गाँव में खेत में बीवी के साथ चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि गाँव में अपनी बीवी के साथ चुदाई करने का मजा ही कुछ और होता है? यह गर्म हिंदी सेक्स स्टोरी राजवीर और उसकी नखरीली और सेक्सी बीवी अस्मिता की है, जो शहर में अकेले रहते हैं और जब चाहे तब जमकर चुदाई करते हैं। लेकिन एक बार जब वे छुट्टियों में अपने गाँव गए, तो वहाँ घर में मेहमानों की वजह से उन्हें 8-9 दिनों तक चुदाई का मौका नहीं मिल पाया। आखिरकार उन्होंने एक शानदार तरकीब निकाली और सब्जी लेने के बहाने केले के खेत में जाकर जमकर चुदाई की। इस गाँव में खेत में बीवी के साथ चुदाई कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे राजवीर ने अपनी बीवी को किचन में चोदना शुरू किया, फिर खेत में ले जाकर गोद में, खड़े-खड़े और डॉगी स्टाइल में उसकी चूत की जबरदस्त चुदाई की। अगर आप गाँव की चुदाई और खेत में सेक्स की ऐसी धमाकेदार कहानी ढूंढ रहे हैं, तो राजवीर और अस्मिता की यह पूरी दास्तान आपके लिए ही है।
भाग 1 – राजवीर और अस्मिता की रंगीन सेक्स लाइफ और गाँव का सफर
मेरा नाम राजवीर है और यह कहानी मेरी और मेरी प्यारी और सेक्सी बीवी अस्मिता की है। हमारी शादी को अब डेढ़ साल हो चुके हैं और मैं बड़े गर्व और खुशी के साथ कह सकता हूं कि हमारी शादीशुदा जिंदगी बहुत ही शानदार और खुशहाल चल रही है। मैं एक प्राइवेट कंपनी में अच्छी पोस्ट पर जॉब करता हूं और इसीलिए मैं और अस्मिता दोनों शहर में अपने एक छोटे से लेकिन प्यारे से फ्लैट में अकेले रहते हैं। हमारा बाकी का पूरा परिवार—मेरे मम्मी-पापा और दूसरे रिश्तेदार—सब हमारे पैतृक गाँव में ही रहते हैं।
हमारी सेक्स लाइफ बहुत ही रंगीन, मजेदार और रोमांचक है। चूंकि हम दोनों शहर में अकेले रहते हैं, इसलिए हमें किसी तरह की कोई रोक-टोक या परेशानी नहीं होती। हम जब चाहें, जहां चाहें और जैसे चाहें, एक दूसरे के साथ चुदाई कर सकते हैं और अपनी हवस को शांत कर सकते हैं। अस्मिता भी मेरा हर कदम पर पूरा साथ देती है और वह भी मेरी ही तरह चुदाई की शौकीन और चुदासी है।
अस्मिता स्वभाव से थोड़ी नखरीली और शरारती है, लेकिन यही बात मुझे उसमें सबसे ज्यादा पसंद है। उसके इन नखरों और उसकी शरारतों के कारण ही मुझे उसके साथ सेक्स करने में और भी ज्यादा मजा आता है। वह मेरे सामने हमेशा बहुत ही सेक्सी और आकर्षक कपड़े पहनती है—जैसे छोटी और पारदर्शी नाइटी, पिंक और रेड कलर की सेक्सी ब्रा और टाइट पैंटी। उसे इन कपड़ों में देखकर ही मेरा मूड अपने आप ही सेक्स के लिए बन जाता है और मेरा लंड खड़ा होने लगता है।
एक बार की बात है, जब हम दोनों अपनी छुट्टियों में शहर से अपने गाँव घूमने और परिवार वालों से मिलने गए हुए थे। गाँव में मेरे मम्मी-पापा दोनों ही रहते हैं और हम वहाँ उनके साथ ही रुकते हैं। लेकिन जिस दिन हम गाँव पहुंचे, उसी दिन मेरी बुआ और उसका जवान बेटा भी हमारे घर आए हुए थे और वे भी हमारे साथ ही रुक गए। वे दोनों हमारे घर पर पूरे 8-9 दिनों तक रुके रहे, जिसकी वजह से मुझे और अस्मिता को एक साथ अकेले में सोने और चुदाई करने का एक भी मौका नहीं मिल पाया। हम दोनों अंदर ही अंदर बहुत बेचैन और तड़प रहे थे, क्योंकि हमें रोज चुदाई करने की आदत थी और अब अचानक से इतना लंबा सूखा पड़ गया था।
हम दोनों रात में बिस्तर पर एक-दूसरे के करीब आते, लेकिन डर के मारे कुछ नहीं कर पाते थे। अस्मिता कभी-कभी चुपके से मेरा लंड छू लेती, मैं उसकी चूत छू लेता, लेकिन पूरी चुदाई नहीं कर पाते थे। इस तरह 8 दिन बीत गए और हमारी हवस अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई थी।
गाँव में खेत में बीवी के साथ चुदाई का सबसे रोमांचक दिन आखिरकार आ ही गया।
भाग 2 – रसोई में चुदाई की शुरुआत और अचानक रुकावट
एक दिन दोपहर के समय की बात है। मेरे मम्मी-पापा, बुआ और उसका बेटा सब मिलकर पास में ही रहने वाले मेरे चाचा जी के घर पर उनसे मिलने और बातचीत करने जाने लगे। उनके जाने से पहले अस्मिता रसोई में खाना बना रही थी और मैं अपने कमरे में बैठा हुआ था। जैसे ही मैंने देखा कि सब लोग घर से बाहर निकल गए हैं और घर में अब सिर्फ मैं और अस्मिता ही अकेले रह गए हैं, मैं तुरंत अपने कमरे से उठा और सीधा रसोई की तरफ चल दिया।
जैसे ही मैं रसोई में दाखिल हुआ, अस्मिता ने मुझे देखा और वह समझ गई कि मैं क्यों आया हूं। उसके चेहरे पर एक शरारती और जानी-पहचानी मुस्कान फैल गई। मैं बिना कुछ कहे सीधा उसके पास गया और उसे पीछे से अपनी मजबूत बाहों में कसकर पकड़ लिया। मेरा सीना उसकी पीठ से सट गया और मेरा लंड मेरी पैंट में ही उसकी गांड पर दबने लगा।
वह मुस्कुराकर और अपनी गर्दन घुमाकर बोली, “मुझे पता था कि तुम तो मौके की तलाश में ही बैठे थे। अब मिल गया ना मौका?” मैंने बिना कुछ बोले हां में अपना सिर हिलाया और अपना मुंह उसकी गर्दन पर रखकर उसे जोर-जोर से चूमने लगा। मेरे होंठों का स्पर्श पाकर वह सिहर उठी और उसकी सांसें तेज होने लगीं। वह बोली, “देखो, अगर तुम ऐसे ही करते रहोगे तो मेरा काम कैसे होगा? खाना बनाना है अभी।” मैंने उसे चूमते हुए ही जवाब दिया, “काम करने की क्या जल्दी है? खाने में अभी काफी देर है। पहले मेरी भूख शांत करो।”
यह कहते हुए मैंने अपना एक हाथ उसके पेट पर रखा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगा। फिर मैंने अपने दोनों हाथों को उसके ब्लाउज के ऊपर से आगे ले जाकर उसके बड़े और भरे हुए बूब्स पर रख दिया और उन्हें हल्का-हल्का दबाने और मसलने लगा। मेरी इस हरकत से वह पूरी तरह से गर्म होने लगी और उसने अपना विरोध छोड़ दिया।
थोड़ी ही देर में मैंने अस्मिता के ब्लाउज के सारे बटन एक-एक करके खोल दिए और उसका ब्लाउज उसके शरीर से अलग कर दिया। उसने अंदर पिंक कलर की एक बहुत ही सेक्सी और टाइट ब्रा पहनी हुई थी, जिसमें उसके गोरे और भरे हुए बूब्स बहुत ही आकर्षक और कामुक लग रहे थे। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना और दबाना शुरू कर दिया और उसके निप्पलों को अपनी उंगलियों से रगड़ने लगा।
मेरी इन हरकतों से अस्मिता भी पूरी तरह से गर्म और चुदासी हो चुकी थी। उसने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर सीधे मेरी पैंट पर रख दिया और पैंट के ऊपर से ही मेरे खड़े हुए लंड को पकड़कर जोर-जोर से मसलने लगी। उसके हाथ का स्पर्श पाकर मेरा लंड और भी ज्यादा सख्त और तना हुआ हो गया।
थोड़ी देर बाद मैं धीरे-धीरे नीचे की तरफ झुकता गया और अपने घुटनों के बल उसके पीछे बैठ गया। मैंने उसके पैरों को पकड़ा और उन्हें अपने होंठों से चूमना शुरू कर दिया। फिर मैंने उसकी साड़ी को नीचे से पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगा। मैं उसकी गोरी-गोरी और मुलायम जांघों को चूमता और चाटता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ता रहा और उसकी साड़ी को उसकी कमर तक पूरी तरह से ऊपर कर दिया। अस्मिता ने नीचे भी उसी पिंक कलर की एक बहुत ही टाइट और सेक्सी पैंटी पहनी हुई थी, जो उसकी मोटी और गोल गांड पर बहुत ही जच रही थी। मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही बारी-बारी से उसके दोनों कूल्हों और उसकी गांड को अपने होंठों से चूमना और अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर बाद वह मेरे सामने घूमकर मेरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। अब मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठा था और उसकी चूत मेरे चेहरे के ठीक सामने थी। मैंने आगे से उसकी गोरी और मुलायम जांघों को चूमना शुरू किया और फिर सीधे उसकी पैंटी पर ही उसकी चूत को चूमने लगा। अस्मिता ने इतनी टाइट और पतली पैंटी पहनी हुई थी कि उसकी चूत के दोनों मोटे होंठों का पूरा आकार पैंटी के ऊपर से ही साफ दिखाई दे रहा था। मैंने उसकी पैंटी को अपनी उंगलियों से थोड़ा सा साइड में किया और अपने गर्म होंठ सीधे उसकी चूत के नंगे होंठों पर रख दिए।
जैसे ही मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर लगाया और उसे चूमा, अस्मिता ने जोर से मेरे सिर के बालों को पकड़ लिया और उसके मुंह से एक जोरदार और कामुक आवाज निकली, “आआह्ह्ह्ह… हां… यही तो चाहिए था मुझे।” मैं अपनी जीभ और अपने होंठों से उसकी गीली होती जा रही चूत को सहलाने और चाटने लगा। मैं उसकी चूत के रस को अपनी जीभ से चाट-चाट कर पीने लगा। थोड़ी देर बाद अस्मिता ने मुझे अपने बालों से पकड़कर ऊपर खींच लिया और मुझे खड़ा कर दिया। हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए और पागलों की तरह एक दूसरे को कीस करने लगे। उसने अपने हाथ नीचे ले जाकर मेरी पैंट की चेन खोलनी शुरू कर दी।
उसने मेरी पैंट और अंडरवियर के अंदर हाथ डाला और मेरा पूरा सख्त और गर्म लंड बाहर निकालकर अपने हाथ में ले लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी। मैंने उसकी ब्रा को थोड़ा और नीचे खींचकर उसके दोनों बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही पूरी तरह से बाहर निकाल लिया और एक बूब को अपने मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। अस्मिता अब पूरी तरह से गर्म और पागल हो चुकी थी और वह बारी-बारी से अपने दोनों बूब्स को मेरे मुंह में देकर चुसवा रही थी और जोर-जोर से कराह रही थी। मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी पैंटी के अंदर डाल दिया और अपनी उंगलियों से उसकी पूरी तरह से गीली हो चुकी चूत को सहलाने और उसकी क्लिट को रगड़ने लगा।
उसकी चूत अब पानी-पानी और पूरी तरह से रसीली हो चुकी थी। थोड़ी देर बाद वह मेरे सामने नीचे बैठ गई और उसने मेरी पैंट और अंडरवियर को मेरे घुटनों तक नीचे खींच दिया। फिर उसने मेरे पूरी तरह से खड़े और तने हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरी तरफ देखकर एक शरारती और कामुक मुस्कान के साथ बोली, “आज तो मैं इसे पूरा का पूरा खा जाऊंगी।” मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा, “हां मेरी जान, पूरा खा जाओ इसे। अपनी भूख मिटाओ।” वह मेरे लंड के सुपारे पर बड़े ही प्यार से कीस करने लगी और फिर धीरे-धीरे मेरे पूरे लंड को अपने गर्म और गीले मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी।
“आअह्ह्ह… क्या मजा आ रहा है मुझे,” मैं कराह उठा। मैंने अस्मिता के सिर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपने लंड को उसके मुंह के अंदर और भी गहराई तक धकेलने लगा और उसका मुंह चोदने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने उसे खड़ा किया और हम दोनों फिर से एक दूसरे से लिपटकर जोर-जोर से कीस करने लगे। मैंने अस्मिता की पैंटी को थोड़ा और नीचे खींच दिया और अपने सख्त लंड को उसकी पूरी तरह से गीली और तैयार चूत पर रखकर ऊपर-नीचे रगड़ने और सहलाने लगा। मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत के होंठों के बीच फिसल रहा था और वह इस एहसास से तड़प रही थी।
थोड़ी देर तक मेरे लंड को अपनी चूत पर रगड़वाने और सहलवाने के बाद अस्मिता ने खुद ही अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ा और उसे अपनी चूत के छेद पर सही से सैट कर दिया। फिर उसने अपना मुंह मेरे कान के पास लाकर धीरे से और बहुत ही कामुक स्वर में फुसफुसाया, “डाल दो अंदर… प्लीज… अब और मत तड़पाओ मुझे।”
बस फिर क्या था, मैंने अपने दोनों हाथों से अस्मिता की मोटी और गोल गांड को कसकर पकड़ लिया और उसे जोर से अपनी तरफ खींच लिया। मेरा सख्त और मोटा लंड अस्मिता की टाइट और गीली चूत को चीरता हुआ एक ही जोरदार झटके में पूरा का पूरा अंदर तक घुस गया। मेरे लंड के अंदर जाते ही अस्मिता की दोनों आंखें अपने आप बंद हो गईं और उसके मुंह से एक जोरदार और संतुष्टि भरी आह निकली, “आह्ह्ह्हह… हां… यही तो चाहिए था मेरी चूत को।”
मैं वहीं रसोई में खड़े-खड़े ही अस्मिता को जोर-जोर से चोदने लगा। मैं उसकी कमर को पकड़कर अपने कूल्हों को जोर-जोर से आगे-पीछे कर रहा था और मेरा लंड उसकी चूत में तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था। लेकिन तभी अचानक बाहर से मुख्य दरवाजा खटखटाने की जोरदार आवाज आई। हम दोनों चौंक गए और हमारी सांसें थम गईं।
अस्मिता ने मुस्कुराकर और मुझे धक्का देकर अलग करते हुए कहा, “जाओ, दरवाजा खोलो। लगता है मम्मी-पापा वापस आ गए।” मैंने झट से अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और जल्दी-जल्दी अपनी पैंट और अंडरवियर पहन ली। अस्मिता ने भी अपनी पैंटी और ब्रा को जल्दी से ठीक किया और अपने ब्लाउज के बटन बंद करके अपनी साड़ी को संभाल लिया। फिर मैं गया और दरवाजा खोला, तो देखा कि मम्मी, पापा, बुआ और उसका बेटा सब वापस आ गए थे।
उनके आने के बाद मैं फिर से रसोई में गया, तो अस्मिता मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी। मैंने उससे धीरे से कहा, “यार, अभी तो बहुत मजा आ रहा था। बीच में ही छोड़ना पड़ा।” वह शरारत से मुस्कुराते हुए बोली, “चिंता मत करो, बाद में और भी ज्यादा मजे करेंगे। अभी तो यह सिर्फ शुरुआत थी।”
भाग 3 – केले के खेत में घमासान चुदाई
फिर अस्मिता ने सबके लिए खाना बनाया और हम सबने साथ में बैठकर दोपहर का खाना खाया। खाने के बाद थोड़ी देर सब लोग साथ में बैठकर बातें करते रहे और फिर सब अपने-अपने कमरों में सोने के लिए जाने लगे। मम्मी और बुआ अपने कमरे में सोने चली गईं, तो पापा ने बुआ के लड़के से कहा, “चलो बेटा, हम भी थोड़ी देर सो लेते हैं।” वह बोला, “हां चाचा जी, मैं भी सुबह जल्दी उठा था, इसलिए मुझे भी नींद आ रही है।”
तभी अस्मिता मेरी मम्मी के कमरे में गई और बोली, “मां, शाम के खाने के लिए घर में सब्जी नहीं है। तो क्या मैं और राजवीर खेत से होकर आएं? आते-आते खेत से ताजी सब्जी भी ले आएंगे और इस बहाने हमारा खेत का चक्कर भी लग जाएगा।”
मम्मी बोली, “थोड़ी देर आराम कर लो बेटा, बाद में शाम को चले जाना। अभी तो धूप भी बहुत तेज है।” अस्मिता ने तुरंत जवाब दिया, “नहीं मां, मुझे नींद नहीं आ रही है। हम अभी ही जाकर आते हैं।” मम्मी बोली, “ठीक है बेटा, जैसी तुम्हारी मर्जी।”
अस्मिता ने कमरे से बाहर निकलकर मेरी तरफ देखा और अपनी एक आंख मारते हुए और एक शैतानी मुस्कान देते हुए बोली, “चलें, मेरे राजा?” मैं भी उसकी इस शरारत को समझ गया और मुस्कुराते हुए बोला, “हां चलो, चलते हैं।” मैंने तुरंत अपनी बाइक निकाली और हम दोनों खेत की तरफ रवाना हो गए।
दोपहर का समय था और पूरा रास्ता बिल्कुल सुनसान और खाली था। गाँव का वह शांत माहौल और खेतों की हरियाली देखकर ही मन खुश हो गया। हमारा खेत हमारे घर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर था। रास्ते में मैंने अस्मिता से कहा, “यार, तुमने तो कमाल का आइडिया निकाला। सच में, तुम बहुत होशियार हो।” वह मेरी पीठ से चिपककर और मेरे कान में फुसफुसाते हुए बोली, “अब जितना चाहे उतना मजा कर लेना मेरे साथ। वहां कोई देखने वाला नहीं है।”
हम खेत पर पहुंचे और मैंने बाइक को एक तरफ खड़ा कर दिया। फिर हम दोनों हाथ में हाथ डालकर खेत के अंदर की तरफ चलने लगे। हमारे खेत में केले के बहुत सारे बड़े-बड़े और घने पेड़ लगे हुए थे, जिनकी वजह से अंदर का हिस्सा पूरी तरह से छिपा हुआ था और बाहर से कुछ भी दिखाई नहीं देता था। मैंने अस्मिता से कहा, “अंदर चलें?” उसने मुस्कुराकर हां में अपना सिर हिलाया और हम दोनों खेत के बीचों-बीच अंदर तक चले गए, जहां हमें कोई भी नहीं देख सकता था।
अंदर जाते ही हमने एक दूसरे को अपनी बाहों में जोर से भर लिया और पागलों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे। हमारी हवस अपने चरम पर थी और हम दोनों एक दूसरे के लिए बेताब थे। चूमते हुए ही अस्मिता ने अपने हाथ नीचे ले जाकर मेरी पैंट की चेन खोलनी शुरू कर दी और मेरा पूरी तरह से खड़ा हुआ और तना हुआ सख्त लंड बाहर निकाल लिया।
मैंने कहा, “चलो, यहां नीचे बैठ जाते हैं।” वह बोली, “हां, बैठ जाओ।” मैं वहीं जमीन पर बैठ गया और अस्मिता मेरे पास ही बैठ गई। फिर वह मेरी गोद में अपना सिर रखकर लेट गई और मेरे सख्त लंड को अपने हाथ में पकड़कर पहले उसे प्यार से चूमने लगी और फिर अपने गर्म मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी।
मैंने अपना हाथ उसकी साड़ी के नीचे डाला और उसकी दोनों टांगों के बीच से होता हुआ उसकी गोरी और मुलायम जांघों को सहलाने लगा। फिर मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को अपनी उंगलियों से सहलाना और दबाना शुरू कर दिया। अस्मिता काफी देर तक मेरा लंड चूसती रही और मुझे पूरी तरह से गर्म कर दिया। फिर मैंने उसे उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया और वह मेरे सामने अपना मुंह करके मेरी गोद में बैठ गई। मैंने उसके ब्लाउज के सारे बटन फिर से खोल दिए और उसका ब्लाउज उतार दिया।
उसकी पिंक कलर की ब्रा में उसके बड़े और भरे हुए बूब्स बहुत ही सेक्सी लग रहे थे। मैंने उसकी ब्रा को थोड़ा ऊपर करके उसके दोनों बूब्स को पूरी तरह से बाहर निकाल लिया और उन्हें अपने मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। अस्मिता ने अपने एक हाथ से मेरा सिर पकड़ लिया और दूसरे हाथ से अपना एक मम्मा पकड़कर मेरे मुंह के पास लाकर मेरे मुंह में दे दिया। मैं उसके कड़क निप्पल को जोर-जोर से चूसने लगा।
गाँव में खेत में बीवी के साथ चुदाई का यह सबसे रोमांचक पल था। वह मेरा सिर पकड़कर और मेरे बालों को सहलाते हुए बोली, “जोर से चूसो… और जोर से… मेरा सारा दूध पी लो।” मैं उसके दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूसने लगा और उन्हें अपनी जीभ से चाटने लगा। अस्मिता ने अपने हाथ में मेरा सख्त लंड पकड़ा और अपनी पैंटी को थोड़ा सा साइड में कर दिया। फिर उसने मेरे लंड को अपनी पूरी तरह से गीली और तैयार चूत पर रखकर ऊपर-नीचे रगड़ना शुरू कर दिया। मैं उसके बूब्स को चूसते हुए अपने दोनों हाथों से उसकी मोटी और गोल गांड को सहला रहा था और उसे मसल रहा था।
उसकी चूत अब पानी-पानी और पूरी तरह से रसीली हो चुकी थी। उसने मेरे लंड के सुपारे को अपनी चूत के छेद पर रखा और मेरी तरफ देखा। मैंने उससे पूछा, “डाल दूं अंदर?” वह धीरे से और अपनी आंखें बंद करके बोली, “हां… पूरा डाल दो… जड़ तक डाल दो।”
मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी गांड को कसकर पकड़ लिया और उसे जोर से अपने लंड पर बिठा दिया। मेरा पूरा मोटा और सख्त लंड अस्मिता की गीली और टाइट चूत में एक ही झटके में जड़ तक घुस गया। अस्मिता की दोनों आंखें अपने आप बंद हो गईं और उसके मुंह से एक जोरदार और संतुष्टि भरी आह निकली, “आअह्ह्ह्हह… हां… यही तो चाहिए था मुझे।”
मैंने उसकी गांड को कसकर पकड़ रखा था और उसे अपनी गोद में उछाल-उछाल कर और जंप करवा कर चोदने लगा। अस्मिता भी अपनी गांड को ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी और जोर-जोर से कराह रही थी। आहहह… क्या जबरदस्त मजा आ रहा था उस खुले माहौल में चुदाई का।
थोड़ी देर तक इसी तरह गोद में बिठाकर चोदने के बाद हम दोनों खड़े हो गए। मैं खड़े-खड़े ही अस्मिता को जोर-जोर से कीस करते हुए अपने लंड को उसकी चूत में डालने लगा और उसे चोदने लगा। फिर मैंने अस्मिता के दोनों पैरों को पकड़कर उसे पूरी तरह से ऊपर हवा में उठा लिया और खड़े-खड़े ही उसे ऊपर उठाए हुए जोर-जोर से और तेजी से चोदने लगा। अस्मिता के मुंह से लगातार “आअह्ह्ह… ओह्ह्ह… हां… चोदो मुझे” की कामुक आवाजें आ रही थीं। वह अपनी दोनों आंखें बंद करके और मेरे गले से लिपटकर इस एहसास का पूरा मजा ले रही थी।
फिर मैंने उसे नीचे उतारा और थोड़ी देर उसके बूब्स को चूसने और उसके निप्पलों को काटने के बाद मैं उसके पीछे आ गया। वह अच्छी तरह से समझ चुकी थी कि अब मैं क्या करने वाला हूं। उसने खुद ही अपनी साड़ी को पूरी तरह से ऊपर उठा लिया और अपनी पैंटी को थोड़ा और नीचे खींच दिया। फिर वह थोड़ा आगे की तरफ झुककर खड़ी हो गई और अपनी गांड को मेरी तरफ पूरी तरह से उठा दिया।
पीछे से उसकी गोरी-गोरी और मुलायम जांघों के बीच में उसकी चूत के दोनों गीले और फूले हुए होंठ कितने सेक्सी और आकर्षक लग रहे थे। मैंने उसकी चूत के दोनों होंठों के बीच में अपना सख्त लंड रखा और उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया। फिर मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक जोरदार धक्का मारा और मेरा मोटा लंड अस्मिता की चूत में एक रॉकेट की भयानक तेजी से घुस गया।
फिर मैंने उसकी कमर को कसकर पकड़ रखा था और मैं पीछे से जोर-जोर से और तेजी से धक्के देने लगा। वह लगातार बोल रही थी, “और जोर से करो… और तेज… रुको मत… प्लीज मुझे चोदो।” मैं अपनी पूरी ताकत और पूरे जोश के साथ अस्मिता को पीछे से चोदने लगा। वह पूरी तरह से तड़प उठी थी और उसके मुंह से जोर-जोर से और बेकाबू आवाजें आ रही थीं।
मैं फुल स्पीड से उसे पीछे से लगातार जोरदार धक्के दे रहा था और मेरा लंड उसकी चूत में जड़ तक घुस रहा था। अस्मिता की चूत उसके अपने पानी से पूरी तरह से लथपथ और गीली हो चुकी थी और मेरे लंड पर उसकी चूत का रस बह रहा था। चोदते-चोदते मैंने अस्मिता से कहा, “मेरा निकलने वाला है… मैं झड़ने वाला हूं।” अस्मिता हांफती हुई और कराहती हुई बोली, “करते रहो… अंदर ही निकाल दो… मेरी चूत के अंदर ही अपना सारा पानी डाल दो।”
मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर अस्मिता को आखिरी तीन-चार बहुत ही जोरदार और गहरे झटके दिए और फिर मेरे लंड ने मेरे गर्म और गाढ़े वीर्य की पूरी पिचकारी उसकी चूत के अंदर गहराई तक छोड़ दी। हम दोनों कुछ देर तक इसी तरह एक दूसरे से चिपके हुए खड़े रहे और अपनी-अपनी सांसें संभालते रहे। हम दोनों ही बुरी तरह से हांफ रहे थे और हमारे शरीर पसीने से लथपथ थे।
मैंने उससे पूछा, “मजा आया मेरी जान?” वह मुस्कुराकर और मेरी तरफ मुड़कर बोली, “आज तो तुमने अलग ही ताकत से किया। मुझे बहुत मजा आया।” मैं हंसते हुए बोला, “तुम्हें देखते ही मुझमें अपने आप ताकत आ जाती है।”
फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपना ढीला पड़ता हुआ लंड उसकी चूत से बाहर निकाला। मेरे लंड को बाहर निकालते ही अस्मिता की चूत से मेरे वीर्य और उसकी चूत के रस का मिश्रण टपकने लगा और जमीन पर गिरने लगा। उसने अपनी पैंटी उतारी और उससे पहले अपनी चूत को और फिर मेरे लंड को अच्छी तरह से साफ किया। फिर हमने अपने-अपने कपड़े ठीक से पहन लिए, खेत से कुछ ताजी सब्जियां तोड़ीं, और अपनी बाइक पर सवार होकर वापस घर की तरफ चल दिए।
भाग 4 – निष्कर्ष
इस तरह हमने अपने गाँव की उस छुट्टी को केले के खेत में जमकर चुदाई करके बेहद यादगार और मजेदार बना दिया। शहर में तो हम अक्सर ही चुदाई करते रहते हैं, लेकिन गाँव के खेत में बीवी के साथ चुदाई करने का जो मजा आया, वह बिल्कुल ही अलग और अविस्मरणीय था। अस्मिता भी उस दिन बहुत खुश और संतुष्ट थी और हम दोनों ने मिलकर इस पूरे प्लान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
गाँव में खेत में बीवी के साथ चुदाई – यह थी हमारी गाँव की छुट्टियों की सबसे यादगार रात। आज भी जब हम उस दिन को याद करते हैं, तो हम दोनों मुस्कुराते हैं। अस्मिता अब भी उतनी ही सेक्सी और चुदासी है और हमारी सेक्स लाइफ आज भी उतनी ही रोमांचक है जितनी पहले थी।
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