पति को गांड चटवाना पसंद है – क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक भारतीय पति अपनी पत्नी से अपनी गांड चटवाता है, अपने लंड की मालिश करवाता है, और फिर उसके चेहरे पर अपना सारा माल निकाल देता है, तो वो रात कैसी होती है? यह हिंदी सेक्स कहानी राधा और समर्थ की है – गुजरात के अहमदाबाद शहर में रहने वाला एक कपल, जिनकी सेक्स लाइफ में एक खास और अनोखी चीज़ है। समर्थ को पति को गांड चटवाना पसंद है, और राधा अपने पति की इस इच्छा को पूरे जोश और प्यार से पूरा करती है। अगर आपको ओरल सेक्स, रिमिंग, फेस-फकिंग और अनोखी हिंदी सेक्स कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ सिर्फ आपके लिए है।
भाग 1: पति को गांड चटवाना पसंद है – हमारी अनोखी सेक्स लाइफ की शुरुआत
मेरा नाम राधा है। हाँ, बिल्कुल भगवान कृष्ण की राधा की तरह – मेरी माँ बहुत धार्मिक हैं, और उन्होंने मेरा यही नाम रखा। मेरे पति का नाम समर्थ है। हम दोनों गुजरात के अहमदाबाद में रहते हैं – साबरमती नदी के किनारे बसा वो खूबसूरत शहर, जहाँ पुरानी पोल और नई बिल्डिंग्स का अनोखा संगम है। हमारी शादी को चार साल हो गए हैं, और हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।
समर्थ एक बिज़नेसमैन हैं – टेक्सटाइल का काम है उनका, क्योंकि अहमदाबाद तो कपड़ों का शहर है ही। मैं एक स्कूल में टीचर हूँ। दिन में हम दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं, लेकिन रात को… रात को हम सिर्फ एक-दूसरे के लिए होते हैं।
हमारी सेक्स लाइफ शुरू से ही बहुत अच्छी रही है। समर्थ बहुत प्यार करने वाले पति हैं – न सिर्फ बिस्तर के बाहर, बल्कि बिस्तर पर भी। वो हमेशा मेरा ख्याल रखते हैं, मुझसे पूछते हैं कि मुझे क्या चाहिए, और मेरी हर इच्छा को पूरा करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हमारी सेक्स लाइफ में एक चीज़ ऐसी है जो शायद हर कपल नहीं करता। एक चीज़ जो हमारे रिश्ते को और भी खास बनाती है।
पति को गांड चटवाना पसंद है।
हाँ, आपने सही पढ़ा। मेरे पति को जब मैं उनका लंड चूसती हूँ, तब वो चाहते हैं कि मैं उनकी गांड भी चाटूँ। उनके अंडकोषों को सहलाऊँ, उनकी जाँघों के बीच की नाज़ुक त्वचा को चूमूँ, और फिर अपनी जीभ उनकी गांड के छेद तक ले जाऊँ।
पहली बार जब समर्थ ने मुझसे ये चाहत ज़ाहिर की थी, तो मैं थोड़ी हिचकिचाई थी। मेरा मतलब है, गांड चाटना? ये तो थोड़ा अजीब लगता था। गंदा लगता था। मुझे याद है वो रात – हमारी शादी के करीब छह महीने बाद की बात है। हम बिस्तर पर लेटे थे, अभी-अभी सेक्स किया था, और समर्थ ने अचानक मेरा हाथ पकड़कर कहा, “राधा, मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ।”
“क्या?” मैंने पूछा।
“मैं चाहता हूँ… मैं चाहता हूँ कि तुम मेरी गांड चाटो।”
मैं चौंक गई थी। “क्या? गांड?”
“हाँ। मुझे पता है ये अजीब लगता है। लेकिन मैं हमेशा से ये चाहता था। जब तुम मेरा लंड चूसती हो, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। लेकिन मैं हमेशा सोचता हूँ – काश तुम मेरी गांड भी चाटो। काश तुम अपनी जीभ वहाँ ले जाओ।”
मैंने उनकी आँखों में देखा। उनकी आँखों में कोई शर्म नहीं थी, कोई झिझक नहीं थी। बस एक गहरी चाहत थी – और मुझ पर पूरा भरोसा कि वो अपनी ये राज़ की बात मुझसे शेयर कर सकते हैं।
“लेकिन… वो तो गंदा होता है ना?” मैंने पूछा।
समर्थ ने मेरा हाथ अपने हाथों में लिया और बोले, “राधा, सेक्स में कुछ भी गंदा नहीं होता। जब दो लोग एक-दूसरे से प्यार करते हैं, तो वो एक-दूसरे के शरीर के हर हिस्से से प्यार करते हैं। और मेरी ये चाहत है। लेकिन अगर तुम्हें नहीं करना, तो मैं समझूँगा। मैं तुम पर कभी ज़बरदस्ती नहीं करूँगा।”
उनकी ये बात सुनकर मेरा दिल पिघल गया। वो मुझ पर दबाव नहीं डाल रहे थे। वो बस अपनी चाहत बता रहे थे – एक पति की तरह, एक दोस्त की तरह। और मैंने तय किया कि मैं उनकी ये चाहत पूरी करूँगी।
अगली रात, मैंने खुद पहल की। मैंने उनसे कहा, “समर्थ, आज मैं वो करूँगी जो तुम चाहते हो। लेकिन पहले नहा लो – अच्छी तरह से।”
समर्थ की आँखें चमक उठीं। वो तुरंत बाथरूम गए और करीब बीस मिनट तक नहाए। जब वो बाहर आए, तो उनका शरीर एकदम साफ और ताज़ा था। हमने उस रात जो किया, वो हम दोनों के लिए एक नया अनुभव था। और उस रात के बाद, ये हमारी सेक्स लाइफ का एक नियमित हिस्सा बन गया।
भाग 2: पति को गांड चटवाना पसंद है – शनिवार की रात का स्पेशल सेशन
पिछले शनिवार की बात है। पूरे हफ्ते की भागदौड़ के बाद, आखिरकार वीकेंड आ गया था। शाम को हमने साथ में खाना खाया – मैंने उनकी फेवरेट गुजराती डिश बनाई थी: ढोकला, खांडवी, और मीठी दाल। खाने के बाद, समर्थ ने मुझसे कहा, “राधा, आज रात मैं चाहता हूँ कि तुम मेरी गांड चाटो। बहुत दिन हो गए।”
मेरी साँसें तेज़ हो गईं। मुझे पता था कि इसका मतलब क्या है – आज रात का सेशन स्पेशल होने वाला है। जब भी समर्थ मुझसे अपनी गांड चटवाने की बात करते हैं, तो इसका मतलब होता है कि वो पूरी तरह से मेरे हवाले होना चाहते हैं, और फिर उसके बाद मुझ पर अपना कंट्रोल जमाना चाहते हैं। ये एक सिलसिला है – पहले वो मेरे सामने बेबस होते हैं, अपनी सबसे कमज़ोर अवस्था में, और फिर अचानक वो पलटकर मुझ पर हावी हो जाते हैं। ये हमारा अपना छोटा सा पावर प्ले है।
“ठीक है,” मैंने मुस्कुराकर कहा। “पहले नहा लो। मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगी।”
समर्थ नहाने चले गए। मैंने बेडरूम तैयार किया – लाइटें धीमी कर दीं, दो मोमबत्तियाँ जला दीं जिनकी लपटें दीवारों पर नाच रही थीं, और बिस्तर पर एक मुलायम तौलिया बिछा दिया। हमारे बेडरूम की खिड़की से साबरमती नदी का किनारा दिखता था, और रात की ठंडी हवा अंदर आ रही थी। फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए – अपनी साड़ी, अपना ब्लाउज, अपनी ब्रा, अपनी पैंटी – सब कुछ। अब मैं पूरी तरह नंगी थी, सिर्फ अपनी त्वचा में। मेरे स्तन – गोरे, गोल, मुलायम – मोमबत्ती की रोशनी में चमक रहे थे। मेरी चूत – शेव की हुई, गुलाबी – पहले से ही गीली हो रही थी, सिर्फ इस इंतज़ार में कि आगे क्या होने वाला है। मेरे निप्पल ठंडी हवा और उत्तेजना से सख्त हो चुके थे।
करीब पंद्रह मिनट बाद, समर्थ बाथरूम से बाहर आए। उन्होंने सिर्फ एक तौलिया कमर पर लपेटा हुआ था। उनका शरीर – चौड़ी छाती, मज़बूत बाहें, सपाट पेट – मोमबत्ती की रोशनी में चमक रहा था। वो जिम जाने की वजह से काफी फिट थे, और उनकी मांसपेशियाँ साफ उभर रही थीं। उन्होंने मुझे नंगी देखा और उनकी आँखों में वो चमक आ गई जो मैं पहचानती थी – हवस, प्यार, और चाहत।
“तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो, राधा,” उन्होंने कहा। उनकी आवाज़ भारी हो गई थी।
“तुम भी,” मैंने जवाब दिया।
समर्थ ने अपना तौलिया उतार दिया। उनका लंड – 7 इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा हुआ – आधा खड़ा था, लेकिन तेज़ी से सख्त हो रहा था। वो बिस्तर पर आए और अपनी पीठ के बल लेट गए। उनकी टाँगें थोड़ी फैली हुई थीं, और उनका लंड उनके पेट पर लेटा हुआ था।
“आओ, राधा,” उन्होंने कहा। “शुरू करो।”
भाग 3: पति को गांड चटवाना पसंद है – लंड की मालिश और गांड चाटना
मैं बिस्तर पर चढ़ी और उनके पैरों के पास घुटनों के बल बैठ गई। मेरी नज़रें उनके लंड पर टिक गईं – अब वो पूरी तरह खड़ा था, टोपी लाल और चमकदार, और उस पर प्री-कम की एक बूँद झलक रही थी। मेरे मुँह में पानी आ गया। चार साल हो गए थे, लेकिन हर बार जब मैं उनके लंड को देखती हूँ, मुझे वैसा ही रोमांच होता है जैसा पहली बार हुआ था।
लेकिन आज की शुरुआत अलग थी। आज समर्थ चाहते थे कि मैं पहले उनकी मालिश करूँ।
मैंने अपने पास रखी नारियल तेल की बोतल उठाई – गुजरात में नारियल तेल हर घर में होता है, और हम इसे सेक्स के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। इसकी खुशबू बहुत अच्छी होती है – हल्की, मीठी, नेचुरल। मैंने अपनी हथेलियों में तेल लिया और उन्हें आपस में रगड़कर गर्म किया। फिर मैंने अपने हाथ समर्थ की जाँघों पर रख दिए।
“आह्ह्ह,” समर्थ ने धीरे से कराहते हुए कहा। मेरे हाथों की गर्माहट और तेल की चिकनाहट उन्हें पसंद आ रही थी।
मैंने धीरे-धीरे उनकी जाँघों की मालिश शुरू की – ऊपर से नीचे, गोल-गोल घुमाते हुए, अपनी उंगलियों से हल्का दबाव देते हुए। मेरे हाथ उनकी जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर गए – वो जगह जो बहुत संवेदनशील होती है। समर्थ की साँसें तेज़ हो गईं। उनकी त्वचा तेल से चमक रही थी, और मेरी उंगलियाँ आसानी से फिसल रही थीं।
फिर मैंने अपना ध्यान उनके अंडकोषों पर लगाया। मैंने तेल लगी अपनी उंगलियों से उनके अंडकोषों को सहलाना शुरू किया – धीरे-धीरे, गोल-गोल, बहुत प्यार से। उनके अंडकोष भारी और गर्म थे, और मेरी उंगलियों के नीचे सिकुड़ रहे थे। समर्थ की आँखें बंद हो गईं और उनके मुँह से एक गहरी आह निकली।
“राधा… तुम्हारे हाथों में जादू है…”
मैंने मुस्कुराकर अपना काम जारी रखा। मैंने उनके लंड को अपने हाथ में लिया – गर्म, सख्त, धड़कता हुआ – और धीरे-धीरे उसकी मालिश करने लगी। ऊपर से नीचे, जड़ से टोपे तक, मेरी उंगलियाँ उनकी हर नस, हर सिलवट को सहला रही थीं। समर्थ कराह रहे थे, उनकी कमर हल्की-हल्की उठ रही थी। उनका लंड मेरे हाथों में और भी सख्त हो गया था।
“अब… अब नीचे जाओ,” उन्होंने भारी आवाज़ में कहा।
मैं समझ गई। अब वो पल आ गया था जिसका हम दोनों को इंतज़ार था।
मैंने अपने हाथ उनके अंडकोषों के नीचे ले गए – उस जगह जहाँ अंडकोष खत्म होते हैं और गांड शुरू होती है। वो जगह बहुत संवेदनशील होती है – बहुत कम लोगों को पता है, लेकिन वहाँ नसों का एक बड़ा गुच्छा होता है। मैंने अपनी उंगलियों से उस जगह को सहलाया, दबाया, मसला। तेल की वजह से मेरी उंगलियाँ आसानी से फिसल रही थीं।
“ओह्ह्ह, हाँ… वहीं…” समर्थ कराह उठे। उनकी आवाज़ काँप रही थी।
फिर मैंने अपना चेहरा नीचे झुकाया। मेरे होंठ अब उनके अंडकोषों के ठीक नीचे थे। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी त्वचा को चाटना शुरू किया – अंडकोषों के नीचे से लेकर गांड के छेद तक, एक लंबी, गीली लकीर।
“आह्ह्ह्ह्ह… राधा…” समर्थ की आवाज़ काँप रही थी। उनके हाथ चादर को कसकर पकड़ रहे थे।
मैंने उनकी गांड के छेद पर अपनी जीभ रख दी। वो छोटा सा, कसा हुआ, गुलाबी छेद – जिसे समर्थ हमेशा बहुत साफ रखते थे, खासकर जब उन्हें पता होता कि आज मैं उनकी गांड चाटने वाली हूँ। मैंने अपनी जीभ को गोल-गोल घुमाया – पहले छेद के चारों ओर, फिर धीरे-धीरे अंदर की ओर। मेरी जीभ की नोक ने उनके छेद को हल्के से छुआ, और समर्थ का पूरा शरीर झटके से काँप उठा।
“हाँ… हाँ… ऐसे ही…” समर्थ अब पूरी तरह से मेरे काबू में थे। उनका शरीर ढीला पड़ गया था, उनकी आँखें बंद थीं, और उनके मुँह से लगातार कराहें निकल रही थीं। ये वो पल था जो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद था – जब मेरा पति, जो दिन में इतना मज़बूत और कंट्रोल में रहता है, रात को मेरे सामने पूरी तरह बेबस हो जाता है।
मैंने अपनी जीभ को उनके गांड के छेद के अंदर धकेला – जितना अंदर तक जा सकती थी, उतना अंदर तक। मेरी जीभ उनकी गर्म, कसी हुई गांड के अंदर घूम रही थी। साथ ही, मेरे हाथ उनके लंड पर थे – एक हाथ से मैं उनके लंड को सहला रही थी, और दूसरे हाथ से उनके अंडकोषों को मसल रही थी। तीनों जगहों पर एक साथ उत्तेजना – समर्थ के लिए ये बर्दाश्त से बाहर था।
समर्थ अब पूरी तरह से मदहोश थे। उनका शरीर काँप रहा था, उनकी कमर हवा में उठ रही थी, और उनके मुँह से सिर्फ मेरा नाम निकल रहा था – “राधा… राधा… राधा…”
मैंने करीब दस मिनट तक उनकी गांड चाटी। हर कोने को, हर सिलवट को, हर इंच को। मेरी जीभ अब थक गई थी, लेकिन मैं रुकना नहीं चाहती थी – क्योंकि समर्थ के चेहरे पर जो एक्सप्रेशन था, वो मेरी सारी थकान दूर कर देता था। उनका चेहरा परमानंद से चमक रहा था, उनकी आँखें बंद थीं, और उनके होंठ खुले हुए थे जिनसे लगातार कराहें निकल रही थीं।
“बस… बस करो राधा,” आखिरकार समर्थ ने कहा। उनकी आवाज़ भारी और हाँफती हुई थी। “अब मैं तुम्हारा चेहरा चोदूँगा।”
भाग 4: पति को गांड चटवाना पसंद है – चेहरे की चुदाई और माल की बारिश
समर्थ उठे और मुझे बिस्तर के किनारे पर ले गए। उन्होंने मुझे घुटनों के बल बिठाया – मेरी पीठ बिस्तर से सटी हुई थी, और मेरा चेहरा उनके लंड के ठीक सामने था। उनका लंड अब पहले से भी ज़्यादा बड़ा और सख्त लग रहा था – मेरी गांड चाटने की वजह से वो और भी उत्तेजित हो गए थे। उनकी नसें उभरी हुई थीं, और टोपे से प्री-कम टपक रहा था।
“अपना मुँह खोलो, राधा,” उन्होंने हुक्म दिया। उनकी आवाज़ में वो अधिकार था जो मुझे बहुत पसंद था – वो अधिकार जो सिर्फ बेडरूम में आता था।
मैंने अपना मुँह खोला। समर्थ ने अपना लंड मेरे मुँह में डाला और एक ही झटके में मेरे गले तक धकेल दिया। मेरा दम घुटने लगा, मेरी आँखों से पानी आने लगा, लेकिन मैंने अपनी साँसों पर कंट्रोल किया और अपना गला ढीला छोड़ दिया। चार साल की प्रैक्टिस के बाद, मैं अब अपने गैग रिफ्लेक्स को कंट्रोल करना सीख गई थी।
समर्थ ने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ा और मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया। ज़ोर से, तेज़ी से, बेरहमी से। उनका लंड मेरे गले में अंदर-बाहर हो रहा था, और मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे। मेरी लार उनके लंड पर बह रही थी, मेरी ठुड्डी से टपक रही थी। लेकिन मैं खुश थी – क्योंकि मुझे पता था कि मैं अपने पति को खुश कर रही हूँ। और उनकी खुशी ही मेरी खुशी थी।
“हाँ… ऐसे ही… ले मेरा लंड…” समर्थ गुर्रा रहे थे। उनकी पकड़ मेरे बालों पर और कस गई। “तुम्हारा मुँह… कितना अच्छा है… कितना गर्म…”
करीब पाँच मिनट तक उन्होंने मेरे मुँह को चोदा। फिर अचानक – उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाला और अपने हाथ से ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगे। उनकी साँसें तेज़ थीं, उनका शरीर तन गया था, और मैं जान गई कि अब वो झड़ने वाले हैं। उनके अंडकोष सिकुड़ गए थे, और उनके लंड की नसें और भी उभर आई थीं।
“अपना चेहरा ऊपर करो,” उन्होंने हुक्म दिया।
मैंने अपना चेहरा ऊपर किया – अपनी आँखें बंद कर लीं, अपना मुँह थोड़ा खोल दिया। और फिर – एक ज़ोरदार गुर्राहट के साथ – समर्थ ने अपना गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरे चेहरे पर छोड़ दिया। पहली धार मेरे माथे पर गिरी, दूसरी मेरे गालों पर, तीसरी मेरे होंठों पर, चौथी मेरी ठुड्डी पर, और पाँचवीं मेरी गर्दन पर। मेरा पूरा चेहरा उनके वीर्य से भीग गया – गर्म, चिपचिपा, उनकी खुशबू से भरा। वो खुशबू जो सिर्फ उनकी थी – मेरे पति की, मेरे समर्थ की।
“आह्ह्ह्ह्ह… राधा…” समर्थ हाँफ रहे थे। उनका शरीर ढीला पड़ गया, और वो मेरे सामने घुटनों के बल आ गए।
मैंने अपनी आँखें खोलीं और ऊपर उनकी तरफ देखा। उनका चेहरा संतुष्टि से चमक रहा था। उनकी आँखों में प्यार था, चाहत थी, और एक गहरी कृतज्ञता थी। उन्होंने नीचे झुककर मेरे माथे पर किस किया – मेरे चेहरे पर पड़े उनके ही वीर्य के ऊपर। उन्हें इस बात से कोई परहेज़ नहीं था कि वो अपना ही वीर्य चूम रहे हैं।
“तुम कमाल हो, राधा,” उन्होंने कहा। उनकी आवाज़ अब नरम और प्यार भरी थी। “मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।”
“मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, समर्थ,” मैंने जवाब दिया।
समर्थ ने मुझे उठाया और बाथरूम में ले गए। उन्होंने गर्म पानी से मेरा चेहरा धोया – बड़े प्यार से, बहुत धीरे-धीरे, अपनी उंगलियों से मेरे चेहरे के हर हिस्से को साफ करते हुए। फिर हम दोनों ने साथ में नहाया, एक-दूसरे को साबुन लगाया, और एक-दूसरे की बाहों में लिपटकर खड़े रहे। गर्म पानी की धार हम दोनों पर गिर रही थी, और हम बस एक-दूसरे को पकड़े हुए थे।
बिस्तर पर वापस आकर, समर्थ ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। मेरा सिर उनकी छाती पर था, और उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में घूम रही थीं। बाहर अहमदाबाद की रात गहरा चुकी थी, और साबरमती नदी की ठंडी हवा खिड़की से आ रही थी।
“राधा,” उन्होंने धीरे से कहा।
“हाँ?”
“तुम्हें पता है, जब तुम मेरी गांड चाटती हो… तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब आदमी हूँ। मुझे नहीं लगता कि कोई और पति अपनी पत्नी से इतना प्यार करता होगा, जितना मैं तुमसे करता हूँ।”
मैं मुस्कुराई और उनकी छाती से और सट गई। “और जब तुम मेरे चेहरे पर अपना माल निकालते हो… तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं दुनिया की सबसे खुशनसीब औरत हूँ। क्योंकि तुम मुझ पर इतना भरोसा करते हो कि अपनी सबसे गहरी, सबसे निजी इच्छाएँ मेरे साथ शेयर करते हो।”
समर्थ हँसे और उन्होंने मुझे और कसकर गले लगा लिया। उनके होंठ मेरे बालों पर थे।
“कल रात फिर से?” उन्होंने शरारत से पूछा।
“कल रात फिर से,” मैंने हँसकर जवाब दिया।
और यही है हमारी कहानी – राधा और समर्थ की। एक ऐसा कपल जो एक-दूसरे से बहुत प्यार करता है, और जो अपनी सेक्स लाइफ में कुछ भी करने से नहीं हिचकिचाता। क्योंकि जब दो लोग एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं, तो सेक्स में कुछ भी गलत या गंदा नहीं होता। बस प्यार होता है – और एक-दूसरे को खुश करने की चाहत।
और हाँ, पति को गांड चटवाना पसंद है – और मुझे अपने पति की गांड चाटना पसंद है। यही तो है हमारी लव स्टोरी।