बीवी और सहेली के साथ थ्रीसम – 10 दिनों तक चली जबरदस्त चुदाई की हॉट कहानी

⏱️ 28 min read

बीवी और सहेली के साथ थ्रीसम – क्या आपने कभी सोचा है कि एक पति अपनी बीवी और उसकी सहेली को एक साथ चोदकर कितना मज़ा ले सकता है? यह हिंदी सेक्स कहानी बीवी और सहेली के साथ थ्रीसम की है जहाँ रागिनी ने अपनी गोरी और भरी-पूरी सहेली प्रिया को 10 दिनों के लिए बुलाया। तीनों ने मिलकर खूब चुदाई की — बीवी और सहेली एक-दूसरे की चूत चाटती थीं, एक साथ पति का लंड चूसती थीं, और पति ने बारी-बारी से दोनों की चूत और गांड की जोरदार चुदाई की। अगर आपको लेस्बियन, थ्रीसम, और पति-बीवी-सहेली की चुदाई वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।

भाग 1: बीवी और सहेली के साथ थ्रीसम का सपना और प्रिया का बुलावा

मेरी बीवी रागिनी और मेरी शादी को 12 साल हो चुके थे, और हमारी सेक्स लाइफ हमेशा से जबरदस्त रही थी। रागिनी का 40 साल का गोल-मटोल बदन — 42D के बड़े-बड़े बूब्स जो हर ब्लाउज से बाहर झाँकते थे, चिकनी और भारी गांड जो साड़ी के नीचे भी अपनी मौजूदगी का एहसास कराती थी, मोटी-मोटी चिकनी जाँघें जिन्हें देखकर ही मेरा दिल धड़कने लगता था, और गोरी-गोरी त्वचा जो चाँदनी में और भी चमकती थी — ये सब आज भी मेरा लंड एक पल में खड़ा कर देता था। लेकिन 12 साल एक लंबा समय होता है, और हम दोनों के दिलों में एक नई ख्वाहिश जाग रही थी — थ्रीसम की।

रातों को जब हम चुदाई के बाद एक-दूसरे से लिपटे होते, हमारी बातें अक्सर इसी तरफ मुड़ जातीं। “कैसा लगेगा अगर कोई और औरत हमारे साथ हो?” रागिनी मेरे कान में फुसफुसाती। “या कोई और मर्द?” मैं पूछता। और फिर हम घंटों बातें करते — क्या करेंगे, कैसे करेंगे, कौन होगा वो। हमारी ये बातें ही हमें दोबारा गर्म कर देतीं और हम फिर से चुदाई शुरू कर देते।

रागिनी की सबसे अच्छी सहेली थी प्रिया — उसकी बचपन की दोस्त, जिसके साथ उसने स्कूल से लेकर कॉलेज तक का सफर तय किया था। प्रिया अब मुंबई में अकेली रहती थी, एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती थी, और हाल ही में उसका तीन साल पुराना बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हुआ था। रागिनी अक्सर उससे फोन पर घंटों बातें करती, और मुझे पता था कि प्रिया की ज़िंदगी में एक खालीपन है — वो खालीपन जो सिर्फ प्यार और शरीर के मिलन से भरता है।

प्रिया भी रागिनी की तरह ही गोरी और भरी-पूरी थी — 38C के बूब्स, जो उसके पतले शरीर पर और भी बड़े लगते थे, गोल-मटोल गांड जो जींस में कसी रहती थी, और एक शरारती मुस्कान जो किसी भी मर्द को पागल कर सकती थी। उसके बाल लंबे और काले थे, और उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेती थी।

एक रात, जब हम दोनों बिस्तर पर लेटे थे और मैंने अभी-अभी रागिनी की चूत चोदी थी, रागिनी ने अचानक अपना सिर मेरी छाती से उठाया और बोली — “क्यों न प्रिया को बुलाएँ? वो भी अकेली है, और मुझे पता है वो राज़ी हो जाएगी।” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी।

मैंने रागिनी की तरफ हैरानी से देखा। हालाँकि हम थ्रीसम के बारे में बातें करते थे, लेकिन यह पहली बार था जब रागिनी ने कोई असली नाम लिया था। “सच में? तुम प्रिया के साथ…?” मेरी आवाज़ में हैरानी और उत्सुकता दोनों थे।

रागिनी ने मेरी बात पूरी होने से पहले ही अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया और मुस्कुराकर बोली — “हाँ, मैं प्रिया के साथ भी सब कुछ करना चाहती हूँ। उसकी चूत चाटना चाहती हूँ, उसके साथ तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ। और तुम… तुम हम दोनों के साथ जो चाहो कर सकते हो।” उसकी आँखों में एक जंगली चमक थी, और उसका हाथ धीरे-धीरे मेरे लंड की तरफ बढ़ रहा था।

ये सुनते ही मेरा लंड शॉर्ट्स के अंदर ही तन गया। मैंने रागिनी को अपनी तरफ खींच लिया और ज़ोर से चूमने लगा। “तुम कमाल हो,” मैंने उसके होंठों पर फुसफुसाकर कहा। “तो फिर तय है?” रागिनी ने पूछा। “तय है,” मैंने जवाब दिया।

अगले दिन ही रागिनी ने प्रिया को फोन किया। मैं पास ही बैठा था, उनकी बातें सुन रहा था। “प्रिया, तुझे कुछ दिनों के लिए यहाँ आना चाहिए। तेरा ध्यान भी बँटेगा, और हम दोनों साथ में मज़े करेंगे,” रागिनी ने कहा। फिर उसने आवाज़ धीमी की और कुछ ऐसा कहा जो मैं ठीक से नहीं सुन पाया, लेकिन प्रिया की हँसी से लगा कि वो राज़ी हो गई है। बाद में रागिनी ने मुझे बताया कि उसने प्रिया को इशारों-इशारों में बता दिया था कि हम थ्रीसम करना चाहते हैं।

“और वो मान गई?” मैंने पूछा। “हाँ, बल्कि वो तो बहुत एक्साइटेड है,” रागिनी ने मुस्कुराकर कहा। “उसने कहा कि उसे हमेशा से ऐसा कुछ ट्राय करने की इच्छा थी, लेकिन उसके बॉयफ्रेंड के साथ वो इतनी कम्फर्टेबल नहीं थी। हमारे साथ उसे कोई झिझक नहीं है।”

अगले तीन दिन हमने तैयारी में बिताए। रागिनी ने घर को अच्छी तरह सजाया, गेस्ट रूम तैयार किया — हालाँकि हमें पता था कि प्रिया शायद ही उस रूम में सोएगी। उसने नए बेडशीट्स खरीदे, मोमबत्तियाँ खरीदीं, और यहाँ तक कि कुछ सेक्स टॉयज़ भी ऑनलाइन ऑर्डर कर दिए। “प्रिया को सरप्राइज़ देंगे,” उसने आँख मारते हुए कहा।

आखिरकार वो दिन आ गया। प्रिया का फ्लाइट लैंड हुआ और मैं उसे लेने एयरपोर्ट गया। जब प्रिया एयरपोर्ट के गेट से बाहर निकली, तो मेरी नज़रें उस पर ही अटक गईं। उसने व्हाइट कलर की टाइट टॉप पहनी हुई थी जो उसके 38C के बूब्स को बखूबी उभार रही थी, और ब्लैक जींस जो उसकी मोटी गांड पर एकदम फिट थी। उसके बाल खुले हुए थे और उसने हल्का मेकअप किया हुआ था। वो देखने में किसी मॉडल से कम नहीं लग रही थी।

उसने मुझे देखा और एक बड़ी सी मुस्कान दी। “हाय जीजू!” उसने कहा और मेरी तरफ दौड़ पड़ी। गले मिलते हुए उसके बूब्स मेरी छाती से दब गए। वो सिर्फ एक दोस्ताना गले मिलना था, लेकिन मैंने महसूस किया कि उसने मुझे थोड़ा ज़्यादा कसकर पकड़ा था, थोड़ी देर तक पकड़े रखा था। जब वो अलग हुई, तो उसकी आँखों में एक शरारत थी। “रागिनी कहाँ है?” उसने पूछा। “घर पर, तुम्हारा इंतज़ार कर रही है,” मैंने कहा।

कार में बैठते हुए, प्रिया ने अपनी टॉप को थोड़ा एडजस्ट किया और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई। मैंने सोचा — आने वाले 10 दिन मेरी ज़िंदगी के सबसे यादगार दिन होने वाले हैं।

भाग 2: प्रिया का आगमन और बीवी और सहेली के साथ थ्रीसम की पहली शाम

घर पहुँचते ही रागिनी और प्रिया एक-दूसरे से ऐसे चिपकीं जैसे बरसों बाद मिल रही हों। वो चीख रही थीं, हँस रही थीं, एक-दूसरे के गालों पर किस कर रही थीं। “तू कितनी स्लिम हो गई है!” रागिनी चीखी। “और तू तो और भी सेक्सी हो गई है!” प्रिया ने जवाब दिया। दोनों एक-दूसरे की तारीफ कर रही थीं और मैं सिर्फ खड़ा-खड़ा ये सब देख रहा था।

पूरी दोपहर दोनों ने बातों में बिताई — पुरानी यादें, कॉलेज के किस्से, प्रिया के एक्स-बॉयफ्रेंड की बुराई। शाम को मैंने खाना बनाया — चिकन करी, पनीर बटर मसाला, और गार्लिक नान। हम तीनों ने साथ में डिनर किया। रागिनी ने वाइन की दो बोतलें निकालीं, और हमने पीना शुरू किया। वाइन के तीन-चार ग्लास के बाद दोनों का शरीर ढीला पड़ने लगा और उनकी हँसी और भी खिलखिलाने लगी। माहौल गर्म और खुशनुमा था।

वाइन के साथ-साथ, मैंने देखा कि रागिनी और प्रिया के बीच की छुअनें बढ़ने लगी थीं। रागिनी प्रिया के कंधे पर हाथ रखती, प्रिया रागिनी की जाँघ पर हाथ रखती। दोनों एक-दूसरे के करीब आती जा रही थीं, और मैं जानता था कि ये वाइन का नहीं, बल्कि उस चीज़ का असर था जो आने वाली थी।

रात के 11 बजे, जब हम सब हॉल में सोफे पर बैठे थे, रागिनी ने मेरी तरफ देखा और अपनी आँखों से इशारा किया। मैं समझ गया।

“प्रिया, तुम्हें पता है न हमने तुम्हें क्यों बुलाया है?” रागिनी ने प्रिया का हाथ पकड़ते हुए धीरे से पूछा। उसकी आवाज़ नरम थी, लेकिन उसमें एक गहराई थी।

प्रिया ने शर्म से नीचे देखा और धीरे से सिर हिलाया। उसके गाल गुलाबी हो गए थे। “हाँ… रागिनी ने बताया था… और मैं… मैं भी ये सब करना चाहती हूँ।” उसकी आवाज़ काँप रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी — वो चमक जो उत्तेजना, डर, और चाहत का मिश्रण थी।

“डरो मत,” रागिनी ने प्रिया का चेहरा अपने हाथों में लिया। “हम दोनों तुम्हारे साथ हैं। हम धीरे-धीरे शुरू करेंगे। तुम जितना कम्फर्टेबल हो, उतना ही करना। कोई ज़बरदस्ती नहीं।”

प्रिया ने रागिनी की आँखों में देखा और फिर मेरी तरफ देखा। उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई। “मैं रेडी हूँ,” उसने कहा।

“तो फिर आओ,” रागिनी बोली, और प्रिया का हाथ पकड़कर उसे सोफे से उठाकर बेडरूम की तरफ ले जाने लगी। दोनों के पीछे-पीछे मैं भी चल दिया। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और मेरा लंड मेरी पैंट में तन चुका था। बेडरूम का दरवाज़ा जैसे किसी नई दुनिया का दरवाज़ा था।

भाग 3: बीवी और सहेली के साथ थ्रीसम – पहली रात जब दोनों ने मिलकर लंड चूसा

बेडरूम में हल्की रोशनी थी। मैंने जानबूझकर सिर्फ बेडसाइड लैंप जलाया था, जिसकी पीली रोशनी पूरे कमरे को एक गर्म और रोमांटिक माहौल दे रही थी। रागिनी ने पहले ही कमरे को तैयार कर रखा था — बिस्तर पर साफ सफेद चादर, तकियों का ढेर, और एक छोटी सी टेबल पर तेल की बोतलें और लुब्रिकेंट।

रागिनी ने प्रिया को अपनी तरफ खींचा और बिना किसी हिचकिचाहट के, सीधे उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो प्रिया थोड़ा सकपकाई — उसकी आँखें खुली रहीं, उसका शरीर अकड़ गया — लेकिन फिर, जैसे ही रागिनी ने अपनी जीभ प्रिया के होंठों पर फिराई, प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और रागिनी के होंठों को चूसने लगी। यह एक कोमल, धीमा, और बेहद कामुक चुम्बन था — दो सहेलियाँ, सालों की दोस्त, अब एक-दूसरे को एक नए तरीके से जान रही थीं।

मैं वहीं खड़ा-खड़ा ये सब देख रहा था — मेरी बीवी और उसकी सहेली एक-दूसरे को चूम रही थीं। यह नज़ारा मेरी कल्पना से भी ज़्यादा खूबसूरत था। मेरा लंड अब पूरी तरह तन चुका था और मेरी पैंट में दर्द कर रहा था।

रागिनी ने प्रिया का टॉप उतार दिया। प्रिया के गोरे कंधे और उसकी काली लेस वाली ब्रा दिखने लगी। प्रिया ने जवाब में रागिनी की साड़ी का पल्लू सरका दिया और उसके कंधे खुले। रागिनी ने प्रिया की ब्रा का हुक खोला और उसके 38C के बूब्स बाहर आ गए — गोल, मुलायम, गोरी त्वचा पर गुलाबी निप्पल जो अभी से खड़े हो चुके थे। प्रिया ने भी रागिनी का ब्लाउज खोला और उसकी ब्रा उतार दी — रागिनी के 42D के बड़े-बड़े बूब्स बाहर निकल आए, भारी और रसीले।

दोनों एक-दूसरे के बूब्स को चूसने लगीं। रागिनी ने प्रिया के निप्पल को अपने मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं और उसके मुँह से हल्की सिसकारी निकली — “उन्ह्ह… रागिनी…” रागिनी ने प्रिया के दोनों बूब्स को अपने हाथों में लिया और ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगी। प्रिया ने भी रागिनी के बूब्स को पकड़ा और उसके निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगी।

“आओ न,” रागिनी ने बीच में ही रुककर मुझे बुलाया, उसकी आवाज़ भारी और हवस से भरी थी।

मैंने अपने कपड़े उतारे — शर्ट, पैंट, बॉक्सर — सब कुछ। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था — 7 इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा हुआ, टोपा लाल और चमकदार। प्रिया ने मेरे लंड को देखा और उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। “इसे चूसो, प्रिया,” रागिनी ने कहा, जैसे कोई आदेश नहीं, बल्कि एक न्योता दे रही हो।

प्रिया ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया — उसकी छुअन गर्म और नरम थी, उसकी उंगलियाँ मेरे लंड की मोटाई को नाप रही थीं। उसने पहले लंड को करीब से देखा, फिर धीरे-धीरे अपना मुँह पास ले गई और टोपे पर एक हल्का सा किस किया। फिर उसने अपने होंठ खोले और मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। उसी समय रागिनी भी नीचे आई और उसने मेरे बॉल्स को अपने मुँह में ले लिया।

हे भगवान! दो औरतें — मेरी बीवी और उसकी सहेली — एक साथ मेरा लंड चूस रही थीं। प्रिया टोपा चूसती, अपनी जीभ से टोपे के छेद पर फिराती, तो रागिनी बॉल्स चाटती, दोनों गोटियों को बारी-बारी से मुँह में लेती। फिर दोनों स्विच करतीं — प्रिया बॉल्स मुँह में लेती और अपनी जीभ से सहलाती, और रागिनी पूरा लंड गले तक ले जाती। रागिनी का गला खुल चुका था और वो मेरे पूरे 7 इंच के लंड को आसानी से निगल रही थी। प्रिया ये देखकर हैरान थी और उसकी आँखों में प्रशंसा और उत्सुकता दोनों थे।

मैं कराह उठा — “ओह… तुम दोनों… कमाल हो… ये तो स्वर्ग है…”

करीब 15 मिनट तक दोनों ने मिलकर मेरा लंड चूसा। कभी दोनों साथ में टोपे को चूमतीं, कभी दोनों की जीभें मेरे लंड पर आपस में लड़तीं। मेरा शरीर काँप रहा था और मैं खुद को झड़ने से रोकने की कोशिश कर रहा था। आखिरकार मैंने रागिनी का सिर पकड़कर उसे हटाया और कहा — “रुको, वरना मैं अभी झड़ जाऊँगा।”

भाग 4: बीवी और सहेली एक-दूसरे की चूत चाटती हैं और पति प्रिया की चूत चोदता है

रागिनी ने प्रिया को बिस्तर पर लिटा दिया। प्रिया अब सिर्फ अपनी लाल रंग की लेस पैंटी में थी। रागिनी ने धीरे-धीरे प्रिया की जींस उतारी थी, और अब वो सिर्फ उस पतली सी पैंटी में थी, जो उसकी चूत और गांड को बमुश्किल ढक रही थी। पैंटी के कपड़े पर पहले से ही गीलापन का एक धब्बा फैल चुका था — प्रिया की चूत का रस उसकी पैंटी को भिगो रहा था। रागिनी ने प्यार से अपनी उंगलियाँ प्रिया की जाँघों पर फिराईं, उसकी त्वचा की गर्माहट को महसूस किया, और फिर धीरे-धीरे प्रिया की पैंटी उतार दी। प्रिया पूरी तरह नंगी हो गई।

प्रिया का नंगा शरीर बिस्तर पर ऐसे बिछा हुआ था जैसे कोई संगमरमर की मूर्ति — गोरी-गोरी त्वचा, 38C के गोल-मटोल बूब्स जिनके निप्पल भूरे और खड़े हुए थे, पतली कमर, चौड़े कूल्हे, और उसकी चूत — उसकी चूत पर हल्के-हल्के भूरे बाल थे, एक सुंदर तिकोनी आकृति में, और उसके चूत के होंठ गुलाबी और गीले थे, आपस में चिपके हुए। उसकी जाँघें मोटी और चिकनी थीं, और उसकी गांड — उसकी गांड गोल-मटोल और उभरी हुई थी, जिसे देखकर ही मेरा लंड और सख्त हो गया।

रागिनी प्रिया की टाँगों के बीच आ गई। उसने प्रिया की जाँघों को चौड़ा किया और अपना चेहरा प्रिया की चूत के सामने ले गई। उसने पहले प्रिया की चूत को करीब से देखा — उसके गीले होंठ, उसकी उभरी हुई क्लिट — और फिर अपनी जीभ निकालकर प्रिया की चूत के बाहरी होंठों पर फिराई। प्रिया का शरीर एकदम से अकड़ गया और उसके मुँह से एक दबी हुई चीख निकली — “आआह… रागिनी…”

“चुप, चुप… मुझे करने दे,” रागिनी ने फुसफुसाकर कहा और फिर से अपनी जीभ प्रिया की चूत पर फिराने लगी। वो प्रिया की चूत के होंठों को चाट रही थी, उन्हें अपने मुँह में लेकर चूस रही थी, अपनी जीभ से प्रिया की क्लिट पर गोल-गोल घुमा रही थी। प्रिया की सिसकारियाँ अब तेज़ हो गई थीं — “उन्ह्ह… उन्ह्ह… ओह रागिनी… तू तो कमाल कर रही है… मुझे नहीं पता था कि तू ऐसा भी कर सकती है…”

रागिनी ने प्रिया की चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाल दीं और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगी, जबकि उसकी जीभ अब भी प्रिया की क्लिट पर काम कर रही थी। प्रिया की चूत से रस बहने लगा — पारदर्शी, चिपचिपा, और मीठी खुशबू वाला — जो रागिनी की उंगलियों और ठोड़ी पर चमक रहा था। रागिनी प्रिया की चूत को ऐसे चाट और चूस रही थी जैसे कोई भूखी औरत हो, जिसे सालों बाद खाना मिला हो।

“अब तुम,” रागिनी ने मेरी तरफ देखकर कहा, उसका चेहरा प्रिया के रस से चमक रहा था। “इसकी चूत चोदो।”

मैं बिना एक पल गँवाए प्रिया की टाँगों के बीच आ गया। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था और उस पर पहले से ही प्रिया और रागिनी की लार चमक रही थी। मैंने प्रिया की चूत के होंठों पर अपने लंड का टोपा रगड़ा — वो इतनी गीली थी कि मेरा लंड फिसल रहा था। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने होंठ काट लिए। “धीरे से… प्लीज़… बहुत दिनों बाद…” उसने फुसफुसाकर कहा।

मैंने धीरे-धीरे अपना लंड प्रिया की चूत में डालना शुरू किया। उसकी चूत टाइट थी — रागिनी की चूत से भी ज़्यादा टाइट — और गर्म। मेरा लंड इंच-इंच करके अंदर जा रहा था, और प्रिया की चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं। “आआह… जीजू…” प्रिया कराह उठी। आखिरकार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया।

मैंने धक्के देना शुरू किया — पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़, फिर और तेज़। प्रिया की चूत से चुचु… चुचु… की आवाज़ें आ रही थीं और उसका रस मेरे लंड और उसकी जाँघों पर फैल रहा था। रागिनी मेरे पीछे आ गई और उसने मेरी गांड को पकड़कर मुझे और ज़ोर से धक्के मारने के लिए प्रोत्साहित किया। “चोदो इसको ज़ोर से… इसकी चूत तोड़ दो…” वो फुसफुसा रही थी।

प्रिया अब पूरी तरह चीख रही थी — “ओह… ओह… ओह… जीजू… मैं झड़ रही हूँ… मैं झड़ रही हूँ… आआआह!” उसका शरीर अकड़ गया, उसकी टाँगें काँपने लगीं, और उसकी चूत की मांसपेशियों ने मेरे लंड को इतनी ज़ोर से जकड़ा कि मैं भी कराह उठा। वो झड़ गई — ज़ोर से, पूरी तरह।

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और रागिनी की तरफ देखा। “अब तुम्हारी बारी,” मैंने कहा। रागिनी मुस्कुराई और अपनी टाँगें फैलाकर बिस्तर पर लेट गई।

भाग 5: प्रिया की गांड चुदाई की तैयारी और रागिनी की ट्रेनिंग

रागिनी को चोदने के बाद, मैंने देखा कि प्रिया अब पूरी तरह रिलैक्स हो चुकी थी। उसकी आँखों में अब वो शर्म और झिझक नहीं थी जो शाम को थी। अब वो बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी, उसके बूब्स पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं, और उसकी चूत से मेरा और उसका मिला-जुला रस बह रहा था।

“प्रिया,” मैंने उसके पास जाकर कहा, “क्या तुमने कभी गांड चुदाई करवाई है?”

प्रिया का चेहरा एकदम से लाल हो गया। उसने शर्म से अपना चेहरा तकिए में छिपा लिया और धीरे से सिर हिलाया — “नहीं… कभी नहीं… मेरे एक्स ने एक बार कोशिश की थी, पर इतना दर्द हुआ कि मैंने मना कर दिया।”

रागिनी उठकर प्रिया के पास आई और उसके बालों को सहलाने लगी। “डरो मत, प्रिया। गांड चुदाई में दर्द सिर्फ शुरू में होता है। बाद में उससे ज़्यादा मज़ा और किसी चीज़ में नहीं आता। देख, मैं तुझे दिखाती हूँ।”

रागिनी ने मेरी तरफ देखा और कहा — “मेरी गांड चोदो। प्रिया को दिखाओ कि ये कितना मज़ेदार होता है।”

मैंने रागिनी को कुतिया पोज़ में लिटा दिया — उसके घुटने और हाथ बिस्तर पर, उसकी कमर हवा में, उसकी बड़ी गांड पूरी तरह खुली हुई। मैंने लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और रागिनी की गांड के छेद पर उदारता से लगाया। मेरी उंगलियाँ उसके छेद के चारों ओर गोल-गोल घूम रही थीं, लुब्रिकेंट को अंदर तक पहुँचा रही थीं। प्रिया करीब से ये सब देख रही थी — उसकी आँखें चौड़ी थीं, उसकी साँसें तेज़ थीं, और उसका एक हाथ अपनी चूत पर था।

“देख, प्रिया,” रागिनी ने कहा, “पहले लुब्रिकेंट लगाना ज़रूरी है। फिर धीरे-धीरे लंड अंदर डालना। पहले थोड़ा दर्द होगा, लेकिन फिर… ओह… फिर तो बस मज़ा ही मज़ा है।”

मैंने अपना लंड रागिनी की गांड के छेद पर सेट किया और धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया। रागिनी की गांड का छेद खिंच रहा था, लेकिन वो आराम से मेरा लंड ले रही थी। जल्द ही मेरा पूरा लंड उसकी गांड में समा गया। “आआह… हाँ… ऐसे ही…” रागिनी कराह उठी।

मैंने रागिनी की गांड चोदना शुरू किया — पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़। रागिनी अपनी कमर पीछे धकेल रही थी और ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी। “देख प्रिया… देख… कितना मज़ा आ रहा है… ओह… मेरी गांड… चोदो मेरी गांड…”

प्रिया ये सब देखकर मंत्रमुग्ध थी। उसकी उंगलियाँ अब उसकी अपनी चूत के अंदर थीं और वो खुद को मसल रही थी। रागिनी को झड़ते देख — जब उसका शरीर अकड़ गया और वो ज़ोर-ज़ोर से चीखी — प्रिया ने अपनी साँस रोक ली। उसने ऐसा चरमसुख पहले कभी नहीं देखा था।

मैंने रागिनी की गांड से अपना लंड निकाला और प्रिया की तरफ मुड़ा। “अब तुम्हारी बारी,” मैंने मुस्कुराकर कहा।

प्रिया ने एक गहरी साँस ली और सिर हिलाया। “ठीक है… मैं तैयार हूँ।”

भाग 6: बीवी और सहेली के साथ थ्रीसम – प्रिया की गांड चुदाई और रुलाई

प्रिया को मैंने बिस्तर पर पेट के बल लिटा दिया। उसकी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया ताकि उसकी गांड थोड़ी ऊपर उठी रहे। रागिनी प्रिया के पास बैठ गई और उसके बालों को सहलाने लगी, उसके कान में प्यार से फुसफुसाने लगी — “डरो मत… मैं हूँ ना… सब अच्छा होगा…”

मैंने लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और प्रिया की गांड के छेद पर खूब सारा लुब्रिकेंट लगाया। मेरी उंगली जैसे ही उसके छेद पर गई, प्रिया का शरीर अकड़ गया। “आह… ठंडा है…” वो बोली। रागिनी ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा — “बस शुरू में ठंडा लगता है, फिर तो तुझे पता भी नहीं चलेगा।”

मैंने पहले एक उंगली प्रिया की गांड में डाली। उसकी गांड का छेद रागिनी से भी ज़्यादा टाइट था — एकदम कुंवारी। प्रिया कराह उठी — “आह… जीजू… धीरे…” मैंने अपनी उंगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर की, उसके छेद को ढीला करने की कोशिश कर रहा था। फिर मैंने दूसरी उंगली डाली। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं, लेकिन उसने अपने आप को रिलैक्स करने की कोशिश की।

“बस… अब लंड डालने का समय है,” मैंने कहा और अपने लंड पर और लुब्रिकेंट लगाया।

मैंने अपने लंड का टोपा प्रिया की गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे दबाव डालना शुरू किया। प्रिया का छेद खिंचने लगा — वो इतना टाइट था कि मेरे लंड का आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा था। “आआआह… दर्द हो रहा है… जीजू… प्लीज़…” प्रिया की आँखों से आँसू निकल आए।

“रुको मत,” रागिनी ने मुझसे कहा, “एक बार अंदर चला जाए तो दर्द खत्म हो जाता है।” फिर उसने प्रिया का चेहरा अपने हाथों में लिया और बोली — “प्रिया, मेरी तरफ देख। बस मेरी आँखों में देख। दर्द बस कुछ सेकंड का है।”

प्रिया ने रागिनी की आँखों में देखा, और मैंने एक ज़ोरदार लेकिन कंट्रोल्ड धक्का मारा। मेरा लंड का टोपा उसकी गांड के छेद के अंदर चला गया। प्रिया ज़ोर से चीखी — “आआआह!” — और उसके आँसू बह निकले। उसने रागिनी का हाथ इतनी ज़ोर से पकड़ा कि रागिनी की उंगलियाँ सफेद पड़ गईं।

“बस… बस हो गया… अब दर्द कम हो जाएगा…” रागिनी उसे चुप करा रही थी, उसके माथे पर किस कर रही थी।

मैंने अपना लंड वहीं रोक दिया — बस टोपा अंदर था, बाकी लंड बाहर। करीब एक मिनट तक मैं ऐसे ही रहा, प्रिया के छेद को मेरे लंड की आदत पड़ने दे रहा था। प्रिया की साँसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं।

“अब… अब ठीक है… थोड़ा और अंदर डालो…” प्रिया ने खुद कहा, उसकी आवाज़ में दर्द कम और उत्सुकता ज़्यादा थी।

मैंने धीरे-धीरे अपना लंड और अंदर सरकाना शुरू किया — आधा, फिर थोड़ा और, फिर पूरा। जल्द ही मेरा पूरा 7 इंच का लंड प्रिया की गांड के अंदर था। “ओह… मेरी गांड… भर गई…” प्रिया कराह उठी, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में आनंद था।

मैंने धीरे-धीरे धक्के देना शुरू किया। प्रिया अब भी कराह रही थी, लेकिन अब वो दर्द की नहीं, बल्कि एक नए आनंद की कराह थी। “ओह… जीजू… ये तो… ये तो बहुत अच्छा लग रहा है…” प्रिया बोली।

रागिनी ने प्रिया के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और दोनों एक-दूसरे को चूमने लगीं, जबकि मैं प्रिया की गांड चोद रहा था। कमरे में तीनों की साँसें, कराहें, और थप-थप की आवाज़ें गूँज रही थीं।

करीब 10 मिनट तक मैंने प्रिया की गांड चोदी, और फिर आखिरकार प्रिया झड़ गई — उसकी गांड की मांसपेशियों ने मेरे लंड को इतनी ज़ोर से जकड़ा कि मैं भी रुक नहीं पाया और मैंने भी उसकी गांड में ही झड़ गया। मेरा गर्म माल उसकी गांड के अंदर भर गया।

“देखा प्रिया,” रागिनी ने मुस्कुराकर कहा, “गांड चुदाई का मज़ा ही कुछ और है।”

प्रिया बस मुस्कुराई, उसकी आँखें बंद थीं और उसका चेहरा संतुष्टि से चमक रहा था। “तुम दोनों… तुम दोनों ने तो मेरी ज़िंदगी बदल दी,” उसने फुसफुसाकर कहा।

भाग 7: दोनों की बारी-बारी से चूत और गांड चुदाई – 10 दिन का रूटीन

वो पहली रात हम तीनों के लिए एक नई शुरुआत थी। अगले 10 दिनों का हमारा एक अनकहा रूटीन बन गया था। सुबह उठते, नाश्ता करते, और फिर दिन के किसी न किसी हिस्से में हमारी चुदाई शुरू हो जाती। कभी सुबह-सुबह, जब धूप खिड़की से कमरे में आ रही होती, तो कभी दोपहर की आलस भरी गर्मी में, और हर रात तो जैसे हमारी चुदाई के लिए ही बनी थी।

रूटीन कुछ ऐसा था — मैं बारी-बारी से दोनों की चूत चोदता, फिर दोनों की गांड। कभी रागिनी पहले, तो कभी प्रिया। दोनों एक-दूसरे से मुकाबला करतीं — कौन ज़्यादा देर तक टिकेगा, कौन ज़्यादा ज़ोर से चीखेगा, कौन ज़्यादा बार झड़ेगा।

एक सुबह, मैंने रागिनी को डॉगी स्टाइल में चोदा और प्रिया को उसके चेहरे के सामने बैठा दिया ताकि रागिनी प्रिया की चूत चाट सके जब मैं उसकी गांड चोद रहा था। दूसरी शाम, मैंने प्रिया को काउगर्ल पोज़िशन में बैठाया और रागिनी को मेरे पीछे बैठाकर मेरे बॉल्स चूसने को कहा। तीसरी रात, मैंने दोनों को एक-दूसरे के सामने लिटाकर बारी-बारी से दोनों की चूत और गांड चोदी — रागिनी की चूत में 5 मिनट, फिर प्रिया की गांड में 5 मिनट, फिर स्विच।

रागिनी प्रिया को सिखाती रहती — “देख, गांड चुदाई में कमर को ऐसे घुमाना… जीभ को ऐसे चलाना…” प्रिया हर दिन कुछ नया सीख रही थी, और हर दिन वो सेक्स में और भी निखरती जा रही थी।

भाग 8: कौन ज़्यादा देर तक लंड चूस सकती है – गेम और इनाम की रात

आठवीं रात को, रागिनी ने एक गेम प्रपोज़ किया — “चलो देखते हैं, हम दोनों में से कौन ज़्यादा देर तक लंड चूस सकती है। जो जीतेगी, उसे इनाम मिलेगा — एक घंटे तक सिर्फ उसी के साथ चुदाई।”

प्रिया मान गई। दोनों मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गईं — रागिनी बाईं तरफ, प्रिया दाईं तरफ। मैंने टाइमर सेट किया।

“शुरू!” मैंने कहा और दोनों मेरे लंड पर टूट पड़ीं। रागिनी ने अपने गले तक मेरा लंड ले लिया, प्रिया ने अपनी जीभ से मेरे टोपे पर गोल-गोल घुमाना शुरू किया। फिर दोनों स्विच करतीं — रागिनी बॉल्स चूसती, प्रिया लंड चूसती। दोनों की जीभें मेरे लंड पर आपस में लड़तीं, दोनों के होंठ मेरे लंड को शेयर करते।

करीब 20 मिनट बाद, प्रिया की गति धीमी पड़ने लगी। उसका जबड़ा दुखने लगा था। लेकिन रागिनी — मेरी बीवी — अभी भी पूरे जोश से मेरा लंड चूस रही थी, उसका गला खोलकर, बिना रुके। आखिरकार प्रिया ने हार मान ली और रागिनी विजेता बनी।

“चल अब, इनाम ले,” मैंने रागिनी से कहा और उसे बिस्तर पर लिटाकर अगले एक घंटे तक सिर्फ उसी के साथ चुदाई की। प्रिया पास बैठकर देखती रही, अपनी चूत मसलती रही, और कभी-कभी आगे बढ़कर रागिनी के बूब्स चूसती रही।

भाग 9: बाथरूम में लेस्बियन प्ले और गांड चुदाई का चस्का

अब प्रिया को गांड चुदाई का चस्का लग चुका था। वो अक्सर खुद ही आकर कहती — “जीजू, आज मेरी गांड चोदो ना…” और हर बार वो और ज़्यादा माँगती। उसकी गांड का छेद अब पहले से थोड़ा ढीला हो गया था और वो बिना दर्द के आराम से मेरा लंड ले लेती थी।

एक सुबह, मैं बेडरूम में सो रहा था कि बाथरूम से आवाज़ें आने लगीं। मैंने उठकर देखा तो बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा खुला था। अंदर झाँका तो देखा कि रागिनी और प्रिया शॉवर के नीचे खड़ी थीं — दोनों नंगी, दोनों के शरीर पर साबुन का झाग, और दोनों एक-दूसरे को चूम रही थीं। रागिनी ने प्रिया को दीवार से सटा रखा था और उसकी चूत पर अपनी जाँघ रगड़ रही थी। प्रिया रागिनी के बूब्स को दबा रही थी और दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं।

“तुम लोग मेरे बिना ही शुरू हो गईं?” मैंने मुस्कुराकर कहा और अंदर चला गया।

“आ जाओ जीजू,” प्रिया ने अपनी गीली उंगली से मुझे इशारा किया, “आज हम दोनों को एक साथ चोदो।”

मैंने शॉवर के नीचे ही प्रिया को दीवार से सटाकर उसकी गांड चोदी, और रागिनी मेरे पीछे खड़ी होकर मेरी गांड को सहला रही थी और प्रिया के बूब्स को दबा रही थी। शॉवर का गर्म पानी हम तीनों पर गिर रहा था और हम तीनों एक-दूसरे में खोए हुए थे।

भाग 10: बीवी और सहेली के साथ थ्रीसम – आखिरी रात, अलविदा और अगली प्लानिंग

10 दिन कैसे बीत गए, हमें पता ही नहीं चला। आखिरी रात, हमने कुछ खास नहीं किया — बस धीरे-धीरे, प्यार से एक-दूसरे को चूमा, सहलाया, और चोदा। तीनों एक-दूसरे से लिपटकर सोए।

सुबह प्रिया का फ्लाइट था। एयरपोर्ट पर, रागिनी की आँखों में आँसू थे और प्रिया भी भावुक थी। “मैं फिर आऊँगी,” प्रिया ने वादा किया। “और इस बार, शायद एक और दोस्त को भी लाऊँ।”

“ज़रूर,” मैंने मुस्कुराकर कहा, “हम इंतज़ार करेंगे।”

प्रिया ने रागिनी को गले लगाया, फिर मुझे गले लगाया — इस बार उसने मुझे थोड़ा ज़्यादा कसकर पकड़ा। जब वो अलग हुई, तो उसकी आँखों में वही शरारती चमक थी जो 10 दिन पहले थी। “अगली बार, मैं गेम जीतूँगी,” उसने आँख मारते हुए कहा।

कार में वापस आते हुए, रागिनी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुस्कुराकर बोली — “तो, अगली बार प्रिया अपनी कज़िन को लाएगी।”

मैंने रागिनी की तरफ देखा और हम दोनों ज़ोर से हँस पड़े। ज़िंदगी में मज़े लेने का एक ही मौका मिलता है — और हम उसे पूरी तरह जीना चाहते हैं।

📲 इस कहानी को अपने करीबी दोस्तों के साथ शेयर करें 😉

Leave a Comment