मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक भारतीय पत्नी अपने पति के लंड की दीवानी हो, हर वक्त उसे अपने मुँह में रखना चाहे, उसका सारा वीर्य और पेशाब दोनों पी जाए, और रात को 69 पोज़िशन में ही सोए, तो वो रिश्ता कैसा होता है? यह हिंदी सेक्स कहानी यश और ऋचा की है – बिहार से बेंगलुरु आकर बसा एक कपल, जिनकी ज़िंदगी सिर्फ और सिर्फ लंड की पूजा, डीप-थ्रोट, पेशाब पीने और 69 में सोने से भरी है। यश अपनी पत्नी का सिर अपनी जाँघों में जकड़ लेता है, उसका गला चोदता है, और रात को पेशाब भी उसी के मुँह में करता है। और ऋचा… ऋचा को ये सब पसंद है, क्योंकि वो अपने पति से बेइंतहा प्यार करती है। अगर आपको डीप-थ्रोट, फेस-फकिंग, 69 पोज़िशन, पेशाब पीने और गहरे समर्पण वाली हिंदी सेक्स कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ सिर्फ आपके लिए है।
भाग 1: मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – हमारी लव स्टोरी और बेंगलुरु की नई ज़िंदगी
मेरा नाम यश है। यश कुमार। मैं बिहार का रहने वाला हूँ – पटना के पास का एक छोटा सा कस्बा, जहाँ खेत, आम के बगीचे और गंगा की सहायक नदियाँ हैं। बचपन में मैं उन्हीं खेतों में भागा करता था, आम के बगीचों में चोरी-चोरी आम तोड़ता था, और नदी किनारे दोस्तों के साथ घंटों बिताता था। मेरा परिवार साधारण था – पिता जी खेती करते थे, माँ घर संभालती थीं। और मैं… मैं पढ़ाई करके आगे बढ़ना चाहता था। इसलिए मैंने मेहनत की, अच्छे नंबरों से इंजीनियरिंग की, और फिर बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में नौकरी पा ली।
मेरी पत्नी का नाम ऋचा है। ऋचा कुमारी। वो बिहार की ही है – गया ज़िले से। उसका परिवार भी साधारण था – पिता जी टीचर थे, माँ गृहिणी। ऋचा ने भी पढ़ाई में मेहनत की और कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। फिर उसने बेंगलुरु की ही एक अकाउंटिंग फर्म में नौकरी पा ली।
हमारी शादी अरेंज मैरिज थी – हमारे परिवारों ने रिश्ता तय किया था। लेकिन जब मैंने ऋचा को पहली बार देखा, तो मुझे लगा कि भगवान ने मेरी सारी मेहनत का फल मुझे दे दिया है। वो बहुत खूबसूरत थी – गोरी, सुडौल, और बहुत प्यारी सी। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी थीं, उसकी मुस्कान दिल को छू जाने वाली थी, और उसके शरीर की बनावट ऐसी थी जैसे किसी मूर्तिकार ने बड़ी मेहनत से गढ़ा हो।
और जब मुझे पता चला कि ऋचा को भी मैं पसंद आ गया हूँ, तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।
अब हम बिहार छोड़कर बेंगलुरु में रहते हैं – सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया, जहाँ सुबह की शुरुआत फिल्टर कॉफी से होती है, और शाम को एमजी रोड पर ट्रैफिक जाम रहता है। हम बेंगलुरु के कोरमंगला इलाके में रहते हैं – एक अच्छा सा 2BHK फ्लैट, बारहवीं मंज़िल पर। बालकनी से पूरे शहर की रोशनियाँ दिखती हैं। रात को, जब हम बालकनी में खड़े होते हैं, तो दूर-दूर तक फैली रोशनियाँ किसी तारों भरे आसमान की तरह लगती हैं।
मैं एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ, और ऋचा एक अकाउंटिंग फर्म में काम करती है। दिन में हम दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं – मेरी मीटिंग्स चलती हैं, उसकी एक्सेल शीट्स चलती हैं। मैं सुबह नौ बजे ऑफिस निकल जाता हूँ, और ऋचा साढ़े नौ बजे। हम शाम को सात-साढ़े सात बजे तक घर लौटते हैं। और फिर… फिर शुरू होती है हमारी असली ज़िंदगी।
शादी से पहले, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऋचा जैसी पत्नी मिलेगी। वो बहुत शर्मीली थी – शादी के शुरुआती दिनों में तो मुझसे आँखें भी नहीं मिलाती थी। सुहागरात वाली रात को, वो बिस्तर के कोने में सिकुड़कर बैठी रही – घूँघट में, काँपती हुई। मैंने उससे कहा था, “ऋचा, डरो मत। मैं तुम्हारा पति हूँ। तुम्हारा ख्याल रखूँगा।”
और मैंने वैसा ही किया। पहले कुछ महीनों तक, मैंने उसके साथ बहुत धीरे-धीरे, बहुत प्यार से संबंध बनाए। कोई जल्दबाज़ी नहीं, कोई ज़बरदस्ती नहीं। बस प्यार। मैं उसे चूमता – माथे पर, गालों पर, होंठों पर। मैं उसकी चूत चाटता – धीरे-धीरे, प्यार से। और मैं उसे चोदता – रोमांटिक तरीके से, बहुत कोमलता से।
लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, ऋचा बदलने लगी। वो खुलने लगी। और एक दिन, मुझे पता चला कि मेरी शर्मीली पत्नी के अंदर एक बहुत गहरी, बहुत तीव्र चाहत छिपी है। एक ऐसी चाहत जो सिर्फ और सिर्फ मेरे लंड के लिए है।
हाँ, आपने सही पढ़ा। मेरी पत्नी को मेरा लंड बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। और अब, शादी के चार साल बाद, हमारी ज़िंदगी पूरी तरह से उसके इर्द-गिर्द घूमती है – मेरे लंड के इर्द-गिर्द।
मुझे याद है पहली बार जब ऋचा ने मेरा लंड चूसा था। हम शादी के करीब चार महीने बाद बेंगलुरु शिफ्ट हुए थे। एक रात, जब हम बिस्तर पर लेटे थे, ऋचा ने अचानक मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया। वो काँप रही थी। “यश… क्या मैं… क्या मैं इसे चूस सकती हूँ?” उसने पूछा था।
मैं हैरान रह गया था। “बिल्कुल,” मैंने कहा था। “तुम मेरी पत्नी हो। तुम्हें हर चीज़ की इजाज़त है।”
और फिर ऋचा ने पहली बार मेरा लंड अपने मुँह में लिया था। वो अटक रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे चूसा जाता है। लेकिन मैंने उसे सिखाया – धीरे-धीरे, प्यार से। और कुछ ही हफ्तों में, वो माहिर हो गई।
अब, चार साल बाद, ऋचा मेरा लंड चूसने में इतनी अच्छी है कि मैं सोचता हूँ कि शायद कोई और औरत दुनिया में उससे बेहतर नहीं हो सकती। और मैं सही हूँ।
भाग 2: मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – सुबह की शुरुआत, लंड चूसना और पेशाब पीना
सुबह का अलार्म बजता है – सुबह के छह बजे। बेंगलुरु की सुबह ठंडी और खुशनुमा होती है। बाहर हल्की-हल्की धुंध होती है, और पक्षी चहचहा रहे होते हैं। लेकिन मुझे अलार्म बंद करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। क्योंकि उससे पहले ही, मुझे अपने पैरों के बीच एक गर्म, गीली चीज़ महसूस होती है। ऋचा का मुँह।
हाँ, मेरी पत्नी हर सुबह मुझे अपने मुँह से जगाती है। जब मैं सो रहा होता हूँ, तो वो चुपके से चादर के नीचे घुस जाती है। वो मेरे बॉक्सर को धीरे से नीचे सरकाती है, मेरा लंड अपने मुँह में ले लेती है, और धीरे-धीरे चूसना शुरू कर देती है। उसके होंठ नरम और गर्म होते हैं, उसकी जीभ मेरी टोपी पर गोल-गोल घूमती है, और उसका गला मेरे लंड को धीरे-धीरे अंदर लेता जाता है।
मेरी नींद खुलती है, तो मैं उसके बालों को सहलाता हूँ और कराहता हूँ। “ऋचा… सुबह-सुबह…”
“चुप रहो,” वो कहती है – मेरा लंड अभी भी उसके मुँह में होता है। “मुझे अपना काम करने दो।”
और मैं उसे करने देता हूँ। मैं पीठ के बल लेटा रहता हूँ, और ऋचा मेरे लंड को चूसती रहती है। वो मेरे लंड को गहराई से, पूरी तरह से, जैसे कोई अमृत पी रही हो, चूसती है। उसकी जीभ मेरी टोपी के चारों ओर घूमती है, उसके होंठ मेरे शाफ्ट को कसकर पकड़ते हैं, और उसका गला मेरे लंड को पूरी तरह से निगल लेता है। मेरा लंड अब उसके गले के अंदर है – गर्म, गीला, और पूरी तरह से उसके मुँह में कैद।
मैं उसके सिर को पकड़ता हूँ और हल्के से दबाता हूँ। ऋचा कराहती है, लेकिन रुकती नहीं। वो मेरे लंड को और भी गहराई तक ले जाती है – अपने गले के पिछले हिस्से तक। मेरी नाक से उसकी खुशबू आ रही है – उसके बालों की, उसकी त्वचा की, उसकी चूत की। और मेरा लंड उसके मुँह में धड़क रहा है।
कुछ ही मिनटों में, मैं उसके मुँह में झड़ जाता हूँ। मेरा वीर्य उसके गले से नीचे उतर जाता है – गर्म, गाढ़ा, भरपूर। ऋचा एक-एक बूँद निगल जाती है। उसकी आँखें बंद होती हैं, उसका चेहरा शांत होता है, और वो मेरे वीर्य को पूरी श्रद्धा से पीती है – जैसे कोई भक्त प्रसाद खा रहा हो।
और जब मैं पूरी तरह झड़ चुका होता हूँ, तो वो मेरे लंड को चाटकर साफ कर देती है – बिल्कुल वैसे ही जैसे बिल्ली अपने बच्चे को चाटती है। उसकी जीभ मेरे लंड के हर हिस्से को चाटती है – टोपी से लेकर जड़ तक, हर नस को, हर सिलवट को। और जब वो पूरी तरह संतुष्ट हो जाती है, तो वो मेरे लंड को अपने मुँह से निकालती है और मेरे सीने पर आकर लेट जाती है।
“गुड मॉर्निंग, जान,” वो मुस्कुराकर कहती है।
“गुड मॉर्निंग, रानी,” मैं कहता हूँ और उसके माथे पर किस करता हूँ।
लेकिन सुबह का सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता। कुछ ही देर बाद, मुझे पेशाब आने लगता है। और मैं उठकर बाथरूम नहीं जाता। मैं बस ऋचा से कहता हूँ, “मुझे पेशाब आ रहा है।”
और ऋचा – बिना किसी हिचकिचाहट के – मेरे पैरों के बीच आ जाती है। वो अपना मुँह खोल देती है, और मैं उसके मुँह में पेशाब करता हूँ। मेरा पेशाब गर्म होता है, और ऋचा उसे पी जाती है – बूँद-बूँद, जैसे कोई गंगाजल हो। उसका चेहरा शांत होता है, उसकी आँखें बंद होती हैं, और वो मेरे पेशाब को पूरी श्रद्धा से पीती है। कुछ बूँदें उसके होंठों से छलककर उसकी ठुड्डी पर बह जाती हैं, लेकिन वो परवाह नहीं करती। वो बस पीती है – तब तक पीती है, जब तक मेरा पेशाब पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।
“शाबाश, मेरी रानी,” मैं उसके सिर पर हाथ फेरता हूँ।
“धन्यवाद, जान,” वो कहती है और मेरे लंड को फिर से चूसने लगती है – ताकि आखिरी बूँद भी न छूट जाए। वो मेरे लंड को चूसती है, चाटती है, और साफ करती है – बिल्कुल वैसे ही जैसे मैंने उसे सिखाया है।
ये हमारी सुबह है। हर दिन की सुबह। और मुझे इससे ज़्यादा कुछ नहीं चाहिए।
भाग 3: मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – ऑफिस से लौटने के बाद का स्वागत
शाम को, जब मैं ऑफिस से लौटता हूँ, तो दरवाज़ा खुलते ही ऋचा मेरे सामने घुटनों पर बैठी होती है। उसने अपने कपड़े उतार रखे होते हैं – पूरी तरह नंगी। उसकी चूत गीली होती है, उसके निप्पल सख्त होते हैं, और उसका मुँह मेरे लंड का इंतज़ार कर रहा होता है। वो मेरे लौटने का इंतज़ार करती है – हर शाम, बिना किसी रुकावट के।
“घर में आपका स्वागत है, जान,” वो कहती है। उसकी आवाज़ मीठी और समर्पित होती है।
“धन्यवाद, रानी,” मैं कहता हूँ और दरवाज़ा बंद करके अंदर आता हूँ।
मैं उसके सामने खड़ा होता हूँ – थका हुआ, चिड़चिड़ा, दिन भर की मीटिंग्स से परेशान। मैं अपनी बेल्ट खोलता हूँ, अपनी पैंट की ज़िप खोलता हूँ, और अपना लंड बाहर निकालता हूँ। मेरा लंड – दिन भर की मेहनत से पसीने से भरा, बदबू से भरा – ऋचा के लिए सबसे स्वादिष्ट चीज़ होती है।
ऋचा तुरंत मेरा लंड अपने मुँह में ले लेती है। वो मुझे चूसती है – दिन भर की थकान दूर करने के लिए। वो मेरे लंड को चूसती है, चाटती है, और अपने गले में गहराई तक ले जाती है। मेरे पसीने की गंध, मेरे शरीर की महक – सब कुछ उसके लिए नशा होता है। वो मेरे लंड को ऐसे चूसती है जैसे उसकी ज़िंदगी इसी पर टिकी हो।
“तुम्हारा लंड… कितना अच्छा है… मुझे पागल कर देता है…” ऋचा कराहती है। उसकी आवाज़ मेरे लंड के चारों ओर गूँजती है, और मेरी रीढ़ में सिहरन दौड़ जाती है।
“और तुम्हारा मुँह… कितना गर्म है… मुझे पागल कर देता है…” मैं जवाब देता हूँ। मैं उसके सिर को पकड़ता हूँ और उसे अपने लंड पर और गहराई तक धकेलता हूँ।
ऋचा मेरे अंडकोषों को सहलाती है – हल्के से, प्यार से। वो मेरे लंड को अपने गले में और गहराई तक ले जाती है – मेरी नाक उसके बालों को छूती है। और वो मुझे चूसती रहती है – तब तक चूसती रहती है, जब तक मैं उसके मुँह में झड़ नहीं जाता।
“अपना सारा माल मुझे दे दो… मेरे मुँह में…” ऋचा कराहती है।
और मैं उसके मुँह में झड़ जाता हूँ। मेरा वीर्य उसके गले से नीचे उतर जाता है – गर्म, गाढ़ा, भरपूर। ऋचा एक-एक बूँद निगल जाती है। और जब मैं पूरी तरह झड़ चुका होता हूँ, तो वो मेरे लंड को चाटकर साफ कर देती है।
“आपका दिन कैसा रहा, जान?” वो पूछती है – जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
“अब अच्छा हो गया,” मैं मुस्कुराकर कहता हूँ।
भाग 4: मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – रात का 69 और जाँघों में जकड़ा सिर
रात को, खाना खाने के बाद, हम बेडरूम में जाते हैं। और वहाँ, हम अपनी सबसे पसंदीदा पोज़िशन में आ जाते हैं – 69।
मैं बिस्तर पर पीठ के बल लेट जाता हूँ। बिस्तर के सिरहाने तकिए लगे होते हैं, ताकि मैं आराम से लेट सकूँ। ऋचा मेरे ऊपर आती है – उसका चेहरा मेरे पैरों की तरफ, उसकी चूत मेरे चेहरे के ठीक ऊपर। वो धीरे-धीरे अपनी चूत मेरे मुँह पर रख देती है – उसकी गर्माहट, उसकी नमी, उसकी खुशबू – सब कुछ मेरे चेहरे पर। और फिर वो मेरा लंड अपने मुँह में ले लेती है।
और फिर शुरू होता है हमारा नाइट रूटीन – 69 पोज़िशन में, घंटों तक।
मैं उसकी चूत चाटता हूँ – गहराई से, पूरी तरह से। मेरी जीभ उसकी क्लिट पर घूमती है, उसकी चूत के अंदर जाती है, और उसके रस को पीती है। उसका रस मीठा होता है – थोड़ा नमकीन, थोड़ा मीठा – और मुझे बहुत पसंद है। मैं उसकी चूत को चूसता हूँ, उसके होंठों को चाटता हूँ, और उसकी क्लिट को हल्के से काटता हूँ।
ऋचा मेरा लंड चूसती है – उतनी ही गहराई से, उतनी ही पूरी तरह से। उसकी जीभ मेरी टोपी पर घूमती है, उसके होंठ मेरे शाफ्ट को कसकर पकड़ते हैं, और उसका गला मेरे लंड को पूरी तरह से निगल लेता है। हम दोनों एक-दूसरे को खुश करने में लगे रहते हैं, और कमरा हमारी कराहों से भर जाता है।
“यश… मैं झड़ने वाली हूँ…” ऋचा कराहती है। उसकी आवाज़ मेरे लंड के चारों ओर काँपती है।
“झड़ जाओ… मेरे मुँह पर… अपना सारा रस दे दो…” मैं कहता हूँ।
और ऋचा झड़ जाती है – मेरे मुँह पर, मेरे चेहरे पर। उसका रस मेरे मुँह में भर जाता है – मीठा, गर्म, और बहुत स्वादिष्ट। मैं उसे पी जाता हूँ – बूँद-बूँद। और मैं उसकी चूत को चाटता रहता हूँ – तब तक, जब तक उसका ऑर्गैज़्म पूरी तरह शांत नहीं हो जाता।
फिर मैं उसके सिर को अपनी जाँघों से जकड़ लेता हूँ – कसकर, बहुत कसकर। ऋचा अब हिल नहीं सकती। उसका सिर मेरी जाँघों के बीच फँस चुका है, और मेरा लंड उसके गले में पूरी तरह से है। वो बेबस है – और मैं उसकी इस बेबसी का पूरा मज़ा लेता हूँ।
मैं उसका गला चोदता हूँ – ज़ोर से, तेज़ी से, बेरहमी से। मेरा लंड उसके गले में अंदर-बाहर होता है – हर धक्का पिछले से ज़्यादा ज़ोरदार, हर धक्का पिछले से ज़्यादा गहरा। ऋचा का दम घुट रहा होता है, उसकी आँखों से आँसू बह रहे होते हैं, लेकिन वो नहीं रुकती। वो मेरे लंड को अपने गले में और गहराई तक ले जाती है – बस मुझे खुश करने के लिए।
“हाँ… ऐसे ही… मेरा गला चोदो…” ऋचा कराहती है। “मैं आपकी हूँ… पूरी तरह आपकी…”
“तुम मेरी हो… पूरी तरह मेरी…” मैं गुर्राता हूँ। “तुम्हारा मुँह मेरा है… तुम्हारा गला मेरा है… तुम्हारी पूरी ज़िंदगी मेरी है…”
और फिर, मैं उसके मुँह में झड़ जाता हूँ। मेरा वीर्य उसके गले से नीचे उतर जाता है। ऋचा उसे निगल जाती है – बूँद-बूँद। और जब मैं पूरी तरह झड़ चुका होता हूँ, तो वो मेरे लंड को चाटकर साफ कर देती है – बिल्कुल वैसे ही जैसे मैंने उसे सिखाया है।
भाग 5: मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – रात का पेशाब और 69 में सोना
रात को, हम 69 पोज़िशन में ही सोते हैं। हाँ, आपने सही पढ़ा। हम ऐसे ही सोते हैं – मेरा चेहरा ऋचा की चूत पर, और ऋचा का मुँह मेरे लंड पर। ये हमारी सबसे सहज पोज़िशन है। जब हम थक जाते हैं, तो हम ऐसे ही सो जाते हैं – एक-दूसरे से लिपटे हुए, एक-दूसरे के सबसे करीब।
मेरी जाँघें ऋचा के सिर को हल्के से जकड़े रहती हैं – ज़्यादा कसकर नहीं, बस इतना कि वो मेरे पास रहे। ऋचा का मुँह मेरे लंड पर टिका होता है – चूसते हुए नहीं, बस लिए हुए। जैसे कोई बच्चा अपनी माँ की उंगली पकड़कर सोता है, वैसे ही ऋचा मेरा लंड पकड़कर सोती है।
रात के बीच में, जब मुझे पेशाब आता है, तो मैं उठकर बाथरूम नहीं जाता। मैं बस ऋचा का सिर पकड़ता हूँ और उसके मुँह में पेशाब कर देता हूँ। ऋचा – अभी भी आधी नींद में – अपना मुँह खोल देती है और मेरा पेशाब पी जाती है। बिना किसी शिकायत के, बिना किसी हिचकिचाहट के। वो बस पीती है – जैसे ये दुनिया की सबसे सामान्य चीज़ हो।
“शाबाश, रानी,” मैं फुसफुसाता हूँ और उसके बालों को सहलाता हूँ।
“धन्यवाद, जान,” वो फुसफुसाकर जवाब देती है और वापस सो जाती है – मेरा लंड अभी भी उसके मुँह में।
ये हमारी ज़िंदगी है। हर रात। बिना किसी रुकावट के। और मुझे इससे ज़्यादा कुछ नहीं चाहिए।
भाग 6: मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – वीकेंड की लंबी सुबह और पूरे दिन का प्यार
वीकेंड पर, हमारी रूटीन और भी लंबी होती है। शनिवार और रविवार को, हमें कहीं जाने की जल्दी नहीं होती। तो हम सुबह से लेकर रात तक – बिस्तर पर ही रहते हैं।
शनिवार की सुबह, ऋचा मुझे हमेशा की तरह अपने मुँह से जगाती है। लेकिन वीकेंड पर, वो और भी ज़्यादा समय लेती है। वो मेरे लंड को घंटों तक चूसती है – बिना किसी जल्दबाज़ी के, बिना किसी रुकावट के। मैं उसका सिर अपनी जाँघों में जकड़ लेता हूँ और उसका गला चोदता हूँ – बार-बार, बिना रुके। वो मेरे अंडकोषों को सहलाती है, मेरी गांड को उंगली करती है, और मेरे लंड को और गहराई तक ले जाती है।
“यश… तुम्हारा लंड… आज कितना सख्त है…” ऋचा कराहती है।
“और तुम्हारा गला… आज कितना गहरा है…” मैं जवाब देता हूँ।
जब मैं झड़ जाता हूँ, तो ऋचा मेरा सारा वीर्य पी जाती है। फिर वो मेरा पेशाब पीती है – जब मुझे आता है। और फिर वो मेरा लंड चूसती है – फिर से, और फिर से। पूरे दिन, हम ऐसे ही रहते हैं – एक-दूसरे में खोए हुए, एक-दूसरे के लिए पागल।
कभी-कभी, हम शॉवर में भी जाते हैं – साथ में नहाने के लिए। लेकिन वहाँ भी, ऋचा मेरे सामने घुटनों पर बैठ जाती है और मेरा लंड चूसती है। गर्म पानी हम दोनों पर गिर रहा होता है, और ऋचा मेरे लंड को चूस रही होती है। पानी की बूँदें उसके शरीर पर चमकती हैं, और मेरा लंड उसके मुँह में धड़कता है। ये बहुत अच्छा लगता है।
“यश… मुझे तुम्हारा लंड बहुत पसंद है…” ऋचा कराहती है।
“और मुझे तुम्हारा मुँह…” मैं जवाब देता हूँ।
भाग 7: मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – प्यार, भरोसा और समर्पण
कुछ लोग शायद सोचें कि हमारा रिश्ता अजीब है। कि हम जो करते हैं, वो गलत है। लेकिन हमारे लिए, ये सिर्फ प्यार है। सबसे गहरा, सबसे सच्चा प्यार।
ऋचा मुझसे बहुत प्यार करती है – इतना कि वो मेरा पेशाब भी पी जाती है, बिना किसी शिकायत के। और मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ – इतना कि मैं उसे अपनी सबसे गहरी, सबसे निजी चीज़ें भी सौंप देता हूँ।
हम एक-दूसरे पर पूरा भरोसा करते हैं। और यही भरोसा ही तो हमारे रिश्ते की बुनियाद है।
मेरी पत्नी को मेरा लंड पसंद है – और मुझे उसकी ये चाहत बहुत पसंद है। क्योंकि जब दो लोग एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं, तो सेक्स में कुछ भी गलत नहीं होता। कुछ भी गंदा नहीं होता। बस प्यार होता है – और एक-दूसरे को खुश करने की चाहत।
बेंगलुरु की रात गहरा चुकी है। हमारे फ्लैट की बालकनी से शहर की रोशनियाँ दिख रही हैं। और हम – यश और ऋचा – 69 पोज़िशन में लेटे हैं। मेरा चेहरा उसकी चूत पर है, और उसका मुँह मेरे लंड पर। मेरी जाँघें उसके सिर को हल्के से जकड़े हुए हैं। और हम दोनों गहरी नींद में हैं – एक-दूसरे से लिपटे हुए, एक-दूसरे के सबसे करीब।
और यही तो है हमारी लव स्टोरी। सबसे अलग, सबसे गहरी, और सबसे सच्ची।