दोपहर में चुदाई की तलब – बीवी ने पति को बुलाकर ऐसे चोदवाया

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दोपहर में चुदाई की तलब – क्या आपने कभी दोपहर के समय अपनी बीवी को इतना हॉर्नी देखा है कि वो आपको ऑफिस से घर बुला ले? इस हॉट हिंदी सेक्स स्टोरी में पढ़िए राज की जुबानी वो दोपहर, जब उसकी बीवी रीना को दोपहर में चुदाई की तलब लगी। रीना ने नंगी होकर अपनी चूत को हाथों से चिकार रखा था और राज को बुलाया। जब राज ने उसकी टाइट चूत चाटी और अपना 7 इंच लंड डाला, तो रीना पागल हो गई। दोपहर में चुदाई की तलब रखने वाली रीना ने आखिर में अपनी गांड में भी पूरा लंड ले लिया। अगर आप दोपहर में सेक्सगांड मारने की कहानी, और जबरदस्त चुदाई ढूंढ रहे हैं, तो यह गर्म दास्तान आपके लिए ही है।

भाग 1: ऑफिस से घर बुलाकर बीवी ने शुरू की शरारत

मैं राज हूँ और मेरी पत्नी का नाम रीना है। उस समय मैं 26 साल का जवान था, और रीना 24 साल की। बिना किसी मेकअप के भी रीना खूबसूरत लगती थी। गोरा रंग, मध्यम स्तन, पतला शरीर – लेकिन उसकी चूत उभरी हुई थी, जो उसके पतले शरीर के बीच एक अलग ही आकर्षण रखती थी। हमारी शादी एक साल पहले हुई थी, लेकिन हमारे बीच का प्यार अभी भी उतना ही ताज़ा था जितना पहले दिन था – बल्कि हर दिन बढ़ रहा था।

एक दिन की बात है। मैं ऑफिस में था – काम का दबाव था, कंप्यूटर के सामने बैठा था, और मीटिंग का इंतज़ार कर रहा था। तभी मेरे फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर नाम था – रीना। मैंने फोन उठाया और उसकी मीठी आवाज़ सुनते ही मेरा तनाव कम हो गया।

“राज, आज जल्दी घर आ जाओ,” रीना ने कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शरारत थी।

“क्या बात है? सब ठीक है?” मैंने पूछा।

“सब ठीक है… बस आ जाओ। मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ,” उसने कहा और फोन रख दिया।

मैं हैरान था – रीना आमतौर पर ऐसे फोन नहीं करती थी। उसकी आवाज़ में कुछ था – एक बेचैनी, एक जल्दबाजी, एक प्यास। मैंने सोचा, शायद कुछ ज़रूरी काम होगा। मैंने अपने बॉस से छुट्टी मांगी – थोड़ा सा झूठ बोल दिया कि पेट खराब है – और ऑफिस से निकल गया।

रास्ते में मैं सोच रहा था – आखिर क्या बात हो सकती है? क्या घर पर कोई समस्या है? क्या मेरी माँ को कुछ हुआ? मेरा दिल थोड़ा घबरा रहा था, लेकिन साथ ही एक उत्सुकता भी थी।

जब मैं ऑफिस से घर आया, तो रीना पूरी तरह तैयार होकर बैठी थी। उसने हल्का मेकअप किया था – हल्की लाल लिपस्टिक, थोड़ा सा काजल, और उसके बाल खुले हुए थे, उसके कंधों पर बिखरे हुए। उसने एक हल्के रंग का सलवार-सूट पहना था – पुदीना हरा रंग, जो उसके गोरे शरीर पर बहुत अच्छा लग रहा था।

तो मैंने कहा – “क्या बात है मेरी जान, आज तो तुम कहर ढा रही हो। ऑफिस से बुलाया, तैयार होकर बैठी हो – क्या कोई खास मौका है?”

फिर रीना मुस्कुराने लगी – उसकी मुस्कान में वही शरारत थी, वही बेचैनी – और वह मेरी पैंट पर हाथ फेरने लगी। उसके हाथ पहले मेरी जांघ पर थे, फिर घुटने पर, फिर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ने लगे। उसकी उंगलियाँ मेरी पैंट के कपड़े के ऊपर से मेरे लंड को ढूंढ रही थीं।

जब मेरा लौड़ा टनटनाने लगा – मेरी पैंट में उभार बन गया था – तो रीना उसे छोड़कर बेडरूम में चली गई। वह उठी, मुस्कुराई, और धीरे-धीरे चलती हुई कमरे से बाहर चली गई। मैं वहाँ बैठा रह गया – मेरा लंड खड़ा था, और मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है।

फिर मैंने अपने कपड़े बदले। मैंने अपनी ऑफिस की शर्ट और पैंट उतार दी, और एक लुंगी पहन ली – घर के आराम के लिए। मैंने उसे कई बार बुलाया – “रीना! रीना! कहाँ हो?” – लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सन्नाटा था – सिर्फ पंखे की आवाज़ थी।

तो मैं उसे देखने बेडरूम में गया। दरवाज़ा थोड़ा खुला था – मैंने धीरे से धक्का दिया और अंदर कदम रखा। और जहाँ मैं उसे देखकर दंग रह गया।

भाग 2: नंगी बीवी देख पति का लंड हुआ टनटन

रीना बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी। उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे – उसका सलवार-सूट एक तरफ बिखरा हुआ था, उसकी ब्रा और पैंटी बिस्तर के किनारे पर थे। और उसने अपने दोनों हाथों से अपनी बुर को चीर रखा था – उसकी चूत के होंठ उसकी उंगलियों के बीच खुले हुए थे, और उसकी क्लिट उभरी हुई थी, चमक रही थी।

उसने अर्ध-पारदर्शी कपड़े पहने हुए थे – वास्तव में, उसने एक पतली, पारभासी नाइटी पहन रखी थी जिसमें उसके स्तन बड़े और सेक्सी लग रहे थे। नाइटी इतनी पतली थी कि उसके निप्पल साफ दिख रहे थे – वे पहले से ही सख्त हो चुके थे, उत्तेजना से। उसकी चूत भी नाइटी के नीचे से झाँक रही थी, और वह पहले से ही गीली थी – मैं उसकी चमक देख सकता था।

मेरा दिमाग ठन गया। मैं उसकी मंशा समझ गया – उसे दोपहर में चुदाई की तलब लगी थी, और उसने मुझे ऑफिस से बुला लिया था। उसकी आँखों में वही बेचैनी थी, वही भूख थी, जो मुझे पागल कर देती थी।

उसने धीरे से कहा – “राज, आ गए? मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। इतनी देर क्यों लगा दी?”

मैं पास गया। मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और चूमना शुरू कर दिया। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए – पहले धीरे से, फिर जोर से, फिर दीवानों की तरह। उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली, और हम एक-दूसरे के मुँह का रस पीने लगे।

मेरा लंड गर्म हो गया और अंडरवियर के अंदर फुफकारने लगा। वह मेरी लुंगी के नीचे इतना तन गया था कि मुझे दर्द हो रहा था। उसने मेरी लुंगी और अंडरवियर उतार दिया – एक झटके में, जैसे उसे देर हो रही हो।

उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया – उसकी उंगलियाँ मेरे लंड के शाफ्ट पर फिसल रही थीं – और मेरी खूब तारीफ़ करने लगी। मैं उसकी मंशा समझ गया – वह मुझे और अधिक उत्तेजित करना चाहती थी।

रीना – “तुम्हारा लंड बहुत दमदार है। क्या मस्त लग रहा है? इतना सख्त, इतना मोटा, इतना लंबा – मेरे हाथ में बिल्कुल सही आ रहा है।”

मैं – “क्या तुम्हें सच में मज़ा आता है?”

रीना – “सच में राजा, बहुत दमदार है, मुझे बहुत मज़ा आता है। जब मैं इसे देखती हूँ, तो मेरी चूत में पानी आ जाता है। जब मैं इसे छूती हूँ, तो मैं पागल हो जाती हूँ। तुमसे शादी करके मुझे जैकपॉट मिल गया है।”

मैं मुस्कुराया – उसकी बातों ने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया। लेकिन अब बारी थी उसे चोदने की।

भाग 3: दोपहर में चुदाई की तलब – टाइट चूत में लंड घुसाया

मैं उसकी बुर चाटने लगा। मैंने अपना चेहरा उसकी चूत पर रख दिया – उसकी नमी, उसकी गर्माहट, उसकी खुशबू – सब कुछ मुझे पागल कर रहा था। मैंने अपनी जीभ से उसके बाहरी होठों को चाटा, फिर भीतरी होठों को, फिर उसकी क्लिट को अपने होठों के बीच दबाकर चूसा।

वो मेरा लंड चूसने लगी – उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया। ग्लग-ग्लग-ग्लग की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। हम 69 पोजीशन में थे – मैं उसके ऊपर था, उसकी चूत चाट रहा था, और वह मेरे नीचे थी, मेरा लंड चूस रही थी।

करीब दस मिनट बाद मेरा लंड लोहे की तरह सख्त हो गया – पत्थर जैसा सख्त, लोहे जैसा मजबूत – और रीना की चूत को पूरी तरह रगड़ने लगा। उसके चूत के होंठ मेरे लंड के सुपारे पर फिसल रहे थे, और उसकी चूत की नमी मेरे लंड पर लग गई थी।

हम दोनों अपने काम में इतने मग्न थे कि हमें समय का पता ही नहीं चला। घर के बाहर से गुजरने वालों की आवाज़ें आ रही थीं, पड़ोसियों के बच्चों के चिल्लाने की आवाज़ें आ रही थीं – लेकिन हमें कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। बस हमारी साँसें थीं, हमारी कराहें थीं, और हमारे शरीरों की थपकें थीं।

कुछ देर बाद मेरी नज़र बेडरूम के दरवाजे पर पड़ी, जो खुला था – पूरा खुला था। हम बिस्तर से सीधे बाहर दिख रहे थे। अगर कोई लिविंग रूम में आ जाता, तो हमें नंगा देख सकता था।

तभी रीना जल्दी से उठी – उसने एक झटके में अपना मुँह मेरे लंड से हटाया – और उसने दरवाजा बंद कर दिया। “क्लैक” की आवाज़ के साथ दरवाज़ा बंद हो गया, और हम अकेले थे – बस हम दोनों।

अब मैंने रीना को बिस्तर पर लिटा दिया – उसकी पीठ गद्दे पर, उसके बाल तकिए पर बिखरे हुए – और उसकी टांगों के बीच बैठ गया। उसकी टांगें खुली हुई थीं, और उसकी चूत मेरे सामने पूरी तरह खुली हुई थी – गुलाबी, गीली, चमकती हुई।

मैंने फिर से रीना की चूत चाटना शुरू कर दिया – इस बार और जोर से, और तेज़ी से। मैंने अपनी पूरी जीभ उसकी चूत के अंदर डाल दी, बाहर निकाली, फिर से अंदर डाली। उसके रस का स्वाद मीठा था, और उसकी सिसकारियाँ मुझे और अधिक उत्तेजित कर रही थीं।

रीना – “राजा, अपना लंड मेरी चूत में डाल दो… मुझे और मत तड़पाओ। मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकती। मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए तरस रही है।”

मैं – “रीना, तुम्हारी चूत बहुत टाइट और चिकनी है। मुझे इसे खाने का मन कर रहा है। जैसे कोई मिठाई खाता है, वैसे मैं तुम्हारी चूत खाना चाहता हूँ।”

रीना – “नहीं राजा, तुम मेरी चूत को फिर कभी खा सकते हो। इस समय मेरी चूत के अंदर आग लगी हुई है। पहले इसे अपने लंड के पानी से ठंडा कर दो मेरे राजा। प्लीज, और मत रुको।”

रीना के मुँह से ये सुनते ही मेरे अंदर की हवस एकदम भड़क उठी – जैसे कोई ज्वालामुखी फट गया हो। मेरे लंड के अंदर खून उबलने लगा, और वह और भी सख्त हो गया।

मैंने अपने लंड पर ढेर सारा थूक थूका – उसकी पूरी लंबाई को गीला कर दिया – और लंड का सुपारा रीना की चूत के मुँह पर रखा। उसके चूत के होंठ मेरे लंड के सुपारे के चारों ओर बंद हो गए, और मैंने हल्का सा धक्का दिया।

रीना – “आउच! मैं मर रही हूँ, बहुत दर्द हो रहा है। प्लीज़ इसे बाहर निकालो। ऐसा लग रहा है जैसे मेरी बुर फट गई हो। प्लीज़ राजा, बहुत दर्द हो रहा है।”

मैं – “अभी तो तुम कह रही हो कि चूत में आग लगी है, इसे शांत करो – और अब लंड बाहर निकालने को कह रही हो। हल्का सा धक्का देने से तुम्हें क्या हो गया? अब दर्द का नाटक मत करो और बर्दाश्त करो रीना।”

वो फुसफुसाती रही और कोई जवाब नहीं दिया। उसकी आँखों में पानी था, उसके होंठ काँप रहे थे, लेकिन उसने मुझे रोका नहीं। कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे – मेरा लंड उसकी चूत के मुँह पर टिका हुआ था, और उसकी चूत की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे उसे स्वीकार कर रही थीं।

फिर मैंने एक जोरदार धक्का दिया – अपनी पूरी ताकत से – और पूरा लंड अंदर चला गया। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड के चारों ओर सिकुड़ गईं, जैसे वह मुझे अंदर खींच रही हों।

वो दर्द से चीखने लगी – “आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!” – और मैं अपना लंड आगे-पीछे करने लगा। धीरे-धीरे, फिर तेज़, फिर और तेज़।

भाग 4: दो बार स्खलित हुई बीवी, फिर मांगी गांड चुदाई

अब रीना को भी मज़ा आने लगा। उसका दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था, और उसकी जगह एक अलग ही सुख ले रहा था। धीरे-धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी – थप-थप-थप की आवाज़ें कमरे में गूँजने लगीं, और बिस्तर चरमराने लगा।

मेरी प्यारी बीवी रीना चुदाई का मज़ा ले रही थी और बोल रही थी – “जोर से चोदो मेरे राजा! आज बहुत दिनों के बाद मेरी चूत को तुम्हारा लाजवाब लंड मिला है। और तेज़! और गहरा! और जोर से!”

मैं – “रीना तुम्हें क्या हो गया है? सिर्फ़ दो दिन पहले ही मैंने तुम्हें एक रात में दो बार चोदा था। लगता है मैं तुम्हें तब पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाया था। मेरी जान, चिंता मत करो, मैं तब तक चोदूंगा जब तक तुम संतुष्ट नहीं हो जाती। और बाद में मुझे कभी भी ऐसे ही बुला लेना – दोपहर हो या रात, सुबह हो या शाम, मैं तुम्हारे लिए तैयार हूँ।”

लंड निकाले बिना मैंने रीना की कमर के नीचे एक तकिया रखा – उसके कूल्हे ऊपर उठ गए, और उसकी चूत मेरी तरफ और भी खुल गई। फिर उसकी टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं – उसके पैर हवा में थे, और मैं उन्हें कस कर पकड़े हुए था।

जब मैंने अपना लंड उसकी बुर में धकेला तो लंड उसकी बच्चेदानी के मुँह से टकराया – एक गहरी, जोरदार थाप। रीना कराह उठी – “आह्ह्ह्ह्ह्ह!” – और अपने लंड के उभार को अपने पेट पर देखने और महसूस करने को कहा।

रीना – “राजा मेरे प्यारे, देखो तुम्हारा लंड कितना बड़ा है। यह मेरी नाभि के पार पहुँच कर मेरे बच्चेदानी से भी टकरा रहा है। मैं इसे अपने पेट पर महसूस कर सकती हूँ!”

मैं मुस्कुराया और कहा – “हाँ मेरी रानी, तुम भी इसे महसूस करो और मेरे लंड का मज़ा लो। अपना हाथ रखो अपने पेट पर, और जब मैं धक्का मारूँ तो महसूस करो कि मेरा लंड कितना गहरा जाता है।”

हम दोनों चुदाई के बारे में ज़ोर-ज़ोर से बातें करने लगे। रीना ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी – “हाँ… हाँ… वहीं… और गहरा… राजा… और जोर से…” वो मेरी कमर पकड़ कर चिल्ला रही थी कि मैं ज़ोर से और गहरा धक्का दूँ। मैं हर ज़ोरदार धक्के के साथ बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था – पहले बाएँ निप्पल को, फिर दाएँ को, फिर दोनों को एक साथ।

चुदाई के दौरान रीना दो बार स्खलित हो गई। पहली बार उसकी चूत ने अपना रस बहाया – गर्म, पतला, मीठा – जो मेरे लंड पर बह गया। कुछ ही मिनटों में वह फिर से झड़ गई – उसका शरीर अकड़ गया, उसके पैर काँपने लगे, उसके हाथ चादर को नोचने लगे। सौभाग्य से मैंने अब तक खुद पर काबू रखा था।

आख़िरकार रीना ने स्खलन के साथ पेशाब भी कर दिया – उसके शरीर पर पूरी तरह से काबू नहीं था, और उसका पेशाब बिस्तर पर गिर गया, चादर भीग गई। वह शरमा गई, लेकिन मैंने उसे चूम लिया – “कोई बात नहीं, प्यार में सब चलता है।”

फिर रीना बोली – “मेरे राजा, तुमने मुझे पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया और थका भी दिया। प्लीज़ अब मुझे छोड़ दो।”

लेकिन मैं अभी थका नहीं था। मेरा लंड अभी भी सख्त था, और मेरे मन में एक और इच्छा थी – वह इच्छा जो कई महीनों से अधूरी थी।

भाग 5: आखिरकार पूरा 7 इंच लंड गांड में डाला और माल झड़ा

मैंने उसकी गांड की खुजली मिटाने में 6 महीने से ज़्यादा लगा दिए थे। हर बार जब मैं उसकी गांड चोदने की कोशिश करता, वह कभी ना कभी बहाना बना देती थी। लेकिन वो कभी भी मेरा लंड अपनी गांड में पूरा जाने देने को राज़ी नहीं हुई। मैं हमेशा अपनी इच्छा पूरी करने का कोई रास्ता ढूँढ़ने के बारे में सोचता रहता था।

उसके बाद उसने हर तरह की चुदाई और लंड चूसने में मेरा साथ दिया – उसने मेरा लंड चूसा, अपनी चूत चुदवाई, अपने स्तन चुदवाए – लेकिन जब मैं अपना पूरा लंड उसकी गांड में डालने की कोशिश करता, तो रीना बहुत दर्द का नाटक करती और वो कभी भी पूरा लौड़ा अपनी गांड में लेने के लिए राज़ी नहीं होती थी।

इस बार मैंने मन ही मन ठान लिया था कि मैं अपना पूरा लंड उसकी गांड में डाल दूँगा – चाहे कुछ भी हो जाए। और मैंने उन्हें अपने इरादे के बारे में बताया भी नहीं – यह मेरा सीक्रेट प्लान था।

मैं – “रीना, मेरी अभी भी थकान नहीं हुई है और यह और चाहती है। इसे ठंडा करने के लिए कुछ करो।”

रीना – “ठीक है मेरे राजा, मुझे बताओ कि मैं इसके साथ क्या करूँ। मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगी।”

मैं – “मेरी प्यारी रानी, मैं तुम्हारी गांड में स्खलित होना चाहता हूँ। तो उठो और घोड़े की तरह झुको और मेरा लंड अपनी गांड में ले लो।”

रीना मान गई और मेरे लंड को सहलाने लगी – उसके हाथ मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रहे थे, धीरे-धीरे, मुझे और उत्तेजित करने के लिए। मैंने इसे एक सुनहरा मौका समझा।

फिर रीना घोड़े की तरह झुक गई – उसके हाथ बिस्तर पर, उसके घुटने गद्दे पर, और उसकी गांड मेरी तरफ ऊपर उठी हुई। उसने अपनी गांड का छेद खोल दिया – अपने हाथों से उसके गालों को अलग किया, ताकि मैं अंदर जा सकूँ।

फिर मैंने उसकी गांड के छेद पर थूका – ढेर सारा थूक – और अपने लंड का सुपारा उस पर रख दिया। जब मैंने अपना लंड का सुपारा डाला, तो वो चिल्लाई और बोली कि बहुत दर्द हो रहा है मेरी जान। प्लीज़ बहुत धीरे करो। मेरी गांड फट रही है।

मैं – “बस थोड़ा सा सहन करो मेरी जान। तुम्हें दर्द हो रहा है क्योंकि मैं कई दिनों के बाद तुम्हारी गांड में अपना लंड डाल रहा हूँ। इसलिए इस बार तुम्हें बर्दाश्त करना होगा। अब मैं रुकने वाला नहीं हूँ।”

फिर मैंने लंड को धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया – सेंटीमीटर दर सेंटीमीटर – जब तक कि आधा अंदर नहीं चला गया।

पहले तो हमेशा की तरह मैंने अपना आधा लौड़ा ही अंदर डाला और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रीना चुप रही – उसके होंठ कटे हुए थे, उसकी आँखें बंद थीं, और वह धीरे-धीरे साँस ले रही थी। जब मेरा आधा लंड अंदर चला गया तो मैंने अपने पैर से उसकी टांग और अपने हाथों से उसके दोनों हाथ कस कर पकड़ लिए – उसके पूरे शरीर को जकड़ लिया – ताकि वो मुझे किसी भी तरह से हटा न सके।

जब मैं उसके बदन को कस कर दबा रहा था तो शायद वो मेरी मंशा भांप गई थी। उसकी आँखें फैल गईं, और वो बोली – “राजा, क्या कर रहे हो? मुझे डर लग रहा है!”

मैं – “मेरी जान, घबराओ मत, मैं तुम्हारा डर समझता हूँ। बस थोड़ा और सहन करो।”

मैं उसके बूब्स को सहलाने लगा – मेरे हाथ उसके स्तनों पर थे, उसके निप्पल्स को दबा रहे थे, मसल रहे थे – और उसे चूमने लगा – उसके कंधों को, उसकी गर्दन को, उसके कानों को। और हमेशा की तरह मैं धीरे-धीरे अपना लंड रीना की गांड में अंदर-बाहर करता रहा।

फिर मैंने उससे पूछा – “अब मज़ा आ रहा है या दर्द हो रहा है? बताओ कैसा लग रहा है?”

मैं – “क्या तुम ठीक हो मेरी जान?”

रीना – “ठीक है मेरे राजा, अब दर्द कम हो रहा है। अब थोड़ा अच्छा लगने लगा है।”

अब मेरी हिम्मत बढ़ गई। इस बार मैंने मन बना लिया था कि किसी भी कीमत पर, चाहे कुछ भी हो जाए, अपना पूरा लंड उसकी गांड में पेल दूँगा। मैंने उसके हाथ पकड़े – उसकी कलाइयों को कस कर – और उसके पूरे शरीर को कस कर जकड़ लिया ताकि जब मैं अपना पूरा लंड अंदर डालूँ तो वो मुझे रोक न सके।

फिर तुरंत अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख दिया – मेरी हथेली उसके होठों पर थी, उसकी चीखों को दबाने के लिए – ताकि वो ज़ोर से चीख न सके। इससे पहले कि वो कुछ समझ पाती, मैंने एक जोरदार झटका दिया और मेरा पूरा लंड उसकी गांड में जड़ तक चला गया।

रीना चीख उठी – एक दबी हुई, मफल हुई चीख – और उसकी आँखों से आँसू निकल आए। इस बार मेरा पूरा 7 इंच का लंड पहली बार उसकी गांड में गहराई तक जा चुका था – उसकी गांड की तंग दीवारों के बीच से गुजरते हुए।

वो दर्द से तड़पने लगी और चिल्लाने लगी – “ओ… माँ… मैं मर गई… ओ… ओ… आह माँ मैं मर रही हूँ…” दर्द के मारे उसकी जान हलक में आ गई, उसकी साँसें ऊपर की ओर खिंच गईं और वो चीखने लगी – “प्लीज़ राज, इसे बाहर निकालो! प्लीज़! बहुत दर्द हो रहा है!”

उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे। चूँकि मैंने पहले ही अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख दिया था, ताकि रीना ज़ोर से चीख न सके, फिर भी उसके मुँह से चीखें निकल रही थीं – दबी हुई, लेकिन तेज़।

लेकिन इस बार मैं उसकी चीख की परवाह किए बिना अपना लंड उसकी गांड में पेलता रहा। उसने मुझसे छूटने की बहुत कोशिश की – उसने अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, अपनी टांगें हिलाईं, अपने कूल्हों को झटका दिया – पर कामयाब नहीं हुई। मैंने न तो उस पर कोई रहम दिखाया और न ही अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकाला।

रीना की आँखों से आँसू निकल रहे थे। वो दर्द से आहें भर रही थी। मुझे उसकी चीखें सुनकर मज़ा आ रहा था क्योंकि उसने मुझे कई महीनों से इसके लिए इंतज़ार करवाया था। मैंने अपना लंड बाहर नहीं निकाला और उसकी माँ के जाग जाने की चिंता किए बिना ज़ोर-ज़ोर से पेलता रहा।

रीना – “राजा, इस बार मुझे पहले से ज़्यादा दर्द क्यों हो रहा है? तुमने अपना लंड कई बार पेला है, लेकिन इस बार ऐसा लग रहा है जैसे पहली बार पेल रहे हो। मेरी गांड ऐसे फट रही है जैसे पहली बार हो।”

मैं – “मेरी जान, ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम अब थक गई हो और आराम करना चाहती हो। बस रुको, मैं जल्द ही झड़ जाऊँगा मेरी जान। बस कुछ और मिनट सहन करो।”

करीब 10 मिनट तक ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने के बाद – थप-थप-थप की तेज़ आवाज़ों के साथ – मैंने अपना सारा गर्म, गाढ़ा वीर्य रीना की गांड के अंदर तक डाल दिया। एक धार, दूसरी, तीसरी – उसकी गांड के अंदर गहराई तक।

रीना और मैं दोनों पसीने से लथपथ थे – हमारे शरीर चिकने हो गए थे – और बिस्तर पर उसकी गांड में अपना लंड डाले नंगे लेट गए। हम हाँफ रहे थे, हमारे दिल तेज़ी से धड़क रहे थे, और हम एक-दूसरे से लिपट गए थे।

रीना ने धीरे से कहा – “राजा, तुमने मेरा रिकॉर्ड तोड़ दिया। आज तक किसी ने मुझे इतना नहीं चोदा। लेकिन… प्यास अभी भी बाकी है।”

मैं हँसा – “मेरी जान, अब तो पूरी रात पड़ी है। चल, थोड़ा आराम कर लेते हैं, फिर से शुरू करेंगे।”

उस दिन के बाद, रीना ने कभी मुझे अपनी गांड चोदने से मना नहीं किया। उसे एहसास हो गया था कि थोड़ा दर्द सहने के बाद उसे भी उतना ही मज़ा आता है जितना मुझे। और दोपहर में चुदाई की तलब लगने पर वह अब बिना किसी झिझक के मुझे ऑफिस से बुला लेती है – और मैं तुरंत आ जाता हूँ, क्योंकि उससे बेहतर क्या हो सकता है?

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