मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – क्या आपने कभी सोचा है कि एक शर्मीली और मासूम पत्नी का कुंवारापन तोड़ना कैसा लगता है? यह हिंदी सेक्स कहानी उसी पल की है जब एक पति ने अपनी मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 में पहली बार पूरी चुदाई की और उसका कुंवारापन तोड़ा। शादी के एक महीने बाद की वो रात, जब सिमरन ने खुद अपने पति से कहा कि वो अब तैयार है। दर्द, डर, प्यार और चरमसुख से भरी यह दास्ताँ उस पल की है जब दो शरीर पहली बार पूरी तरह एक हुए। अगर आपको पहली बार सेक्स, कुंवारापन तोड़ना, सुहागरात की असली रात, और शर्मीली दुल्हन की चुदाई जैसी कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ सिर्फ आपके लिए है।
भाग 1: मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – एक महीने का सफर और तैयारी की रात
शादी को पूरा एक महीना हो चुका था। ये तीस दिन मेरी और सिमरन की ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत दिन थे। हम दोनों ने एक-दूसरे को जाना, समझा, और धीरे-धीरे करीब आए। सिमरन अब पहले जैसी शर्मीली नहीं रही थी — कम से कम मेरे सामने तो नहीं। वो अब मुझसे खुलकर बातें करती, अपनी इच्छाएँ बताती, और शारीरिक संबंधों के मामले में भी काफी सहज हो चुकी थी। हम रोज़ चूमते, मैं उसकी चूत चाटता, वो मेरा लंड चूसती — ये सब अब हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका था।
लेकिन अभी तक हमने पूरी चुदाई नहीं की थी। मैं जानता था कि सिमरन अभी तक वर्जिन है — बिल्कुल कुंवारी। उसकी गुलाबी चूत अभी भी अछूती थी, और उसके अंदर वो पतली झिल्ली मौजूद थी जो उसके कुंवारेपन की निशानी थी। मैं उससे पूरी चुदाई करने की जल्दी नहीं करना चाहता था। मैं चाहता था कि वो खुद तैयार हो, खुद चाहे, और खुद मेरे पास आए। और अब वो दिन आ ही गया था।
कल रात जब मैंने उससे कहा था कि “कल हमें एक हो जाना चाहिए,” तो उसने बिना किसी झिझक के कहा था, “मैं तैयार हूँ।” यह सुनकर मेरा दिल खुशी से नाच उठा था। मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन अब मेरी पूरी तरह से होने को तैयार थी।
अगले दिन सुबह से ही सिमरन तैयारी में जुट गई। उसने सुबह नहाया, बालों में तेल लगाया, शरीर पर हल्दी और बेसन का उबटन लगाया, और शाम को फिर से गुनगुने पानी से नहाई। उसने मुझसे कहा कि वो आज कुछ खास पहनना चाहती है। मैंने उससे कहा, “तुम जो भी पहनना चाहो, पहनो। तुम मुझे हर रूप में खूबसूरत लगती हो।”
शाम को सिमरन ने अपनी शादी वाली लाल बनारसी साड़ी निकाली। वही साड़ी जो उसने हमारी शादी के दिन पहनी थी। उसके साथ उसने अपने सारे गहने निकाले — सोने का मंगलसूत्र, चाँदी की पायल, लाल चूड़ियाँ, नथ, झुमके, और माँग के लिए सिंदूर। वो पूरी तरह सजना चाहती थी — बिल्कुल वैसे ही जैसे वो मेरी दुल्हन बनकर आई थी।
मैंने कमरा तैयार किया। गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछाईं, मोमबत्तियाँ जलाईं, और हल्का मीठा संगीत चलाया। कमरे में खुशबू फैला दी — चंदन और गुलाब की। मैं चाहता था कि यह रात सिमरन के लिए सबसे खास रात हो, सबसे यादगार रात हो।
रात के करीब 10 बजे, सिमरन तैयार होकर बाहर आई। मैंने जब उसे देखा, तो मेरी साँसें थम गईं। वो लाल साड़ी में लिपटी हुई थी, माथे पर लाल बिंदी, माँग में गहरा सिंदूर, गले में सोने का मंगलसूत्र, हाथों में लाल चूड़ियाँ, पैरों में चाँदी की पायल। उसकी गोरी कांच जैसी त्वचा लाल साड़ी में और भी चमक रही थी। वो बिल्कुल वैसी ही लग रही थी जैसे शादी के दिन लगी थी — मेरी दुल्हन, मेरी पत्नी, मेरी रानी।
“कैसी लग रही हूँ?” उसने शरमाते हुए पूछा।
“तुम… तुम बिल्कुल देवी लग रही हो,” मैंने सच कहा। “इतनी खूबसूरत कि मैं तुम्हें देखता ही रह सकता हूँ।”
सिमरन मुस्कुराई। वो बिस्तर पर बैठ गई, और मैं उसके पास बैठा। कमरे में मोमबत्तियों की हल्की रोशनी थी, और गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी हुई थीं। बाहर हल्की हवा चल रही थी, और कमरे का माहौल पूरी तरह रोमांटिक था।
“डर लग रहा है?” मैंने उसका हाथ पकड़कर पूछा।
“थोड़ा…” उसने सच कहा। “लेकिन तुम्हारे साथ हूँ, इसलिए डर कम है।”
“मैं तुम्हारे साथ हूँ, सिमरन,” मैंने उसे भरोसा दिलाया। “हम धीरे-धीरे करेंगे। जब भी तुम्हें लगे कि बहुत दर्द हो रहा है, बताना। मैं रुक जाऊँगा।”
“ठीक है,” उसने कहा और मुझे चूम लिया।
भाग 2: मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – पहला चुम्बन और शरीर की गर्माहट
मैंने सिमरन को अपनी बाहों में लिया और उसे गहरा चूमा। उसके होंठ नर्म थे, गर्म थे, और मीठे थे। वो अब पहले से बहुत बेहतर चूमना सीख चुकी थी — उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी, उसके होंठ मेरे होंठों को चूस रहे थे। दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर झुक गया।
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू सरकाया, और उसके कंधे दिखाई दिए — गोरे, चिकने, मुलायम। जब मैंने उसे छुआ, तो उसकी त्वचा हल्की लाल हो गई — कांच जैसी गोरी त्वचा पर लाली ऐसे उभरी जैसे दूध में गुलाब की पंखुड़ियाँ घुल गई हों। मैंने उसके कंधों को चूमा, फिर उसकी गर्दन को। वो सिहर उठी। मैंने उसकी गर्दन पर हल्के से चूसा, और उसका शरीर काँप गया।
“सिमरन, मैं तुम्हारी साड़ी उतारना चाहता हूँ,” मैंने फुसफुसाया।
उसने धीरे से सिर हिलाया — हाँ में। मैंने उसकी साड़ी के फेरे खोलना शुरू किया — धीरे-धीरे, प्यार से। हर फेरे के साथ उसका शरीर थोड़ा और खुलता गया। आखिर में साड़ी ज़मीन पर गिर गई, और सिमरन सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसका शरीर मेरी आँखों के सामने था — गोरा, चिकना, और बहुत खूबसूरत।
मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले — एक-एक करके। हर हुक के साथ सिमरन की साँसें तेज़ होती गईं। ब्लाउज खुलते ही उसका सीना दिखने लगा — लाल ब्रा में कैद उसके स्तन। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबाया, और सिमरन ने एक गहरी साँस ली।
“अब ब्रा उतार दो,” मैंने कहा।
उसने खुद अपने पीठ के पीछे हाथ ले जाकर ब्रा के हुक खोले। ब्रा हटते ही उसके स्तन बाहर आ गए — छोटे, गोल, और बिल्कुल सही आकार के। निप्पल छोटे, गहरे भूरे रंग के, और पहले से ही सख्त हो चुके थे। उसकी गोरी त्वचा पर उसके गुलाबी निप्पल ऐसे लग रहे थे जैसे दूध में स्ट्रॉबेरी तैर रही हो। मैंने उन्हें अपने हाथों में लिया और धीरे-धीरे दबाया। सिमरन कराह उठी — “आह… रोहन…”
फिर मैंने उसके निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। पहले दाएँ, फिर बाएँ। सिमरन का शरीर मेरी बाहों में ऐंठ रहा था। उसने अपने हाथ मेरे सिर पर रख दिए और मुझे दबा दिया। “उफ़्फ़… बहुत अच्छा…” वो बुदबुदाई। मैं उसके निप्पल्स को चूसता रहा, जीभ से गोल-गोल घुमाता रहा, हल्के से काटता रहा। सिमरन अब पूरी तरह से मेरे साथ थी — उसकी शर्म गायब हो चुकी थी, और हवस हावी हो रही थी।
मैंने उसका पेटीकोट उतार दिया। अब सिमरन सिर्फ लाल पैंटी में थी। मैंने उसकी पैंटी उतारी, और उसकी चूत मेरी आँखों के सामने आई। मैंने देखा — उसकी चूत अब भी उतनी ही गुलाबी और मासूम थी, जितनी पहली बार थी। गोरी कांच जैसी त्वचा पर हल्के भूरे बाल, और उनके नीचे गुलाबी, चिकनी चूत — बिल्कुल कोमल, बिल्कुल अछूती। उसकी चूत से हल्की सी नमी आ चुकी थी — उत्तेजना की निशानी।
भाग 3: मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – चूत चाटना और चरमसुख
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसके पैर फैलाए, और धीरे से उसकी चूत के बाहरी होंठों को चाटा। सिमरन चीख पड़ी — “ओह! रोहन…” उसका शरीर उछल गया। मैंने उसके दोनों घुटनों को पकड़कर उसे स्थिर किया और फिर से चाटने लगा — इस बार थोड़ा गहरा। मेरी जीभ उसकी चूत की दरार में गई, उसके भीतरी होंठों को चाटा, और उसकी क्लिट को हल्के से दबाया। सिमरन की साँसें बहुत तेज़ हो गई थीं, वो कराह रही थी — “आह… उम्म… ये क्या हो रहा है…”
“बस आराम से रहो, और मज़ा लो,” मैंने कहा और फिर से उसकी चूत को चाटने लगा। मैंने उसके रस को अपनी जीभ से साफ किया — वो मीठा था, हल्का नमकीन, और बहुत स्वादिष्ट। मैं उसकी चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे कोई भूखा आदमी खाना खा रहा हो। सिमरन के शरीर से झटके आ रहे थे, उसके हाथ चादर को नोच रहे थे, उसके पैर मेरे कंधों पर चढ़ गए थे। उसकी गोरी त्वचा लाल हो गई थी — उत्तेजना से, प्यार से, और शर्म से।
अचानक उसका शरीर अकड़ गया। उसने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया — और उसके मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली — “रोहन… ओह… बहुत… बहुत अच्छा…” उसका पूरा शरीर काँप उठा। उसकी चूत ने मेरी जीभ को कस लिया — और फिर अचानक रस की एक तेज़ धार निकली। सिमरन को चरमसुख मिल चुका था। वो निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी, उसकी साँसें फूली हुई थीं, उसकी आँखें बंद थीं, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति थी।
मैं उसके पास लेट गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। वो काँप रही थी, लेकिन उसने मुझसे लिपटकर कहा, “मुझे नहीं पता था कि ऐसा भी होता है…”
“यह तो बस शुरुआत है, सिमरन,” मैंने उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा। “अभी तो बहुत कुछ बाकी है।”
भाग 4: मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – लंड चूसना और तैयारी
कुछ देर बाद सिमरन थोड़ा सामान्य हुई। मैंने उसे पानी पिलाया, उसे सहलाया, और उसकी प्यार से देखभाल की। फिर मैंने उससे कहा, “सिमरन, अब तुम मेरे लिए कुछ करोगी?”
वो धीरे से बोली, “क्या करना है?”
मैंने अपना कुर्ता और पायजामा उतार दिया। मेरा लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा था — तन गया था, लाल, और बहुत गर्म। सिमरन ने जब मेरा लंड देखा, तो उसके चेहरे पर आश्चर्य और डर दोनों थे। वो बोली, “ये इतना बड़ा… क्या ये मेरी चूत में जाएगा?”
“हाँ, जाएगा,” मैंने हँसते हुए कहा। “लेकिन पहले तुम इसे अपने मुँह से सहलाओ। इससे यह और गीला होगा, और तुम्हारी चूत में जाने में आसानी होगी।”
सिमरन हिचकिचाई, लेकिन फिर मेरी बात मान ली। वो बिस्तर से उठी, मेरे सामने घुटनों पर बैठी, और धीरे से मेरे लंड को अपने हाथ में लिया। मेरा लंड उसके हाथ में फड़फड़ाया। वो डर गई, लेकिन मैंने उसके हाथ को सहलाया। “बस इसे चूमो,” मैंने कहा।
उसने अपने होंठ मेरे लंड के टोपे पर रखे — सिर्फ एक हल्का सा चुम्बन। फिर उसने अपनी जीभ निकाली और मेरे लंड के टोपे को चाटा। मेरा शरीर झटके से काँप गया। “बहुत अच्छा कर रही हो…” मैंने धीरे से कहा। अब सिमरन थोड़ी साहसी हो गई। उसने मेरे पूरे लंड को चाटना शुरू किया — जड़ से टोपे तक, धीरे-धीरे। फिर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लिया — पहले सिर्फ टोपा, फिर थोड़ा और। उसके मुँह का नर्मपन और गर्माहट ने मुझे पागल कर दिया।
“थोड़ा और अंदर लो…” मैंने कहा। उसने और लिया — लेकिन उसका गला छोटा था, इसलिए आधे से ज़्यादा नहीं जा पा रहा था। मैंने उसके सिर को हल्के से दबाया — और उसका मुँह मेरे लंड से भर गया। सिमरन की आँखों में पानी आ गया, लेकिन उसने कोशिश जारी रखी। वो मुझे चूस रही थी — ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, मेरा शरीर गर्म हो गया।
कुछ देर बाद मैंने उसे रोका। “बहुत हो गया, सिमरन। अब मुझे तुम्हारी चूत चाहिए।”
भाग 5: मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – कुंवारापन तोड़ने की रात
मैंने सिमरन को बिस्तर पर लिटाया, उसके पैर फैलाए, और अपने लंड को उसकी चूत के दरवाज़े पर रखा। उसकी चूत पहले से ही गीली थी — ओरल सेक्स के बाद और भी ज़्यादा। मैंने उससे कहा, “थोड़ा दर्द होगा, लेकिन बस शुरुआत में। तुम बहादुर हो, ठीक?”
उसने घबराते हुए कहा, “मुझे डर लग रहा है…”
“मेरा हाथ पकड़ो,” मैंने कहा। उसने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया। मैंने अपने लंड को उसकी चूत में धीरे-धीरे घुसाना शुरू किया। पहले सिर्फ टोपा अंदर गया। सिमरन ने तेज़ साँस ली। फिर मैंने थोड़ा और धकेला — उसके चेहरे पर दर्द के भाव आए। “साँस लो… धीरे-धीरे…” मैंने कहा। उसने मेरी बात मानी, और मैंने अपने लंड को और अंदर धकेला।
“आह!” सिमरन की चीख निकल गई। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। “रोहन… दर्द हो रहा है…”
“मैं रुक जाता हूँ,” मैंने कहा और रुक गया। मैंने उसके आँसू पोंछे, उसे चूमा, और कहा, “बस थोड़ा और, सिमरन। फिर दर्द कम हो जाएगा।”
वो रोती रही, लेकिन फिर बोली, “ठीक है… तुम आगे बढ़ो…”
मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को और अंदर धकेला। सिमरन की चूत बहुत तंग थी — इतनी तंग कि मेरा लंड उसमें फँसा हुआ महसूस हो रहा था। सिमरन के नाखून मेरी पीठ में धँस गए, उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसके आँसू बहते रहे। लेकिन उसने मुझे रोका नहीं।
फिर अचानक मुझे कुछ महसूस हुआ — मेरे लंड के रास्ते में कुछ था, जैसे कोई पतली झिल्ली। मैं समझ गया कि यही उसका कुंवारापन है। मैंने सिमरन से कहा, “सिमरन, अब सबसे ज़्यादा दर्द होगा। लेकिन बस एक बार। तैयार हो?”
उसने आँखें बंद कर लीं, मेरा हाथ कसकर पकड़ा, और कहा, “हाँ, करो।”
मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा — और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर पूरी तरह घुस गया। सिमरन की चीख निकल गई — दर्द की, लेकिन उसी में एक गहरी राहत भी थी। उसका कुंवारापन टूट चुका था। वो रो रही थी, लेकिन उसने मुझे रोका नहीं। मैंने उसे प्यार से चूमा, उसके आँसू पोंछे, और कहा, “अब दर्द कम हो जाएगा, सिमरन। अब सब ठीक हो जाएगा।”
कुछ मिनट तक मैं अंदर ही अंदर रहा, बिना हिले। मैं उसे दर्द से उबरने का वक्त दे रहा था। फिर धीरे-धीरे सिमरन की साँसें सामान्य हुईं, और उसने कहा, “अब… अब ठीक है… तुम चल सकते हो।”
भाग 6: मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – पहली चुदाई और चरमसुख
मैंने धीरे-धीरे चुदाई शुरू की। पहले बहुत धीमे धक्के, फिर थोड़े तेज़। सिमरन की साँसें लौट आईं, उसकी चूत ने मेरे लंड को पकड़ लिया। वो कराहने लगी — “आह… उम्म… रोहन…” मैं उसके दूध दबाता रहा, उसके होंठ चूमता रहा, और उसे चोदता रहा। धीरे-धीरे उसका दर्द कम हुआ और उत्तेजना बढ़ी। वो मुझसे चिपक गई, उसके पैर मेरी कमर से लिपट गए, और वो मेरे साथ झूलने लगी।
“अब कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा।
“बहुत अच्छा…” उसने कहा। “अब दर्द नहीं हो रहा… बहुत अच्छा लग रहा है…”
मैंने उसकी रफ्तार बढ़ाई। अब मैं उसे पूरी तरह चोद रहा था — प्यार से, लेकिन जोश से। सिमरन मेरे नीचे तड़प रही थी, उसकी आहें कमरे में गूँज रही थीं। उसके दूध हिल रहे थे, उसकी चूत मेरे लंड को कस रही थी। मैंने उसके निप्पल्स को चूसा, उसके होंठों को चूमा, और उसे और भी आनंद दिया।
कुछ देर बाद सिमरन का शरीर अकड़ने लगा। उसने मेरे गले में बाहें डाल दीं और मुझे कसकर पकड़ लिया। “रोहन… मैं… मैं आ रही हूँ…” वो चीखी। उसकी चूत ने मेरे लंड को बहुत तेज़ी से कसा — और फिर उसका शरीर ज़ोरों से काँप उठा। उसकी आँखें बंद थीं, उसके होंठ खुले थे, और उसके चेहरे पर चरमसुख की तृप्ति थी। मैंने उसे इसी हालत में देखा और मेरा भी वीर्य निकलने वाला था।
“सिमरन, मैं झड़ने वाला हूँ…” मैंने कहा।
“अंदर ही… मेरे अंदर ही…” उसने कहा। और फिर मैं झड़ गया — उसकी चूत के अंदर ही। मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई। सिमरन भी मेरे साथ ही चरम पर पहुँची — उसका शरीर काँप उठा, उसने मुझे कसकर पकड़ लिया।
दोनों निढाल होकर लेट गए — पसीने से तर, थके हुए, लेकिन बहुत खुश। सिमरन मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी थी। वो बोली, “मुझे नहीं पता था कि ये इतना अच्छा होता है…”
“अब तो तुम्हें पता चल गया,” मैंने उसके माथे को चूमते हुए कहा। “और अभी तो बहुत कुछ बाकी है।”
भाग 7: मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – पहली बार खून और सफाई
जब मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला, तो मैंने देखा कि उसकी चूत से खून निकल रहा था — उसके कुंवारेपन की आखिरी निशानी। सिमरन की गोरी जाँघों पर खून के हल्के धब्बे थे, और उसकी चूत लाल हो गई थी। वो रो रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी।
“सिमरन, अब हम पति-पत्नी हैं,” मैंने उसके माथे पर चुम्बन लेते हुए कहा। “अब तुम पूरी तरह मेरी हो, और मैं पूरी तरह तुम्हारा।”
वो रोती रही, लेकिन उसकी आँखों में प्यार था। वो बोली, “मैं हमेशा से तुम्हारी थी, रोहन। बस आज ये और भी पक्का हो गया।”
मैं उठा और बाथरूम से गर्म पानी का बर्तन लाया। मैंने एक साफ कपड़ा लिया, उसे गर्म पानी में भिगोया, और धीरे-धीरे सिमरन की जाँघों पर लगा खून साफ किया। वो लेटी रही, और मैं उसकी देखभाल करता रहा। मैंने उसकी चूत को बहुत प्यार से साफ किया — बिना कोई जल्दबाज़ी, बिना कोई दर्द। उसकी गोरी त्वचा पर लाली अब कम हो रही थी, और उसकी चूत फिर से गुलाबी दिखने लगी थी।
“दर्द हो रहा है?” मैंने पूछा।
“थोड़ा…” उसने कहा। “लेकिन तुम्हारा प्यार उस दर्द को कम कर देता है।”
मैंने उसे गले लगा लिया। “तुम बहुत बहादुर हो, सिमरन। मुझे तुम पर गर्व है।”
भाग 8: मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन भाग 2 – प्यार की सुबह और दूसरी पारी
सुबह हुई। हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही थी। मेरी आँख खुली तो सिमरन मुझे देख रही थी — उसकी आँखों में प्यार था, शर्म भी थोड़ी सी, और एक नई सी चमक भी। वो बोली, “सुप्रभात…”
“सुप्रभात, मेरी पत्नी,” मैंने मुस्कुराकर कहा। फिर उसने मुझे चूमा — इस बार खुद से, बिना मेरे कहे। उसके होंठ मेरे होंठों पर थे, और उसकी जीभ मेरे मुँह में थी। वो कल रात से बिल्कुल अलग थी — अब वो जानती थी कि उसे क्या चाहिए।
मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और उससे कहा, “कल रात बहुत खास थी, सिमरन।”
“हाँ,” उसने कहा। “मैं अब पूरी तरह तुम्हारी हूँ।”
“और मैं पूरी तरह तुम्हारा,” मैंने कहा।
सिमरन ने मेरा लंड अपने हाथ में लिया — वो सुबह की तरह खड़ा था। वो बोली, “मुझे फिर से चाहिए…”
“ये तो तुम्हारा हक है,” मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और फिर से चुदाई शुरू कर दी। इस बार वो और खुली थी, और साहसी थी। उसने मुझे चोदने दिया, और फिर खुद मेरे ऊपर चढ़ गई — काउगर्ल पोज़िशन में। वो मेरे लंड पर उछल रही थी, उसके दूध हिल रहे थे, उसकी आँखें बंद थीं, और उसके मुँह से आहें निकल रही थीं। मैं उसे देखता रहा — मेरी मासूम शर्मीली दुल्हन अब एक प्यासी पत्नी बन चुकी थी, और मैं उसका सबसे खुशनसीब पति था।
उस सुबह हमने दो बार चुदाई की। हर बार सिमरन और बेहतर होती गई। वो अब शर्मीली नहीं थी — कम से कम मेरे सामने नहीं। वो मेरी पत्नी थी, मेरी प्रेमिका थी, और अब पूरी तरह से मेरी हो चुकी थी। और मैं उसका पति था, उसका प्रेमी था, और पूरी तरह से उसका हो चुका था।
यह सिर्फ शुरुआत थी। आने वाले दिनों, हफ्तों, महीनों और सालों में हम और भी करीब आएंगे, और भी नई चीज़ें सीखेंगे। लेकिन यह रात — हमारी पहली रात — हमेशा हमारे दिलों में सबसे खास रहेगी।
समाप्त — भाग 2