पत्नी की रफ चुदाई भाग 2 – बेरहम गांड चुदाई, आँसू और प्यार भरी आफ्टरकेयर

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पत्नी की रफ चुदाई भाग 2 – क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक पति अपनी पत्नी से कहे कि वो नहाकर अपनी गांड साफ करे और तैयार हो जाए, क्योंकि आज रात वो उसकी गांड चोदेगा, और फिर बेरहमी से, बिना किसी रहम के, इतनी ज़ोर से गांड चुदाई करे कि पत्नी दर्द से रो पड़े, चीखें मारे, और उसकी गांड पूरी तरह टूट जाए, तो वो रात कितनी दर्दनाक और साथ ही कितनी प्यार भरी हो सकती है? यह हिंदी सेक्स कहानी पत्नी की रफ चुदाई भाग 2 की है जहाँ विक्रम ने अपनी पत्नी आर्या से कहा कि वो नहाकर अपनी गांड साफ करे और तैयार हो जाए, क्योंकि आज रात वो उसकी गांड चोदेगा। आर्या ने घबराते हुए भी अपनी गांड तैयार की — साफ किया, नारियल तेल लगाया, अपनी उंगलियों से अपनी गांड को ढीला किया, और अपने पति का इंतज़ार करने लगी। फिर विक्रम ने बेरहमी से, बिना किसी रहम के, अपना 7 इंच का मोटा लंड आर्या की गांड में घुसा दिया। आर्या दर्द से चीख पड़ी, रोने लगी, उसकी आँखों से आँसू बहने लगे, लेकिन विक्रम रुके नहीं — वो जानवरों की तरह उसकी गांड चोदते रहे। जब गांड चुदाई खत्म हुई और आर्या दर्द से कराह रही थी, तब विक्रम ने उसे प्यार से गले लगाया, उसकी गांड पर बर्फ से सिंकाई की, उसे दर्द की गोली दी, और घंटों उसे अपनी बाहों में लेकर बातें कीं। उसने बताया कि उसे आर्या को रोता देखकर कितना मज़ा आया, और आर्या ने कहा — “मैं तुम्हारी हूँ, तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो।” अगर आपको रफ एनल सेक्स, गांड चुदाई, दर्द, आँसू, आफ्टरकेयर और पति-पत्नी के गहरे प्यार वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।

भाग 1: पत्नी की रफ चुदाई भाग 2 – गांड की तैयारी और विक्रम का हुक्म

पिछली रात की रफ चुदाई के बाद, मेरी चूत अभी भी दर्द कर रही थी। बिस्तर टूट चुका था, दरवाज़े की चिटकनी टूट चुकी थी, और मेरा शरीर थका हुआ था। लेकिन विक्रम की भूख कम नहीं हुई थी। अगली शाम, जब हम दोनों ऑफिस से लौटे — मैंने अपना लैपटॉप बैग सोफे पर रखा, विक्रम ने अपने जूते उतारे — और हमने साथ में खाना खाया। मैंने उनकी पसंद का राजमा-चावल बनाया था, और उन्होंने तारीफ करते हुए दो प्लेट खाईं।

खाना खत्म करने के बाद, जब मैं प्लेटें उठाकर किचन में रख रही थी, विक्रम मेरे पीछे आए और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उनकी बाहें मेरी कमर के चारों ओर लिपट गईं, और उनकी ठुड्डी मेरे कंधे पर टिक गई। मैंने उनकी गर्माहट को अपनी पीठ पर महसूस किया और मुस्कुरा दी।

“आज रात कुछ और करेंगे,” उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाया। उनकी साँसें गर्म थीं, और मेरे कान को छूते ही मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

“क्या?” मैंने पूछा, हालाँकि मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा था। मुझे पता था कि जब विक्रम इस अंदाज़ में बात करते हैं, तो कुछ बड़ा होने वाला होता है।

“आज रात मैं तुम्हारी गांड चोदूँगा,” उन्होंने धीरे से कहा, उनकी आवाज़ में एक अजीब सी गहराई थी। “जाओ, नहाकर अपनी गांड साफ करो और तैयार हो जाओ। मैं इंतज़ार कर रहा हूँ।”

मेरी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने पहले कभी गांड चुदाई नहीं करवाई थी। मैंने सुना था कि इसमें बहुत दर्द होता है, खास कर जब लंड मोटा और बड़ा हो। और विक्रम का लंड तो 7 इंच का और काफी मोटा था — जब भी मैं उसे देखती, मुझे लगता कि ये किसी घोड़े का लंड है। मैं डर गई, लेकिन साथ ही मुझे एक अजीब सी उत्तेजना भी हो रही थी। विक्रम की हर ख्वाहिश पूरी करना मेरा फर्ज़ था — और मेरी खुशी भी।

“ठीक है,” मैंने धीरे से कहा और बाथरूम की तरफ चल दी।

मैं बाथरूम में गई और दरवाज़ा बंद कर दिया। मैंने शीशे में खुद को देखा — मेरी आँखों में डर था, लेकिन साथ ही एक अजीब सी चमक भी थी। मैंने शॉवर चालू किया और गर्म पानी के नीचे खड़ी हो गई। पानी की बूँदें मेरे शरीर पर गिर रही थीं, और मैंने अपने आप को आराम करने की कोशिश की। मैंने अपने पूरे शरीर को अच्छी तरह से धोया — अपने बाल, अपनी बगलें, अपनी चूत, और अपनी गांड।

फिर मैंने अपनी गांड को साफ किया। मैंने वीट क्रीम निकाली और अपनी गांड के छेद पर लगाई। गर्म पानी से धोया, फिर से क्रीम लगाई, फिर से धोया — बार-बार, ताकि बिल्कुल साफ हो जाए। मैं चाहती थी कि जब विक्रम अपनी जीभ वहाँ लगाएँ या अपना लंड डालें, तो उन्हें कोई शिकायत न हो। मैंने अपनी उंगली से अपनी गांड के छेद को महसूस किया — वो बहुत टाइट था, बिल्कुल बंद, जैसे किसी गुलाब की कली। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि विक्रम का मोटा लंड वहाँ कैसे जाएगा।

फिर मैंने नारियल तेल की बोतल उठाई — वही जो हमने हनीमून से पहले खरीदी थी, वही जो पिछली रात विक्रम ने मेरी चूत पर डाली थी। मैंने अपनी उंगली पर तेल लगाया और धीरे-धीरे अपनी गांड के छेद पर लगाना शुरू किया। पहले बाहर-बाहर, गोल-गोल घुमाकर। फिर धीरे-धीरे एक उंगली अंदर डाली। ठंडक और दबाव का एहसास हुआ। मेरी गांड का छेद मेरी उंगली के चारों ओर कस गया, जैसे वो किसी घुसपैठिए को रोकना चाहता हो। मैंने तेल को अंदर तक फैलाया, अपनी गांड को चिकना किया। फिर मैंने दो उंगलियाँ डालने की कोशिश की — थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मैंने सह लिया। मैं चाहती थी कि जब विक्रम अपना लंड डालें, तो मुझे कम से कम दर्द हो।

मैंने वही काली पारदर्शी नाइटी पहनी जो विक्रम को बहुत पसंद थी। मेरे 34D स्तन उसमें से झाँक रहे थे, और मेरी गांड का आकार साफ दिख रहा था। मैंने अपने बाल खोल दिए — वो मेरी कमर तक आते थे — हल्का सा परफ्यूम लगाया, और बाथरूम से बाहर आ गई।

विक्रम बिस्तर पर बैठे हुए थे — नंगे, सिर्फ अपनी लुंगी पहने हुए। उनका लंड पहले से ही आधा खड़ा था, लुंगी के नीचे तंबू बना रहा था। उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुराए। “तैयार हो?” उन्होंने पूछा।

“हाँ,” मैंने धीरे से कहा, मेरी आवाज़ काँप रही थी।

“डरो मत,” उन्होंने कहा और अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाया। “मैं तुम्हें संभाल लूँगा।”

भाग 2: गांड चुदाई की शुरुआत – सुपाड़ा अंदर गया और दर्द से चीख निकल गई

विक्रम ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होंठों को चूमने लगे। ये किस पिछली रात जैसा नहीं था — इसमें जल्दबाज़ी नहीं थी, बल्कि एक गहराई थी, एक प्यार था। उन्होंने मेरी नाइटी धीरे-धीरे उतारी, इस बार फाड़ी नहीं। उनके हाथ कोमल थे, जैसे वो किसी कीमती चीज़ को छू रहे हों। उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे पूरे शरीर को चूमना शुरू किया — मेरे माथे से लेकर मेरे पैरों तक। वो मुझे गरम कर रहे थे, मुझे रिलैक्स कर रहे थे। उनकी जीभ मेरी त्वचा पर लकीरें बना रही थी, और मैं उनके हर स्पर्श पर सिहर रही थी।

फिर उन्होंने मुझे घुमाया और पेट के बल लिटा दिया। मेरी गांड अब उनके सामने थी — गोल, मोटी, और तेल से चमकती हुई। उन्होंने मेरी गांड के गालों को सहलाया, उन्हें दबाया, और फिर अपना चेहरा मेरी गांड के पास ले गए। मैंने महसूस किया कि उनकी जीभ मेरी गांड के छेद पर घूम रही है — गर्म, गीली, और बहुत कोमल। मैं कराह उठी।

“आआह… विक्की… ये… ये बहुत अच्छा लग रहा है…”

उन्होंने मेरी गांड को चूमा, चाटा, और अपनी जीभ से मेरे छेद को गीला किया। उनकी जीभ मेरे छेद के अंदर तक गई, और मुझे एक अजीब सी गुदगुदी महसूस हुई। फिर उन्होंने तेल की बोतल उठाई और मेरी गांड पर और तेल डाला। ठंडा तेल मेरी गांड की दरार में बहा, और उनकी उंगलियाँ मेरे छेद पर काम करने लगीं — एक उंगली, फिर दो, धीरे-धीरे मेरी गांड को फैलाती हुईं। मैंने अपनी साँसें रोक लीं और आराम करने की कोशिश की।

“बहुत टाइट है,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। “लेकिन मैं अंदर जाऊँगा।”

फिर मैंने महसूस किया कि उनके लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के छेद पर रखा गया है। वो गर्म था, मोटा था, और मेरे छेद पर दबाव डाल रहा था। मैंने अपनी मुट्ठी भींच ली और तैयार हो गई।

“आराम से साँस लो,” उन्होंने कहा। “जितना रिलैक्स करोगी, उतना कम दर्द होगा।”

मैंने गहरी साँस ली। और फिर — उन्होंने धक्का दिया।

“आआआआह्ह्ह्ह्ह…” मेरी चीख निकल गई। उनके लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के अंदर चला गया था। दर्द इतना तेज़ था कि मेरी आँखों से आँसू निकल आए। मुझे लगा जैसे मेरी गांड फट गई हो, जैसे कोई चाकू मेरे अंदर घुसा दिया गया हो। मैंने अपना मुँह तकिये में दबा लिया और चीख को दबाने की कोशिश की।

“श्श्श… बस… हो गया… अब सुपाड़ा अंदर है,” विक्रम ने धीरे से कहा और मेरी पीठ पर हाथ फेरा। “अब आराम से।”

वो कुछ सेकंड रुके, मुझे उनके लंड के आकार की आदत डालने का समय दिया। मेरी गांड का छेद उनके मोटे लंड के चारों ओर कसा हुआ था, और मैं हर धड़कन को महसूस कर रही थी। फिर धीरे-धीरे, उन्होंने और अंदर धकेला। इंच-इंच करके, उनका पूरा 7 इंच का लंड मेरी गांड में समा गया। मैं रो रही थी, लेकिन चुप थी — सिर्फ आँसू बह रहे थे।

“पूरा अंदर है,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। “अब मैं चोदूँगा।”

भाग 3: बिना रहम की गांड चुदाई – आर्या रो पड़ी और विक्रम ने गांड तोड़ दी

और फिर विक्रम ने धक्के मारने शुरू कर दिए। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़, फिर बहुत तेज़। वो मेरी गांड को ज़ोर-ज़ोर से चोद रहे थे, और मैं दर्द से चीख रही थी। मेरी सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं, और मेरे आँसू तकिये को भिगो रहे थे।

“आआआह… विक्की… प्लीज़… बहुत दर्द हो रहा है… आआआह… रुक जाओ… प्लीज़…”

लेकिन विक्रम रुके नहीं। वो बिना किसी रहम के मेरी गांड चोद रहे थे। उनकी पकड़ मेरे कूल्हों पर मज़बूत थी, और उनके धक्के गहरे और ज़ोरदार थे। हर धक्के के साथ मेरा शरीर आगे की तरफ खिसकता, और मेरी गांड में जलन होती। उनका मोटा लंड मेरी गांड के छेद को फैला रहा था, और मुझे लग रहा था कि मेरी गांड फट जाएगी।

“तुम्हारी गांड बहुत टाइट है,” विक्रम गुर्राए। “मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।”

“आआआह… विक्की… प्लीज़… मैं… मैं और नहीं सह सकती…” मैं रोते हुए बोली।

लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी। वो और ज़ोर से, और तेज़ी से मेरी गांड चोदने लगे। उनके धक्के अब जानवरों जैसे थे — बेकाबू, बेरहम, और पूरी तरह बेलगाम। वो मेरी गांड को ऐसे चोद रहे थे जैसे कोई सांड किसी गाय को चोदता है। मेरी चीखें अब सिसकियों में बदल गई थीं। मैं रो रही थी, मेरी नाक बह रही थी, और मेरा पूरा शरीर काँप रहा था।

“विक्की… प्लीज़… मुझे छोड़ दो… मैं मर जाऊँगी…” मैंने गिड़गिड़ाकर कहा।

लेकिन विक्रम को मेरी गिड़गिड़ाहट से और भी मज़ा आ रहा था। उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मेरा सिर पीछे की तरफ खींचा। “चुप रह और चुदवा,” उन्होंने गुर्राया। “ये तूने ही तो कहा था — तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो। अब चुपचाप सह।”

मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और बस सहने लगी। उनके धक्के लगातार जारी रहे — 10 मिनट, 15 मिनट, 20 मिनट। हर मिनट मुझे एक घंटे जैसा लग रहा था। मेरी गांड पूरी तरह खुल गई थी, और दर्द अब एक अजीब सी सुन्नता में बदल गया था। मेरा शरीर बस हिल रहा था — उनके हर धक्के के साथ, आगे-पीछे, आगे-पीछे। मेरे स्तन बिस्तर पर रगड़ खा रहे थे, और मेरे निप्पल सख्त हो गए थे।

फिर अचानक, दर्द के बीच, मुझे कुछ और महसूस होने लगा। एक अजीब सी गर्माहट, एक अजीब सा आनंद। मेरी चूत गीली होने लगी। मैं समझ नहीं पा रही थी कि ये क्या हो रहा है — मेरी गांड में दर्द हो रहा था, लेकिन मेरी चूत मज़ा ले रही थी। मेरा शरीर मेरे खिलाफ विद्रोह कर रहा था।

“ओह… विक्की… कुछ… कुछ हो रहा है…” मैंने हाँफते हुए कहा।

“क्या हो रहा है?” उन्होंने पूछा, उनके धक्के नहीं रुके।

“मुझे… मुझे मज़ा आ रहा है… दर्द में भी… मज़ा…”

“यही तो मैं चाहता था,” उन्होंने गुर्राया और अपने धक्के और तेज़ कर दिए।

और फिर वो हुआ — मेरी चूत से रस की धार निकल गई। मैं अपनी गांड चुदवाते-चुदवाते झड़ गई। मेरा शरीर तन गया, मेरी पीठ मुड़ गई, और मैं चीख पड़ी। ये चीख दर्द की नहीं थी — ये आनंद की थी।

विक्रम ने भी अपनी आखिरी ताकत लगा दी। उन्होंने एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरी गांड में अपना सारा माल निकल दिया। उनका गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरी गांड में भर गया, और वो मेरे ऊपर गिर पड़े। हम दोनों हाँफ रहे थे। मैं रो रही थी — लेकिन इस बार आँसू दर्द और आनंद दोनों के थे। वो संतुष्ट थे।

भाग 4: पत्नी की रफ चुदाई भाग 2 – चुदाई के बाद का दर्द और आफ्टरकेयर

विक्रम मेरे ऊपर से उतरे और उन्होंने मुझे देखा। मैं बिस्तर पर पड़ी हुई थी, रो रही थी, मेरी गांड से उनका वीर्य टपक रहा था, और मेरा शरीर काँप रहा था। मैं हिल भी नहीं पा रही थी। मेरी गांड का छेद पूरी तरह खुला हुआ था, और वीर्य की सफेद धार मेरी जाँघों पर बह रही थी।

तभी विक्रम का चेहरा बदल गया। वो जानवर जो अभी-अभी मुझे बेरहमी से चोद रहा था, अब गायब हो गया था। उनकी जगह मेरा पति आ गया — वही विक्की जो मुझसे बहुत प्यार करता था। उनकी आँखों में चिंता थी, और उनके हाथ काँप रहे थे।

“अरे बेबी… तुम तो बहुत रो रही हो,” उन्होंने धीरे से कहा और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। “श्श्श… हो गया… अब सब हो गया… मैं यहीं हूँ…”

उन्होंने मुझे कसकर गले लगाया और मेरे माथे पर, मेरी आँखों पर, मेरे गालों पर किस किए। उन्होंने मेरे आँसू पोंछे और मुझे चुप कराया। “मुझे माफ कर दो, बेबी। मैं बहुत ज़्यादा कर गया। लेकिन तुमने बहुत अच्छे से सहा। तुम बहुत बहादुर हो। तुम मेरी शेरनी हो।”

वो उठे और बाथरूम में गए। वो एक तौलिया लेकर आए, गर्म पानी से भिगोया हुआ। उन्होंने धीरे-धीरे मेरी गांड को साफ किया — बहुत कोमलता से, बहुत प्यार से। हर स्पर्श पर मैं सिहर जाती, लेकिन उनके हाथ इतने नरम थे कि दर्द नहीं होता था। फिर वो फ्रीज़ से बर्फ लेकर आए और एक कपड़े में लपेटकर मेरी गांड पर रख दिया। ठंडक से मुझे थोड़ी राहत मिली।

“दर्द कम होगा,” उन्होंने कहा। “और ये लो, दर्द की गोली।”

उन्होंने मुझे गोली दी और पानी पिलाया। फिर वो मेरे बगल में लेट गए और मुझे अपनी बाहों में ले लिया। उनका एक हाथ मेरे बालों में था, और दूसरा हाथ मेरी पीठ पर। वो धीरे-धीरे मुझे सहला रहे थे, और मैं धीरे-धीरे शांत हो रही थी।

“पानी चाहिए?” उन्होंने पूछा।

“हाँ,” मैंने धीरे से कहा।

वो उठे और पानी लेकर आए। उन्होंने गिलास मेरे होंठों से लगाया और मुझे पानी पिलाया। फिर वो वापस लेट गए और मुझे अपनी बाहों में ले लिया। मैंने उनकी छाती पर अपना सिर रख दिया और उनकी धड़कनें सुनने लगी।

भाग 5: घंटों बातें – “मैं तुम्हारी हूँ, तुम जो चाहो कर सकते हो”

हम घंटों ऐसे ही लेटे रहे — एक-दूसरे की बाहों में, नंगे, बिना कुछ बोले। बाहर रात गहरी हो गई थी, और कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाज़ थी। कभी-कभी कोई गाड़ी सड़क पर गुज़रती, और उसकी हेडलाइट की रोशनी खिड़की से छनकर कमरे में आती और चली जाती।

फिर विक्रम ने धीरे से कहा, “तुम्हें पता है, मुझे तुम्हें रोता देखकर बहुत मज़ा आया।”

मैंने उनकी तरफ देखा। “सच में?”

“हाँ,” उन्होंने कहा। “ये नहीं कि मुझे तुम्हारा दर्द देखकर खुशी होती है। लेकिन जब तुम मेरे लिए इतना कुछ सहती हो, जब तुम मेरे नीचे रोती हो और फिर भी मुझे रोकती नहीं, तो मुझे लगता है कि तुम सच में मेरी हो। पूरी तरह मेरी। और मुझे तुम पर बहुत गर्व है।”

मैंने उनकी छाती पर अपना सिर रख दिया और उनकी धड़कनें सुनीं। “मैं तुम्हारी हूँ, विक्की। पूरी तरह तुम्हारी। तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो। मेरी चूत, मेरी गांड, मेरा मुँह — सब तुम्हारा है। मैं सब सह लूँगी।”

“मुझे पता है,” उन्होंने मेरे बालों पर किस किया। “और मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। तुम मेरी ज़िंदगी हो।”

“मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ,” मैंने कहा। “बस… अगली बार थोड़ा और तेल लगा लेना।”

वो हँस पड़े। “पक्का। अगली बार पूरी बोतल खत्म कर दूँगा। और हाँ… तुमने जो कहा कि तुम्हें दर्द में भी मज़ा आया… वो सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा।”

“सच में आया था,” मैंने शरमाकर कहा। “पता नहीं कैसे, पर आया था।”

“यही तो खूबसूरती है हमारे रिश्ते की,” उन्होंने कहा। “हम एक-दूसरे को पूरा करते हैं। तुम मेरी कमज़ोरी हो, और मेरी ताकत भी।”

“और तुम मेरी ज़िंदगी हो,” मैंने कहा।

और हम हँसते-हँसते सो गए — एक-दूसरे की बाहों में, पूरी तरह संतुष्ट, और पूरी तरह एक-दूसरे के।

पत्नी की रफ चुदाई भाग 2 ने मुझे दिखा दिया कि विक्रम सिर्फ मेरे पति नहीं हैं — वो मेरे मालिक हैं, मेरे रक्षक हैं, और मेरे सबसे बड़े प्यार हैं। और मैं उनके लिए कुछ भी सह सकती हूँ।

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