फर्स्ट नाईट में बीवी की टाइट चूत चोदना -हिंदी सेक्स कहानी

⏱️ 22 min read

फर्स्ट नाईट में बीवी की टाइट चूत चोदना – क्या आपने कभी सोचा है कि शादी की पहली रात को जब एक पति अपनी दुल्हन की बिल्कुल नई और कसी हुई चूत में अपना मोटा लंड डालता है, तो वो पल कितना जबरदस्त और यादगार होता है? इस हॉट हिंदी सेक्स स्टोरी में एक पति बताता है कि कैसे उसने फर्स्ट नाईट में बीवी की टाइट चूत चोदना अपना लक्ष्य बनाया। सगाई के बाद से ही वह अपनी मंगेतर से गंदी बातें करता था, मुट्ठी मारता था, और अब सुहागरात की रात आखिरकार आ ही गई। इस कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे उसने अपनी बीवी के कपड़े उतारे, उसकी गीली चूत चाटी, और फिर उसकी बेहद टाइट चूत में अपना लंड डालकर उसे रुलाते हुए भी जमकर चोदा। अगर आप भी फर्स्ट नाईट में बीवी की टाइट चूत चोदना जैसी रियल और एक्सप्लिसिट हिंदी सेक्स स्टोरी ढूंढ रहे हैं, तो ये कहानी आपके लिए ही है।

भाग 1: शादी से पहले की हॉट बातें और बेचैनी

मेरी शादी 2018 के नवंबर में हुई थी। उस समय मैं 27 साल का था, और मेरी मंगेतर (अब पत्नी) 24 साल की। शादी से पहले हमारी मुलाकात कुछ ही बार हुई थी – एक बार सगाई के समय, और एक-दो बार घर पर। लेकिन फोन पर हमारी बातें रात-रात भर चला करती थीं।

हम दोनों जानते थे कि हम एक-दूसरे से शादी करने वाले हैं, इसलिए बातें बहुत जल्दी गंभीर से हटकर गंदी होने लगीं। मैं उससे पूछता – “तुम्हारे स्तन कितने बड़े हैं? तुम्हारी चूत पर बाल हैं या साफ़ है? क्या तुम मुझसे चुदवाओगी?”

वो पहले तो शरमाती, मना करती, बोलती – “तुम्हें शर्म नहीं आती?” लेकिन धीरे-धीरे वो भी मेरी ही तरह गंदी बातें करने लगी। वो बताती कि वो कैसे मुझसे चिपक कर लेटेगी, कैसे मैं उसकी चूत चाटूंगा, कैसे वो मेरा लंड चूसेगी। उसकी बातें सुनते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था।

उस वक्त मैं उससे कहता – “आज तेरी वजह से हाथ से काम करना पड़ा। बस तू आ जा, हरेक बार का हिसाब चुकता कर लूंगा। मैं तुझे ऐसे चोदूंगा कि तू रोएगी और भीख मांगेगी।”

वो हंस कर कह देती – “हां हां, मैं आपका माल बनने वाली हूँ। फिर जैसे चाहे मजा ले लेना। जब तुम मुझे चोदोगे ना, तो मैं भी मस्ती करूंगी।”

ये बातें सुनकर मैं पागल हो जाता था। मैं रात को सोने से पहले अपना लंड हाथ में लेता, उसके बारे में सोचता, और मुट्ठी मारता। कई बार तो मैं एक रात में दो बार मारता। मैं बस उस दिन का इंतज़ार कर रहा था जब मैं उसे असली में चोदूंगा, जब उसकी गीली, गर्म चूत मेरे लंड को स्वीकार करेगी।

फिर शादी तय हो गई। तारीख आ गई – नवंबर की 20 तारीख। मैंने अपनी शादी के कपड़े पहने, घोड़ी पर चढ़ा, बारात लेकर उसके घर गया। जब मैंने उसे लाल लहंगे में देखा, तो मेरा लंड वहीं खड़ा हो गया। मैं बड़ी मुश्किल से उसे कंट्रोल कर पाया। उसके चेहरे पर घूंघट था, लेकिन उसकी आँखें मेरी तरफ देख रही थीं – उनमें वही शरारत थी, वही बेचैनी थी जो मेरे अंदर थी।

शादी की सारी रस्में खत्म हुईं। फेरे हुए, सिंदूर हुआ, विदाई हुई। जब वो हमारे घर आई, तो उसके चेहरे पर शर्म और खुशी दोनों थी। हमारे कमरे को फूलों और बैंड-बाजे से सजाया गया था। मैं उसे कमरे में ले गया, और फिर हम दोनों ने खाना खाया। लेकिन मेरा मन खाने में बिल्कुल नहीं था। मेरा तो बस उसी में लगा था – कब रात हो, कब हम बिस्तर पर जाएं।

घड़ी में रात के करीब 9 बज रहे थे। घर के सब लोग अपने-अपने कमरों में जा चुके थे। अब सिर्फ हम दोनों थे। मैंने अपनी बीवी की तरफ देखा। वो बेड पर बैठी थी, उसने अभी तक अपना लहंगा नहीं उतारा था। वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन उसकी आँखों में डर भी था।

मैं उठा, गया, और कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया। क्लिक की आवाज़ के साथ ही हम दोनों की साँसें तेज हो गईं। अब पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं था।

भाग 2: पहली बार उतारे कपड़े और बढ़ती हुई बेचैनी

मैं उसके पास आया, और धीरे से उसके गाल पर हाथ रखा। उसकी त्वचा बिल्कुल रेशम की तरह मुलायम थी। मैंने उसकी ठोड़ी पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर उठाया, और उसके होंठों पर अपने होंठ टिका दिए। यह हमारा पहला किस था – कम से कम शादी के बाद तो पहला ही था।

वो मेरी बांहों में आ गई। उसके हाथ मेरी पीठ पर थे। मैंने उसे कसकर अपने से लगा लिया। हम दोनों चूम रहे थे – पहले धीरे-धीरे, फिर जोर से, फिर हम अपने होंठों को एक-दूसरे से चिपका कर चूसने लगे।

वो हंस कर बोली – “माल पसंद आया?”

मैंने कहा – “हाँ, बहुत पसंद आया। तुम तो एकदम परफेक्ट माल हो।”

वो बोली – “तो मुँह दिखाई नहीं दोगे?”

मैं भूल ही गया था। मैंने अपनी जेब से एक सोने की अंगूठी निकाली, और धीरे से उसकी उंगली में पहना दी। अंगूठी पर एक छोटा सा हीरा लगा था, जो रोशनी में चमक रहा था। उसने अंगूठी देखी, मुस्कुराई, और मुझे गले लगा लिया।

फिर वो थोड़ी दूर हुई और बोली – “अब मुझे कपड़े चेंज करने हैं। ये लहंगा बहुत भारी है।”

उसने बाजू में रखी अपनी नाइटी उठा ली। वो नाइटी हल्की गुलाबी रंग की थी, जिसमें फीते लगे थे। मैंने उसके हाथ से नाइटी लेकर एक तरफ रख दी।

“कपड़े चेंज करने की क्या जरूरत है?” मैंने कहा। “वैसे भी थोड़ी देर में ये सब उतरने वाले हैं।”

उसकी आँखें फैल गईं। वो बोली – “नहीं नहीं, रुको। मैं खुद उतार लूंगी। मुझे शर्म आ रही है।”

लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी। मैंने उसके लहंगे का नाड़ा खोला, और वो लहंगा उसके शरीर से नीचे गिर गया। फिर मैंने उसके कुर्ते के बटन खोले – एक-एक करके, ऊपर से नीचे तक। उसके हाथ काँप रहे थे, और वो बार-बार मेरा हाथ रोकने की कोशिश कर रही थी।

“अपने आप कपड़े उतारने का आगे बहुत टाइम आएगा,” मैंने कहा। “अभी मुझको उतारने दे।”

मैंने उसका कुर्ता उसके कंधों से उतार दिया। वो अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई थी – और दोनों पिंक कलर के थे। उसकी ब्रा के अंदर उसके स्तन कैद थे, और उसकी पैंटी उसकी गांड पर कसी हुई थी।

“अपने कपड़े भी उतारो,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।

मैंने अपने कपड़े उतारे – पहले शेरवानी, फिर शर्ट, फिर पैंट। मैं एक अंडरवियर में रह गया था। मेरे अंडरवियर में से मेरा लंड बाहर आने को बेताब था – वह इतना सख्त था कि उसने अंडरवियर पर एक टेंट सा बना दिया था।

उसने मेरे लंड को उसके कपड़े के नीचे देखा, और उसकी साँसें तेज हो गईं। उसकी आँखें डर से भरी हुई थीं, लेकिन साथ ही उनमें एक अजीब सी चमक भी थी।

भाग 3: फोरप्ले का जादू और चूत चाटना

मैंने उसे अपनी बांहों में लिया और बेड पर लेट गया। हम दोनों करवट बदल कर एक-दूसरे के सामने थे। मैंने उसके होंठों को चूमा – पहले ऊपर वाले होंठ को, फिर नीचे वाले को। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, और अपने होंठ मेरे होंठों पर दबा दिए।

धीरे-धीरे हम दोनों ने अपने मुँह खोले, और हमारी जीभें एक-दूसरे से मिलने लगीं। पहले हम झिझक रहे थे, लेकिन फिर हम एक-दूसरे के मुँह में जीभ डालने लगे। मैंने उसकी जीभ को अपने मुँह में लिया, और उसे चूसा। उसने भी मेरी जीभ चूसी। हम एक-दूसरे का थूक पी रहे थे – और हमें बहुत मज़ा आ रहा था।

मेरा एक हाथ उसकी पीठ पर था, और दूसरा हाथ मैंने उसकी पैंटी के अंदर डाल दिया। उसकी चूत के होंठ उसकी पैंटी के नीचे से निकल रहे थे – मुलायम, गर्म, और पहले से ही थोड़े गीले। मैंने उसकी चूत को मसलना शुरू कर दिया। उसने धीरे से कराहना शुरू कर दिया।

“आह… रुको… इतनी जल्दी मत करो…” वो बोली, लेकिन उसकी आवाज़ में कोई ताकत नहीं थी।

मैंने उसकी ब्रा का हुक खोला – पीछे से एक हुक था, जो मैंने एक ही झटके में खोल दिया। ब्रा ढीली हुई, और मैंने उसे खींच कर फेंक दिया। उसके स्तन अब पूरी तरह खुले हुए थे – करीब 34 के आकार के, भरे हुए, और उनके बीच एक गहरी दरार थी। उसके निप्पल हल्के भूरे रंग के थे और सख्त हो चुके थे।

मैंने उसके एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया, और चूसना शुरू कर दिया। मैंने अपनी जीभ से उसके निप्पल के चारों तरफ गोल-गोल घुमाया, फिर उसे हल्के से दबाया, फिर पूरे स्तन को अपने मुँह में भर लिया।

“आह… हाँ… ऐसे…” वो कराह उठी।

मैं बारी-बारी से उसके दोनों स्तनों को चूसता रहा। एक को चूसता, तो दूसरे को अपने हाथों से दबाता। उसके हाथ मेरे बालों में उलझ गए थे, और वह मेरे सिर को अपने स्तनों से और जोर से दबा रही थी।

उसके मुँह से अब तेज सिसकारियां निकलने लगी थीं – “आआह… आह… आह… इश्श… आहह!”

यह आवाज़ बहुत ही कामुक थी। मैं और उत्तेजित हो गया। मैंने उसके स्तनों को छोड़ा, और धीरे-धीरे नीचे की तरफ जाने लगा। मैंने उसकी गर्दन को चूमा, उसकी छाती को चाटा, और फिर उसके पेट पर आ गया। उसकी नाभि छोटी और गहरी थी। मैंने उसमें अपनी जीभ डाली, तो वह नागिन की तरह मचल उठी।

“आह… मत करो… मुझे गुदगुदी हो रही है…” वो हँसते-हँसते बोली।

लेकिन मैंने जारी रखा। मैं उसकी नाभि को चाटता रहा, और फिर और नीचे चला गया।

भाग 4: टाइट चूत में लंड डालने की जद्दोजेहद

मैंने उसकी पैंटी को नीचे खिसका दिया। वह कसी हुई थी, उसकी गांड के गालों पर चिपकी हुई थी। मैंने उसे धीरे-धीरे नीचे उतारा – पहले उसके एक पैर से, फिर दूसरे से। अब वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी। उसके शरीर पर कपड़े का एक भी टुकड़ा नहीं था।

मैंने उसकी टांगें चौड़ी कीं, और उसकी चूत को देखा। यह बिल्कुल गुलाबी थी, चिकनी थी, और उस पर एक भी बाल नहीं था। उसने शादी से पहले ही अपनी चूत को साफ करवा लिया था। उसके दोनों होंठ मोटे और गुलाबी थे, और उनके बीच से नमकीन रस टपक रहा था। उसकी चूत से एक हल्की मीठी गंध आ रही थी।

उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रख लिया – शर्म से, या डर से। मैंने उसका हाथ हटा दिया।

“अपनी चूत क्यों ढक रही हो?” मैंने कहा। “यह अब मेरी है।”

मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया, और धीरे-धीरे चाटना शुरू कर दिया। मैंने अपनी जीभ से उसके बाहरी होंठों को सहलाया, फिर अंदर के होंठों को, फिर उसके दाने (क्लिटोरिस) को। वह छोटा सा मटर जैसा दाना उत्तेजना से फूल गया था। मैंने उसे अपने होंठों के बीच लिया और हल्के से चूसा।

“आहहह… उई मम्मी… मर गई… आअह… इस्स्स्स्श!” वह चीख उठी।

उसके हाथ मेरे सिर पर आ गए, और उसने मेरे सिर को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया। वह चाहती थी कि मैं और जोर से चाऊं, और मैंने वही किया। मैंने अपनी पूरी जीभ उसकी चूत के अंदर डाल दी, और अंदर-बाहर करने लगा। उसकी चूत से रस टपक रहा था – नमकीन, गर्म, चिपचिपा। मैंने उसे चाट कर पी लिया।

करीब दस मिनट तक मैं उसकी चूत चाटता रहा। वह दो बार चरमसुख पर आ चुकी थी – उसका शरीर अकड़ जाता, वह काँपती, और फिर ढीली हो जाती। उसके हाथ मेरे बालों से खिसक गए थे, और वह बेड पर बेहोश सी पड़ी थी।

अब मेरी बारी थी। मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया। मेरा 7 इंच का लंड पूरी तरह सख्त था – सीधा खड़ा, मोटा, और उसके सिरे से प्री-कम की बूंदें टपक रही थीं। उसने मेरा लंड देखा, और उसकी आँखें डर से फैल गईं।

“हाय… इतना बड़ा…” वो डर गई। “मैं नहीं ले पाऊंगी… मेरी तो चूत फट ही जाएगी। तुमने तो बोला था कि उंगली जितना है!”

मैं मुस्कुराया – मैंने उसे फोन पर झूठ बोला था। मैं चाहता था कि वो मुझसे शादी करे, और अगर उसे पता होता कि मेरा लंड इतना बड़ा है, तो शायद वो डर जाती। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।

मैं उसके ऊपर चढ़ गया, और उसके होंठों को चूसने लगा। मैंने उसे किस करते हुए उसका ध्यान दूसरी तरफ लगाने की कोशिश की। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी – उसका रस उसकी जांघों पर बह रहा था।

मैंने एक हाथ से उसकी टांगें चौड़ी कीं, और अपने लंड के सिरे को उसकी चूत की दरार में लगा दिया। उसकी चूत की गर्मी मेरे लंड पर महसूस हो रही थी।

“रुको रुको… अभी नहीं!” वो चिल्लाई। “मैं तैयार नहीं हूँ!”

लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी। मैंने एक झटका मारा – और मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में घुस गया।

भाग 5: अंधेरे में जारी रही चुदाई और दर्द की चीखें

“आअहह… मर गई… रुको… आंह… बाहर निकालो… मुझको बहुत दर्द हो रहा है!” वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी।

मैं थोड़ी देर रुका। मैंने उसके सिर को सहलाया, उसके माथे पर किस किया। लेकिन मैंने अपना लंड बाहर नहीं निकाला – यह बेवकूफी होती। अगर मैं बाहर निकालता, तो वह दोबारा कभी मुझे अन्दर नहीं आने देती।

मैंने फिर से धक्का मारा – इस बार थोड़ा और जोर से। मेरा लंड थोड़ा और अंदर चला गया। वह दर्द से कराह रही थी – “आअहह… उह… आह… मर गई… मम्मी… मर गई… आंह… निकालो… मेरी चूत फट गई!”

उसके हाथों ने मेरी कमर को पकड़ लिया – लेकिन मुझे दूर धकेलने के लिए नहीं, बल्कि खुद को ऊपर खींचने के लिए। जैसे ही मैं अंदर धकेलता, वह अपने शरीर को ऊपर की तरफ खिसका लेती। जैसे ही मैं रुकता, वह नीचे आ जाती। हम एक अजीब से खेल में उलझ गए थे – मैं उसकी चूत में अपना लंड घुसाना चाहता था, और वह उसे रोकना चाहती थी।

और तभी – बिजली चली गई। पूरा कमरा घुप्प अंधेरे में डूब गया। इतना अंधेरा था कि अपना हाथ भी नहीं दिख रहा था। शायद इनवर्टर भी डाउन हो गया था – नई बात थी, शादी में इतना भीड़ था कि शायद लोड बढ़ गया था।

अब हम दोनों अंधेरे में ही संघर्ष कर रहे थे। उसकी साँसें तेज थीं, मेरी साँसें भी तेज थीं। मैं अपना लंड अंदर पेलने के लिए जोर लगा रहा था, और वह अपने कूल्हों को ऊपर उठा-उठा कर मेरे लंड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी। हम दोनों बस उसी हालत में फंसे हुए थे – मेरा लंड उसकी चूत में आधा घुसा हुआ, और न ही मैं अंदर जा पा रहा था, न ही वह बाहर निकाल पा रही थी।

करीब पांच मिनट तक यह धक्का-मुक्की चलती रही। हमारी पोजीशन बदल गई थी – मैं कभी उसके ऊपर, तो कभी उसके करवट में। फिर अंधेरे में ही वह बिस्तर के सिरहाने तक पहुंच गई। अब उसके पास और पीछे जाने की जगह नहीं थी। उसकी पीठ बेड के हेडबोर्ड से लग चुकी थी। अब वह और पीछे नहीं जा सकती थी।

अब वक्त आ गया था।

मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया – कसकर, ताकि उसकी चीखें बाहर न जाएं। उसकी आवाज़ें अंदर ही दम तोड़ रही थीं। फिर मैंने एक तेज, जोरदार शॉट मारा।

मेरे लंड ने उसकी चूत की सील तोड़ दी। खून बह निकला – मैं उसकी गर्माहट को अपने लंड पर महसूस कर सकता था।

“उम्म्म… उंग… उंग…” उसकी दबी हुई आवाजें ही बाहर आ रही थीं। उसका पूरा शरीर दर्द से अकड़ गया था। उसके हाथों के नाखून मेरी पीठ में गड़ गए थे – इतनी ताकत से कि मुझे लगा खून निकल आएगा।

लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने धक्के मारना शुरू कर दिए – धीरे-धीरे, एक-एक करके। हर धक्के के साथ वह छटपटाती, कराहती, मुझसे चिपक जाती। वह रो रही थी – मैं उसके आँसुओं को अपने गाल पर महसूस कर सकता था। लेकिन मैं रुका नहीं। यह हमारी पहली रात थी, और मुझे उसे सिखाना था कि वह किसकी है।

मेरा लंड अभी भी पूरा नहीं घुस पाया था – शायद उसकी चूत बहुत टाइट थी, या शायद मैं बहुत मोटा था। लेकिन मैंने वैसे ही धक्के मारना जारी रखा। धीरे-धीरे, आगे-पीछे, आगे-पीछे।

फिर मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने अपने धक्के और तेज कर दिए। उसकी चूत ने मेरे लंड को जकड़ रखा था – इतनी कसकर कि मुझे लगा मैं उसे बाहर नहीं निकाल पाऊंगा। और फिर, अंधेरे में ही, मैं उसकी चूत में झड़ गया। मेरे वीर्य की गर्म धारें उसकी चूत के अंदर फैल गईं।

हम दोनों पसीने से तर थे। मैं उसके ऊपर से उठा, और पास ही लेट गया। वह अपनी चूत पर हाथ रखे हुए थी, और इधर-उधर पलट रही थी – दर्द से छटपटा रही थी। उसके रोने की आवाज़ें अब खुल कर आ रही थीं।

मैंने फोन की लाइट जलाई, और उसकी टांगें फैला कर देखा। उसकी चूत से मेरा वीर्य और उसका रस – दोनों मिलकर – टपक रहे थे। उसके साथ खून भी था – थोड़ा सा, लाल रंग का। मैंने उसकी पैंटी उठाई, और धीरे-धीरे उसकी चूत को साफ़ किया। वह दर्द से सिसक रही थी, लेकिन उसने मुझे रोका नहीं।

धीरे-धीरे, दस-पंद्रह मिनट में, उसकी चूत की जलन कम हो गई। वह मेरी बांहों में आ गई। मैं उसके स्तनों को सहला रहा था, उसकी चूत के होंठों पर हल्के हाथ फेर रहा था, उसके होंठों को चूस रहा था। वह भी मेरा लंड पकड़ कर सहला रही थी – धीरे-धीरे, डरते-डरते, लेकिन सहला रही थी।

भाग 6: रात भर की चुदाई और फिर बदलाव की सुबह

करीब दस मिनट बाद, मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने उसे महसूस किया – वह फिर से सख्त हो रहा था, उसकी नसें फिर से उभर रही थीं।

मैं फिर से उसके ऊपर चढ़ गया।

“नहीं… अब नहीं…” वो डर गई। “बहुत दर्द होता है… प्लीज़, नहीं करो…”

लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी। मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया, उसकी जीभ को अपने मुँह में लिया, उसे शांत किया। कुछ ही पलों में वो मेरा साथ देने लगी – उसके हाथ फिर से मेरी पीठ पर आ गए, और उसने अपने होंठों को मेरे होंठों से दबा दिया।

मैंने उसकी चूचियों को चूसा – बारी-बारी से, एक को मुँह में लेकर, दूसरे को हाथ से दबाते हुए। फिर मैं नीचे गया, और उसकी चूत को फिर से चाटा। इस बार वह पहले से ज्यादा गीली थी – मेरे वीर्य और उसके रस के मिश्रण ने उसे चिकना कर दिया था। मैंने उसे चाटा, और देखा कि अब वह गर्म हो रही थी।

मैंने अपने लंड पर थूक लगाया – क्योंकि ल्यूब हाथ से दूर था – और उसकी चूत में फिर से पेल दिया।

“आह्ह!” वह चिल्ला उठी। “रोना शुरू कर दिया। वह मेरी कमर को नोच रही थी – उसके नाखून मेरी त्वचा में गड़ रहे थे। लेकिन मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया।

मैंने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। उसकी चूत अभी भी बहुत टाइट थी – मेरा लंड पूरा नहीं जा पा रहा था। वह फिर से उसी कोने में पहुंच गई थी, उसकी पीठ बेड के हेडबोर्ड से लगी हुई थी। अब उसके पास और पीछे हटने की जगह नहीं थी।

इस बार मैंने तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। नरमी से काम नहीं चल रहा था – उसे सख्ती से लेना होगा। मैंने उसे एक के बाद एक जोरदार झटके दिए। वह रो रही थी – सिसकियाँ ले रही थी, मेरी कमर को दबा रही थी, मुझसे बचने की कोशिश कर रही थी। लेकिन वह बच नहीं पाई।

थोड़ी देर में मैं फिर से झड़ गया – अपने वीर्य का एक और राउंड उसकी चूत में डाल दिया। उसकी चूत अब हमारे वीर्य और रस से भरी हुई थी। वह बेड पर बेहोश सी पड़ी थी।

बिना बिजली के, हम दोनों पसीने में नहा चुके थे। ऐसा लगा जैसे हमने कोई मैराथन दौड़ लगा ली हो। थोड़ी देर बाद मैं उठा।

“मुझे पेशाब करने जाना है,” उसने कमजोर आवाज़ में कहा।

मैं उसे टॉयलेट ले गया। वह चल नहीं पा रही थी – मुझे उसे कंधे से सहारा देना पड़ा। उसकी चूत में अभी भी दर्द था – वह टेढ़े-मेढ़े पैरों से चल रही थी, अपनी चूत को हाथ से पकड़े हुए। मैंने उसे टॉयलेट बैठाया, बाहर आकर खड़ा हो गया।

वापस आकर, हम दोनों फिर से बेड पर लेट गए। थोड़ी देर हम एक-दूसरे को सहलाते रहे। मेरा हाथ उसकी चूत पर था, उसके होंठ मेरे कंधे पर। मैं उसके बालों को सहला रहा था, और वह मेरे लंड को हल्के हाथों से रगड़ रही थी।

और फिर – मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।

वह मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़े हुए थी, जब उसने महसूस किया कि वह फिर से सख्त हो रहा है। उसकी आँखों में डर फिर से आ गया।

“अब नहीं,” उसने कहा। “वरना मैं चिल्लाऊंगी।”

“चिल्ला ले,” मैंने कहा। “या कुछ भी कर ले। मैं नहीं रुकूंगा।”

और मैंने फिर से उसकी चूत में लंड डाल दिया। वह छटपटा रही थी, लेकिन इस बार उसकी चीखें पहले से कम थीं। वह थक चुकी थी, या शायद अब उसे दर्द के साथ-साथ कुछ और भी महसूस होने लगा था – सुख का एहसास।

मैंने उसकी तीसरी बार चुदाई की। और फिर चौथी बार – हालाँकि चौथी बार मेरा लंड जल्दी ही शांत हो गया। मैं बहुत थक गया था।

हम दोनों एक-दूसरे की बांहों में लिपट कर सो गए।

अगली सुबह जब मैं उठा, तो मेरी बीवी मेरी तरफ पीठ करके सो रही थी। मैंने उसकी गांड पर हाथ रखा – वह गर्म थी। मैंने धीरे से अपना लंड उसकी गांड के गालों के बीच रगड़ा। वह धीरे से कराह उठी, लेकिन सोती रही।

शादी के अगले दिनों में हमारी रोज चुदाई होने लगी। हर रात, और कभी-कभी सुबह भी। करीब दस दिन बाद उसकी चूत में मेरा लंड सही से जाने लगा। उसकी चूत ने मेरे लंड की शक्ल लेना सीख लिया था – अब दर्द नहीं होता था, बल्कि सुख मिलता था।

अब वह चुदाई के लिए खुद मुझसे चिपकने लगी। वह अपनी गांड उठा-उठा कर चुदवाने लगी थी। जब मैं उसे पीछे से चोदता हूँ, तो वह खुद अपने कूल्हों को हिलाती है। वह मेरा लंड चूसती है – पूरे पोर्न स्टार की तरह – उसे अपने मुँह में गहराई तक ले जाती है, अपनी जीभ से उसके चारों तरफ घूमती है, और मुझे पागल कर देती है।

उसका साइज भी बढ़ गया है – खूब चुदाई के बाद उसके स्तन और भी भरे हुए लगने लगे हैं, उसकी गांड और गोल हो गई है। वह अब पहले से ज्यादा सेक्सी लगती है। और सबसे अच्छी बात – वह अब मुझसे प्यार करती है, मेरे लंड से प्यार करती है, और फर्स्ट नाईट में बीवी की टाइट चूत चोदना उसने कभी गलत नहीं कहा। वह जानती है कि वह मेरी है – और मैं जब चाहूँ, उसकी चूत में अपना लंड डाल सकता हूँ।

यह हमारी फर्स्ट नाइट की कहानी है – एक ऐसी रात जिसने हमारी ज़िंदगी बदल दी।

📲 इस कहानी को अपने करीबी दोस्तों के साथ शेयर करें 😉

Leave a Comment