पति को सिखाया बेरहम सेक्स – क्या आपने कभी सोचा है कि एक पत्नी अपने प्यारे और सीधे-साधे पति को कैसे बेरहम सेक्स सिखाती है? यह हिंदी सेक्स कहानी उसी सफर की है जहाँ सुप्रिया ने अपने पति रोहन को धीरे-धीरे पति को सिखाया बेरहम सेक्स और उसे अपनी हर हवस, हर इच्छा, और हर फैंटेसी का शिकार बना लिया। यह कहानी उस औरत की है जो अपने पति से बहुत प्यार करती है, लेकिन चाहती है कि वो उसे सिर्फ प्यार से नहीं, बल्कि बेरहमी से चोदे — उसका मुँह चोदे, उसकी गांड चोदे, उसे थप्पड़ मारे, उसे अपनी रंडी बनाए, और उस पर अपनी पूरी हवस उतारे। यह कहानी उस औरत की है जिसने अपने पति को सिखाया कि प्यार सिर्फ धीरे-धीरे चुदाई में नहीं, बल्कि बेरहम चुदाई में भी होता है। अगर आपको पति-पत्नी का बदलता रिश्ता, बेरहम सेक्स, गांड चुदाई, मुँह चोदना, थप्पड़ मारना, पेशाब पीना, और सबमिसिव पत्नी की कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ सिर्फ आपके लिए है।
भाग 1: पति को सिखाया बेरहम सेक्स – शादी और सुप्रिया की छिपी हुई चाहत
मेरा नाम सुप्रिया है। उम्र 27 साल, गोरा रंग, सुंदर चेहरा, और शरीर ऐसा कि कोई भी मर्द देख ले तो उसकी आँखें मुझ पर ही टिक जाएँ। मेरे बड़े-बड़े दूध हैं जो हर साड़ी और हर ब्लाउज में उभरकर दिखते हैं, मोटी गांड है जो चलने पर लहराती है, और पतली कमर है जो मेरे फिगर को और भी निखारती है। मैं हमेशा से जानती थी कि मैं खूबसूरत हूँ, और मुझे अपनी खूबसूरती पर गर्व भी था। जब भी मैं बाज़ार जाती, मर्द मुझे घूरते, और औरतें मुझसे जलतीं। लेकिन मेरी असली खूबसूरती मेरे अंदर छिपी थी — मेरी हवस, मेरी इच्छाएँ, और मेरी फैंटेसी। और वो सब मैंने कभी किसी को नहीं बताई थीं।
मेरी शादी रोहन से हुई है। रोहन बहुत ही अच्छे इंसान हैं — बहुत प्यार करने वाले, बहुत केयरिंग, और बहुत ही समझदार। वो मेरा बहुत ध्यान रखते हैं, मुझसे बहुत प्यार करते हैं, और मुझे कभी कोई तकलीफ नहीं होने देते। शादी के बाद से ही वो मेरे साथ बहुत अच्छे रहे हैं — हमेशा प्यार से बात करना, हमेशा मेरा ख्याल रखना, और हमेशा मुझे खुश रखने की कोशिश करना। वो मेरे लिए खाना बनाते हैं, मेरे लिए चाय लाते हैं, और मेरी हर छोटी-बड़ी ज़रूरत का ध्यान रखते हैं। मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि मुझे ऐसा पति मिला। मेरे सारे दोस्त और रिश्तेदार कहते हैं कि रोहन जैसा पति हर किसी को नहीं मिलता। और ये सच भी है।
लेकिन एक बात है जो मैं कभी किसी को नहीं बताई। दरअसल, मैं अंदर से बहुत ही अलग हूँ। मैं जितनी बाहर से सीधी और शांत दिखती हूँ, उतनी अंदर से नहीं हूँ। मुझे बहुत ही गंदा और बेरहम सेक्स पसंद है। मैं चाहती हूँ कि मेरा पति मुझे सिर्फ प्यार से न चोदे, बल्कि मुझे बेरहमी से चोदे। मुझे अपनी रंडी बनाए, मुझ पर अपनी पूरी हवस उतारे, मुझे दर्द दे, मुझे रुलाए, और मुझे अपनी गुलाम बनाकर रखे। मैं चाहती हूँ कि वो मुझे थप्पड़ मारे, मुझ पर पेशाब करे, मेरा गला चोदे, मेरी गांड चोदे, और मुझे अपनी पूरी हवस का शिकार बनाए। मैं चाहती हूँ कि वो मुझसे प्यार भी करे और मुझे बेरहमी से चोदे भी। मैं चाहती हूँ कि वो मेरा मालिक बने, और मैं उसकी गुलाम। यही मेरी सबसे बड़ी चाहत है, और यही मेरा सबसे गहरा राज़ है।
शादी के शुरुआती दिनों में रोहन बहुत ही धीरे और प्यार से सेक्स करते थे। वो मुझसे पूछते, “सुप्रिया, क्या मैं ऐसे करूँ? क्या तुम्हें अच्छा लग रहा है? क्या मैं और तेज़ करूँ?” वो हर बात मुझसे पूछते थे, और मैं शर्म से सिर्फ हाँ कह देती थी। वो मुझे बहुत धीरे से चूमते, बहुत धीरे से छूते, और बहुत धीरे से चोदते। उन्हें लगता था कि वो मुझे दर्द नहीं देना चाहते, और इसलिए वो बहुत सावधानी से सेक्स करते थे। लेकिन मेरे अंदर एक तूफान चल रहा था। मैं चाहती थी कि वो मुझसे बिना पूछे मुझे चोदें, मुझे दबाएँ, मुझे मारें, और मुझ पर अपनी हवस निकालें। मैं चाहती थी कि वो मुझे अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ें, मुझे ज़ोर से चोदें, और मुझे रुला दें। लेकिन मैं कुछ कह नहीं पाती थी — क्योंकि मुझे लगता था कि अगर मैं ऐसा कहूँगी, तो वो मुझे गलत समझेंगे। वो सोचेंगे कि मैं अच्छी औरत नहीं हूँ, कि मुझे गंदी चीज़ें पसंद हैं, कि मैं कोई रंडी हूँ जो सिर्फ चुदाई चाहती है। मुझे डर था कि कहीं वो मुझसे नफरत न करने लगें, कहीं वो मुझे छोड़ न दें। इसलिए मैं चुप रहती थी, और अपनी हवस को अंदर ही दबाए रखती थी।
लेकिन मैं जानती थी कि अगर मैंने अपनी इच्छाएँ उनसे नहीं कहीं, तो मैं कभी खुश नहीं रह पाऊँगी। मैं हमेशा अंदर से अधूरी रहूँगी, और हमारा रिश्ता भी कभी पूरा नहीं होगा। मैं हमेशा यही सोचती कि काश रोहन मुझे बेरहमी से चोदें, काश वो मुझ पर अपनी हवस उतारें, काश वो मुझे अपनी रंडी बनाएँ। और इसीलिए मैंने सोचा कि मैं धीरे-धीरे उन्हें अपनी फैंटेसी के बारे में बताऊँगी। मैं उन्हें सिखाऊँगी कि मुझे क्या पसंद है, और कैसे वो मुझे चोदें। मैं उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाऊँगी, और उन्हें भी अपनी हवस का शिकार बनाने दूँगी। यही मेरा प्लान था, और मैंने तय कर लिया कि मैं इसे पूरा करूँगी। मैं अपने पति को बेरहम सेक्स सिखाऊँगी, और उसे अपना मालिक बनाऊँगी। यही मेरी कहानी है — पति को सिखाया बेरहम सेक्स की कहानी। और यह कहानी अब शुरू होती है।
भाग 2: पति को सिखाया बेरहम सेक्स – पहली बार अपनी इच्छा ज़ाहिर करना
शादी के करीब एक महीने बाद मैंने पहली बार रोहन से अपनी बात कही। उस रात हम दोनों बिस्तर पर थे, और रोहन मुझे प्यार से चूम रहे थे। उनका हाथ मेरी कमर पर था, और वो मुझे धीरे-धीरे सहला रहे थे। उनका हाथ जब मेरी कमर से मेरे दूध की तरफ बढ़ा, तो मैंने उनके हाथ को पकड़ लिया और धीरे से कहा, “रोहन, मुझे तुमसे कुछ कहना है।”
वो रुके और मेरी तरफ देखा। “क्या, सुप्रिया? कुछ हुआ? तुम ठीक हो?”
मैंने गहरी साँस ली। मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, और मेरी हथेलियाँ पसीने से तर हो गई थीं। मैं बहुत घबराई हुई थी, क्योंकि मैं पहली बार अपनी सबसे गहरी चाहत को शब्दों में बयां करने जा रही थी। मैंने हिम्मत जुटाई और कहा, “मैं… मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे सिर्फ प्यार से नहीं, बल्कि… थोड़ा बेरहमी से भी चोदो।”
रोहन हैरान रह गए। उनकी आँखें चौड़ी हो गईं, और वो कुछ पल के लिए चुप रहे। फिर बोले, “बेरहमी से? मतलब?”
“मतलब… मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे ज़ोर से चोदो,” मैंने कहा, मेरी आवाज़ धीमी थी लेकिन दृढ़ थी। “मुझे दबाओ, मुझे मारो, मुझे अपनी मुट्ठी में रखो। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझ पर अपनी पूरी हवस उतारो। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझसे बिना पूछे मुझे चोदो, और मैं तुम्हारे नीचे तड़पूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे अपनी रंडी बनाओ, और मुझ पर पूरी तरह से राज करो।”
रोहन कुछ देर चुप रहे। उनके चेहरे पर उलझन थी, और उनकी आँखों में एक अजीब सी उथल-पुथल चल रही थी। वो बोले, “लेकिन सुप्रिया, मैं तुम्हें दर्द नहीं देना चाहता। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। मैं तुम्हें कभी चोट नहीं पहुँचाना चाहता। तुम मेरी पत्नी हो, और मैं तुम्हारा पति। मेरा फर्ज़ है कि मैं तुम्हारा ख्याल रखूँ, तुम्हें प्यार दूँ, और तुम्हें कभी दुख न दूँ।”
“मुझे पता है,” मैंने कहा और उनका चेहरा अपने हाथों में ले लिया। मैंने उनकी आँखों में देखा, और प्यार से कहा, “और मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। लेकिन मुझे थोड़ा दर्द अच्छा लगता है। मुझे अच्छा लगता है जब तुम मुझे चोदते हो और मैं तुम्हारे नीचे तड़पती हूँ। मैं तुम्हारी हूँ, रोहन। तुम मेरे साथ कुछ भी कर सकते हो। मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी। मैं हमेशा खुश रहूँगी, क्योंकि तुम मेरे पति हो, और मैं तुम्हारी पत्नी। मैं तुम्हारे लिए सब कुछ सह सकती हूँ, और सब कुछ कर सकती हूँ।”
रोहन ने मुझे गौर से देखा। उनकी आँखों में अब भी उलझन थी, लेकिन साथ ही एक हल्की सी चमक भी थी — जैसे उनके अंदर भी कुछ जाग रहा हो। वो बोले, “क्या तुम सच में ऐसा चाहती हो?”
“हाँ, रोहन,” मैंने कहा। “मैं तुम्हारी पत्नी हूँ। तुम्हें मुझसे पूछने की ज़रूरत नहीं है। तुम जब चाहो, जैसे चाहो, वैसे कर सकते हो। मैं हमेशा खुश रहूँगी। मैं तुम्हारी हूँ, और सिर्फ तुम्हारी।”
ये सुनकर रोहन के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आई। वो बोले, “ठीक है, सुप्रिया। अगर तुम यही चाहती हो, तो मैं तुम्हारी बात मानूँगा। अगर तुम्हें बेरहम सेक्स पसंद है, तो मैं तुम्हें बेरहमी से चोदूँगा।”
उस रात रोहन ने मुझे पहली बार थोड़ा ज़ोर से चोदा। वो अब भी प्यार से कर रहे थे, लेकिन उनमें थोड़ा जोश ज़्यादा था। उन्होंने मेरे दूध ज़ोर से दबाए, मेरी गांड पकड़ी, और मुझे पहले से ज़्यादा ताकत से चोदा। उनकी रफ्तार पहले से तेज़ थी, और उनके धक्के पहले से गहरे थे। मैं उनके नीचे कराह रही थी, और मेरे अंदर की आग पहली बार थोड़ी शांत हुई थी। मैंने उनसे कहा, “और ज़ोर से, रोहन। मुझे और चाहिए।”
रोहन ने मेरी बात मानी, और मुझे और ज़ोर से चोदा। उन्होंने मेरी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा, और मेरे दूध को और कसकर दबाया। मैं खुशी से चीख पड़ी, और उनसे लिपट गई। वो मुझ पर अपनी हवस उतार रहे थे, और मुझे ये बहुत पसंद आ रहा था। लेकिन मैं जानती थी कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। अभी तो बहुत कुछ बाकी है। अभी तो मैंने उन्हें सिर्फ पहला कदम सिखाया है। अभी तो उन्हें और भी बहुत कुछ सीखना है, और मुझे उन्हें सिखाना है। यही मेरा मकसद है, और मैं इसे पूरा करूँगी। मैं अपने पति को बेरहम सेक्स सिखाऊँगी, और उसे अपनी हवस का शिकार बनाऊँगी। और यह सफर अभी शुरू हुआ है।
भाग 3: पति को सिखाया बेरहम सेक्स – ब्लोजॉब और मुँह चोदना
अगले कुछ हफ्तों में मैंने रोहन को धीरे-धीरे और चीज़ें सिखाईं। मैंने उनसे कहा कि वो मेरा मुँह चोदें। पहले तो वो झिझके, लेकिन मैंने उन्हें समझाया, “रोहन, तुम्हारा लंड मेरे मुँह में जाएगा, और मैं उसे चूसूँगी। ये मुझे बहुत पसंद है। तुम बस अपना लंड मेरे मुँह में डालो, और मुझे चोदो। मैं तुम्हारे लिए अपना मुँह खोलती हूँ, और तुम मुझे चोदो।”
रोहन ने धीरे-धीरे मेरा मुँह चोदना शुरू किया। पहले तो वो बहुत धीरे करते थे, और बीच-बीच में पूछते, “सुप्रिया, क्या तुम्हें अच्छा लग रहा है?” मैं उन्हें कहती, “हाँ, और ज़ोर से करो। मेरे गले तक ले जाओ। मुझे अच्छा लगता है।” रोहन थोड़ा और ज़ोर से करते, लेकिन फिर भी उनके अंदर झिझक थी। वो मुझे चोट नहीं पहुँचाना चाहते थे।
लेकिन मैं जानती थी कि मुझे उन्हें और सिखाना है। मैंने उनसे कहा, “रोहन, मुझे डर लगता है कि तुम मुझे उतना नहीं चोदते जितना मैं चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरा मुँह पूरी तरह से चोदो। मेरे गले में अपना लंड डालो, और मुझे साँस लेने मत दो। मैं तुम्हारे लिए सब सह लूँगी।” ये सुनकर रोहन ने मुझे और ज़ोर से मुँह चोदना शुरू किया। वो मेरा सिर पकड़ते, और अपना लंड मेरे मुँह में डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदते। मेरी लार उनके लंड पर बहती, और मैं उनके बॉल्स को सहलाती। जब वो मेरे मुँह में झड़ते, तो मैं उनका सारा माल पी जाती। वो बहुत खुश होते, और मुझसे और भी प्यार करते।
एक दिन मैंने उनसे कहा, “रोहन, मैं चाहती हूँ कि तुम मेरा गला चोदो।”
वो हैरान रह गए। “गला? वो तो बहुत मुश्किल है। तुम्हें साँस नहीं आएगी। तुम्हारी आँखों से पानी निकलेगा, और तुम्हें उल्टी भी आ सकती है।”
“मुझे पता है,” मैंने कहा। “लेकिन मैं चाहती हूँ। तुम मेरा गला चोदो, और मुझे साँस लेने मत दो। मैं तुम्हारे लिए सब सह लूँगी। मैं तुम्हारी हूँ, रोहन। मैं तुम्हारी गुलाम हूँ।”
रोहन ने फिर से मेरा मुँह चोदा, लेकिन इस बार उन्होंने अपना लंड मेरे गले तक ले जाने की कोशिश की। मेरा गला भर गया, और मुझे साँस लेने में दिक्कत होने लगी। मेरी आँखों से पानी निकलने लगा, और मेरा चेहरा लाल हो गया। मेरी छाती ज़ोर से उठ-गिर रही थी, और मुझे लग रहा था कि मेरा दम घुट जाएगा। लेकिन मैंने उन्हें रोका नहीं। मैं उनके लिए सब सहना चाहती थी। कुछ देर बाद रोहन मेरे गले में झड़ गए, और मैंने उनका सारा माल निगल लिया। मेरा गला जल रहा था, लेकिन मेरा दिल खुशी से भरा था। मैंने उनके लिए ये सब किया था, और मुझे इस पर गर्व था।
“सुप्रिया, तुम कितनी अच्छी हो,” रोहन ने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा। “तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया। तुम सच में मेरी सबसे अच्छी पत्नी हो।”
“और तुम कितने अच्छे हो,” मैंने मुस्कुराकर कहा। “अब मुझे और चीज़ें सिखाओ। मैं तुम्हारे लिए और भी कुछ करना चाहती हूँ। मैं तुम्हारी रंडी बनना चाहती हूँ, और तुम्हारी हर हवस का शिकार बनना चाहती हूँ।”
भाग 4: पति को सिखाया बेरहम सेक्स – गांड चुदाई की शुरुआत
एक दिन मैंने रोहन से कहा, “रोहन, क्या तुम मेरी गांड चोदना चाहोगे?”
वो चौंक गए। “गांड? वहाँ? लेकिन वो तो बहुत दर्दनाक होता है। तुम्हें बहुत दर्द होगा, और शायद तुम्हें खून भी निकल जाए।”
“हाँ,” मैंने कहा। “लेकिन मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी गांड चोदो। मैंने अपनी गांड साफ कर ली है, ताकि तुम्हें अच्छा लगे। मैं तुम्हारे लिए पूरी तरह तैयार हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी गांड चोदो, और मुझे दर्द दो। मैं तुम्हारा दर्द सह सकती हूँ।”
रोहन थोड़ा झिझके, लेकिन फिर मान गए। वो मुझसे बहुत प्यार करते थे, और मेरी हर खुशी के लिए कुछ भी कर सकते थे। उस रात मैंने उन्हें अपनी गांड दी। मैंने उनसे कहा कि वो पहले मुझे चूत चोदें, फिर गांड चोदें। रोहन ने पहले मेरी चूत चोदी, और जब मैं पूरी तरह गीली हो गई, तो उन्होंने मेरी गांड चोदना शुरू किया। पहले तो बहुत दर्द हुआ, लेकिन मैंने सब सहा। मेरी गांड में उनका लंड घुस रहा था, और मुझे लग रहा था कि मेरी गांड फट जाएगी। लेकिन मैंने अपने दाँत भींच लिए, और उन्हें रोका नहीं।
रोहन बीच-बीच में रुकते और पूछते, “सुप्रिया, दर्द हो रहा है? मैं रुक जाऊँ?”
मैं कहती, “नहीं, रोहन। तुम रुको मत। मैं तुम्हारा दर्द सह सकती हूँ। मुझे थोड़ा दर्द अच्छा लगता है। मैं तुम्हारी हूँ। मैं तुम्हारी रंडी हूँ।”
धीरे-धीरे रोहन ने मेरी गांड चोदना सीख लिया। अब वो बिना झिझके मेरी गांड चोदते, और मुझे बहुत अच्छा लगता। मैं उनके नीचे कराहती, चीखती, और उनसे और ज़ोर से चोदने के लिए कहती। रोहन मेरी गांड को पूरी ताकत से चोदते, और मैं उनके हर धक्के को महसूस करती। उनका लंड मेरी गांड में आगे-पीछे होता, और मैं उनके नीचे तड़पती। मुझे ये बहुत पसंद था। मेरी गांड अब उनकी हो गई थी, और मुझे इस पर गर्व था।
एक दिन मैंने उनसे कहा, “रोहन, मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी गांड चोदने के बाद अपना गंदा लंड मेरे मुँह में डालो।”
रोहन हैरान रह गए। “गंदा लंड? मुँह में? लेकिन वो तो बहुत गंदा होगा।”
“हाँ,” मैंने कहा। “मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी गांड चोदो, और फिर अपना लंड मेरे मुँह में डालकर मुझे चूसने को कहो। मैं तुम्हारा गंदा लंड चूसूँगी। मुझे तुम्हारा हर हिस्सा प्यारा है, और मैं तुम्हारा गंदा लंड भी चूसना चाहती हूँ।”
रोहन ने ऐसा ही किया। उन्होंने मेरी गांड चोदी, और फिर अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने उनका गंदा लंड चूसा, और उनका स्वाद मेरे मुँह में भर गया। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं उनकी हवस का शिकार बन रही थी, और मुझे ये बहुत पसंद था। मैं उनकी गुलाम थी, और वो मेरे मालिक थे। यही मेरी पहचान थी, और यही मेरी खुशी थी।
भाग 5: पति को सिखाया बेरहम सेक्स – थप्पड़ और रंडी बनाना
अब रोहन मुझे बेरहमी से चोदना सीख चुके थे। वो मेरी चूत चोदते, मेरी गांड चोदते, और मेरा मुँह चोदते। मैं उनके लिए सब कुछ करती, और वो मुझसे बहुत प्यार करते। लेकिन मैं चाहती थी कि वो मुझे थप्पड़ भी मारें, मुझे मारें, और मुझे अपनी रंडी कहकर बुलाएँ। मैं चाहती थी कि वो मुझे सिर्फ प्यार से नहीं, बल्कि गुस्से से भी चोदें। मैं चाहती थी कि वो मुझ पर अपनी पूरी हवस उतारें, और मुझे अपनी रंडी बनाएँ।
एक रात, जब रोहन मुझे चोद रहे थे, मैंने कहा, “रोहन, मुझे थप्पड़ मारो।”
वो रुके। “थप्पड़? लेकिन क्यों?”
“हाँ,” मैंने कहा। “मेरी गांड पर, मेरे चेहरे पर, मेरी चूत पर। मुझे मारो। मुझे अच्छा लगता है। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे अपनी रंडी बनाओ, और मुझ पर अपनी हवस उतारो। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे मारो, और मैं तुम्हारे लिए रोऊँ।”
रोहन थोड़ा झिझके, लेकिन फिर उन्होंने मेरी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा। मैंने कहा, “और ज़ोर से। मुझे और चाहिए। मुझे और दर्द चाहिए।”
फिर उन्होंने और ज़ोर से मारा। मेरी गांड लाल हो गई, और मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर उन्होंने मेरे चेहरे पर हल्का सा थप्पड़ मारा। मैं चीख पड़ी, लेकिन मुस्कुरा भी रही थी। “और ज़ोर से, रोहन। मुझे मारो। मुझे अपनी रंडी बनाओ। मुझ पर अपनी हवस उतारो।”
रोहन ने मुझे और थप्पड़ मारे। मेरा चेहरा लाल हो गया, और मेरी आँखों में आँसू आ गए। लेकिन मैं बहुत खुश थी। मैं उनकी रंडी बन चुकी थी, और मुझे ये बहुत पसंद था। उन्होंने मेरी चूत पर भी थप्पड़ मारे, और मैं दर्द से चीख पड़ी। लेकिन मैंने उन्हें रोका नहीं, क्योंकि मैं जानती थी कि यही मेरी ज़िंदगी है — उनकी रंडी बनकर रहना, और उनकी हर हवस का शिकार बनना।
फिर रोहन ने कहा, “तू मेरी रंडी है, सुप्रिया। मेरी निजी रंडी।”
“हाँ, मैं तुम्हारी रंडी हूँ,” मैंने कहा। “तुम्हारी हवस का शिकार। तुम्हारी गुलाम।”
रोहन ने मुझे और ज़ोर से चोदा, और मुझे और थप्पड़ मारे। मैं उनके नीचे तड़प रही थी, चीख रही थी, और रो रही थी। लेकिन मैं बहुत खुश थी। मैं उनकी हो चुकी थी, और मुझे ये बहुत पसंद था। मैं उनकी पत्नी थी, उनकी रंडी थी, और उनकी गुलाम थी। और यही मेरी असली पहचान थी।
भाग 6: पति को सिखाया बेरहम सेक्स – पेशाब पीना और अंदर पेशाब करना
एक दिन मैंने रोहन से कहा, “रोहन, मैं चाहती हूँ कि तुम मुझ पर पेशाब करो।”
वो चौंक गए। “क्या?”
“हाँ,” मैंने कहा। “मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे मुँह में पेशाब करो, और मैं उसे पी जाऊँ। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझ पर अपना पेशाब डालो, और मैं उसे साफ करूँ। मैं तुम्हारी गुलाम हूँ, और मुझे तुम्हारा हर हिस्सा प्यारा है।”
रोहन बहुत हैरान हुए, लेकिन उन्होंने मेरी बात मान ली। उन्होंने मुझे बाथरूम में बुलाया, और मेरे मुँह में पेशाब किया। मैंने उनका पेशाब पिया, और मुझे बहुत अच्छा लगा। वो मेरे अंदर पेशाब कर रहे थे, और मैं उनका हर बूँद पी रही थी। उनका गर्म पेशाब मेरे मुँह में भर गया, और मैंने उसे निगल लिया। मैं उनकी गुलाम थी, और मुझे ये पसंद था। मैं उनके लिए कुछ भी कर सकती थी, और ये मेरी सबसे बड़ी खुशी थी।
फिर मैंने कहा, “रोहन, अब मेरी चूत में पेशाब करो।”
रोहन ने मेरी चूत में पेशाब किया। उनका गर्म पेशाब मेरी चूत के अंदर भर गया, और बाहर बहने लगा। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं उनकी हवस का शिकार थी, और मुझे ये सब बहुत पसंद था। मैं उनकी गुलाम थी, और वो मेरे मालिक थे। उन्होंने मेरी गांड में भी पेशाब किया, और मैंने उसे सहा। मैं उनके लिए सब कुछ सह सकती थी, और ये मेरी सबसे बड़ी ताकत थी।
“सुप्रिया, तुम सच में मेरी सबसे अच्छी रंडी हो,” रोहन ने कहा। “तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो।”
“हाँ, रोहन,” मैंने कहा। “मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ। मैं तुम्हारी गुलाम हूँ, और तुम मेरे मालिक हो।”
भाग 7: पति को सिखाया बेरहम सेक्स – पूरी रात बेरहम चुदाई
अब रोहन मुझे पूरी तरह से बेरहमी से चोदते थे। वो मेरी चूत, गांड, और मुँह — तीनों छेदों में चुदाई करते। वो मुझे थप्पड़ मारते, मुझे रंडी कहते, और मुझ पर पेशाब करते। मैं उनकी हर बात मानती, और उनके लिए सब कुछ करती। मैं उनकी पत्नी थी, उनकी रंडी थी, और उनकी गुलाम थी। और मुझे ये सब बहुत पसंद था। मैं उनके बिना एक पल भी नहीं रह सकती थी, और वो मेरे बिना।
एक रात रोहन ने मुझे पूरी रात बेरहमी से चोदा। उन्होंने मेरी चूत को इतना चोदा कि मैं चल भी नहीं पा रही थी। उन्होंने मेरी गांड को इतना चोदा कि मेरी गांड सूज गई। उन्होंने मेरा मुँह इतना चोदा कि मेरा गला दर्द करने लगा। उन्होंने मुझे इतने थप्पड़ मारे कि मेरा पूरा शरीर लाल हो गया। लेकिन मैं बहुत खुश थी। मैं उनके नीचे तड़प रही थी, चीख रही थी, रो रही थी — लेकिन मुस्कुरा भी रही थी।
“रोहन… मुझे और चोदो… मुझे बेरहमी से चोदो…” मैं चीख रही थी।
“तू मेरी रंडी है,” रोहन गुर्रा रहे थे। “मैं तुझे चोदूँगा, पूरी रात चोदूँगा। तुझे नष्ट कर दूँगा।”
और उन्होंने ऐसा ही किया। पूरी रात वो मुझे चोदते रहे, और मैं उनके हर धक्के को सहती रही। उन्होंने मेरी चूत में, मेरी गांड में, और मेरे मुँह में — हर जगह अपना लंड डाला। उन्होंने मुझ पर पेशाब किया, मुझे थप्पड़ मारे, और मुझे अपनी रंडी कहकर बुलाया। मैं उनकी हर बात मानती रही, और उनके लिए सब कुछ सहती रही। मेरा शरीर टूट रहा था, लेकिन मेरा दिल खुशी से भरा था। मैं उनकी हो चुकी थी — पूरी तरह से। और मुझे ये बहुत पसंद था।
सुबह जब मैं उठी, तो मेरा शरीर दर्द से कराह रहा था। मेरी चूत सूज गई थी, मेरी गांड जल रही थी, और मेरा गला बैठ गया था। लेकिन मैं बहुत खुश थी। मैंने रोहन को देखा, जो मेरे बगल में सो रहे थे, और मेरा दिल प्यार से भर गया। मैंने उनके माथे को चूमा, और सोचा कि मैं दुनिया की सबसे भाग्यशाली औरत हूँ। मुझे ऐसा पति मिला है जो मुझसे प्यार भी करता है, और मुझे बेरहमी से चोदता भी है। यही मेरी ज़िंदगी है, और मुझे इस पर गर्व है।
भाग 8: पति को सिखाया बेरहम सेक्स – प्यार और हवस का संगम
अब हमारा रिश्ता बिल्कुल बदल चुका था। रोहन मुझसे पहले से भी ज़्यादा प्यार करते थे, और मैं उनसे। वो मुझे दिन में प्यार से रखते, और रात में बेरहमी से चोदते। मैं उनकी पत्नी थी, उनकी प्रेमिका थी, और उनकी रंडी भी। और मुझे ये सब बहुत पसंद था। मैं उनके लिए सब कुछ करती, और वो मेरे लिए सब कुछ करते। हमारा रिश्ता अब सिर्फ पति-पत्नी का नहीं था — वो मालिक और गुलाम का था, प्रेमी और प्रेमिका का था, और दो इंसानों का था जो एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे।
एक दिन रोहन ने मुझसे कहा, “सुप्रिया, तुम मेरी ज़िंदगी हो। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।”
“और मैं तुमसे,” मैंने कहा। “तुम मेरे सब कुछ हो, रोहन।”
“क्या तुम सच में खुश हो?” उन्होंने पूछा।
“बहुत खुश,” मैंने कहा। “तुमने मुझे वो सब दिया जो मैं चाहती थी। तुमने मुझे अपनी रंडी बनाया, मुझ पर अपनी हवस उतारी, और मुझे प्यार भी दिया। मैं बहुत भाग्यशाली हूँ।”
रोहन मुस्कुराए। “मैं भी भाग्यशाली हूँ। तुमने मुझे सिखाया कि प्यार सिर्फ धीरे-धीरे चुदाई में नहीं, बल्कि बेरहम चुदाई में भी होता है। तुमने मुझे सिखाया कि एक पति और पत्नी के बीच सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि हवस भी होनी चाहिए। और तुमने मुझे सिखाया कि अपनी पत्नी को सिर्फ प्यार से नहीं, बल्कि बेरहमी से भी चोदना चाहिए।”
उस दिन हमने बहुत सारी बातें कीं। हमने अपने सपनों के बारे में बात की, अपने भविष्य के बारे में बात की, और अपने रिश्ते के बारे में बात की। हम दोनों जानते थे कि हमारा रिश्ता बाकी लोगों से अलग है, लेकिन हमें इस पर गर्व था। हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे, और यही सबसे ज़रूरी था। मैं उनकी पत्नी थी, उनकी रंडी थी, और उनकी सबसे बड़ी चाहत थी। और वो मेरे सब कुछ थे। यही हमारी कहानी है — पति को सिखाया बेरहम सेक्स, और उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया। और मुझे इस पर गर्व है।
समाप्त