा मुँह पूरी तरह भर गया था – इतना कि मैं बंद करके भी अपने होठों से कुछ बूंदें बाहर टपकने से नहीं रोक सकती थी। मैंने उनके वीर्य को निगल लिया – एक घूंट में, फिर दूसरे में, फिर तीसरे में। उसका स्वाद बहुत गहरा था – नमकीन, मीठा, और पूरी तरह उनका। मैंने उनके लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला, और फिर अपनी जीभ से अपने होंठों को साफ किया – उनका बचा हुआ वीर्य चाट कर खा लिया।

उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा और मेरे बाल सहलाए – प्यार से, देखभाल से। वह बोले – “गुड गर्ल। अब थोड़ा आराम करो।”

लेकिन मैं उठना नहीं चाहती थी। मैं वहीं उनके पैरों में बैठी रही – थोड़ा हाँफ रही थी, थोड़ा मुस्कुरा रही थी। मेरे चेहरे पर उनके वीर्य के दाग थे, मेरे होंठ सूज गए थे, मेरी आँखों में प्यास अभी बाकी थी।

भाग 7: सर पर अंडे फोड़े और ऑमलेट बनाया

सब्जी पक कर तैयार हो गई थी। उन्होंने गैस बंद कर दी और कढ़ाई को एक तरफ रख दिया। अब उनकी नज़र एक और चीज़ पर थी – ऑमलेट। मेरे पति को ऑमलेट बहुत पसंद है – नरम, स्पंजी, और अंदर से थोड़ा कच्चा। और उस दिन उन्होंने कुछ अलग ही करने का मन बनाया था।

उन्होंने फ्रिज से चार अंडे निकाले। बड़े-बड़े – ताज़े, सफेद खोल वाले। उन्होंने मेरी तरफ देखा और एक शरारती मुस्कान के साथ कहा – “आज ऑमलेट बनाने का तरीका थोड़ा अलग होगा, बेबी। चलो, नीचे बैठो।”

मैं पहले से ही घुटनों पर थी – नीचे बैठने की जरूरत नहीं थी। मैंने अपना सिर थोड़ा ऊपर उठाया और उनकी तरफ देखा। और फिर – उन्होंने एक अंडा लिया और धीरे से उसे मेरे सर पर फोड़ दिया।

“धप!” – अंडा फूटा। उसका पीला, गाढ़ा पीला भाग (योक) और पारदर्शी सफेद भाग मेरे सर पर बहने लगा। यह ठंडा था – बिल्कुल ठंडा, फ्रिज से निकाला हुआ। मैं चौंक गई! मैंने चीखते हुए कहा – “अरे! क्या कर रहे हो? बाल खराब हो जाएंगे!”

लेकिन वह हँसे और दूसरा अंडा मेरे सर पर फोड़ दिया। “धप!” – फिर से। अब दो अंडों का मिश्रण मेरे बालों से होता हुआ मेरे चेहरे पर, मेरे कंधों पर, मेरी कमीज़ पर बहने लगा। यह बहुत गंदा था – लेकिन उस गंदगी में एक अलग ही कामुकता थी। ठंडे अंडे की चिपचिपाहट मेरी गर्म त्वचा पर – यह अद्भुत एहसास था।

तीसरा अंडा – “धप!” चौथा अंडा – “धप!” अब मेरे पूरे सर पर चार अंडों का मिश्रण था। मेरे बाल पूरी तरह भीग गए थे, मेरे चेहरे पर पीले और सफेद धब्बे थे, मेरी कमीज़ चिपक गई थी। मैं हँस रही थी और साथ ही थोड़ा नाराज़ भी – लेकिन सच में, मुझे यह पसंद आ रहा था।

उन्होंने मेरे सर को अपने दोनों हाथों से थोड़ा दबाया – जैसे कोई संतरा निचोड़ रहा हो – ताकि अंडे का सारा भाग मेरे सर से निकलकर नीचे पैन में गिर जाए। और सच में, उन्होंने पैन सीधे मेरे सर के नीचे कर रखा था – जो भी अंडा मेरे सर से गिर रहा था, वह सीधे पैन में जा रहा था। अंडे का सफेद और पीला भाग – सब कुछ – पैन में इकट्ठा हो रहा था। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि वह ऐसा कर रहे हैं – इतना क्रिएटिव, इतना गंदा, इतना सेक्सी।

फिर उन्होंने उस पैन को गैस पर रख दिया। अंडे सिज़-ज़-ज़ की आवाज़ करने लगे। उन्होंने ऑमलेट बनाना शुरू कर दिया – एक हाथ से पैन हिला रहे थे, दूसरे हाथ से उस पर नमक और काली मिर्च छिड़क रहे थे। ऑमलेट फूलने लगा, गोल होने लगा, किनारे सुनहरे होने लगे। उसकी खुशबू – अंडे की भुनी हुई खुशबू – पूरे किचन में फैल गई।

भाग 8: दूसरी बार मुँह वीर्य से भरा – ऑमलेट भी बन गया

ऑमलेट बनने में करीब पाँच मिनट लगे। और उन पाँच मिनटों में, मेरे पति ने अपना लंड फिर से मेरे मुँह में डाल दिया। शायद पहले राउंड के बाद उनका लंड सिर्फ पाँच मिनट में ही फिर से खड़ा हो गया था – या शायद वह कभी ढीला ही नहीं पड़ा था। मुझे नहीं पता। लेकिन उनका लंड फिर से मेरे मुँह में था – कड़क, गर्म, और तैयार।

इस बार उन्होंने ऑमलेट पलटते हुए मेरा मुँह चोदा। एक हाथ में स्पैटुला, दूसरे हाथ में मेरा सिर। लेकिन इस बार उनका लंड पहले से कहीं ज्यादा तेज़ चल रहा था – शायद उनका ऑर्गेजम आने वाला था। उन्होंने मेरा मुँह पूरी तरह अपने लंड से भर दिया – जैसे मेरा मुँह उनकी चूत हो। वह मुझे चोद रहे थे – मेरे मुँह को, मेरे गले को, मेरी साँसों को। मेरी आँखों से पानी आ रहा था – घुटन से और सुख से। मैंने उनके लंड को अपने हाथों से पकड़ रखा था, उसे सहला रही थी, अपनी उँगलियों से उनके अंडों को दबा रही थी।

और फिर – उन्होंने फिर से अपना वीर्य मेरे मुँह के अंदर निकाल दिया। दूसरी बार। उतनी ही मात्रा में – गर्म, गाढ़ा, और भरपूर। इस बार मैं और तैयार थी – मैंने तुरंत निगलना शुरू कर दिया। एक बार, दो बार, तीन बार – जब तक मेरा मुँह साफ नहीं हो गया। उनका वीर्य मेरे अंदर जा रहा था – मेरे पेट में, मेरे शरीर में, मेरी हर कोशिका में। मैंने उनके लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और उसे चूस कर पूरी तरह साफ कर दिया – जैसे वह कोई लॉलीपॉप हो।

उन्होंने गैस बंद कर दी। ऑमलेट तैयार था – गोल, सुनहरा, बिल्कुल परफेक्ट। उन्होंने उसे प्लेट में निकाल दिया।

भाग 9: प्यार से खाना खिलाया – थाली में प्यार और मुँह में स्वाद

अब मेरे पति मुझे उठाकर खड़ा कर दिया। उन्होंने मेरे गंदे चेहरे और बालों को देखा और हँस पड़े – “तुम बहुत गंदी हो गई हो, बेबी। लेकिन बहुत सेक्सी भी।”

उन्होंने एक गीला कपड़ा लिया और धीरे-धीरे मेरे चेहरे को साफ किया – मेरे होठों से, मेरे गालों से, मेरी आँखों के पास से। उन्होंने मेरे बालों को भी थोड़ा साफ किया – हालाँकि बाल तो धोने ही पड़ेंगे, लेकिन उस वक्त उन्होंने जितना हो सके, उतना साफ कर दिया। फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे डाइनिंग टेबल तक ले गए।

उन्होंने मुझे एक कुर्सी पर बैठाया – उसी तरह जैसे कोई राजकुमारी को बैठाता है। फिर उन्होंने प्लेट में सब्जी, रोटी, और ऑमलेट रखा – सब कुछ बिल्कुल सही अनुपात में। और फिर – उन्होंने मुझे खाना खिलाना शुरू कर दिया। हाँ, खुद खाना नहीं, बल्कि खिलाना।

पहले उन्होंने रोटी का एक टुकड़ा तोड़ा, उसमें सब्जी डाली, और मेरे मुँह में रख दिया। मैंने चबाया – सब्जी का स्वाद बहुत अच्छा था – मसालेदार, थोड़ा तीखा, बिल्कुल सही। फिर उन्होंने ऑमलेट का एक टुकड़ा मेरे मुँह में रखा – अंदर से नरम, बाहर से कुरकुरा। और इन सबके बीच, मेरे मुँह में उनके वीर्य का हल्का स्वाद अब भी बाकी था। सब्जी, रोटी, ऑमलेट, और उनका वीर्य – सब मिलकर एक अजीब लेकिन अद्भुत स्वाद बना रहे थे। वह स्वाद मैं कभी नहीं भूल सकती।

मेरे पति भी मेरे साथ बैठ गए – उन्होंने भी अपनी प्लेट बनाई। हम दोनों साथ बैठकर खाना खाने लगे। वह बीच-बीच में मेरे मुँह में खुद से खाना डालते थे, और कभी अपना मुँह बढ़ाकर मेरे होठों को चूम लेते थे – उन चुम्बनों में अब भी उनके वीर्य का स्वाद था।

खाना खत्म करने के बाद, उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। मैंने अपना सिर उनके कंधे पर रख दिया। उन्होंने मेरे बालों में हाथ फिराया – धीरे-धीरे, प्यार से। मैंने कहा – “तुम बहुत पागल हो। सर पर अंडे फोड़ना… किसी की औकात है?”

वह हँसे – “तुम मेरी हो, मैं तुम्हारा हूँ। हम दोनों के बीच कोई औकात नहीं, सिर्फ प्यार है – और थोड़ी सी पागलपन।”

मैंने उन्हें और कसकर पकड़ लिया। खाना बनाते हुए मुँह चोदना – यह हमारे रिश्ते का एक नया पन्ना था। एक ऐसा पन्ना जिसमें प्यार था, वासना थी, गंदगी थी, और सबसे बढ़कर – एक दूसरे के लिए पूर्ण समर्पण था। उस दिन मैंने सीखा कि सेक्स सिर्फ बेडरूम तक सीमित नहीं है – यह किचन में भी हो सकता है, डाइनिंग टेबल पर भी, जहाँ भी दो दिल एक होना चाहते हैं।

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