वीडियो कॉल से चुदाई – 30 दिन बाद पति ने नीतू की प्यास बुझाई गर्म हिंदी कहानी

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वीडियो कॉल से चुदाई तक का यह गर्म सफर जब 30 दिन बाद नीतू के पति घर लौटे और वीडियो कॉल पर अधूरी रह गई प्यास को एक साथ पूरा किया। इस हिंदी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कैसे नीतू ने अपने पति को अपनी पर्पल नाइटी में बहकाया, कैसे दोनों ने दोपहर से शाम तक एक दूसरे के शरीर को तोड़ा, और कैसे वीडियो कॉल से चुदाई ने उनके 30 दिनों के अलगाव को एक ही दिन में पूरा कर दिया। बूब्स चूसे गए, चूत चाटी गई, 69 पोजीशन में एक दूसरे को पागल किया गया – और सुबह के बजाय शाम होते-होते नीतू के शरीर पर प्यार के निशानों की संख्या पाँच राउंड के बराबर थी। अगर आप वीडियो कॉल से चुदाई जैसी सच्ची, भावुक और बेहद गर्म हिंदी सेक्स कहानियां ढूंढ रहे हैं, तो नीतू की यह दास्तान आपके लिए ही है।

भाग 1: 30 दिन बाद पति के घर आने की खुशखबरी

मेरा नाम नीतू है। शादी को हमें सात साल हो गए थे, लेकिन हमारे बीच का प्यार आज भी पहले दिन जैसा ही था – बल्कि, समय के साथ और गहरा होता जा रहा था। मेरे पति का ट्रांसफरेबल जॉब है, इसलिए वो अक्सर टूर पर चले जाते हैं। कभी दस दिन, कभी पंद्रह दिन, कभी पूरा एक महीना। और हर बार उनके जाने के बाद मेरा शरीर बंजर ज़मीन की तरह सूख जाता था। मैं प्यार की एक बूँद के लिए तरसती थी। मेरी चूत उनके लंड के बिना प्यासी रह जाती थी, मेरे बूब्स उनके हाथों के बिना बेचैन हो जाते थे।

उस दिन रात के ठीक ग्यारह बजे मेरे पति का फोन आया। मैं बेड पर लेटी हुई थी, किताब पढ़ रही थी, और मन ही मन सोच रही थी कि आज तो बात ही नहीं हुई। फोन उठाते ही पति की आवाज़ सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। “नीतू, एक खुशखबरी है,” उन्होंने कहा। मेरा दिल तेज़ धड़कने लगा – ऐसे तेज़ कि मुझे लगा मेरी छाती फट जाएगी। मैंने पूछा, “क्या खुशखबरी है? जल्दी बताओ।” और फिर उन्होंने वो कहा जो मैं सुनना चाहती थी – “मैं पाँच दिन बाद घर आ रहा हूँ।”

मैं झूम उठी। पिछले 30 दिन से वो टूर पर थे। तीस दिन! एक पूरा महीना। मैंने हर रात उनके तकिए को गले लगाकर नींद पूरी की थी। हर सुबह उनके फोटो को देखकर दिन शुरू किया था। मैं उस रात ठीक से सो नहीं पाई। मेरे दिमाग में बस यही चल रहा था – कैसे उनका स्वागत करूँ, कैसे उन्हें सरप्राइज़ दूँ, और सबसे बढ़कर – कैसे उस अलगाव के दर्द को एक ही दिन में भूल जाऊँ। मेरी चूत रात-रात भर सिकुड़ती-फैलती रही, उनके लंड के सपने देखती रही।

भाग 2: वीडियो कॉल पर वो रात – बूब्स दिखाने का मादक दृश्य

उसी रात हमने लैपटॉप पर वीडियो कॉल की। तीन घंटे तक हम बात करते रहे। तीन घंटे! हमने बातों-बातों में एक दूसरे को बताया कि हम कितना तन्हा महसूस कर रहे हैं। मैंने उन्हें बताया कि उनके बिना बिस्तर सूना सूना लगता है। उन्होंने बताया कि होटल के कमरे में उन्हें मेरी याद आती है। धीरे-धीरे हमारी बातें भावनाओं में बहने लगीं। फिर उन्होंने प्यार भरी बातें शुरू कर दीं – “नीतू, तुम्हारी बहुत याद आती है। तुम्हारा चेहरा, तुम्हारी हँसी, तुम्हारे होंठ… और सबसे ज्यादा तुम्हारा शरीर। तुम्हारे बूब्स, तुम्हारी चूत, तुम्हारी गांड – सब कुछ।”

मैं शरमा गई। उन्होंने मेरे जिस्म को देखने की जिद करनी शुरू कर दी। पहले तो मैं मना करने लगी – “वीडियो पर ये सब कैसे करूँ? कितनी शर्म की बात है।” लेकिन मन ही मन में मैं भी बहुत उत्तेजित थी। पिछले तीस दिनों से इस जिस्म की प्यास किसी ने नहीं बुझाई थी। मैं एक सूखी नदी की तरह थी जो बरसात का इंतज़ार कर रही थी। मेरे निप्पल पहले से ही तने हुए थे, मेरी चूत गीली हो चुकी थी – सिर्फ उनकी आवाज़ सुनकर।

मैंने उस रात पर्पल रंग की नाइटी पहनी हुई थी। वह नाइटी स्लीवलेस थी और मेरी जांघों तक आती थी। सिल्की कपड़ा, सामने से नेट का काम – ऐसी नाइटी जो किसी भी पति को पागल कर सकती है। मैं जानती थी कि इस नाइटी में मैं उन्हें दीवाना बना सकती हूँ। उन्होंने बार-बार कहा, “नीतू प्लीज़, कुछ तो दिखाओ। तुम मेरी बीवी हो। क्या शर्म है?” लेकिन मैं हँसते हुए मना करती रही। मैं चाहती थी कि वो और ज्यादा बेकरार हो जाएँ।

फिर मैंने लैपटॉप लेकर बिस्तर पर उल्टी लेटना शुरू कर दिया। लैपटॉप मेरे सामने था और मैं अपने पेट के बल लेटी हुई थी। इस पोजीशन में मेरे बूब्स बेड से दबकर और भी बड़े दिखने लगे थे। मेरी नाइटी से वे बाहर झाँकने लगे थे। मेरे क्लीवेज साफ दिख रहे थे – वह गहरी घाटी जो 30 दिनों से बंद पड़ी थी। मेरे पति की साँसें तेज हो गईं। उनकी आँखों में वो जंगली चमक आ गई जो मैं बहुत पहचानती थी। वो बोले, “नीतू, तुम आज और भी सेक्सी लग रही हो। मेरा लंड तुम्हें देखकर पत्थर जैसा हो गया है।”

भाग 3: अधूरी प्यास और अधूरी रात

अब उन्होंने बहुत विनती की – “बस एक बार, बस एक झलक।” मैंने हँसते हुए कहा, “आप मेरे पति हो, आपकी इतनी इच्छा तो पूरी करनी ही पड़ेगी।” मैंने अपने बाल बगल में किए और नाइटी को थोड़ा सा नीचे किया। मेरी पर्पल रंग की ब्रा मेरे गोरे शरीर पर साफ दिख रही थी। मेरे बूब्स उस ब्रा से बाहर निकलने को बेचैन थे। मेरे पति ने अपना कंट्रोल खो दिया। वो बोले – “बस अब और इंतज़ार नहीं होता। मुझे घर आने दो, मैं तुम्हें नंगा करके कच्चा खा जाऊंगा। तुम्हारे बूब्स चूसूंगा, तुम्हारी चूत चाटूंगा, और तुम्हारी गांड में अपना लंड घुसाऊंगा।”

अब मेरी हालत भी बहुत खराब हो रही थी। मेरी नाइटी पूरी तरह खुल चुकी थी और मेरी ब्रा सिर्फ मेरे निप्पल को ढक रही थी। उसके ऊपर का सब कुछ – मेरे बूब्स का ऊपरी हिस्सा, मेरा क्लीवेज, मेरी गर्दन – सब कुछ साफ दिख रहा था। मेरे पति ने फिर कहा – “नीतू, अपनी नाइटी उतार दो। मुझे तुम्हारे दूध चाहिए।”

मैंने उनकी आज्ञा का पालन किया। मैं रात को ब्रा का हुक खोलकर ही सोती हूँ, इसलिए ब्रा ढीली थी। जैसे ही मैं उल्टी लेटी, मेरी ब्रा गिर गई और मेरे दोनों बूब्स आज़ाद हो गए। वो दो अनमोल रत्न – दूध से भी ज्यादा गोरे, सोने से भी ज्यादा चमकीले – अब साफ दिख रहे थे। मेरे निप्पल गुलाबी और तने हुए थे, ऐसे लग रहे थे जैसे किसी चेरी के फल हों। मेरे पति पागल हो गए। उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए। मैंने स्क्रीन पर देखा – उनका लंड एकदम टाइट था, जैसे अंबुजा सीमेंट से बना हो। उसमें जान थी, वो एकदम मजबूत सरिया लग रहा था। 7 इंच का वो लंड हिल रहा था, झटके मार रहा था – मेरी तरफ।

मैंने अपनी जीभ निकालकर अपने होंठों पर फेरी। मैं उनके लंड को चूसने का सपना देख रही थी। मैंने अपनी जीभ नीचे वाले होंठ पर टच की और धीरे-धीरे लेफ्ट साइड पर फेरने लगी। ये देखते ही उनका लंड हिलने लगा – और फिर हिलाते-हिलाते निकल गया। वो झड़ गए। उनका गाढ़ा सफेद वीर्य स्क्रीन पर दिखा और फिर वो चला गया। उन्होंने “गुड नाइट” कहा और सोने चले गए। मैं बिस्तर पर तड़पती रही, अपने बूब्स खुद सहलाती रही, अपनी चूत में उंगली करती रही, और देर रात तक सो नहीं पाई। मेरी प्यास अधूरी रह गई थी – और वो प्यास अब जहर बन चुकी थी।

भाग 4: सुबह का इंतज़ार और फिर अचानक दरवाजे की घंटी

सुबह जब मेरी आँख खुली, तो मेरा मन ही नहीं कर रहा था कि मैं बेड से उठूँ। मेरे शरीर की प्यास अधूरी थी – 30 दिनों की प्यास जो एक रात में भी पूरी नहीं हुई थी। मैं बिस्तर पर पड़ी-पड़ी सोचती रही – अब ये प्यास मुझसे और सहन नहीं होती। मेरा जिस्म गर्म हो गया था, उसे ठंडा होने के लिए किसी के प्यार की ज़रूरत थी। मेरी चूत अब भी गीली थी – रात के उस सपने से। मेरे निप्पल अब भी तने हुए थे। रात के उस किस्से को सोचकर मुझे गुस्सा भी आ रहा था – कि वो कितने खुदगर्ज़ हैं, अपना मन भरते ही चले गए, और मेरी एक बार भी नहीं सोची। और प्यार भी आ रहा था – कि मैंने अपने बूब्स उन्हें वीडियो पर दिखाए, इतनी बेशर्मी कैसे कर दी?

मैं उठी, नहाई, लंच बनाया, और फिर टीवी देखने लगी। मानसून वेडिंग मूवी आ रही थी। मैं सोफे पर लेटी हुई थी, आलस में, अपनी नाइटी में ही। मैंने अभी तक कपड़े नहीं बदले थे। मेरे बाल बिखरे हुए थे, मेरा चेहरा बिना मेकअप के था – और मैं बिल्कुल वैसी ही दिख रही थी जैसी मैं हूँ। तभी अचानक डोर बेल बजी। मैंने सोचा – कौन होगा इस वक्त? कोई डिलीवरी बॉय होगा या पड़ोसन। मैं बिना कुछ सोचे उठी और दरवाजा खोल दिया।

मेरे पति! वो दरवाजे पर खड़े थे। उनके हाथ में एक सफेद बैग था। उन्होंने ब्लू जींस और सफेद शर्ट पहनी थी – बिल्कुल वैसे ही जैसे मैं उन्हें सबसे ज्यादा पसंद करती हूँ। मेरी आँखें फटी रह गईं। “तुम… तुम तो पाँच दिन बाद आने वाले थे?” मैं हकलाते हुए बोली। वो मुस्कुराए – उस मुस्कान में शरारत थी, प्यार था, और वो जंगली भूख थी जो मैंने कल रात उनकी आँखों में देखी थी। “सरप्राइज़,” उन्होंने कहा। “बिना बताए आ गया। सोचा तुम्हें झटका दूँ। और कल रात जो अधूरा रह गया न… वो आज पूरा करूँगा।”

भाग 5: पति के आते ही शुरू हुआ जुनून (दोपहर 1 बजे)

मैं अभी कुछ कहती, उससे पहले ही उन्होंने बैग एक तरफ रखा, दरवाजा बंद किया, और मुझे अपनी बाँहों में भर लिया। उनका हाथ मेरी कमर पर था, दूसरा हाथ मेरे बालों में। उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो चुम्बन जंगली था – भूखा, बेरहम, और फिर भी प्यार से भरा हुआ। 30 दिनों की भूख एक ही चुम्बन में समा गई। हमारी जीभें एक दूसरे से लड़ने लगीं। मैंने उनकी गर्दन पकड़ ली, उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली। हम एक दूसरे को खाने लगे। मेरी नाइटी उनके हाथों में अटक गई, उनकी शर्ट मेरे हाथों में सिकुड़ गई।

मैंने घड़ी देखी – दोपहर के 1 बज रहे थे। अभी पूरा दिन पड़ा था। मेरे मन में एक ही ख्याल था – आज शाम तक वो मुझसे प्यार करेंगे। और मैं उनकी हर बात मानूंगी। मैं उन्हें अपने शरीर की हर इंच चखाऊंगी, हर छेद उनके लंड से भरवाऊंगी। “बेडरूम में चलते हैं,” मैंने कहा। वो मुझे उठाकर ले गए – ऐसे उठाया जैसे मैं कोई पंख हो। मेरे पैर ज़मीन नहीं छू रहे थे। बेडरूम में उन्होंने मुझे बेड पर पटका। उनकी आँखों में वही जंगली चमक थी – और मेरे अंदर की प्यास अब चरम पर थी।

भाग 6: बूब्स चूसे, चूत चाटी – दोपहर 1:30 बजे से शुरुआत

“पहले मुझे वो दिखाओ जो कल रात दिखाया था,” उन्होंने कहा। मैंने अपनी नाइटी उतार दी – पहले ऊपर वाला हिस्सा, फिर पूरी नाइटी। मेरे अंदर ब्रा नहीं थी। मैं अब ऊपर से पूरी तरह नंगी थी। मेरे 34 साइज के बूब्स सामने थे – गोल, गोरे, सुडौल, और उनके निप्पल पहले से ही तने हुए थे। “हे भगवान,” उन्होंने कहा – और फिर वो मेरे बूब्स पर टूट पड़े जैसे कोई भूखा शेर शिकार पर टूटता है।

उन्होंने मेरे एक बूब्स को अपने मुँह में भर लिया। उनकी जीभ मेरे निप्पल के चारों तरफ घूम रही थी, फिर उसे चूस रही थी, काट रही थी, फिर से चूस रही थी। “आह्ह्ह… जान… जोर से चूसो… 30 दिनों के बाद पहली बार कोई छू रहा है मुझे… तुम्हारी जीभ की कमी थी मुझे…” मैं कराह उठी। उन्होंने मेरा दूसरा बूब्स अपने हाथ में ले लिया और दबाने लगा – इतनी ताकत से कि मुझे अच्छा दर्द हो रहा था। फिर उन्होंने दूसरे बूब्स को भी मुँह में ले लिया। वो बारी-बारी से दोनों बूब्स चूस रहे थे, काट रहे थे, चाट रहे थे। मैं पागल हो रही थी। मेरे निप्पल उनके मुँह में सख्त हो गए थे, जैसे छोटी उंगलियाँ हों।

करीब 30 मिनट तक वो मेरे बूब्स से खेलते रहे। दोपहर के 2 बज गए थे। मेरे निप्पल सूज गए थे, लाल हो गए थे, उन पर दाँतों के निशान बन गए थे। मेरी पूरी छाती उनके प्यार के निशानों से भर गई थी। फिर वो नीचे की तरफ सरके। उन्होंने मेरी पैंटी निकाल दी – एक ही झटके में। मेरी चूत पहले से ही गीली थी – उनके बूब्स चूसने से मेरा रस टपकने लगा था। मेरी चूत बिल्कुल बाल रहित थी, चिकनी और गुलाबी। उन्होंने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरी चूत को बीच से चाटा – ऊपर से नीचे तक, एक ही लंबे स्ट्रोक में। “आह्ह्ह्ह्ह!” मैं चीख उठी – इतनी जोर से कि पूरे घर में गूंज गई। उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी और अंदर-बाहर करने लगे – जैसे कोई लंड चूत को चोद रहा हो। मैंने उनके बाल पकड़ लिए और अपनी चूत पर उनका सिर दबा दिया। “हाँ… वहीं… और चाटो… मेरा सारा रस पी जाओ… मेरी चूत की प्यास बुझाओ…” मैं पागलों की तरह चिल्ला रही थी। मेरी चूत का पानी उनके मुँह में जा रहा था, और वो उसे पी रहे थे – बूंद-बूंद। वीडियो कॉल से चुदाई की यह शुरुआत थी – और यह सिर्फ शुरुआत थी।

भाग 7: 69 पोजीशन और लंड चूसने का खेल – दोपहर 2:30 बजे

मैं उन्हें अपनी चूत चाटने के बाद ऊपर खींच लिया। “अब तुम्हारी बारी है। मैं तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ। 30 दिनों से मैंने इस लंड का सपना देखा है।” वो मेरे ऊपर आ गए – हम 69 पोजीशन में थे। मैंने उनके लंड को अपने हाथ में पकड़ा – 7 इंच लंबा, मोटा, नसों से लदा हुआ, सुपारी बैंगनी और चमकदार। मैंने उसे अपने मुँह में ले लिया। मैंने पहले सुपारी को चूसा – गोल-गोल घुमाकर, फिर उसे दाँतों से हल्के से काटा। फिर मैंने पूरे लंड को अपने गले तक उतारने की कोशिश की। वो घुटने लगे, लेकिन मैं रुकी नहीं। मैं चाहती थी कि उन्हें उतना ही मजा आए जितना मुझे आया था। मैंने उनके लंड को जोर-जोर से चूसा, और साथ ही मैंने अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डाल लीं – खुद को चोद रही थी। उन्होंने भी मेरी चूत चाटना शुरू कर दिया – और इस बार और तेज, और गहरा।

इस पोजीशन में हम करीब 30 मिनट तक रहे। दोपहर के 3 बज गए थे। अब तक मैं एक बार झड़ चुकी थी – उनके मुँह में। मेरी चूत से निकला पानी उन्होंने पी लिया था। और उनका लंड अब भी उतना ही सख्त था – जैसे उन्होंने अभी शुरू ही किया हो। उन्होंने मेरा सारा रस पी लिया था, और मैंने उनके लंड को इतना चूसा था कि वो और सख्त हो गया था, लाल हो गया था, नसें और ज्यादा उभर आई थीं।

भाग 8: डॉगी स्टाइल में चूत चुदाई – दोपहर 3:30 बजे

उन्होंने मुझे पलट दिया। डॉगी स्टाइल में – मेरे हाथ और घुटनों के बल। मैंने अपनी गांड ऊपर उठा दी – जितना हो सके उतना ऊपर। उन्होंने बिना देर किए अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया – एक ही झटके में पूरा। “आह्ह्ह! मर गई! इतना मोटा… इतना गर्म…” मैं चीखी। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। “थप-थप-थप” की आवाज़ें पूरे घर में गूंज रही थीं। मेरी चूत का पानी उनके लंड के साथ बाहर आ रहा था और मेरी जांघों से बह रहा था। मैं अपनी गांड उठा-उठाकर उनके लंड को और अंदर ले रही थी। मैं पीछे मुड़कर देख रही थी – उनका लंड मेरी चूत में जा रहा था और बाहर आ रहा था, लाल, गीला, और तनाव से भरा हुआ।

“आह्ह… जान… और गहरा… और जोर से चोदो… तीस दिनों की प्यास है मेरी… मेरी चूत तुम्हारे लंड के बिना पागल हो गई थी…” मैं चिल्ला रही थी। उन्होंने मेरे स्तनों को पीछे से पकड़ लिया और उन्हें दबाने लगे – मेरे निप्पल उनकी उँगलियों के बीच दब रहे थे। डॉगी स्टाइल में उन्होंने मुझे 45 मिनट तक चोदा। दोपहर के 4:15 बज गए थे। मैं दो बार झड़ चुकी थी – पहली बार तो बस उनके लंड के अंदर आते ही, दूसरी बार 20 मिनट बाद। मेरी चूत का रस मेरी जांघों से बह रहा था, बेड की चादर पूरी तरह भीग चुकी थी। उनका लंड अब भी उतना ही सख्त था – जैसे वो कभी झड़ा ही न हो।

भाग 9: काउगर्ल पोजीशन में पति के ऊपर सवारी – शाम 5 बजे

“अब बस। अब मैं चोदूंगी। तुम लेट जाओ।” वो मेरे नीचे लेट गए। मैं उनके ऊपर चढ़ गई – काउगर्ल पोजीशन में। मैंने उनके लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत में डाल लिया – धीरे-धीरे, ऊपर से नीचे तक। फिर मैंने अपने पैर ज़मीन पर टिका दिए और अपनी गांड ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया। मेरे बूब्स उनके चेहरे के सामने थिरक रहे थे – उन्होंने उन्हें अपने मुँह में ले लिया। मैं जितना तेज ऊपर-नीचे हो रही थी, उतना ही वो मेरे बूब्स चूस रहे थे। “हाँ… जान… मैं तुम्हें चोद रही हूँ… देखो कैसे तुम्हारी बीवी तुम्हारे लंड पर सवारी कर रही है… क्या तुम्हें मजा आ रहा है?” मैं पागल हो रही थी।

मैंने उनके कंधे पकड़ लिए और अपनी गांड को और तेजी से ऊपर-नीचे किया। हर बार जब मैं नीचे आती, मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अंदर तक चला जाता। मैं अपने बालों को पीछे की तरफ झटक रही थी, अपने निप्पल सख्त हो चुके थे, मेरा पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था, और मैं बस “हाँ-हाँ-हाँ” कर रही थी। मैं एक बार फिर झड़ गई – उनके ऊपर। मेरी चूत का रस उनके पेट पर गिरा, उनकी छाती पर गिरा, उनके मुँह पर भी कुछ बूंदें गिरीं। इस पोजीशन में हम 40 मिनट तक रहे। शाम के 5:40 बज गए थे। मैं तीन बार झड़ चुकी थी। मैं थक कर उनके ऊपर लेट गई, हाँफ रही थी, मेरी साँसें नहीं आ रही थीं।

भाग 10: मिशनरी में चौथा राउंड और चूत में वीर्य – शाम 6:30 बजे

उन्होंने मुझे नीचे लिटा दिया – मिशनरी पोजीशन में। उन्होंने मेरे दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। इस बार वो तेज नहीं थे – बल्कि धीरे-धीरे, प्यार से, गहरे धक्के मार रहे थे। हर धक्के के साथ वो मेरे होंठ चूम रहे थे। हर धक्के के साथ वो मेरी आँखों में देख रहे थे – प्यार से, दीवानगी से। हम दोनों के शरीर पसीने से भीग चुके थे। मेरे बाल बिखर गए थे, मेरा मेकअप स्मज हो गया था, उनके शरीर पर मेरे नाखूनों के गहरे निशान थे। मैंने उनकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए थे – खून के निशान बन गए थे।

“अब झड़ने वाला हूँ,” उन्होंने कहा – उनकी आवाज़ में घरघराहट थी। “कहाँ डालूँ?”

“चूत में,” मैंने कहा – मैं भी हाँफ रही थी। “मेरी चूत में डालो। मैं तुम्हारा वीर्य अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम्हारा बीज मेरे अंदर जाए, मुझे गर्म करे, मुझे तुम्हारा बनाए।”

उन्होंने और तेज धक्के मारना शुरू कर दिए। उनका लंड मेरी चूत में जोर-जोर से अन्दर-बाहर हो रहा था – जैसे कोई पिस्टन मशीन हो। मैंने उनकी गर्दन पकड़ ली और उन्हें अपने से लगा लिया। “आह्ह… आ रहा हूँ…” उन्होंने कहा। और फिर उन्होंने अपना सारा गर्म, गाढ़ा, सफेद वीर्य मेरी चूत के अंदर निकाल दिया। मैंने उसकी गर्माहट को अपनी चूत की दीवारों पर महसूस किया – भरते हुए, फैलते हुए, मुझे अंदर से गर्म करते हुए। “आह्ह्ह्ह्ह!” मैं चीखते हुए झड़ गई – मेरा चौथा ऑर्गेजम। उनका वीर्य मेरी चूत में गहराई तक जा रहा था, मेरे अंदर की हर कोशिका को भर रहा था। मैंने उन्हें अपने अंदर महसूस किया – गर्म, गीला, सुखद। मेरी चूत की दीवारें उनके लंड को आखिरी बार पकड़ रही थीं, जैसे उसे जाने न देना चाहती हों। हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे – हमारे शरीर एक साथ काँपे, हमारी साँसें एक साथ रुकीं, और फिर हम एक साथ ढीले पड़ गए। वो मेरे ऊपर गिर पड़े, हाँफ रहे थे, और मैं उनकी बाँहों में बंद थी – थकी हुई, संतुष्ट, और पूरी तरह उनकी।

भाग 11: शाम 7:30 बजे – पाँचवाँ राउंड और पूरी हुई प्यास

हम 20 मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे – एक दूसरे के शरीर से चिपके हुए, एक दूसरे के पसीने में सने हुए। मेरी चूत से उनका वीर्य बाहर बह रहा था और मेरी जांघों पर सफेद धारियाँ बना रहा था। मैंने उनकी छाती पर अपना चेहरा रखा और उनके दिल की धड़कन सुनी – धड़क-धड़क-धड़क, प्यार की धुन। फिर मैंने उनके निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। उनका शरीर तुरंत अकड़ गया। मैंने अपना हाथ नीचे बढ़ाया और उनके लंड को पकड़ा – वो फिर से खड़ा हो रहा था। चौथा राउंड खत्म हुए अभी 20 मिनट ही हुए थे, और वो फिर से तैयार थे। “तुम्हारा लंड तो कभी थकता ही नहीं,” मैंने हँसते हुए कहा। “तुम्हारे लिए तो कभी नहीं,” उन्होंने कहा – और फिर उन्होंने मुझे पलट दिया।

इस बार उन्होंने मेरी गांड में लंड डाला। मैंने पहले ही तेल लगा रखा था – मैं जानती थी कि आज उन्हें मेरी गांड भी चाहिए। उन्होंने धीरे-धीरे अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रखा, मेरे चूतड़ फैलाए, और धीरे से अंदर धकेला। “आह्ह्ह… जान… धीरे… थोड़ा धीरे…” मैंने कहा। उन्होंने रुका – मुझे एडजस्ट होने दिया। 30 सेकंड बाद मैंने अपनी गांड उठाई – यह संकेत था कि मैं तैयार हूँ। उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया – एक बार में नहीं, धीरे-धीरे, प्यार से। “मेरी प्यारी बीवी… तुम्हारी गांड बहुत टाइट है… बहुत गर्म है…” उन्होंने कहा। उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मेरी गांड चोदना शुरू कर दिया – धीरे-धीरे, फिर तेज। मैं चादर को अपने मुँह में दबा रही थी ताकि चीख न निकले। मेरी गांड उनके लंड को पकड़ रही थी, उसे अंदर खींच रही थी, उसे जाने नहीं दे रही थी।

हमने 40 मिनट तक गांड चोदी। शाम के 7:30 बज गए थे – बाहर अंधेरा होने लगा था। मैंने अपनी गांड उठा-उठाकर उनके लंड को अंदर लिया। मैं पागलों की तरह चीख रही थी – “हाँ… गांड मारो… मेरी गांड मारो… और गहरा… आह्ह्ह…” मैं पाँचवीं बार झड़ने वाली थी। उन्होंने और तेज किया। और फिर – मैं झड़ गई। मेरा पाँचवाँ ऑर्गेजम। मेरा पूरा शरीर काँप गया, मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया, मैं बेहोश होने के कगार पर थी। उन्होंने भी उसी समय अपना वीर्य मेरी गांड के अंदर निकाल दिया – गर्म, गाढ़ा, और भरपूर। मैंने उसे अपनी गांड के अंदर महसूस किया – और उस पल, वीडियो कॉल से चुदाई की जो प्यास 30 दिनों से मेरे अंदर जल रही थी, वो पूरी तरह बुझ गई। हम एक दूसरे से लिपट गए, थके हुए, संतुष्ट, और एक दूसरे में खोए हुए। बाहर शाम ढल चुकी थी – और हमने पूरा दिन प्यार में बिताया था। पाँच राउंड। तीन पोजीशन। दो छेद। एक प्यार। और अब कोई अलगाव नहीं – बस हम, हमेशा के लिए।

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