शादी के बाद पत्नी-पति की ताबड़तोड़ चुदाई – हम पत्नी-पति इतने चुदक्कड़ हैं कि एक दिन भी बिना चुदाई के नहीं रह सकते। यह कहानी उन 10 दिनों की है जब हम गाँव में रिश्तेदार की शादी में गए थे और वहाँ हमें एक बार भी चुदाई का मौका नहीं मिला। शादी के बाद पत्नी-पति की ताबड़तोड़ चुदाई का वह दिन हमारी जिंदगी का सबसे गर्म और यादगार दिन था – जब हम शहर वापस आए और घर के दरवाज़ा बंद करते ही एक-दूसरे पर टूट पड़े। अगर आप भी ऐसी देसी चुदाई की कहानी पढ़ना चाहते हैं जहाँ गांड चुदाई, ब्लोजॉब, कुतिया स्टाइल, और केले से मस्ती जैसे गर्म सीन हों, तो यह कहानी आपके लिए ही है।
भाग 1: गाँव के 10 दिन – हवस अंदर ही अंदर सुलगती रही
हम पत्नी-पति इतने चुदक्कड़ हैं कि एक दिन भी बिना चुदाई के नहीं रह सकते। मेरी हवस और जोश की कोई सीमा नहीं है। ये कहानी तब की है जब हम रिश्तेदार की शादी के लिए गाँव गए थे। शादी के लिए हम पूरे परिवार के साथ गाँव गए थे – सभी 10 दिन के लिए वहाँ रुके। लेकिन इन 10 दिनों में हम पत्नी-पति को चुदाई का एक भी मौका नहीं मिला। गाँव में रिश्तेदारों की भीड़, शादी की तैयारियाँ, और तमाम रस्में – इन सबके बीच हमारी हवस अंदर ही अंदर सुलग रही थी।
मैं देख सकती थी कि मेरे पति कैसे तड़प रहे थे। उनकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी, और वो बार-बार मुझे छूने का बहाना ढूंढ रहे थे। कभी रसोई में हाथ आपस में टकरा जाता, तो कभी भीड़ में कमर पर हाथ फिर जाता। मेरी चूड़ियों की खनक और मेरी टाइट ब्लाउज में उभरे हुए बूब्स जैसे पति को और उकसा रहे थे। मैंने उन दिनों अपने सबसे अच्छे कपड़े पहने थे – टाइट ब्लाउज, लहंगा, और गहने – जिससे मैं और भी आकर्षक लग रही थी। हर बार जब मैं पति के सामने से गुजरती, उनकी नज़रें मेरे बूब्स और गांड पर टिक जातीं।
रातें सबसे मुश्किल थीं। हम एक ही कमरे में सोते थे, लेकिन बच्चे और दूसरे रिश्तेदार भी साथ थे। रात को जब सब सो जाते, तो मैं पति के करीब जाने की कोशिश करती। हम चुपके-चुपके हाथ पकड़ते, पैर रगड़ते, और एक-दूसरे के कान में इश्क भरी बातें फुसफुसाते। एक रात तो हालत यह हो गई कि मैंने पति का हाथ अपनी पैंट के अंदर डाल दिया। उनकी उंगलियों ने मेरी गीली चूत को छुआ तो वो खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने चुपके से अपना लंड बाहर निकाला और उसे मेरी पैंट के ऊपर से रगड़ने लगे। लेकिन बीच में ही किसी के जागने की आहट सुनकर हम अलग हो गए। बस इतनी-सी शरारत से हम दोनों की रात भर नींद हराम हो गई।
दसों दिन हम उसी तड़प में गुजार दिए। लेकिन असली चुदाई का मौका ही नहीं मिल रहा था। हम दोनों जानते थे कि जैसे ही शहर वापस जाएंगे और घर का दरवाज़ा बंद होगा, फिर जो होगा, वो किसी धमाके से कम नहीं होगा।
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भाग 2: शहर वापसी और घर पहुँचते ही धमाका
10 दिन बाद जब शादी की सारी रस्में खत्म हुईं, तो शहर वापस लौटने का प्लान था। मैं और पति अगले दिन सुबह शहर के लिए निकले। रास्ता लंबा था, करीब 5 घंटे की ड्राइव। कार में हम अकेले थे – बच्चे दूसरी कार में रिश्तेदारों के साथ थे। यह हमारे लिए सुनहरा मौका था। पति कार चला रहे थे, और मैं उनके बगल में बैठी थी। मैंने अपना हाथ उनकी जांघ पर रखा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ले जाने लगी। पति ने एक नज़र मेरी तरफ देखा – आँखों में वही जोश, वही भूख। उन्होंने कार एक सुनसान जगह पर रोक दी।
दोनों बाहर निकले, पीछे की सीट पर बैठ गए। पति ने कार के परदे लगा दिए। अब हम दुनिया से छुप चुके थे। पति ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसका किस गरम और तेज़ था – 10 दिनों की भूख। उसकी जीभ मेरे मुँह के अंदर घुस गई, और उसके हाथों ने मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया। मेरा ब्लाउज और ब्रा – दोनों एक झटके में उतर गए। मेरे निप्पल सख्त हो चुके थे, और पति उन्हें चूसने लगा। मैं कराह रही थी, लेकिन आवाज़ को दबा रही थी। फिर पति ने अपनी पैंट की जिपर खोली। उसका लंड पहले से ही सख्त और खड़ा हुआ था – मोटा, लंबा, और नसों से भरा हुआ। मैंने अपना सिर झुकाया और उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया। मैं जोर-जोर से चूस रही थी – ग्ग्ग… ग्ग्ग… गी-गी-गों। पति ने मेरे बाल पकड़े और धीरे-धीरे मेरे मुँह में धक्के देने लगा। लेकिन हम नहीं चाहते थे कि कार में ही सब कुछ हो जाए। हम तो घर पर असली धमाका करना चाहते थे।
पति ने कार स्टार्ट की और हम सीधे घर पहुँच गए। सुबह करीब 10 बजे घर पहुँच गए। घर में हम अकेले थे। दरवाज़ा बंद होते ही मैंने अपनी साड़ी पीछे की तरफ खींची, अपने ब्लाउज के हुक खोले, और ब्रा को उतार फेंका। मेरे बूब्स – गोरे, मुलायम, और भरे हुए – बाहर आ गए। पति ने मेरी साड़ी पूरी नीचे उतार दी। अब मैं सिर्फ अपनी पैंटी में थी। पति ने भी अपने कपड़े उतार दिए।
पत्नी-पति दोनों पूरी तरह नंगे थे। पति खड़े थे, और मैं नीचे बैठकर पति का लंड चूस रही थी। मैं बिल्कुल किसी रंडी की तरह लंड को चूस रही थी, जैसे कोई लॉलीपॉप हो। पति अपने हाथों से मेरा सिर दबा-दबाकर लंड चुसवा रहे थे। मैं पति की गोलियों को भी सहला रही थी, जिससे पति को गजब का मजा आ रहा था। मैं उस वक्त इतनी सेक्सी लग रही थी कि क्या बताऊँ! मेरी चूड़ियाँ, मंगलसूत्र, और शादी के जेवर अभी भी मेरे बदन पर थे, जो मेरी खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। पति का जोश भी मुझे देखकर और चढ़ रहा था। हम दोनों नहाने जा रहे थे, लेकिन नहाने से पहले एक ताबड़तोड़ चुदाई का प्लान बना लिया था।
मेरे पति का लंड बड़ा ही मजबूत, मोटा, और लंबा था। मैं लंड को चूसते हुए पति से बोली, “हाय, 10 दिन से आपका लंड मेरे मुँह को नहीं मिला, आज इसे पूरा चूसूँगी।” मेरे पति भी जोश में थे और कह रहे थे, “चूस साली रंडी, चूस मेरे लंड को! इतने दिन तड़प रहा हूँ, आज तेरा मुँह फाड़ दूँगा।” पति ने मेरे बाल पकड़े और तेज-तेज लंड चुसवाने लगे। मेरी गांड इतनी चिकनी थी कि किसी का भी लंड उसे देखकर खड़ा हो जाए। पति का लंड काले रंग का था, और मेरा गोरा बदन घर के आईने में ऐसा लग रहा था जैसे चुदाई के देवता और देवी आपस में मस्ती कर रहे हों।
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भाग 3: आईने के सामने और कुतिया स्टाइल में थप्पड़ों के साथ चुदाई
तभी मेरे पति ने बगल में पड़ी तकिया उठाई और बेड के किनारे रख दी। फिर मेरा सिर बेड पर रखकर ऊपर-नीचे होते हुए मेरे मुँह में लंड चोदने लगे। मेरा गला खुल रहा था, और पति का लंड मेरे गले तक जा रहा था। मेरी आँखों में पानी आ गया, लेकिन मैं रुकी नहीं। थोड़ी देर बाद पति ने मुझे उठाया, और दोनों खड़े होकर एक-दूसरे को चूमने लगे। पति मेरी गांड दबाते हुए चूम रहे थे, और मैं फिर नीचे बैठ गई। मैं पति के लंड को लॉलीपॉप की तरह चाटने और चूसने लगी। मेरी जीभ उनके लंड के निचले हिस्से की नसों पर घूम रही थी, और मेरे होंठ उनके सुपारे को जोर-जोर से चूस रहे थे। कुछ देर बाद पति का पानी निकल गया – गर्म, गाढ़ा वीर्य – और मैंने सारा पानी मुँह में ले लिया और निगल गई। लेकिन पति का लंड अभी भी वैसा ही खड़ा था, जो मुझे उनकी चुदाई की ताकत को दिखा रहा था।
पति ने मुझसे कहा, “चल, अब जल्दी से कुतिया बन जा।” मैं तुरंत बेड पर चारों पैरों के बल कुतिया की तरह झुक गई। मेरी गांड ऊपर की तरफ उठी हुई थी और मेरी चूत साफ दिख रही थी – गीली, गर्म, और मेरे चूत के रस से चमकती हुई। पति ने मेरी गांड पर तीन-चार जोरदार थप्पड़ जड़े। चटाक-चटाक-चटाक की आवाज़ से मेरी गांड लाल हो गई और उसमें आग लग गई। मेरी गांड इतनी चिकनी थी कि पति बार-बार उसे मसल रहे थे और कह रहे थे, “साली, मेरी रंडी, कितने दिन बाद तेरी गांड मिली है, आज इसे खा जाऊँगा।” पति ने मेरी चूत चाटनी शुरू की – अपनी गर्म जीभ से मेरे चूत के होठों को बार-बार चाटा, मेरी क्लिटोरिस को छेड़ा, और मेरे चूत के रस को पी गया। मैं “अह्ह्ह… हाय… और चाटो… मत रुको…” कहते हुए अपने हिप्स को उनके मुँह पर हिला रही थी। मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही थी।
थोड़ी देर चूत चाटने के बाद पति ने एक और थप्पड़ मारा – इस बार और जोर से। मैं समझ गई कि अब चुदाई शुरू होने वाली है। मैं थोड़ा और नीचे झुकी, अपना सिर बेड पर टिका दिया, जिससे मेरी गांड और भी ऊपर उठ गई। पति ने मेरी कमर पकड़ी और एक ही झटके में पूरा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। “आह्ह्ह… हाय राम… बहुत मोटा है…” मैं चिल्ला उठी। पति ने मेरी कमर दबाते हुए ताबड़तोड़ चुदाई करनी शुरू कर दी। पूरे कमरे में उनकी चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं – थप-थप-थप की गीली आवाज़, मेरी सिसकारियाँ, और पति की भारी साँसें। पति मेरी चूत को ऐसे चोद रहे थे जैसे कोई बदला ले रहा हो – 10 दिनों की भूख का बदला।
थोड़ी देर बाद पति ने मेरे बाल पकड़े और खींचते हुए चुदाई करने लगे। मेरा सिर पीछे की तरफ खिंच गया, और मेरी पीठ धनुष की तरह झुक गई। इस पोजीशन में पति का लंड और गहराई तक जा रहा था। फिर पति ने दोनों हाथों से मेरे बूब्स पकड़ लिए – जो सामने लटक रहे थे – और उन्हें जोर-जोर से दबाते हुए चोदने लगे। पति की उंगलियाँ मेरे निप्पल्स को दबा रही थीं, मसल रही थीं, और मैं दीवानी हो रही थी। “आह्ह्ह… और जोर से… चोदो मुझे रंडी की तरह… 10 दिन की तड़प निकाल दो…” मैं चिल्ला रही थी। पति और तेज हो गए। उनके हिप्स तेजी से आगे-पीछे हो रहे थे, और मेरी चूत का पानी बहकर मेरी जांघों से होता हुआ बेड पर गिर रहा था।
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भाग 4: केले से मस्ती और गांड चुदाई का गर्म सीन
कुतिया स्टाइल में करीब 20 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद हम दोनों थोड़े थक गए। पति ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला – वो अभी भी सख्त और मेरे रस से चमक रहा था। हम दोनों बैठ गए। मैं फिर से पति का लंड चाटने लगी – बार-बार, ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर – जैसे कोई बच्चा आइसक्रीम चाटता है। पति मेरी गांड मसल रहे थे – मेरे गोरे, चिकने, और मुलायम गांड के गालों को।
फिर मैंने अपनी पोजीशन बदल दी। मैं करवट लेकर लेट गई, अपनी गांड पति के मुँह की तरफ कर दी, और अपना मुँह पति के लंड पर रख दिया। अब हम 69 पोजीशन में थे। पति मेरी गांड चाट रहे थे – उनकी गर्म जीभ मेरी गांड के छेद को बार-बार चाट रही थी, और मैं पति का लंड चूस रही थी। पति ने मेरी गांड के छेद पर जोर से थूक लगाया – थूक मेरी गांड के छेद में समा गया। मैं समझ गई कि अब पति गांड मारने वाले हैं। पति ने मेरी गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा – चटाक – और कहा, “आज तो तेरी गांड फटेगी, कुतिया।”
पास में कुछ केले रखे थे – किचन से उठाए हुए। पति ने एक केला मुझे दिया और बोले, “खा ले, क्योंकि अब तेरी गांड फटने वाली है, साली रंडी।” मैंने वो केला खाया – धीरे-धीरे, शरारत से। पति ने खुद भी एक केला खाया। फिर पति ने दूसरा केला लिया, उसे हाथ में मसलकर पेस्ट बना दिया, और फिर वह केले का पेस्ट मेरी गांड के छेद पर लगाया और धीरे-धीरे अंदर घुसेड़ दिया। “आह्ह्ह… ठंडा लग रहा है… और घुसाओ…” मैंने उनसे कहा। केले की ठंडक और चिकनाई ने मेरी गांड को फैलाना शुरू कर दिया। फिर पति ने अपनी जीभ मेरी गांड में डाली – पहले केले का पेस्ट, फिर अपनी जीभ – और मेरी गांड को अच्छे से चाटा। फिर उन्होंने अपनी चूत से लेकर गांड तक मेरे पूरे निचले हिस्से को जीभ से चाट लिया।
अब असली खेल शुरू होने वाला था। पति खड़े हुए। उन्होंने मेरी गांड के दोनों गालों को अपने हाथों से फैलाया, अपने लंड के सुपारे को मेरी गांड के छेद पर रखा, और धीरे-धीरे अंदर घुसाना शुरू किया। पहली बार में ही उनका लंड मेरी गांड के अंदर घुस गया – केले के पेस्ट और उनकी लार ने पूरा रास्ता चिकना कर दिया था। “आह्ह्हह्ह्ह… गांड फट रही है… लेकिन मत रुको…” मैं चीख उठी। थोड़ा दर्द हुआ – क्योंकि पति का लंड मोटा है – लेकिन उस दर्द में एक अलग ही मज़ा था।
पति ने धीरे-धीरे गांड चोदना शुरू किया – हल्के-हल्के धक्के। धीरे-धीरे मेरी गांड उनके लंड की आदी हो गई, और पति ने अपनी गति तेज़ कर दी। अब वो जोर-जोर से मेरी गांड चोद रहे थे – ताबड़तोड़। जो केला मेरी गांड के अंदर था, वो धीरे-धीरे उनके धक्कों के साथ बाहर निकलने लगा – पहले थोड़ा-थोड़ा, फिर पूरा। केले का पेस्ट और मेरी गांड का रस सब मिलकर बेड पर गिर रहा था। पति ने और तेज़ कर दिया। मैं अपनी आवाज़ पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी – “आह्ह्ह… गांड चोद दी तुमने… मैं पागल हो गई… और जोर से… गांड फाड़ दो… ऊईईई… ऊउउइइ…”
पति पसीने से तर थे। उनके हाथ मेरी कमर पर थे, उंगलियाँ मेरे मांस में धंसी हुई थीं। उनकी साँसें तेज़ थीं, और उनकी आँखें बंद थीं – वो पूरे आनंद में डूबे हुए थे। हम दोनों चरम सीमा पर पहुँच चुके थे। पूरे कमरे में सिर्फ हमारी चीखें और हमारे शरीरों के टकराने की आवाज़ गूंज रही थी। करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ गांड चुदाई के बाद, मैंने अपनी चूत के अंदर एक गर्म झरना महसूस किया – मेरा ऑर्गेज़्म आ गया था। मैं चीखते-चिल्लाते हुए झड़ गई। उसी पल, पति का लंड मेरी गांड के अंदर फूल गया और उनका गरम-गरम वीर्य मेरी गांड के अंदर भर गया – एक के बाद एक कई धारें।
हम दोनों पूरी तरह झड़ चुके थे। शरीर ढीले पड़ गए, साँसें तेज़ थीं, और पसीने से पूरा बिस्तर भीग चुका था। पति ने अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाला। फिर दोनों नहाने चले गए – साथ में – और बाथरूम में भी हमने एक-दूसरे को प्यार किया। मैंने फिर से पति का लंड अपने मुँह में लिया और उसे साफ कर दिया – हर आखिरी बूंद को चाटकर निगल लिया।
भाग 5: प्यार भरा अंत – एक-दूसरे के लिए बने होना
नहाने के बाद हम दोनों साफ-सुथरे कपड़े पहनकर बैठे। पति ने मेरे गाल पर हाथ रखा और प्यार से कहा, “10 दिन बाद असली घर वापसी का एहसास करा दिया तूने।” मैंने उनकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “बिना चुदाई के तो हम अधूरे हैं। तुम मेरे हो, मैं तुम्हारी हूँ – बस चुदाई ही तो इस प्यार को और गहरा बनाती है।”
उस दिन के बाद हमने तय किया कि अब चाहे कुछ भी हो जाए, हम हर दिन एक-दूसरे को समय देंगे – चाहे वो प्यार हो, छेड़खानी हो, या फिर ताबड़तोड़ चुदाई। क्योंकि हमारे रिश्ते की ताकत ही यही है – एक-दूसरे को बिना शर्त प्यार करना और हर बार नए जोश के साथ एक-दूसरे को महसूस करना।
आज भी, जब भी हम कहीं बाहर जाते हैं और लंबे समय तक अकेले नहीं हो पाते, तो वापस आते ही हम वही करते हैं – कपड़े उतारना, थप्पड़ मारना, चूत चाटना, गांड मारना, और फिर एक-दूसरे की बाँहों में सो जाना। यही हमारी जिंदगी है – प्यार और चुदाई का एक अटूट बंधन।
यह कहानी मुझे पसंद आई। मुझे यह पहला सेक्स स्टोरी वेबसाइट मिला जहां सिर्फ कपल (पति-पत्नी या प्रेमी जोड़ो) की कहानियां है। यह विमेन फ्रेंडली भी है।
धन्यवाद! 😊
हमें खुशी है कि आपको कहानी पसंद आई। हमारा मकसद ही यही है कि कपल्स की रियल और रिलेटेबल कहानियाँ एक सुरक्षित और विमेन-फ्रेंडली माहौल में पेश करें।
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