बॉस और रिसेप्शनिस्ट की चुदाई – रोमांटिक लव स्टोरी

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बॉस और रिसेप्शनिस्ट की चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक ऑफिस बॉस और उसकी रिसेप्शनिस्ट के बीच प्यार हो जाए, ईर्ष्या हो, गुस्सा हो, और फिर धीरे-धीरे वो प्यार गहरी चुदाई तक पहुँच जाए, तो वो सफर कितना रोमांचक और रोमांटिक हो सकता है? यह हिंदी सेक्स कहानी बॉस और रिसेप्शनिस्ट की चुदाई की है जहाँ सूरज नाम का एक ऑफिस बॉस अपनी रिसेप्शनिस्ट सना के प्यार में पड़ गया। सना — 5’6″ लंबी, गोरी-चिट्टी, और 34-28-36 के ज़बरदस्त फिगर वाली — ने पहले सूरज को अपनी ओर आकर्षित किया, फिर ईर्ष्या में आकर उसका लंड काटा, फिर माफी माँगी, और फिर ऑफिस में ही चुपके-चुपके किस किए। एक दिन सूरज सना को अपने घर ले गया, जहाँ सना ने पहली बार उसका लंड चूसा, चॉकलेट लगाकर चाटा, और अपनी चूत चटवाई। फिर सूरज ने पहले सना की गांड चोदी, और फिर बिना कंडोम के उसकी कुँवारी चूत तोड़ी। खून, आँसू, दर्द और फिर ज़बरदस्त आनंद — सब कुछ उस रात हुआ। 4 साल तक दोनों ने साथ रहकर हर दिन सेक्स किया और आखिर में शादी कर ली। अगर आपको ऑफिस रोमांस, बॉस-एम्प्लॉयी लव स्टोरी, पहली चुदाई, गांड चुदाई और सच्चे प्यार वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।

भाग 1: बॉस और रिसेप्शनिस्ट की चुदाई – सना से पहली मुलाकात और ऑफिस में नज़दीकियाँ

मेरा नाम सूरज है। मैं एक ऑफिस चलाता हूँ — अपनी खुद की कंपनी, जिसे मैंने सालों की मेहनत से खड़ा किया था। मेरे ऑफिस की एक ब्रांच मैंने पुणे में शुरू की थी। पुणे — आईटी हब, नौकरी के लिए देश भर से आए जवान लड़के-लड़कियाँ, और एक अलग ही माहौल। तो हमारी शाखा में मुझे एक लड़की को रिसेप्शन की नौकरी पर रखना था। रिसेप्शनिस्ट — ऑफिस का चेहरा, जो भी आए सबसे पहले उसी से मिले। तो मेरे एक दोस्त ने एक लड़की को मेरे पास भेजा।

उसका नाम सना था, और वो दिखने में एकदम माल लगती थी। जब मैंने उसे पहली बार देखा, तो मैं कुछ सेकंड के लिए भूल ही गया कि मैं कहाँ हूँ और क्या कर रहा हूँ। वो एकदम गोरी-चिट्टी थी — इतनी गोरी कि लगता था दूध से नहाई हो। उसकी हाइट 5’6 फीट है और उसका सेक्सी फिगर साइज़ 34-28-36 है — परफेक्ट ऑवरग्लास, जिसे देखकर कोई भी मर्द पागल हो सकता है। जो भी उसे देखता था, वो उसका दीवाना हो जाता था। और मैं भी उन्हीं में से एक था।

जिस दिन वो आई, उसने सफेद रंग का सलवार कमीज़ पहना हुआ था, बालों में हल्की सी चमेली की खुशबू थी, और उसकी मुस्कान… उसकी मुस्कान तो जैसे पूरे ऑफिस को रोशन कर गई। मैं उसे देखता ही रह गया। मैंने उसको उसका केबिन दिखाया और वो वहाँ बैठ गई। धीरे-धीरे वो काम करने लग गई, ऑफिस का कोई भी काम होता तो वो आराम से कर लेती थी। फोन अटेंड करना, क्लाइंट्स को हैंडल करना, फाइल्स मैनेज करना — सब कुछ वो बड़ी आसानी से कर लेती थी।

हम दोनों के बीच में व्हाट्सएप चैटिंग भी शुरू हो गई थी। पहले तो सिर्फ ऑफिस के काम की बातें होती थीं — “सर, कल की मीटिंग का टाइम क्या है?” या “सर, आपका टिफिन मंगवा दूँ?” लेकिन धीरे-धीरे बातें पर्सनल होने लगीं। कभी वो मेरा टिफिन लेकर आती थी, तो कभी मैं होटल से उसके लिए खाना ले आता था। वो मुझे बताती कि उसे क्या पसंद है — पनीर टिक्का, चिकन बिरयानी, और चॉकलेट शेक। और मैं चुपके से उसकी पसंद की चीज़ें मंगवा देता।

एक दिन मैं ऑफिस में बैठा हुआ था, तो कुछ लड़कियाँ मेरे पास आईं और वो मेरे बहुत करीब खड़ी हुई थीं। वो मुझसे कुछ काम के बारे में पूछ रही थीं, और उनमें से एक लड़की ने तो मेरी टेबल पर झुककर मुझे कुछ दिखाया भी। तो सना ने उन सब लड़कियों को डाँट दिया — “आप लोगों को काम नहीं है क्या? अपनी-अपनी सीट पर जाइए।” मैं समझ गया कि ये मुझ पर अब लाइन मार रही है। पर मैं ये पता करने के लिए दो लड़कियों के साथ फिल्म देखने का प्लान बनाने में लग गया — बस उसे थोड़ा और जलाने के लिए।

जब मैं फिल्म देखने गया तो उसने फिल्मों की टिकटें सँभाल कर रखीं, और सुबह एक बार ऑफिस के टेबल पर छोड़ कर चला गया। फिर जब वो आई तो उसने 3 टिकटें देखीं — तीन टिकटें, मतलब मैं और दो लड़कियाँ। कुछ देर बाद मैं वापस आया तो वो मुझसे बात नहीं कर रही थी। मैंने उसे आवाज़ लगाई तो वो आई, पर वो मुझसे बात नहीं कर रही थी। फिर मैंने उससे चाय मंगवाई तो उसने मुझे मना कर दिया और वो बोली —

“आप उन लड़कियों को चाय पिलाइए जिनके साथ आप फिल्म देखने गए थे।”

भाग 2: ईर्ष्या, गुस्सा और पहला किस – दरवाज़ा बंद करके रोमांस

मैं समझ गया कि अब इसे पूरी आग लग चुकी है। उसकी आँखों में गुस्सा था, लेकिन उस गुस्से के पीछे कुछ और था — प्यार, अपनापन, और शायद थोड़ी सी ईर्ष्या। तो मैं उसको मनाने लग गया, और मैं उसे सॉरी कहने लग गया। “सना, प्लीज़… मैं तो बस तुम्हें चिढ़ा रहा था… तुम नाराज़ मत हो…”

पर वो नहीं मानी। उसने अपना मुँह फुला लिया और मेरी तरफ देखा तक नहीं। तो मैंने टेबल पर हाथ ज़ोर से मारा, और मेरा हाथ लग गया। चोट लग गई थी, और मैंने दर्द से कराहते हुए अपना हाथ पकड़ लिया।

ये उसने देख लिया और फिर वो मेरे पास आई और वो भी खुद मेरे पास आकर बैठ गई। उसकी आँखों में अब गुस्सा नहीं, चिंता थी।

“नाराज़ हो?” उसने धीरे से पूछा।

मैं कुछ नहीं बोला तो वो बोली — “ओए, नाराज़ हो क्या?”

“हाँ, बात मत करो, जाओ,” मैंने मुँह फुलाकर कहा।

“देखो ना, कोई लगी है,” उसने मेरे हाथ की तरफ हाथ बढ़ाया।

मैंने अपना हाथ पीछे कर लिया तो उसने मेरे हाथ पकड़ने के लिए मुझे छेड़ना शुरू कर दिया। मैं चुप रहा तो उसने एक पेपर को फोल्ड किया और मुझे मज़ाक में मारने लग गई। फिर मैंने उसे वो पेपर पकड़ना चाहा पर वो भागने लग गई। मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया, और गलती से मेरा हाथ उसके स्तन पर लग गया। क्या मुलायम बूब्ज़ थे — जैसे रुई के गोले। मैं बोला — “सॉरी यार।”

फिर वो मुझे फिर से पेपर से मारने लग गई, तो मैंने उसे फिर से पकड़ लिया। अब तो उसके स्तन मेरे सीने से छू गए थे, मेरा मुँह उसके मुँह के पास था, उसकी गर्म साँसें मुझसे टकरा रही थीं। मैं उसका इतना करीब पहली बार हुआ था। उसकी साँसों की गर्माहट, उसके शरीर की खुशबू, और उसकी धड़कनें — सब कुछ मुझे पागल कर रहा था।

तभी उसका पैर फिसला और वो गिर गई, और मैं भी उसके साथ उसके ऊपर गिर गया। मेरे होंठ सीधे उसके होंठों पर जाकर टकरा गए। मेरा एक हाथ उसकी जाँघ पर था तो दूसरा हाथ उसके दाएँ वाले स्तन पर। मेरी पैंट में अल्लाह का टेंट बना हुआ था, और उसकी वो महसूस हो रहा था।

मैं उठा और मैंने उसको उठाया और थोड़ी देर के बाद मैं अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गया। फिर वो चाय लेकर आई, पर वो एक ही चाय लेकर आई।

“तुम्हारी चाय कहाँ है?” मैंने पूछा।

“मुझे नहीं पीनी है,” उसने छोटा सा जवाब दिया।

फिर जब मैं चाय पीने के लिए उठा तो वो मेरी कुर्सी पर बैठ गई, मैं फिर उसके सामने टेबल पर बैठ गया। मैंने अपनी पूरी चाय पी ली तो अब उसे गुस्सा आ रहा था। लगता था कि मैं उसको आधी चाय दूँगा, पर ऐसा नहीं हुआ। तो वो और भी नाराज़ हो गई।

अब मैं उसके सामने उसकी टेबल पर बैठकर उसको मना रहा था, तभी उसने मेरी जाँघों पर सिर रखा और वो ऐसे ही बैठ गई। उसके ऐसे बैठने से मेरा लंड जो पहले से खड़ा था, अब वो और भी ज़्यादा खड़ा हो गया। और ये देखकर उसकी आँखें चमक गईं। अब वो धीरे-धीरे मेरे लंड की तरफ अपना सिर सरका रही थी। फिर अचानक से उसने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को काट दिया। मेरी तो अब हालत ही खराब हो गई थी।

“ये तो होना ही था, और लड़कियों को मूवी ले जाओ,” उसने गुस्से से कहा।

मैं अपने लंड को पैंट के ऊपर से ही सहला रहा था, फिर वो मेरे ऊपर आई और वो बोली — “सॉरी, मैं गुस्से में थी। दर्द हो रहा क्या है?”

फिर वो मेरे लंड को ऊपर से सहलाने लग गई। फिर उसने मेरी पैंट की ज़िप खोली और मेरे अंडरवियर में से मेरा लंड बाहर निकाल लिया। मेरा लंड पूरा लाल हो चुका था।

“सॉरी, मुझे माफ कर दो,” उसने धीरे से कहा।

“ठीक है, जाने दो,” मैंने कहा।

“पर आपका लंड बहुत बड़ा और बहुत अच्छा है, इसका साइज़ क्या है?”

“6 इंच,” मैंने जवाब दिया।

ये सुनकर वो दंग रह गई और वो बोली — “रुको, मैं अभी इसको शांत करती हूँ।” फिर वो मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लग गई, मेरे लंड को हाथ में लेकर वो ऊपर-नीचे कर रही थी। अब मैं गर्म हो रहा था, उसके हाथ लगाने से मैं सातवें आसमान में जा चुका था।

“मैं इसको किस कर सकती हूँ?” उसने पूछा।

मैं हाँ बोलने ही वाला था, कि तभी दरवाज़ा खटखटाया गया और हम दोनों अलग हो गए। उसका भाई अब उसे लेने आया था, फिर वो मुझसे बात करके चली गई।

उसके जाने के बाद अब मेरी हालत खराब हो गई थी। घर जाकर उसने मुझे मैसेज किया — “कैसे हो? अब दर्द तो नहीं हो रहा है ना?”

“नहीं, दर्द हो रहा है, तुमने हाथ जो लगाया था,” मैंने मज़ाक किया।

“अच्छा, आज तो बस काटा ही था। अगर आप किसी और लड़की के साथ गए ना तो मैं उसे जल्द ही काट दूँगी। वो सिर्फ मेरा है और मैं आपकी हूँ। मैं आपसे बहुत ज़्यादा प्यार करती हूँ, ठीक है? आई लव यू।”

“मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ,” मैंने जवाब दिया।

भाग 3: घर पर पहली बार – ब्लोजॉब, चॉकलेट और चूत चाटना

दूसरे दिन जब वो ऑफिस आई तो वो एकदम पर लग रही थी। उसने एक टाइट जींस और क्रॉप टॉप पहना था, जिसमें उसकी कमर और कूल्हे साफ दिख रहे थे। आते ही वो सीधा मेरे केबिन में आ गई और उसने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया। फिर वो आकर मेरे गले लग गई, मैंने भी उसे कसकर गले लगाया था। उसके स्तन और ब्रा मुझे लग रहे थे, फिर वो थोड़ा पीछे हटी। अब वो मुझे देख रही थी। मैंने उसे पकड़ कर दीवार के सहारे रख दिया।

फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसके क्या मस्त होंठ थे — नरम, गुलाबी, और बिल्कुल चूमने के लिए बने हुए। मैंने उसे कम से कम 30 मिनट तक लिप किस किया, मैंने उसकी जीभ को भी अच्छे से चूसा। फिर मैंने एक हाथ उसके स्तन पर रख दिया तो उसने मेरा हाथ हटा दिया, बाद में उसने खुद मेरा हाथ अपने दोनों स्तनों पर रख दिया।

“ये दोनों आपके ही हैं, चाहे देख लो,” उसने कहा।

फिर मैंने उसके 34 के स्तन टॉप के ऊपर से ही मसलने लग गया। करीब 10 मिनट तक उसके टॉप के ऊपर से उसके स्तन मैं दबाता रहा। वो मुझे किस करे जा रही थी, तभी उसने मुझे कुर्सी पर बिठाया। फिर वो मेरे पास आकर मेरी पैंट की ज़िप खोल दी, और उसने मेरा लंड बाहर निकाल लिया। अब वो फिर से किस करने वाली थी, तभी फिर से दरवाज़ा खटखटाया गया। उसने फिर से अपने कपड़े ठीक किए और जाकर वो क्लाइंट से बात करने लग गई। मेरा तो पूरा मूड ही ऑफ हो गया था।

12 बजे थे। मैंने कहा — “चलो यार, रूम पर चलते हैं।” वो मान गई।

मैंने ऑफिस बंद किया और उसे अपनी कार में बिठाकर अपने कमरे पर ले आया। मैं अकेला रहता हूँ — एक छोटा सा 1BHK फ्लैट, पर बिल्कुल साफ-सुथरा। मैंने रूम खोला और उसे पानी दिया। “तुम बैठो, मैं अपने कपड़े चेंज करके आता हूँ।”

तो वो भी मेरे पीछे आई। मैं शर्ट के बटन खोल ही रहा था, कि उसने मेरे पीछे से मुझे टाइट हग कर दिया। उसके स्तन सीधे मुझ पर दब रहे थे, मैंने उसको आगे किया और मैं उसे चुंबन करने लग गया। अब मैं साथ ही उसके स्तनों को दबा रहा था, और मेरा एक हाथ उसकी गांड को सहला रहा था। उसकी गांड बहुत अच्छी थी — 36 इंच की, गोल, मज़बूत, और बिल्कुल सही शेप में।

एक लंबा चुंबन करने के बाद मैंने उसका टॉप उतारना चाहा पर उसने मुझे रोक दिया। अब वो खुद मेरी शर्ट निकालकर मेरी छाती पर किस करने लग गई। मेरी गर्दन से उसने छाती तक मुझे चूमा। फिर मैंने उसे उठाकर बेडरूम में ले गया, जब उसने मेरे होंठों पर किस किया और फिर उसने मेरी छाती को किस करते हुए मेरे पेट पर आ गई। फिर उसने मेरी बेल्ट को खोला और उसने मेरी पैंट को उतार दिया। उसने मेरा अंडरवियर भी उतार दिया, और मेरा 6 इंच का लंड अब उसके हाथ में था।

अब वो मेरा लंड हिलाने लग गई थी। फिर उसने अचानक मेरे लंड पर किस कर दिया, जिससे मैं आसमान पर था। किस करने के बाद उसने मुँह में ले लिया और अब वो मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लग गई। उसके मुँह की गर्मी से मेरा लंड और कड़क बन चुका था, पर वो अभी भी लगातार मेरा लंड चूस रही थी। 10 मिनट तक चूसने के बाद उसने मेरी गेंदों को भी चूसना शुरू कर दिया, फिर उसने मेरे लंड को ज़ोर से चूमा और वो उठकर खड़ी हो गई।

“आपका लंड बहुत अच्छा है, इसे मेरा पूरा खाना है,” उसने कहा।

“खा जाओ मेरी रानी,” मैंने जवाब दिया।

“ऐसे नहीं, मुझे चॉकलेट चाहिए।”

मैं किचन में गया और जहाँ से मैं चॉकलेट लेकर आया, उसने थोड़ी सी सिर्फ लंड पर लगा दी। फिर वो मेरे लंड को चाटने लग गई, जब वो चाट रही थी तो वो चॉकलेट के साथ मेरा लंड भी खा रही थी। अब मैं अपनी चरम सीमा पर आ गया था, 15 मिनट के बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया। फिर वो उठी और वो बोली — “ये चॉकलेट भी अच्छी थी और आपका रस भी अच्छा था।”

फिर वो हँसने लग गई। मैंने उसे उठाया और मैंने अपनी तरफ खींच लिया। मैं अब होंठों को चूमने लग गया। किस करते-करते मैं उसकी क्लीवेज पर आ गया। उसके टॉप में हाथ डालकर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबाने लग गया।

हमने खाना ऑर्डर किया, साथ में खाया, और फिर मैं फ्रेश हो गया। जब वो बाथरूम से बाहर आई, तो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने उसे देखकर बिस्तर पर से उठा लिया और उसकी तरफ जाने लगा, तो वो भी मेरे करीब आ गई। उसकी आँखों में अजीब सा नशा था।

मैंने उसको पकड़ा और अपने करीब खींच लिया और उसके होंठों को चूमने लगा। मैं उसको दीवार के करीब ले जाकर पागलों की तरह चूमने लगा और मैंने अपनी टी-शर्ट निकाल दी। फिर मैंने उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाने लगा। फिर वो मेरे पेट से होते हुए सीधा मेरे अंडरवियर के ऊपर पहुँच गई। उसने मेरे 6 इंच के लंड को हाथ में पकड़ा और मेरे लंड के टोपे पर मुँह रखकर उसको चूमा। फिर वो धीरे-धीरे मेरे लंड को चूसने लगी।

10 मिनट तक वो मेरा लंड चूसती रही। फिर मेरा निकलने वाला था, तो मैं बोला — “मेरा होने को है।” तो उसने मेरा लंड मुँह से बाहर निकालकर हिलाना शुरू कर दिया और एक-दो धक्के के बाद ही मैं उसके सामने झड़ गया।

फिर उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मुझे अपनी चूत चाटने के लिए बोला। मैंने देर न करते हुए उसकी पैंटी को निकाला फेंक और उसकी चूत पर मुँह रख दिया। उसने हाल ही में अपनी चूत को शेव किया था। उसकी चूत गुलाबी रंग की थी और पूरा नशा दे रही थी। मैं 6 मिनट तक उसकी चूत में मुँह डालकर अपनी जीभ से चाट रहा था। वो झड़ने के करीब थी, तो उसने मुझे बोला — “उठ जाओ और उंगली से करो।” मैंने उसकी बात नहीं सुनी और जीभ डालकर चूसता रहा। फिर उसने अपना पानी छोड़ दिया और मेरा सिर अपनी चूत में दबाने लग गई। मैं उसका पूरा पानी पी गया।

भाग 4: बॉस और रिसेप्शनिस्ट की चुदाई – पहली बार गांड चुदाई और दर्द

मैं उसके ऊपर आ गया और उसके मुँह में अपना लंड डाल दिया। वो मेरा लंड चूस रही थी। अब मैंने उसके मुँह से लंड निकाल दिया और उसकी चूत के पास जाकर रगड़ने लगा। वो डर गई, क्योंकि उसको पता था, कि मैं उसको चोदने वाला हूँ। उसने मुझे चोदने से मना कर दिया और मैं उससे नाराज़ होकर उसके पास ही बिस्तर पर सोने लगा।

वो मुझसे बात कर रही थी, लेकिन मैं उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे रहा था। फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसकी चूत में एक उंगली घुसा दी और बोली — “मैं वर्जिन हूँ, समझ जाओ। मैं भी सेक्स करना चाहती हूँ और मुझे तुम्हें वो सब देना है। लेकिन अगर मैं माँ बन गई तो क्या होगा? मुझे कोई अपनाएगा नहीं।”

मैंने उसको समझाया, कि हम आई-पिल खा लेंगे। तो वो बोली — “मैं अपने पति से ही चुदना चाहती हूँ।” इस पर मैंने कुछ नहीं बोला और फिर से सोने लगा। फिर वो उठी और उसने एक धागा लिया और बोली — “मुझे अपनी पत्नी नहीं बनाओगे?”

मैंने झट से उसे धागा बाँध दिया और उसको बिस्तर पर पटक दिया। फिर मैं उसके ऊपर आकर उसके स्तनों को दबाने लगा। मैं उसके होंठ, कान और गालों को पागलों की तरह चूमने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी।

फिर मैंने उठकर उसके दोनों जाँघों को ऊपर उठा लिया और अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया। उसने फिर मुझे रोक दिया और बोली — “नहीं, प्लीज़ समझो ना। कल कंडोम लेके आना और फिर चोदना मुझे। आज नहीं, प्लीज़।”

जब मैंने कुछ नहीं बोला, तो उसने मेरा मुँह देखा और हँसने लगी। फिर वो बोली — “तुम चाहो तो मेरे पीछे डाल सकते हो।”

ये सुनकर मैं खुश हो गया। उसकी गांड बहुत अच्छी थी। उसकी 36 इंच की गांड और उभरे हुए नितंबों को देखकर ही तो मैं पहले दिन से पागल हो गया था। फिर मैंने उसको उल्टा करके उसकी गांड को अपनी थूक डालकर मालिश की और अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया। अभी एक इंच लंड ही गया था और वो चिल्ला उठी — “आआआह, मर गई। सूरज सर प्लीज़ निकालो इसको। आअहह… आआ… अम्मीइइइ… अबुउउ…”

लेकिन मैं रुका नहीं। फिर जब मैंने एक धक्का मारा, तो पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया था। फिर मैं उसको चोदने लगा और वो दर्द के मारे चिल्ला रही थी। मैं लगातार धक्के मार रहा था और अब उसको भी मज़ा आ रहा था। अब वो भी मज़े से चुद रही थी। मैं भी 18 मिनट से उसकी गांड मार रहा था, तो मैं भी उसकी गांड में झड़ गया और लंड निकाल के बिस्तर पर उसके करीब सोने लगा।

“सूरज सर, आज सच में आपसे गांड मरवाने में बहुत मज़ा आया,” उसने कहा।

भाग 5: कुँवारी चूत की पहली चुदाई – खून, आँसू और सच्चा प्यार

फिर वो बोली — “एक बात कहूँ? मुझे अभी चूत मरवानी है आपसे।”

ये सुनकर मैंने कुछ नहीं बोला। वो फिर बोली — “बोला ना मैंने, अभी चोद दो मुझे और वो भी बिना कंडोम के। ये आपकी बीवी का ऑर्डर है।”

इतना बोलकर वो मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी और हिलाने लगी। उसके हाथ लगने से मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और वो फिर उसे मुँह में लेकर चूसने लग गई। 4 मिनट तक चूसने के बाद वो बोली — “आप डालते हो, या मैं डलवा लूँ?”

मैंने उसको धक्का देके बिस्तर पर लिटा दिया। फिर मैंने उसकी जाँघें थोड़े ऊपर कीं और लंड उसकी चूत पर रखा और धक्का मारा। उसकी चूत बहुत गीली थी, पर मुँह छोटा था, इसलिए लंड अंदर घुस नहीं रहा था। मैंने फिर थोड़ा धक्का मारा, तो लंड का सुपाड़ा चूत के अंदर घुस गया। वो चिल्ला उठी और तड़पने लगी और मेरी पीठ पर हाथ मारने लगी।

“छोड़ो मुझे, मुझे नहीं करना है,” वो रोने लगी।

लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी। फिर मैंने एक ज़ोरदार झटका मारा, तो आधा लंड उसकी चूत में चला गया। वो ज़ोर से चिल्ला उठी। उसकी आँखों में आँसू आ रहे थे। मैंने उसको सॉरी बोला और 5 मिनट उसके ऊपर वैसे ही पड़ा रहा। कुछ देर बाद, जब वो सामान्य लगी, तो मैंने फिर एक धक्का मारा और पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया।

वो चिल्ला रही थी और मैंने धक्के मारने चालू रखे। मैं अभी धीरे-धीरे कर रहा था। कुछ देर बाद उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ दे रही थी। फिर मैं उसको धक्के मारते हुए उसके स्तनों को दबा रहा था और उसके होंठों को चूम रहा था। 10 मिनट बाद जब मैंने लंड बाहर निकाला, तो वो खून से लाल हुआ पड़ा था। फिर मैंने उसको चोदने लगा और वो भी मेरा साथ दे रही थी। वो अब तक 2 बार झड़ चुकी थी। मैं भी झड़ने वाला था, तो मैंने लंड बाहर निकाला और उसकी नाभि पर अपना पानी छोड़ दिया और उसे करीब ले गया।

“थक गए क्या मेरे राजा?” ये कहकर वो हँसने लगी।

मैं फिर उठा और उसको किस करके उसके स्तन दबाने लगा। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैंने उसको मेरे ऊपर बैठने को बोला। वो मेरे ऊपर बैठकर मेरे होंठों को चूस रही थी। फिर मैंने धीरे से लंड उसकी चूत पर रखा और उसको लंड पर बैठने को बोला। वो बैठ गई और फिर ऊपर-नीचे होने लगी। फिर 4 मिनट बाद मैंने उसको बिस्तर पर पटक दिया और उसको मिशनरी स्टाइल में चोदने लगा। इस बार मैं 14 मिनट में झड़ गया और उसके अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया। वो डर गई, पर मैंने उसको वादा किया, कि उसको आई-पिल खिला दूँगा। फिर वो मान गई।

हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे। फिर वो बाथरूम में चली गई। मैं भी उसके पीछे बाथरूम में गया और हम दोनों नहाने लगे। मैंने उसके स्तनों को साबुन लगा रहा था और वो मेरी छाती को साबुन लगा रही थी।

भाग 6: शादी और ज़िंदगी भर का सफर – हमेशा के लिए

फिर हम नहाकर तैयार हो गए। 5 बजे थे, तो उसको घर जाना था। मैंने उसको बस स्टैंड तक छोड़ दिया और घर चला आया। फिर उसका मैसेज आया — “आज सच में आपने मुझे अपना बना लिया है। सबके लिए धन्यवाद।” मैंने जवाब दिया — “नहीं, तुमने मुझे अपना बना लिया है। आई लव यू।”

वो करीब मेरे साथ 4 साल रही, मगर 4 साल तक हमने हर रोज़ अलग-अलग तरीके से सेक्स किया और एक-दूसरे को खुश रखा। कभी ऑफिस में चुपके-चुपके, कभी घर पर आराम से, कभी कार में, कभी किसी होटल में। कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी काउगर्ल, कभी 69। हर दिन एक नया अनुभव था, हर रात एक नई कहानी। मुझे उससे प्यार हो गया — गहरा, सच्चा, और हमेशा के लिए।

और फिर वो दिन आ गया जब हमने शादी कर ली। उसने लाल जोड़ा पहना, मैंने शेरवानी। उसके माथे पर सिंदूर, गले में मंगलसूत्र, और हाथों में मेहंदी — वो बिल्कुल किसी अप्सरा जैसी लग रही थी। जब मैंने उसे देखा, तो मेरी आँखों में आँसू आ गए। यही वो लड़की थी जो कभी मेरे ऑफिस में रिसेप्शनिस्ट बनकर आई थी, और आज मेरी दुल्हन बनकर मेरे सामने खड़ी थी।

अब हमारी शादी को कई साल हो गए हैं। हमारा एक बेटा है — बिल्कुल सना जैसा गोरा और मेरी तरह शरारती। हमारी ज़िंदगी बहुत ही मज़े से चल रही है। सना अब भी उतनी ही खूबसूरत है जितनी पहले दिन थी, और मैं अब भी उतना ही उसका दीवाना हूँ। हमारी सेक्स लाइफ अब भी उतनी ही गर्म है — बेटे के सो जाने के बाद, हम अपनी दुनिया में खो जाते हैं।

कभी-कभी रात को, जब हम बिस्तर पर लेटे होते हैं और सना मेरी छाती पर सिर रखकर सोती है, तो मैं सोचता हूँ — कितना अजीब है ना? एक ऑफिस, एक रिसेप्शनिस्ट, एक ईर्ष्या भरी लड़ाई, और एक चोरी का किस — और इन सब ने मिलकर हमारी पूरी ज़िंदगी बदल दी।

“क्या सोच रहे हो?” सना ने कल रात पूछा।

“यही कि तुम मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत गलती हो,” मैंने मुस्कुराकर कहा।

“गलती?” उसने भौंहें चढ़ाईं।

“हाँ, वो गलती जो मैंने जानबूझकर की थी — तुम्हें अपने ऑफिस में रखना।”

वो हँस पड़ी और मुझे कसकर गले लगा लिया। “मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, सूरज। हमेशा के लिए।”

“हमेशा के लिए,” मैंने दोहराया।

बॉस और रिसेप्शनिस्ट की चुदाई की ये कहानी हमारी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत अध्याय है। और ये अध्याय कभी खत्म नहीं होगा — क्योंकि हमारा प्यार, हमारी चुदाई, और हमारा साथ ज़िंदगी भर का है।

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