गांड और चूत की आराम से चुदाई – रवि और पूजा की गर्म हिंदी सेक्स स्टोरी

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गांड और चूत की चुदाई की वह गर्म सुबह जब रवि और उसकी प्यारी बीवी पूजा ने जल्दबाजी से दूर रहकर पूरे आराम से एक-दूसरे का भरपूर मजा लिया। इस हिंदी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कैसे पूजा ने अपनी साफ-सुथरी चूत और तैयार गांड से रवि को बुलाया, कैसे रवि ने धीरे-धीरे प्यार से पहले चूत चोदी, फिर वैसलीन से तैयारी करके उसकी टाइट गांड में अपना साढ़े छह इंच का मोटा लंड घुसाया, और कैसे दोनों ने छेद बदल-बदल कर, ऊपर बैठकर, और तकिये के सहारे गहरी गांड चुदाई का आनंद लिया। गांड और चूत की चुदाई के इस किस्से में आप देखेंगे कि कैसे एक पति-पत्नी हफ्ते में एक बार अपनी सेक्स लाइफ को खास बनाते हैं, कैसे पूजा अपनी गांड में रवि का पूरा लंड लेकर मदहोश हो जाती है, और कैसे आखिर में रवि अपना गाढ़ा सफेद वीर्य पूजा की गांड में डालकर उसकी प्यास बुझाता है। अगर आप गांड और चूत की चुदाई जैसी धीमी, रोमांटिक और फिर भी बेहद गर्म हिंदी सेक्स कहानियां ढूंढ रहे हैं, तो यह कहानी आपके लिए ही है।

भाग 1: आराम से चुदाई का मजा – पूजा की चूत ने बुलाया

मेरा नाम रवि कुमार है। मैं और मेरी प्यारी बीवी पूजा – हम दोनों का सेक्स के प्रति एक साफ नियम है। हम जल्दबाजी में की गई चुदाई कभी पसंद नहीं करते। नहीं, हमें वो पांच मिनट की हड़बड़ी वाली चुदाई पसंद नहीं जहां आदमी बस लंड डालकर दस झटके मारे और निकल जाए। हम दोनों अपनी चुदाई बहुत ही आराम से, धीरे-धीरे, पूरा मजा लेते हुए करते हैं। कभी-कभी तो हमारा एक राउंड पूरा एक घंटे से भी ज्यादा चलता है। मेरी प्यारी बीवी पूजा को मेरे लंड से अपनी चूत चुदवाना बहुत ज्यादा पसंद है। वो कहती है, “तेरे लंड के बिना मेरी चूत अधूरी है।” और मैं मानता हूँ – उसकी गीली, गर्म, कसी हुई चूत मेरे लंड के लिए स्वर्ग से कम नहीं है।

लेकिन कुछ महीनों पहले एक और नया रास्ता खुल गया। जबसे मैंने पूजा की गांड का उद्घाटन किया है, तबसे तो उसे अपनी गांड मेरे लंड से चुदवाना भी बहुत पसंद हो गया है। सच कहूं तो गांड चोदने में बहुत मजा आता है। चूत की तुलना में गांड ज्यादा टाइट होती है, ज्यादा गर्म होती है, और जब तुम धीरे-धीरे उस टाइट छेद में अपना लंड डालते हो तो वो सक्शन… वो पकड़… वो अहसास… शब्दों में बयां नहीं कर सकता। पूजा अब मुझसे हफ्ते में एक-दो बार अपनी गांड चुदवा लेती है। हमने तय कर रखा है – हर बुधवार और हर शनिवार को गांड चोदने का दिन है। और उस दिन पूजा सुबह उठते ही नहा लेती है, अपनी गांड को अंदर से अच्छी तरह साफ करती है, और बिल्कुल तैयार रहती है। वो जानती है कि उस दिन उसकी गांड मेरे लंड की मेजबानी करने वाली है।

वो 17 जनवरी का दिन था। सर्दी का मौसम था, बाहर हल्की धुंध छाई हुई थी। सुबह के साढ़े नौ बज रहे थे। हमारी बेटी कॉलेज के लिए निकल गई – उसका टाइम था सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक। घर में हम दोनों अकेले थे। बिल्कुल अकेले। मैं सामने वाले रूम में बैठा अखबार पढ़ रहा था और चाय की चुस्कियां ले रहा था। दिमाग में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे – ऑफिस के काम, बिल भुगतान, बेटी की पढ़ाई। लेकिन तभी बेडरूम से मेरी प्यारी बीवी पूजा की मीठी आवाज आई, “रवि… जरा अन्दर आओ ना।”

आवाज में एक अजीब सी चमक थी। मैं अखबार एक तरफ रखकर उठा। मेरा दिल थोड़ा तेज धड़क रहा था – पता नहीं क्यों, लेकिन कुछ कह रहा था कि आज कुछ खास होने वाला है। मैं धीरे-धीरे बेडरूम की तरफ बढ़ा। दरवाजा खुला था, मैंने अन्दर कदम रखा – और जो नजारा देखा, उसने मेरे होश उड़ा दिए। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। ऐसा सैक्सी और लंड खड़ा कर देने वाला नजारा मैंने बहुत दिनों में नहीं देखा था।

भाग 2: चूत में लंड का पहला धक्का

पूजा ने अपना एक पैर जमीन पर टिकाया हुआ था। दूसरा पैर उसने घुटने से मोड़कर बेड पर रखा हुआ था – जैसे कोई सुन्दर मूर्ति हो। उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट को सावधानी से उठाकर अपनी पीठ पर लपेट लिया था, जिससे उसकी कमर से नीचे का पूरा हिस्सा पूरी तरह खुला हुआ था। उसने अपनी चड्डी (पैंटी) निकालकर बाजू में रख दी थी। वो इस वक्त मोबाइल में किसी से चैटिंग कर रही थी, लेकिन उसका चेहरा मेरी तरफ झुका हुआ था – उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी।

दो दिन पहले उसने अपनी चूत को पूरी तरह शेव करवा लिया था। बिल्कुल साफ-सुथरी, बिना एक बाल के, चिकनी और गुलाबी – उसकी चूत बिल्कुल एक कली की तरह मेरे लंड को बुला रही थी। और उसके चूतड़… हे भगवान। पूजा के गोरे-गोरे, भरे-पूरे चूतड़ बिल्कुल सेब की तरह गोल और मुलायम थे। उनके बीच उसकी चूत की गुलाबी फांकें और उसके ठीक ऊपर उसकी गांड का छोटा सा छेद – दोनों मेरे लंड को बेसब्री से बुला रहे थे। वो सफाचट चूत, वो मदमस्त नजारा… आहा! देखते ही देखते मेरा लंड विशाल रूप लेने लगा। मेरे अंडरवियर के अन्दर वह फड़फड़ा रहा था, जैसे कोई जानवर पिंजरे में कैद हो।

फिर क्या था? मैंने झट से अपनी पैंट का हुक खोला, जिपर खोल दिया। दो सेकंड की देरी नहीं की। अपने दायें हाथ को मैंने पूजा के गोरे, मुलायम चूतड़ पर रख दिया – उसकी त्वचा की गर्माहट मेरे हाथों में उतर गई। बायें हाथ से मैंने अपनी पैंट और चड्डी एक साथ नीचे उतार दी। अब तक मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। साढ़े छह इंच लंबा, ढाई इंच मोटा, नसों से लदा हुआ, सुपारी लाल और तनी हुई। उस पर प्री-कम की एक बूंद चमक रही थी – बस अब घुसने का इंतज़ार था।

मेरा हाथ जैसे ही पूजा की गांड पर पड़ा, उसकी चूत में हलचल मच गई। मैंने महसूस किया – वह गीली हो रही थी। मेरा लंड खुद ही झटके मारने लगा, जैसे कोई अश्व घास के मैदान में दौड़ने को बेचैन हो। पूजा मेरा लंड अपनी चूत में लेने के लिए उतावली थी – वह अपनी गोरी गांड हिला-हिलाकर इशारा कर रही थी। “क्या कर रहे हो जल्दी करो… मुझे चाहिए,” उसकी आँखें कह रही थीं।

मैंने अपने हाथ पर थूक लगाया और अपने लंड पर अच्छी तरह मल दिया। चिकनाई थोड़ी थी, लेकिन काम चलाऊ थी। फिर मैंने अपने दोनों हाथों से पूजा के दोनों चूतड़ों को फैला दिया – उन्हें अलग किया, जिससे उसकी चूत और गांड दोनों साफ दिखने लगे। अब मेरे सामने पूजा की खुली हुई गुलाबी चूत थी – उसके होंठ गीले और फैले हुए, उनके बीच से एक नदी की तरह रस टपक रहा था। उसकी मीठी, नमकीन, मादक खुशबू मेरी नाक तक आ रही थी।

मैंने अपना साढ़े छह इंच का मोटा लंड उसकी चूत के दरवाजे पर रखा, एक गहरी सांस ली, और एक ही झटके में जड़ तक घुसा दिया। “आह्ह्ह!” पूजा के मुँह से एक हल्की, मदमस्त सी चीख निकली। उसने मोबाइल एक तरफ फेंक दिया और बेड पर गिर गई – उसके हाथ बेड की चादर पकड़ रहे थे। मैंने उसकी चूत को अपने लंड से भर दिया था। वह अब मेरी थी – उस पल पूरी तरह मेरी।

भाग 3: वैसलीन से तैयारी – चूत से गांड तक का सफर

मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। आराम से। बिल्कुल आराम से। जल्दबाजी नहीं थी। मैं हर धक्के का स्वाद ले रहा था – कैसे मेरा लंड उसकी गीली, गर्म चूत में अन्दर जाता है, और कैसे उसकी चूत मेरे लंड को बाहर निकलते समय पकड़े रहती है। “थप-थप” की हल्की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। साथ ही, मैंने अपने दोनों हाथों से उसके दोनों स्तनों को दबाना, मसलना शुरू कर दिया। पूजा के 36 साइज के स्तन – मुलायम, गर्म, बिल्कुल भरे हुए। उनके निप्पल तने हुए थे, काले नहीं बल्कि सुंदर गहरे भूरे रंग के। मैंने उन्हें अपनी उँगलियों के बीच दबाया, घुमाया, खिंचोरी की। पूजा के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं – “इस्स… आह… उह… रवि… धीरे… लेकिन अच्छा लग रहा है…”

लगभग दस मिनट तक हमारी चूत चुदाई चलती रही। मैं पूरी तरह से उसमें खो गया था।

तभी अचानक पूजा को कुछ याद आया। उसने मेरे लंड को अपनी चूत में लेते हुए ही मुझसे कहा – उसकी आवाज में थोड़ी शरारत थी – “रुको… लगता है तुम कुछ भूल गए।”

मैंने लंड पेलते हुए, बिना रुके कहा, “क्या भूल गया हूँ मैं?”

“आज कौन सा दिन है?”

“मुझे याद नहीं।”

वह हँसी। “भूल गए क्या? आज गांड चोदने का दिन है। बुधवार है।”

मैं सच में भूल गया था। हमने हफ्ते में एक बार गांड चोदने के दिन तय किए थे – शनिवार। और आज शनिवार था। आज गांड बजाने का दिन था। मैंने अपना लंड पूजा की चूत में से बाहर निकाला – वह पूरी तरह उसके रस से लथपथ था। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “तुमने भी तो भूल कर अपनी चूत खोल दी थी, तो मैंने चूत में पेल दिया।”

पूजा हंस पड़ी। उसकी हँसी में एक अलग ही आज़ादी थी। “मुझे तो याद था, रवि। बस देख रही थी कि तुमको कौन सा छेद याद रहता है – चूत या गांड।”

“तो मैं गांड से शुरू करूँ अब?” मैंने पूछा।

“हां, लेकिन पहले वैसलीन लगाओ। बिना वैसलीन के मत मारना – पिछली बार बहुत दर्द हुआ था।”

मैं अपना लंड बाहर ही निकाल रहा था कि पूजा ने बगल में रखी वैसलीन की डिब्बी मेरे हाथ में दे दी। उसने पहले से ही तैयारी कर रखी थी। वह इस दिन का इंतज़ार कर रही थी। अब वह बेड पर पीठ के बल लेट गई – लेकिन इस बार उसकी गांड बिल्कुल बेड के किनारे पर थी। उसने अपना दाँया पैर सीधा कर दिया और मेरे शरीर से लगा दिया। बाँया पैर उसने बेड के किनारे लंबा कर दिया। इस पोजीशन में उसकी गांड पूरी तरह मेरे सामने खुल रही थी।

मैंने वैसलीन की डिब्बी खोली। पहली बार में थोड़ी – उंगली पर लेकर पूजा के चूतड़ फैलाए। उसकी गांड का छेद – छोटा, गुलाबी, बिल्कुल टाइट – मेरे सामने था। मैंने धीरे से उस पर वैसलीन लगाई, फिर अपनी उंगली गांड के अन्दर डाल दी। “आह्ह…” पूजा सिहर उठी। मैंने अपनी उंगली आराम से अन्दर-बाहर करना शुरू किया – धीरे-धीरे, प्यार से। लगभग दो मिनट तक उसकी गांड को चिकनाई से ढीला किया। फिर दूसरी उंगली भी डाल दी। पूजा की साँसें तेज हो गईं। उसने मेरी कलाई पकड़ ली – दर्द से नहीं, बल्कि उत्तेजना से। “बस अब… हो गया… लंड डालो,” वो फुसफुसाई।

मैंने अपनी उंगलियाँ बाहर निकालीं। अब एक हाथ से मैंने पूजा के चूतड़ों को फैलाकर रख दिया – उसकी गांड का छेद साफ दिख रहा था। पूजा ने खुद भी एक हाथ से अपना चूतड़ फैला रखा था – वह चाह रही थी कि मैं बिना किसी रुकावट के अन्दर जाऊं। मैंने अपना मोटा, सख्त लंड दाँये हाथ में पकड़ा, उसकी सुपारी पर थोड़ी और वैसलीन लगाई, और फिर उसे पूजा की गांड के छेद पर टिका दिया।

दबाव दिया। पहले तो कुछ नहीं हुआ – उसकी गांड ने मना कर दिया। फिर मैंने थोड़ा और जोर दिया। अचानक उसका गुदा का छेद खुला और मेरे लंड की सुपारी अन्दर घुस गई। “आह्ह्ह!” पूजा के मुँह से दर्द भरी कराह निकली। उसने अपने होंठ काट लिए। मैं थोड़ा रुका – उसे एडजस्ट होने दिया। लगभग 30 सेकंड बाद, उसने अपनी सांसें सामान्य कीं और बोली, “और डालो… धीरे से… लेकिन डालो।”

मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी गांड फैलाए रखी और लंड को आगे धकेला। धीरे-धीरे। एक इंच… दो इंच… मैं रुक रहा था, फिर बढ़ा रहा था। उसकी गांड की दीवारें मेरे लंड को इतनी कसकर पकड़ रही थीं जैसे उसे छोड़ना ही नहीं चाहती थीं। तीन इंच… मेरा आधा लंड अब उसकी गांड के अन्दर था। पूजा दर्द और सुख दोनों से कराह रही थी। उसका चेहरा बेड की तरफ था, लेकिन उसकी आँखें बंद थीं। मैंने पूछा, “रुकूं क्या?”

“नहीं… आगे बढ़ो। मैं झेल लूंगी। पूरा डालो।”

एक और ठोकर – और मेरा पूरा लंड, साढ़े छह इंच, उसकी गांड के अन्दर तक चला गया। मेरे अंडकोष उसकी चूत से चिपक गए थे। पूजा चीखी नहीं, बल्कि उसने एक लंबी, गहरी साँस ली – जैसे कोई डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज हो। “बस… थोड़ी देर ऐसे ही रहने दो… पूरा भर गया है अन्दर…”

मैंने अपना लंड उसकी गांड में डाला रखा, हिला नहीं। उसे आराम दिया। करीब एक मिनट बाद, पूजा ने खुद अपनी गांड हिलानी शुरू कर दी। वह अब तैयार थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए – पहले धीमी गति से, फिर थोड़ा तेज। पूजा की गांड अब मेरे लंड को एडजस्ट कर चुकी थी। “हाँ… यह सही है… धीरे-धीरे चोदो… गांड का मजा ही कुछ और है,” वो बुदबुदाई।

भाग 4: ऊपर बैठकर गांड चुदवाने का अलग ही मजा

करीब दस मिनट तक मैंने उसकी गांड चोदी। कभी पूरा लंड अन्दर, कभी आधा बाहर। उसकी गांड अब पहले से ढीली हो गई थी – लेकिन फिर भी बहुत टाइट। मैं चाहता था कि और भी अन्दर जाऊं, लेकिन उसकी गांड की दीवारें मुझे रोक रही थीं। तभी पूजा ने अपनी गांड में से मेरा लंड निकाला – उसने मुझे पीछे खिसकने को कहा। फिर वह खुद उठी, अपनी पीठ मेरी तरफ की, और बोली, “अब मैं तुम्हारे ऊपर बैठकर चोदूंगी।”

मैं बेड पर पीठ के बल लेट गया। पूजा आई और मेरी कमर के ऊपर आकर बैठ गई – लेकिन इस बार चूत के बजाय गांड पर। उसने अपने बांये हाथ में मेरा लंड पकड़ा, उसे अपनी गांड के छेद पर सटाया, और फिर धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी। जैसे ही लंड का सुपारा उसकी गांड में घुसा, उसने अपने दोनों हाथ मेरे सीने पर रख दिए और अपना पूरा वजन नीचे दबा दिया। मेरा पूरा लंड एक बार में उसकी गांड में चला गया। “आह्ह… मर गई… पर बहुत अच्छा लग रहा है,” वो कराह उठी।

फिर उसने धीरे-धीरे अपनी गांड ऊपर-नीचे करना शुरू किया – जैसे घोड़ी पर सवार कोई अप्सरा हो। उसके स्तन मेरे सामने थिरक रहे थे – मैंने उन्हें अपने हाथों में भर लिया। उसके निप्पल मेरे हाथों से चूसने की भीख मांग रहे थे, लेकिन मैं उन्हें दबा रहा था, मसल रहा था। पूजा अब पूरी तरह मदहोश थी। वह अपनी गांड को जोर-जोर से ऊपर-नीचे कर रही थी, मेरा लंड उसकी गांड के अन्दर घिस रहा था, और वह बस “हाँ-हाँ-हाँ” कर रही थी – जैसे कोई मंत्र हो।

करीब पंद्रह मिनट तक वह मेरे ऊपर बैठकर गांड चुदवाती रही। फिर वह थक गई। वह मेरे ऊपर लेट गई – उसकी पीठ मेरी छाती पर, मेरा लंड अब भी उसकी गांड में घुसा हुआ था। मैंने अपने हाथों से उसकी कमर पकड़ी और नीचे से ऊपर को धक्के मारने लगा – अब मैं उसे नीचे से चोद रहा था। यह पोजीशन बहुत इंटीमेट थी – हमारे शरीर पूरी तरह लिपटे हुए थे, और मेरा लंड उसकी गांड में गहराई तक जा रहा था।

भाग 5: तकिये के सहारे गहरी गांड चुदाई

अब पूजा ने पोजीशन बदली। वह औंधी लेट गई – पेट के बल – और मैंने उसके नीचे दो बड़े-बड़े तकिये रख दिए, जिससे उसकी गांड ऊपर उठ गई। उसने अपने दोनों पैर थोड़े फैला दिए, और मैं उसकी गांड के पीछे घुटनों के बल बैठ गया। अब उसकी गांड बिल्कुल सामने थी – खुली हुई, तैयार, चिकनी। मैंने अपना लंड उसके छेद पर रखा और एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर डाल दिया।

“आह्ह… थोड़ा धीरे… यार… मैं तुम्हारी ही हूँ, बाजार वाली रंडी नहीं हूँ,” पूजा चीखी। उसकी इस बात पर मैं हँस दिया। वह सही कह रही थी – मैं उत्साह में थोड़ा ज्यादा ही जोर लगा बैठा।

“माफ कर, जान,” मैंने कहा और फिर धीरे-धीरे, कोमलता से, बिल्कुल प्यार से उसकी गांड चोदने लगा – जैसे कोई नाजुक चीज़ को छू रहा हो। “खरामा-खरामा” – धीमी, गहरी, संतुष्टिदायक चुदाई। इस पोजीशन में मेरा लंड उसकी गांड में और भी गहराई तक जा रहा था। पूजा के मुँह से बस “उम्म… उह… आह…” की आवाजें आ रही थीं। वह बिल्कुल शांत थी – पूरी तरह समर्पित।

भाग 6: गांड और चूत की चुदाई – दोनों छेदों का एक साथ लुत्फ

अब मैंने उसे पलट दिया। अब वह अपनी पीठ के बल लेटी थी, लेकिन मैंने उसके नीचे फिर से तकिये रख दिए – इस बार उसकी गांड के नीचे, ताकि वह ऊपर उठ जाए। उसने अपने दोनों पैर दोनों तरफ फैला दिए। अब मेरे सामने दोनों छेद थे – ऊपर उसकी चूत, नीचे उसकी गांड। दोनों ही मेरे लंड को बुला रहे थे। दोनों ही गीले और तैयार थे। यह नजारा देखते ही मैं सोच में पड़ गया – पहले किस छेद में डालूँ?

चूत तो मैं हर रोज चोदता था। लेकिन गांड हफ्ते में सिर्फ एक बार ही मिलती थी। यह सोच कर मैंने अपना लंड गांड में ही डालना अच्छा समझा। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा चेहरा उसके चेहरे के सामने था – हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। मैंने अपना लंड उसकी गांड में डाला और धीरे-धीरे चोदने लगा। साथ ही, मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया और चूसने लगा। पूजा ने भी मुझे जवाब दिया – हमारी जीभें एक दूसरे से लड़ रही थीं।

फिर पूजा ने अपने हाथ से अपने एक स्तन को उठाया और मेरे मुँह की तरफ ले गई। मैंने उसके निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। वह सिसकारी लेने लगी – “इस्स… आह… उह… और जोर से चूस… और जोर से चोद… मेरी गांड जोर से चोद…”

गांड और चूत की चुदाई का यह दृश्य बिल्कुल परफेक्ट था। मैं एक साथ उसकी गांड चोद रहा था, उसके स्तन चूस रहा था, और उसके होंठों को चूम रहा था। हमारे शरीर एक दूसरे में पिघल रहे थे। पूजा अपनी गांड बार-बार ऊपर उठा रही थी, मेरे लंड को और गहराई तक ले रही थी। वह पागल हो रही थी – “हाँ… हाँ… बस यही चाहिए था मुझे… तुम्हारा लंड मेरी गांड में… इतना अच्छा लग रहा है रवि…”

भाग 7: गांड में वीर्य – पूजा की प्यास बुझी

करीब एक घंटे से ज्यादा हो चुका था। मैं थक गया था, पूजा की हालत तो बिल्कुल खराब हो चुकी थी – उसके शरीर पर पसीने की धारें बह रही थीं, उसके बाल बिखर गए थे, उसकी आँखों में नशा था। मैंने उससे पूछा – मेरी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी क्योंकि मैं झड़ने के बिल्कुल करीब था – “वीर्य कहाँ डालूँ? गांड में या चूत में?”

पूजा ने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। वह इठलाते हुए बोली – उसकी आवाज़ में एक मीठी शरारत थी – “इतनी अच्छी गांड चोद कर तुम अपना वीर्य मेरी चूत में क्यों डालोगे? तुम मेरी चूत को तो हर रोज वीर्य पिलाते हो। आज तुम अपने वीर्य से मेरी गांड को भर दो। मेरी गांड की प्यास बुझा दो।”

यह सुनते ही मेरे शरीर में एक जोरदार झटका सा लगा। मैंने अपना पूरा जोर लगाकर लंड को उसकी गांड में जड़ तक घुसा दिया – एक बार, दो बार, तीन बार… और फिर आखिरी धक्के के साथ, मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी गांड के अन्दर उतार दिया। गर्म, गाढ़ा, सफेद वीर्य – धार के रूप में उसकी गांड में समा गया। पूजा दर्द से चीखी, लेकिन उसने मुझे अपने पास से जाने नहीं दिया। उसने मुझे कसकर गले लगा लिया – उसके पैर मेरी कमर पर लिपट गए। मेरा लंड अब भी उसकी गांड में घुसा हुआ था, छोटा हो रहा था, धीरे-धीरे बाहर सरक रहा था।

पूजा के चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी। उसकी आँखें बंद थीं, होठों पर मुस्कान, और वह बस “हाँ… हाँ… हो गया… पूरा हो गया…” बुदबुदा रही थी। मैंने उसके माथे पर एक प्यार भरा चुम्मा दिया।

जब मैंने अपना लंड पूरी तरह बाहर निकाला, तो देखा – मेरा गाढ़ा सफेद वीर्य पूजा की गांड से बाहर बह रहा था। उसकी गांड के छेद से एक सफेद धार निकल रही थी, बेड पर टपक रही थी। मैंने कहा, “तुम्हारी गांड से मेरा वीर्य बाहर आ रहा है, पौंछ लो।”

पूजा फिर इठलाई। उसने मुझे और कसकर गले लगा लिया और मेरा चेहरा चूमने लगी – गालों पर, आँखों पर, होठों पर। उसने कहा, “आने दो। मैं नहीं पौंछूगी। यह तुम्हारा प्यार है – तुम्हारी निशानी है। इसे तुम्हारी बीवी की गांड से बाहर बहने दो।”

उस दिन उसके बाद हम साथ नहाए। गुनगुने पानी में, एक दूसरे के शरीर को सहलाते हुए, एक दूसरे के होंठ चूमते हुए। हम थके हुए थे, लेकिन संतुष्ट थे। पूजा ने मेरे कान में कहा – “रवि, गांड और चूत की चुदाई के बिना मेरी ज़िंदगी अधूरी है। तुम हो मेरे, मैं हूँ तुम्हारी। हमेशा।”

और मैंने उससे कहा – “हमेशा, पूजा। हमेशा।”

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