नवविवाहिता पत्नी के साथ पहली रात: अजय और गायत्री की सुहागरात

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नवविवाहिता पत्नी के साथ पहली रात – मेरा नाम अजय है और मैं 30 साल का हूं। 26 की उम्र में मेरी शादी 21 साल की एक बहुत ही प्यारी और सीधी-सादी लड़की के साथ हो गई थी। मेरी पत्नी का नाम गायत्री है और यह कहानी है हमारी सुहागरात की—वो पहली रात जब दो अजनबी एक-दूसरे के हो जाते हैं, जब डर और शर्म के बीच प्यार और जुनून अपनी जगह बनाता है। गायत्री शादी के समय काफी कमसिन थी—उसकी सुंदर काया, दुबला-पतला शरीर और कोमल अंग देखकर ऐसा लगता था जैसे वो अभी-अभी खिली हुई कली हो और उसे अभी फूल बनना बाकी हो। शादी के बाद वह गांव में मेरे घर आई और फिर आखिरकार वो रात आ ही गई जब हम एक होने वाले थे। उस रात उसकी चूत में मेरा लंड घुसा, चूत फटीखून आया, और धीरे-धीरे दर्द ऐसे मज़े में बदल गया कि आज भी वो रात याद आती है। पढ़िए अजय और गायत्री की इस प्यार भरी, भावनात्मक और पूरी तरह से सच्ची सुहागरात की कहानी।

भाग 1: शादी और पहली मुलाकात

मेरा नाम अजय है। मैं एक साधारण से गांव का रहने वाला हूं और मेरी परवरिश भी बहुत ही सादगी से हुई है। मेरे घर में मेरे माता-पिता, मेरे बड़े भाई और भाभी, और अब मेरी पत्नी गायत्री रहते हैं। हमारा परिवार संयुक्त है और घर में हमेशा चहल-पहल बनी रहती है।

मेरी उम्र 30 साल है और मेरी शादी तब हुई थी जब मैं 26 साल का था। मेरी पत्नी गायत्री उस समय सिर्फ 21 साल की थी। वो अभी बहुत छोटी थी, बिल्कुल कमसिन। उसकी काया बहुत सुंदर थी—दुबला-पतला शरीर, कोमल अंग, और चेहरे पर एक मासूमियत जो किसी को भी अपनी ओर खींच लेती थी। अभी वो एक कली ही थी और उसे फूल बनना बाकी था। जब मैंने पहली बार उसकी तस्वीर देखी थी, तो मेरा दिल बस उसी पल उस पर आ गया था। मैंने अपने माता-पिता से कह दिया था कि मुझे यही लड़की पसंद है और मैं इसी से शादी करूंगा।

हमारी शादी बड़ी धूमधाम से हुई। गांव भर के लोग इकट्ठा हुए थे। ढोल-नगाड़े बज रहे थे और हर तरफ खुशियों का माहौल था। गायत्री लाल रंग की साड़ी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। उसके माथे पर सिंदूर, मांग में टीका, हाथों में मेहंदी—वो सच में किसी देवी की तरह लग रही थी। शादी की सारी रस्में पूरी होने के बाद, गायत्री विदा होकर मेरे साथ मेरे गांव आ गई।

हमारे हनीमून के लिए घर में एक कमरे की व्यवस्था की गई थी। लेकिन हमारे घर में कमरों की कमी थी। वो कमरा दूसरे कमरे के साथ इस तरह से जुड़ा हुआ था कि आवाज़ आसानी से दूसरे कमरे तक पहुंच जाती थी। मेरी भाभी को भी हमारे कमरे से सटा हुआ एक कमरा दिया गया था और वहां कई महिलाएं सोती थीं। यह बात मेरे मन में थोड़ी चिंता पैदा कर रही थी, क्योंकि मैं जानता था कि पहली रात गायत्री को दर्द होगा और वो चीख सकती है। लेकिन मैंने सोचा कि जो होगा, देखा जाएगा।

आखिर वो रात आ ही गई जिसका मैं लंबे समय से इंतजार कर रहा था। देर रात होने को थी। गायत्री तैयार होकर कमरे में बैठी थी। जब मैं कमरे में दाखिल हुआ तो मैंने देखा कि वो बिस्तर पर चेहरा ढककर बैठी हुई थी। उसकी आंखें शर्म से झुकी हुई थीं और वो बहुत घबराई हुई लग रही थी। मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा। जैसे ही मैं उसके पास पहुंचा, वो उठी और बिस्तर से उतरकर मेरे सामने खड़ी हो गई।

उसने झुककर मेरे पैर छुए। मैंने उसे कंधों से पकड़कर उठाया। आगे उसे समझ नहीं आया कि क्या करे, इसलिए उसने बाजू में रखा दूध का गिलास उठाया और मुझे थमा दिया। लेकिन जल्दबाजी में वो गिलास हल्का सा मुझ पर गिर गया। मैं समझ गया कि वो बहुत डरी हुई थी। मैंने उसे सहज करने की कोशिश की।

“शांत हो जाओ गायत्री। क्या हुआ तुम्हें?” मैंने प्यार से पूछा।

वो कुछ नहीं बोली। उसकी नजरें जमीन पर थीं और उसके हाथ कांप रहे थे।

“डरो मत। मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा जो तुम्हारी मर्जी के खिलाफ हो। तुम रुकना चाहती हो तो हम रुक सकते हैं। कुछ वक्त और ले लो,” मैंने उसे भरोसा दिलाने की कोशिश की।

“नहीं… बात वो नहीं है,” गायत्री ने धीरे से कहा।

“तो फिर क्या बात है? तुम मुझसे सब कुछ कह सकती हो। आखिर आज के बाद तुम्हारे लिए मैं और मेरे लिए तुम ही तो हो,” मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा।

गायत्री ने धीरे से कहा, “पता नहीं, कुछ समझ नहीं आ रहा। कभी डर लगता है कि आप क्या करोगे? तो कभी चिंता होती है कि क्या आप मुझे प्यार करते हो? तो कभी बहुत शर्म भी आती है।”

मैंने उसे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा और खुद उसके बाजू में बैठ गया। उसका हाथ अपने हाथों में लेकर मैंने कहा, “मैंने शादी इसलिए की है क्योंकि तुम मुझे पसंद हो। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और पूरी जिंदगी तुम्हारा साथ निभाऊंगा। क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?”

गायत्री ने शर्माते हुए कहा, “हां, मुझे भी आप पसंद हो। मैं भी जीवनभर आपका साथ दूंगी। बस, आज हमारी सुहागरात है इसलिए मुझे शर्म आ रही है और पता नहीं आप क्या करोगे?”

“मैं तुम्हारे साथ बहुत प्यार करने वाला हूं। अगर कोई चीज तुम्हें नहीं आती, तो धीरे-धीरे सीख जाओगी। और अब शरमाना कैसा? आज की रात मैं तुम्हारी सारी शरम उतार दूंगा। फिर खुद ही सुहागरात के मजे लोगी तुम,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।

मेरी बातें सुनकर वो और शरमा गई। उसके गाल लाल हो गए। मैंने उसका चेहरा अपनी तरफ किया और एक गहरा चुंबन जड़ दिया। करीब एक-दो मिनट तक हम दोनों एक-दूसरे से चिपके रहे। बिना किसी शर्म के मैंने उसे अपनी गोद में ले लिया और उसे चूमने लगा। वह शर्मा रही थी, लेकिन अब उसकी शर्म में एक मीठी सी झिझक घुल रही थी।

भाग 2: पहला स्पर्श और उत्तेजना का बढ़ना

मैंने धीरे-धीरे उसके स्तनों को छेड़ना शुरू किया। उसके स्तन काफी कसे हुए लेकिन बड़े थे। वो मेरे स्पर्श से मदहोश होने लगी। मैंने अपने दोनों हाथ उसके शरीर पर घुमाने शुरू कर दिए। कभी उसके बालों को छुआ, तो कभी उसके गालों पर हाथ फेरा, तो कभी उसके पेट पर, और कभी उसकी जांघों पर। हर स्पर्श के साथ वो और अधिक उत्तेजित हो रही थी।

कुछ ही देर में मैंने उसकी साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे सरका दिया और उसको ऊपर से कमर तक निहारने लगा। उसने भी अपनी आंखें बंद कर लीं और अपनी छाती चौड़ी करके मेरा स्वागत किया, जैसे कह रही हो कि मैं तैयार हूं। मैंने उसके गले पर चूमा और धीरे से अपना मुंह उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके दोनों स्तनों के बीच दबाने की कोशिश की।

वो झट से अपना हाथ बीच में ले आई, जैसे खुद को बचाना चाहती हो। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके दोनों हाथ पकड़े और साइड पर दबाकर रख दिया। वो हल्की सी रुआंसी हो गई, लेकिन मैंने उसे छोड़ा नहीं। मैंने उसके दोनों स्तनों के बीच के ऊपरी भाग में चूमा और अपनी जीभ जहां तक अंदर जा पाई, वहां तक लेकर गया। वो गर्म होने लगी थी। उसकी सांसें तेज हो रही थीं और उसका शरीर ढीला पड़ने लगा था।

मैं भी अब पूरी तरह से हॉर्नी हो चुका था। मेरा लंड मेरी पैंट में तनकर खड़ा हो गया था और बाहर निकलने को बेकरार था। मैं उठा और उसकी साड़ी खींचने लगा। धीरे से उसकी कमर पर हाथ घुमाया और उसकी साड़ी, जो ठीक उसकी नाभि के नीचे धंसी हुई थी, उसे बाहर खींचा। उसकी गोरी कमर देखकर मैं बावरा हो गया और उसके पेट और कमर को छूने और चूमने लगा। उसकी त्वचा बहुत ही मुलायम और गर्म थी।

गायत्री भी अब अपना पेट और कमर मेरे मुंह के पास ले आती और मुझे और जोश में लाती। वो अब पूरी तरह से इस खेल में डूब चुकी थी। कुछ देर में ही मैं उठा और उसकी साड़ी निकालकर जमीन पर फेंक दी। वो सिर्फ अपने ब्लाउज और पेटीकोट में बहुत ही सुंदर लग रही थी। मैंने भी अपनी शर्ट उतारकर फेंक दी और सिर्फ अपनी बनियान में रह गया।

मैं उसके ऊपर किसी जानवर की तरह सवार हो गया। उसके होंठों को चूमना शुरू किया और इस बार कब मेरी चुम्मी फ्रेंच किस में बदल गई, पता ही नहीं चला। हमारी जीभें एक-दूसरे के मुंह में जा रही थीं और हम दोनों एक-दूसरे का स्वाद ले रहे थे। फिर मैंने उसे उल्टा किया और उसका ब्लाउज खोलकर उसकी पूरी पीठ को चाटने लगा। उसकी पीठ बहुत ही चिकनी और खूबसूरत थी। फिर मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। उसके मम्मे अब मेरे मुंह के ठीक सामने थे।

मैंने उसका ब्लाउज उतारा और उसके दोनों स्तनों को पहली बार अपने हाथों से पकड़ा। मैंने उसके मम्मों को दबाया। पूरी मर्दों वाली ताकत आज अपने स्तनों पर गायत्री महसूस कर रही थी। उसके मुंह से ‘आह’ तक निकल गई। मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को चूमा और चूसा।

कुछ देर में मैंने उसे खड़ा किया और खुद भी अपनी बनियान उतारकर फेंक दी। अब वो सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थी और मैं ऊपर से पूरी तरह से नंगा था। मैंने उसे अपनी तरफ खींचकर कसकर गले लगा लिया। आखिर मेरी बीवी को मेरी मर्दाना गर्माहट और खुशबू का एहसास तो होना ही चाहिए था। उसने भी अपने हाथ मेरी छाती और पीठ पर घुमाए। उसके हाथ मेरे शरीर पर बहुत ही नर्म और प्यारे लग रहे थे।

मैंने उसकी ब्रा निकाल दी। अब उसकी चूचियां पूरी तरह से नंगी थीं और मैं उनको दबाने लगा। कुछ देर तक दबाने के बाद मैं एक-एक करके उनको चूसने लगा। उसके निप्पल गुलाबी और छोटे थे, और मेरे चूसने से वो सख्त हो गए थे। फिर मैंने उसकी साड़ी और नीचे के सारे कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने पूरी तरह से नंगे थे।

भाग 3: पहली चुदाई – दर्द, खून और प्यार

उस समय मैं पूरी तरह से उत्तेजित था। मेरा लंड काले कोबरा की तरह फुंफकार रहा था। वो पूरी तरह से खड़ा था, नसें उभरी हुई थीं और सुपारा लाल और चमकदार था। गायत्री ने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा था। उसने मेरे उभरे हुए लंड को छुआ और डरते हुए कहने लगी, “यह बहुत बड़ा है… मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।”

मैंने उसे प्यार से समझाया, “इसके बड़े साइज की चिंता मत करो। मैं ऐसे डालूंगा कि दर्द नहीं होगा। बस थोड़ा सा सहन करना होगा।”

उसके पैर काफी सुंदर थे। मैंने सबसे पहले उसके पैरों को चूमा और फिर नीचे से ऊपर आते हुए उसके पेट और फिर होंठों को चूमा। मैं उसे पूरी तरह से रिलैक्स करना चाहता था। आखिर में मैंने उसकी चूत को छुआ, जिस पर काफी कम बाल थे। उसकी चूत बहुत ही नर्म, गुलाबी और टाइट थी। मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डालने की कोशिश की, लेकिन वो बीच में ही रुक गई। गायत्री ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा हुआ था और वो बहुत घबराई हुई थी।

मैंने फिर उसकी चूत में कुछ चिकनाई लगाई। मैंने उसके पैर उठाए और अपने कंधों पर रख लिए। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रख दिया और थोड़ा अंदर घुसाने की कोशिश की। जैसे ही मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर लगा, वो जोर से चीखी और उसने मेरे लंड को अपने हाथ से वहीं पर पकड़कर रोक लिया। उसने इससे आगे घुसवाने से साफ मना कर दिया और मैं वहीं पर रुक गया।

वो मुझसे लंड छोड़ने के लिए कहने लगी और बोली, “सील टूट जाएगी और बिस्तर पर खून फैल जाएगा। सब लोग देख लेंगे।”

मैंने उसे समझाया, “अगर सुहागरात में बिस्तर पर खून नहीं निकला तो कब निकलेगा? यह तो होना ही है।”

मैंने उसको कुछ देर दर्द को सहन करने के लिए कहा। फिर उसने अपने मुंह में कपड़े का एक टुकड़ा दबा लिया और मैंने अपना लंड आगे बढ़ाना शुरू किया। एक जोरदार धक्के के साथ मैंने अपना लंड लगभग आधा अंदर घुसा दिया। गायत्री दर्द से कराह रही थी और मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे।

मैंने कुछ समय के लिए उसके स्तन चूसना और उसके होंठ चूमना शुरू कर दिया, ताकि उसका ध्यान दर्द से हट सके। तब मैंने उससे पूछा कि वह कैसा महसूस कर रही है। गायत्री ने कोई बात नहीं की, बस मेरी कमर पकड़ ली। यह उसका तरीका था मुझे बताने का कि वो तैयार है।

अब उसने मुझे और अधिक अंदर धकेलने के लिए प्रोत्साहित किया। लेकिन मैंने कुछ देर के लिए अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया। मैं उसे थोड़ा आराम देना चाहता था। फिर मैंने गायत्री से पूछा कि क्या वह अब तैयार है? वह दर्द के बीच भी हल्का सा हंस दी। उसकी वो हंसी मेरे लिए हरी झंडी थी।

फिर मैंने उसके नितंबों के नीचे एक तकिया रख दिया और उसके पैर वापस अपने कंधे पर रख लिए। मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर रखा और हल्का सा धक्का दिया। इस बार मैंने उससे कोई बात नहीं पूछी। लंड को आधा धकेलने के बाद मैंने उसे दर्द सहन करने को कहा और जैसे ही मैंने एक जोरदार धक्का दिया, गायत्री की चीख निकल गई। “आआआह… मर गई मैं…” वो जोर से चिल्लाई।

लेकिन मैंने अपना जोरदार धक्का जारी रखा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में जड़ तक घुसा दिया। मेरा लंड उसकी चूत की झिल्ली को तोड़ चुका था और मुझे खून का गीलापन महसूस हो रहा था। यह भारी धक्का बर्दाश्त करने के बाद उसने रोना बंद कर दिया और मेरी कमर को कसकर पकड़ लिया। उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी।

मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाना जारी रखा और उससे पूछा कि क्या वो मेरे बड़े लंड का मजा ले रही है? वह मुस्कुराई और बताया कि वह वास्तव में अब आनंद ले रही है। उसका दर्द अब कम हो गया था और उसकी जगह एक मीठा सा सुख ले रहा था। इस तरह हम कुछ समय तक अपने पहले सेक्स का आनंद लेते रहे। मैं उसे धीरे-धीरे चोद रहा था और वो नीचे से अपनी गांड उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी।

तब मैंने कुछ अधिक भारी धक्के दिए और अपना सारा भार उसके अंदर डाल दिया। मेरा गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया और हमारे पहले सेक्स का आनंद स्खलन पर खत्म हो गया। मैं हांफ रहा था और गायत्री भी पसीने से लथपथ हो गई थी।

उसके बाद हमने हर जगह बहुत सारा खून देखा। बिस्तर की चादर खून से भर गई थी। गायत्री की चूत से अभी भी खून निकल रहा था। उसका कौमार्य टूट गया था। मेरे लंड का टोपा भी पूरी तरह से खुल गया था और उस पर खून लगा हुआ था। यह थी हमारी सुहागरात। फिर हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। हम बहुत थक चुके थे।

भाग 4: सुबह की शर्म और दूसरी रात

जब हम सोकर उठे तो हम दोनों के प्राइवेट पार्ट में दर्द हो रहा था। पेशाब के दौरान मुझे काफी दर्द महसूस हुआ क्योंकि मेरा लंड भी थोड़ा छिल गया था। मैं कमरे से बाहर चला गया और नीचे जाकर चाय पी।

अगली रात को जब हम फिर मिले, तो मेरी नवविवाहिता पत्नी ने मुझे बताया कि कई महिलाओं ने उससे कल रात की कहानी पूछी थी। उसने कोई जवाब नहीं दिया तो महिलाएं खुद ही कहने लगीं कि उन्होंने रात की सारी आवाजें सुन ली हैं। वो बोलीं, “देवर जी ने काफी दुख दिया है। पहले से ही लग रहा था कि बहुत चोट देगा, लेकिन चिंता मत करो बहू, कुछ दिन में सब कुछ सही हो जाएगा।”

यह सुनकर मैं थोड़ा शर्मिंदा हुआ, लेकिन गायत्री हंस रही थी। फिर उसने मुझसे कहा कि उसकी चूत में बहुत सूजन है और दर्द हो रहा है। मैंने उससे कहा, “मेरा लंड भी सूज गया है, लेकिन हमें दर्द से तेजी से रिकवरी के लिए चोदना जारी रखना चाहिए।” वो मेरी बात सुनकर थोड़ा डरी, लेकिन फिर मान गई।

तो उस रात हमने दो बार और चुदाई की। हालांकि इस बार मैंने बहुत धीरे और प्यार से चोदा। धीरे-धीरे हमारे प्राइवेट पार्ट्स का दर्द कम होता गया और हम रोज चुदाई करने लगे।

भाग 5: लंड चूसना और पहली बार वीर्य का स्वाद

अब मेरी गायत्री मेरे लंड को चूसना भी सीख गई थी। लंड तो उसने भले ही खूब चूसना शुरू कर दिया था, लेकिन अभी तक उसने मेरे वीर्य का स्वाद नहीं लिया था। मैंने उससे कई बार अनुरोध किया कि वो मेरा पानी पी ले, लेकिन वो कभी सहमत नहीं हुई। उसे लगता था कि यह गंदा होता है।

एक बार मुझे एक शरारती विचार आया। चुदाई से पहले हम लगभग रोज एक-दूसरे को चूसते थे—मैं उसकी चूत चूसता था और वो मेरा लंड चूसती थी। एक रात मैं उसके ऊपर 69 पोजीशन में आ गया और उसकी चूत को जोर-जोर से चूसने लगा। वो भी उसी जोश में मेरे लंड को चूसने लगी। हम दोनों बहुत जोर-जोर से एक-दूसरे को चूस रहे थे।

जब गायत्री ने मेरी गर्दन पकड़कर मुझे और जोर से उसकी चूत चूसने के लिए कहा, उसी समय मैंने अपना पूरा लंड उसके गले के अंदर गहरे तक धकेल दिया। जब मैं उसकी चूत को जोरदार तरीके से चूस रहा था, तो मैंने अपने वीर्य का पूरा भार उसके गले में उड़ेल दिया।

चूसने का काम खत्म करने के बाद, उसने अपने मुंह में नमकीन स्वाद की शिकायत की और मुझसे पूछा, “क्या तुमने अपना पूरा माल मेरे मुंह में छोड़ दिया?”

मैं शरारत से हंस पड़ा और बोला, “हां, जानू।”

तो उसने कहा, “तुमने मुझे धोखा दिया… लेकिन मुझे यह पसंद आया।” फिर वो बोली, “अगर तुम आगे कभी मुझे अपने लंड का पानी पिलाना चाहते हो तो ऐसे धोखा देने की जरूरत नहीं है। मैं इस बड़े लंड के पानी को निगलने के लिए तैयार रहूंगी। स्वाद नमकीन है, जो मुझे पसंद है।”

उस दिन के बाद से गायत्री मेरा वीर्य बड़े चाव से पीने लगी। वो कहती थी कि उसे इसका नमकीन स्वाद बहुत पसंद है।

भाग 6: गांड चुदाई – इंतजार और आखिरकार सफलता

मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हूं। मुझे उसकी गांड बहुत पसंद है। वो बहुत ही गोल, मोटी और मुलायम है। मैंने कई बार उससे गांड चुदाई के लिए आग्रह किया, लेकिन उसने यह कहकर मना कर दिया कि वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती। उसे बहुत डर लगता था कि उसकी गांड फट जाएगी।

मैंने फिर भी हार नहीं मानी और उसकी गांड चोदने की कोशिश को जारी रखा। मैं उससे इतना प्यार करता था कि कभी जबरदस्ती नहीं की। बस उसे बहुत प्यार करता और उसकी गांड को चूमता रहता। मैं उसे बताता कि मुझे उसकी गांड कितनी अच्छी लगती है। मैं किसी तरह उसको मनाकर लंड डालने की कोशिश करता, तो वो रोने लगती थी और मैं रुक जाता था।

नहाते समय मैं उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रगड़ता था और धीरे-धीरे उसे इसकी आदत डालने की कोशिश करता था। कुछ दिनों बाद उसको गांड के छेद में लंड लगवाने में मजा आने लगा। वो अब खुद ही गांड के छेद को लंड से खुजलाने के लिए कहती थी। मैं उससे लंड का टोपा डालने के बदले यह सौदा करता था। कई महीने मैंने असफलता में ही निकाल दिए और अपनी बीवी की गांड चुदाई नहीं कर पाया।

फिर मुझे काम से बाहर जाना पड़ा। करीब दो महीने बाद जब मैं वापस लौटा, तो मैं सीधा घर गया। मैं बहुत दिनों से चुदाई के लिए तड़प रहा था और गायत्री भी इसी दौर से गुजर रही थी। वो मुझे देखते ही बहुत खुश हो गई। वो काफी हॉट और सेक्सी लग रही थी। उसने ऐसे कपड़े पहने हुए थे जो किसी फिल्मी हीरोइन की तरह लग रहे थे। उसके बालों का नया कट उसे बहुत सेक्सी बना रहा था।

जैसे ही हम अपने कमरे में पहुंचे, मैंने उसे अपनी गोद में ले लिया और उसके होंठ चूमने लगा। उसने मुझे पहले दरवाजा बंद करने की याद दिलाई। दरवाजा बंद करके मैंने उसके स्तन सहलाने शुरू कर दिए। गायत्री भी मुझसे लिपटने लगी। हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूमते हुए एक-दूसरे के जिस्मों पर मादक अंदाज में हाथ फिराने लगे।

इतने दिनों के बाद बीवी के जिस्म का स्पर्श पाकर मेरा लंड एकदम से टनटना गया था और गायत्री इसे अपनी जांघों के बीच में टकराता हुआ महसूस कर रही थी। फिर उसने मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया। उसके बाद उसने मेरी पैंट का हुक खोला और मेरे लंड को अंडरवियर से बाहर निकाल लिया।

वो मेरे लंड को गौर से देखते हुए कहने लगी, “आज तो ये पहले से भी ज्यादा बड़ा और मोटा लग रहा है!”

मैंने उससे कहा, “बहुत दिनों तक तुम्हारी चूत से दूर रहा, इसलिए जोश में ज्यादा फूला हुआ है।”

उसने जल्दी से घुटनों पर बैठते हुए मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और ऐसे मजे से चूसने लगी जैसे कई सालों से इसके लिए प्यासी हो। लंड चुसवाने में आज मुझे इतना आनंद आया जितना पहले कभी नहीं आया था। फिर वो खड़ी हुई और हम दोनों एक-दूसरे के होंठों का रस पीने लगे।

मैंने उसकी गांड को भींचते हुए कहा, “जान, आज किसी भी चीज के लिए मना मत करना।”

वो मुस्कुराते हुए बोली, “ठीक है, आज जैसे चाहे चोद लो!”

यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया। वो मेरे लंड को पकड़कर जोर-जोर से फेंटने लगी। उससे रुका नहीं गया तो दोबारा से मेरे घुटनों के पास बैठकर मेरे लंड को मुंह में भरकर चोसे मारने लगी। आज वो खुद ही लंड को गले तक अंदर ले जा रही थी, लग रहा था जैसे मेरे लंड के गाढ़े वीर्य का स्वाद जल्दी से चखना चाह रही हो।

अब मैंने भी उसका सिर दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसके मुंह को चोदने लगा। चोदते हुए मैंने अपना गर्म-गर्म माल उसके गले में उड़ेल दिया, जिसे मेरी बीवी बड़े चाव से निगल गई। वीर्यपान करने के बाद उसने मुस्कुराते हुए बताया कि उसको लंड का पानी पीने में बड़ा मजा आया और उसका नमकीन स्वाद बहुत अच्छा लगा।

पानी पीने के बाद वो बोली, “चलो, अब पहले खाना खा लेते हैं। फिर पूरी रात चोदना मुझे!”

हमने खाने के लिए ऑर्डर किया। खाने के साथ हमने हल्का पेय भी लिया। कुछ देर बाद रूम स्टाफ आया और प्लेटें लेकर चला गया। भोजन के बाद मैंने गायत्री से कहा, “मैं सेक्स की गोलियां लाया हूं। इस दवा का अनुभव लेना चाहता हूं। तुम्हें पूरी रात चोदने का मन कर रहा है आज!”

गायत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेशक! मुझे भी आज आपकी ताकत देखनी है।”

फिर मैंने स्नान किया, क्योंकि मैं लंबी यात्रा से आया था। गायत्री ने भी स्नान किया। नहाने के बाद गायत्री ने एक पारदर्शी नाइटी पहनी थी, जिसमें उसके स्तन साफ दिख रहे थे। उसके चूचे आज मस्त और काफी बड़े दिख रहे थे। मैंने भी ढीली पतलून और शर्ट पहनी थी।

मैं उसे बिस्तर पर ले गया और उसके स्तन फिर से पकड़ लिए। मैं उसके स्तनों को सहलाने और चूसने लगा। फिर मैंने उसका कपड़ा हटाया और वो पूरी नंगी हो गई। गायत्री अपनी टांगों को फैलाकर पीठ के बल बिस्तर पर पड़ी थी। ऐसा लग रहा था कि वो मेरे लंड को निमंत्रण दे रही है। लेकिन मैंने पहले अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। वो बहुत साफ और गीली थी। फिर मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटा। मुझे लगा कि वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई है।

गायत्री ने मेरे लंड को पकड़कर चूत में पेलने के लिए कहा। मैंने उसकी मांग मान ली और अपने लंड को उसकी चूत पर रख दिया। मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी चूत के अंदर घुसाने की कोशिश की। उसे बहुत दर्द हुआ और उसने मुझे धीरे से पेलने को कहा। वह बता रही थी कि गोली लेने के बाद लंड लोहे की छड़ की तरह सख्त हो गया है, जो चुभ रहा है। मैंने उससे कहा कि तुम्हारी चूत को लंबे अंतराल के बाद मेरा लंड मिल रहा है, इसलिए तुम्हारी चूत का छेद संकरा हो गया है।

फिर मैंने एक जोरदार धक्का दिया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया। गायत्री दर्द के मारे रोने लगी, लेकिन उसने मुझे रोका नहीं। कई जोरदार धक्के झेलने के बाद उसे मजा आने लगा। अब गायत्री और भी जोर से चुदाई की मांग करने लगी। मैंने अपने बड़े लंड को अपनी प्यारी बीवी की चूत के अंदर धकेलना शुरू कर दिया। गायत्री लगातार बोल रही थी, “और जोर से चोदो! पूरे लंड को चूत के अंदर धकेलो!”

मैं दस मिनट से अधिक समय तक जोर-जोर के धक्के देता रहा। गायत्री बोल रही थी, “चुदाई का आज पूरा मजा ले रही हूं। लंड इस बार और मोटा और शक्तिशाली हो गया है। अब तुम्हारा बड़ा लंड दर्द नहीं कर रहा है, बल्कि मुझे मस्त कर रहा है।”

इस वक्त गायत्री और जोर से चोदने को कह रही थी, अधिक जोरदार धक्का देने के लिए कह रही थी। फिर वो हवस की आग में पगलाकर बोली, “जान… आप अपने लंड को और अंदर घुसेड़ दो, अपना सारा वीर्य मेरी चूत के अंदर डाल दो। मैं इस समय आपके शक्तिशाली लंड से गर्भवती होना चाहती हूं।”

फिर मैंने उसकी टांगें ऊपर उठाईं और अपना लंड उसकी चूत के अंदर अधिकतम संभव गहराई तक पेल दिया। वह थोड़ी देर रोई, लेकिन मेरी कमर को तब तक रोके रखा जब तक मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में खाली नहीं कर दिया। मुझे लगा कि गायत्री अंदर से पूरी तरह से खुश हो गई है। मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और गायत्री की चूत ने वीर्य का एक कतरा भी बाहर नहीं आने दिया। उसने सारे वीर्य को अंदर ही सोख लिया। गायत्री की चूत बहुत दिनों से प्यासी थी और मेरा वीर्य ही उसकी प्यास बुझाने वाला पानी था।

फिर हम आराम से लेटकर बातें करने लगे। इतने दिनों की जुदाई के बारे में बतियाने लगे। लेटे हुए ही हम सोने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मेरा लंड जैसे सोने के लिए तैयार ही नहीं था। वो अभी भी जोर-जोर से फुंफकार रहा था। गायत्री ने उसे पकड़ा और पूछा, “तुम्हें और क्या चाहिए?”

उसने लंड को नम कपड़े से साफ किया और थोड़ा तेल लगाया। मैं बोला, “मुझे लगता है कि उसे और भी बहुत कुछ चाहिए!” फिर मैंने गायत्री से कहा, “आज गांड चोदने के बाद शायद मेरा लंड संतुष्ट हो जाएगा।”

वह हंसने लगी और बोली, “मैं पहले से ही जानती थी।” उसने अपनी गांड को अच्छी तरह से साफ किया था। वो पहले से ही गांड चुदाई के लिए तैयार थी। फिर वह अपने पेट के बल लेट गई और मुझे आमंत्रित किया। उसने मुझे अपने लंड पर और अपनी गांड के छेद पर तेल लगाने के लिए कहा। मैंने उसके कहे अनुसार वैसा ही किया।

गायत्री को डर था कि इस बार उसे बहुत दर्द होगा। मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखा और एक छोटा सा धक्का दिया। उसने दर्द के कारण कुछ देर रुकने के लिए कहा। फिर से गायत्री ने मुझे आगे बढ़ने का इशारा दिया। उसकी हरी झंडी मिलने के बाद मैंने एक जोरदार धक्का दिया। वह जोर से चीखी और मेरी कमर पकड़कर मुझे रोकने की कोशिश करने लगी। वो किसी तरह दर्द को बर्दाश्त करते हुए कहने लगी कि उसको आज फिर से पहली चुदाई की याद आ गई है।

उसकी गांड में पहली बार लंड इतना अंदर गया था, या यूं कहें कि लंड को पहली बार उसकी गांड ने जगह देने की कोशिश की थी, और वो मुश्किल से इसे बर्दाश्त कर पा रही थी। वो लंड तो ले रही थी, लेकिन साथ ही शिकायत भी कर रही थी कि लंड पहले से और मोटा हो गया है। फिर मैं धीरे-धीरे उसकी गांड में अपना लंड चलाने लगा। कुछ देर तक गायत्री को परेशानी होती रही, लेकिन फिर उसका दर्द कम होने लगा।

कुछ देर के बाद गायत्री आसानी से गांड चुदवाने लगी। उसको अब कोई परेशानी नहीं हो रही थी। मैं भी बहुत ही संभलकर और प्यार से उसकी गांड चोद रहा था। पहली गांड चुदाई का अनुभव मैं उसके लिए बुरा नहीं बनाना चाहता था। हमने लगभग आधे घंटे तक चुदाई की। इस दौरान मैंने बीस-पच्चीस मिनट तक उसकी गांड के छेद को धीरे-धीरे खोला और फिर आखिर में उसकी गांड में झड़कर शांत हो गया।

आज मेरी पुरानी इच्छा पूरी हो गई थी। मेरी बीवी ने मेरे लंड को चूसने का भरपूर आनंद दिया और अपनी गांड देकर मेरी इच्छा भी पूरी की। हालांकि उसको काफी देर तक गांड में दर्द होता रहा, लेकिन मेरी बाहों में आने के बाद वो दर्द को भूलकर सो गई।

इस तरह से मैंने अपनी बीवी के सारे छेदों की चुदाई का मजा लिया। उस दिन के बाद से गायत्री महीने में दो-तीन बार गांड भी चुदवाने लगी। समय के साथ उसकी गांड का छेद भी ढीला हो गया। कई बार तो वो खुद ही अपनी गांड आगे कर देती थी और चोदने को कहती थी। अब हम हर तरह की पोजीशन में सेक्स करने लगे। पोर्न फिल्में देखते हुए उन्हीं के आसनों में चुदाई का पूरा मजा लेते थे।

अब हमें एक-दूसरे से किसी भी बात में आना-कानी करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। अब वह चुदाई के खूब मजे लेती है। मैं उसके सारे छेदों की बेरहम चुदाई करता हूं। मेरे कहे अनुसार गायत्री मेरे लंड को जितनी देर चाहूं, चूसा करती थी, चूत चटवाती थी और उंगली से चुदवाती थी। मैं भी उसके कहे अनुसार उसकी चूत को चोदा करता था और उसके पसंदीदा आसनों का प्रयोग किया करता था। हमारी वैवाहिक जिंदगी बहुत अच्छे से चलने लगी। उम्मीद करता हूं कि आपको हमारी यह कहानी पसंद आई होगी।

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