सुहागरात की पहली रात में चुदाई: पति का अनोखा अंदाज

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सुहागरात की पहली रात में चुदाई: पति का अनोखा अंदाज – मेरा नाम बबीता है। मैं अभी-अभी जवान हुई हूँ। मैं एक अमीर घराने से हूँ। मेरे पापा डॉक्टर हैं। मैं बहुत ही गोरी हूँ। लड़के मुझे देखते ही फिदा हो जाते हैं। मेरा बदन बहुत ही रसीला है। मेरे लिप्स तो एकदम गुलाब हैं। चूचियाँ तो खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी हैं। मेरी चूत भी बहुत लाजवाब है। पूरा रस मैंने अपने होने वाले पति के लिए बचाकर रखा था। मेरी शादी धनंजय से हुई। वो रात मुझे आज तक नहीं भूली, जिस रात सैयां जी ने मेरा पहली बार काम लगाया था। उनका अंदाज ही कुछ और था—उन्होंने मुझे अपनी गाय बना लिया और फिर मेरी चूत और गांड दोनों चोद डाली। पढ़िए मेरी सुहागरात की यह अनोखी और सच्ची कहानी।

भाग 1: शादी से पहले – सपने और इंतजार

मेरा नाम बबीता है। मैं अभी-अभी जवान हुई हूँ। मेरी उम्र अभी बीस साल की ही थी जब मेरे घर वाले मेरी शादी के लिए लड़का ढूंढने लगे। मैं एक अमीर घराने से हूँ। मेरे पापा शहर के जाने-माने डॉक्टर हैं और हमारे घर में कोई कमी नहीं है। मैं बहुत ही गोरी हूँ। मेरा रंग दूध की तरह सफेद है और उस पर मेरे गुलाबी गाल—लड़के मुझे देखते ही फिदा हो जाते हैं। मेरा बदन बहुत ही रसीला और भरा हुआ है। मेरे लिप्स तो एकदम गुलाब की पंखुड़ियों की तरह नर्म और गुलाबी हैं। मेरी चूचियाँ तो खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी और गोल-गोल हैं। जब मैं चलती हूँ तो ये ऐसे उछलती हैं जैसे किसी को बुला रही हों। मेरी कमर पतली है और मेरी गांड—हाय, मेरी गांड तो जैसे किसी ने गढ़कर बनाई हो। मेरी चूत भी बहुत लाजवाब है। मैंने अपनी चूत का पूरा रस, अपनी पूरी जवानी, अपने होने वाले पति के लिए बचाकर रखा था। मैं चाहती थी कि जब मेरी शादी हो, तो मैं अपने पति को अपना पूरा शरीर सौंप दूं और वो मुझसे खुश हो जाए।

मेरी उम्र भी अब शादी की हो चुकी थी। मेरे सैयां जी के साथ सुहागरात का अवसर मुझे मिलने वाला था। मैं बहुत ही खुश थी। मैं हर रात सोने से पहले सोचती थी कि मेरा पति कैसा होगा, वो मेरे साथ कैसे पेश आएगा, और हमारी पहली रात कैसी होगी। मैंने अपनी सहेलियों से सुना था कि पहली रात बहुत दर्द होता है, लेकिन साथ ही बहुत मजा भी आता है। मैं डरी हुई भी थी और उत्साहित भी। वो रात मुझे आज तक नहीं भूली, जिस रात सैयां जी ने मेरा पहली बार काम लगाया था।

दोस्तों, ये बात 2013 की है। मेरे घर वाले मेरे लिए रिश्ता ढूंढ रहे थे। मैं भी हर लड़की की तरह अपने ख्वाबों को सजाकर रखा था—अपने होने वाले सैयां जी के साथ। मैं सोचती थी कि मेरा पति कैसा होगा, क्या वो मुझे प्यार करेगा, क्या वो मेरी इज्जत करेगा। और फिर वो समय आया जब मेरी शादी तय हो गई। मेरा होने वाला पति किसी हीरो की तरह खूबसूरत था। जब मैंने उसकी फोटो देखी, तो मैं तो बस देखती ही रह गई। उसकी पर्सनालिटी पर तो मैं फोटो में ही देखकर फिदा हो चुकी थी। उसका नाम था धनंजय। नाम भी किसी राजा जैसा और वो दिखने में भी किसी राजकुमार से कम नहीं था। मैं तो उसे पाकर फूली नहीं समा रही थी। मैंने भगवान को लाख-लाख शुक्रिया कहा कि मुझे ऐसा पति मिला।

हमारी शादी बड़ी धूमधाम से हुई। पूरा शहर हमारी शादी की चर्चा कर रहा था। सुबह-सुबह मैं उनके घर विदा होकर आ गई। सासू माँ ने और अन्य मेहमानों ने मेरा भव्य स्वागत किया। मुझे फूलों से लाद दिया गया। मैं बहुत ही खुश थी। लेकिन मेरे मन में एक अलग ही बेचैनी थी। आज मैं चुदने वाली थी। आज मुझे जबरदस्त लंड मिलेगा। मैं उसे खाने को बेकरार हो रही थी। मेरी चूत में खुजली हो रही थी और मैं बस यही सोच रही थी कि कब रात होगी और कब मैं अपने पति के साथ अकेली होऊंगी।

फिर वो रात भी आ गई। जिसका हर चूत को इंतजार होता है। जिस रात बीवी को अपने पति के लंड का दर्शन होता है। मैं सज-धजकर अपने रूम में बैठी थी। मैंने अपनी सबसे खूबसूरत साड़ी पहनी थी, गहनों से लदी हुई थी, और मेरी मांग में सिंदूर चमक रहा था। मैं सुहागरात की सेज पर परियों सी सजी बैठी थी। अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार कर रही थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। हर आहट पर मुझे लगता कि वो आ गए।

और फिर दरवाजा खुला। धनंजय आए। वो शेरवानी पहने हुए थे और बहुत ही हैंडसम लग रहे थे। वो मेरे पास आकर बैठ गए और मुझसे जमाने भर की बातें करने लगे। मेरे बारे में पूछा, अपने बारे में बताया, हमारी पहली मुलाकात के बारे में बात की। बातों ही बातों में वो रोमांटिक होने लगे। उनकी आँखें मेरी आँखों में थीं और उनके होंठ मुस्कुरा रहे थे। लेकिन मुझे तो इंतजार था कि वो कब अपना लंड मुझे दिखाएं। मगर मैं कैसे उनसे कहूँ कि मुझे चुदने की बेचैनी हो रही है। मैं बहुत शर्मीली थी और अपने पति के सामने अपनी इच्छा जाहिर करना मुझे बहुत मुश्किल लग रहा था।

भाग 2: पहला स्पर्श और अनोखी शुरुआत

मैंने बहुत देर तक सोचा कि क्या करूँ। अचानक मैंने एक आइडिया सोचा। मैंने धीरे-धीरे अपने गहने उतारने शुरू किए और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे खिसकाकर अपने सीने से हटा दिया। ऐसा करते ही धनंजय मेरी तरफ आकर्षित होने लगे। मेरे सफेद बड़े-बड़े खरबूजे देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वो बिना पलक झपकाए मेरी चूचियों को ताड़े जा रहे थे। उनकी नजरों में एक जंगली भूख थी, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देख रहा हो।

उन्होंने मुझे बिना कुछ कहे उठाकर अपनी गोद में घसीट लिया और मेरे होंठों से अपने होंठ चिपकाकर मेरी सारी लिपस्टिक छुड़ा डाली। मेरे होंठों के लिप लाइनर को चूस लिया। वो मुझे ऐसे चूम रहे थे जैसे मैं कोई मिठाई हूँ और वो मुझे पूरा खा जाना चाहते हैं। अब मेरी देसी लुक उनसे भी देखी नहीं जा रही थी। मैं अपना होश खो बैठी थी। मैं भी पागल सी हो गई और अपने हाथ उनके पूरे शरीर पर फिराने लगी। उनकी चौड़ी छाती, उनके मजबूत कंधे, उनकी पीठ—मैं सब कुछ छू रही थी और महसूस कर रही थी। धनंजय ने कब एक-एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए, मुझे तो पता भी नहीं चला कि उन्होंने कब का मुझे नंगी कर दिया था। मैं उनकी गोद में पूरी तरह से नंगी बैठी थी और वो मुझे चूम रहे थे।

मैं तो उनके होंठों में ही गुम थी कि अचानक से एक ‘चटाक’ की आवाज के साथ मेरी गांड में चोट सी महसूस हुई। मैं चौंक गई। मैंने सकपकाकर उनके होंठ छोड़ दिए और उनकी तरफ बुरी निगाहों से देखा। तो वो मुस्कुरा रहे थे। बोले, “क्या करूं बबीता, आदत से मजबूर हूँ। मुझे तुम्हारी गांड बहुत ही जबरदस्त लगी तो मार दिया। मुझे सेक्स करते समय कुछ भी होश नहीं रहता। मैं क्या कर रहा हूँ, इस बात का मुझे पता ही नहीं चलता।”

मैंने भी मुस्कुरा दिया और कहा, “कोई बात नहीं। मैं भी तुम्हारी तरह हूँ। मुझे भी कुछ होश नहीं रहता।”

तभी मेरी गांड में कुछ लंबा-मोटा सा महसूस हुआ। मैंने अपने ऊपर ध्यान दिया तो पता चला कि मैं उनके ऊपर नंगी बैठी हूँ। उनका लंड ही मेरी गांड में चुभ रहा था। वो उनकी पैंट के अंदर से ही मुझे टक्कर मार रहा था। मैं उनकी गर्दन पर अपना हाथ टिकाकर बैठी हुई थी। मैं पूरी नंगी, अपने पतिदेव धनंजय की गोद में किसी बच्चे की तरह बैठी हुई थी। उन्होंने कुरता-पायजामा अभी तक पहन रखा था। उनके कसरती बदन की मजबूती बाहर से ही महसूस हो रही थी। मगर उनका लंड देखने की चाहत मेरे मन में अभी भी बरकरार थी।

हम दोनों खूब सेक्सी-सेक्सी बातें करने लगे। वो मेरी चूचियों के निप्पल को पकड़-पकड़कर खींचते हुए मुझे गर्म कर रहे थे। मैं “अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारियाँ भर रही थी। उनकी उंगलियाँ मेरे निप्पलों को मरोड़ रही थीं और मेरा पूरा शरीर झनझना रहा था। मेरा पेट खिंचते ही सिकुड़ जाता। मेरा दिल धक-धक कर रहा था। मेरी साँसें तेज होने लगीं।

मैं उनकी गोद से उतरने ही वाली थी कि उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और बोले, “बबीता! तुम मुझे एकदम देसी गाय की तरह लगती हो। एकदम मासूम सी, चाहे जहाँ हाथ लगाओ, कोई विरोध नहीं करती।”

मैंने भी कहा, “और तुम मुझे देसी साँड़ के जैसे लग रहे हो। पीछे पड़े हो। हर पल मेरे गुप्तांगों को ही छूकर मजा ले रहे हो।”

धनंजय हंस दिए। उन्होंने मुझे कसकर जकड़ लिया। मुझे अपनी छाती से चिपकाते हुए फिर एक बार मेरे होंठों को चूसने लगे। इतना जोश तो मैंने पहले कभी किसी में नहीं देखा था। वो जोश में आकर मेरे होंठों को ही काटने लगे। मैं तड़पती हुई “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की मदमस्त आवाज निकाल रही थी।

धीरे-धीरे उनके होंठ मेरे शरीर के नीचे के अंगों की तरफ बढ़ने लगे। वो मेरी चूचियों को पकड़कर मींजने और सहलाने लगे। उन्होंने अपना मुँह मेरी गोरी-गोरी चूचियों के काले-काले निप्पल पर लगा दिया। धनंजय बछड़े की तरह मेरे निप्पल को खींच-खींचकर मेरा दूध पी रहे थे। उनकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी और वो उसे चूस-चूसकर ऐसे आवाजें निकाल रहे थे जैसे सच में कोई बच्चा दूध पी रहा हो। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

कुछ देर तक पीने के बाद वो मुझे अपनी गोद से उतारकर बिस्तर पर ही खड़े हो गए और अपना कुरता उतारने लगे। फिर बनियान और पायजामा भी उतार दिया। अब वो सिर्फ अपने अंडरवियर में थे। उनका लंड उनके अंडरवियर में एक तंबू की तरह खड़ा था। वो बोले, “लो जी, अब तुम्हारी बारी आ गई।”

भाग 3: काला साँप और गाय का खेल

मैं उनके बड़े से मोटे लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही देखकर डर गई। मेरा सर उनकी जाँघों के पास था। धनंजय अपना लंड चूसने और सहलाकर मुठ मारने को कह रहे थे। मैं बोली, “आज नहीं। ये सब कल से किया जाएगा।”

लेकिन उन्होंने बिना कुछ कहे मेरा सर पकड़कर अपने लंड पर, अंडरवियर के ऊपर से ही रगड़ना चालू कर दिया। वो बहुत ही जोश में दिख रहे थे। मेरे दिमाग में अजीब-अजीब हलचल होने लगी। मैं भी मदहोश सी होने लगी। उनका यह जबरदस्ती भरा प्यार मुझे अंदर तक झकझोर रहा था।

मैंने उनका अंडरवियर पकड़कर नीचे किया तो मेरे होश उड़ गए। बाप रे! इतना मोटा काला लंड करीब 5 इंच का तो बिना खड़ा हुआ ही था। ये खड़ा होता तो कितना बड़ा हो जाता, यही सोचकर मेरा दिमाग खराब हो रहा था। मेरे पति और मेरा दोनों का रंग एकदम गोरा है। मगर पता नहीं क्यों, उनका लंड एकदम भुजंग काला था। वो बिल्कुल काले साँप की तरह लग रहा था। मैं उनका लौड़ा देखकर हल्के से चिल्ला पड़ी, “हे भगवान! ये क्या है? इतना बड़ा लंड तो किसी का जल्दी खड़ा होने पर भी नहीं होता!”

धनंजय मन ही मन खुश हो रहे थे। वो हंसे, मगर बोले कुछ नहीं और मेरा सर पकड़कर अपने लंड को मेरे होंठों पर रगड़ने लगे। मैंने जोर लगाने की कोशिश की, मगर वो मुझसे ज्यादा ताकतवर थे। मेरे होंठ न चाहते हुए भी उनके काले लंड पर घूम रहे थे। कुछ ही देर में मैं विरोध करते-करते थक गई थी। फिर मुझे पता नहीं क्यों, वो काला साँप जैसा लंड बहुत ही मेरे मन को भाने लगा। कुछ देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा, मैंने भी जोर लगाना बंद कर दिया।

तभी धनंजय ने मेरे बालों की चोटी को जोर से खींचा तो मेरे मुँह से ‘आह’ निकलते ही मेरा मुँह खुल गया। जैसे ही मेरा मुँह खुला, वैसे ही उन्होंने अपना लंड अंदर करके मुझे चुसाना शुरू कर दिया। मुझे उनका लंड मुँह में रखकर बहुत बुरा लग रहा था। मुझे लगने लगा कि उल्टी हो जाएगी। मेरा पूरा मुँह उनके लंड से भर गया था और मेरी सांसें रुक रही थीं।

तभी धनंजय के लंड ने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया। उसका साइज बढ़ने लगा। मेरे छोटे से मुँह में उनका बड़ा लंड बड़ा होकर मुझे तड़पाने लगा। मुझे लगा कि मेरा मुँह फट जाएगा। मैं छटपटा रही थी। हाथ-पाँव पटकने लगी। मगर उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा। वो मेरी तरफ ध्यान ही नहीं दे रहे थे। अब मुझे साफ-साफ महसूस हुआ कि उनका लंड मेरे गले से होता हुआ मेरे सीने तक चला गया है। मेरी आँखों से आँसुओं की नदी बह पड़ी। मैं उनकी जाँघों पर मर रही थी। अपने नाखून उनकी जाँघों में गड़ा रही थी। मगर उन पर कोई असर नहीं हुआ। वो बेदर्दी से मुझे दर्द देकर मार ही डालेंगे। मेरा सांस लेना दुष्वार हो गया। वो मेरा सर दबाए हुए थे। मैं कुछ बोल भी नहीं सकती थी।

मैंने हाथ जोड़ लिए और उनसे लंड निकालने के लिए बड़ी ही नम्रता वाली नजरों से देखा। मेरी आँखों के आगे अब तक अँधेरा छाने लगा था। तभी वो अचानक मुझे छोड़ दिया। बैठकर उन्होंने मेरी गांड पर जमकर एक तमाचा मारा। मैं उछल पड़ी।

वो बोले, “क्यों, कैसा लगा?”

मैं रो रही थी। वो कहने लगे, “अब मानोगी न मेरी बात?”

मैंने अपना सर हिला दिया। मैं बिस्तर पर धड़ाम से गिर पड़ी। मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा था, मैं दमे के मरीज की तरह हाँफ रही थी। इतने में पति बोले, “अब तू पूरी तरह से गाय लग रही है।”

वो मेरे दोनों हाथ फैलाकर उनके ऊपर अपने घुटने रखकर मेरे सीने पर बैठ गए। कहने लगे, “इसे अब चाट। जैसे तू गाय अपने बछड़े को चाटती है। चाट साली चाट….”

अब मेरा दिमाग कुछ समझने के काबिल हुआ था। तो उनका सांडों वाला लंड देखकर मेरी आँखें चौंधिया गईं। कहीं मैं सपना तो नहीं देख रही। मैंने अपनी आँखों को मलते हुए उनका लंड देखा। करीब 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा काला लौकी जैसा लंड मेरे मुँह पर रखा हुआ था। मैं लंड देखकर मेरी सिट्टी-पिट्टी गुम थी। मेरे पति का लंड मेरे मुँह पर रखा हुआ था, मैं इतने बड़े लंड को देखकर हैरान थी।

मेरे पति बोले, “चाट इसे जल्दी।”

मैंने जल्दी से अपनी जीभ निकालकर लंड चाटना शुरू कर दिया। वो बोले, “हाँ, अब जाकर तू पूरी तरह से गाय बनी है।”

मैं रोती जा रही थी और लंड चाटती जा रही थी। मेरे दोनों हाथ उनके पैरों के नीचे दबे हुए थे। मेरे गोरे गालों पर उनका भारी लंड मुक्के की तरह पड़ रहा था। लगभग पाँच मिनट बाद वो उठे और मुझे उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया। अपने शेव किए हुए चेहरे से मेरी चूचियों पर मसाज करने लगे। कहीं-कहीं की दाढ़ियाँ मेरी चूचियों पर चुभ रही थीं। उनका लंड ठीक मेरी चूत के नीचे था और मैं उसकी गर्माहट को अपनी चूत पर महसूस कर पा रही थी।

भाग 4: सुहागरात की पहली रात में चूत फाड़ चुदाई और गांड की बारी

उन्होंने मेरी दोनों टाँगों को खोलकर जोर का झटका मारा। मैं उछल पड़ी। जोर-जोर से “आआआअ ह्हह् हह …..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई..अई..अई…..अई..मम्मी….” चिल्लाने लगी। उनके लंड का टोपा मेरी चूत में जाकर फंस गया। वो और भी धक्का मार-मारकर मेरी चूत में डाल-डालकर निकालने लगे। मैं दर्द से तड़प रही थी। लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो मेरी चूत की फड़ाई में लगे हुए थे। मुझे लग रहा था किसी ने लोहे का मोटा रॉड गर्म करके मेरी चूत में डाल दिया हो। मैं भी चूत के दर्द को भूलकर चुदाई करवा रही थी।

अचानक उनका मोटा काला लंड मेरी चूत में हलचल मचाने लगा। वो मुझे किसी कुत्ते की तरह जल्दी-जल्दी चोदने लगे। सैयां जी की ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली थी। वो ब्रेक मारने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उनकी स्पीड की रगड़ से मैं बहुत परेशान हो गई थी। मैं दर्द से “उ उ उ उ उ……अ अ अ अ अ आ आ आ आ… सी सी सी सी….. ऊँ— ऊँ… ऊँ….” की आवाज के साथ अपनी चूत फड़वा रही थी। वो मेरी गांड पर मार-मारकर मुझे भी जोश दिला रहे थे। मेरी चूत का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा। मैं उसे महसूस करने लगी।

अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा। मैं भी अपनी चूत को उठाकर चुदवाने लगी। वो “एंह…एंह” करके मेरी चूत में अपना लंड हचक-हचककर पेल रहे थे। इतनी जोर की चुदाई ने तो मेरी जान ही निकाल दी। मुझे उसका लंड अब अच्छा लगने लगा। मैं उस लंड को खाकर मन ही मन खुश होने लगी। उन्होंने अपने बल का प्रयोग करके मुझे अपनी गोद में उठाकर चोदना शुरू कर दिया। मैं भी उनका गला पकड़कर उछल-उछलकर चुदवा रही थी। वो मेरी गांड पर हाथ मार-मारकर मुझे उछाल-उछालकर चोद रहे थे।

कुछ देर बाद लंड की रगड़ मेरी चूत न सह सकी और उसने अपनी सफेद मलाई निकाल दी। मैं झड़ गई। मेरा पूरा शरीर काँपने लगा और मैं एक जोरदार चीख के साथ उनकी गोद में ढेर हो गई। वो मेरी चूत को मलाई के साथ ही चोदने लगे। कुछ देर में उन्होंने मुझसे मेरी गांड चोदने को कहा। मैं डर से हाँ करके बैठ गई। उन्होंने मुझे अपने खड़े लंड को गांड में डालकर उस पर ऊपर-नीचे होने को कहा। मैं जैसा वो बोले, करने लगी। उनका मोटा घोड़े जैसा काला लंड अपनी गांड में घुसाकर ऊपर-नीचे होने लगी। जोर-जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज के साथ मैं अपनी गांड खुद ही चुदवा रही थी। मैंने भी स्पीड बढ़ाई, लेकिन इस बार वो भी जवाब दे गए। उनका लंड माल निकालने वाला था।

सारा माल धनंजय ने मेरी गांड में ही डाल दिया। मैं थक गई थी। मैं बिस्तर पर गिर पड़ी। वो हँसते हुए मेरे ऊपर अपना पैर रखकर मेरी चूचियों को दबाने लगे। उस दिन की चुदाई ने तो सब कुछ यादगार बना दिया। मेरे पति धनंजय ने मुझे पहले तो अपनी गाय बनाकर मेरा मुँह चोदा, फिर मेरी चूत फाड़ी, और आखिर में मेरी गांड में अपना पूरा माल डाल दिया। मैं आज भी उस लंड से खूब खेलती हूँ और हमारी सेक्स लाइफ बहुत ही शानदार चल रही है। मेरे पति का अंदाज वाकई अनोखा था और आज भी है। वो मुझे कभी गाय बना लेते हैं, तो कभी कुतिया। कभी प्यार से चोदते हैं, तो कभी बेरहमी से। लेकिन मुझे उनका हर अंदाज पसंद है। उम्मीद करती हूँ कि आपको मेरी यह कहानी पसंद आई होगी।

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