खुली छत पर चांदनी रात में बीवी की चूत और गांड चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि खुली छत पर चांदनी रात में बीवी के साथ चुदाई करने का मजा कैसा होता होगा? यह गर्म हिंदी सेक्स स्टोरी एक ऐसे शादीशुदा जोड़े की है जिन्होंने अपनी शादी की सालगिरह को यादगार बनाने के लिए न कोई महंगा होटल चुना और न ही कोई विदेशी टूर, बल्कि अपनी ही साली के घर की खुली छत पर एक ऐसी रात बिताई जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे। इस खुली छत पर चांदनी रात में बीवी की चूत और गांड चुदाई कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे हफ्ते भर की जुदाई के बाद पति-पत्नी ने चांद की रोशनी में नंगे बदन होकर ऐसी घमासान चुदाई की कि पूरी छत हिल गई। अगर आप एनिवर्सरी स्पेशल चुदाई और गांड मारने की हिंदी कहानी ढूंढ रहे हैं, तो यह पूरी दास्तान आपके लिए ही है।
भाग 1 – हफ्ते भर की जुदाई और एनिवर्सरी का मिलन
यह कहानी पिछले साल की है, जब गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं और पूरा माहौल आलस और सुस्ती से भरा हुआ था। मेरी बेटी की स्कूल की छुट्टियां शुरू हो चुकी थीं और वह हर रोज घर पर ही रहकर बोर हो रही थी। तभी मेरी साली का फोन आया कि वह अपनी बहन यानी मेरी बीवी और मेरी बेटी दोनों को मुंबई बुला रही है। बस फिर क्या था, मेरी बीवी और बेटी दोनों ने मिलकर मुझसे जिद की और मैं उनकी जिद के आगे झुक गया। अगले ही हफ्ते मेरी बीवी और बेटी मुंबई के लिए रवाना हो गईं और मैं अपने घर में अकेला रह गया।
पहले दो-तीन दिन तो अकेले रहने में एक अलग ही तरह की आजादी का मजा आया। न किसी का टोकना-टाकना, न किसी की कोई जिम्मेदारी। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतने लगे, घर का सन्नाटा मुझे खाने लगा। सबसे बड़ी समस्या तो यह थी कि मेरी बीवी मेरे पास नहीं थी और मेरा लंड उसकी चूत के लिए तड़प रहा था। हम दोनों की आदत थी कि हम रात में बिना चुदाई किए सोते ही नहीं थे और अब अचानक से एक हफ्ते का सूखा पड़ गया था। मैं रात-रात भर बिस्तर पर करवटें बदलता रहता और अपनी बीवी की गर्म चूत को याद करके अपना लंड हाथ में लेकर मुठ मार लेता, लेकिन उससे वह बात नहीं बनती थी जो बीवी की असली चूत चोदने में आती है।
हालांकि एक बात से मुझे थोड़ी तसल्ली थी। 24 तारीख को हमारी शादी की सालगिरह थी और इसी बहाने मैं भी मुंबई जाने वाला था। मेरी साली ने खुद मुझे फोन करके कहा था, “जीजाजी, इस बार आपकी एनिवर्सरी हम यहीं मनाएंगे। आप 23 तारीख को निकल जाइए और 24 की सुबह तक यहां पहुंच जाइए।” उसकी इस बात ने मेरे मन में एक अलग ही तरह की उत्तेजना और खुशी भर दी थी। मुझे पता था कि मेरी बीवी भी मुझसे मिलने के लिए उतनी ही बेताब होगी जितना मैं उससे मिलने के लिए बेताब था।
आखिरकार 23 तारीख की रात आ ही गई। मैंने पहले से ही अपनी ट्रेन की टिकट बुक करवा रखी थी। शाम को मैंने अपना छोटा सा बैग पैक किया, घर में सब कुछ ठीक से बंद किया, पड़ोसी को घर की चाबी सौंपी और रात वाली ट्रेन पकड़ ली। पूरी रात ट्रेन में मैं सो नहीं पाया। मेरे दिमाग में बस एक ही चीज घूम रही थी—मेरी बीवी की फूली हुई चूत और उसके मोटे-मोटे मम्मे। मैं सोच रहा था कि कल सुबह जैसे ही मैं उससे मिलूंगा, उसे अपनी बाहों में भरकर जोरदार किस करूंगा और फिर रात होते ही उसे पूरी तरह से नंगा करके उसकी चूत की जमकर चुदाई करूंगा। इन्हीं ख्यालों में डूबे-डूबे कब सुबह हो गई, मुझे पता ही नहीं चला।
सुबह करीब 7 बजे मेरी ट्रेन मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर पहुंची। मैंने स्टेशन से बाहर निकलकर एक ऑटो किया और सीधे अपनी साली के घर के लिए रवाना हो गया। रास्ते भर मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं अपनी बीवी को एक हफ्ते बाद देखने वाला था और यह सोचकर ही मेरा लंड मेरी पैंट में हल्का-हल्का खड़ा होने लगा था। करीब आधे घंटे बाद ऑटो मेरी साली के घर के सामने रुका। मैंने ऑटो वाले को पैसे दिए और अपना बैग लेकर गेट की तरफ बढ़ा।
जैसे ही मैंने गेट खोला और अंदर कदम रखा, मैंने देखा कि मेरी बीवी दरवाजे पर ही खड़ी मेरा इंतजार कर रही थी। उसकी नजरें बार-बार गेट की तरफ जा रही थीं और जैसे ही उसने मुझे देखा, उसका चेहरा खुशी से चमक उठा। वह दौड़कर मेरी तरफ आई और मुझे देखते ही मुझसे जोर से लिपट गई। उसकी गर्म सांसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं और उसकी धड़कनें मैं अपने सीने पर महसूस कर पा रहा था। उसने मुझे इतनी जोर से और इतनी देर तक पकड़े रखा मानो वह मुझे फिर कभी छोड़ना ही नहीं चाहती हो। मैंने भी उसे अपनी बाहों में कसकर भर लिया और उसकी पीठ पर अपने हाथ फेरने लगा। इतने में मेरी बेटी भी अंदर से भागती हुई आई और मेरे गले से लिपट गई। “पापा… पापा… आप आ गए!” वह खुशी से चिल्ला रही थी।
थोड़ी देर बाद जब हम सब सामान्य हुए, तो मेरी बीवी ने मुझसे कहा, “सुनो जी, आप जल्दी से फ्रेश हो जाओ और तैयार हो जाओ। हम सब वाटर पार्क जा रहे हैं।” उसकी आंखों में एक शैतानी चमक थी और मैं समझ गया कि आज वह मेरे साथ पानी में बहुत मस्ती करना चाहती है। मैंने जल्दी से नहाया, कपड़े बदले और हम सब वाटर पार्क के लिए निकल पड़े।
भाग 2 – वाटर पार्क में मस्ती और रात का इंतजार
वाटर पार्क में हम पति-पत्नी ने जमकर मस्ती की। हम साथ में वॉटर स्लाइड्स पर गए, वेव पूल में एक दूसरे के साथ खेले, और रेन डांस में भीगते हुए जमकर डांस किया। पानी के अंदर मैंने अपनी बीवी के साथ वह सब कुछ किया जो मैं करना चाहता था। मैंने उसके मोटे-मोटे मम्मों को पानी के अंदर दबाया, उसकी गांड पर हाथ फेरा, और उसे अपनी तरफ खींचकर कई बार जोरदार किस किया। उसकी चूत भी पानी के अंदर मेरे लंड को महसूस कर रही थी और बार-बार मचल रही थी। बस एक चीज रह गई थी जो हम नहीं कर पाए थे और वह थी—मेरा लंड उसकी चूत में डालकर उसे असली चुदाई का मजा देना। लेकिन वहां इतनी भीड़ थी कि ऐसा करना नामुमकिन था। हालांकि हम दोनों के चेहरे पर यह साफ लिखा था कि हम रात होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
शाम करीब 7 बजे हम सब थके-हारे घर वापस पहुंचे। मेरी साली ने घर पर ही हमारी एनिवर्सरी के लिए एक छोटा सा केक मंगवा रखा था। हम सबने साथ में बैठकर केक काटा, एक दूसरे को केक खिलाया और फिर साथ में खाना खाया। खाना खाने के बाद जब सब लोग अपने-अपने कमरों में जाने लगे, तो मेरी बीवी ने धीरे से मेरे कान में आकर कहा, “सुनो जी, आज रात हम दोनों सोने के लिए टैरेस यानी छत पर जाएंगे।”
उसकी यह बात सुनकर मेरे दिल की धड़कनें एकदम से तेज हो गईं और मेरे चेहरे पर एक शरारती मुस्कान फैल गई। मैं भली-भांति समझ गया कि आज की रात किस काम के लिए बनी है। आज तो जमकर चुदाई होगी, क्योंकि हम दोनों ने पूरे हफ्ते भर से एक दूसरे को छुआ तक नहीं था और हमारे जिस्म एक दूसरे के लिए बुरी तरह तड़प रहे थे। मैंने तुरंत हां में सिर हिला दिया और हम दोनों एक बिस्तर और तकिए लेकर छत की तरफ चल दिए।
भाग 3 – चांदनी रात में खुली छत पर नंगे बदन
हम दोनों सीढ़ियां चढ़कर छत पर पहुंच गए। मुंबई की रात अपने आप में बहुत खूबसूरत होती है, लेकिन उस रात तो मानो चांद भी हमारी एनिवर्सरी पर अपनी पूरी शबाब पर था। पूरी छत पर चांद की सफेद और ठंडी रोशनी फैली हुई थी और दूर-दूर तक शहर की रोशनियां टिमटिमा रही थीं। मौसम भी बहुत सुहाना था—न ज्यादा गर्मी, न ज्यादा ठंड, बस एक हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी जो हमारे जिस्मों को और भी ज्यादा गर्म कर रही थी।
मैंने छत के बीचों-बीच जमीन पर बिस्तर बिछा दिया और तकिए को सही से लगा दिया। इतने में मेरी बीवी ने कहा कि वह नीचे से पानी की बोतल लेकर आती है और वह सीढ़ियों से नीचे चली गई। मैं उसके आने का बेसब्री से इंतजार करने लगा। इसी बीच मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और पूरी तरह से नंगा होकर बिस्तर पर लेट गया। मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा होने की तैयारी कर रहा था और ठंडी हवा के स्पर्श से और भी ज्यादा सख्त हो गया था।
थोड़ी ही देर में मेरी बीवी हाथ में पानी की बोतल लेकर छत पर आ गई। उसने आते ही छत का दरवाजा अंदर से अच्छी तरह से बंद कर दिया, ताकि कोई गलती से भी ऊपर न आ सके। फिर वह मेरी तरफ मुड़ी। मैंने देखा कि वह अपनी साड़ी उतार कर नीचे रख आई थी और अब सिर्फ एक हल्का सा नाइट गाउन पहने हुए थी। वह गाउन इतना पतला था कि चांद की रोशनी में उसके अंदर का पूरा बदन साफ झलक रहा था।
उसने देखा कि मैं तो पहले से ही पूरी तरह से नंगा बिस्तर पर लेटा हुआ हूं और मेरा सख्त लंड हवा में खड़ा हुआ है। यह देखकर वह मुस्कुराई और उसने झट से पानी की बोतल नीचे रख दी और मेरी तरफ लपकी। वह आते ही मुझसे कसकर लिपट गई। उसके गर्म और मुलायम जिस्म की गर्मी ने मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ा दी। उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और उन्हें बड़े ही जोश और प्यार से चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुसकर मेरी जीभ से खेलने लगी। साथ ही, उसने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर सीधे मेरे सख्त लंड पर रख दिया और उसे अपनी मुठ्ठी में भरकर जोर-जोर से मसलने लगी। उसकी यह हरकत मुझे पागल किए जा रही थी।
मैं भी पीछे नहीं रहा। मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ उसके गाउन के नीचे डाले और उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा। मेरी उंगलियां उसकी नंगी जांघों को छू रही थीं और वह स्पर्श बहुत ही सुखद था। जैसे-जैसे मैंने उसका गाउन ऊपर उठाया, मैंने महसूस किया कि उसने अंदर पेटीकोट तक नहीं पहना था। मेरे मन में एक शक पैदा हुआ और मैंने चेक करने के लिए अपना हाथ उसकी पीठ के पीछे से होता हुआ सीधे उसकी गांड पर फेरा। मेरा शक सही निकला—उसने नीचे पैंटी भी नहीं पहनी थी। वह तो सिर्फ यह गाउन पहनकर आई थी और अंदर से पूरी की पूरी नंगी थी।
यह जानकर मेरी उत्तेजना और भी बढ़ गई। मैं उसकी चिकनी और मुलायम गांड को कभी जोर-जोर से दबाता, तो कभी प्यार से सहलाता। मेरे हाथ का स्पर्श पाकर वह और भी ज्यादा मचलने लगी और मुझसे और जोर से चिपक गई। वह बिना रुके मेरे होंठों और मेरी जीभ को चूसे जा रही थी और उसका दूसरा हाथ अभी भी मेरे लंड को मसल रहा था।
मैंने अपना एक हाथ उसकी गांड से हटाया और ऊपर की तरफ उसकी चूचियों की तरफ ले गया। मैंने उसके गाउन के ऊपर से ही उसके मम्मे को दबाया और मुझे तुरंत अहसास हो गया कि उस पट्ठी ने वहां भी ब्रेजियर नहीं पहनी थी। मतलब साफ था कि वह अंदर के सारे कपड़े उतार कर सिर्फ यह एक गाउन पहन कर आई थी, ताकि मैं उसे आसानी से और जल्दी से नंगा कर सकूं।
मैंने अपनी आंखें भर कर और गहरी वासना से उसकी तरफ देखा। वह मेरी इस नजर को समझ गई और उसने तुरंत अपने दोनों हाथ ऊपर कर दिए, मानो वह कह रही हो कि मुझे अपनी पूरी तरह से ले लो। अगले ही पल मैंने उसका वह पतला सा गाउन ऊपर से सिर के ऊपर से निकाल कर दूर फेंक दिया और अपनी प्यारी बीवी को पूरी तरह से नंगा कर दिया।
चांद की रोशनी में उसका गोरा और भरा हुआ बदन बहुत ही खूबसूरत और कामुक लग रहा था। उसके बड़े-बड़े मम्मे बिना किसी सहारे के लटक रहे थे और उनके निप्पल ठंडी हवा से पहले से ही खड़े हो चुके थे। उसकी कमर पतली और गांड चौड़ी और मोटी थी। और उसकी जांघों के बीच उसकी फूली हुई चूत अपनी जगह पर मौजूद थी, जो शायद पहले से ही गीली हो चुकी थी।
भाग 4 – निप्पल चूसने और चूत सहलाने का गर्म दौर
मैं थोड़ा सा नीचे झुका और मैंने उसका एक खड़ा हुआ निप्पल अपने मुंह में ले लिया और उसे एक छोटे बच्चे की तरह जोर-जोर से चूसने लगा। साथ ही, मैंने उसके दूसरे मम्मे को अपने हाथ में लिया और उसके दूसरे निप्पल को अपनी दो उंगलियों के बीच में दबाकर हल्का-हल्का सा मींजने लगा और खींचने लगा। मेरे इस दोहरे हमले से वह पूरी तरह से मस्त होने लगी और उसके मुंह से धीरे-धीरे कामुक आवाजें निकलने लगीं।
“आंह… उंहह… पी लो मेरा दूध… आज पूरा पी लो… आंह मेरी चूत के राजा… आंह… थोड़ा और जोर से मेरे मम्मे दबाओ न… इस्स… आं… ह… मेरी चूत तो पूरे हफ्ते भर से तुम्हारे इस कड़क लंड के लिए तरस रही है… आज तुम मुझे खूब चोदना… आज मुझे बहुत सारी बार चुदवाना है तुमसे… मेरी चूत की सारी प्यास आज ही बुझानी है।” वह बिना रुके यह सब बड़बड़ा रही थी और मेरे बालों को सहला रही थी।
मैंने भी उसकी बात का जवाब देते हुए कहा, “हां मेरे लंड की रानी… आज मैं तेरी इस प्यारी चूत को जमकर चोदूंगा… तू बस एक बार मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस दे मेरी जान… इसे अपनी लार से पूरी तरह गीला कर दे।” यह सुनते ही वह झट से नीचे बैठ गई और मेरे पूरे तने हुए लंड को अपने गर्म मुंह में भर कर जोर-जोर से चूसने लगी। हफ्ते भर से चूत न चोदने की वजह से मेरा लंड मानो लोहे की रॉड की तरह तन गया था और उसकी गर्मी से उसका मुंह भर गया था।
वह मेरा लंड चूसते हुए बीच-बीच में रुकती और कहती, “आंह… बहुत कड़क हो गया है तुम्हारा लंड तो… आज तो मैं बहुत मस्ती से चुदवाऊंगी… आज मेरी चूत बहुत खुश हो जाएगी… इसने तो पूरे हफ्ते सिर्फ तुम्हारे लंड का ही इंतजार किया है।”
मैंने अपने दोनों हाथ उसके लटकते हुए मम्मों पर रख दिए और उन्हें जोर-जोर से मसलने और दबाने लगा। मेरे ऐसा करने से वह और भी जोश में आ गई और फिर से मेरे पूरे लंड को अपने मुंह के अंदर गहराई तक ले जाकर चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड के सुपारे पर गोल-गोल घूम रही थी और वह उसे बड़े ही चाव से चाट और चूस रही थी।
मैंने उससे कहा, “जरा नीचे देख और अपनी चूत को हाथ लगाकर बता… तेरी चूत गर्म हो गई है या अभी भी देर है?” उसने अपने एक हाथ से अपनी चूत को छुआ और उसे पूरी तरह से गीला पाया। उसकी चूत का रस उसकी उंगलियों पर लग गया था और चांद की रोशनी में चमक रहा था। उसने अपनी वही उंगलियां मुझे दिखाते हुए कहा, “आ जा… मेरे सैयां… तेरी मुनिया तेरे लिए पूरी तरह से रेडी है… अब देर मत कर।”
भाग 5 – ऊपर बैठकर चूत चुदाई और तीन बार पानी
खुली छत पर चांदनी रात में बीवी की चूत और गांड चुदाई का सबसे जोशीला दौर अब शुरू होने वाला था। यह कहते हुए वह छत पर बिछे बिस्तर पर अपनी पीठ के बल लेट गई और उसने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन के पीछे डालकर मुझे अपने ऊपर खींच लिया। अब मैं उसके ठीक ऊपर था और मेरा सख्त लंड उसकी गीली चूत पर रगड़ खा रहा था। उसने अपने एक हाथ से मेरे सिर के पीछे के बाल पकड़ लिए और दूसरे हाथ से अपना एक मम्मा उठाकर अपने कड़क निप्पल को सीधे मेरे मुंह में डाल दिया। मैं तुरंत उसका वह निप्पल चूसने लगा और ऐसे चूसने लगा जैसे सच में उसका दूध पी रहा हूं।
उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ा और अपने दूसरे मम्मे पर रख दिया और मुझे उसे जोर से दबाने का इशारा किया। अब मैं एक साथ दो काम कर रहा था—एक तरफ तो मैं उसका एक निप्पल मुंह में लेकर चूस रहा था और दूसरी तरफ मैं उसका दूसरा मम्मा अपने हाथ से जोर-जोर से मसल रहा था। वह मेरी इन हरकतों से पूरी तरह से पागल हो रही थी और उसकी सांसें तेज हो गई थीं।
कुछ देर तक मेरे मम्मे चूसने और मसलने के बाद मेरी बीवी ने मेरा बायां हाथ पकड़ा और उसे अपनी मम्मे से हटाकर सीधे अपनी फूली हुई और पूरी तरह से गीली चूत पर रख दिया। उसने मेरे हाथ को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया। अब मेरा एक और काम बढ़ गया था। मैंने अपनी पूरी मुट्ठी में उसकी मोटी और गीली चूत को भर लिया और उसे जोर-जोर से दबाने और सहलाने लगा। मेरे ऐसा करते ही उसके मुंह से एक जोरदार आह निकल गई, “आआआह्ह्ह… स्स्साला… यही तो चाहिए था मुझे।”
वह अब बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी और पूरी तरह से बेकाबू होकर लगातार “आंह… उन्ह… इस्स… आह…” जैसी कामुक आवाजें निकाल रही थी। उसका पूरा शरीर उत्तेजना से कांप रहा था और वह अपनी गांड को बिस्तर पर बार-बार उठा और पटक रही थी।
मैंने अपनी एक उंगली से उसकी चूत के दाने यानी उसकी क्लिट को हल्का सा छेड़ा और फिर उसी उंगली और अंगूठे की मदद से उसके दाने को पूरी तरह से पकड़ लिया। वह तो दाने को छेड़ने से ही चिहुंक उठी थी, लेकिन जब मैंने उसके उस संवेदनशील दाने को अपनी दो उंगलियों के बीच में दबाकर जोर से मींजा, तो उसकी वासना अपने चरम पर पहुंच गई। वह जोर-जोर से कसमसाने लगी और अपने हाथ-पैर पटकने लगी। मैं उसकी चूत को और ज्यादा भड़काने और उत्तेजित करने के लिए उसके दाने को लगातार हल्के-हल्के से मसल रहा था। मैं उसके दाने को अपने अंगूठे से रगड़ता और फिर उसे दो उंगलियों से पकड़ कर जोर से खींचता। मेरी इस हरकत से वह बहुत तेज-तेज सीत्कार करने लगती और उसकी चीखें निकल जातीं। अब वह पूरी तरह से बेकाबू होकर जोर-जोर से कराहने लगी थी और अपनी गांड को ऊपर-नीचे उछालने लगी थी।
मैं लगातार अपनी दोनों उंगलियों से उसकी चूत के दाने को बुरी तरह से रगड़ रहा था और वह हद से ज्यादा बेकाबू होकर बिस्तर पर मछली की तरह तड़पने लगी और अपने हाथ-पैर हवा में मारने लगी। जब मैंने उसे छेड़ना और उसके दाने को रगड़ना नहीं छोड़ा, तो उसने भी मेरा तगड़ा और सख्त लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे पूरी ताकत से मसलने और खींचने लगी। उसके द्वारा मेरे लंड को इस तरह से मसलने से मुझे भी बहुत जबरदस्त मजा आने लगा था और मैंने भी उसकी चूत के दाने को रगड़ने की अपनी स्पीड को और भी तेज कर दिया। उसने बिस्तर पर तड़पते-तड़पते और छटपटाते हुए पूरे बिस्तर को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। वह मेरा सिर अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने मम्मों पर जोर-जोर से दबाने लगी। और तभी अचानक, उसकी चूत ने एक जोरदार फव्वारे के साथ पानी छोड़ दिया और उसकी पूरी चूत उसके अपने ही रस से पूरी तरह से गीली और भीग गई।
एक पल के लिए रुकने और अपनी सांसें संभालने के बाद उसने अचानक से घूमकर मेरा पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया और पागलों की तरह जोर-जोर से चूसने लगी। वह अपना सिर ऊपर-नीचे हिला रही थी और मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक ले जा रही थी। मैं उसकी झड़ी हुई और गीली चूत के दाने को अभी भी बिना रुके जोर-जोर से रगड़ रहा था और उसे सहला रहा था।
फिर अचानक मेरी बीवी ने मेरे दोनों कंधों को पकड़ कर मुझे जोर से नीचे बिस्तर पर गिरा दिया और एक गुर्राती हुई शेरनी की तरह मेरे ऊपर चढ़ गई। वह मेरे कूल्हों के दोनों तरफ अपने दोनों पैर रखकर मेरे ऊपर बैठ गई थी और उसने मेरा सख्त लंड अपनी मुट्ठी में पकड़ कर अपनी चूत की गीली फांकों में रगड़ना और घिसना शुरू कर दिया। मैंने अपना हाथ उसकी चूत से हटा लिया था और अब मैं बस उसकी हरकतों का मजा ले रहा था। वह मेरे लंड को अपनी चूत की दरार में सही से सैट करके धीरे-धीरे से मेरे लंड पर बैठने लगी।
मेरा सात इंच का खड़ा हुआ और सख्त लंड मेरी बीवी की पूरी तरह से गीली हुई और गर्म चूत में धीरे-धीरे से घुसने लगा। उसने अपनी गांड को थोड़ा और नीचे किया और मेरा पूरा लंड अपनी चूत के अंदर समा लिया। वह मेरा पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में लेकर मेरे ऊपर बैठ गई। एक पल के लिए उसने अपनी चूत के अंदर मेरे लंड की गर्मी को महसूस किया और एक लंबी और संतुष्टि भरी आह भर कर अपनी तृप्ति और खुशी को जाहिर किया। अब उसने थोड़ा सा नीचे की तरफ झुककर अपना एक निप्पल फिर से मेरे मुंह में डाल दिया।
मैं एक छोटे और भूखे बच्चे की तरह उसके उस निप्पल को चूसने लगा और उसका दूध पीने लगा। उसने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने दूसरे मम्मे पर रख दिया और मुझे उसे जोर से दबाने के लिए कहा। अब हमारी पोजीशन बहुत ही शानदार और कामुक थी। मेरे मुंह में उसका एक निप्पल था और मेरे एक हाथ में उसका दूसरा मम्मा दबा हुआ था। और नीचे मेरी बीवी की गर्म और गीली चूत मेरे सख्त लंड को पूरी तरह से अपने अंदर लिए हुए थी और उसकी गर्मी का आनंद ले रही थी।
ऊपर खुले आसमान में फैली हुई हल्की चांदनी की रोशनी में हमारे दोनों के पूरी तरह से नंगे और पसीने से भीगे हुए बदन बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लग रहे थे। मेरी बीवी मेरे ऊपर सवार होकर मुझे ऊपर से दनादन और जोर-जोर से चोद रही थी। उसकी गांड ऊपर-नीचे हो रही थी और मेरा लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। चारों तरफ गहरी शांति और सन्नाटा का माहौल था, बस हमारी इस जोरदार चुदाई की आवाजें—”पच-पच, खच-खच, पचर-पचर, फट-फट”—पूरी छत और आस-पास के वातावरण में गूंज रही थीं। यह आवाजें सुनकर ही मेरा जोश और भी बढ़ रहा था और मैं नीचे से अपनी गांड उठा-उठाकर उसके हर धक्के का जवाब दे रहा था।
कोई दो मिनट बाद ही उसकी चुदाई करने की स्पीड बहुत ही तेज और जंगली हो गई थी। वह अपने मोटे-मोटे चूतड़ों को जोर-जोर से और बहुत तेजी से ऊपर-नीचे करके मेरे सख्त लंड को अपनी चूत में जड़ तक ले रही थी और फिर उसे पूरा बाहर निकाल रही थी।
“आह… मेरी जान… मुझे बहुत मजा आ रहा है… तुम्हारा लंड तो मेरी चूत की पूरी बैंड बजा रहा है… इस्स… मेरी चूत के अंदर कुछ-कुछ हो रहा है… मुझे लगता है मैं फिर से झड़ने वाली हूं… ऊई मां… तुम्हारा लंड तो सीधे मेरे पेट में घुस रहा है… अब तुम मेरे दोनों निप्पल एक साथ चूसो न… प्लीज… आह… मेरी जान तुमने तो मेरी चूत में आग ही लगा दी है।”
मैं उसकी इन बातों और उसकी इस हालत को देखकर समझ गया कि अब इसकी चूत तो कभी भी पानी छोड़ने वाली है और यह अपने दूसरे ऑर्गेज्म के करीब है। बस फिर क्या था, मैंने उसके दोनों लटकते हुए और हिलते हुए मम्मों को अपने दोनों हाथों में ले लिया और उन्हें आपस में मिलाकर उसके दोनों निप्पलों को एक साथ अपने मुंह में भर लिया। फिर मैं बड़ी ही मस्ती और जोश से उसके दोनों निप्पलों को एक साथ चूसने लगा। जैसे ही मैंने उसके दोनों निप्पलों को एक साथ अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया, उसने अपने दोनों हाथों से मेरे सिर के बालों को कसकर पकड़ लिया और अपनी गांड को बहुत ही तेजी से ऊपर-नीचे उठा-उठाकर मुझे जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।
वह जोर-जोर से चीखते हुए और कराहते हुए करीब दस-बारह बार मेरे लंड पर बहुत जोर-जोर से उछली और उसने मेरे लंड पर अपनी पूरी ताकत से धक्के मारे। और इन्हीं धक्कों को मारते-मारते ही अचानक उसकी चूत का एक और जबरदस्त फव्वारा छूट गया और उसने मेरे पूरे लंड और अंडों को अपने गर्म पानी से भिगो दिया। वह एकदम से एक तेज और गहरी “आह…” भरते हुए मेरे ऊपर पूरी तरह से निढाल होकर गिर पड़ी।
मेरी प्यारी बीवी ने अपनी चूत की मांसपेशियों को मेरे लंड पर जोर से दबा दिया और मुझे अपनी चूत के अंदर महसूस किया। इस तरह से लगातार दो बार झड़ने के बाद वह पूरी तरह से बेहोश सी होकर मेरे ऊपर गिर गई और अपनी सांसें संभालने लगी। वह करीब पांच मिनट तक मेरे ऊपर ही लंबी-लंबी और गहरी सांसें भरते हुए पड़ी रही। उसके पूरे शरीर से पसीना बह रहा था और वह पूरी तरह से शिथिल और संतुष्ट हो चुकी थी।
भाग 6 – गांड चुदाई का रोमांच और वीर्य की वर्षा
लेकिन मेरी बात ही कुछ और थी। मेरी बीवी तो दो बार झड़ चुकी थी और पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी, लेकिन मेरा लंड अभी भी किसी महान योद्धा की तरह पूरी तरह से सख्त और तना हुआ मेरी बीवी की गीली और गर्म चूत में अड़ा हुआ था। मैंने अभी तक अपना पानी नहीं छोड़ा था और मैं अभी भी उसे चोदना चाहता था।
करीब पांच मिनट तक मेरे ऊपर पड़े रहने और अपनी सांसें सामान्य करने के बाद वह धीरे से उठी और उसने मेरी तरफ देखकर एक प्यारी और संतुष्ट मुस्कान दी। फिर उसने आगे झुककर मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिया और उन्हें बड़े ही प्यार और जोश से चूसने लगी। फिर उसने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन के पीछे डाल दिए और मुझसे कसकर लिपट कर मेरे ऊपर ही आराम से लेट गई और अपनी आंखें बंद कर लीं, मानो वह सोने ही वाली हो।
मैंने उससे पूछा, “मेरी जान, कैसा लगा तुझे आज?” उसने अभी भी हांफते हुए और अपनी आंखें बंद रखते हुए जवाब दिया, “बहुत… बहुत अच्छा लगा… तुम्हारे इस जबरदस्त लंड ने तो आज मेरी चूत की सारी मस्ती और सारी गर्मी ही निकाल दी। मैं तो पूरे हफ्ते से बहुत ज्यादा तड़प रही थी तुम्हारे लिए। आज तुम्हारी चूत रानी बहुत-बहुत खुश है, इसने तो आज तीन बार पानी छोड़ा है। अब तुम्हारी बारी है मेरे राजा… अब तुम जैसा चाहो और जिस तरह से चाहो, मुझे वैसे चोद लो। मैं तुम्हारे लिए पूरी तरह से तैयार हूं।”
यह सुनकर मेरा जोश फिर से जाग गया और मेरे लंड ने उसकी चूत के अंदर एक और झटका दिया। मैंने अपनी बीवी को अपने ऊपर से उतारा और उसे बिस्तर पर अपनी पीठ के बल लिटा दिया। फिर मैंने उसके दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर उसकी जांघों को पूरी तरह से फैला दिया। उसकी गांड के नीचे मैंने एक मुलायम तकिया रख दिया, ताकि उसकी चूत और गांड ऊपर की तरफ उठी रहे और मुझे चोदने में आसानी हो। उसके पैरों के पूरी तरह से फैल जाने की वजह से उसकी पहले से ही गीली और चिकनी चूत ने अपना मुंह पूरी तरह से खोल दिया था। उसकी चूत मानो चुपचाप मुझसे कह रही थी कि अब तुम अपना यह सख्त लंड मेरे अंदर डाल दो और मुझे फिर से चोदो।
लेकिन मेरे दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। मैं आज उसकी गांड मारना चाहता था। मैंने पहले ही देख लिया था कि वह नीचे से आते वक्त अपनी गांड को अच्छी तरह से धोकर और साफ करके आई थी और उसकी गांड का छेद बिल्कुल साफ और तैयार था। मैंने अपने सख्त लंड पर थोड़ा सा अपना थूक लगाया और उसे चिकना किया। फिर मैंने अपने लंड के सुपारे को उसकी गांड के छेद पर रख दिया। मेरी बीवी ने तुरंत अपने दोनों हाथों से अपने दोनों कूल्हों को और भी ज्यादा फैला दिया, ताकि मेरा लंड आसानी से उसकी गांड में जा सके। उसने मेरे लंड के सुपारे को अपनी गांड के छेद पर रखकर खुद ही हल्का सा दबा दिया।
इधर मैंने जैसे ही उसकी गांड के छेद की टाइटनेस का अहसास किया, मैंने अपने कूल्हों पर जोर डाला और एक हल्का सा धक्का मारा। मेरा सुपारा उसकी गांड के अंदर प्रवेश कर गया। उसके मुंह से एक हल्की सी “उंह” की आवाज निकली। यह सुनकर मैंने थोड़ा सा और जोर लगाकर एक और धक्का मारा। इस बार मेरा आधा लंड मेरी प्यारी बीवी की तंग और गर्म गांड के अंदर विराजमान हो गया। उसके मुंह से दर्द और मजे की मिली-जुली एक सिसकारी निकल गई। अब मैं अपना आधा लंड ही उसकी गांड में अंदर-बाहर करके उसे धीरे-धीरे और आराम से चोदने लगा। मेरी बीवी को शुरू-शुरू में हल्का सा दर्द हो रहा था, इसलिए वह धीरे-धीरे कराह रही थी और अपने होंठों को दांतों से दबा रही थी।
खुली छत पर चांदनी रात में बीवी की चूत और गांड चुदाई का यह वह पल था जब मैंने उसकी गांड में अपना लंड डाला। कुछ देर तक उसकी गांड को इसी तरह से आधे लंड से चोदने के बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड से पूरी तरह से बाहर निकाल लिया। फिर मैंने उसकी गांड के छेद पर अपना थूक लगाया और उसे अच्छी तरह से गीला और चिकना किया। इसके बाद मैंने फिर से अपने लंड को उसकी गांड में डाला और इस बार मेरा आधा लंड पहले से भी ज्यादा आराम से और बिना किसी रुकावट के अंदर चला गया।
खुली छत पर चांदनी रात में बीवी की चूत और गांड चुदाई के इस दौर में मैंने फिर से चार-पांच धीमे और आरामदायक झटके दिए और फिर अचानक से अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला और अपनी पूरी ताकत लगाकर एक जोरदार धक्का मारा और एक ही बार में अपना पूरा का पूरा सात इंच का लंड उसकी गांड की जड़ तक पेल दिया। मेरे पूरे लंड के एक साथ उसकी गांड में जाते ही मेरी बीवी के मुंह से एक जोरदार और दर्द भरी चीख निकल गई। वह जोर से चिल्लाई, “आआआह्ह्ह… स्स्साले… धीरे… मार डाला तुमने तो मुझे!”
वह थोड़ा गुस्से और थोड़ा प्यार से मुझसे कहने लगी, “इतना जोर का धक्का मारने से पहले बोलना तो था न… मैं तैयार हो जाती।” मैंने हंसते हुए और उसकी गांड में अपना लंड हिलाते हुए कहा, “अगर मैं तुझे बोलकर धक्का मारता, तो तू चीखती ही नहीं। और जब तू नहीं चीखती, तो मुझे चोदने का असली मजा ही नहीं आता।” मेरी यह बात सुनकर वह कराहते हुए और अपनी आंखें मटकाते हुए हंस दी।
अब मैं अपना पूरा सख्त लंड उसकी तंग और गर्म गांड में आराम से और लगातार अंदर-बाहर करके अपनी प्यारी बीवी की गांड को जोर-जोर से चोदने लगा। गांड चोदते हुए मैं कभी आगे की तरफ झुककर उसके लटकते हुए मम्मों को अपने मुंह में लेकर उनका दूध पीने लगता, तो कभी मैं उसके चेहरे के करीब जाकर उसके होंठों को अपने होंठों में जकड़ कर उन्हें चूसने लगता। वह भी अब पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी और मेरी हर हरकत का भरपूर आनंद ले रही थी।
लगभग आधे घंटे तक मैं अपनी प्यारी बीवी की तंग गांड को अलग-अलग अंदाज में और अलग-अलग रफ्तार से चोदता रहा। इस लंबी और जोरदार चुदाई के बाद अब हम दोनों ही काफी थक चुके थे। हमारे शरीर पसीने से लथपथ थे और हमारी सांसें फूल रही थीं। मेरा वीर्य अब मेरे अंडों से निकलने के लिए पूरी तरह से तैयार था और मैं बस झड़ने ही वाला था।
भाग 7 – चूत में वीर्य और एनिवर्सरी की यादगार रात
मेरी प्यारी और पूरी तरह से संतुष्ट बीवी ने मुझसे पूछा, “बताओ मेरे राजा… अब तुम अपना गर्म पानी कहां डालोगे? मेरी गांड में या मेरी चूत में?” मैंने बिना एक पल की भी देर किए जवाब दिया, “मैं आज तुम्हारी प्यारी चूत की प्यास बुझाऊंगा और अपना सारा पानी तुम्हारी चूत के अंदर ही डालूंगा।”
यह कहते हुए मैंने अपना गीला और सख्त लंड उसकी गांड से बाहर निकाला और उसे एक ही झटके में उसकी खूबसूरत, गीली और पूरी तरह से खुली हुई चूत के अंदर जड़ तक घुसा दिया। मेरे लंड के अंदर जाते ही उसने संतुष्टि की एक गहरी आह भरी। उसने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन के पीछे डालकर मुझे अपनी तरफ कसकर पकड़ लिया और अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट दीं। अब मैं उसकी चूत में अपना लंड बहुत जोर-जोर से और तेजी से धक्के मारने लगा।
मेरे हर जोरदार धक्के के साथ उसका पूरा शरीर बिस्तर पर हिल रहा था और उसके मोटे-मोटे मम्मे जोर-जोर से थिरक रहे थे। मेरी प्यारी बीवी नीचे से अपनी गांड को ऊपर उठा-उठाकर मेरा हौसला बढ़ा रही थी और मुझे और जोर से चोदने के लिए उकसा रही थी। वह जोर-जोर से कह रही थी, “आंह… और जोर से… और तेज… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है… तुम्हारे जैसा तगड़ा और मोटा लंड तो मुझे मेरी इस चूत को चोदने के लिए ही मिला है… आह… मैं तो सच में बहुत खुशनसीब हूं… आ… हा… मुझे चोदो… जोर से चोदो।”
उसकी ये बातें सुनकर मैंने अपनी चुदाई की रफ्तार को और भी ज्यादा बढ़ा दिया। मुझे अपने लंड में वह जानी-पहचानी सी गुदगुदी और दबाव महसूस होने लगा जो मेरे वीर्य के निकलने का संकेत होता है। मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर चार-पांच और बहुत ही जोरदार और गहरे धक्के मारे और फिर मैंने अपना पूरा का पूरा लंड अपनी प्यारी बीवी की गर्म और गीली चूत में जड़ तक घुसा दिया और उसे वहीं रोक दिया। और ठीक उसी पल, मेरे लंड से मेरे गर्म और गाढ़े वीर्य की एक के बाद एक कई तेज और जोरदार धारें निकलीं और सीधे मेरी प्यारी बीवी की चूत की गहराई में जाकर गिरीं और उसे पूरी तरह से भर दिया।
जैसे ही मेरे वीर्य की गर्म धारें उसकी चूत के अंदर पड़ीं, मेरी बीवी ने एक जोरदार चीख के साथ मुझे अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया और अपनी टांगों से मुझे पूरी तरह से भींच लिया। मेरा पूरा वीर्य उसकी चूत में गिर जाने के बाद भी मैंने करीब पांच मिनट तक अपने लंड को उसकी चूत से बाहर नहीं निकाला और उसे वैसे ही अंदर डाले रखा। मैं पूरी तरह से निढाल होकर उसके ऊपर ही ढेर हो गया था और अपनी सांसें संभाल रहा था।
मेरी बीवी बहुत खुश और संतुष्ट थी। वह मेरे बालों में अपनी उंगलियां घुमा रही थी और मेरे माथे को प्यार से सहला रही थी। उसकी आंखें बंद थीं और उसके चेहरे पर एक गहरी शांति और संतुष्टि की मुस्कान थी। हम दोनों उसी हालत में एक दूसरे से लिपटे हुए, खुले आसमान के नीचे, चांद की ठंडी रोशनी में गहरी नींद सो गए। यह हमारी शादी की सबसे यादगार और खूबसूरत एनिवर्सरी थी।
खुली छत पर चांदनी रात में बीवी की चूत और गांड चुदाई – इस तरह हमने अपनी शादी की सालगिरह को एक बेहद खास और यादगार तरीके से मनाया। मेरी प्यारी बीवी पूरी रात मेरे साथ चुदती रही और उसकी चूत ने कई बार पानी छोड़ा। यह एनिवर्सरी स्पेशल चुदाई हम दोनों के लिए हमेशा यादगार बनी रहेगी और हम अक्सर इस रात को याद करके मुस्कुराते हैं।
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