पहली रात 9 इंच लंड से चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि सुहागरात पर 9 इंच का मोटा लंड पहली बार चूत में घुसे तो क्या होता है? इस हॉट हिंदी सेक्स स्टोरी में पढ़िए काव्या की जुबानी वो रात, जब पहली रात 9 इंच लंड से चुदाई ने उसकी ज़िंदगी बदल दी। उत्तराखंड से आई 22 साल की काव्या की गुलाबी चूत देखकर उसके पति ने बेरहम चुदाई शुरू कर दी। पहले ब्लोजॉब लिया, फिर 9 इंच लंड उसकी तंग चूत में ठूंस दिया। अगर आप सुहागरात की चुदाई, बड़े लंड की कहानी, और बेरहम सेक्स ढूंढ रहे हैं, तो यह धमाकेदार दास्तान आपके लिए ही है।
भाग 1: उत्तराखंड की लड़की से अरबपति पति ने की शादी
मैं काव्या शर्मा हूँ। उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में रहने वाली लड़की। मेरा जीवन सीधा-साधा था – सुबह उठना, पढ़ना, घर के काम करना, शाम को पहाड़ों की ठंडी हवा का लुत्फ उठाना। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी जिंदगी इतनी तेज़ी से बदल जाएगी।
लेकिन अचानक से मेरी पूरी जिंदगी बदल गई, जब रियांश ओबेरॉय नाम का एक बहुत बड़ी कंपनी का मालिक मेरी जिंदगी में आया। हमारे गांव में वह किसी काम से आया था – कुछ लैंड डील के लिए। उसने मुझे देखा और बस देखता ही रह गया। मैं उस समय स्थानीय मंदिर में थी, सफेद सूट में, बाल खुले हुए। उसने अपने कुछ लोगों को मेरे बारे में पता लगाने भेजा और फिर कुछ ही दिनों में उसने मेरे पिता से मेरी शादी का प्रस्ताव रख दिया।
मेरे पिता तो सुनते ही रह गए – एक अरबपति, दिल्ली में बंगला, कंपनियाँ, गाड़ियाँ। क्या गरीब पहाड़ी किसान का सपना हो सकता है कि उसकी बेटी शहर के किसी अमीर आदमी से शादी करेगी? लेकिन सपना सच हो गया। मैंने रियांश को कुल दो बार देखा था – एक बार मंदिर में और एक बार सगाई के दिन। वह बहुत हैंडसम था – तेज़ निगाहें, पैनी आँखें, एक अजीब सा आत्मविश्वास। लेकिन उसकी आँखों में कुछ और भी था – एक शिकारी की नज़र।
शादी के बाद वह मुझे लेकर दिल्ली आ गए। शादी की सारी रस्में पूरी हुईं – फेरे, सिंदूर, माँ-बाप का आशीर्वाद। फिर लंबी कारों में सवार होकर हम दिल्ली के लिए निकल पड़े। रास्ते में मैं सोच रही थी – कैसा होगा मेरा नया घर? कैसा होगा मेरा पति? कैसी होगी मेरी नई ज़िंदगी? और हाँ – कैसा होगा मेरा पहला सम्भोग?
सुबह के करीब हम घर पहुंचे। रियांश का घर – बल्कि हवेली – बहुत बड़ी थी। गेट के अंदर लॉन था, फव्वारे थे, और सामने एक विशाल हवेली थी। सारी रस्मों के बाद शाम को मुझे मेरे पति के कमरे में भेज दिया गया। कुछ औरतें मुझे तैयार करने आईं – उन्होंने मुझे नहलाया, मेरे शरीर पर इत्र लगाया, मेरे बालों को सँवारा, और फिर एक लाल रंग की साड़ी पहनाई। वह साड़ी बहुत महंगी लग रही थी – सोने की कढ़ाई, चमकदार किनारा, और हल्का सा झिलमिलाता कपड़ा।
मैं लाल रंग की साड़ी में बड़ी खूबसूरती से बेड पर बैठी अपने पति का इंतजार कर रही थी। कमरे में हल्की रोशनी थी – मोमबत्तियाँ जल रही थीं, और हल्का संगीत बज रहा था। मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था। मैं घबरा तो रही थी, लेकिन साथ ही पहले सेक्स अनुभव के लिए भी एक्साइटेड भी थी। मैंने कई बार सोचा था कि मेरी पहली रात कैसी होगी – कोमल, प्यार भरी, धीरे-धीरे। लेकिन जो होने वाला था, उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी।
भाग 2: लाल साड़ी में घूंघट डाले इंतज़ार करती काव्या
तभी कमरे का दरवाजा खुलता है, और पति कमरे में दाखिल होता है। उसने ब्लैक शर्ट और पैंट पहनी हुई थी। उसके बाल थोड़े बिखरे हुए थे, और उसकी आँखों में वही शिकारी नज़र थी।
कमरे का दरवाजा खुलते ही मैं तुरंत अपने चेहरे पर घूंघट डाल देती हूं। मैंने बिस्तर पर घुटने मोड़कर बैठा लिया, अपने हाथ गोद में रख दिए। मेरी साड़ी का पल्लू मेरे चेहरे पर लटक रहा था – एक पतला, पारदर्शी घूंघट। मैं उसके नीचे से दुनिया को देख सकती थी, लेकिन वह मेरा चेहरा साफ नहीं देख पा रहा था।
वो आगे आ कर मुझे ऊपर से लेकर नीचे तक देखने लग जाता है। उसकी नज़र मेरे चेहरे पर, फिर मेरी गर्दन पर, फिर मेरे स्तनों पर, फिर मेरी कमर पर, फिर मेरी जांघों पर। ऐसा लग रहा था जैसे वह मुझे खा जाना चाहता हो। इस वक्त मुझे थोड़ी घबराहट भी हो रही थी – उसका तरीका डरावना था – लेकिन अपनी घबराहट को काबू में करते हुए मैं बेडशीट कस के पकड़ लेती हूं। मेरी उंगलियाँ सफेद चादर में गड़ रही थीं।
वह वहीं पलंग पर बैठ कर एक झटके से मेरे सर से दुपट्टा हटा देता है। उसने बहुत तेज़ी से किया – जैसे कोई शिकार पर झपटता है। मुझे तो इस बात की उम्मीद ही नहीं थी कि वह यह करेगा। मुझे तो लगा था वह आकर मुझे दो शब्द कहेंगे – प्यार की बातें करेंगे, मुझे रिलैक्स करेंगे। लेकिन उसने कुछ भी नहीं कहा।
उसके तुरंत बाद ही गुस्से में अपने होठों को मेरे होठों पर रख देते हैं, और मुझे किस करने लग जाते हैं। यह किस नहीं था – यह एक हमला था। उसके होंठ सूखे और सख्त थे, उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई, और मैं कुछ भी नहीं कर पा रही थी। इस वक्त मैं कुछ भी समझने की हालत में नहीं थी। मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था।
वह खींच कर मेरा ब्लाउज फाड़ कर फेंक देते हैं। एक तेज़ “ट्रर्र” की आवाज़ के साथ मेरा ब्लाउज दो टुकड़ों में बंट गया और कमरे में बिखर गया। इस वक्त मैं ब्लैक कलर की ब्रा में उनके सामने थी, जहां मेरी साड़ी अभी भी मेरे शरीर से लिपटी हुई थी। मेरे स्तन ब्रा में कसे हुए थे, और मेरी नाभि से लेकर मेरी जाँघों तक साड़ी का कपड़ा चिपका हुआ था।
वह मुझे एक टक देखने लग जाते हैं – बिना पलक झपकाए। अचानक से वह अपना हाथ बढ़ा कर मेरे बूब्स पर रख देते हैं, और जोर से दबाते हैं। उसने इतनी ताकत से दबाया कि मेरे मुँह से “आह्ह्ह!” की चीख निकल जाती है। मैं पीछे हटने की कोशिश करती हूँ, लेकिन वह मेरा हाथ पकड़ लेता है। उनके चेहरे पर जहरीली मुस्कुराहट आ जाती है – एक संतुष्ट, शैतानी मुस्कान।
रेयांश हंसते हुए कहता है – “अभी तो रात की शुरुआत हुई है, तुम अभी से चिल्ला रही हो। अभी तो मैंने तुम्हें छुआ भी नहीं है असल में।”
इतना बोलकर वह अपनी पेंट उतार देते हैं। उसने अपनी बेल्ट खोली, बटन खोला, और पैंट नीचे खिसका दी। उनका लंड देख कर मैं हैरान रह जाती हूं।
भाग 3: पहली रात 9 इंच लंड से चुदाई – बेरहमी से ब्लोजॉब
9 इंच लंबा, 3 इंच मोटा लंड – जो इस वक्त किसी डंडे की तरह खड़ा था। उसकी नसें उभरी हुई थीं, सुपारा बैंगनी-लाल रंग का था, और उसकी चमड़ी चिकनी थी। मैंने अपनी ज़िंदगी में इतना बड़ा लंड कभी नहीं देखा था। मुझे तो लगता था कि सब लंड छोटे होते हैं – बच्चों वाले जैसे। लेकिन यह तो मेरे हाथ से भी बड़ा था।
मेरी आंखों में हैरानी देख कर वह और भी ज्यादा हंसने लग जाते हैं और एक बार फिर मेरे बूब्स कस के दबा देते हैं। उसने दोनों हाथों से मेरे दोनों स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें अपनी हथेलियों में समेट लिया। मेरे स्तन बहुत बड़े नहीं थे – 34″ के थे – लेकिन वे उसके हाथों में ऐसे दब रहे थे जैसे दो रसीले आम हों।
अचानक से वह मेरा सर अपने लंड पर लेकर आता है – उसने मेरे बाल पकड़े और मेरा चेहरा अपने लंड के पास कर दिया। फिर उसने अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया – बिना किसी चेतावनी के, बिना किसी पूछताछ के। मुझे इस बात की जरा भी उम्मीद नहीं थी कि वह मेरे साथ पहली ही रात में ऐसा करेंगे। मैंने कभी लंड को हाथ से भी नहीं छुआ था, और वह सीधा मेरे मुँह में डाल रहे थे।
उसका लंड इतना बड़ा था कि मेरे होंठ फैल गए, मेरे गाल फूल गए। मेरी जीभ उसके लंड के नीचे फंस गई थी, और मुझे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। मैं उन्हें हटाने की कोशिश करती हूं – मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी जाँघों को धक्का दिया – लेकिन उनकी ताकत के आगे मेरी ताकत ना के बराबर थी। वह पत्थर की मूर्ति की तरह अडिग थे।
उन्होंने मेरे मुँह में अपना लंड घुसाया और बाहर निकाला – धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से। मेरा मुँह उनके लंड से भर गया था, मैं सिर्फ गों-गों की आवाज़ें निकाल पा रही थी। मेरे मुँह से लार टपक रही थी, मेरी आँखों से पानी आ रहा था। मैं चोक हो रही थी – हर बार जब उनका लंड मेरे गले तक जाता, मुझे उल्टी जैसी महसूस होती।
कुछ देर में जब उन्हें महसूस होता है कि मुझे सांस नहीं आ रही थी – मेरा चेहरा लाल हो गया था, मेरी आँखें फटी हुई थीं – तो वह मेरा सर हटा देते हैं। एक “पॉप” की आवाज़ के साथ उनका लंड मेरे मुँह से बाहर आया, और मैं जोर-जोर से सांस लेते हुए बेड पर गिर जाती हूं। मैंने अपने फेफड़ों में हवा भरी – बड़े-बड़े गहरे साँस – जैसे कोई डूबता हुआ आदमी साँस लेता है।
जोर-जोर से सांस लेने की वजह से मेरे बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैं इस वक्त 22 साल की थी, और मेरे शरीर का माप 34-28-30 था – 34″ के बूब्स, 28″ की कमर, और 30″ के हिप्स। मैं दिखने में काफी खूबसूरत थी – गोरा रंग, लंबे बाल, बड़ी आँखें – और साथ ही साथ पहाड़ी इलाके में रहने की वजह से मेरे निप्पल का कलर एकदम पिंक था। ठंडी हवा और साफ पानी ने मेरी त्वचा को जवान और चमकदार रखा था।
मैं अभी उस हमले से उभरी भी नहीं थी कि तभी वह मेरी साड़ी खींच कर उतार देते हैं। उन्होंने मेरी कमर से साड़ी का पल्लू खींचा, फिर साड़ी को मेरे शरीर से खिसका दिया। फिर उन्होंने मेरा पेटिकोट फाड़ कर साइड में फेंक दिया – एक और “ट्रर्र” की आवाज़, और मेरा पेटिकोट दो टुकड़ों में बँट गया। अब मैं ब्लैक कलर की पेंटी में उनके सामने थी। उस ब्लैक पैंटी के नीचे मेरी चूत छिपी हुई थी – बिल्कुल अनछुई, बिल्कुल ताज़ा।
वह बिना देर किए मेरी पैंटी भी हटा देते हैं। उसने एक ही झटके में मेरी पैंटी नीचे खींच ली – उसे मेरे कूल्हों से, मेरी जाँघों से, मेरे घुटनों से, मेरे टखनों से खिसका दिया। अब मैं पूरी तरह से नंगी थी।
इन सब से मुझे सिर्फ दर्द हो रहा था – मेरा शरीर दर्द से कराह रहा था। मेरे ब्लाउज के फटने से मेरे कंधों पर खरोंचें आ गई थीं, मेरे हाथों पर उनकी पकड़ के निशान थे, और मेरे मुँह में अभी भी उनके लंड का स्वाद था। जिस वजह से मैं सेक्स के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। मैं डरी हुई थी, घबराई हुई थी, दर्द से तड़प रही थी। यह वो सुहागरात नहीं थी जिसका मैंने सपना देखा था।
भाग 4: गुलाबी चूत में 9 इंच लंड घुसा और बेहोशी
पैंटी उतारने के बाद वह मुझे ध्यान से देखने लग जाते हैं। उसकी नज़र पहले मेरे चेहरे पर, फिर मेरे स्तनों पर, फिर मेरे पेट पर, और फिर मेरी जांघों के बीच में टिक गई। वहाँ मेरी चूत थी – बिल्कुल नई, बिल्कुल अनछुई, बिल्कुल गुलाबी।
अचानक वह अपना एक हाथ बूब्स पर लेकर आते हैं, और कस कर दबा देते हैं। साथ ही झुक कर मेरी चूत को बड़ी गौर से देखने लग जाते हैं। उसने अपने दूसरे हाथ से मेरी जांघें और खोल दीं, और मेरी चूत पूरी तरह से उनके सामने खुल गई। उसने उस पर हाथ फेरते हुए अपनी जीभ घुमाते हुए कहा – “तुम तो वर्जिन हो, और साथ ही साथ इतनी गुलाबी भी। तुम्हारी चूत तो गुलाब के फूल की पंखुड़ी जैसी है। मजा आएगा तुम्हारे साथ खेल कर। आज तुम्हें ऐसा चोदूंगा कि तुम्हारा पिंक कलर भी काला हो जाएगा।”
ऐसा बोल कर वह जोर-जोर से कुत्तों की तरह मेरी चूत चाटने लग जाते हैं। उसने अपना चेहरा मेरी जांघों के बीच डाल दिया, और उसकी गर्म जीभ मेरी चूत के होंठों पर घूमने लगी। उसने मेरे बाहरी होठों को चाटा, फिर भीतरी होठों को, फिर मेरी क्लिट को अपने होठों के बीच दबा दिया। उनकी इस हरकत से मैं भी थोड़ी-थोड़ी गर्म होने लगती हूं। मेरे शरीर में एक अजीब सी झुनझुनी होने लगी – दर्द के साथ-साथ एक नई सी अनुभूति।
अचानक से उनका हाथ जो इतनी देर से मेरे बूब्स के साथ खेल रहा था, वह मेरे होठों पर आकर होंठ दबा देता है। उसने अपनी बड़ी हथेली को मेरे पूरे मुँह पर रख दिया – मेरी नाक और मेरे होंठ दोनों उसके हाथ के नीचे दब गए। मुझे लगा वह यह सब मेरी सिसकारियाँ रोकने के लिए कर रहे थे – ताकि घर में कोई सुन न ले। लेकिन मुझे क्या पता था कि इसके तुरंत बाद मुझे मेरी जिंदगी का पहला सबसे बड़ा दर्द मिलने वाला था।
अचानक ही वो अपना बड़ा लौड़ा जो किसी डंडे की तरह खड़ा था, उसको मेरी छोटी सी चूत में डाल देते हैं। एक ही झटके में – पूरी ताकत के साथ – उसने अपना 9 इंच का लंड मेरी कुंवारी चूत में ठूंस दिया।
मुझे इतना दर्द हुआ जैसे कोई चाकू मेरे अन्दर घुसा दिया गया हो। मेरी चूत के अंदर का कुंवारापन एक पल में टूट गया। मुझे लगा जैसे मेरा शरीर दो हिस्सों में बँट गया है। लेकिन मैं चिल्ला भी नहीं पाती – क्योंकि उनके हाथ ने मेरे मुँह को दबा रखा था। मैं बेहोश हो जाती हूं – सब कुछ काला हो गया, जैसे किसी ने लाइट बंद कर दी हो।
पर इससे मेरे पति पर कोई असर नहीं होता। वह एक और झटका देते हैं – और भी जोर से – जिससे मुझे होश आता है। दर्द ने मुझे वापस जगा दिया। मैं उनका हाथ हटाने की कोशिश करने लग जाती हूं – मैंने अपने नाखूनों से उनके हाथ को नोचा, उनकी कलाई को मरोड़ा – लेकिन उन पर कोई असर नहीं हुआ।
लेकिन वह अपना हाथ मेरे मुंह से नहीं हटाते, और जोर-जोर से धक्का लगाने लगते हैं। थप-थप-थप – उसकी कमर मेरी जाँघों से टकरा रही थी। उनके हर धक्के से मुझे दर्द हो रहा था – ऐसा दर्द जैसे कोई गर्म लोहे की सलाख़ मेरे अन्दर घुसा रहा हो। और मैं “आआह.. आआ.. प्लीज़ छोड़ दो.. वरना मैं मर जाऊंगी.. प्लीज़.. रुक जाइए.. मुझसे नहीं होगा..” इतना ही बोल पा रही थी – वह भी उनके हाथ के नीचे दबी आवाज़ में।
लेकिन उससे भी उन पर कोई असर नहीं हो रहा था। उनके चेहरे पर एक अजीब सी क्रूर संतुष्टि थी – जैसे वह इसी दर्द का इंतज़ार कर रहे थे। वह वैसे ही तेज़-तेज़ धक्के लगाए जा रहे थे। अचानक से उनकी पकड़ फिर से मेरे 34″ के बड़े बूब्स पर आकर फिर से मज़बूत हो जाती है। उसने अपने नाखूनों को मेरे बूब्स में गड़ा दिया – इतनी ज़ोर से कि मैं दर्द से तड़प उठी।
अचानक से वह मेरे बूब्स पर जोर-जोर से मारना शुरू करते हैं – थप्पड़-थप्पड़-थप्पड़ – मेरे स्तनों पर, मेरे निप्पल्स पर, मेरे स्तनों के नीचे के हिस्से पर। जिस वजह से मेरा चिल्लाना और भी तेज़ हो जाता है। लेकिन शायद उन्हें मेरे चिल्लाने से मुझ पर रहम की जगह और भी मजा आ रहा था, और वह वैसे ही अपनी रफ्तार बढ़ाते हुए मुझे चोदे जा रहे।
मैं बिस्तर पर फैली हुई थी – मेरे हाथ बेजान से पड़े थे, मेरे पैर काँप रहे थे, मेरे स्तनों पर लाल-लाल निशान पड़ गए थे, और मेरी चूत से खून टपक रहा था। मैं रो रही थी – चुपके से – लेकिन उन्हें इससे कोई मतलब नहीं था।
भाग 5: ऊपर बैठाकर चोदा और सुबह तक का तड़पना
कुछ वक्त बाद वो खुद नीचे बैठते हैं, और मुझे इस पोजीशन में अपने ऊपर कर लेते हैं। उन्होंने मुझे उठाकर अपने लंड पर बैठा लिया – मेरी चूत उनके लंड के ऊपर, मेरा चेहरा उनके चेहरे के सामने, मेरे स्तन उनकी आँखों के सामने।
इस पोजीशन में मुझे उनका लौड़ा अपनी बच्चेदानी तक महसूस हो रहा था। मुझे लगा जैसे वह मेरे पेट को चीरता हुआ मेरे सीने तक पहुँच गया हो। उनका 9 इंच का मोटा लंड मेरी छोटी सी चूत में पूरी तरह समा चुका था – मैं उसके ऊपर बैठी हुई थी, और मेरी चूत की दीवारें उसके लंड को जकड़े हुए थीं।
“अब तुम मेरे लौड़े की सवारी करो,” उसने आदेश दिया – उसकी आवाज़ में कोमलता नहीं, बल्कि एक सख्त हुक्म था।
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू किया। पहले धीमे-धीमे – क्योंकि हर हरकत पर मेरी चूत में दर्द हो रहा था। मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे, मेरे होंठ काँप रहे थे, और मेरा पूरा शरीर दर्द से अकड़ रहा था। लेकिन वह मुझ पर चिल्लाया – “तेज़! और तेज़!”
मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। अब मैं उनके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी – मेरे स्तन उछल रहे थे, मेरे बाल बिखर रहे थे, मेरी चूत से खून और उनके प्री-कम का मिश्रण टपक रहा था। उसने मेरे दोनों स्तनों को अपने हाथों में पकड़ लिया – कसकर, दर्द से – और उन्हें दबाते हुए मुझे और तेज़ी से हिलने को कहा।
“हाँ.. ऐसे.. अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ो.. और ज़ोर से.. मुझे तुम्हारी चूत की गर्माहट चाहिए..” वह बड़बड़ा रहा था, उसकी आँखें बंद थीं, उसके होंठ काँप रहे थे।
मैं उनके लंड पर उछल रही थी – लगभग 10-15 मिनट तक। मेरे पैरों में दर्द हो रहा था, मेरी जांघें काँप रही थीं, मेरी चूत सुन्न हो चुकी थी। लेकिन वह अभी भी नहीं झड़ा था। उसका स्टेमिना देखते ही बनता था – 60 दिन से अधिक का इंतज़ार उसके अन्दर ज्वालामुखी बन चुका था।
तभी उसने मुझे अपने ऊपर से हटा दिया और मुझे फिर से पीठ के बल लिटा दिया। उसने मेरे पैरों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया – जैसे कोई मुर्गी अपने पंख फैलाती है – और फिर से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। इस बार वह और भी जोर से धक्के मार रहा था – ऐसे जैसे कोई क्रोधित बैल अपने सींगों से हमला कर रहा हो।
थप-थप-थप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। मेरी चूत से निकल रहा खून और पानी बिस्तर पर फैल गया था – चादर पूरी तरह भीग चुकी थी। उसके हर धक्के के साथ मेरा पूरा शरीर बिस्तर पर सरक जाता था। मेरा सिर हेडबोर्ड से टकरा रहा था, मेरे बाल चिपक गए थे, मेरा चेहरा आँसुओं और पसीने से तर था।
“प्लीज़.. रुक जाइए.. मैं मर जाऊँगी.. बहुत हो गया..” मैं चिल्ला रही थी, लेकिन मेरी आवाज़ अब फट चुकी थी – एक कर्कश फुसफुसाहट रह गई थी।
उसने मेरी एक न सुनी। उसने अपनी गति और तेज़ कर दी – दीवानों की तरह। मेरी चूत अब पूरी तरह से सुन्न हो चुकी थी, लेकिन मेरा दिमाग अब भी हर धक्के को महसूस कर रहा था – हर धक्का एक अलग ब्रह्मांड की तरह था।
अचानक उसका शरीर अकड़ गया। उसने मेरी जांघों को इतनी जोर से दबाया कि मुझे लगा मेरी हड्डियाँ टूट जाएँगी। उसके मुँह से एक गहरी, जानवर जैसी दहाड़ निकली – “ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!” – और फिर उसने अपना सारा गर्म, गाढ़ा, सफेद वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया। एक धार, दूसरी, तीसरी – मैं अपनी चूत में उसकी गर्माहट को फैलते हुए महसूस कर सकती थी।
पाँच-छह जोरदार स्खलनों के बाद वह ढीला पड़ गया। उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला – “पॉप” की आवाज़ के साथ – और मेरी चूत से उसका वीर्य, मेरा खून, और मेरी चूत का रस बाहर बहने लगा। चादर पर एक बड़ा सा गीला धब्बा बन गया – सफेद और लाल का मिश्रण।
वह मेरे बगल में गिर गया, हाँफ रहा था, संतुष्ट और थका हुआ। उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था, उसके बाल बिखरे हुए थे, लेकिन उसके होंठों पर एक शैतानी मुस्कान थी।
“पहली रात 9 इंच लंड से चुदाई – याद रखोगी?” उसने धीरे से कहा।
मैं कुछ नहीं बोल पाई। मेरा शरीर टूट चुका था, मेरी चूत जल रही थी, मेरे स्तनों पर उनके नाखूनों के निशान थे, और मेरे मुँह में अभी भी उनके लंड का स्वाद था। लेकिन उसकी आँखों में मैंने एक अजीब सी तृप्ति देखी – जैसे उसने वह पा लिया था जो वह चाहता था।
उस रात उसने मुझे तीन बार और चोदा – हर बार एक नई पोजीशन में। कभी कुतिया बनाकर पीछे से, कभी करवट से, कभी मुझे दीवार से सटाकर। मैं रोती रही, तड़पती रही, लेकिन वह रुका नहीं। सुबह के चार बजे जब वह सो गया, तब जाकर मुझे चैन मिला।
मैं काव्या आज भी उस रात को याद करती हूँ – पहली रात 9 इंच लंड से चुदाई का वह दर्द, वह बेरहमी, और वह अजीब सी संतुष्टि जो बाद में मिली। आज मैंने उस दर्द को अपना लिया है – अब मैं अपने पति की 9 इंच चूत और गांड दोनों में लेती हूँ। और हाँ – अब मुझे चुदाई में मज़ा आने लगा है। बहुत मज़ा।