फर्श पर गुस्से में सेक्स – जब बहस के बाद बॉयफ्रेंड ने मुझे बेरहमी से चोदा

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फर्श पर गुस्से में सेक्स – क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक कपल आपस में बहस कर रहा हो, चिल्ला रहा हो, और अचानक वो गुस्सा जुनूनी सेक्स में बदल जाए तो कैसा लगता है? यह हिंदी सेक्स कहानी फर्श पर गुस्से में सेक्स की है जहाँ एक मामूली सी बहस ने ऐसा मोड़ लिया कि गर्लफ्रेंड ने अपने बॉयफ्रेंड को दीवार पर धक्का दिया, उसके होंठ काटे, और फिर बॉयफ्रेंड ने उसे फर्श पर गिराकर उसके कपड़े फाड़ डाले। उसने अपना मोटा लंड उसकी गीली चूत में ज़ोर से घुसाया, फर्श पर लिटाकर बेरहमी से चोदा, और फिर गर्लफ्रेंड ने काउगर्ल पोज़िशन में आकर उसकी लंबाई पूरी अंदर तक ली और उस पर धार मार दी। गुस्सा शांत हुआ, चूत माल से भर गई, और दोनों एक-दूसरे में समा गए। अगर आपको एंग्री सेक्स, जुनूनी चुदाई, और प्यार भरी हिंसा वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।

भाग 1: फर्श पर गुस्से में सेक्स – बेवजह की बहस और बढ़ता गुस्सा

शाम के 7 बज रहे थे। बाहर हल्की बारिश हो रही थी, और दिल्ली की सर्द हवा खिड़कियों से टकरा रही थी। हमारे अपार्टमेंट के अंदर, माहौल बिल्कुल अलग था — गर्म, तनावपूर्ण, और चीखों से भरा हुआ।

“तुमने मुझे फोन क्यों नहीं किया? मैं पूरे दो घंटे से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी!” मैंने चिल्लाकर कहा। मेरी आवाज़ में गुस्सा था, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा एक दर्द था — ये एहसास कि उसने मेरी परवाह नहीं की।

“मैं मीटिंग में था, प्रिया! मैंने तुम्हें पहले ही बता दिया था कि आज मेरी एक इंपॉर्टेंट मीटिंग है!” रोहन ने पलटकर जवाब दिया। उसकी आवाज़ में भी गुस्सा था, लेकिन साथ ही एक थकान भी — ऑफिस की पूरे दिन की भागदौड़ के बाद अब घर पर ये बहस।

प्रिया — यानी मैं — 25 साल की, कद 5 फीट 5 इंच, और शरीर ठीक-ठाक फिट। मैं रोज़ योगा करती हूँ, जिससे मेरा शरीर लचीला और सुडौल है। मेरे बाल लंबे, काले और सीधे हैं, और मेरी त्वचा गोरी है — बिल्कुल दूध जैसी। मेरे स्तन 34C साइज़ के हैं, गोल और उभरे हुए, और मेरी गांड — जैसा रोहन हमेशा कहता है — “किसी गिटार की तरह शेप्ड।” आज मैंने व्हाइट कलर की शर्ट और ब्लैक स्किन-टाइट लेगिंग पहनी हुई थी, जो मेरे शरीर पर बिल्कुल चिपक रही थी। अंदर मैंने ब्लैक लेस वाली ब्रा और मैचिंग जी-स्ट्रिंग पहनी हुई थी। शाम को रोहन के साथ डिनर पर जाने का प्लान था, इसलिए थोड़ा एक्स्ट्रा एफर्ट मारा था।

रोहन — 28 साल का, कद 6 फीट, चौड़े कंधे, और एक एथलेटिक बॉडी जो जिम में घंटों मेहनत करने का नतीजा थी। उसकी बाँहें मज़बूत थीं, छाती चौड़ी थी, और पेट पर हल्के-हल्के एब्स उभरते थे। उसने ऑफिस की ब्लू शर्ट और ग्रे पैंट पहनी हुई थी, जो अब थोड़ी बिगड़ चुकी थी — शर्ट का ऊपरी बटन खुला हुआ था और स्लीव्स कोहनियों तक मुड़ी हुई थीं। उसकी जॉलाइन शार्प थी, और जब वो गुस्से में होता था, तो उसकी आँखों में एक अलग ही आग जलती थी — और आज वो आग मुझे साफ दिख रही थी।

लेकिन आज हम जिस बात पर लड़ रहे थे, वो बहुत छोटी थी — एक मिस्ड कॉल, एक न भेजा गया मैसेज। असल में, न तो मुझे याद है और न ही रोहन को कि लड़ाई की शुरुआत कैसे हुई। शायद ये सिर्फ एक बहाना था — पूरे हफ्ते का जमा हुआ तनाव, ऑफिस की टेंशन, और एक-दूसरे के लिए वक्त न निकाल पाने की कमी। हम दोनों बस एक-दूसरे पर चिल्ला रहे थे, और हर गुज़रते पल के साथ, हमारी आवाज़ें ऊँची होती जा रही थीं।

“तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, रोहन! तुम्हें बस अपने काम से मतलब है!” मैंने कहा, मेरी आवाज़ अब काँप रही थी।

“और तुम्हें बस शिकायतें करने से मतलब है, प्रिया!” रोहन ने पलटकर कहा।

मेरा गुस्सा अब सातवें आसमान पर था। मैंने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं, मेरे नाखून मेरी हथेलियों में गड़ रहे थे। और फिर, बिना कुछ सोचे-समझे, मैंने आगे बढ़कर रोहन की कलाई पकड़ ली।

भाग 2: फर्श पर गुस्से में सेक्स – दीवार पर धक्का, जुनूनी किस और कपड़े फाड़े

“चुप रहो, रोहन! बस… चुप रहो!” मैंने उसकी कलाई कसकर पकड़ते हुए कहा। मेरी आवाज़ में अब गुस्से से ज़्यादा कुछ और था — एक अजीब सी बेताबी, एक अनकही चाहत।

रोहन हैरान रह गया। उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, और वो एक पल के लिए बिल्कुल चुप हो गया। उसने उम्मीद नहीं की थी कि मैं ऐसा करूँगी। लेकिन मैं अब रुकने वाली नहीं थी। मेरे अंदर का गुस्सा अब किसी और ही रूप में बाहर आ रहा था।

मैंने उसे ज़ोर से दीवार की तरफ धकेल दिया। उसकी पीठ दीवार से टकराई, और एक धीमी सी आवाज़ हुई। मैंने उसकी कलाई को दीवार से सटाकर पकड़ रखा था। हमारे चेहरे अब बस कुछ इंच की दूरी पर थे। उसकी साँसें तेज़ थीं, मेरी भी। मैं उसकी आँखों में देख सकती थी — गुस्सा, हैरानी, और कुछ और… कुछ जो मैंने पहले भी देखा था, लेकिन आज वो ज़्यादा तीव्र था।

लेकिन उस पर और चिल्लाने के बजाय, मैंने कुछ ऐसा किया जिसकी न तो उसने उम्मीद की थी, न ही मैंने। मैंने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और उसके होंठों पर एक ज़ोरदार, जुनूनी किस किया। ये कोई प्यार भरा किस नहीं था — ये गुस्से से भरा हुआ, भूख से भरा हुआ, और एक अजीब सी बेताबी से भरा हुआ किस था। मेरी जीभ ने उसके मुँह के अंदर ज़बरदस्ती प्रवेश किया, और मैंने उसके निचले होंठ को अपने दाँतों से हल्का सा काट लिया।

रोहन के मुँह से एक धीमी सी कराह निकली। मैंने उसके होंठ का स्वाद चखा — हल्का नमकीन, हल्का मीठा। और फिर मैंने महसूस किया — उसकी पैंट के अंदर, उसका लंड हरकत कर रहा था। सख्त हो रहा था। बढ़ रहा था। मेरे इस अचानक हमले ने उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर दिया था।

मैंने अपना शरीर उससे सटा दिया और अपनी जाँघ को उसके लंड पर दबाया। मैं जानती थी कि इससे वो पागल हो जाएगा। और हुआ भी ऐसा ही।

“ओह, मुझे पता है कि तुम क्या चाहती हो… छोटी रंडी,” रोहन ने अपनी भारी, कामुक आवाज़ में कहा। उसकी आँखों में अब गुस्सा नहीं था — सिर्फ हवस थी, जुनून था, और एक जानवर जो पिंजरे से बाहर आ चुका था।

और फिर, उसने खुद को मेरी पकड़ से छुड़ाया — इतनी तेज़ी से कि मुझे संभलने का मौका नहीं मिला। उसने मेरी दोनों कलाइयाँ पकड़ीं और मुझे ज़ोर से फर्श पर धकेल दिया। मेरी पीठ ठंडे मार्बल फर्श पर जा लगी, और एक पल के लिए मेरी साँस रुक गई। मैंने अपनी कलाइयों को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसकी पकड़ बहुत मज़बूत थी। उसने मेरी कलाइयों को मेरे सिर के ऊपर फर्श पर दबा रखा था।

“अब तू बोलेगी नहीं, समझी?” रोहन ने गुर्राकर कहा।

उसने एक हाथ से मेरी दोनों कलाइयाँ पकड़ रखी थीं, और दूसरे हाथ से उसने मेरी व्हाइट शर्ट का कॉलर पकड़ा और एक ही झटके में फाड़ दिया। खट्ट से आवाज़ हुई, और मेरी शर्ट के बटन उछलकर फर्श पर बिखर गए। मेरी ब्लैक लेस वाली ब्रा दिखने लगी, और उसके अंदर मेरे 34C साइज़ के स्तन — जो अब गुस्से और उत्तेजना से लाल हो रहे थे।

रोहन ने मेरी ब्रा को नीचे सरका दिया और अपना मुँह मेरे दाहिने स्तन पर लगा दिया। उसने मेरे निप्पल को अपने दाँतों से पकड़ा और हल्के से काटा। मैंने दर्द और आनंद से एक ज़ोरदार कराह निकाली — “आह… रोहन…”

“चुप! मैंने कहा ना, तू बोलेगी नहीं!” उसने गुर्राकर कहा और मेरे निप्पल को और ज़ोर से चूसने लगा।

मैंने अपनी पीठ पर उसकी पकड़ को महसूस किया — मैंने अपने नाखूनों से उसकी पीठ पर खरोंचें कीं, जितनी ज़ोर से मैं कर सकती थी। “मैं अब भी तुम पर पागल हो रही हूँ!” मैंने चिल्लाकर कहा।

“पागल रहो,” रोहन ने बिना रुके जवाब दिया और मेरे दूसरे स्तन पर भी वही सिलसिला दोहराया।

भाग 3: फर्श पर गुस्से में सेक्स – फर्श पर गिराकर बेरहमी से चूत में लंड डाला

मैंने अपने पैर रोहन की कमर के चारों ओर लपेट लिए। मेरी जाँघों ने उसकी कमर को कसकर जकड़ लिया। इस बीच, रोहन मेरी स्किन-टाइट लेगिंग उतारने की कोशिश कर रहा था। लेकिन लेगिंग इतनी टाइट थी कि वो आसानी से नहीं उतर रही थी। उसने गुस्से में मेरी लेगिंग को खींचा, और कपड़े के फटने की आवाज़ आई। लेगिंग की सिलाई उधड़ गई, और वो धीरे-धीरे नीचे सरकने लगी।

अब मेरी ब्लैक जी-स्ट्रिंग दिख रही थी — बस एक पतली सी पट्टी जो मेरी चूत को ढक रही थी, और पीछे से मेरी गांड की दरार में समाई हुई थी। मेरी गांड के दोनों चूतड़ पूरी तरह खुले हुए थे।

इस पूरे समय, मैं भी खाली नहीं बैठी थी। मैं बेचैनी से रोहन की पैंट का बटन खोल रही थी, उसकी ज़िप नीचे सरका रही थी। मेरी उंगलियाँ काँप रही थीं — गुस्से से नहीं, बल्कि उस बेताबी से जो अब मेरे पूरे शरीर में दौड़ रही थी। मैंने उसकी पैंट और बॉक्सर को एक साथ नीचे सरकाया, और उसका लंड बाहर आ गया।

हे भगवान। रोहन का लंड — मोटा, लंबा, और पूरी तरह से खड़ा हुआ। उसकी लंबाई करीब 7 इंच थी, और मोटाई इतनी कि मेरी उंगलियाँ मुश्किल से उसके चारों ओर बंद हो पाती थीं। उसकी नसें उभरी हुई थीं, और टोपा लाल और चमकदार था — प्री-कम की एक बूँद टोपे पर झलक रही थी। मैंने उसे अपने हाथ में पकड़ा और महसूस किया कि वो कितना गर्म और सख्त था।

लेकिन रोहन ने मुझे ज़्यादा वक्त नहीं दिया। उसने मेरी जी-स्ट्रिंग को साइड में सरकाया और अपने लंड को मेरी चूत के द्वार पर लगा दिया। मेरी चूत पहले से ही पूरी तरह गीली थी — गुस्से ने, बहस ने, और उसकी छुअन ने मुझे पूरी तरह से तैयार कर दिया था। मेरी चूत के होंठ सूजे हुए थे, और मेरा रस मेरी जाँघों पर बह रहा था।

और फिर — बिना किसी चेतावनी के — रोहन ने अपना पूरा 7 इंच का लंड एक ही ज़ोरदार झटके में मेरी चूत में घुसा दिया।

“आआआह… रोहन…” मैं ज़ोर से चीख उठी। मेरी चूत में एक साथ इतना कुछ समा गया कि मेरी साँस रुक गई। दर्द हुआ — तेज़, चुभता हुआ दर्द — लेकिन साथ ही एक ऐसा आनंद भी जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। मेरी चूत की दीवारें उसके मोटे लंड के चारों ओर कस गईं, जैसे उसे कभी छोड़ना नहीं चाहती हों।

रोहन ने मेरी कलाइयों को छोड़ दिया और मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया। उसने मेरे बालों को ज़ोर से खींचा, जिससे मेरा सिर पीछे की तरफ झुक गया। मैंने दर्द से उसके कंधे पर काट लिया — अपने दाँतों से, जितनी ज़ोर से मैं काट सकती थी। उसकी त्वचा का नमकीन स्वाद मेरे मुँह में आ गया।

“शिट… प्रिया…” रोहन कराह उठा, लेकिन उसने चोदना नहीं छोड़ा।

उसने मुझे फर्श पर लिटाकर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। मेरी पीठ ठंडे मार्बल फर्श पर रगड़ खा रही थी, लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। हर धक्के के साथ, उसका लंड मेरी चूत की गहराई में जा रहा था — मेरी जी-स्पॉट पर चोट कर रहा था। कमरे में बस हमारी साँसों की आवाज़ें, फर्श पर शरीर के रगड़ने की आवाज़ें, और “थप-थप-थप” की गीली आवाज़ें गूँज रही थीं।

“हाँ… हाँ… और ज़ोर से… मुझे चोदो… मेरी चूत फाड़ दो…” मैं चीख रही थी। मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे — न जाने गुस्से के, दर्द के, या आनंद के।

मैं महसूस कर सकती थी कि रोहन का लंड मेरी चूत के अंदर फड़फड़ा रहा था — उसकी नसें मेरी चूत की दीवारों से रगड़ खा रही थीं। वो खुद भी कराह रहा था, उसकी साँसें तेज़ थीं, और उसकी आँखों में एक जंगली चमक थी।

भाग 4: फर्श पर गुस्से में सेक्स – काउगर्ल में ली अंगड़ाई, चूत पर धार और माल से भरी चूत

लेकिन मैं अब भी पागल थी। मेरा गुस्सा पूरी तरह से शांत नहीं हुआ था। और मैं ये सब उसके कंट्रोल में नहीं छोड़ना चाहती थी। मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई और रोहन को पलट दिया। अब वो नीचे था, फर्श पर पीठ के बल लेटा हुआ, और मैं उसके ऊपर।

“अब मैं तुम्हें चोदूँगी,” मैंने गुर्राकर कहा।

मैंने उसकी छाती पर अपने हाथ रखे और अपनी चूत को उसके लंड पर सरकाया। एक ही झटके में, मैंने उसका पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया। अब मैं काउगर्ल पोज़िशन में थी — उसके ऊपर, पूरी तरह से कंट्रोल में।

मैंने पागलों की तरह उसे चोदना शुरू कर दिया। मेरी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी — तेज़ी से, बहुत तेज़ी से। हर बार जब मैं नीचे जाती, उसका लंड मेरी चूत की गहराई तक जाता — मेरी सर्विक्स को छूता। मेरे स्तन उछल रहे थे, मेरे बाल बिखर गए थे, और मेरे चेहरे पर पसीना आ गया था।

“हाँ… ऐसे ही… और ज़ोर से…” अब रोहन कराह रहा था। उसके हाथ मेरी कमर पर थे, मुझे और ज़ोर से नीचे खींच रहे थे।

मैं उसके लंड पर तब तक उछलती रही जब तक मुझे नहीं लगा कि मेरी चूत फट जाएगी। मेरी चूत की मांसपेशियाँ उसके लंड को कसकर जकड़ रही थीं, और हर बार जब मैं ऊपर जाती, तो एक गीली “स्क्विश” की आवाज़ आती।

और फिर — वो पल आ गया। मेरा पूरा शरीर अकड़ गया। मेरी आँखें बंद हो गईं। मेरी साँसें रुक गईं। और फिर मेरी चूत से एक ज़ोरदार धार निकली — स्क्वर्ट। पानी की एक तेज़ धार सीधे रोहन के लंड और पेट पर पड़ी। मैं ज़ोर-ज़ोर से चीख रही थी — “आआआह… रोहन… मैं… मैं झड़ रही हूँ…”

मेरा ऑर्गेज़्म इतना तीव्र था कि मेरा पूरा शरीर काँप रहा था। मेरी जाँघें फड़फड़ा रही थीं, और मेरी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी। मैंने रोहन के लंड को अपनी चूत में और कसकर दबा लिया।

और ये सब रोहन के लिए बहुत ज़्यादा था। मेरी चूत का सिकुड़ना, मेरा स्क्वर्ट, मेरी चीखें — सब कुछ। “प्रिया… मैं भी… मैं झड़ रहा हूँ…” उसने कराहते हुए कहा।

उसने अपनी कमर ऊपर उठाई और अपना सारा माल मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया। मैंने महसूस किया कि उसका गर्म, गाढ़ा माल मेरी चूत की दीवारों पर फैल रहा है — बहुत सारा, एकदम गर्म। वो हल्का सा कराहता रहा, और फिर उसका शरीर शिथिल पड़ गया।

मैं भी उसके ऊपर ढह गई। हम दोनों फर्श पर लेटे थे — हाँफते हुए, पसीने से भीगे हुए, और पूरी तरह से संतुष्ट। मेरा गुस्सा कहाँ गायब हो गया, मुझे पता नहीं चला। शायद वो उसके लंड के साथ मेरी चूत से बाहर निकल गया था।

भाग 5: फर्श पर गुस्से में सेक्स – गुस्सा शांत, प्यार बढ़ा और दोबारा चुदाई

कुछ देर तक हम दोनों फर्श पर ही लेटे रहे — एक-दूसरे से लिपटे हुए। मेरी टूटी हुई शर्ट, मेरी फटी हुई लेगिंग, और मेरी जी-स्ट्रिंग इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं। रोहन की पैंट उसके घुटनों तक लटक रही थी, और उसकी शर्ट पसीने से भीग चुकी थी। बाहर बारिश रुक चुकी थी, और खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी।

“हमें ज़्यादा बार लड़ना चाहिए,” रोहन ने हाँफते हुए कहा, और फिर एक हल्की सी हँसी निकल गई।

मैंने उसकी छाती पर एक हल्का सा मुक्का मारा। “शट अप।”

लेकिन मैं भी मुस्कुरा रही थी। मेरा गुस्सा अब पूरी तरह से खत्म हो चुका था। उसकी जगह सिर्फ प्यार था — गहरा, सच्चा, और अब और भी मज़बूत।

“सॉरी,” मैंने फुसफुसाकर कहा। “मुझे नहीं पता कि मैं इतना गुस्सा क्यों हो रही थी।”

“सॉरी मुझे भी बोलना चाहिए,” रोहन ने कहा। “मुझे तुम्हें फोन करना चाहिए था। मीटिंग के बाद भी मैंने वक्त नहीं निकाला।”

हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखने लगे। और फिर, बिना कुछ कहे, हमने एक-दूसरे को कसकर गले लगा लिया।

थोड़ी देर बाद, हम उठे और बाथरूम की तरफ गए। हमने साथ में शॉवर लिया — गर्म पानी के नीचे, एक-दूसरे को धोते हुए। रोहन ने मेरी पीठ पर साबुन लगाया, और मैंने उसकी छाती पर। शॉवर में ही, हमने फिर से किस किया — इस बार बिना गुस्से के, बस प्यार से।

और फिर, शॉवर में ही, रोहन का लंड फिर से खड़ा हो गया। इस बार हमने बहुत धीरे-धीरे, बहुत प्यार से चुदाई की — शॉवर की दीवार से सटकर, गर्म पानी की बौछारों के नीचे। कोई गुस्सा नहीं, कोई जल्दी नहीं — बस प्यार।

रात को, जब हम बिस्तर पर लेटे, तो रोहन ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। “आई लव यू, प्रिया,” उसने फुसफुसाकर कहा।

“आई लव यू टू, रोहन,” मैंने जवाब दिया। “और हाँ… अगली बार जब लड़ना हो, तो याद रखना — फर्श पर गुस्से में सेक्स हमेशा एक ऑप्शन है।”

रोहन हँस पड़ा। “डील।”

और फिर हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए — शांत, संतुष्ट, और पहले से कहीं ज़्यादा प्यार में।

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