सुहागरात की पहली रात में कुंवारी चूत की चुदाई 

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सुहागरात की पहली रात में कुंवारी चूत की चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि एक कुंवारी लड़की की सुहागरात कैसी होती है? यह रोमांटिक और हॉट हिंदी सेक्स स्टोरी मेरठ की रहने वाली हर्षिता और उसके आर्मी पति राहुल की है। हर्षिता का फिगर 33-28-36 का है—ऐसे उभार जिन्हें देखकर कोई भी मर्द पागल हो जाए। बचपन के प्यार से शुरू हुई यह कहानी उस पहली रात तक पहुंचती है जहां राहुल ने अपनी नई-नवेली दुल्हन की चूत की सील तोड़ी और उसे चुदाई का असली मजा चखाया। उस रात हर्षिता की कुंवारी चूत में राहुल का 7 इंच का लंड घुसते ही दर्द से चीख निकल गई, खून आया, लेकिन धीरे-धीरे वह दर्द ऐसे मज़े में बदल गया कि पूरी रात उन्होंने चार राउंड चुदाई की। अगर आप सुहागरात की पहली रात में कुंवारी चूत की चुदाई वाली देसी सुहागरात की असली कहानी पढ़ना चाहते हैं, जिसमें प्यार, तड़प, दर्द और ज़बरदस्त सेक्स सब कुछ हो, तो हर्षिता और राहुल की यह पूरी दास्तान आपको अंत तक बांधे रखेगी।

भाग 1: बचपन का प्यार और रिश्ते की शुरुआत

शादी के बाद मेरी सुहागरात की कहानी–मैं हर्षिता, मेरठ की रहने वाली हूँ. मेरी फिगर साईज की बात करें, तो मेरे बूब्स 33 इंच के हैं यानि आप उन्हें पूरा का पूरा मुँह में लेकर गपगप कर सकते हैं. कमर मेरी 28 इंच की है, जिसे मटका कर जब मैं चलती हूँ, तो अपनी 36 इंच की गांड को अक्सर झटके देते हुए चलती हूं. मेरे हंसबेंड राहुल मेरी इस सेक्सी फिगर के दीवाने हैं.

यही कारण है कि मौका मिलने पर वे मेरी चुत की चुदाई ताबड़तोड़ करते हैं. उनका मोटा तगड़ा लंड जब मेरी चूत में जाता है, तो आह … क्या मजा आता है.

आज का ये किस्सा मेरा और मेरे पति राहुल की सुहागरात का है.

वो कहते हैं न कि शादी हर एक लड़की का सपना होता है. शादी को लेकर लड़की कई तरह के अरमान दिल में संजोये होती है. उसके वे अरमान उसके सपनों के राजकुमार से दिखने वाले पति से ही होते हैं. उसका मन होता है कि उसे एक अच्छा ससुराल मिले. उस लड़की के मन की सबसे बड़ी बात उसकी जवानी की दहलीज पर कदम रखने के बाद आए दिन उसके गुप्तांगों में उठ रही चुल्ल को शान्त करने से जुड़े होते हैं.

मेरी ये टीनएज रोमांस लव स्टोरी भी कुछ ऐसी ही है.

जब मेरी शादी हुई, तो मेरे पति राहुल की उम्र 26 साल थी और मैं 22 की थी. आज से एक साल पहले ही हमारी शादी हुई थी.

दरअसल, मैं और राहुल बचपन में एक ही स्कूल में पढ़ते थे. उस दौरान पढ़ाई के सिलसिले से एक दूसरे के घर आना जाना, साथ में पढ़ना लगा ही रहता था. यह सब हमें सामान्य ही लगता था.
लेकिन जब आगे की पढ़ाई के लिए हम दोनों ने अलग अलग कॉलेज में दाखिला लिया, तो हम एक दूसरे की कमी सी महसूस करने लगे. हमारे दिलों में धीरे धीरे एक दूसरे के लिए तड़प सी बढ़ने लगी.

इसी बीच मुझे पता लगा कि राहुल आर्मी में भर्ती की तैयारी में लगा है. जल्द ही उसका सिलेक्शन भी हो गया. लेकिन कहते हैं कि जोड़ियां ऊपर वाला ही बना कर भेजता है.

तो हुआ यूं कि एक बार हमारे किसी रिश्तेदार ने मेरे मम्मी पापा के आगे मेरी शादी का प्रस्ताव रखते हुए लड़के का नाम बताया. उसने नाम बताया तो वो राहुल का ही नाम था, जिसे मैं मन ही मन ही मन में चाहने लगी थी. लेकिन उस समय न मैं अपने प्यार का इजहार कर सकी और न ही राहुल ने कुछ कहा.

हमारे परिवार वाले राहुल की फैमिली को अच्छे से जानते थे, सो उन्होंने तुरन्त हां कर दी.

अगले ही दिन राहुल और उसके मम्मी पापा मुझे देखने के लिए हमारे घर आए. मैंने राहुल को काफी टाइम बाद देखा था, तो बस मैं उसे देखती ही रह गई. उसने आर्मी में पोस्टिंग की वजह से अच्छी खासी बॉडी बना ली थी. कुछ ऐसा ही हाल राहुल का भी लग रहा था, वह भी नजरें छिपा कर मुझे देख रहा था. मेरे शरीर में आए उभारों की मानो वो पैमाइश सी कर रहा था.

मेरी एक सहेली शिखा भी दो दिन से मेरे घर आई हुई थी. उसने भी हम दोनों को एक दूसरे के लिए परफेक्ट बताया … और वो राहुल से हंसी मजाक करने लगी.

इतने में मेरी चाची बोलीं- एक बार इन दोनों को अकेले में आपस में बात करने देते हैं.

चाची हम दोनों को ऊपर बने कमरे में छोड़ आईं और दरवाजे को अटका सा दिया. पहले तो हम दोनों चुपचाप से बैठे रहे. आखिरकार बात की शुरूआत राहुल ने ही की.

राहुल ने मेरी पढ़ाई के बारे में पूछा और इसके बाद मैंने उसे उसकी नौकरी के बारे में जाना.

इसके बाद उसने मुझसे पूछा कि मैं इस शादी के लिए खुश हूं या नहीं या मेरा कहीं कोई अफेयर तो नहीं चल रहा है.
जब उसने ऐसा पूछा, तो मुझे अजीब सा लगा कि जो दबा सा प्यार मैं राहुल से करती हूं, वह उसे पहचान ही नहीं पाया.

ऐसे में मैंने भी अब अपने आप पर कंट्रोल करते हुए उससे शरारत करने के मन से कहा- राहुल, मेरा किसी और से अफेयर है .. और मैं यह शादी नहीं कर सकती. आप कोई और लड़की देख लो.

मेरे इतना कहने पर राहुल के चेहरे के भाव अचानक से बदल गए. उसने तपाक से मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और ऐसे कसा, मानो मुझे कभी छोड़ने ही न वाला हो.

इसके बाद राहुल ने पूछा- हर्षिता जो तुम कह रही हो, क्या वो सच है?
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- हां यही सच है.

इतना सुनते ही वह बाहर जाने लगा. लेकिन जाते जाते उसने मुड़ कर देखा, तो उसकी आंखें कुछ नम सी नजर आईं.

मैंने कहा- रुको राहुल, क्या हुआ!
तो वह मेरे पास आया और बोला- हर्षिता मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना रह नहीं सकता.
मैंने कहा- अगर प्यार करते थे, तो फिर आज तक बताया क्यों नहीं?

राहुल- कॉलेज की पढ़ाई के दौरान मेरे मम्मी पापा ने मुझे कहा था कि मैं शादी भले ही किसी से भी कर लूं, उसके लिए वे कभी रोक टोक नहीं करेंगे. लेकिन उनकी शर्त यही थी कि मैं पहले अपने कैरियर पर ध्यान दूं. मेरे पापा ने कहा था कि बेटा अपनी मनपसंद की लड़की से शादी कर लेना, लेकिन उससे पहले अपना भविष्य जरूर देख लेना.

इतना कह कर राहुल मेरी तरफ देखने लगा. मैं भी उसे मुस्कुरा कर देखती रही.

उसने आगे कहा- मुझे मेरे पापा की बात इसलिए भी जंच गई थी क्योंकि मैं खुद चाहता था कि मैं अपनी कमाई से तुम्हें खुश रख सकूं. सो मैंने नौकरी मिलने तक का इंतज़ार किया और नौकरी लगते ही तुम्हें अपनी जीवन संगिनी बनाने के बारे में घर पर बताया. जिस पर घरवालों ने सहमति देते हुए तुमसे मेरी शादी की बात चलाई.

राहुल के मुँह से यह सब सुनकर मैं भी हैरान सी रह गई. यानि हमारे घर रिश्ता अनायास नहीं हुआ था, बल्कि राहुल ने ही भिजवाया था.

इस पर मैंने उसके गाल पर हल्की सी चिकोटी काटते हुए कहा- मेरे चम्पू आशिक … मैं भी मजाक कर रही थी. मैं भी तुम्हें चाहने लगी थी और तुम्हारे इजहार का ही इंतज़ार कर रही थी.
वो एकदम से खुश हो गया और बोला- हर्षिता क्या सच!
मैंने कहा- … मुच राहुल.

वो मेरी तरफ प्यार से देखने लगा. मगर उसने कोई वो पहल न की, जो मैं उससे उम्मीद कर रही थी.

फिर मैंने ही पहल की और राहुल के गाल पर किस करते हुए कहा- राहुल आई लव यू.

अब राहुल ने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और बोला- आई लव यू जान, लव यू लव यू.

इतना कहते ही उसने मेरे होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया.

यकीन मानिए उस समय मानो सब कुछ थम सा गया था. हम एक दूसरे में गुम से हो गए थे.

हम दोनों ही अपने होंठों से एक दूसरे को खाने लगे. हमारी जकड़ भी और मजबूत हो गई थी. मेरी चुचियां उसकी छाती पर रगड़ सी खाने लगी थीं. जिससे हम दोनों के बदन गर्म होने लगे थे. हम दोनों एक दूसरे को किस करते हुए पीठ सहलाने लगे.

इसी बीच राहुल का हाथ मुझे मेरी कमर से होता हुआ मेरी गांड पर फिरता महसूस हुआ.

आह … न जाने क्या था उस स्पर्श में … मेरे तन-बदन में एक अजीब सिहरन दौड़ गई.

आप शायद ही यकीन नहीं करोगे कि मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा हग आज तक नहीं किया था. सेक्स तो कभी किया ही नहीं था. अपनी सहेलियों की सेक्स भरी बातें सुन कर भी अपने आप को कंट्रोल किया हुआ था, लेकिन इतने समय कुछ दबा सा आज मानो बाहर आने को बेताब सा हो रहा था.

राहुल के सीने में गड़ते मेरे बूब्स के निप्पल्स खड़े खड़े से हुए महसूस हुए. हम दोनों बिना रुके एक दूसरे को खाए जा रहे थे. मेरा तो राहुल के बाहुपाश से निकलने का मन ही नहीं हो रहा था.

मुझे उसकी पैंट में से मेरी चूत में कुछ गड़ता सा महसूस होने लगा. इससे मेरी चूत खुद ब खुद उसकी पैंट से चिपक गई. राहुल ने मेरे दोनों चूतड़ों को मुट्ठी में भर लिया और अपने लंड को चूत पर रगड़ने लगा.

जिस तरह से हम दोनों एक दूसरे को खा रहे थे. ठीक उसी तरह से हमारे गुप्तांग एक दूसरे के लिए बेताब से हो गए थे. थोड़ी ही देर में मेरी चूत से लिसलिसा सा कुछ टपकने लगा.

राहुल की पैंट में उसका लंड मानो फुंफकारने सी मारने लगा. हम दोनों एक दूसरे में समा कर पिघल से गए. इतने में किसी की आने की आहट हुई और हम दोनों अलग हो गए.

हम अलग तो हो गए थे, लेकिन दिलो-दिमाग में जो सुरूर चढ़ चुका था, वह हमे अब भी अलग ही अहसास करवा रहा था. मेरी चूत रानी चु चु करने लगी थी.

तभी कमरे में चाची दाखिल हुईं और हमें सबके बीच ले गईं.

हम दोनों की सहमति के बाद दोनों परिवारों ने खुश होते हुए एक दूसरे को लड्डू देकर मुँह मीठा कराया. लेकिन हम दोनों के मन अलग ही लड्डू की डिमांड सी कर रहे थे. राहुल का मन मेरे बोबों को लड्डू की तरह खाने का हो रहा था, तो मेरा मन उसके लंड के नीचे लटक रहे टट्टों को लड्डू की तरह पूरा गटकने का होने लगा.

मैंने एक दो बार पोर्न मूवी देखी है, जिसमे लड़के का लंड तनाव में आने के बाद उसके नीचे लटके टट्टे धारीदार गोलू मोलू से हो जाते हैं .. जिन्हें गप से मुँह में भरने को मन करता है.

इसके बाद हमारी शादी तय हुई और राहुल वापस चले गए.

भाग 2: शादी से पहले की रात और सहेली के साथ पहली गर्मी

उस रात को मुझे नींद ही नहीं आई. मैं बस करवटें बदलती रही. मेरा प्यार मुझे मिलने वाला था, साथ ही दिन में जो कुछ भी हम दोनों में हुआ, वह रोमांच पैदा कर रहा था. इतना रोमांच हो रहा था कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब लेटे लेटे मेरा हाथ खुद ब खुद लोवर से होता हुआ मेरी पैंटी के अन्दर चला गया.

मैं अपनी लाडो सी चूत को सहला रही थी. मेरी उंगलियां मेरी भगनासा के दाने को रगड़ने लगी थीं. चूत में भाप सी निकलने का सा अहसास होने लगा. चूत पर रखी मेरी ही हथेली मानो अपने आप चूत से प्यार करने लगी.

इस प्यार में लोवर आड़े आई, तो मैंने अपनी गांड उठा कर लोवर उतार दी. फिर पैंटी आड़े आई, तो पैंटी को उतार कर हाथ में ले लिया. मेरा एक हाथ मेरी चूत को सहला रहा था, तो दूसरे हाथ से मैं पैंटी सूंघने लगी. आज मेरी चूत रस में भीगी मेरी पैंटी से मदहोश करने वाली महक मुझे सराबोर करने लगी. सब कुछ मेरे बस से बाहर सा हो रहा था.

अब मेरे बोबे ब्रा की कैद से छूटने को बेताब से हो रहे थे. मैंने अपनी टी-शर्ट ऊपर करके पैंटी हाथ में लेकर बोबों पर रगड़ते हुए अपने चूचियों को सहलाने लगी.

मेरी चूचियों के निप्पल खड़े होने लगे. मैंने तुरन्त टी-शर्ट उतार कर अपनी ब्रा उतार दी और एक निप्पल को बेरहमी से खींचने लगी.

आह … आह … की सिसकारियां निकलने लगीं. मेरी टांगें एक दूसरे रगड़ खाने लगीं. मैं कभी पैंटी को बोबों पर रगड़ती, कभी अपने होंठों पर.
मेरी कामुक सिसकारियां बढ़ने लगीं- आह … आह.

मैं ये भी भूल गई कि इस टाइम में मेरे कमरे में मेरे बेड पर मेरी सहेली शिखा भी साथ में लेटी हुई थी.

वो मेरी इस कामाग्नि को देख रही थी. वो न केवल मुझे ये सब करते देख रही थी, बल्कि खुद भी अपनी लोवर में हाथ डालकर अपनी चूत का भुरता बनाने की जद्दोजहद कर रही थी. मुझे होश तब आया, जब मेरी चूत के पास सुड़प .. सुड़प … सुड़प की आवाज आने लगीं और मेरा दाना खिंचने सा लगा.

दरअसल मेरी ही तरह कामाग्नि में जल रही मेरी शिखा ने मुझ पर चुदास भरा प्रहार करते हुए मेरी चूत को अपने होंठों के आगोश में ले लिया था.

मेरी कुंवारी चूत पर एकाएक हुए इस हमले से मेरी सोचने समझने की शक्ति मानो समाप्त सी हो गई थी. मैं अपने कंधों को जरा सा उठा कर यह देखने लगी कि आखिर मेरी चूत को कौन चूस रहा है.

नीचे मेरी सहेली बड़ी शिद्दत से मेरे दाने को चूस चूस कर अपने होंठों से बाहर की ओर खींच रही थी. जैसे ही उसने अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर डाली, ‘आआआह …’ मेरी गांड खुद ब खुद उछलने लगी. मैंने उसे बालों से पकड़ कर मेरी चूत पर और ज्यादा दबाव बना दिया और उसकी पीठ पर अपनी टांगों की कैंची सी बना दी.

इसके साथ साथ मैं हाथ में पकड़ी अपनी कच्छी को जोर जोर से चाटने लगी. मेरी कच्छी का हल्का हल्का सा नमकीन सा स्वाद मुझे मदहोश किए जा रहा था. मैं कामुकता के सागर में डुबकी सी लगाने लगी. मेरी चुदास बढ़ती जा रही थी.

मेरी बढ़ती चुदास को देखते हुए शिखा ने एकाएक पलटी मारी और वह अपना पोज बदलते हुए मेरे ऊपर आ गई. उसकी गांड मेरे मुँह पर थी, जिसे सैट करते हुए उसने अपनी फुद्दी को मेरे मुँह पर लगा दिया और मेरे होंठों पर रगड़ने लगी. साथ ही साथ मेरी चूत को चाटने लगी. उसकी फुद्दी का दबाव मेरे मुँह पर था. साथ ही उसकी पेट का दबाव मेरे बोबों पर पड़ने लगा.

साली शिखा इस खेल में खेली खाई थी. वो जैसे जैसे मेरी चूत को चाट रही थी, ठीक वैसे ही मैंने उसकी गांड पर अपने दोनों हाथों से दबाव बना दिया.

उस वक्त शिखा अलग ही रूप में नजर आई. मेरे होंठ जैसे ही उसकी चूत पर लगे, वह गनगना उठी.

शिखा बोली- आह … खा साली खा, मेरी इस चूत को खा ले. चोद डाल इसे अपनी जुबान से … चोद … कुतिया जोर से चोद.
उसके मुख से निकली गालियों ने मुझे और भी गर्म सा कर दिया था.

मैं उसकी चूत को जीभ से चाटने लगी. जैसा स्वाद मेरी कच्छी से आ रहा था उससे भी बेहतर स्वाद अब मेरी जीभ को लग चुका था. चूंकि यह मेरा पहला अनुभव था. मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, जिसे शिखा चाट रही थी. उसकी चूत भी पानी पानी हो रही थी, जिसे मैंने चाट चाट कर साफ कर दिया.

हम दोनों सहेलियों का पानी निकल जाने के बाद हम दोनों ही शिथिल हो गई थीं.

कुछ देर यूँ ही पड़े रहने के बाद हम अलग हुई.

इसके बाद वह मेरे पास आई और मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड़ते हुए किस करने लगी. मैं भी उसके होंठों का रसपान करने लगी. हम दोनों के होंठों से अपनी अपनी चूत के पानी का स्वाद आने लगा.

यकीन मानिए हम दोनों के बीच इतना सब हुआ, जिसका कभी अंदाजा भी न था.

थोड़ी ही देर में हम दोनों सहेलियां एक दूसरे से लिपट कर नंगी ही सो गईं.

सुबह उठ कर देखा तो शिखा की … और मेरी ब्रा कच्छी इधर उधर पड़ी थी. हमने कपड़े पहने और एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा दीं.

शिखा बोली- कैसा लगा जान कल रात को?
मैंने कहा- सच बताऊं, तो एक अलग ही अहसास हुआ.
शिखा- जान, कल रात वाले से भी आगे का आनन्द अभी बाकी है.
मैं- सच शिखा!
शिखा- हां जान, पर अब आगे का आनन्द तू अपने राहुल से ही लेना. मतलब शादी के बाद. तब तक अपने ऊपर कंट्रोल कर … फिर देखना क्या क्या होता है.

उस दिन के बाद से मेरे जिस्म के बारे में मेरी ही सोच बदल सी गई. अब मेरा जिस्म जिस्म न लग कर, एक आनन्द का स्त्रोत से लगने लगा. अपने एक एक अंग में मुझे न जाने कैसे अलग सा ही प्यार से होने लगा था.

मैं कल्पनाओं के सागर में डूब कर कभी अपनी निगोड़ी चूत को शीशे के सामने सहलाती, तो अपने बोबों को दबाती, निप्पलों पर अपना थूक लगा कर उंगलियों से सहला सहला कर हल्का हल्का सा खींच कर खड़ा करती.

इसी बीच मेरी शादी की तारीख तय हो गई और राहुल से भी बातें होने लगी. बातों का सिलसिला धीरे धीरे जिस्मानी सम्बन्धों पर चलने लगा. राहुल जब भी ऐसी बात करता, मेरी चूत पानी छोड़ने लगती.

भाग 3: फार्म हाउस में सुहागरात – केक से लेकर सील टूटने तक

खैर, वह दिन आ ही गया जब मेरी और राहुल की शादी होनी थी.

राहुल दूल्हा बनकर आया और मैं भी दुल्हन बनकर कयामत ढा रही थी. रस्मो-रिवाज के मुताबिक हमारी शादी हुई और मैं अपने मायके से ससुराल के लिए विदा हुई.

राहुल के घर आई, तो सभी रिश्तेदारों ने जी खोल कर मेरा स्वागत किया. वहां पता चला कि राहुल और मुझे थोड़ी ही देर में फार्म हाउस में शिफ्ट किया जाएगा, जहां मेरे और राहुल के अलावा बस एक मेड रहती थी. ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि राहुल ने दोबारा से ड्यूटी ज्वाइन करनी थी. अतः हम दोनों एक दूसरे के साथ कुछ समय बिता सकें.

तो घर परिवार में थोड़ा एंजॉयमेंट करने के बाद हमें फार्म हाउस में शिफ्ट कर दिया गया. वहां जाते हुए रास्ते में हम दोनों एक दूसरे से कुछ न कुछ बातें करते रहे थे और एक दूसरे से सहज हो चुके थे.

शहर से बाहर बने इस फार्म हाउस में आसपास सब सुनसान ही था. हम दोनों वहां पहुंचे, तो देखा कि फार्म हाउस को हमारे स्वागत के लिए आकर्षक रूप से सजाया हुआ था. हमारे वाले कमरे को विशेष रूप से सजाया गया था. पूरे कमरे में गुलाब के फूलों की सुगन्ध आ रही थी.

राहुल ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे कमरे में ले गया.

हम दोनों एक दूसरे से पहले से ही लम्बे समय से परिचित थे, साथ ही कई दिनों से लगातार फोन से बातें कर रहे थे, तो हमें कुछ अलग सा या संकोच सा महसूस भी नहीं हुआ.

कमरे में ले जाकर राहुल ने मुझे बेड पर बिठाया और खुद वापस आने का कह कर एक बार बाहर चला गया. हालांकि मुझे संकोच तो नहीं हो रहा था, लेकिन नारी सुलभ स्वभाव के कारण बस हल्की सी लज्जा और हिचकिचाहट सी थी. मैं घूंघट में बैठी राहुल का इंतज़ार करने लगी और मन ही मन अपनी सुहागरात के बारे में सोच सोच कर पगला सी रही थी.

थोड़ी ही देर में राहुल आया, उसने कमरे की रोशनी मद्धिम की. फिर मेरे करीब आते ही उसने मेरा घूंघट उठाया. फिर उसने एक माहौल बनाने के लिए घर परिवार की बातें की.

इसके बाद पास ही टेबल पर रखे ड्राईफ्रूट वाले दूध के गिलासों को उठाया और एक ही गिलास से हम दोनों ने बारी बारी से एक एक चुस्की लेकर दूध पिया.

इसके बाद बातों बातों में उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा और मेरे हाथों को पकड़ कर चूम लिया.

‘आ .. ह ..’

उस चुम्बन ने न जाने क्या कर दिया था. मैं यही सोच कर पागल सी हो रही थी कि अभी बस हाथ पर ही चुम्बन किया है, आगे आगे क्या क्या होगा और उससे मेरी क्या हालत होने वाली है.

इसके बाद उसने मेरे गालो पर हाथ फेरते हुए मेरे माथे को चूम लिया. मैं सिहर सी उठी.

राहुल ने मुझे प्यार से बोला- जान आई लव यू.
इसके बाद उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मेरी गुलाब सी पंखुड़ियों सरीखे होंठों को अपने होंठों के आगोश में लेकर खाने लगा.

मन तो मेरा भी कर रहा था कि मैं भी बराबरी से उसके होंठों को खा जाऊं, लेकिन मैंने जैसे तैसे एक बार खुद पर कंट्रोल सा किया हुआ था. मगर मैं तड़प सी रही थी.

राहुल ने अब अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मेरी जीभ को अपने होंठों से बाहर खींच कर चुभलाने लगा.
उसके इस स्मूच से मैं धीरे धीरे गर्म होने लगी.

राहुल ने अब अपना एक हाथ मेरे मम्मे पर रख कर उसे दबाना शुरू कर दिया.
इससे मेरे कंट्रोल की मां चुद गई. अब मैं भी पूरी शिद्दत से राहुल का साथ देने लगी.

हम दोनों ने एक दूसरे को जकड़ लिया और जीभ से जीभ का मिलन करवाने लगे. साथ ही बीच बीच में एक दूसरे को ‘आई लव यू, आई लव यू.’ कहने लगे.

तभी राहुल ने मेरे कंधे पर किस किया, जिससे करंट सा दौड़ गया. मेरे तन बदन में आग सी लग गई. मौसम जरूर ठंड का था, लेकिन मैं लगातार गर्म ही होती जा रही थी.

राहुल ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए. उसने मेरा हाथ ऊपर उठा कर मेरी चोली ऊपर की तरफ़ खिसकाते हुए उतार दी. मैं उसके सामने मेहरून रंग की ब्रा में थी. उसने ब्रा के ऊपर ही मेरे बोबों को दबाना शुरू कर दिया.

मेरी सांस जोर जोर से चलने लगी. कसी हुई नई ब्रा में कैद मेरे सफेद कबूतर बाहर आने को तड़प से रहे थे. राहुल उनकी गोलाइयों को नापता हुआ ऐसे दबा रहा था मानो हवा भर रहा हो.

फिर उसने मेरी ब्रा के अन्दर हाथ डालकर जब मेरे बोबों को स्पर्श करते हुए निप्पल को पकड़ा, तो मेरी ‘आ … ह …’ निकल गई.

मैंने भी राहुल के होंठों को जबरदस्ती अपने होंठों में जकड़ते हुए चूसना शुरू कर दिया. उसके गालों पर यहां वहां किस करने शुरू कर दिए. मैं अपने पति को ताबड़तोड़ किस पर किस किए जा रही थी.

इतने में राहुल ने मेरी पीठ पर हाथ फिराते हुए ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरे दोनों सफेद कबूतरों को आजाद कर दिया.

मेरे चूचियों ने उसके सामने उछल उछल कर मस्ती दिखाई, तो राहुल ने मेरे एक बोबे को अपने मुँह में लिया और उसे चूसने लगा.

मैं बस राहुल के इन प्रहारों ने पगला रही थी. साली शिखा ने पहली बार मेरी चूत तो चाटी थी, लेकिन मेरे बोबों को जो स्पर्श आज मिला, वैसा उसने नहीं दिया था.

राहुल ने मुझे लिटा दिया और वो अभी भी मेरे उसे बोबे को मुँह में लेकर चूस रहा था और दूसरे बोबे के निप्पल को उंगलियों से खींच रहा था.

मेरे निप्पल खड़े खड़े से महसूस होने लगे. वहीं राहुल मेरे ऊपर लेटे होने के कारण उसका लंड मेरी चूत पर महसूस होने लगा. राहुल गप गप करके मेरे दोनों बोबों को बारी बारी से चूस रहा था.

मैं भी कामाग्नि के वशीभूत होकर उसके बालों में जोर जोर से हाथ चलाने लगी और उसके मुँह का दबाव मेरे बोबों पर बनाने लगी.

राहुल ने मेरे एक बोबे को अपने मुँह में पूरा भरा और दूसरे बोबे को हाथ से सहलाने लगा. मुझे न जाने क्या मस्त अनुभूति सी होने लगी कि मैं उस मजे को लिख ही नहीं पा रही हूँ. उसके मुँह की गर्मी से मेरे दूध को एक अजीब सा मजा आने लगा था.

एक दूध को चूसना और दूसरे को मसलने के साथ साथ वो अपने दूसरे हाथ को मेरे बदन पर सहलाने लगा. मेरे बटर वेक्स किए हुए चिकने बदन पर उसका हाथ फिसलने लगा.

फिर राहुल ने मेरे लहंगे को उतारने के लिए मेरी कमर में हाथ डाला. मेरे लहंगे को जैसे ही उतारने लगा, मैंने अपनी गांड उठा कर लहंगा उतारने में उसकी मदद की. लहंगा उतरते ही मैंने शर्म से अपने चेहरे को हाथों से ढक लिया. मेरी चूत मेहरून कलर की कच्छी से ढकी हुई थी.

राहुल ने नीचे की ओर सरकते हुए मेरे एक पांव के अंगूठे को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया.

आप यकीन नहीं कर सकते कि उस वक्त मुझ पर क्या गुजर रही थी. मैं आंखें बंद किए अपनी गर्दन को कभी दांए, तो कभी बाएं तरफ घुमा रही थी.

फिर राहुल ने मेरी टांगों को प्यार से सहलाना शुरू कर दिया था. उसका हाथ अब मेरी नंगी जांघों को सहलाने लगा था. उसने मेरी दाईं जांघ की तरफ से मेरी पैंटी के अन्दर अपनी उंगली डाल दी और पैंटी की लकीर के अन्दर अन्दर उंगली चलाने लगा.

इससे मेरी चुदास हद से ज्यादा बढ़ गई. मैं अपनी गांड उठा उठा कर अपनी चूत में उसे घुस जाने का न्यौता देने लगी. लेकिन मैं जहां इस खेल में नई थी, वहीं राहुल माहिर खिलाड़ी के तौर पर सब कर रहा था. वह जल्दबाजी करने की बजाए मेरी चुदास को बढ़ा कर मेरी सुहागरात को यादगार बनाने चाहता था.

एकाएक राहुल ने मुझे पेट के बल पलट दिया और मेरी पीठ पर किस करने लगा. मैं बस ‘आह आह ..’ करके मादक सिसकारियां ले रही थी. मेरी कामुक सिसकारियों की आवाज और रफ्तार दोनों ही बढ़ रही थी.

मेरे पतिदेव ने अब अपना एक हाथ मेरी कच्छी के अन्दर डालकर मेरी गांड को सहलाना शुरू कर दिया.

वो अहसास ‘आह … कितना कामातुर कर रहा था मैं कैसे कहूँ.

फिर उसने मेरी गांड के बड़े से भाग को अपनी मुट्ठी में जोर से भींच लिया. मुझे दर्द होने की बजाए मजा आने लगा. मेरा मन किया कि वह इसी तरह से मेरी गांड को बार बार भींच ले.

इसके बाद राहुल ने मेरी कच्छी को मेरे जिस्म से अलग कर दिया और गांड पर दांत से काट कर किस पर किस करने लगा.

मेरी गांड की गुलाबी चकरी पर जब उसने अपनी जीभ फिराई, तो कई हजार वोल्ट का करंट सा लगा.

मेरी गांड, मेरी चूत, मेरे बोबे सब राहुल ने थोड़ी ही देर में अपने गुलाम से बना लिए थे. मेरे बोबे उसके मुँह में जाने को तरसने लगे. मेरी चूत गर्मी से धधकने लगी, तो रही सही कसर अब गांड ने पूरी कर दी थी, जो एक अलग ही आनन्द में गोते खाए जा रही थी.

मेरे अंग अंग में आग लगा कर राहुल उठा और अपने कपड़े उतारने लगा.

अपने सारे कपड़े उतार लेने के बाद वह एक बार फिर से मेरी गांड पर सवार हो गया.

इस बार उसका किया गया प्रहार मुझे कुछ ज्यादा ही जोर से लगा. क्योंकि इस बार उसका जिस्म बिना कपड़ों के मेरे जिस्म से स्पर्श कर रहा था और उसका सांप जैसा लंड मेरी गांड की दरार में मानो अपनी बिल ढूंढ रहा था.

मैं वासना से ‘आह … आह …’ करती जा रही थी.
आखिरकार मुझसे रहा नहीं गया. मैं स्वयं ही एकाएक सीधी हुई और पीठ के बल लेट गई.

मैं राहुल को सिर के पीछे से पकड़ कर किस पर किस करने लगी. मैंने कहा- आह राहुल आ..आ आई ल..लव य..य..यू … जान.
राहुल भी बोला- यस आई लव यू टू जान.

एक बार फिर से राहुल उठा और बेड के दूसरे कोने की तरफ जाकर वापस आ गया. मैं सीधी ही लेटी हुई थी. उसने मेरी चूत, हां मेरी चूत, मेरी कमसिन बुर, मेरी सील फुद्दी पर अपना पहला किस किया.

‘आ आ आ ह …’ मैं आग से झुलस सी गई.

फिर उसने मेरे दाने पर अपनी जीभ चलाई, तो मेरे बदन में लाखों चींटिया सी दौड़ने लगीं. मैं मन ही मन मानो उसे गालियां भी दे रही थी कि बहनचोद अब घुसा भी दे … इसमें कुछ.

मगर राहुल एक मंजा हुआ खिलाड़ी था. वह एक एक पल को यादगार बनाने में जुटा था. हालांकि शिखा ने मेरी चूत पर अपने होंठों और जीभ से लपलप तो की थी, लेकिन आज वाली मेरी चूत चुसाई कुछ अलग ही अहसास करवा रही थी.

थोड़ी ही देर में राहुल एकदम से उठा और बेड के दूसरे किनारे पर रखा एक बॉक्स उठा लाया.

मैंने कहा- यह क्या है राहुल?
राहुल बोला- मेरी जान, सुहागरात को सेलिब्रेट करते हैं.

फिर उसने बॉक्स में रखा केक बाहर निकाला और मेरी चूत पर अपने हाथ फिरा फिरा कर लगाने लगा. मेरी गांड उसके स्पर्श से फिर से उचकने लगी. पूरी चूत पर केक लगा देने के बाद उसने एक छोटी मोमबत्ती मेरी चूत के अन्दर जरा सी घुसाते हुए खड़ी कर दी.

मैंने जरा सा ऊपर उठते हुए देखा, तो वाकयी ये नजारा किसी की भी चूत को पानी पानी कर देने वाला सा था.

इसके बाद राहुल ने कहा- जान, कैसा लगा सरप्राइज … काट दूँ केक!
मैंने कहा- राहुल जो भी करना है, जल्दी से करो … मुझे तड़पाओ मत प्लीज.

इसके बाद राहुल ने मोमबत्ती को जलाते हुए मेरे नंगे जिस्म की फोटो ले ली.

मोमबती का मोम पिघलने से पहले उसे फूंक मार कर बुझा दिया.

मैंने कहा- अब अगर छुरी से केक काटो, तो ध्यान रखना … कहीं मेरी ये ना काट देना.

राहुल- ये ‘ये ..’ क्या होता है. इस ये का कोई नाम भी तो होगा!

हालांकि मुझे नाम सब मालूम था, लेकिन मैंने शर्म से अपना चेहरा ढंकते हुए बोला- नहीं, मुझे नहीं पता … क्या नाम है.

राहुल बोला- ओके जान, मुझे पता है तुम्हें नाम तो मालूम है … लेकिन शर्म के मारे तुम नाम नहीं लोगी. मैं ही तुम्हें नाम बता देता हूं, लेकिन एक रिक्वेस्ट है कि अब हम वही नाम लेकर इन अंगों को पुकारेंगे और हल्की फुल्की गाली-गलौच भी करेंगे, ताकि हर एक लम्हा यादगार और हसीन बन जाए.

राहुल एक एक करके बताने लगा.

उसने सबसे पहले मेरे बूब्स पर हाथ लगाए और कहा- ये है बोबे या मम्मे.
मैं शर्मा गई.

इसके बाद उसने मेरे कड़े हुए निपल्स पर उंगली से सहलाते हुए कहा- ये है चूचुक.
फिर मेरी चुत पर हाथ लगाकर बोला- इसे कहते हैं फुद्दी, चूत, बुर … और इसके पीछे ये है गांड.
फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने रॉड से सख्त हुए लंड पर हाथ रखवा कर बोला- ये है लंड, लौड़ा.
इसके साथ नीचे अपने अंडकोश को छुआते हुए बोला- ये है आंड, टट्टे.

उसके बाद राहुल बोला- अब नाम लेकर बताओ … क्या करना है!
मैंने कहा- यार, मेरी चूत में कुछ हो रहा है … प्लीज इसे जल्दी से शांत कर दो.
इस पर राहुल ने कहा- रुको जान, अभी केक तो कट जाए.

इस पर राहुल ने मोमबत्ती बाहर निकाली और अपने लौड़े को हाथ से पकड़ कर छुरी की तरह चलाते हुए मेरी फुद्दी लाइन पर केक को बीच कट किया.

आह … वो भी मस्त क्या अहसास था. लंड से केक काट दिया.

राहुल बोला- जान केक का स्वाद भी चख लो अब.

मैं केक खाने के लिए रेडी थी.

राहुल ने एक बार फिर से अपनी जीभ मेरी फुद्दी पर चलानी शुरू की. अबकी बार मैंने भी शर्म लिहाज की मां चोदते हुए राहुल को बालों से पकड़ा और अपनी चूत पर उसका मुँह दबाने लगी.

राहुल उठा और केक से सने हुए अपने होंठों को मेरे होंठों और जीभ से मिला दिया. फिर उसने केक से भरे अपने लौड़े को मेरे मुँह में दे दिया. मैं मना करने को, कर सकती थी … लेकिन ना जाने क्यों राहुल ने इतना सब करके मुझे अपना गुलाम सा बना लिया. मैं लौड़े से केक खाने के बहाने उसे अपने मुँह में अन्दर बाहर करने लगी.

भाग 4: सुहागरात की पहली रात में कुंवारी चूत की चुदाई

केक में आज अलग ही स्वाद सा आ रहा था. मेरी पनियाई चूत का रस मिक्स होने के कारण यह एक अलग दर्जे का स्वाद आ रहा था.

अब राहुल शुरूआत करते हुए बोला- बोल, लेगी मेरा लौड़ा!
मैं तो पहले से ही भट्टी सी तप रही थी मैंने कहा- दे दे, जो देना है … क्यों मेरी फुद्दी को तड़पा कर पाप कर रहा है. आह … जल्दी चोद दे मुझे, फाड़ दे मुझे.

मैं मदहोशी सी में ना जाने क्या क्या बकने लगी.

राहुल बोला- आह बहुत तड़प रही है ना तू … ले फिर मेरा मूसल अपनी फुद्दी में.
इतना कहते ही राहुल ने अपना लंड मेरी चूत पर टिकाते हुए अन्दर घुसेड़ दिया.

आप यकीन नहीं मानोगे मेरा यह सेक्स का पहला अनुभव था और मेरी सील टूटी नहीं थी. राहुल के लौड़े ने जैसे ही मेरी फुद्दी की सील फाड़ी, मैं इतनी जोर से चिल्लाई मानो भूकम्प आ गया हो.

‘उ … ई..ई..ई … ई … मां मर गई मैं.’

राहुल चाहता तो मेरे मुँह को ढक कर आवाज को बाहर जाने से रोक सकता था, लेकिन उसने मानो जानबूझकर मेरी चिल्लाहट नहीं रोकी.

हां … इतना जरूर था कि उस एक धक्के के बाद वह खुद रुक गया. मेरी चीख सुनकर फार्म हाउस की एक मात्र नौकरानी हमारे कमरे के करीब आ गई और एक खिड़की के छोटे से छेद से हमारी सुहागरात का लुत्फ उठाने लगी. हालांकि हमें यह पता नहीं चला कि कोई हमें देख सुन भी रहा है, लेकिन बाद में उस नौकरानी ने मुझे बताया कि कैसे उसने हमारी सुहागरात लाइव देखते देखते अपनी फुद्दी को मूली से खोद डाला था.

राहुल के इस एक धक्के ने मेरी आंखों में आंसू ला दिए. अब राहुल ने अपने लौड़े को जहां तक अन्दर गया, वहीं तक रहने दिया और मेरे होंठों, मेरे बोबों मेरे चूचुकों को चूसने लगा.

मैं एक बार फिर से गर्म होने लगी. जिस लौड़े ने मेरी आंखों में आंसू ला दिए, उसी लौड़े का अहसास फिर से चुत में करने को मचलने लगी. राहुल मेरे बोबे को मुँह में डाले हुए था, तो मैं भी अपनी गांड उठा कर लंड और देने की मौन स्वीकृति देने लगी. इस पर राहुल ने देर न करते हुए अपना लौड़ा पूरी तरह से चुत के अन्दर डाल दिया. उसका लंड एकदम भीतर जाकर मेरी बच्चेदानी से जा टकराया.

इस बार में गाली देकर चिल्लाई- आह …… चोद दी मेरी मां … लंड है या टावर … आह तोड़ दिया मेरा एक एक अंग … कमीने. आह … उ … ई..ई..ई … ई … मां मर गई मैं … प्लीज़ इसे लौड़े को बाहर निकाल लो.

लेकिन इस बार राहुल को मेरी चिल्लाहट और दर्द का जरा असर नहीं हुआ. वह बिना रुके अपने लंड को छप छप करके चुत में पेलता रहा.

राहुल- अभी तो तड़प रही थी. अब ले इस लंड को. ले और ले … आह और अन्दर ले … अच्छे से ले.
इतना कहते कहते उसने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.

अब राहुल के एक एक धक्के से मेरी चुत को मजा आने लगा. मैं गांड उछालने लगी. मैंने अपनी टांगों को उठा कर उसकी कमर पर कैंची बना ली, जिससे मेरी चूत पूरे लंड को निगलने लगी.

मैं बस कामुक सिसकारियां भरने लगी और जोर जोर से बोलने लगी- आह … आह … आह मजा आ गया जान … मजा आ गया आह … और चोदो … जोर से चोदो. अब मैं रोज चुदूंगी. सारा दिन चुदूंगी … आह … चोद दो.

राहुल ने चुदाई की रफ्तार और भी बढ़ा दी. इस पर मेरी चूत रो पड़ी और उसने पानी का सैलाब सा छोड़ दिया. थोड़ी ही देर में राहुल के लंड ने पानी का ऐसा फव्वारा मेरी चुत में छोड़ा कि बस चूत में मानो बाढ़ सी गई.

स्खलन होने के बाद हम दोनों निढाल से हो गए. राहुल मेरे ऊपर ही लेट गया और मेरे एक बोबे को मुँह में लेकर चुसकने लगा.

इस पर हम दोनों थोड़ी ही देर में फिर से गर्म हो गए और फिर से दमादर चुदाई का मजा लिया.

रात भर में हम दोनों ने चार राउंड लगा लिए और सो गए. सुबह कब हुई, पता ही नहीं चला.

सुबह दोनों निढाल होकर पड़े थे.

नौकरानी आई और मुझे आवाज देकर चाय नाश्ते का बोलने लगी. वो बात बात में अलग ही तरीके से मुस्कुरा रही थी. उसकी आंखों से भी लग था जैसे वह भी रात भर सोई नहीं थी.

खैर, दोपहर में राहुल और मैंने फिर से धक्कमपेल चुदाई के राउंड लगाए.

राहुल और मैं वहां पांच दिन रहे. इन पांच दिनों में अलग अलग तरीकों से राहुल ने मेरी चुदाई करके चूत को सुजा कर पाव ब्रेड सा बना दिया।

इसके बाद राहुल अपनी ड्यूटी पर चले गए. हालांकि वे कभी कभार आते हैं. लेकिन जब भी आते हैं, मेरी चुदास को शांत कर देते हैं. मैं उन्हें सबकुछ करने देती हूँ। उसकी हर इच्छा पूरी करती हूँ। अब बस एक ही तमन्ना है कि राहुल कभी मेरी गांड भी मार दे.

मैंने इस बारे में सीधा कहने की बजाए कई बार उसे उकसाने की कोशिश की है, लेकिन वह मानता नहीं है। मेरी गांड उसकी जीभ की लपलप और लंड की धकधक को तरस रहा है।

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