शादी के बाद मेरी पहली रात – मेरा नाम अजय है और यह कहानी उस रात की है जब मैंने अपनी बीवी स्नेहल की कुंवारी चूत में पहली बार अपना लंड घुसाया। शादी तक मैं वर्जिन रहा था, और स्नेहल भी। उसकी 36-30-38 की परफेक्ट बॉडी, सुडौल बूब्स, और चिकनी गांड ने मुझे पागल कर रखा था। जब उस रात हमने सुहागरात मनाई, तो पहले लंड घुसते ही उसकी चूत से खून निकलने लगा और वह दर्द से चिल्ला उठी। लेकिन धीरे-धीरे दर्द ऐसे मज़े में बदल गया कि हमने रात भर चूत चुदाई की, अगली रात लंड चूसा, और शॉवर सेक्स का भी मज़ा लिया। अगर आप भी सुहागरात की ऐसी रोमांटिक और गर्म सेक्स कहानी पढ़ना चाहते हैं जिसमें पहली बार का दर्द, प्यार, उत्तेजना, और धीरे-धीरे साथी का साथी में घुलना हो, तो यह पूरी दास्तान आपके लिए ही है।
भाग 1: शादी के दिन का इंतज़ार और सुहागरात की घड़ी
मेरा नाम अजय है। मेरी उम्र 26 साल है। मैं एक साधारण से मिडिल क्लास परिवार का लड़का हूँ – अपनी नौकरी करता हूँ, अपने सपने देखता हूँ, और अपनी ज़िंदगी में कभी किसी लड़की के बहुत करीब नहीं गया। शादी होने तक मैंने कभी किसी लड़की को नहीं छुआ था, कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था। हाँ, मैंने पोर्न देखी थी – बहुत देखी थी – और उन मूवीज़ में जो कुछ देखा, वह मैं अपनी सुहागरात में करना चाहता था। मैं अपनी शादी तक वर्जिन रहा था – और यह मेरे लिए गर्व की बात थी, क्योंकि मैं चाहता था कि मेरी बीवी मेरा पहला और आखिरी हो।
मेरी बीवी का नाम स्नेहल है। उसकी उम्र 23 साल है – पूरी जवानी का शिखर। उसकी त्वचा गोरी और चमकदार है, जैसे दूध में उतरी हुई। उसके बाल घने, लंबे और काले हैं – जब वह उन्हें खोलती है, तो मानो काली रात बिखर जाती है। उसका फिगर बिल्कुल परफेक्ट है – 36-30-38। उसके बूब्स 36 साइज़ के हैं – सुडौल, गोल, और इतने मुलायम कि छूते ही उंगलियाँ डूब जाएँ। उसकी कमर 30 इंच की है – इतनी पतली कि दो हाथों में समा जाए। और उसके हिप्स 38 इंच के हैं – चौड़े, गोल, और उसकी गांड बिल्कुल आड़ू के आकार जैसी। जब भी वह चलती है, उसकी गांड लहराती है – और मैं पागल हो जाता हूँ।
जब से हमारी शादी तय हुई थी – तब से लेकर शादी के दिन तक – मैं रोज़ अपनी सुहागरात के बारे में सोचता था। रात को सोते समय, सुबह उठते समय, ऑफिस में बैठे-बैठे – बस एक ही ख़्वाब मेरी आँखों में होता था। स्नेहल और मैं एक-दूसरे के बिल्कुल नग्न – एक बिस्तर पर – और हमारे शरीर एक हो रहे हों। मैं कल्पना करता था कि उसकी चूत कैसी होगी, क्या मेरा लंड अंदर जाएगा, क्या उसे दर्द होगा, क्या मुझे मज़ा आएगा। शादी से पहले हमने कभी सेक्स नहीं किया था – हमने सिर्फ बातें की थीं, सिर्फ उंगलियाँ छूई थीं, बस इतना ही। स्नेहल ने एक बार मुझसे कहा था – “जो भी करना है, शादी के बाद करेंगे।” उस वक्त मैं थोड़ा निराश हुआ था, लेकिन अब सोचता हूँ तो लगता है कि उसने सही किया। क्योंकि शादी के बाद जो हुआ, वह बहुत खास था।
फिर शादी हुई। वह दिन – रस्में, फेरे, विदाई, सब कुछ बहुत सुंदर था। लेकिन मेरा दिमाग सिर्फ एक ही चीज़ पर था – रात। सुहागरात वाली सुहानी रात। रात को मैंने जल्दी से खाना खाया और अपने कमरे में आने के लिए रेडी हो गया। उस दिन मेरे दोस्तों ने मेरी खूब खिंचाई की – “अजय, आज तो तेरी ज़िंदगी बदलने वाली है। आज तू असली मर्द बनेगा।” – हँसी-मज़ाक हुआ, शराब छलकी, और फिर उन्होंने मुझे मेरे कमरे में धक्का देकर बाहर से दरवाजा बंद कर दिया। मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था – बहुत तेज़। मैंने अन्दर आते ही दरवाजे की सिटकनी लगा कर उसे बंद कर दिया। आवाज़ – “क्लिक” – ने मुझे एहसास दिलाया कि अब हम दोनों पूरी तरह अकेले हैं।
स्नेहल बेड पर बैठी थी – बिल्कुल दुल्हन की तरह – लाल साड़ी में, घूँघट डाले, हाथों में मेहँदी, और गले में मंगलसूत्र। वह बस मेरा इंतज़ार कर रही थी। मेरे आते ही वह उठ कर मेरे करीब आई। उसने अपने हाथों में एक चाँदी का गिलास पकड़ रखा था – दूध का। वह बड़े प्यार से मेरे पास आई, मेरी तरफ देखा, शरमाती हुई मुस्कुराई, और फिर दूध का गिलास मेरी तरफ बढ़ा दिया। उसने आवाज़ में ठिठकन के साथ कहा, “लो जी… दूध पी लो।” मैंने उसकी आँखों में देखा – वो डरी हुई थी, लेकिन खुश भी थी।
मैंने कहा – “तुम खुद मुझे दूध पिला दो न!” यह सुनकर उसके चेहरे पर शरम की लाली दौड़ गई। उसने धीरे-धीरे गिलास मेरे होंठों से लगाया। उसके हाथ काँप रहे थे। मैंने उसके हाथों से दूध पिया – घूँट-घूँट करके – और उसी गिलास से आधा दूध स्नेहल को पिलाया। हमने एक-दूसरे से आँखें मिलाईं, मुस्कुराए, और फिर दूध खत्म हुआ। उससे पहले मैंने स्नेहल के करीब आने की कोशिश की थी – पर तब उसने कहा था कि जो भी करना है, वह सब शादी के बाद करेंगे। आज वह रात आ चुकी थी, और अब वह मुझे किसी चीज़ के लिए मना नहीं कर सकती थी। यह सोचकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
भाग 2: पहली बार शरीर का मिलन – चूचियाँ, चूत, और पहली चुदाई
मैं उसके पास पहुँचा और उसकी पतली, नाज़ुक कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया। उसके शरीर की गर्मी मुझे महसूस हुई। उसकी साड़ी के कपड़े और उसके नीचे उसका गर्म शरीर – मेरी साँसें तेज़ हो गईं। उसके बालों की एक लट उसके चेहरे पर आ गई थी। मैंने उसे बड़े प्यार से अपनी उंगलियों से उठाया और उसके कान के पीछे कर दिया। उसकी गर्दन साफ दिख रही थी – गोरी, चिकनी, और इतनी नाज़ुक कि शीशे की तरह लग रही थी। मैंने बड़े प्यार से कहा – “स्नेहल, तुम बिल्कुल अप्सरा सी सुंदर लग रही हो। – किसी परी से कम नहीं।” उसने अपनी तारीफ सुनी, तो शरमाती हुई मेरे गले से लग गई। उसके चेहरे की गर्मी मेरे सीने में समा गई। वो मुझसे चिपक गई – पूरी तरह।
मैंने उसका मुँह अपने मुँह की तरफ करते हुए उसे किस करना चाहा। वह समझ गई। उसने अपनी आँखें बंद कर दीं – कसकर – और मैंने अपने होंठ धीरे-धीरे उसके होंठों पर रख दिए। उसके होंठ पंखुड़ियों की तरह मुलायम थे, और थोड़े लरज रहे थे। उसके लरजते हुए होंठों पर अपने होंठ रख कर मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया – धीरे-धीरे, प्यार से, एक किस, फिर दो किस, फिर दस किस। मैं उसके होंठों का रस पी रहा था – हल्का सा मीठा, हल्का सा नमकीन। कुछ देर चूमने के बाद मैंने उसकी साड़ी का पल्लू धीरे-धीरे उसके कंधे से नीचे सरकाया। रेशम फिसला और उसके गोरे कंधे सामने आ गए। फिर मैंने उसके दोनों गालों को चूमते हुए – बाएँ, दाएँ, बाएँ – धीरे-धीरे उसके गले तक पहुँच गया। उसकी गर्दन पर मैंने अपने होंठों को गोल-गोल घुमाया, हल्के-हल्के काटा, फिर चूसा। उसके कंठ से एक मीठी सिसकारी निकली।
उसके बाद मैंने अपने हाथों से उसके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से दबाया – पहले हल्के से, फिर थोड़ा और जोर से, फिर और जोर से। मेरे हाथ उसके बूब्स को लगते ही मुझे एक करंट सा लगा – जैसे बिजली दौड़ गई हो पूरे शरीर में। और उधर स्नेहल की भी ऐसी कामुक सिसकारी निकली – “आह… इस्स… थोड़ा धीरे… पर दबाओ भी…” मेरे लंड में अचानक थिरकन हुई – वह सख्त हो गया – इतना सख्त कि मेरे पज़ामे में जगह कम पड़ रही थी। मैंने उसके बड़े-से दूध को और जोर से दबा दिया। स्नेहल के कंठ से और भी तेज़ आवाज़ निकली – “आहह… उहह… धीरे करो न… पर मत रुको… ओह्ह्ह…” उसकी कामुक आवाज़ सुनकर मैं और पागल होता जा रहा था।
कुछ ही देर में मैंने उसकी साड़ी को धीरे-धीरे पूरी तरह उतार दिया। साड़ी उसके शरीर से खिसकी और फर्श पर गिर गई। अब स्नेहल सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसका ब्लाउज – गहरे गले का – उसके बूब्स के ऊपरी हिस्से को खुला छोड़ रहा था। उसके बाद उसने भी मेरी शेरवानी के बटन खोलने शुरू कर दिए – एक-एक करके, उसकी उंगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन वो बटन खोलती रही। चार बटन थे – सब खुल गए। फिर उसने मेरी शेरवानी को मेरे कंधों से उतारा और एक तरफ फेंक दिया। शेरवानी हटते ही मैंने अपनी शर्ट भी उतार दी – नीचे से सिर निकाल कर – और अब मेरा ऊपरी बदन पूरी तरह नंगा था। मैंने स्नेहल को फिर से अपनी बांहों में भर लिया – कसकर – और अपने नंगे सीने की गर्मी उसके शरीर में देने लगा। वह भी पिघल रही थी।
उसके ब्लाउज के बटन पीछे थे। मैंने अपने दोनों हाथ बढ़ाकर उसकी पीठ पर लगे छोटे-छोटे हुक खोले – एक, दो, तीन – सब खुल गए। ब्लाउज ढीला हो गया, और मैंने उसे आराम से उतार दिया। अब स्नेहल एक स्किन कलर की ब्रा में थी – जालीदार, पारदर्शी सी। उसमें से उसके निप्पल साफ दिख रहे थे – खड़े हुए, सख्त, गहरे गुलाबी। मैं उसके गले को किस करता हुआ – ठोड़ी से गले तक, गले से छाती तक – धीरे-धीरे उसके बूब्स तक पहुँच गया। ब्रा के ऊपर से ही मैंने उसके बूब्स को दबाना और चूसना शुरू कर दिया। ब्रा का बीच का हिस्सा जल्दी ही मेरे थूक से गीला हो गया।
फिर स्नेहल ने धीरे से मेरे पज़ामे का नाड़ा खोला। उसकी उंगलियाँ पेट पर रेंगती हुई नीचे गईं, डोरा खोला, और फिर उसने मेरे पज़ामे को नीचे खींच दिया। मैंने खुद अपना पज़ामा पूरी तरह निकाल दिया – पैरों को झटका देकर। नीचे मैंने अपनी अंडरवियर पहनी थी – एक टाइट बॉक्सर। अंडरवियर के बाद मेरा पूरा नंगा शरीर मेरी बीवी के सामने आने वाला था – और उसके शरीर का हर हिस्सा भी। मैंने स्नेहल के पेटीकोट का नाड़ा खोला – एक ही झटके में – और पेटीकोट ढीला होकर उसके पैरों से नीचे गिर गया। अब स्नेहल मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी – एक स्किन कलर का छोटा-सा सेट, जो उसके गोरे शरीर पर बिल्कुल सूट कर रहा था।
मैं बेड पर बैठ गया और स्नेहल को अपनी जांघ पर बिठाया – मेरी तरफ मुँह करके। अब उसकी चूचियाँ सीधे मेरे सामने थीं – ठीक मेरे मुँह के स्तर पर। मेरा मुँह उसके बूब्स पर आ गया था। मैंने उसके मुँह से अपना मुँह जोड़ा और होंठों को चूमने लगा – गहरा, प्यार भरा किस। होंठ चूमते हुए ही मैंने उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी। पहले तो वह सहमी, फिर धीरे-धीरे उसने मेरी जीभ को चूसना शुरू कर दिया। जीभ का रस चूसना इतना ज्यादा कामोत्तेजित कर देता है – इसका अंदाज मैंने उसी दिन लगाया था। मैं आज सोचता हूँ कि मुँह से चूमना या जीभ को चूसना किस तरह से स्वतः ही आ जाता है। हम दोनों को पता नहीं था कि कैसे करना है – पर हम कर रहे थे, और बहुत अच्छा कर रहे थे। यह प्रकृति का ही खेल होता है – वह सब कुछ खुद ही सिखा देती है।
कुछ देर चूमने के बाद मैंने उसकी ब्रा निकाल कर अलग कर दी – पीछे का हुक खोला, और फिर ब्रा को उसके बूब्स से हटा दिया। उसके बूब्स आज़ाद हो गए – दो गोरे, मुलायम, भरे हुए तरबूज़, जो ब्रा से निकलते ही हिल गए और अपनी जगह पर आ गए। मैं वर्जिन था – और स्नेहल भी वर्जिन थी – लेकिन हमारे शरीर जानते थे कि उन्हें क्या करना है। मेरे सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका था। मैं पागलों की तरह स्नेहल के बूब्स दबाने लगा – पहले दाएँ, फिर बाएँ – फिर चूसने लगा – ज़ोर-ज़ोर से – और फिर उसके सख्त निप्पलों को अपने होंठों के बीच दबाकर हल्का-हल्का काटने लगा। स्नेहल सिसकार रही थी – “आह्ह्ह… अजय… धीरे… थोड़ा धीरे… मुझे दर्द होता है… पर मज़ा भी आ रहा है… ओह्ह्ह…” वह मेरे सिर को पकड़ कर अपने बूब्स पर दबा रही थी, मानो मुझे अंदर समा लेना चाहती हो।
थोड़ी ही देर में मैंने स्नेहल को बेड पर लिटा दिया – पीठ के बल – और उसके पेट पर किस करते-करते धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगा। मैंने उसकी नाभि चूमी, उसके पेट के निचले हिस्से को चाटा, और फिर उसकी चूत पर पहुँच गया। पहले मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से किस करना और चूत को चाटना शुरू किया – पैंटी के उस उभरे हुए हिस्से को, जहाँ उसकी चूत के लिप्स छुपे थे। यह कुछ ही देर चला था कि स्नेहल ने एक बार झड़ना शुरू कर दिया – उसकी साँसें तेज़ हो गईं, उसके हिप्स हिलने लगे, उसकी आँखें बंद हो गईं – और पैंटी के ऊपर से ही मेरे मुँह पर उसका गीला, गर्म रस आ गया। उसने अपनी पहली सुहागरात में ही अपना पहला ऑर्गेज्म मेरे मुँह पर छोड़ दिया था।
मैंने उसकी गीली पैंटी को धीरे-धीरे नीचे खींचा – पहले उसके नितंबों पर से, फिर उसकी जांघों पर से – और फिर पूरी उतार कर एक तरफ फेंक दी। अब स्नेहल मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी – उसके शरीर पर कपड़े का एक भी धागा नहीं था। उसकी गोरी, चिकनी, भरी हुई चूत मेरे सामने थी – बिल्कुल किसी खिली हुई कली की तरह। उसके लिप्स मोटे और गुलाबी थे, उसके बाल कम और साफ थे, और उसकी क्लिटोरिस छोटी-सी, उत्तेजना से बाहर आ रही थी। मैंने उसके दोनों पैर फैला दिए – चौड़ा – और अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। स्नेहल की मदभरी सिसकारियों की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी। उसकी “उहह… आह… शह… ओह्ह्ह… अजय… और चाटो… मेरी चूत को और चाटो… आह्ह्ह…” की आवाज़ों से पूरा कमरा भर गया। स्नेहल ने मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत में और जोर से दबा दिया। स्नेहल को उस जोश में देख कर मैं और ज्यादा हॉर्नी हो गया।
फिर स्नेहल ने मेरी चड्डी को पकड़ कर नीचे खींच दिया – एक झटके में – और मुझे भी पूरी तरह नंगा कर दिया। अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने बिल्कुल नग्न थे – पहली बार। मैं एक जगह खड़ा था और वह बेड पर लेटी हुई थी, दोनों नंगे। मैंने उससे मेरा लंड मुँह में लेने को कहा – “स्नेहल, चूस ले थोड़ा… इससे अंदर जाने में आसानी होगी…” पर उसने मना कर दिया। उसने मुस्कुराते हुए – शरमाते हुए – सिर हिलाया – “नहीं… आज नहीं… बाद में… मुझे पहली बार में डर लग रहा है…” आज पहली बार हम दोनों सेक्स कर रहे थे तो मैंने भी उससे ज़िद नहीं की। पर मैं भी कहाँ मानने वाला था – आज नहीं तो कल – एक ना एक दिन तो स्नेहल के मुँह में मेरा लंड जाना ही था। उसके मीठे होंठ मेरे लंड को चूसेंगे – यह सोचकर ही मेरा लंड और सख्त हो गया।
मैंने अपनी दो उंगलियाँ स्नेहल की चूत में डाल दीं। उसकी वर्जिन चूत बहुत टाइट थी – इतनी टाइट कि एक उंगली भी मुश्किल से अंदर गई। कुछ देर तक मैंने अपनी दोनों उंगलियों को ऐसे ही अंदर रखा और बाद में धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। स्नेहल को शुरू-शुरू में दिक्कत हुई – उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, “धीरे… दर्द हो रहा है…” – पर बाद में, जैसे-जैसे उसकी चूत गीली होती गई, उसने अपनी टांगें खुद-ब-खुद फैला दीं और फिर वह अपनी चूत रगड़वाने का मज़ा लेने लगी। उसकी चूत की दीवारें मेरी उंगलियों के चारों ओर सिकुड़ रही थीं।
कुछ देर के बाद स्नेहल ने अपनी आँखें खोलीं, मेरी तरफ देखा, और बड़ी मासूमियत से कहा – “अब और मत तड़फाइए… डाल दीजिए ना… मैं तैयार हूँ…” यह सुनते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं झट से उसके दोनों पैरों के बीच में बैठ गया – घुटनों के बल – और उसकी कमर के नीचे एक तकिया लगा कर उसकी चूत को ऊपर उठा दिया। फिर मैंने अपने हाथों से अपना लंड पकड़ा – जो 7 इंच का सख्त और खड़ा था – और उसे उसकी चूत पर सैट कर दिया। मैंने धीरे-धीरे – बहुत धीरे – अपना लंड अंदर घुसाना शुरू किया। पहली बारी में सिर्फ सुपारा ही अंदर गया – और स्नेहल कराह उठी – “आह… दर्द…” मैं रुका, उसे चूमा, फिर से कोशिश की। लंड का सुपारा अब थोड़ा और अंदर गया। मेरे साथ-साथ उसे भी दर्द शुरू हो गया – उसकी आँखों में पानी आ गया – “आह्ह्ह… रुको… एक बार रुको…” – लेकिन हम रुके नहीं। एक, दो, तीन बार धक्का देकर – धीरे-धीरे – मेरा लंड उसकी चूत में पूरा घुस गया। पर नीचे से खून निकलने लगा – हल्की-हल्की लाल धार – मेरी बीवी के कौमार्य के प्रमाण। पहली बार चुदाई करने में दिक्कत हुई। साथ ही स्नेहल को बहुत दर्द भी हुआ – वह सिसक रही थी – “बहुत दर्द हो रहा है… अजय… तुमने मेरी चूत फाड़ दी…” – पर मैं उसका चेहरा पोंछता रहा, चूमता रहा। मेरी दुल्हन कुंवारी थी – और अब वह नहीं रही।
थोड़ी देर बाद – जब हम दोनों थोड़ा संभल गए – हमने पुनः कोशिश की। इस बार मैंने पहले उसकी चूत को अच्छे से चाटा – और गीला किया – और धीरे से लंड अंदर रखा। फिर छोटे-छोटे धक्के देने लगा। स्नेहल चिल्ला उठी – “प्लीज़ निकालिए… आह… दर्द हो रहा है… बहुत!” पर मैंने उसकी एक ना सुनी। बस धीरे-धीरे – प्यार से – लेकिन निरंतर – मैं लंड को अंदर-बाहर करने लगा। दो मिनट, पाँच मिनट – थोड़ी देर बाद स्नेहल के चेहरे के भाव बदलने लगे। अब दर्द कम हो रहा था – और उसकी जगह एक अजीब-सा सुख आ रहा था। उसके मुँह से जो आवाज़ें निकल रही थीं, वो अब दर्द की नहीं, सुख की थीं – “आह्ह्ह… अजय… अब अच्छा लग रहा है… हिलाओ… धीरे-धीरे हिलाओ… ओह्ह्ह…” मैंने भी अपनी बीवी की पहली चुदाई का मज़ा लेना शुरू कर दिया।
कुछ ही देर बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मैंने चुदाई करने से पहले कोई दवा नहीं ली थी – जो होना था, स्वाभाविक रूप से हो रहा था। शादी के बाद मेरी पहली रात दो नंगे बदन मिल रहे थे – उनकी गर्मी, उनकी नमी, उनकी धड़कनें – एक हो रही थीं। मैं चुदाई का मज़ा ले रहा था। मैंने दस मिनट तक लगातार चुदाई की – मैंने पूरे जोश में – “थप-थप-थप” की गीली आवाज़ के साथ – और उसके बाद मैंने अपनी बीवी की चूत से लंड निकाल कर उसके सफ़ेद पेट पर अपना गर्म, गाढ़ा वीर्य झाड़ दिया। स्नेहल भी चुदाई के दौरान ही झड़ चुकी थी – उसकी चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था।
भाग 3: सुबह का प्यार – दूसरी रात का ब्लोजॉब और डॉगी स्टाइल
उसके बाद मैं उसे सहारा देकर बाथरूम ले गया। उधर हम दोनों ने अपनी चूत और लंड को साफ किया – गर्म पानी से – प्यार से – एक-दूसरे की मदद करते हुए। फिर हम दोनों कमरे में आए और बिना कपड़े पहने – एक-दूसरे से नंगे चिपक कर सो गए। हमारी साँसें मिल रही थीं, हमारे दिल एक साथ धड़क रहे थे।
करीब एक घंटा बाद – आधी रात के बाद – मैं जाग गया। मैंने स्नेहल के बदन की गर्मी को अपने शरीर के साथ सटा हुआ महसूस किया। वह अभी भी सो रही थी, उसका चेहरा बिल्कुल शांत था, उसके नंगे बूब्स मेरे सीने पर दबे हुए थे। मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत को फिर से छेड़ना शुरू कर दिया – अपनी उंगलियों से – और फिर उसके बूब्स चूसने लगा। वह जाग गई – और मुझे देखकर मुस्कुराई। वह समझ गई कि मैं और चाहता हूँ। वह मुझे अपने स्तन पिलाने लगी – अपने निप्पल मेरे मुँह में देने लगी। कुछ ही देर के बाद मैं सीधा लेट गया और मैंने स्नेहल को अपने लंड के ऊपर बैठने को कहा – “स्नेहल, अब तू ऊपर आ। अपने आप चोद।” स्नेहल मेरे ऊपर मेरी तरफ मुँह करके बैठ गयी – उसके बाल बिखरे हुए थे, उसके बूब्स लटक रहे थे – और मैंने अपना लंड पकड़ कर उसकी चूत में पेल दिया। कुछ वक़्त तक स्नेहल मेरे लंड पर ऊपर-नीचे कूदती रही – उसकी चूत मेरे लंड को अंदर ले रही थी और छोड़ रही थी – फिर वह रुक गई। शायद वह थक गई थी। अब मैंने नीचे से अपनी गांड उठा कर उसकी चूत चोदना शुरू कर दिया – तेज़, जोरदार।
थोड़ी ही देर बाद हम दोनों ने पोजीशन चेंज की। मैंने स्नेहल को डॉगी स्टाइल में कर दिया – उसने अपने घुटनों और हाथों के बल हो गई, उसकी गांड हवा में थी, गोल और चिकनी। उसकी चूत पीछे से खुली हुई थी, गीली और चमकती हुई। मैंने उसकी पतली कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपना लंड उसकी चूत में पेलते हुए तेज़ चुदाई शुरू कर दी। डॉगी स्टाइल में हम दोनों ने बहुत देर तक चुदाई की – लगभग बीस मिनट। इसी बीच स्नेहल एक बार और झड़ चुकी थी – उसकी चूत सिकुड़ रही थी, उसकी कराहें तेज़ हो गई थीं – और कुछ ही देर में मैं भी झड़ गया। मैंने अपना सारा गर्म वीर्य – इस बार – स्नेहल की साफ, गोरी गांड पर निकाल दिया। सफेद रंग उसकी गांड पर फैल गया। वापस हम दोनों साफ-सफाई करके बिस्तर पर आ गए। सेक्स के बाद हम दोनों बेड पर एक-दूसरे से लिपट कर – नंगे ही – सो गए।
दूसरे दिन – सुबह – मेरी नींद खुली तो देखा कि मेरी बीवी नहा कर तैयार हो गई थी। वह आईने के सामने अपने गीले बालों को संवार रही थी – एक साधारण सी सलवार-कमीज में – और मैं बेड में अभी तक पूरी तरह नंगा ही सोया था। मैं उठ कर स्नेहल के पास गया और उसे पीछे से पकड़ कर – मेरा नंगा लंड उसकी पीठ पर टिका हुआ था – उसकी गर्दन को चूमने लगा। अभी भी मैं नंगा था और स्नेहल ने ऐसे मुझे आईने में देख लिया – मेरा पूरा शरीर, मेरा खड़ा लंड, सब कुछ। वह मुझे देख शर्माने लगी – उसका चेहरा लाल हो गया – और फिर वह मुस्कुरा दी। मैंने उससे पूछा – “क्या हुआ? अब अपने पति को बिना कपड़ों के नहीं देखोगी, तो किसे देखोगी? हर दिन देखना पड़ेगा।” स्नेहल हँसती हुई बोली – “जाइये… जल्दी से नहा लीजिए और जल्दी से एक अच्छे बच्चे की तरह कपड़े पहन कर बाहर आ जाइए।”
उसने प्यार से – लेकिन आदेश देने वाली भाषा में – मुझसे यह सब कहा। मैं अन्दर तक गुदगुदा सा गया। मैंने कहा – “तुम ही नहला दो न!” वह बोली – “नहीं… वह सब आपको खुद ही करना पड़ेगा।” मैंने कहा – “आज तो ठीक है, पर कल से तुम्हें ही मुझे नहलाना पड़ेगा!” स्नेहल यह सुनकर शर्मा गयी। फिर मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा – “और कल जो नहीं किया, वह आज करना पड़ेगा – मेरे लंड को अपने मुँह में आज लेने को तैयार रहना… और हाँ… आज पीछे से तुम्हारी गांड भी मारूँगा!” यह सुनते ही स्नेहल डर गयी – उसकी आँखें फटी रह गईं – “गांड? नहीं… प्लीज़… मुझसे यह सब नहीं होगा… बहुत डर लगता है…” मैंने मुस्कुराते हुए – बड़े प्यार से – उसे गले लगाया और कहा – “डरो मत, मैं हूँ ना… तुम्हें मैं पूरी तरह ट्रेंड कर दूँगा! बस थोड़ा सब्र रखो।” इतना कहकर मैं वहाँ से नहाने चला गया।
आज मेरी शादी का दूसरा दिन था – और हमारा रिसेप्शन था शाम को। कल की सुहागरात के बाद जब मैं अपने कमरे से तैयार होकर बाहर आया तो मेरे दोस्तों ने मुझे फिर से खूब छेड़ा। राहुल – मेरा सबसे करीबी दोस्त – बोला – “बता अजय, बता… तूने क्या किया? वर्जिनिटी टूट गयी? लगता है तूने खूब चुदाई की है कल… पूरी रात चीखें सुनाई दे रही थीं हमें बाहर खड़े होकर!” मैं यह सब सुन कर आज शर्मा रहा था – मेरा चेहरा लाल हो रहा था – जबकि कल तक यही सब बातें करते हुए मुझे मज़ा आता था।
शाम को हमारा रिसेप्शन था। मैं और स्नेहल तैयार हो गए थे – उसने एक आसमानी रंग का बहुत ही खूबसूरत गाउन पहना था, जिसमें वह एक परी लग रही थी – और हम अपने रिसेप्शन को अटेंड कर रहे थे। प्रोग्राम खत्म करके हम घर वापस आ गए। मैंने आँखों ही आँखों में अपनी बीवी को छेड़ना शुरू कर दिया – उसे देखते ही मेरा लंड सख्त हो जाता था। वह भी शोख निगाहों से मुझे देखे जा रही थी – उसकी आँखों में वही चमक थी, वही भूख थी।
रात हो गई थी तो हम दोनों सीधे अपने कमरे में चले आए। मैं सारे दिन से इसी वक़्त के इंतज़ार में था – कि कब रात हो और कब मैं स्नेहल को अपनी बांहों में ले सकूँ। कमरे के अन्दर जाते ही मैंने स्नेहल को पकड़ लिया – उसे दीवार से सटा दिया। स्नेहल भी समझ चुकी थी कि आज मैं उसे नहीं छोड़ने वाला था। मैंने बिना वक़्त गंवाए उसका रिसेप्शन वाला पार्टी वियर गाउन निकाला – ज़िप खोली, कपड़े खिसकाए – और उसे चंद मिनटों में ब्रा और पैंटी में खड़ा कर दिया। वह आज कल से ज्यादा मादक लग रही थी – क्योंकि आज उसकी शोखी भी उसकी खूबसूरत जवानी के साथ थी। उसके होंठों पर एक दबी-दबी मुस्कान थी – जो बता रही थी कि यह हसीना आज मुझे कत्ल करने का इरादा किए हुई है।
मैंने भी उसे निहारते हुए अपने कपड़े उतार दिए – शर्ट, पैंट – और सिर्फ़ चड्डी में आ गया। मेरा लंड पहले से ही बेकरार था। वह अपने हाथ फैला कर मेरी तरफ देखने लगी – जैसे कह रही हो – “आओ, अब देर मत करो।” मैंने उसे अपने आगोश में ले लिया और खड़े-खड़े ही उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया – गहरा, जोरदार, भावुक किस। कल की सुहागरात के बाद आज हम दोनों की शर्म और झिझक पूरी तरह भाग चुकी थी। स्नेहल भी अब मेरा साथ देने लगी थी – वो मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल रही थी, मेरे होंठ चूस रही थी, मेरे शरीर को अपने शरीर से रगड़ रही थी। आज की स्नेहल मेरे साथ सेक्स करने को बेकरार लग रही थी।
मैंने स्नेहल को नीचे – अपने लंड की तरफ – इशारा किया। उसने मना किया – “नहीं… मुझसे नहीं होगा…” – पर उसके मुँह पर एक शरारती मुस्कान थी। मैं आज नहीं मानने वाला था। मेरे बहुत बार कहने के बाद – प्यार से, जिद करके – स्नेहल मेरा लंड मुँह में लेने को मान गयी। मैं बेड के पास एक जगह खड़ा था और स्नेहल मेरे सामने घुटनों पर बैठ गयी – मेरे सामने, बिल्कुल सटकर। उसने मेरी चड्डी को धीरे-धीरे नीचे खिसकाया – उसके हाथ काँप रहे थे – और मेरा लंबा, सख्त, नसों से भरा लंड उसके सामने खड़ा हो गया। स्नेहल ने उसे देखा – घूर कर देखा – पहली बार इतने करीब से। फिर उसने अपने दोनों हाथों में मेरे लंड को ले लिया – उसकी गर्म हथेलियों ने मेरे लंड को घेर लिया – और उसने लंड के सुपारे पर अपनी नाक लगा कर उसकी मादक महक ली। उसके नथुने फड़क रहे थे। पहले उसने मेरे लंड के सुपारे को अपनी जीभ से चाटा – रुके-रुके कर – और फिर जीभ में आए लंड के स्वाद को महसूस किया। वह हैरान थी – थोड़ी घबराई भी – पर साथ में आकर्षित भी। दूसरी बार उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लेने से पहले मेरी आँखों में देखा तो मैंने “आह” करने के अंदाज में – आँखें बंद करके – अपने भाव जता दिए। मैं बता रहा था कि मुझे अच्छा लग रहा है।
उसने फिर से अपनी जीभ को लंड के सुपारे पर घुमाया – गोल-गोल – और फिर हौले से – बिल्कुल धीरे – उसने पूरे सुपारे को अपने मुँह में भर लिया। “आह…” मेरे मुँह से निकल गया। उसके मुँह की गर्मी पाकर मेरे लंड में गजब की फुरकन हुई – जैसे कोई कोमल, गर्म रेशम मेरे चारों ओर लिपट गया हो। मेरे लंड के टट्टे (अंडकोष) कड़क होने लगे। मैंने अपने टट्टे सहलाते हुए स्नेहल के एक हाथ को अपने टट्टों से स्पर्श करवा दिया। वह समझ गई – वह मेरी बीवी है, वह हर छोटी बात समझ जाती है। उसने धीरे-धीरे टट्टे सहलाते हुए लंड को चूसना शुरू कर दिया – पहले हल्का, फिर थोड़ा जोर से। उसे लंड का स्वाद अच्छा लगने लगा था शायद – इसलिए वह लंड चूसे जा रही थी और टट्टे सहलाए जा रही थी – बड़े प्यार से।
कुछ देर तक सिर्फ मेरे लंड के सुपारे की चुसाई का मज़ा लेने के बाद – जब मैंने उसे आँखों से इशारा किया – तो उसने आधा लंड मुँह में भर लिया। पर वह बार-बार लंड को मुँह से बाहर निकालती रहती थी – क्योंकि उसका गला छोटा था, और मेरा लंड बड़ा। कुछ देर बाद तो उसकी आँखों में पानी आ गया – वह सिसकने लगी, लेकिन रुकी नहीं। मैंने उससे कहा – “स्नेहल, मुँह खोल।” उसने मुँह खोल दिया। मैंने बेड का सहारा लेकर बैठने को कहा – और फिर मैंने उसका सिर पकड़ा और अपना पूरा लंड धीरे-धीरे उसके मुँह में पेल दिया – गहरा, गले तक। वह तड़प उठी – उसकी आँखें नम हो गईं – पर उसने हाथ से मुझे रोका नहीं। कुछ देर तक – लगभग एक मिनट – उसके मुँह में मेरा लंड ऐसे ही अड़ा रहा। फिर मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को उसके मुँह में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया – हर बार पूरा अन्दर जाता, हर बार बाहर आता। कुछ ही मिनट तक ऐसा करने के बाद – जब स्नेहल को इस नई गतिविधि की आदत सी हो गई – तो उसे अच्छा लगने लगा। अब मैंने उससे कहा कि वह खुद ऐसे ही पूरा लंड मुँह में लेकर चूसे। पहले तो स्नेहल रुआंसी हो गयी थी – पर बार-बार करने पर अब उसे अच्छा लगने लगा था। कुछ देर के बाद तो स्नेहल ने खुद पहली बार बहुत अच्छा ब्लोजॉब दिया – वह धीरे-धीरे मेरे लंड को चूस रही थी, उसकी जीभ पूरे लंड पर चल रही थी, उसके होंठ मेरे लंड के चारों ओर बंद थे। फिर जब मैं झड़ने वाला था – तो मैंने बिना बताए ही – बस एक तेज़ थ्रस्ट के साथ – अपना पूरा माल स्नेहल के मुँह में निकाल दिया। स्नेहल ने पहली बार मेरे वीर्य का स्वाद चखा। वह उसे पी नहीं पाई – उसे शायद स्वाद अजीब लगा – और उसने सारे वीर्य को बाहर नीचे थूक दिया। उसने मुँह पोंछा और थोड़ा सा मुँह बना लिया – “बहुत अजीब सा स्वाद है…” – पर आँखों में वह दीवानगी थी।
यह उस समय पहली बार की बात थी – पर अब तो स्नेहल एकदम एक्सपर्ट बन गई है। अब वह रोज़ बिना कहे ही मेरे लंड को अपने मुँह में लेती है – और मैं उसके मुँह में ही लंड झाड़ देता हूँ। वह भी अब सारे वीर्य को मजे से न केवल पी जाती है, बल्कि मेरे लंड को चाट-चाट कर साफ भी कर देती है। हर बार “मुँह में निकालने” का मज़ा लेती है। लेकिन उस रात का वह पहली बार – जब उसने डरते-डरते, सिमटते-सिमटते, मेरा लंड अपने मुँह में लिया – वह मैं कभी नहीं भूलूंगा।
लंड चुसवाने के बाद मैंने स्नेहल की ब्रा और पैंटी उतार दी – और उसे पूरी तरह नंगी कर दिया। हम दोनों एक-दूसरे के सामने नंगे थे – फिर से। मैंने स्नेहल को प्यार से समझाते हुए कहा – “देखो, यह तुम्हारा पहली बार था – इसलिए तुमने ऐसा किया। अब रोज़ अगर तुम मेरा लंड मुँह में लोगी और मेरा वीर्य पीने की कोशिश करोगी, तो तुम्हें मेरे लंड की आदत पड़ जाएगी।” उसने मेरी बातें सुनीं – और मुस्कुरा दी।
उसके बाद हम नंगे लिपटे हुए थे – बिस्तर पर। मैंने उसकी चूत में अपनी उंगलियाँ डाल दीं – दो उंगलियाँ – और अपनी उंगलियों से उसकी चूत चोदने लगा – अब तेज़ी से, क्योंकि अब उसे दर्द नहीं होता था। स्नेहल भी सिसकारियाँ भरने लगी – “आह्ह्ह… अजय… उंगलियों से तो बहुत मज़ा आ रहा है… और तेज़…” उसे उत्तेजित देख कर मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख दिया – उसकी चूत पूरी तरह खुल गई, गीली और गुलाबी। चूत लंड लीलने को आतुर थी। मैंने अपना लंड – जो अब फिर से खड़ा हो चुका था – इस बार एक ही झटके में उसकी चूत में पेल दिया। स्नेहल को हल्का दर्द हुआ – उसने भौंह सिकोड़ी – “आह… थोड़ा दर्द… पर अब ठीक है…” – पर कल के बाद वह इसके लिए अब तैयार हो गयी थी। कुछ देर बाद तो स्नेहल ने भी मेरे साथ देना शुरू कर दिया – वह मेरे हर थ्रस्ट के साथ अपने हिप्स मिला रही थी। स्नेहल के पैर मेरे कंधों पर थे, और मेरा लंड उसकी चूत में तेज़ी से चल रहा था। मेरे धक्के देने पर उसके बूब्स जोर-जोर से हिलते थे – ऊपर-नीचे, बाएँ-दाएँ – और उन्हें देखकर मुझे और भी मज़ा आ रहा था। करीब 15-20 मिनट की गहरी, जोरदार चुदाई के बाद – हम दोनों एक साथ झड़ गए। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर फूट पड़ा, और मैंने अपना गर्म वीर्य – उसकी चूत के अंदर ही – निकाल दिया।
वह रात हम दोनों के लिए कुछ खास भी थी। शादी की पहली रात – सुहागरात – हमारे बीच एक शर्म और झिझक थी – एक अजनबीपन। पर आज – दूसरी रात में – हम दोनों एक-दूसरे के साथ पूरी तरह सहज हो गए थे। अब स्नेहल भी बिना हिचकिचाए मेरे लंड को छू ले रही थी और उसके साथ खेल रही थी – उसे देख रही थी, उस पर हाथ फेर रही थी। जब उसका मन चाहता, वह मेरे लंड को अपने मुँह से चूम लेती, कभी चाट लेती, तो कभी पूरा चूस लेती। मैं भी अब उसके बूब्स, चूत और गांड को बिना झिझक खूब छेड़ रहा था। उस रात दो बार सेक्स करने के बाद हम दोनों सो गए – नंगे, थके, लेकिन बहुत संतुष्ट।
भाग 4: शादी के बाद मेरी पहली रात शॉवर सेक्स और प्यार
आधी रात को – जब नींद खुली – तब स्नेहल मेरे सीने पर अपना सिर रख कर सोई हुई थी। हम दोनों अभी भी नंगे थे – उसके बूब्स मेरे सीने पर दबे हुए थे, उसकी चूत मेरी जांघ से लगी हुई थी। उसका नंगा बदन देख कर मैं वापस बावरा हो गया। मैंने धीरे-धीरे उसके बूब्स अपने हाथों में ले लिए – दोनों हाथों से – और उन्हें दबाने लगा – धीरे-धीरे, प्यार से। इससे स्नेहल की नींद टूट गयी – उसने आँख खोली, मुझे देखा, फिर मुस्कुरा दी। पर उसने मुझे कुछ बोला नहीं – वह चुपचाप मेरे रंग में रंग गयी – अपनी आँखें फिर से बंद कर लीं, और मेरे साथ होने लगी।
मैंने उसे बेड पर से उठा लिया – अपनी ताकत से उसे गोद में उठाया – और अपनी स्टडी टेबल पर बिठा दिया। वह टेबल के किनारे पर बैठी थी, मेरी तरफ देख रही थी। मैंने उसके पैरों को फैलाया – चौड़ा – और अपने पैरों को उसकी दोनों टांगों के बीच रख कर खड़ा हो गया। एक हाथ से मैंने उसके बूब्स को मसलना शुरू किया – और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ कर उसकी चूत पर टिका दिया। फिर – एक ही झटके में – मेरा पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया। मैंने लंड को तेज़ी से अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। स्नेहल की “आह… आह… आह…” की कामुक कराहें और नीचे से हमारी चुदाई की “छप… छप… छप…” की गीली आवाज़ें पूरे कमरे में गूंजने लगीं। मैंने उसकी गांड को – जो टेबल से बाहर लटक रही थी – अपने दोनों हाथों से कस कर पकड़ लिया और अपनी स्पीड को टॉप गियर में डाल कर उसका गेम बजाना शुरू कर दिया। स्नेहल को भी बहुत मज़ा आने लगा था – उसकी आँखें अर्ध-खुली थीं, उसके होंठ फड़क रहे थे। यह पहली बार था जब मैं इतनी स्पीड में चुदाई कर रहा था – जैसे मेरे अंदर कोई जानवर जाग गया हो। मैं थोड़ी-थोड़ी देर बाद एक-दो पल का विराम देते हुए उसे चूम लेता – उसके मीठे होंठों को – और फिर वापस धकापेल में लग जाता। आधे घंटे की सॉलिड, जोरदार, बेहिसाब चुदाई के बाद – जब मैं झड़ने वाला था – तो मैंने लंड बाहर खींच कर उसके पेट पर – उसके सफेद, गोरे पेट पर – अपना गर्म वीर्य झाड़ दिया। स्नेहल भी चुदाई के दौरान दो बार झड़ चुकी थी – उसके शरीर पर हल्के-हल्के पसीने की बूंदें थीं। फिर साफ-सफाई करके हम दोनों – नंगे ही – एक-दूसरे से लिपट कर सो गए।
अगले दिन हमारी आँख देर से खुली। सुबह की पहली किरणें कमरे में आ रही थीं – हल्की, सुनहरी। तभी दरवाज़े पर खट-खट हुई। बाहर से घर वाले आवाज़ लगा रहे थे – “अजय, स्नेहल – उठो बेटा, नाश्ता तैयार है।” आज हमें देर हो गयी थी – क्योंकि हम रात भर जागे थे, चोदते रहे थे। इसलिए हम दोनों – बिना कुछ कहे – उठे और एक साथ शॉवर लेने चले गए। मैंने सोचा था कि नहाने का काम जल्दी हो जाएगा – पर उल्टा रोमांस में और देर हो गयी।
फव्वारे की गर्म बौछारें हमारे नंगे शरीर पर गिर रही थीं। हम दोनों ने एक-दूसरे को साबुन लगाया – उसके गोरे, सॉफ्ट बदन पर मेरे हाथ। मैं उसके पूरे शरीर को छू रहा था – उसके बूब्स, उसकी गांड, उसकी चूत, उसकी जांघें – सब कुछ। उसकी गीली त्वचा और साबुन की चिकनाई ने मुझे और पागल कर दिया। मैंने उसके पूरे जिस्म को चूमना शुरू कर दिया – उसकी गर्दन, उसके कंधे, उसके बूब्स, उसके पेट। बस फिर क्या था – मैंने स्नेहल को दीवार की तरफ मुँह करके चिपका दिया – उसके हाथ दीवार पर थे – और मैंने पीछे से एक और बार चुदाई शुरू कर दी – सीधे खड़े-खड़े। साबुन और गीलेपन के कारण इस बार मेरा लंड बिना किसी रुकावट के आसानी से अन्दर चला गया – फिसल गया। ऊपर से शॉवर की मस्त बूंदें – और नीचे जोरदार चुदाई अपनी फुल स्पीड पर चल रही थी। पूरे बाथरूम में “छप… छप… छप…” की और हमारी मदभरी सिसकारियों की आवाज़ गूंजने लगी थी। हम दोनों आनंद के सातवें आसमान पर थे। 15-20 मिनट तक मैंने चुदाई की – बिना रुके, बिना थके। यह हमारा पहला शॉवर सेक्स था – और वह भी बहुत यादगार था। वक़्त की कमी की वजह से हमें जल्दी निपटना पड़ा। लेकिन मैंने तय कर लिया था कि बाथरूम में भी अब स्नेहल को खूब जम कर पेलूँगा – और मैंने अपना वादा निभाया।
हम दोनों कमरे से बाहर आ गए – तैयार होकर। मेरे दोस्त अभी तक मेरे घर में रुके हुए थे – वे भी रिसेप्शन के लिए आए थे और रात भर यहीं सोए थे। उन्होंने मुझे एक सूनी जगह में घेर लिया – जहाँ स्नेहल नहीं थी – और मेरी खिंचाई करना शुरू कर दिया – “अजय, तू तो आज ट्रैक पर आ गया रे… कल और आज – दो रातें, और कितनी बार हुआ? सुबह सुबह भी साथ नहाए? लगता है हमारी अनुपस्थिति में भी तुमने खेल कर रख दिया!” मैं शर्म से पानी-पानी हो गया – पर अन्दर से बहुत मज़ा भी आ रहा था। उन्होंने मुझसे पूछा – “क्या-क्या हुआ? कौन से पोज़ में किया है? सब ठीक से हुआ या नहीं?” वैसे तो मेरे दोस्त काफ़ी अच्छे हैं और अच्छे परिवारों से हैं – और मेरी बीवी स्नेहल की भी बहुत इज़्ज़त करते हैं। पर अकेले में – दोस्तों के बीच – मेरी इस तरह खिंचाई भी कर लेते हैं। और मुझे भी अच्छा लगता है – क्योंकि यही तो दोस्ती है।
भाग 5: आज भी वैसे ही – प्यार, जुनून, और चुदाई जारी
आज मैं और स्नेहल शादी के 5 साल पूरे कर चुके हैं – पाँच साल से ज़्यादा। हमने एक-दूसरे को कभी निराश नहीं किया। स्नेहल ने मुझे पिता बनाया – हमारा एक सुंदर बेटा है – पर हमारे बीच वह प्यार, वह जुनून, वह हवस – आज भी वैसी ही है। आज भी हम रात को चोदते हैं – कभी चूत, कभी गांड, कभी मुँह। आज भी स्नेहल बिना कहे मेरा लंड चूस लेती है, और मैं उसके मुँह में झड़ जाता हूँ। आज भी हमारी चुदाई पूरे घर में चीखों और सिसकारियों से गूंजती है। और आज भी – पाँच साल बाद – जब मैं उसे नंगा देखता हूँ, तो मेरा लंड सख्त हो जाता है, बिल्कुल पहली रात की तरह।
शादी के बाद मेरी पहली रात ने मुझे सिखाया कि प्यार सिर्फ दिल से नहीं, बल्कि शरीर से भी किया जाता है। स्नेहल मेरी जान है, मेरी रानी है, मेरी हवस है, मेरी चूत है, मेरी हर चीज़ है। और हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं – आज भी, कल भी, और हमेशा।