सुहागरात की मीठी कहानी – मेरा नाम राज है। छब्बीस साल का एक आम सा लड़का, जिसे जिम जाने का शौक है। उसी जिम में एक दिन मैंने रचना को देखा—और मेरी दुनिया बदल गई। वो जब पहली बार जिम आई थी, तभी मुझे लग गया था कि ये लड़की मेरी जिंदगी में कुछ खास बदलाव लेकर आएगी। धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी, बातें बढ़ीं, और फिर प्यार हो गया। रचना ने शादी से पहले एक वादा लिया था—कोई शारीरिक संबंध नहीं। और मैंने उस वादे को पूरे मन से स्वीकार किया। क्योंकि मेरे लिए उसकी इज़्ज़त उसके शरीर से कहीं ज्यादा कीमती थी। यह सुहागरात की मीठी कहानी उस प्यार की है, उस इंतज़ार की है, और आखिरकार उस सुहागरात की—जब हम दोनों ने तय किया कि अब हमेशा के लिए एक दूसरे के हो जाएंगे। पढ़िए मेरी और रचना की यह मीठी सुहागरात की कहानी।
भाग 1 – जिम में हुई मुलाकात और प्यार का जन्म
हाय, मेरा नाम राज है। मेरी उम्र 26 साल है और मैं दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता हूं। मैं एक आम सा लड़का हूं, लेकिन एक चीज है जो मुझे थोड़ा अलग बनाती है—मुझे अपनी फिटनेस का बहुत शौक है। मैं नियमित रूप से जिम जाता हूं और अपने शरीर पर बहुत ध्यान देता हूं। इसलिए मेरा बदन एकदम तंदरुस्त और मजबूत है। मेरे दोस्त मुझसे अक्सर कहते हैं कि मेरी बॉडी किसी फिल्म स्टार जैसी है, और मैं शर्माकर मुस्कुरा देता हूं। लेकिन मेरी जिंदगी में एक दिन ऐसा आया जब मेरी यही फिटनेस और जिम जाने की आदत मेरे लिए किस्मत का दरवाजा खोलने वाली साबित हुई।
यह बात करीब एक साल पहले की है। मैं अपने रोज के रूटीन के मुताबिक शाम को जिम गया हुआ था। मैं अपनी एक्सरसाइज कर रहा था कि अचानक जिम का दरवाजा खुला और एक लड़की अंदर आई। वो लड़की कोई और नहीं, बल्कि रचना थी। जैसे ही मेरी नजर उस पर पड़ी, मुझे ऐसा लगा जैसे समय थम गया हो। वो पहली बार जिम आई थी और उसने एक टाइट टी-शर्ट और लेगिंग्स पहनी हुई थी। उसकी फिगर एकदम कमाल की थी—न ज्यादा पतली, न ज्यादा मोटी, बस एकदम परफेक्ट। उसके लंबे काले बाल, उसकी बड़ी-बड़ी आंखें, और उसके होंठ—सब कुछ जैसे किसी कलाकार ने बड़ी मेहनत से बनाया हो। मुझे पहली ही नजर में उससे प्यार हो गया था।
लेकिन मैं बहुत शर्मीला था और सीधे जाकर उससे बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। मैंने सोचा कि अगर वो जिम रेगुलर आएगी तो कभी न कभी मौका मिल ही जाएगा। और ऐसा ही हुआ। रचना ने जिम रेगुलर आना शुरू कर दिया। पहले तो हम सिर्फ एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते थे, फिर धीरे-धीरे “हाय-हेलो” होने लगा। एक दिन मैंने हिम्मत जुटाई और उससे पूछ ही लिया, “तुम्हारा नाम क्या है?” उसने मुस्कुराकर जवाब दिया, “रचना।” बस, वो एक शब्द मेरे दिल में उतर गया।
धीरे-धीरे हम दोनों बातें करने लगे। जिम में साथ-साथ एक्सरसाइज करते, एक-दूसरे को टिप्स देते, और कभी-कभी जिम के बाद बाहर कॉफी पीने चले जाते। हम दोनों के दिल में प्यार बढ़ने लगा। मुझे पता चला कि रचना एक स्कूल में टीचर है और बच्चों को पढ़ाती है। उसका स्वभाव बहुत ही प्यारा और मासूम था। वो भी मेरी बॉडी देखकर मेरे प्यार में खो गई थी, ये बात उसने बाद में मुझे बताई। दिनों-दिन हम दोनों का प्यार बढ़ने लगा। हम घंटों फोन पर बातें करते, एक-दूसरे को मैसेज भेजते, और जब भी मिलते तो समय का पता ही नहीं चलता था।
भाग 2 – शादी से पहले का वादा और सुहागरात की तैयारी
करीब छह महीने बाद, एक शाम हम पार्क में बैठे थे। मौसम बहुत सुहाना था और हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। मैंने रचना का हाथ अपने हाथ में लिया और कहा, “रचना, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। मैं अपनी पूरी जिंदगी तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूं। क्या तुम मुझसे शादी करोगी?” रचना की आंखों में आंसू आ गए और उसने बिना कुछ सोचे-समझे “हां” कह दिया। वो पल मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल था।
हम दोनों ने अपने-अपने परिवारों में बात की और हमारे माता-पिता भी हमारी शादी के लिए राजी हो गए। शादी की तारीख तय हो गई। लेकिन शादी से पहले रचना ने मुझसे एक वादा लिया। उसने कहा, “राज, मैं चाहती हूं कि हम शादी से पहले शारीरिक संबंध नहीं बनाएंगे। मैं अपनी पहली रात अपने पति के साथ बिताना चाहती हूं, उस पल को खास बनाना चाहती हूं।” मैंने उसकी बात सुनकर मुस्कुराकर कहा, “हां, मैं तुमसे वादा करता हूं कि शादी से पहले हम दोनों चुदाई नहीं करेंगे। आखिर हम दोनों के प्यार से बड़ा कुछ नहीं। तुम जो चाहोगी, वही होगा।”
रचना ने भी मुझसे एक और वादा किया। वो बोली, “राज, जब हमारी शादी होगी, तब हमारी पहली सुहागरात यादगार होगी। राज, तुम सुहागरात के दिन जो कहोगे, जितनी बार कहोगे… उस दिन मैं चुदाई के लिए तैयार रहूंगी। ये मेरा वादा है।” उसकी यह बात सुनकर मेरा दिल खुशी से नाच उठा। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके माथे पर एक प्यार भरा किस किया।
वैसे, मैं आपको बता दूं कि मेरी रचना की फिगर कमाल की थी और जब से उसने जिम चालू की थी, तभी से उसका बदन और भी सुडौल होने लगा था। उसकी फिगर एकदम गदराई हुई थी। उसके स्तन गोल-गोल और भरे हुए थे, कमर पतली थी और गांड मोटी और मुलायम थी। मैं जब भी उसे देखता, मेरा मन करता कि बस उसे अपनी बाहों में भर लूं और कभी न छोड़ूं। लेकिन मैंने अपने वादे को पूरी ईमानदारी से निभाया। मैंने कभी भी उसके साथ कोई ऐसी हरकत नहीं की जिससे उसे असहज महसूस हो। मेरे लिए उसकी इज्जत और उसका भरोसा सबसे ज्यादा मायने रखता था।
भाग 3 – शादी का दिन और ससुराल में पहली रात
आखिरकार वो दिन आ गया जिसका हम दोनों को बेसब्री से इंतजार था—हमारी शादी का दिन। शादी की सारी रस्में बड़ी धूमधाम से हुईं। रचना लाल रंग के भारी लहंगे में बेहद खूबसूरत लग रही थी। जब मैंने उसे दुल्हन के रूप में देखा, तो मेरी सांसें थम गईं। मैं सोच रहा था कि मैं कितना खुशनसीब हूं जो ऐसी खूबसूरत और प्यारी लड़की मेरी बीवी बनने वाली है।
हमारी जिस दिन शादी हुई, उस दिन रचना सुहागरात के लिए तैयार होकर बैठी थी। शादी की सारी रस्में खत्म होने के बाद, मैं अपने कमरे में गया। कमरा बहुत खूबसूरती से सजाया गया था। बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं और हल्की रोशनी में पूरा कमरा एक रोमांटिक एहसास दे रहा था। जैसे ही मैं रूम में गया, रचना मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और बोली, “बोलो बेबी, आज तुम्हारी क्या सेवा करूं?”
रचना मुझे प्यार से “बेबी” कहती थी और मैं उसे “जानू” कहता था। यह हमारे बीच का प्यारा सा नाम था। मैंने उसकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “जानू, आज रात नहीं, आज मैं बहुत थक गया हूं… और अगर आज हम चुदाई करेंगे तो मैं तुझे चुदाई का पूरा मजा नहीं दे पाऊंगा। फिर इतने साल से रुकने का कोई फायदा नहीं होगा। वैसे भी आज घर में बहुत लोग हैं, हम दोनों खुल कर चुदाई नहीं कर सकते। जब घर में हम दोनों के अलावा कोई नहीं होगा, तब मेरे काले सांप का तुम्हारे छेद में प्रवेश होगा।”
रचना मेरी बात सुनकर हंस पड़ी और बोली, “बेबी, अब चुदाई के दिन ही देखेंगे तुम्हारे नीचे सांप है या चूहा।” मैंने भी हंसते हुए जवाब दिया, “हां देख लो, इतने साल से तड़प रहा है। अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।” हम दोनों एक-दूसरे को किस करके चिपक गए। मैंने रचना को अपनी बाहों में भर लिया और हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। वो रात बिना सेक्स के भी बहुत खूबसूरत थी, क्योंकि हमारे बीच प्यार और भरोसा था।
शादी के पांच दिन बाद, हम दोनों दिल्ली आ गए, जहां मैं काम करता था। रचना पहली बार मेरे घर आ रही थी और मैं चाहता था कि उसे यहां सब कुछ अच्छा लगे। मैंने पहले से ही घर की साफ-सफाई करवा दी थी और उसके लिए कुछ नए कपड़े और गहने भी खरीदे थे। जब हम घर पहुंचे तो रचना बहुत खुश हुई। उसने कहा, “बेबी, तुम्हारा घर तो बहुत प्यारा है। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।”
भाग 4 – दिल्ली में पहली बार साथ रहना और चुदाई की तैयारी
हमारे दिल्ली आने के अगले दिन मुझे ऑफिस जाना था। सुबह-सुबह रचना ने मेरे लिए खाना बनाया। हम दोनों ने साथ में नहाया और तैयार हुए। रचना ने उस दिन लाल रंग की साड़ी पहनी थी। वो उस साड़ी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। उसने लाल साड़ी के साथ एक सेक्सी डीप कटा हुआ ब्लाउज पहना था, जिसमें उसकी आधी बूब्स दिख रही थीं। उसके गोरे-गोरे स्तनों का उभार देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने उसके मांग में सिंदूर भरा और उसने मेरा पैर चूमकर आशीर्वाद मांगा। वो ऐसा रोज ही करती है, लेकिन उस दिन वो कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी।
मैंने उसे उठाकर अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया। मैंने उससे कहा, “तुम बहुत सुंदर लग रही हो। मुझे तो ऑफिस जाने का भी मन नहीं कर रहा है। ऐसा मौका मैं हाथ से जाने नहीं देता। अच्छा सुनो, मैं आज शाम को छह बजे घर आ जाऊंगा… तुम तैयार रहना मेरी जान… आज बहुत मजे करेंगे।”
ये सुनकर रचना के चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान आ गई। वो बोली, “तो बेबी, तुम्हारी आज मीटिंग नहीं है?” मैंने हंसते हुए जवाब दिया, “जानू, जरूरी मीटिंग है ना… मेरे लंड की तुम्हारी चूत के साथ मीटिंग है।” रचना शर्माकर हंसने लगी और उसके गाल लाल हो गए। मैंने उसे एक और किस किया और ऑफिस के लिए निकल गया।
सारा दिन मैं ऑफिस में बैठकर आज की रात के बारे में ही सोचता रहा। मेरे दिमाग में बस रचना का चेहरा और उसका शरीर घूम रहा था। मैं सोच रहा था कि आज रात मैं उसे कैसे चोदूंगा, क्या-क्या करूंगा। सोचते-सोचते दिन ही नहीं कट रहा था। जैसे-तैसे ऑफिस का टाइम खत्म हुआ और मैं तुरंत घर के लिए निकल पड़ा। रास्ते में मैं बाजार से हर एक वो चीज ले ली जो आज की चुदाई में रंग डालने के लिए जरूरी थी—फल, आइसक्रीम, चॉकलेट, और एक वाइब्रेटर। मैं चाहता था कि आज की रात हमारी जिंदगी की सबसे यादगार रात हो।
जैसे ही मैंने दरवाजे की घंटी बजाई, रचना दौड़कर आई और दरवाजा खोला। वो मुझे शरारत भरी नजरों से देख रही थी। वो बोली, “बेबी, मैंने अपने कमरे में सब चीजों का प्रबंध कर लिया है। बस हमारा खेल शुरू होने के लिए नौ बजने की देर है।” मैंने उसे गले लगा लिया और कहा, “जानू, मैं भी तुम्हारे लिए कुछ खास लाया हूं। आज रात हम दोनों खूब मजे करेंगे।”
मैं नहा-धोकर तैयार हो गया और करीब आठ बजे हमने साथ में खाना खाया। खाना खाने के बाद रचना ने घर के सारे काम खत्म किए। मैं पीछे से जाकर उसे कसकर पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा। वो चिहुंकी और बोली, “अरे राज, रुको तो… इतनी भी क्या जल्दी है। मुझे कुछ सेक्सी सी साड़ी वगैरह तो पहन लेने दो।” मैंने उसे छोड़ दिया और कहा, “जल्दी करो जानू… सब्र नहीं हो रहा है।” रचना ने मुस्कुराकर कहा, “हां राज, पर जब तक मैं न बुलाऊं… तब तक तुम कमरे में मत आना!”
भाग 5 – रोमांटिक माहौल और फलों का सेक्सी खेल
लगभग पंद्रह मिनट के इंतजार के बाद रचना ने मुझे अंदर बुलाया। जैसे ही मैंने कमरे का दरवाजा खोला, मैं देखता ही रह गया। क्या गजब का माहौल बना था रूम में! रचना ने पूरे कमरे को रोमांटिक अंदाज में सजाया था। चारों तरफ दिए और मोमबत्तियां जल रही थीं, अलग-अलग रंग की लाइट्स लगी हुई थीं, जिनकी रोशनी में रचना का जिस्म और भी खूबसूरती से चमक रहा था। धीमी आवाज में मदहोशी पैदा करने वाले रोमांटिक गाने बज रहे थे और पूरे रूम में इत्र की खुशबू महक रही थी।
लेकिन सबसे ज्यादा खूबसूरत थी मेरी रचना। उसने काले रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जो उसके गोरे-गोरे बदन पर बहुत जंच रही थी। उसके उभरे हुए मम्मे काले ब्लाउज में और भी मजेदार लग रहे थे। उसकी पतली कमर और बड़ी गांड गजब की लग रही थी। उसने अपने बाल खोल रखे थे और हल्का मेकअप किया हुआ था। वो सच में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
“अरे वाह जानू, तुमने तो पूरा चुदाई का माहौल बना दिया है… और इस काले रंग की साड़ी में तो तुम माल लग रही हो!” मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा।
रचना मुस्कुराई और बोली, “राज बेबी, आज की रात हमारी जिंदगी की सबसे हसीन रात होगी।”
“तुमने इतना मस्त माहौल बनाया है तो मैंने भी इस माहौल को और मजेदार बनाने के लिए कुछ किया है। मैं फल, आइसक्रीम और चॉकलेट लाया हूं,” मैंने अपना बैग दिखाते हुए कहा।
“बेबी, ये किस लिए लाए हो?” रचना ने उत्सुकता से पूछा।
“जानू, तुम्हारे जिस्म पर लगाकर इसे चाटने का मजा अलग ही होगा,” मैंने शरारत भरे अंदाज में कहा।
इतना कहकर मैं उसके पास गया और उसके लाल-लाल रसीले होंठों को चूसने लगा। रचना भी बावली होकर मेरे होंठों को चूसने लगी। मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी और रचना मेरी जीभ को चूसने लगी। हम दोनों की जीभ एक-दूसरे के मुंह में घुसकर चाटने लगीं। उसकी गर्म सांसें मेरी सांसों से टकरा रही थीं। माहौल गर्मागर्म होता जा रहा था।
मैंने रचना की साड़ी का पल्लू हाथ में पकड़ा और उसे बेड पर ढकेल दिया। रचना गोल-गोल घूमते हुए बेड पर गिर गई। मैंने उसकी पूरी साड़ी निकालकर फेंक दी, साथ ही पेटीकोट भी निकाल दिया। रचना अब सिर्फ ब्लाउज और चड्डी में थी। उसके गोल-मटोल गदराए हुए मम्मे उसके ब्लाउज से थोड़े बाहर निकले हुए थे। रचना का दिल तेजी से धड़क रहा था, इसलिए उसके मम्मे भी तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसकी गोरी-गोरी टांगें मुझे उत्तेजित कर रही थीं।
मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके होंठों और गालों को चूमने लगा। धीरे-धीरे नीचे आते हुए मैंने उसकी गर्दन को चूमा और ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूमने लगा। फिर उसके पेट को सहलाते हुए मैंने उसकी नाभि पर किस किया और नीचे सरककर चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत को किस किया। वो सिहरती रही और मैं नीचे की ओर आता गया, उसकी गोरी-गोरी टांगों को चाटने लगा।
इसके बाद मैंने उसे गोद में उठाया और कुर्सी पर बैठ गया। उसको अपनी जांघों पर बिठाकर प्यार करने लगा। उसने मेरी शर्ट को उतार दिया। रचना मेरे मजबूत शरीर को देखकर बोली, “राज, क्या मजबूत जिस्म है तुम्हारा… तुम्हारा सीना, तुम्हारे बाजू… मेरे जिस्म को, मेरे मन को तुम्हारी ओर खींच रहे हैं। तुम अपने इन डोलों-शोलों से मुझे कसकर बाहों में ले लो।”
मैंने उसके नाजुक बदन को कस लिया और अपनी बाहों में जकड़ लिया। हम दोनों का जिस्म एक-दूसरे से चिपक गया था। सच में, क्या मस्त मजा आ रहा था। मैंने उसकी पीठ को सहलाना चालू किया और उसकी गर्दन को चूसना चालू कर दिया। रचना भी अपने कोमल हाथों से मेरी पीठ की मसाज कर रही थी और पागलों की तरह मेरी गर्दन को चूम रही थी।
अब वो मेरे सीने पर हाथ घुमाने लगी और मेरे एक निप्पल को जीभ से कुरेदती हुई चूसने लगी। वो कभी मेरे पेट को, तो कभी मेरी बगल को चूस-चूसकर मुझे मजा दे रही थी। मैंने उसके शरारती मुंह को हाथ में पकड़ लिया और उसके मुंह में एक स्ट्रॉबेरी घुसेड़ दी। उसने मेरे मुंह में एक अंगूर डाल दिया। अगली बार उसने अपने दांतों में स्ट्रॉबेरी पकड़ ली और मेरी तरफ करने लगी। मैंने उस स्ट्रॉबेरी को अपने दांतों से आधा काटकर खा लिया और बाकी आधी उसके मुंह में छोड़ दी।
फिर रचना ने मेरे मुंह में एक और अंगूर डाल दिया। मैंने एक बार अंगूर को चबाया, उतने में ही उसने मेरे मुंह में अपना मुंह डालकर उस अंगूर को खुद के मुंह में लेकर गटक लिया। ऐसा ही कामुक सिलसिला मेरे और रचना के बीच में चलता रहा। हम दोनों को इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था। बिना लंड-चूत की चुदाई के और बिना चूमाचाटी के इस खेल में इतना मजा भी आ सकता है, ये मुझे उस दिन अहसास हुआ। उसके मुंह से आए हुए फलों का स्वाद बहुत ही स्वादिष्ट था।
इसी दौरान सभी फलों का रस उसके होंठों से गर्दन पर और गर्दन से चूचियों पर गिर गया था। रचना ने एक अंगूर खाने के लिए उठाया, लेकिन वो सीधे उसकी चूचियों के बीच की खाई में गिर गया। मैं अपने मुंह से उस अंगूर को निकालने ही वाला था, पर उसने उंगली से उसे ब्लाउज के अंदर धकेल दिया। रचना हंसकर बोली, “बेबी, अब तुम्हें इन दो पंछियों को पिंजरे से आजाद करना पड़ेगा।”
“जानू, तुम्हारे ये पंछी आजाद तो हो जाएंगे, लेकिन इस शिकारी के हाथ उन पंछियों को दबोच लेंगे,” मैंने मुस्कुराकर कहा।
वो बोली, “परवाह नहीं मेरी जान।”
भाग 6 – चूचियों का खेल और चूत चाटने का पहला अनुभव
मैं उसके ब्लाउज के एक-एक बटन को खोलने लगा। हर एक बटन खोलने पर मेरी और रचना की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं। बेचारे आखिरी बटन पर उसके भरे हुए आमों का इतना ज्यादा दबाव आ गया था कि वो उसी दबाव से ही टूट गया और उसके दोनों गोल-गोल, गोरे और मुलायम मम्मे मेरे सामने झूलने लगे। रचना के दोनों मम्मे एक-दूसरे से चिपक गए थे, चूचियों के बीच में बिल्कुल भी जगह नहीं थी। उसके निप्पल काले और लंबे थे। बेचारा अंगूर दोनों चूचियों के बीच में पिचक गया था। उसके चूचियों के सामने वो अंगूर जरा सा लग रहा था।
“रचना जान, मैं भी पागल हूं… इतने बड़े-बड़े दो आम मेरे सामने लटक रहे थे और मैं इन छोटे-छोटे फलों से खेल रहा था,” मैंने कहा।
वो खिलखिलाकर हंस पड़ी। “जानू, तुमने तो मेरा दिल खुश कर दिया। आज तो मैं तुम्हारे ये आम निचोड़कर ही रहूंगा,” मैंने कहा।
अब तक फलों के रस ने उसके चूचियों को भिगोकर मीठा कर दिया था। मैंने उसके चूचियों पर संतरे का रस भी निचोड़ दिया और फिर से उसकी गर्दन को चूसते-चूसते चूचियों को चूसने लगा, उन्हें जोर-जोर से दबाने लगा। रचना मीठे दर्द से मादक भाव से चिल्ला रही थी। लेकिन मेरी भूख उसके चूचियों को देखने के बाद और बढ़ रही थी। करीब पंद्रह मिनट तक मैं उसके चूचियों से खेलता रहा।
अब बारी उसकी चूत की थी। मैं रचना की मुलायम और गोरी टांगों को चाटते और सहलाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया। मैंने उसकी आंखों में आंखें डालीं और धीरे-धीरे से उसकी चड्डी को उतारा। वो भी मेरी नजरों में कामुकता से देख रही थी और “आह-आह” करके अपने होंठों को दांतों से काट रही थी। मैंने उसकी चड्डी को उतारकर अपने हाथ में लिया और नाक से सूंघा। आह! पूरी चूत की महक उस चड्डी से आ रही थी।
फिर मैंने उसके पैरों के बीच नजर डाली… भाई कसम, सामने जन्नत थी जन्नत। “जानू, तुमने इतना प्यारे से खजाने को छुपाकर रखा था… क्या दिख रही है तुम्हारी चूत!” मैंने कहा।
“बेबी, तुम्हारे लिए ही संभालकर रखी है ये चूत… आज जो करना है, कर लो। आज से ये चूत तुम्हारे हवाले कर दी है। जितना इस जिस्म पर मेरा अधिकार है, आज से तुम्हारा भी उतना ही अधिकार है बेबी,” रचना ने प्यार से कहा।
दोस्तों, जैसे गुलाब की गुलाबी नई-नई कली होती है, उसी तरह रचना की चूत थी। जैसे गुलाब का फूल मधुमक्खी को खींचता है, उसी तरह रचना की चूत मेरे लंड को अपनी तरफ खींच रही थी। फर्क सिर्फ इतना है कि गुलाब मधुमक्खी को शहद देता है और चूत, लंड से सफेद शहद यानी वीर्य लेती है। मैंने रचना की चूत को अपने हाथ से ढक लिया।
रचना मदमस्त हो गई। “बेबी, आज तक किसी मर्द का स्पर्श इस चूत को नहीं हुआ था। आज तुमने छुआ है… तो मजा आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि मेरी चूत सबसे सुरक्षित हाथों में है,” वो बोली।
उसके बाद मैंने उसकी चूत को किस किया। मैं एक उंगली उसकी चूत की दरार में घुमाने लगा। रचना धीरे-धीरे “आह… आह… आआह…” की आवाज निकालने लगी। मैंने उसकी चूत की दोनों पंखुड़ियों को अपने हाथ से खोलना चालू किया। अंदर गुलाबी रंग और बाहर गोरा रंग मनमोहक लग रहा था। मैंने उसकी चूत के दाने को स्पर्श किया तो रचना खुशी और मादकता से झूम उठी।
फिर मैंने उसकी चूत की दोनों पंखुड़ियां और ज्यादा खोलीं, जिन्होंने चूत के छेद को ढक रखा था। उसकी चूत सील बंद थी। मैं उसकी चूत के हर एक हिस्से पर अपनी जीभ रगड़ने लगा। रचना पागल सी हो गई। “ओह बेबी… आह बेबी… आह उम्म बेबी चूसो और चूसो!” वो मेरे सिर को अपने पैरों से चूत पर दबा रही थी। उसने चादर को कसकर पकड़ रखा था।
मैंने उसकी चूत पर आइसक्रीम लगा दी और जोर-जोर से चाटने लगा। एक तो चूत का नमकीन स्वाद और ऊपर से आइसक्रीम का मीठा स्वाद—दोनों मिलकर कमाल का स्वाद दे रहे थे। मैंने पांच मिनट तक उसकी चूत को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
भाग 7 – रचना का पहली बार लंड चूसना और चूत में लंड डालना
रचना भी जोश-जोश में उठ गई और उसने मुझे जोर से बेड पर ढकेल दिया। वो मेरी छाती, निप्पल और पेट को बिल्ली की तरह चाटने लगी। जोर-जोर से मेरे बदन को चूसने लगी। उसने मेरी पैंट की चेन और बटन खोल दिया।
“जानू, जरा धीरे… मैं कहीं भागने वाला नहीं हूं,” मैंने कहा।
मैं ऐसा बोल ही रहा था कि उसने मेरे मुंह पर उंगली रख दी। “शअ… कुछ मत बोलना… बस अब मजे लो,” ये कहकर उसने मेरी चड्डी भी निकाल दी।
मेरा तना हुआ काला लंड उसके सामने डोलने लगा। रचना उसे देखकर चौंक गई। “वाह जानू, तुम्हारा ये लंड तो काफी बड़ा है। इसे देखकर तो सांप भी डर जाएगा और तुम्हारे आंड भी काफी बड़े हैं,” वो बोली।
वो मेरे दोनों आंडों पर टूट पड़ी। उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और चाटने-चूसने लगी। क्या चाट रही थी साली… आह! बड़ा मजा आ रहा था। धीरे-धीरे वो मेरे आंडों को चाटने लगी। फिर उसने मेरे पूरे लंड को चॉकलेट से ढक दिया और उसे चूसने लगी। इसी दौरान जो चॉकलेट उसके मुंह में लग गई थी, वो मैंने चाटकर साफ कर दी।
अब मैंने रचना को बेड पर लिटाया। “रचना जान, मेरा सांप तेरे बिल में जाने वाला है,” मैंने कहा।
“जानू, मुझे डर लग रहा है। तुम्हारा लंड इतना बड़ा है कि मेरी चूत कांप रही है,” रचना ने डरते हुए कहा।
“जान, तुम्हें मुझ पर विश्वास है ना! मैं तुम्हारी चूत को ज्यादा दर्द नहीं दूंगा। बस तुम मेरी आंखों में देखती रहना। तुम्हें थोड़ा सा दर्द होगा। वो कहते हैं ना, प्यार का दर्द मीठा-मीठा, प्यारा-प्यारा,” मैंने उसे समझाया।
“जानू, तुम भी ना…” वो हंसने लगी।
रचना की आंखों में दर्द, डर और प्यार सब कुछ एक साथ दिख रहा था। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना चालू किया। उसकी चूत थोड़ी गीली हो गई थी।
“बेबी, तैयार हो?” मैंने पूछा।
उसने हां का इशारा किया। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सेट किया और धीरे-धीरे चूत में दबाना चालू कर दिया। रचना चिल्लाने लगी, “आह जानू… धीरे डालो।” मेरा लंड अंदर जा ही नहीं पा रहा था। मैंने थोड़ा और जोर से धक्का मार दिया। लंड उसकी चूत की सील तोड़कर अंदर घुसने लगा। मेरे लगातार दबाव के कारण लंड उसकी नाजुक चूत को चीरते हुए अंदर घुसता चला गया। रचना ने अपने मुंह पर हाथ रखकर अपनी आवाज को दबाने की कोशिश की। उसकी आंखों से पानी निकल गया।
मैंने और दो-तीन धक्के मारे… तो मेरा लंड आधा अंदर चला गया। इस बार रचना की आवाज जोर से निकल गई, “उईई मां… मर गई मैं… आह जानू, जानू, बहुत दर्द हो रहा है… आं… बाहर निकालो!”
“बेबी, बाहर निकाला तो फिर से डालने में दिक्कत होगी… तुम्हें कुछ नहीं होगा जान… थोड़ी देर दर्द होगा बस!” मैंने उसे समझाया। मैं उसको किस करने लगा, उसके आंसू पीने लगा। वो “उंह-आंह-आंह” करती हुई बिन पानी सी तड़प रही थी।
“बेबी, धीरज रखो, कुछ नहीं होगा,” ये कहकर मैंने एक और जोर से धक्का मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया। रचना ने अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर रखकर जोर से नाखून से मेरी पीठ खरोंच डाली। मेरी पीठ से थोड़ा खून निकलने लगा।
रचना जोर से चिल्लाई, “जानूऊऊ… प्लीज निकाल लो… जल्दी निकालो ना… बहुत दर्द हो रहा है।”
मैंने उसे सहलाना चालू किया, उसके होंठों पर किस करने लगा, उसकी पलकों को किस किया और आंसुओं को चाट लिया। कुछ मिनट के बाद रचना का दर्द कम हो गया।
“जानू, माफ कर दो… मेरी वजह से तुम्हें दर्द झेलना पड़ा,” मैंने प्यार से कहा।
“अरे बेबी, प्यार में इतना दर्द झेलना पड़ता है। आखिर दर्द के बाद ही मजा है। मैंने भी तुम्हारी पीठ से खून निकाला, दर्द हो रहा है क्या?” रचना ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा।
“नहीं जानू, इतनी सी खरोंच से दर्द कहां होगा,” ये कहते हुए मैंने अपने लंड से उसकी चूत में एक जोर का झटका मारा।
“आउच… बेबी जरा धीरे ना!” वो चीखी।
भाग 8 – चूत चुदाई का मजा और रचना का पहला चरमसुख
मैंने धीरे-धीरे रचना की चूत चोदना चालू किया। उसे थोड़ा-बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन साथ ही मजा भी आने लगा था। थोड़ी देर बाद मैंने चुदाई की तेजी बढ़ा दी। रचना अब गर्म होने लगी, उसकी कामुक आवाजें मेरे कानों में गूंज रही थीं। धीमी आवाज में म्यूजिक भी बज रहा था। कमरे में चुदाई का पूरा माहौल बना हुआ था।
रचना अपनी टांगों से मेरी गांड को दबा रही थी। वो अपने हाथों से कभी मेरे बाल तो कभी मेरी पीठ सहला रही थी और मजे से चिल्ला रही थी, “आह… जोर से जानू… और जोर से चोदो मुझे… मेरी फुद्दी फाड़ दो… चोदो और जोर से!”
अब मैं उसकी चूत को तेजी से और पूरा दम लगाकर चोदने लगा था। मेरा लंड उसकी फुद्दी में मक्खन की तरह अंदर-बाहर हो रहा था। करीब बीस मिनट तक चूत चुदाई के बाद मैंने पूरा माल उसकी चूत में भर दिया। मैं दो मिनट के लिए उसी के जिस्म पर ही लेट गया और उसके एक गोल-मटोल मम्मे को चूसने लगा।
हम दोनों का बदन फलों का रस, आइसक्रीम और चॉकलेट की वजह से चिपचिपा हो गया था। इसलिए हम नहाने चले गए। रचना की चूत से मेरा वीर्य टपक रहा था। मेरे रूम में ही बाथरूम था। मैंने उसे खींचकर शॉवर चालू कर दिया।
पानी की बूंदें रचना के जिस्म से टकराकर उसके जिस्म से खिसकती हुई चूत और गांड से नीचे गिर रही थीं। रचना ने मेरा और मैंने रचना का बदन साबुन के झाग से ढक दिया। फिर जैसे ही शॉवर चालू किया, उसके जिस्म से झाग निकल गया और उसका पूरा नंगा बदन दिखने लगा। ये नजारा कपड़े उतारने से भी गजब का सीन था। हमने एक-दूसरे का बदन पोंछ दिया।
रचना बेडरूम की तरफ गांड मटकाकर चलने लगी। उसकी गांड देखकर मेरा मुरझाया हुआ लंड फिर से खड़ा हो गया। कुछ जिद्दी किस्म की पानी की बूंदें उसके चूचियों के उभार पर, निप्पल पर और गांड पर चिपककर अब भी बैठी थीं। मैंने उन सबको चाट लिया।
भाग 9 – गांड चुदाई का पहला अनुभव और प्यार का आखिरी सबूत
रचना ने मेरा खड़ा लंड देखा तो बोली, “बेबी, लगता है मेरे बाबूराव को आज नींद नहीं आ रही है।”
“जानू, कैसे आएगी… इतना गदराया हुआ बदन सामने है,” मैंने कहा।
वो हंसी और मेरे लंड को पकड़कर सहलाने लगी। मैंने कहा, “जानू, मेरा लंड कह रहा है कि इसका चूत से मन भर गया।”
“तो फिर मेरे प्यारे पतिजी का क्या फरमान है, जरा बताइए तो!” रचना लंड को हिलाते हुए बोली।
“रचना, मुझे तुम्हारी गांड चोदनी है,” मैंने सीधे कह दिया।
वो चौंक गई और डरकर बोली, “पागल हो गए हो क्या… ये लंड मेरी गांड को तहस-नहस कर देगा।”
“हम्म… याद है तुमने वादा किया था कि शादी के बाद सुहागरात के दिन तुम जो चाहो, जितना चाहो कर लेना। मैंने तो अपना वादा निभाया, अब वादा निभाने की बारी तुम्हारी है बेबी,” मैंने उसे याद दिलाया।
फिर मैंने खुद ही कहा, “जाने दो जानू, पहले तुम्हारी चूत की सील तोड़ी… और अब गांड को फाड़ना अच्छा नहीं। तुम्हें काफी दर्द होगा। गांड फिर कभी बाद में चुदाई करूंगा, आज मैं चूत से ही काम चला लूंगा।”
रचना मेरे लंड की तरफ देखकर सोचने लगी और फिर बोली, “नहीं जानू नहीं, मैंने तुमसे वादा किया था और मैं ये वादा निभाऊंगी। वादा नहीं भी किया होता, तो भी तुम जब भी बोलते, तब मेरे जिस्म का हर एक हिस्सा तुम्हारे लिए हाजिर है। मैं तुमसे जान से भी ज्यादा प्यार करती हूं। मेरी गांड आज फट भी जाए तो भी मैं सहन कर लूंगी।”
“जानू, मुझे पता है तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो, पर मुझसे तेरा दर्द नहीं देखा जाएगा,” मैंने कहा।
“और बेबी, अगर आज तुमने मेरी गांड नहीं मारी, तो मुझे बहुत बुरा लगेगा कि मैं तुम्हारी एक जरा सी इच्छा पूरी नहीं कर पाई। इसका मेरे मन में खेद रहेगा,” रचना ने जिद की।
रचना पलट गई और मेरे मुंह के सामने अपनी गांड हिलाने लगी। रचना ने अपनी गांड मेरे लिए साफ करके रखी थी। मैं बहुत खुश हो गया कि मुझे इतनी अच्छी और समझदार पत्नी मिली है।
क्या मुलायम और गदराई हुई गांड थी उसकी! मैंने रचना के दोनों कूल्हों पर हाथ लगाया। उसकी गांड तकिए की तरह मुलायम थी। उसके कूल्हों को सहलाते-सहलाते बीच में ही मैं मसल देता था। इससे उसकी चीख निकल रही थी। मैंने अपनी एक उंगली उसकी गांड की दरार में घुमाई, फिर अपनी जीभ घुमा दी। पर उसकी गांड की गहराई इतनी थी कि मेरी जीभ नीचे तक नहीं पहुंच रही थी।
मैं उसकी गांड की खुशबू सूंघने लगा। उसकी गांड की खुशबू ने मुझे पागल सा बना दिया और मैं उसकी गांड को कुत्ते की तरह चाटने लगा। कुछ मिनट तक मैं कभी उसकी गांड का छेद चाटता, तो कभी उसके कूल्हे जोर-जोर से चाटने लगता था। मैं उसकी गांड के छेद में जीभ डालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन छेद इतना टाइट था कि अंदर ही जीभ नहीं जा रही थी।
मैंने अपना लंड उसके मुंह में डालकर गीला करवाया और रचना की नर्म गांड के छेद पर सेट कर दिया। धीरे-धीरे मैंने लंड को गांड में दबाना शुरू किया। जरा सा लंड अंदर गया भी नहीं था कि रचना की चीखें निकलने लगीं, “बेबी, धीरे डालो, दर्द हो रहा है।” मैंने फिर से गांड में लंड पेलना चालू किया, लेकिन गांड का छेद इतना छोटा था कि लंड जा ही नहीं पा रहा था। मैंने कम से कम दस बार प्रयास किया, लेकिन सिर्फ लंड का सुपारा ही अंदर जा पा रहा था।
अब मैंने वाइब्रेटर का इस्तेमाल किया। पहले मैंने एक उंगली उसकी गांड में डाली, एक उंगली उसकी चूत में डाली और दोनों उंगलियों को अंदर हिलाने लगा। रचना गर्म होने लगी। उसी मौके का फायदा उठाते हुए मैंने वाइब्रेटर उसकी चूत के दाने पर रखा और रगड़ने लगा। उसके पूरे शरीर में एक सनसनी सी आ गई, वो मछली की तरह तड़पने लगी। वो पूरी तरह से मचल रही थी, “आह बेबी, ये क्या कर रहे हो… आह उम उम आई मां… रुको यार, इतना मत तड़पाओ।”
रचना सातवें आसमान पर थी। आखिरकार, कुल दो मिनट में ही रचना ने पूरा पानी मेरे मुंह पर छोड़ दिया।
जब मैंने उसकी गांड में लंड डाला तो रचना की हालत काफी खराब हो चुकी थी। उसके पांव, मम्मे और गांड कांप रहे थे। मैंने अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया और धीरे-धीरे उसकी गांड चोदने लगा। कुछ मिनट बाद मैंने अपनी चोदने की तेजी थोड़ी और बढ़ाई। “जानू, क्या तुम पूरी तेजी के साथ चुदने के लिए तैयार हो?” मैंने पूछा।
“हां बेबी, मैं तैयार हूं। फाड़ दो आज मेरी गांड,” उसने कहा।
अब मैं पूरी तेजी के साथ रचना की गांड को चोदने लगा। हमारे कमरे में बस “फच-फच-फच…” और “आह… उम… आह… आह… बेबी और जोर से… और जोर से फाड़ दो गांड को…” की आवाजें आ रही थीं। उस वक्त मैंने रचना की गांड को हर एक पोजीशन में चोद डाला। लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी गांड में ही झड़ गया।
लेकिन रात यहीं खत्म नहीं हुई। मैंने और दो बार उसकी चूत और गांड को चोदा। सुबह तक हम थक कर बेहाल हो गए थे, लेकिन हमारे चेहरे पर सिर्फ संतुष्टि थी।
भाग 10 – सुबह का प्यार और हमेशा के लिए एक-दूसरे के नाम
जब मैं सुबह उठा तो रचना सोई हुई थी। उसके बालों में हाथ घुमाकर मैंने उसके गाल पर किस किया और उसे सोने दिया। मैंने पूरा नाश्ता और कॉफी रचना के लिए तैयार की।
थोड़ी देर बाद रचना जग गई। मैं अखबार पढ़ रहा था। रचना नंगी ही रूम से बाहर आई। उसकी गांड और चूत पर मेरा सूखा हुआ वीर्य दिख रहा था और वो गांड के दर्द की वजह से ठीक से चल नहीं पा रही थी। मैं झट से उसके पास चला गया, उसे गोद में उठाकर सोफे पर लेकर आ गया।
मैंने उसकी गांड और चूत को देखा। दोनों में सूजन आ गई थी। उसके दर्द को देखकर मेरी आंखों में पानी आ गया। “जानू, इतना दर्द हो रहा था तो रात को क्यों नहीं बताया?” मैंने पूछा।
रचना ने पहले मेरे आंसू पोंछे और फिर बोली, “चलो फिर से चुदाई शुरू करते हैं।”
“नहीं जानू, तुम्हारे दोनों छेद सूज गए हैं और ऐसे में मैं तुम्हें कैसे चोद सकता हूं?” मैंने कहा।
“बेबी, इसलिए मैंने तुम्हें अपने दर्द के बारे में नहीं बताया था… अगर मैं बता देती, तो तुम मुझे रात भर नहीं चोदते। रात में मैं तुम्हें बस खुश देखना चाहती थी और इस लंड की भूख मिटाने के लिए मैंने तुम्हें कुछ नहीं बताया था,” रचना ने प्यार से कहा।
मैं उसकी इस बात पर भावुक हो गया। मैंने फिर से उसको गले लगाया और कहा, “कितनी प्यारी हो तुम रचना। चलो, आज का दिन तुम्हारा हर एक काम मैं करूंगा। तुम बस चुपचाप बैठी रहना।”
मैंने उसे कॉफी पिलाई, नाश्ता खिलाया, उसको नहलाया, उसके बदन को पोंछा। उसे पोंछते-पोंछते मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। ये रचना ने देख लिया। फिर रचना ने अपनी गांड आगे की और बोली, “जिस छेद में लंड डालना चाहते हो, डाल दो।”
“जानू, मैं पागल नहीं हूं कि इस हालत में तुम्हें चोदूं,” मैंने कहा।
“बेबी, मेरे इस प्यारे से लंड बाबू को भूख लगी है… और इसका खाना मेरी गांड और चूत के पास ही है। मैं इसे भूखा नहीं रख सकती,” रचना ने जिद की।
“रचना, मैं तुम्हें नहीं चोदने वाला,” मैंने दृढ़ता से कहा।
“ठीक है, मेरे पास इसका इलाज है,” रचना ने कहा। वो अपने घुटनों पर बैठ गई और मेरा पूरा लंड उसने अपने मुंह में ले लिया। दस मिनट तक लंड चूसने के बाद मैं उसके मुंह में ही झड़ गया।
उस दिन रचना का मेरे प्रति प्रेम देखकर मैं बहुत खुश हुआ और मैंने उसे वचन दिया कि मैं तुम्हें हर वक्त, हर पल खुश रखूंगा। उस दिन मैंने रचना की पूरी सेवा की।
भाग 11 – आजकल की जिंदगी और अंत
हमारी शादी-शुदा जिंदगी बहुत अच्छी चल रही है। मुझे तो रचना से कभी सेक्स के लिए पूछना भी नहीं पड़ता। वो हमेशा मुझे सरप्राइज कर देती है। कभी-कभी वो सुबह-सुबह मेरा लंड चूसकर मुझे नींद से उठाती है, तो कभी ऑफिस से आते ही वो मेरे ऊपर टूट पड़ती है। हफ्ते में एक दिन वो मुझे अपनी गांड भी चोदने देती है। हम दोनों नए-नए सेक्स पोजीशन और नई-नई गंदी सेक्स फैंटेसी भी आजमाते रहते हैं। वो मुझे कभी भी कुछ भी करने से मना नहीं करती। इसीलिए मैं भी उसे रानी की तरह रखता हूं और उसे खूब प्यार करता हूं।
आज भी जब मैं उस रात को याद करता हूं, तो मेरी आंखों में सिर्फ रचना का चेहरा आता है—भरोसा, प्यार और थोड़ी सी शरारत। उस रात मैंने सिर्फ एक पत्नी नहीं पाई, बल्कि एक ऐसा हमसफर पाया जो मेरी हर इच्छा को समझती है, मेरी हर कमजोरी को अपनाती है। रचना ने मुझे सिखाया कि असली प्यार शरीर से नहीं, दिल से होता है। आज हम दोनों खुश हैं, एक-दूसरे के साथ हर पल जीते हैं।
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