पति ने ब्वॉयफ्रेंड के लंड की याद भुला दी – सुहागरात सेक्स कहानी

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पति ने ब्वॉयफ्रेंड के लंड की याद भुला दी – क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई लड़की अपनी शादी के बाद सुहागरात की रात अपने पति के साथ हनीमून सेक्स करती है, तो उसके मन में क्या चल रहा होता है? यह हॉट हिंदी सेक्स कहानी है अंजलि की जुबानी, जिसकी शादी उससे दस साल बड़े एक पहलवान बिजनेसमैन से हुई। इस पति ने ब्वॉयफ्रेंड के लंड की याद भुला दी वाली कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे एक नई नवेली दुल्हन अपने पुराने ब्वॉयफ्रेंड को भूलकर अपने पति के मोटे 8 इंच के लंड की बेरहम चुदाई में पूरी तरह खो जाती है। अगर आप पति ने ब्वॉयफ्रेंड के लंड की याद भुला दी जैसी सच्ची, कामुक और हॉट हनीमून सेक्स कहानियाँ ढूंढ रहे हैं, तो अंजलि की यह दिल को छू लेने वाली दास्तान आपके लिए ही है।

भाग 1: मेरा परिचय और शादी से पहले की कहानी

मैं अंजलि, आप सभी को अपनी आपबीती सुना रही हूँ। इस कहानी में मैं अपने पति की हवस की हॉट हनीमून सेक्स स्टोरी लिख रही हूँ जो मेरे पति ने मेरे साथ उस रात किया था – हमारी सुहागरात की रात। हालांकि मुझे चुदाई में बड़ा मजा आता है, लेकिन जब एक मर्द प्यार से चोदने की जगह जानवरों की तरह व्यवहार करता है, तो क्या किसी भी लड़की या औरत को दुःख नहीं होता? मैं आपको अपनी असली दास्तान सुनाऊंगी – बिना किसी झिझक के, बिना किसी शर्म के। ये कहानी है मेरी मजबूरी की, मेरे डर की, और आखिरकार उस सुख की जो मैंने अपने पति के साथ पाया।

मेरी उम्र 20 साल है। मैं एक साधारण कद-काठी की लड़की हूँ – न बहुत लंबी, न बहुत छोटी। हां, मेरे जिस्म का रंग एकदम दूध सा गोरा है – इतना गोरा कि लोग पूछते थे कि क्या तुम कभी धूप में निकलती ही नहीं हो। मेरी त्वचा इतनी चिकनी और मुलायम है कि उसे छूते ही लगता है जैसे रेशम छू रहे हों।

मैं 36B नाप की ब्रा पहनती हूँ। आप समझ सकते हैं कि मेरे चूचुक कैसे लगते होंगे – न बहुत बड़े, न बहुत छोटे, लेकिन बिल्कुल उभरे हुए, गोल और मुलायम। उनके निप्पल हल्के गुलाबी रंग के हैं – जैसे कोई छोटा सा फूल। और मेरी गांड… मेरी गांड एकदम चौड़ी और उठी हुई थी – बिल्कुल वैसी जैसी हर आदमी देखना चाहता है। गोल, मोटी, और जांघों से मिलती हुई। और सबसे बड़ी बात – मैंने कभी अपनी गांड नहीं मरवाई थी। न अपने ब्वॉयफ्रेंड से, न किसी और से। मेरी गांड अभी भी कुंवारी थी, बिल्कुल वैसी ही जैसे मैं पैदा हुई थी।

भाग 2: पुराना प्यार – मेरा ब्वॉयफ्रेंड और हमारी चुदाई

मेरा एक ब्वॉयफ्रेंड था। उसके साथ मैंने बहुत बार चुदाई की थी – शायद सौ बार से भी ज्यादा। वो मुझसे बहुत प्यार करता था और मैं भी उससे। उसका लंड मेरी चूत में लेते ही मानो मुझे मजा आ जाता था। वो आगे से बड़ा मस्त चोदता था – धीरे-धीरे, प्यार से, मेरी साँसों का ख्याल रखते हुए। जब वो मेरे अंदर होता, तो मुझे लगता कि हम दोनों एक हो गए हैं।

लेकिन एक बात थी – वो अक्सर मेरी गांड मारने के लिए मुझसे कहता था। वो बोलता – “अंजलि, एक बार अपनी गांड तो दे दे। मैं बड़े प्यार से डालूंगा।” मगर मैंने उसे अपनी गांड में लंड नहीं डालने दिया। मुझे डर लगता था – डर था कि दर्द होगा, डर था कि मेरी गांड फट जाएगी, डर था कि शादी से पहले कहीं कोई बात फैल न जाए। वो मान गया, लेकिन उसकी आँखों में वो तड़प हमेशा रहती थी।

भाग 3: शादी की मजबूरी और ब्वॉयफ्रेंड से दूरी

मैं एक गरीब घर से हूँ। मेरे मम्मी-पापा ने बड़ी मुश्किल से मुझे पाला-पोसा था। जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई, उन्हें मेरी शादी की चिंता सताने लगी। पड़ोस की औरतें ताने मारतीं – “लड़की बड़ी हो गई है, अब देर मत करो।” मेरे मम्मी-पापा को डर था कि कहीं मैं कोई गलत कदम न उठा बैठूँ।

मैं चाहती थी कि मेरी शादी मेरे ब्वॉयफ्रेंड से ही हो। उससे मैंने ये बात कई बार कही थी। लेकिन वो अभी पढ़ाई कर रहा था – उसके दो साल और बाकी थे। उसने कहा – “तुम अभी अपने मम्मी-पापा को समझाओ कि वो मेरी जॉब लगने तक का इंतजार कर लें। बस दो साल।”

मैंने उससे कहा – “तुम खुद मेरे पापा से बात करो। उन्हें खुद समझाओ। तुम्हारी बात वो ज्यादा मानेंगे।”

वो बोला – “हाँ, मैं उन्हें समझाने के लिए रेडी हूँ। मगर तुमको भी उनसे कहना पड़ेगा कि तुम मुझसे प्यार करती हो। मैं अकेला क्या करूंगा?”

मैंने हामी भर दी। मुझे लगा कि अब सब ठीक हो जाएगा। मैंने सोचा – पापा तो मान जाएंगे, वो तो मेरी खुशी चाहते हैं ना?

कुछ दिन बाद मैंने मौका देख कर अपनी मम्मी से अपने ब्वॉयफ्रेंड के बारे में बात की। मैंने बड़ी हिम्मत जुटाई और कहा – “मम्मी, मैं किसी से प्यार करती हूँ। वो पढ़ रहा है, दो साल में उसकी जॉब लग जाएगी। क्या हम उसका इंतजार कर सकते हैं?”

मेरी मम्मी का चेहरा सुनकर लाल हो गया। उन्होंने मुझे काफी खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दीं – “बदचलन कहीं की! हमने तुझे पढ़ाया-लिखाया, तूने ये कमाई की? प्यार-व्यार सब झूठ है, तू समझती क्यों नहीं? लड़के वाले तुझे छोड़ देंगे, तब क्या करेगी?”

मैं चुप रही। मुझे पता था कि बहस करने का कोई फायदा नहीं है।

मेरी मम्मी ने ये बात मेरे पापा से भी कह दी – “आपकी लड़की हाथ से निकल रही है। देखो, प्यार के चक्कर में पड़ गई है। इसकी शादी जल्दी करो, वरना हम लोग कहीं मुँह दिखाने काबिल नहीं रह जाएंगे। पूरी बिरादरी में बदनामी हो जाएगी।”

पापा ने भी मुझे बहुत डांटा। वो बोले – “तुमने हमारी इज्जत मिट्टी में मिला दी। अब तुम्हारी शादी हम करेंगे, और तुम किसी से मिलने नहीं जाओगी। समझी?”

मैं कुछ न कर सकी। मुझे अपने ब्वॉयफ्रेंड से फोन पर भी बात करने का मौका नहीं मिला। उन्होंने मेरा फोन तक ले लिया। कुछ ही हफ्तों में रिश्ते आने लगे। मैं देखती रही – जैसे मेरी जिंदगी मेरे हाथों से निकल रही हो।

भाग 4: पहली नज़र में डर और वासना

और फिर एक दिन – मेरी शादी तय हो गई। मुझसे दस साल बड़े एक आदमी से – एक बिजनेसमैन। पैसे वाला घर था, उनका अपना कारोबार था। मेरे मम्मी-पापा खुश थे – “हमारी बेटी अब महल में रहेगी।” मैं चुप थी। मेरे मन में सिर्फ एक ही सवाल था – मेरा ब्वॉयफ्रेंड… वो क्या करेगा?

जब मेरे पति मुझे देखने आए, तब पहली बार मैंने उन्हें करीब से देखा। मेरे पति एक बिजनेसमैन थे और उनका परिवार काफी पैसे वाला था। लेकिन पैसों से ज्यादा, जो चीज़ मेरी नज़रों में आई, वो था उनका शरीर। मेरे पति काफी हट्टे-कट्टे बदन के थे – चौड़े कंधे, भरी हुई छाती, मोटी-मोटी बाजूएँ। उनके सामने मैं एक चुहिया सी लगती थी – छोटी, नाजुक, कमज़ोर।

जब वो मुझे देखने आए, तो मैं सोच रही थी – ये पहलवान जब मेरे ऊपर चढ़ेगा, तो मेरी तो चटनी बन जाएगी। मेरी हड्डियाँ चूर-चूर हो जाएंगी। और उधर, मैंने ध्यान दिया – उनकी नज़रें मेरे 36 इंच के चूचुकों पर बार-बार टिक रही थीं। उनकी आँखों में वासना की आग थी – एक भूखी निगाह, जैसे वो मुझे अभी वहीं नंगा करके चोद देना चाहते हों।

ये समझ कर मेरी चूत में चींटियां रेंगने लगी थीं। साथ ही एक डर सा भी लग रहा था – कि मैं तो पिस कर रह जाऊंगी। मेरे हाथ-पैर काँप रहे थे। लेकिन मेरी चूत गीली भी हो रही थी – ये मैं छुपा नहीं सकती। कुछ और ही अलग सा एहसास था – एक अजीब सा डर, एक अजीब सा सुख।

भाग 5: सुहागरात – सजी हुई सेज और बैठी दुल्हन

मेरी शादी हो गई। एक बड़े से हॉल में, हजारों लोगों के बीच, मैंने फेरे लिए। मैंने अपने पति के हाथ में हाथ डाला तो मुझे लगा जैसे मैंने किसी पत्थर की मूर्ति का हाथ पकड़ लिया हो – इतना मजबूत, इतना कठोर। मैं अपनी ससुराल आ गई। नया घर, नए लोग, नई ज़िंदगी।

पति के शानदार एसी बेडरूम में मेरी सुहागरात की सेज सजी थी। कमरे में हल्की रोशनी थी, गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी हुई थीं, बेडशीट पर लाल और सफेद रंग के फूल बने हुए थे। मैं किंगसाइज़ बेड पर घूँघट निकाल कर बैठी थी। मेरे सिर पर सजा हुआ घूँघट मेरे चेहरे पर पड़ रहा था – उसी के झिलमिलाते कपड़े से मैं कमरे को देख रही थी।

मुझे न जाने क्यों काफी डर लग रहा था। मेरा दिन भर का थकान था, लेकिन डर उससे भी ज्यादा था। और आज मुझे अपने ब्वॉयफ्रेंड की काफी याद आ रही थी। मैंने सोचा – अगर वो यहाँ होता, तो कितना अच्छा होता। वो मुझे प्यार से चूमता, धीरे-धीरे मुझे तैयार करता, और फिर चोदता – जैसे हमेशा चोदता था।

मुझे लग रहा था कि मेरे ब्वॉयफ्रेंड के अलावा कोई दूसरा आदमी मेरे बदन को न छुए। पर मैं मना भी नहीं कर सकती थी। मैं उनकी बीवी थी, उनकी दुल्हन – मुझे तो उनके साथ सब कुछ करना ही था। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरा मन एक तरफ भाग रहा था, मेरा शरीर दूसरी तरफ।

मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी – शादी वाली साड़ी, जिसमें मेरी सारी शादी हुई थी। वो साड़ी बहुत ही खूबसूरत थी – असली रेशम की, जिसमें सोने-चांदी का काम था। अन्दर मैंने ब्रा-पैंटी भी लाल रंग की ही पहनी थी – मैचिंग सेट, जो मैंने खास सुहागरात के लिए खरीदा था। मेरा ब्लाउज बहुत तंग था – डिजाइनर ने कहा था कि ऐसे ही फैशन है। लेकिन उस तंग ब्लाउज में से मेरे चूचुक छुपाए नहीं छुप रहे थे। उनका आधा हिस्सा बाहर निकल रहा था – गोरा, चिकना, मुलायम। ब्लाउज के गहरे नेकलेस से मेरे चूचुकों की दरार साफ दिख रही थी।

मैं बैठी थी – हाथ जोड़े, आँखें नीची। मेरे पैरों में पायल थी, जो मेरे थोड़ा हिलने पर हल्की आवाज़ कर रही थी – छन-छन-छन।

भाग 6: कमरे में पति का प्रवेश और पहला स्पर्श

कुछ देर बाद – शायद दस मिनट, शायद आधा घंटा – मेरे पति कमरे के अन्दर आए। उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया – इतनी जोर से कि बंद होने की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज गई। मैं सहम कर रह गई। मैंने अपने पैर अपनी साड़ी के अन्दर खींच लिए – जैसे वो मुझे बचा लेंगे।

उन्होंने बिस्तर पर मेरे करीब बैठ कर मेरे घुटनों पर हाथ रखा। उनके हाथ – बहुत बड़े, मोटे और भारी – मेरे कोमल घुटनों पर थे। उन्होंने हंस कर कहा – “घूंघट हटा दो… मुझसे कैसा पर्दा? अब तो मैं तुम्हारा पति हूँ। सारी शर्म छोड़ दो।”

मैंने कुछ नहीं बोली। बस चुपचाप बैठी रही। मेरा घूँघट हटाने का मन नहीं था। मैं चाहती थी कि ये रात किसी तरह कट जाए – बिना कुछ हुए। लेकिन मैं जानती थी कि ऐसा नहीं होगा।

पति महोदय ने बेडसाइड टेबल पर रखा दूध का गिलास उठाया और पीने लगे। मैंने सुहागरात की रस्मों के बारे में अपनी सहेलियों से सुन रखा था – सुहागरात के दिन पति अपने दूध के गिलास से आधा दूध अपनी पत्नी को पिलाता है, प्यार से, हाथों से। ये एक प्यार भरी रस्म है – जिसमें नए जोड़े की मिठास बढ़ती है।

लेकिन पहलवान जी ने सारा दूध एक ही साँस में पी लिया – गटक-गटक-गटक – और फिर जोर से डकार लिया। “आह्ह्ह… प्यास बुझ गई,” उन्होंने कहा। मुझे ये सोच कर हल्की सी हंसी भी आई – कितने बेढंगे हैं ये। लेकिन मैंने हंसी दबा ली। उनके सामने मैं हंस भी नहीं सकती थी – कहीं वो बुरा न मान लें।

फिर पति महोदय अपने कपड़े निकालने लगे। पहले उन्होंने अपनी कमीज़ उतारी – बटन खोलते ही उनकी बालों वाली छाती सामने आ गई। फिर उन्होंने अपनी पैंट उतारी। वो जल्द ही अपने शॉर्ट्स में आ गए – एक टाइट नायलॉन का शॉर्ट्स, जिसके अन्दर उनका लंड उभर रहा था। मैं साड़ी के घूँघट से सब कुछ देख रही थी।

उनका कड़ियल बदन देख कर मुझे रश्क होने लगा था। उनकी बाजूएँ मेरी जांघों जितनी मोटी थीं। उनकी छाती इतनी चौड़ी थी कि उस पर दो मैं बैठ सकती थी। और उनके पेट पर बालों की लकीर थी – जो नीचे उतरती जा रही थी।

फिर उन्होंने मेरा घूँघट उठाया – एक झटके में, बिना पूछे। उनकी आँखें मुझ पर टिक गईं। उनकी आँखों में वासना की हवस साफ दिख रही थी – एक जंगली जानवर की तरह, जिसने अपना शिकार पा लिया हो।

पति – “बहुत खूबसूरत हो तुम! मैंने जिंदगी में इतनी खूबसूरत लड़की नहीं देखी। तुम्हारी गोरी त्वचा… तुम्हारे बड़े चूचुक… सब कुछ परफेक्ट है।”

मैं – “थैंक्यू…” मेरी आवाज़ बमुश्किल निकली।

वो मेरे करीब आकर मेरे गाल पर किस करने लगे। उनके होंठ खुरदरे थे, उनकी दाढ़ी चुभ रही थी। मैं एकदम से सिहर गई – पूरे शरीर में एक झटका सा लगा। न जाने क्यों, मुझे मेरे ब्वॉयफ्रेंड की याद सताने लगी। उसकी नर्म किसें, उसकी मुलायम बाँहें, उसकी महक – सब कुछ।

मैंने डरते हुए कहा – “आज कुछ मत करो प्लीज़… मैं बहुत थक गई हूँ। शादी की थकान है, पूरा दिन नाची-गाई हूँ। कल कर लेना न?”

पति ने अपनी ही धुन में कहा – “मैं जो कर रहा हूँ, वो मुझे करने दो। जबसे तुझे देखा है – शादी से पहले, जब तू मुझसे मिलने आई थी – तब से मेरी आँखों से नींद उड़ी हुई है। मैं तेरे बिना पागल हो रहा था। आज मैं तुझे चोदूंगा – चाहे कुछ भी हो जाए।”

मैंने कुछ नहीं कहा। मेरी हिम्मत नहीं हुई।

भाग 7: गहने, साड़ी और नंगे शरीर की शुरुआत

उन्होंने धीरे-धीरे – या यूँ कहूँ जल्दी-जल्दी – मेरे गहने निकाल दिए। पहले मेरे कानों के झुमके – एक झटके में, जिससे मेरे कान में दर्द हुआ। फिर मेरा हार, फिर मेरी चूड़ियाँ – एक-एक करके खोलता गया, जैसे कोई लिफाफा खोल रहा हो। फिर मेरी साड़ी – उन्होंने कमर में लगी हुई पिन निकाली और साड़ी को खींच कर नीचे उतार दिया। अब मैं सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी।

मेरा ब्लाउज बहुत टाइट था – कसे से खुले गले के ब्लाउज में से मेरे आधे चूचुक बाहर निकल रहे थे। सफेद, मुलायम, उभरे हुए – जैसे दो बर्फ के गोले। पति की नज़रें उन पर टिक गईं। उन्होंने धीरे से – या यूँ कहूँ भारी हाथ से – मेरे चूचुकों को सहलाया। उनकी मोटी, खुरदरी हथेलियाँ मेरे नाजुक चूचुकों पर थीं।

पति – “बड़े लाजवाब हैं। आह्ह… क्या दूध हैं तेरे। लगता है आज रात इन्हें खूब चूसूंगा।”

मैं लजा गई। मेरे चेहरे पर शर्म की लाली दौड़ गई। लेकिन साथ ही – मुझे भी अन्दर से हेनू-हेनू होने लगी थी। मेरी चूत में हलचल मच गई थी – वो गीली होने लगी थी। मैं चाहकर भी अपने शरीर को रोक नहीं पा रही थी।

भाग 8: चूचियों पर पहलवानी हाथ – दर्द और बेबसी

पति ने मुझे लिटा दिया – धीरे से नहीं, एक झटके में। मेरी पीठ बिस्तर पर आ गिरी। फिर वो मेरे ऊपर आ गए – अपने पूरे वजन के साथ। उनका शरीर मुझे कुचल रहा था – मैं साँस नहीं ले पा रही थी। वो मेरे होंठों को किस करने लगे – लेकिन प्यार से नहीं, बल्कि जबरदस्ती से। मैं उनका साथ नहीं दे रही थी – मेरा मन अभी भी अपने ब्वॉयफ्रेंड में ही था। मैं अपनी आँखें बंद किए सोच रही थी – काश ये मेरा ब्वॉयफ्रेंड होता।

फिर उन्होंने मेरे चूचुकों को पकड़ा – और जोर से दबाया। इतना जोर से कि मुझे दर्द से चीख निकल गई। उन्होंने मेरे चूचुकों को ऐसे मसल दिया जैसे चूचुक ना हों, कोई दबाने वाली बॉल हों – जैसे कोई आटा गूंथ रहा हो। मेरे कोमल, नाजुक चूचुक उनके पहलवानी हाथों में बेजान हो रहे थे।

मैं – “आहह… धीरे दबाइए प्लीज़… दर्द होता है! प्लीज, मुझे बहुत तकलीफ हो रही है।”

पति – “चुप रहो… कुछ मत बोलो। मैं जैसे दबाऊं, वैसे दबाऊंगा। तुम मेरी बीवी हो – तुम्हारा शरीर मेरा है।”

मैंने चुप रहने का फैसला कर लिया। मैं जान गई थी कि इस आदमी से बहस करना बेकार है।

भाग 9: पूरी तरह नंगी – ब्रा और पैंटी उतरी

पति ने मुझे नंगी करना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझे उल्टा किया – मेरी पीठ ऊपर, मेरा चेहरा बिस्तर में दबा हुआ। फिर उन्होंने मेरे ब्लाउज का हुक खोल दिया – एक ही झटके में। फिर मुझे सीधा करके ब्लाउज निकाल दिया। अब मैं ब्रा में थी – लाल रंग की ब्रा, जो मेरे 36B के चूचुकों को बमुश्किल ढक पा रही थी। मेरे गोरे चूचुक ब्रा के कपड़े से बाहर निकल रहे थे – ऐसे जैसे वो कैद से आज़ाद होना चाहते हों।

पति – “आहह… क्या दूध हैं तेरे… मजा आ गया देखकर। मैंने बहुत रंडियाँ चोदी हैं – दिल्ली, मुंबई, गोवा – बहुत सी। पर तेरे जैसे मम्मे किसी के नहीं निकले। इतने गोरे, इतने उभरे हुए, इतने मुलायम… तू तो कोई अप्सरा है।”

मैं सुहागरात पर अपने पति से ये सब सुन रही थी। किसी पति के मुँह से सुहागरात पर ऐसी बात सुनकर उसकी नई-नवेली दुल्हन को कैसा लगेगा – ये बात वो ही जान सकती है। मैं चुप थी, लेकिन मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे। फिर मैंने सोचा – मैं कौन सी सती सावित्री हूँ? मैंने भी तो अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ चुदाई की है। मैं किस मुँह से इन्हें सती बनूँ?

फिर उन्होंने मेरी ब्रा खोल दी – पीछे का हुक खोला और ब्रा को खींच कर निकाल फेंका। मेरे चूचुक आज़ाद हो गए – वो झूल गए, हिल गए, उनके निप्पल हवा में खड़े हो गए। मैंने शर्मा कर अपने चूचुकों पर हाथ रख दिया – वो ढकने की कोशिश की। मुझे लग रहा था कि आज पहलवान जी मेरी चूत का भोसड़ा बना कर ही दम लेंगे – इतनी बेरहमी से चोदेंगे कि मैं उठ नहीं पाऊंगी। पर मैं कुछ नहीं कर सकती थी।

भाग 10: चूचियों को चूसा और मसला – दर्द और सुख का मेल

पति ने मेरे हाथ को पकड़ कर मेरे चूचुकों से अलग किया – इतनी जोर से पकड़ा कि मेरी कलाई पर निशान पड़ गया। फिर उन्होंने मेरा एक चूचुक अपने मुँह में ले लिया – पूरा का पूरा – और उसे जोर से चूसने लगे। उनकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी, और उनके दाँत मेरे कोमल निप्पल को हल्के से काट रहे थे।

उन्होंने मेरे दोनों चूचुकों को जोर-जोर से चूसना और मसलना शुरू कर दिया। वो एक चूचुक को दबाते – इतना जोर से कि मेरे चूचुक उनकी उँगलियों के बीच से निकल जाता – और दूसरे को चूसते – इतना जोर से कि उसकी आवाज़ ‘चूस-चूस-चूस’ पूरे कमरे में गूंजती। वो मेरे दूसरे चूचुक के साथ भी यही कर रहे थे – दबाना, चूसना, काटना, मसलना।

मैं मजा तो ले रही थी – मेरी चूत में पानी आ रहा था, मेरे शरीर में गर्मी बढ़ रही थी – लेकिन उनके पहलवानी हाथों से मुझे दर्द भी हो रहा था। मेरे कोमल चूचुक उनके कठोर हाथों में बेहाल हो रहे थे।

मैं – “प्लीज़ दर्द हो रहा है, धीरे करो न! मैं तुम्हारी बीवी हूँ, कोई रंडी नहीं। प्यार से करो न!”

पर वो मेरी कहाँ सुनने वाले थे। वो तो मेरी जैसी गोरी-चिट्टी और मुलायम माल पर एकदम से टूट पड़े थे – जैसे कोई भूखा शेर अपने शिकार पर टूटता है। कुछ ही देर में मेरे गोरे-गोरे चूचुक एकदम लाल हो गए थे – उन पर उनके दाँतों के निशान थे, उनके हाथों के निशान थे। वो सूज गए थे, उनमें दर्द था – लेकिन साथ ही एक अजीब सा सुख भी।

भाग 11: नीचे का रास्ता – पेटीकोट और पैंटी उतरी

फिर उन्होंने नीचे हाथ लगाया – उनकी मोटी-मोटी उँगलियाँ मेरे पेटीकोट की डोरी पर चढ़ गईं। उन्होंने उसे खींच कर निकाल दिया – एक ही झटके में, जैसे वो कागज का टुकड़ा हो। मेरा पेटीकोट मेरी जांघों से नीचे उतर गया और मैं अब सिर्फ अपनी लाल पैंटी में थी।

इसके साथ ही उन्होंने अपना शॉर्ट्स उतारा – बिना कोई शर्म के। उनका लंड सामने आया – और मैं देख कर दंग रह गई। उनका लंड 8 इंच का था – मोटा, सख्त, उभरी हुई नसों वाला, और उसका सुपारा लाल और चमकदार था। ये मेरे ब्वॉयफ्रेंड के लंड से बहुत बड़ा था – शायद दोगुना। मेरे ब्वॉयफ्रेंड का लंड 5-6 इंच का था, पतला-सा। पर ये… ये तो कोई मूसल था।

मैं एकदम से डर गई। मेरा मुँह सूख गया। मेरा गला भर आया। मैंने सोचा – ये लंड मेरी छोटी सी चूत में कैसे जाएगा? मैं मर जाऊंगी।

तभी पति महोदय ने मेरी पैंटी भी निकाल दी – दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे खींची। मैं अब पूरी तरह नंगी हो चुकी थी। मेरे ऊपर कुछ भी नहीं था – न ब्रा, न पैंटी, न कोई कपड़ा। मेरे गोरे शरीर पर कमरे की हल्की रोशनी पड़ रही थी – मैं एक खिले हुए फूल की तरह लग रही थी। मेरे चूचुक – लाल और सूजे हुए – मेरी छाती पर थे, और मेरी चूत – जिसके बाल मैंने पहले ही साफ करवा रखे थे – मेरी जांघों के बीच नमी से चमक रही थी।

भाग 12: चूत में पहला झटका – दर्द का ज्वालामुखी

उन्होंने मुझे चुदाई की पोजीशन में सेट किया – उन्होंने मेरी टांगें खोल दीं, मेरे घुटनों को ऊपर उठाया और मेरी जांघों को अपने कंधों पर रख लिया। फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और डालने की कोशिश करने लगे।

मैंने अपने पैरों को समेट लिया – एक आखिरी कोशिश, एक आखिरी विरोध। मैं चीखी – “प्लीज़ ऐसा मत करो… आपका लंड बहुत बड़ा है, मैं मर जाऊंगी। आज अन्दर मत डालो, मुझे दर्द होगा। पहली रात है, प्यार से करो – धीरे से, थोड़ा-थोड़ा करके।”

पति – “चुप रह साली रंडी! तुझे ब्याह कर इसलिए नहीं लाया हूँ कि चोदूं न? क्या लाया है तुझे सजाने के लिए? मैं तुझे मस्ती से चोद सकूं, इसलिए ब्याह कर लाया हूँ। साली रंडी – तेरे चूचुक और तेरी गांड देखकर लगता है कि तू रोज किसी न किसी से चुदती होगी। साली अपने पति के लंड से नखरे कर रही है।”

उनके मुँह से ये सुनकर मैं डर गई – सच में डर गई। मुझे लगा कि इनको तो मेरे बारे में सब पता चल गया है। शायद किसी ने बता दिया। शायद मेरी सहेलियों ने। अब इनके लंड से चुपचाप चुदने में ही भलाई है – वरना ये मुझे घर से निकाल देंगे, और मेरे मम्मी-पापा का नाम बदनाम कर देंगे।

तब भी मैं उनके सामने खुलना नहीं चाहती थी। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं – जैसे अगर मैं उन्हें नहीं देखूंगी, तो ये सब सपना होगा।

उन्होंने मेरे दोनों पैर चौड़े किए – इतना चौड़े कि मेरी जांघों की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया। फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा – मैं उसकी गर्मी को अपनी चूत पर महसूस कर सकती थी – और फिर एक जोरदार झटके से मेरी चूत में पेल दिया।

अभी पति के लंड का सुपारा ही मेरी चूत में गया था कि मेरी ऐसी चीख निकली जैसे कोई मुझे चाकू मार रहा हो – “आह्ह्ह्ह्ह्ह… नहीं… नहीं… बहुत दर्द… निकालो बाहर… निकालो प्लीज़…” मेरी आँखों से आँसू निकल आए। मेरा पूरा शरीर काँप गया। और वो – वो हंसने लगे। एक क्रूर, दिल को तोड़ने वाली हंसी।

उन्होंने मेरी चूत में अपना पूरा 8 इंच का लंड एक बार में पेल दिया – बिना रुके, बिना रौन, बिना प्यार के। मुझे लगा जैसे मेरी चूत चीर दी गई हो – जैसे कोई गर्म लोहे की छड़ मेरे अन्दर घुसा दी गई हो। मैं दर्द से छटपटा रही थी।

मैं – “आहह… प्लीज़ अब रहने दो… ऐसे ही रुक जाओ… प्लीज़ हिलो मत… दर्द हो रहा है… बहुत दर्द… मैं मर जाऊंगी…”

शायद उन्हें मेरे दर्द में मजा आ रहा था। वो ये सोच रहे थे कि उनको हनीमून सेक्स में सीलपैक चूत चोदने मिली है – एक ऐसी चूत जिसमें पहले कभी इतना बड़ा लंड नहीं गया था। उनकी पुरुषता को तुष्टि मिल रही थी – कि उन्होंने एक कुंवारी जैसी टाइट चूत चोदी है।

भाग 13: बेरहम चुदाई और दर्द से आनंद तक का सफर

वो अब अपनी गांड उठा-उठा कर मेरी चूत चोद रहे थे – पूरे जोश के साथ, पूरी ताकत के साथ। हर बार जब उनका लंड मेरी चूत के अंदर जाता, तो उनकी बड़ी-बड़ी गांड मेरे चूतड़ों से टकराती – ‘थप-थप-थप’ की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजती। बेड के लकड़ी के फ्रेम से चर-चर की आवाज आ रही थी – जैसे वो टूटने वाला हो।

मैं उनके मोटे लंड से दर्द से चीख रही थी – “आह्ह्ह… उफ्फ… माआ… मर गई मैं… तुम तो मुझे मार ही डालोगे…” मुझे वाकई ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत आज ही फट जाएगी – पूरी तरह – और खून निकल जाएगा।

कुछ देर बाद – 5 मिनट, 10 मिनट, मुझे पता नहीं – मेरी चूत ने लंड को झेल लिया था। मेरी चूत की मांसपेशियाँ उनके लंड के आकार में ढल गई थीं। मुझे अब दर्द होना बंद हो गया था – बल्कि, एक अलग ही एहसास शुरू हो गया था। उनका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था – और अब वो रगड़ दर्द नहीं, बल्कि सुख दे रही थी।

मगर मैंने दर्द का नाटक करना जारी रखा – क्योंकि अगर वो समझ गए कि मुझे मजा आने लगा है, तो कहीं वो और बेरहम न हो जाएँ। मैं जानती थी – अगर मैंने खुल कर मजा लेना शुरू कर दिया, तो वो मुझे और भी ज्यादा चोदेंगे – और मेरी चूत अभी तैयार नहीं थी इतनी बेरहम चुदाई के लिए।

वो मुझे धमाधम चोदने लगे – तेज़, और तेज़, और तेज़। साथ ही उन्होंने मेरे चूचुकों को फिर से दबाना शुरू कर दिया – उन्हें मसलना, उनके निप्पल को अपनी उँगलियों के बीच रगड़ना, उन्हें खींचना। अब मैं दर्द का नाटक नहीं कर पा रही थी – असली में चीख निकल रही थी, लेकिन अब वो चीख दर्द की नहीं, बल्कि सुख की थी।

अब तो मैं भी गर्म हो गई थी – पूरी तरह से। मेरी चूत में आग लग गई थी। मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी बेचैनी थी। मैंने उन्हें पकड़ लिया – अपनी बाँहों से उनकी गर्दन को जकड़ लिया – और अपनी गांड उठाने लगी – ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे, उनके झटकों के साथ।

मुझे भी जोर की हवस चढ़ गई थी – ऐसी हवस जैसे पहले कभी नहीं चढ़ी थी। मेरे ब्वॉयफ्रेंड के साथ तो मजा आता था, लेकिन ये… ये कुछ और ही था। ये जानवरों वाली चुदाई थी – बेरहम, क्रूर, और इतनी गहरी कि मुझे लग रहा था जैसे मैं अपने शरीर से बाहर निकल रही हूँ।

मैं – “आअहह… आहह… और डालिए… मजा आ रहा है… आहह… आहह… ओह! चोद दो मुझे… पूरा चोद दो…”

पति – “साली… पहले तो बड़े नखरे कर रही थी, अब लंड के नीचे मजा ले रही है। बदचलन कहीं की – तेरा असली चेहरा तो अब सामने आया।”

मैं – “आहह… चोद दो… आप बोलो मत, बस चोद दो… मुझे दर्द भी हो रहा है, मजा भी आ रहा है… बस रुको मत…”

वो जानवरों की तरह मेरी चूत फाड़ते रहे – ऐसे जैसे मैं कोई रबर की गुड़िया हूँ, कोई स्ट्रीट वॉकर हूँ, उनकी बीवी नहीं। उनके झटके इतने तेज़ थे कि मेरा पूरा शरीर बिस्तर पर आगे-पीछे हो रहा था। मेरे चूचुक ऊपर-नीचे उछल रहे थे – जैसे दो पानी के गुब्बारे हिल रहे हों। मेरे पैरों की पायल – जो अभी तक खामोश थी – अब जोर-जोर से बजने लगी – ‘छन-छन-छन-छन’।

कुछ देर बाद – और 10 मिनट के बाद – उनका लंड माल निकालने वाला हो गया था। मैं तो कब की झड़ चुकी थी – दो बार। पहली बार तो उनके लंड के अंदर आते ही, दूसरी बार पाँच मिनट बाद। मेरी चूत से पानी की धार बह चुकी थी – इतना पानी कि बिस्तर भीग गया था और उनका लंड उसी पानी में चिकना हो गया था।

भाग 14: मुँह में लंड और वीर्य की पिचकारी

फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला – ‘चटाक्’ की आवाज़ के साथ। वो भीगा हुआ, मेरे रस से चमक रहा था। फिर उन्होंने मुझे खड़ा कर दिया – मेरे बाल पकड़ कर उठाया। मैं घुटनों के बल उनके सामने थी – बिल्कुल वैसे जैसे कोई अपने मालिक के सामने घुटने टेके।

उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह के पास लाया – उसकी गर्मी और उसकी खुशबू ने मेरे होश उड़ा दिए। मैंने अपना मुँह नहीं खोला – मैं झिझक रही थी। मैंने कभी किसी का लंड अपने मुँह में नहीं लिया था। अपने ब्वॉयफ्रेंड का भी नहीं।

पर पति महोदय ने मेरा मुँह जबरदस्ती खोला – उन्होंने मेरे जबड़े को एक हाथ से दबाया और दूसरे हाथ से अपना लंड मेरे मुँह में पेल दिया। मेरे मुँह में अचानक उनका पूरा 8 इंच का लंड था – मेरे गले तक जा रहा था। मैंने अपनी जीभ से उनके लंड की गर्मी और उनके प्री-कम का स्वाद चखा – नमकीन सा, थोड़ा कड़वा सा।

उन्होंने मेरे मुँह को पकड़ कर लंड को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया – बेरहमी से, जैसे मैं कोई रबर की डॉल हूँ। उनके लंड का सुपारा मेरे गले की दीवार से रगड़ खा रहा था – मुझे उल्टी आ रही थी, मेरी आँखों से पानी निकल रहा था, लेकिन वो नहीं रुके।

कुछ ही पलों में – मेरे मुँह के 20-25 झटकों के बाद – मेरे पहलवान पति ने एक तेज ‘आह्ह्ह’ के साथ अपना पूरा माल – गर्म, गाढ़ा, पीले रंग का वीर्य – मेरे मुँह में डाल दिया। इतना ज्यादा वीर्य – जैसे पानी की बाल्टी उलट दी गई हो।

मेरे मुँह के अन्दर इतना गहरा लंड घुसा हुआ था कि उनकी पिचकारी सीधे मेरे गले में उतर गई – मुझे स्वाद भी नहीं आया। एक बार को तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा – मेरा गला भर आया, मेरा दम घुटने लगा।

मैं उल्टी जैसे करने लगी – मेरा मुँह बंद था, लेकिन मेरा पेट ऊपर-नीचे हो रहा था। मैं पति से छूट कर बाथरूम में भाग गई – नंगी, भागती हुई।

बाथरूम में जाकर मैंने अपने मुँह को पानी से धोया। मैंने अपने दाँतों के बीच से उनके वीर्य के अवशेष निकाले। और फिर – अचानक – मैंने उनके वीर्य के स्वाद को महसूस किया। वो गर्म, थोड़ा मीठा, थोड़ा नमकीन, और कुछ अलग सा था। कुछ देर पहले तक मुझे उल्टी आ रही थी – और अब, मुझे मजा आ गया था।

मैंने चटखारा लेकर बचा हुआ वीर्य खा लिया – अपनी जीभ से अपने होठों को चाटा। और फिर मैंने उल्टी करने की आवाजें करना शुरू कर दिया – ‘कैह्ह्ह… कैह्ह्ह… ओउउउ…’ – ताकि अगर पति सुन रहे हों, तो उन्हें लगे कि मुझे उनका वीर्य पसंद नहीं आया। असल में, मैं चाहती थी कि वो आए और मुझे फिर से चोदें – पर ये उन्हें पता नहीं चलना चाहिए था।

मैंने दस मिनट बाथरूम में बिताए। मैंने शीशे के सामने अपने नंगे शरीर को देखा – मेरे चूचुक लाल थे, सूजे हुए थे; मेरी चूत सूजी हुई थी, उसके आसपास लालिमा थी; मेरे गालों पर आँसुओं के निशान थे। लेकिन मेरी आँखों में एक अलग ही चमक थी।

दस मिनट बाद मैं कमरे में वापस आ गई। मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और अन्दर झाँका। देखा तो पहलवान जी चित पड़े थे – बिस्तर पर तारों की तरह फैले हुए। उनका लंड अब सिकुड़ गया था – एक छोटा सा मुलायम टुकड़ा, जो अब तक मेरी चूत और मेरे मुँह में था। उनकी आँखें मुंद गई थीं – वो सो रहे थे, या सोने का नाटक कर रहे थे। उनके मुँह से हल्की खर्राटों की आवाज़ आ रही थी – ‘घुर्र-घुर्र-घुर्र’।

भाग 15: निष्कर्ष – वो रात और उसके बाद

मैं मुस्कुरा दी। एक गहरी, संतुष्ट मुस्कान। मैं धीरे से बिस्तर पर चढ़ी और अपने पति से चिपक कर लेट गई – अपना सिर उनकी चौड़ी छाती पर रखा, अपना एक हाथ उनके पेट पर, और अपनी एक टांग उनके पैरों के बीच में।

मुझे अब मेरे ब्वॉयफ्रेंड की ज़रा सी भी याद नहीं आ रही थी। उसका चेहरा – जो कुछ घंटे पहले तक मेरी आँखों के सामने घूम रहा था – अब धुंधला पड़ गया था। उसके होंठ, उसकी बाँहें, उसका पतला-सा लंड – सब कुछ फीका पड़ गया था। मेरे पति के उस 8 इंच के मोटे लंड ने – जिसने मुझे बेरहमी से चोदा था, जिसने मुझे रुलाया था, जिसने मेरी चूत फाड़ दी थी और मेरे मुँह में वीर्य भर दिया था – मेरे दिल और मेरे शरीर पर ऐसी छाप छोड़ दी थी कि मेरा पुराना प्यार धूल में मिल गया।

पति ने ब्वॉयफ्रेंड के लंड की याद भुला दी – सच में भुला दी।

मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरे पति की साँसों की लय के साथ, मेरी साँसें भी चलने लगीं। मैं सोच रही थी – शायद यही मेरी किस्मत थी। शायद यही मेरी ज़िंदगी थी। और शायद… शायद मुझे ये ज़िंदगी पसंद आने लगी थी।

तो दोस्तों, ये थी मेरी – अंजलि की – हॉट हनीमून सेक्स स्टोरी। ये कहानी थी डर की, मजबूरी की, पहलवान पति के बेरहम लंड की, और एक लड़की के शरीर और दिमाग के बदलाव की।

हो सकता है कि मेरे पति ने मुझे उस रात जानवरों की तरह चोदा हो – बिना प्यार के, बिना मुलायमियत के। हो सकता है कि उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी, मेरे दर्द को नहीं समझा। लेकिन एक बात तय है – उस एक रात ने मुझे बदल दिया। मैंने अपने ब्वॉयफ्रेंड को भुला दिया, और अपने पति को अपना लिया – पूरी तरह, हर तरह से।

पति ने ब्वॉयफ्रेंड के लंड की याद भुला दी – और मैं ये कहानी आप सबसे इसलिए सुना रही हूँ, ताकि आप भी समझ सकें कि कभी-कभी वो जो सबसे ज्यादा डर लगता है, वोी आपको सबसे ज्यादा सुख भी दे सकता है।

अब मैं अपने पति के साथ हूँ – उनके शानदार एसी बेडरूम में, उनके किंगसाइज़ बेड पर। वो मेरे बगल में सो रहे हैं, और मैं उनके सीने पर सिर रखे ये कहानी लिख रही हूँ। उनके सिकुड़े हुए लंड को देखकर मुस्कुरा रही हूँ – क्योंकि मुझे पता है कि कल सुबह फिर से वो 8 इंच का हो जाएगा, और फिर से मुझे चोदेगा।

और इस बार – मैं दर्द का नाटक नहीं करूंगी। मैं खुल कर मजा लूंगी।

यही है मेरी कहानी – पति ने ब्वॉयफ्रेंड के लंड की याद भुला दी

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