ससुराल में बीवी की चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि जब पति-पत्नी कई दिनों बाद मिलते हैं और ससुराल में बीवी की चुदाई करते हैं, तो वो मौका कितना जबरदस्त होता है? यह गर्म हिंदी सेक्स स्टोरी पूजा नाम की एक गोरी-चिट्टी, साढ़े पांच फिट हाइट वाली सेक्सी बीवी की जुबानी है। इस ससुराल में बीवी की चुदाई वाली कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे एक पति अपनी बीवी से कई दिनों बाद ससुराल में मिला, उसकी गीली चूत चाटी, उसके मोटे दूध दबाए, और फिर पूरी रात उसकी चूत में लंड डालकर मेज पर, बेड पर और 69 पोजीशन में जमकर चोदा। अगर आप ससुराल में बीवी की चुदाई जैसी रियल, रोमांटिक और धमाकेदार हिंदी सेक्स स्टोरी ढूंढ रहे हैं, तो यह कहानी आपके लिए ही है।
भाग 1: कई दिनों बाद मिलने की बेचैनी
मेरा नाम राहुल है और ये कहानी है मेरी बीवी पूजा के साथ ससुराल में हुई जबरदस्त चुदाई की। मैं आपको पहले बता दूँ कि मेरी बीवी पूजा एकदम गोरी-चिट्टी है। उसका रंग बिल्कुल दूध की तरह सफेद है। उसकी हाइट साढ़े पांच फिट है और उसके लंबे बाल उसके चूतड़ों पर ड्रम के जैसे बजाते रहते हैं। उसके होंठ रसीले और पतले-पतले हैं – बिल्कुल गुलाब की पंखुड़ी की तरह। उसकी बॉडी ऐसी है कि पहली बार में ही किसी का भी लंड खड़ा करने के लिए वो एकदम परफेक्ट माल है।
हमारी शादी को चार साल हो चुके थे, लेकिन हमारे बीच आज भी वही जोश और जुनून था जो पहले दिनों में था। पूजा की सेक्स लाइबिडो इतनी तेज है कि हफ्ते में कम से कम चार-पांच बार सेक्स करना हमारी आदत बन चुकी थी। लेकिन कुछ दिनों पहले पूजा अपने पीहर गई थी। वहाँ वह बीमार हो गई – तेज बुखार और कमजोरी के चलते उसे काफी दिनों तक वहीं रुकना पड़ा।
जब वह ठीक हुई, तो मेरी सास को अपने भतीजे की शादी में जाना था। शादी दूसरे शहर में थी, इसलिए सास-ससुर दोनों को वहाँ जाना था। उन्होंने पूजा से कहा कि वो तब तक घर पर रहे – कोई अकेला नहीं होगा। पूजा को वहीं रुकना पड़ा। मेरा साला अपनी बीवी के साथ सीधा शादी में शामिल होने वाला था, तो उससे भी कोई मदद नहीं थी।
कुल मिलाकर, हम दोनों को करीब तीन हफ्ते बाद मिलने का मौका मिल रहा था। तीन हफ्ते! ये हमारे लिए बहुत लंबा समय था। हम दोनों सेक्स के लिए तरस रहे थे। पूजा के बिना मेरा लंड खड़ा रहता था, मैं रातों-रात मूठ मारता था, लेकिन वो सुख उसकी गीली चूत का नहीं था। पूजा भी फोन पर रात-रात भर मुझसे सेक्सी बातें करती, अपनी चूत की याद दिलाती, और मुझे पागल कर देती।
हमारा चुदास का ज्वर बहुत बढ़ गया था। फिर एक दिन पूजा ने फोन किया और एक बड़ा सा सरप्राइज दिया।
भाग 2: फोन पर साज़िश और ससुराल का सफर
“सुनो जान, मैं अकेली हूँ। मम्मी और पापा शादी में जा चुके हैं और भैया भी नहीं है। तुम आ जाओ यहीं।” पूजा की आवाज़ में एक अलग ही शरारत थी।
मेरा दिल धड़कने लगा। मैं अभी उसे कुछ गंदा सा कहने ही वाला था कि तभी पूजा ने जल्दी से कहा – “फोन स्पीकर पर है। मम्मी भी यहीं हैं, लीजिए उनसे भी बात कर लीजिए।”
मैं चौंक गया। मेरी जीभ अभी “रंडी” शब्द कहने को उत्सुक थी, लेकिन मैंने अपने आप को काबू में कर लिया। फिर मेरी सास की आवाज़ आई – “हाँ बेटा, आप आ जाओ। पूजा अकेली है, उसे घर पर अकेला छोड़कर जाना अच्छा नहीं लगता।”
मैंने तुरंत मीठी आवाज़ में कहा, “जी, जी, मैं कल सुबह आ रहा हूँ।” पर मन में मैं मुस्कुरा रहा था। मैं सोच रहा था – सास-ससुर निकल चुके हैं, साला भी नहीं है, पूजा अकेली है। मतलब पूरा घर खाली है। पूरी रात हम बिना किसी डर के चुदाई कर सकते हैं।
उसी शाम मैंने अपना बैग पैक किया। मैंने वियाग्रा की दो टैबलेट्स भी साथ रख लीं – पूरी रात चलने का पूरा प्लान था। मैंने सोचा, पूजा को कई दिनों बाद चोदूंगा तो एक बार में झड़ने का डर था, इसलिए दवा जरूरी थी।
अगली सुबह मैं जल्दी उठा, नहाया, और सीधा ससुराल के लिए निकल पड़ा। रास्ते में मेरा मन पूजा के शरीर के बारे में सोच-सोच कर दीवाना हो रहा था। मैं सोच रहा था – उसके गोरे और मुलायम शरीर पर हाथ फेरूंगा, उसके मोटे स्तनों को दबाऊंगा, उसकी गीली चूत चाटूंगा, और फिर अपना 7 इंच का लंड उसकी चूत में डालकर पूरी रात चोदूंगा।
दोपहर तक मैं ससुराल पहुँच गया।
भाग 3: मिलते ही पागलों जैसा प्यार
मैंने गेट पर घंटी बजाई। अंदर से पूजा की चप्पलों की आवाज़ आई। दरवाज़ा खुला – और पूजा वहाँ खड़ी थी। उसने साधारण सा सलवार-कुर्ता पहना था, उसके बाल खुले हुए थे, उसके चेहरे पर वही प्यारी सी मुस्कान थी। लेकिन उसकी आँखों में आग थी – वही चुदास की आग जो मुझमें भी धधक रही थी।
मैं अंदर ही गया था कि पूजा मुझसे चिपट गई। उसने दरवाज़ा बंद किया और फिर मुझे ऐसे गले लगाया जैसे हम सालों बाद मिले हों। उसके हाथ मेरी पीठ पर थे, उसके नाखून मेरी शर्ट के ऊपर से ही मेरे शरीर को खरोंच रहे थे।
हम दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे को चूमने लगे। उसके होंठ मेरे होंठों पर थे, उसकी जीभ मेरे मुँह के अंदर घुस रही थी। मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे अपने से और कसकर लगा लिया। मेरा हाथ उसकी गांड पर था – उसकी गोरी, मोटी, उभरी हुई गांड। मैंने उसे जोर से दबाया, तो वो मेरे मुँह में कराह उठी।
पूजा मुझे चूम रही थी और मैं उसकी गांड को मसल रहा था। हम दोनों का जबरदस्त चुदाई का मन था, लेकिन अभी दिन का समय था। गेट के बाहर कोई भी आ-जा सकता था। पड़ोसी थे, राहगीर थे। हमने बड़ी मुश्किल से अपने आप को कंट्रोल किया।
पूजा ने मेरे होंठों से अपने होंठ हटाए और मेरी आँखों में देखकर शरारत से मुस्कुराई। उसने आँख मारते हुए कहा, “रात को मेरे कुएँ से अपने पंप से पानी निकालना, मेरे राजा। मेरा कुआँ बहुत सूखा है, पानी की जरूरत है।”
मैंने उसकी गांद पर थप्पड़ मारते हुए कहा, “हाँ, आज तो पंप डालना ही पड़ेगा, रानी। खेत बहुत सूख गया है। इतने दिनों से बारिश नहीं हुई, अब पंप ही काम करेगा।”
हम दोनों जोर से हँसे। फिर हम फिर से एक-दूसरे से चिपक गए और एक और लंबा, गहरा लिप किस किया। इस किस में इतना जुनून था कि मुझे लगा मैं वहीं उसे नीचे बिठाकर चोद दूँगा। लेकिन हमने कंट्रोल किया।
“अब जाओ, चाय बनाओ। रात के लिए ताकत चाहिए।” मैंने उसकी ठोड़ी थामते हुए कहा।
पूजा ने चाय बनाई और मुझे दे दी। फिर वह रात के खाने में लग गई। वो बहुत जल्दी में थी – जल्दी से सब कुछ खत्म करना चाहती थी, ताकि जल्दी से बिस्तर पर जा सके। मैंने उसकी तड़प देखी, तो मुझे और भी बेताबी हो रही थी। मेरा लंड दिन भर से पैंट में जगह नहीं बना पा रहा था।
हमने शाम के 8 बजे तक खाना खा लिया। रसोई समेटने में पूजा ने कुछ ही मिनट लगाए और 8:30 तक वो बेडरूम में आ गई।
भाग 4: बेडरूम में बिजली की तरह चुदाई शुरू
पूजा पहले ही कपड़े चेंज करके आई थी। उसने एक ढीली सी टी-शर्ट और नीचे लोअर पहन रखा था। लेकिन जैसे ही वो कमरे में आई, मैंने देखा कि उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उसके स्तन टी-शर्ट के अंदर ढीले-ढीले झूल रहे थे और उसके निप्पल शर्ट के ऊपर से दिख रहे थे।
उसने कमरे का गेट बंद किया और फिर बिजली की तरह मुझ पर टूट पड़ी। उसने मुझे बेड पर धक्का दिया और मैं पीठ के बल गिर गया। वह मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे बेतहाशा चूमने लगी।
“पागल हो गई हो क्या?” मैंने हँसते हुए कहा।
“हाँ, तुम्हारे लंड के लिए पागल हूँ। इतने दिन हो गए, मेरी चूत तड़प रही है।” उसने कहा।
उसने मेरे होंठ चूसे, मेरे गालों को चूमा, मेरे माथे पर किस किया, मेरी गर्दन को चूसा। फिर वह मेरी छाती पर आ गई। उसने मेरी शर्ट के बटन खोले और मेरी नंगी छाती को चूमना शुरू कर दिया। उसकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी, जिससे मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
वह अपने लोअर के ऊपर से ही अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थी। मैं अपनी पैंट में अपने लंड को सख्त होता महसूस कर सकता था। वो जितनी तेज रगड़ रही थी, उतनी ही मेरी साँसें तेज हो रही थीं।
मैंने उसे रोका और बोला, “मेरी रंडी, ऐसे थोड़ी ही चुदेगी चूत!”
पूजा को रंडी कहना उसे बहुत पसंद है। यह शब्द सुनते ही वो और भी उत्तेजित हो जाती है। उसने मेरे चेहरे पर शरारत भरी नज़र डाली और बोली, “तो फिर चोदो मुझे, मेरे सांड!”
मैंने उसे जल्दी से पलटा और बेड पर पटक दिया। फिर मैंने एक ही झटके में उसके लोअर को चड्डी सहित नीचे उतार दिया। वह अब कमर से नीचे पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूत साफ़ नज़र आ रही थी – बिल्कुल बाल-रहित, गुलाबी, और पहले से ही गीली। उसके रस ने उसकी जांघों को चिकना कर दिया था।
उसके कुछ समझ पाती, मैंने उसके दोनों पैर खोल दिए। फिर मैंने उसकी चूत में अपना मुँह घुसा दिया। मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर डाला और तेजी से हिलाना शुरू कर दिया।
“आह्ह… राहुल… आह्ह… ये क्या कर रहे हो… ऊहह…” पूजा चीख उठी।
मैंने जीभ से उसकी पूरी चूत में हलचल मचा दी। मैंने उसकी चूत को ऊपर से नीचे तक चाटा, उसके बाहरी होंठों को चूसा, और फिर जीभ को अंदर गहराई तक डाल दिया। उसकी चूत का स्वाद था – मीठा, नमकीन, और बहुत ही कामुक।
पूजा “आह-वाह” करती हुई गांड उठाने लगी। उसने चादर को अपनी मुट्ठियों में कसकर भींच लिया और उसके मुँह से बार-बार “आह-आह” की आवाजें निकलने लगीं। मैं अपनी पूरी जीभ को उसकी चूत में गहराई तक डालता और फिर बाहर निकालता। हर बार उसकी चूत से ‘चुप-चुप’ की आवाज़ आती।
पूजा ने मेरे बाल पकड़ लिए और अति उत्तेजना में वह मेरे सिर को अपनी चूत पर और जोर से रगड़ने लगी। वह सिसकियाँ ले रही थी, कराह रही थी, और पागल हो रही थी।
“आह… हाँ, मेरी जान… ऐसे ही करो… कब से तरस रही थी मेरी चूत… आज चूत की प्यास बुझा दो मेरी जान!” पूजा की कामुक आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी।
“ऊंह… आह… हाँ जान… ऐसे ही करो… हाय री मेरी चूत!” वह बोल रही थी।
मैंने अपने हाथ से उसकी चूत के दाने (क्लिटोरिस) को रगड़ना शुरू कर दिया। मेरी दूसरी उंगली उसकी चूत के अंदर थी। मैं उसकी चूत को दोनों तरफ से उत्तेजित कर रहा था – जीभ से अंदर, और उंगली से दाने पर।
बस कुछ ही मिनटों में पूजा चरमसुख पर पहुँच गई। उसका पूरा शरीर अकड़ गया, उसके पैर काँपने लगे, और उसने मेरे बालों को और कसकर पकड़ लिया। “ऊं… आह… उफ़… मर गई… मैं मर गई…” वह चिल्लाई और फिर उसका शरीर ढीला पड़ गया।
मैंने उसकी चूत से निकले रस को अपनी जीभ से चाट लिया। वो रस गाढ़ा और मीठा था। मैंने उसकी चूत को पूरी तरह चाटकर चमका दिया।
फिर मैं हँसा और बोला, “बड़ी जल्दी झड़ गई, रानी। बस इतनी ही चुल्ल थी क्या?”
वह हारी हुई रंडी की तरह लेटी हुई थी, उसकी साँसें तेज़ थीं, उसके शरीर पर पसीना आ रहा था। उसने धीरे से कहा, “बहुत कोशिश की मेरे जान… पर रुका ही नहीं गया। तुम्हारी जीभ का कमाल है।”
मैं बोला, “कोई बात नहीं, जान। अबकी बार देखते हैं कौन जीतता है।”
वह मुस्कुराई और बोली, “आप ही जीत जाना… बस मुझे रौंद डालो। मेरे साथ कोई रहम नहीं करना।”
भाग 5: अब लंड की बारी – चूत में पेल दिया
मुझे भी अब जोश चढ़ चुका था। मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड तो दवा के असर से एकदम कड़क अजगर सा बन चुका था। 7 इंच लंबा, मोटा, और उसकी नसें बाहर निकल आई थीं। मैंने पूजा की टी-शर्ट भी उतार दी और फिर उसकी ब्रा का हुक खोला।
उसके 36 इंच के मोटे-भरे स्तन बाहर निकल आए। उसके निप्पल बादाम के आकार के थे, गहरे गुलाबी रंग के, और पहले से ही सख्त हो चुके थे। मैंने उन्हें अपने हाथों में लिया और जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया। उनकी नरमी और गर्मी ने मुझे दीवाना बना दिया।
पूजा भी मेरे साथ मचलने लगी और मुझसे चिपककर किस करने लगी। उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और जोर-जोर से हिलाने लगी। फिर उसने अपना मुँह मेरे लंड पर रख दिया और उसे चूसकर चिकना कर दिया। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड के सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी।
मैंने उसके दोनों स्तनों के निप्पलों को बारी-बारी से अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। एक को चूसता, तो दूसरे को अपनी उंगलियों से मसलता। पूजा फिर से गरम हो गई। वह गाली देती हुई बोली – “अपना लौड़ा डाल दे, मादरचोद! अब और इंतज़ार मत करा!”
मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया, ताकि उसकी चूत थोड़ी ऊपर की तरफ उठ जाए। फिर मैंने अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत के बीच में रगड़ना शुरू कर दिया। वह बेचैन हो गई। उसने अपनी चूत को और फैलाना शुरू कर दिया।
मैंने धीरे-धीरे चूत के दाने को रगड़ा और फिर अपने लंड के टोपे को उसकी चूत में ठूंस दिया।
“आह्ह!” पूजा चीख उठी, लेकिन उसकी आँखों में खुशी थी।
मैंने उसकी आँखों में देखा और धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए। पहले धीरे, फिर थोड़ा तेज। कुछ ही धक्कों में मैंने अपना पूरा 7 इंच का लंड उसकी चूत में पेल दिया।
“आह… उफ़… आह…” पूजा की कामुक सिसकारियाँ पूरे कमरे में फैल गईं।
हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में प्यार से देख रहे थे। हमारे होंठ आपस में जुड़ गए और हम गहरे लिप किस में खो गए। पूजा ने अपने पैर और फैला दिए ताकि मैं उसे बिना किसी रुकावट के चोद सकूँ।
मैं लगातार अपने लंड को उसकी चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। उसकी चूत बहुत गीली थी, इसलिए हर धक्के के साथ ‘चुप-चुप’ की आवाज़ आ रही थी। मेरे अंडकोष उसकी गांड से टकरा रहे थे और ‘थप-थप’ कर रहे थे।
पूजा मेरे चेहरे को सहला रही थी, मेरे बालों में हाथ फेर रही थी, और “ऊंह… आह… उफ़… ओह…” करते हुए मुझे किस कर रही थी।
कुछ देर बाद पूजा ने कहा, “मैं ऊपर आऊँगी।”
मैं पीठ के बल लेट गया। पूजा मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ा और धीरे से अपनी चूत में डाला। फिर वह ऊपर-नीचे होने लगी। वह जितनी तेज उछल रही थी, उसके स्तन उतनी ही तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने उसके उछलते स्तनों को अपने हाथों में लिया और उन्हें दबाने लगा।
कभी वह उछल-उछल कर लंड लेती, तो कभी अपनी गांड को गोल-गोल घुमाकर लंड लेने लगती। हर तरीके से वो मेरे लंड को अपनी चूत में महसूस कर रही थी।
थोड़ी देर बाद वह थक गई और मेरे सीने से चिपक गई। मैंने दोनों हाथों से उसकी गांड पकड़ी और लंड को तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। मेरे झटके इतने तेज थे कि पूजा रोमांचित हो उठी।
“हाँ, राजा… चोदो मुझे… मेरी जान, पूरा अन्दर तक रगड़ दो… आह!” वह चिल्ला रही थी।
“साली बहुत दिनों से लंड के लिए तड़प रही थी मेरी चूत!” मैंने कहा।
“तो ले ले न फिर… आह… और ले, मेरी रंडी… आह!” मैं झटके देते हुए लंड को और गहराई तक घुसाने लगा।
पूजा मेरे ये कड़क झटके सहन नहीं कर पाई। वह फिर से चरमसुख पर आ गई। उसका शरीर काँप उठा, उसने मुझे कसकर गले लगा लिया, और फिर बेहोश सी हो गई।
भाग 6: 69 और मेज पर जबरदस्त समापन
मैंने पूजा को पलटा और हम 69 पोजीशन में आ गए। वह ऊपर थी, मैं नीचे था। उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे आइसक्रीम चूसते हैं। मैंने भी उसकी चूत और गांड में अपनी जीभ डालकर चाटना शुरू कर दिया।
वह मेरे लंड को हिला रही थी, और मैं उसकी चूत के हर हिस्से को अपनी जीभ से साफ कर रहा था। मैंने बीच-बीच में अपनी उंगली उसकी गांड में भी डाली, जिससे वह और जोर से मेरा लंड चूसने लगी।
कुछ देर तक यही सिलसिला चला। फिर मैंने पूजा को उठाया और कमरे के दूसरे कोने में रखी मेज की तरफ ले गया। मैंने उसकी कमर से ऊपर का भाग मेज पर टिका दिया। उसके पैर फर्श पर थे – यानी वह आधी खड़ी और आधी लेटी हुई थी। यह पोजीशन बहुत ही कामुक थी।
मैंने एक पैर मेज पर रखा और अपने लंड को उसकी चूत पर सैट किया। फिर एक तेज झटके से मैंने पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
पूजा हड़बड़ाई, लेकिन फिर शांत हो गई। अब मैं पूरी ताकत से उसकी चूत को ठोक रहा था। मेरे धक्के इतने जोरदार थे कि मेज हिलने की आवाज़ आ रही थी। हमारी सांसों की तेज आवाज़ें, चुदाई की ‘थप-थप’, और पूजा की चीखें – सब कुछ पूरे घर में गूंज रहा था।
हम खुलकर मज़े ले रहे थे। घर के सारे गेट बंद थे, कोई नहीं था। हमारी आवाज़ें बाहर नहीं जा रही थीं।
मैं उसे मेज पर ऐसे चोद रहा था जैसे मैं उसकी चूत का कचूमर निकाल देना चाहता हूँ। हर धक्के के साथ पूजा के मुँह से “आह… ओह… उफ़…” की आवाजें निकल रही थीं।
पूजा अब बेसुध हो रही थी। वह अंट-शंट बकने लगी – “आह… हाँ… चोदो मुझे… मेरी चूत फाड़ दो, बहन के लौड़े!…”
मैं समझ गया कि वह किसी भी पल ढेर हो सकती है। मैंने आगे झुककर तेजी से लंड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैं उसके एक स्तन को जोर से मसल रहा था और उसकी चूत में लंड पेल रहा था।
“शाबास, मेरे लंड… अपनी चूत का कचूमर बना दे, मादरचोद… आह… जोर से चोद, भोसड़ी वाले!” पूजा पागलों की तरह चिल्ला रही थी।
और फिर अगले ही पल उसका शरीर अकड़ गया। वह जोर से चिल्लाई और फिर उसके पैर काँपने लगे। वह मेज से नीचे गिरने लगी, लेकिन मैंने उसे जोर से मेज पर दबा दिया।
मैंने दो-चार जबरदस्त झटके लगाए और फिर मैं भी चरमसुख पर आ गया। मेरे वीर्य की गर्म और गाढ़ी धारें पूजा की चूत में गहराई तक जा घुसीं। मैंने अपनी पूरी पिचकारी उसके अंदर मार दी और फिर उसके ऊपर ही गिर गया।
हम दोनों मेज पर ही लेटे थे। पूजा मदहोश थी – उसकी आँखें खुली थीं, लेकिन उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसमें बिल्कुल भी ताकत नहीं बची थी। मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया।
मैंने उसे पानी पिलाया। उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। उसमें कपड़े पहनने जितनी ताकत नहीं थी। मैंने भी कपड़े नहीं पहने।
मेरा लंड अभी तक शांत नहीं हुआ था। मैंने उसे करवट से लिटाया और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। फिर मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया, और हम दोनों नंगे ही सो गए। सारी रात मेरा लंड उसकी चूत में घुसा रहा।
हम दोनों को इतनी गहरी नींद आई कि सुबह ही आँख खुली। सुबह जब मैं उठा, तो पूजा मेरी छाती पर सिर रखकर सो रही थी। उसके चेहरे पर वही प्यारी सी मुस्कान थी, लेकिन उसके शरीर पर रात की चुदाई के निशान थे – मेरे काटे के निशान, मेरे थप्पड़ के लाल निशान।
उस सुबह हमने फिर से सेक्स किया – धीरे-धीरे, प्यार से, एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए। यह ससुराल में बीवी की चुदाई का वो रियल और धमाकेदार अनुभव था जिसे हम दोनों बहुत दिनों तक नहीं भूलेंगे।