सुहागरात की पहली चुदाई – क्या आपने कभी सोचा है कि एक कुँवारी दुल्हन की सुहागरात कैसी होती है जब उसका पति उसे पहली बार नंगा देखे, उसके ब्रेस्ट चूसे, उसकी चूत और गांड चाटे, और फिर अपना लंड उसकी कुँवारी चूत में डालकर उसे औरत बनाए? यह हिंदी सेक्स कहानी सुहागरात की पहली चुदाई की है जहाँ 26 साल की प्रिया की शादी दो महीने पहले हुई और उसकी सुहागरात पर उसके पति विक्रम ने पहले उसे प्यार से चूमा, उसके 36 साइज़ के ब्रेस्ट चूसे और निप्पल काटे जिससे प्रिया को अपना पहला ऑर्गेज़्म हुआ और उसे लगा कि उसने पेशाब कर दिया। फिर विक्रम ने उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से चूमा, उसकी गांड को चाटा और जीभ अंदर डाली, फिर उसकी पैंटी उतारी और उंगलियों से उसकी चूत को चौड़ा किया। आखिर में विक्रम ने अपना लंड प्रिया की कुँवारी चूत में डाला – दर्द हुआ, खून निकला, लेकिन फिर वही दर्द आनंद में बदल गया और विक्रम ने अपना वीर्य प्रिया की चूत में छोड़ दिया। अगली सुबह विक्रम की बहन ने प्रिया को चिढ़ाया – “भैया ने ज्यादा परेशान तो नहीं किया न?” अगर आपको सुहागरात, पहली चुदाई, चूत चाटना, गांड चाटना और रोमांटिक सेक्स वाली कहानियाँ पसंद हैं, तो यह दास्ताँ आपके लिए ही है।
भाग 1: सुहागरात की पहली चुदाई – दुल्हन का इंतज़ार और पति का आगमन
मेरा नाम प्रिया है, मेरी उम्र है 26 साल, मेरी शादी दो महीने पहले हुई है और मुझे अपने पति से बहुत प्रेम है। वो बहुत ही अच्छा इंसान है और मेरी बहुत केयर करता है — मेरी हर छोटी-बड़ी ज़रूरत का ख्याल रखता है, मेरी पसंद-नापसंद का ध्यान रखता है, और मुझे हमेशा मुस्कुराता रहता है। इस साइट पर जब मैंने बहुत सारी कहानियाँ पढ़ीं तब मुझे लगा कि अपनी कहानी मैं भी शेयर कर दूँ। आखिरकार, हर लड़की की ज़िंदगी में सुहागरात एक ऐसा पल होता है जिसे वो कभी नहीं भूलती — और मैं भी अपनी सुहागरात को शब्दों में बयान करना चाहती हूँ।
अब ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए मैं सीधे कहानी पर आती हूँ। वो मेरी सुहागरात थी और लड़कियाँ तथा भाभियाँ मुझे फूलों से सजे हुए खूबसूरत कमरे में अकेला छोड़कर चली गईं। कमरा बहुत खूबसूरत लग रहा था — बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी थीं, चारों तरफ मोमबत्तियाँ जल रही थीं, और हवा में रजनीगंधा और मोगरे की मीठी खुशबू तैर रही थी। शादी की थकान पूरे शरीर में महसूस हो रही थी — पाँच दिनों से लगातार रस्में, मेहमानों का आना-जाना, और भारी लहंगे का वज़न। इसलिए मैंने नहाने का फैसला किया। मैंने जल्दी से नहा लिया — गर्म पानी से, जिसने मेरी थकान को कुछ हद तक धो दिया — और एक हल्की सुंदर लाल रंग की साड़ी पहनकर फिर से तैयार हो गई। मैंने अपने बालों को खुला छोड़ दिया, हल्का सा इत्र लगाया, और पलंग पर बैठकर अपने पति का इंतज़ार करने लगी।
जैसा कि आप सभी जानते ही होंगे कि सुहागरात की अहमियत पति और पत्नी के लिए बहुत ज्यादा होती है। यह वो रात है जब दो अजनबी एक-दूसरे के सबसे करीब आते हैं, एक-दूसरे के शरीर और आत्मा को जानते हैं। मैं यह भी जानती थी कि वो भी मेरी तरह कुँवारे थे — उन्होंने मुझसे पहले कभी किसी लड़की के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए थे। यह सोचकर मुझे थोड़ी राहत मिली, क्योंकि हम दोनों एक-दूसरे के लिए पहले थे।
जैसे ही मैं पलंग पर बैठी, मेरे पति विक्रम कमरे में आ गए। उनके शरीर से चंदन, गुलाब और महंगे परफ्यूम की मीठी महक आ रही थी जो पूरे कमरे में फैल रही थी। वो कुर्ता-पायजामा पहने हुए थे — हल्के क्रीम रंग का कुर्ता — और उनके चेहरे पर एक शर्मीली सी मुस्कान थी। मैं थोड़ी सी घबरा रही थी — मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, मेरी हथेलियाँ पसीने से तर थीं। जैसे ही वो मेरे पास आए, मैं उठकर खड़ी हो गई। वो भी पलंग पर मेरे साथ बैठ गए। हमने शादी से संबंधित बातें कीं — कौन-कौन आया था, किसने क्या गिफ्ट दिया — और जो गिफ्ट्स हमें मिले थे उनके बारे में विस्तार से चर्चा की। इससे मेरी घबराहट थोड़ी कम हुई।
फिर बड़े प्यार से उन्होंने मुझसे पूछा, “क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ?” वो खड़े हुए और अपने दोनों हाथों से मेरे चेहरे को नरम तरीके से थाम लिया। उनके हाथ गर्म और मुलायम थे। उन्होंने मेरे गाल पर गहरा और प्यारा किस किया — बस एक हल्का सा चुंबन, लेकिन उसमें इतना प्यार था कि मेरी आँखें भर आईं। फिर वो बहुत नज़दीक आकर मेरे बगल में बैठ गए। बैठने के बाद उन्होंने मेरी बंद आँखों पर भी हल्के से किस किया और मुझे बताया कि इस दिन का उन्होंने जब से इंतज़ार किया था जबसे कि वो मुझसे पहली बार मिले थे। उन्होंने मेरे हाथों को अपने गर्म हाथों में लेकर मुझसे पूछा कि क्या मैं थकी हुई महसूस कर रही हूँ। अगर ऐसा है तो मैं आराम से सो सकती हूँ।
जिसे सुनकर मैंने एक शर्मीली मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया कि अगर वो भी थके हुए हों तो हम दोनों सो जाते हैं। यह सुनकर उन्होंने मुझे आँख मारी और मुस्कुराते हुए मेरे और भी नज़दीक आकर मुझे फिर से किस करने लगे। मैं व्याकुलता से भर रही थी। वैसे भी यह उनका पहला किस नहीं था। ऐसा वो पहले भी कई बार कर चुके थे। हमारी सगाई के बाद जब भी हम अकेले होते थे, चाहे घर पर या कहीं बाहर घूमने जाते समय — पार्क की बेंच पर, कार में, एक बार तो सिनेमा हॉल में भी। पर शादी के बाद किया जाने वाला किस पता नहीं क्या जादू करता है जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। शायद यह जानकर कि अब हम एक-दूसरे के हैं, पूरी तरह से, हमेशा के लिए। मैं अपनी सुहागरात को लेकर बहुत ज्यादा उत्सुक थी और मेरे मन में तरह-तरह के विचार चल रहे थे — क्या होगा? कैसा लगेगा? दर्द होगा या मज़ा?
भाग 2: पहला चुंबन, ब्रेस्ट चूसना और पहला ऑर्गेज़्म
हम लोग एक-दूसरे को गहरे किस करने लगे थे। उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरी पीठ और कमर पर धीरे-धीरे गोल-गोल फेरना शुरू कर दिया। मेरे हाथ उनके मजबूत कंधों पर थे और मैं उन्हें अपनी ओर खींच रही थी। मैंने महसूस किया कि उनकी गर्म और नम जीभ मेरे होंठों के बीच से मेरे मुँह में अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी। मेरे होंठों को धीरे से खोलती हुई उनकी जीभ मेरे मुँह में चली गई — गर्म, गीली, और मेरी जीभ से खेलती हुई। उसी बीच उनके हाथ मेरे पल्लू के अंदर से होते हुए मेरी पीठ और कमर को सहलाते हुए मेरे स्तनों तक पहुँच गए।
उनका हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे नरम और भरे हुए स्तनों को धीरे-धीरे दबा रहा था। मेरे स्तन — 36 साइज़ के, गोल और भरे हुए — उनकी हथेलियों में बिल्कुल फिट आ रहे थे। मेरी आँखें पूरी तरह से बंद थीं। मैं उनके हर स्पर्श को गहरे से अनुभव कर रही थी और उसका पूरा मज़ा ले रही थी। जब उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए तो मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी। आज मैं पहली बार किसी लड़के के सामने पूरी तरह बिना कपड़ों के होने वाली थी। आज तक मेरी मम्मी ने भी मुझे बिना कपड़ों के नहीं देखा था। जब मैं चौदह-पंद्रह साल की थी तब भी नहाते समय अगर मम्मी ने सर धोने में मदद की तो भी मैं हमेशा तौलिए में लिपटी रहती थी या ब्रा और पैंटी पहने रहती थी। और आज एक पुरुष को अपना पूरा नग्न शरीर दिखाने का मौका मिलने वाला था।
उन्होंने मेरे पल्लू को मेरे कंधों से धीरे से हटाया और वो एक तरफ सरककर गिर गया। साथ ही साड़ी का दूसरा हिस्सा जो पेटीकोट में घुसा हुआ था उसे भी बाहर की तरफ खींचकर निकाल दिया और साड़ी पूरी तरह से निकाल दी। अब मैं उनके सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी। उन्होंने एक बार फिर से मुझे अपनी मजबूत बाहों में भर लिया। हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में गहरी नज़रों से देखने लगे। साथ ही उन्होंने मेरे ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने शुरू कर दिए।
और फिर उन्होंने ब्लाउज को मेरे कंधों पर से होते हुए उतार दिया। अब मैं नरम और चमकदार सैटिन की ब्रा में थी जिसमें मेरे भरे हुए स्तन पूरी तरह फिट थे और बाहर आने को बेताब थे। उन्होंने मुझे पलंग की तरफ चलने को कहा और हम दोनों पलंग पर साथ-साथ आराम से लेट गए। फिर उन्होंने मेरी ब्रा के हुक भी खोल दिए और मेरे स्तनों पर से उसे पूरी तरह हटा दिया। मेरे चुचुक उत्तेजना से पूरी तरह खड़े और सख्त हो चुके थे — गुलाबी, उभरे हुए, और उनके स्पर्श के लिए तरस रहे थे। उनके गर्म हाथों ने मेरे स्तनों को अपनी हथेलियों में भर लिया और उन्हें किस करने लगे। उन्होंने मेरे स्तनों को नरम-नरम सहलाना शुरू कर दिया। हम दोनों की साँसें तेज़-तेज़ चलने लगी थीं।
वो मेरे निप्पल के साथ खेल रहे थे — कभी उंगलियों से घुमाते, कभी हल्के से दबाते, कभी खींचते। वो मेरे स्तनों को बार-बार देखे जा रहे थे और मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उन्होंने एक निप्पल को अपने गर्म और नम मुँह में ले लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगे। हे भगवान, मैं नहीं बता सकती कि उस पल क्या अनुभूति हुई थी — जैसे मेरे पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई हो। फिर उन्होंने दूसरे निप्पल को किस किया और उसे भी चूसना शुरू कर दिया। मैंने अपना सर उत्तेजना और आनंद के मारे पीछे की ओर कर लिया था, और मेरे मुँह से हल्की-हल्की कराहें निकल रही थीं।
वो बार-बार मेरे बाएँ और दाएँ निप्पल को चूसना जारी करे रहे जब तक की मेरे पूरे शरीर में एक आग सी न लग गई। उनके गर्म और नम मुँह ने मेरे बाएँ निप्पल को पूरी तरह अपने अंदर ले लिया। वे उसकी नोक को अपनी जीभ से बार-बार घुमाते हुए ज़ोर से चूस रहे थे। फिर वे दाएँ निप्पल पर चले गए। वहाँ भी उन्होंने उसे होंठों के बीच दबाकर खींचा और चूसा। मेरे निप्पल अब पूरी तरह सख्त और लाल हो चुके थे। हर बार जब उनकी जीभ मेरी निप्पल की नोक पर घूमती तो मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती।
पहली बार कोई ऐसा मेरे साथ कर रहा था। तभी पता नहीं क्या हुआ, मेरे शरीर में एक उफान सा आया और मैं निढाल सी हो गई। मेरी योनि के अंदर से अचानक एक गर्म तरल पदार्थ निकलने लगा। मुझे अपनी योनि में भारी गीलापन सा महसूस हुआ। मेरी पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी। वो मेरा पहला ऑर्गेज़्म था उस सुहागरात में। मुझे लगा कि मैंने अपनी पैंटी में पेशाब कर लिया है। मैं बहुत शर्मिंदगी महसूस करने लगी। मेरे चेहरे पर लालिमा छा गई और मैं अपनी आँखें बंद करके मुँह फेरने लगी।
वो समझ गए और उन्होंने पूछा, “क्या हुआ, क्या तुम्हें ऑर्गेज़्म हुआ?”
“यह क्या था? मुझे लगा कि मैंने पेशाब कर दिया,” मैंने पूछा।
“नहीं… तुम्हें ज़रूर ही ऑर्गेज़्म हुआ होगा…” उन्होंने जवाब दिया, और मुस्कुराए। उनकी मुस्कान ने मेरी शर्म को थोड़ा कम किया।
भाग 3: चूत चाटना, गांड चाटना और पैंटी उतारना
फिर उन्होंने मेरे स्तनों पर से अपने हाथ नीचे की ओर बढ़ाए और मेरे पेटीकोट पर पहुँच गए। उन्होंने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। उनकी उंगलियों का मेरी पैंटी पर स्पर्श हुआ और मेरे बदन में सिहरन दौड़ गई। वो मेरी कमर पर गहरे किस कर रहे थे — मेरी नाभि के आस-पास, मेरे कूल्हों पर। उनकी गर्म साँस मेरी त्वचा पर पड़ रही थी। फिर उन्होंने मेरी नम हो चुकी पैंटी पर भी किस किया। उनके होंठ मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी योनि की आकृति को महसूस कर रहे थे।
उन्होंने पीछे से मेरे हिप्स को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ा। उन्होंने अपना चेहरा मेरी पैंटी से पूरी तरह सटा दिया और उसे ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगे। उनकी जीभ पैंटी के कपड़े के ऊपर से मेरी योनि की दरार पर दबाव डाल रही थी। मैं अपनी कराहों को रोक नहीं पा रही थी।
फिर उन्होंने अपनी गर्म जीभ मेरी पैंटी की बीच वाली दरार पर घुमाते हुए धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ले जाकर मेरी गांड की दरार पर पहुँचा दी। उन्होंने पैंटी को थोड़ा साइड खींचकर अपनी नम जीभ को मेरी टाइट गांड के छेद पर लगा दिया और ज़ोर-ज़ोर से चाटना शुरू कर दिया। उनकी गर्म जीभ मेरी गांड को पूरी तरह लपलपा रही थी, छेद को चूस रही थी और बार-बार अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी। मैं शर्म और तीव्र उत्तेजना से काँप उठी। उनकी जीभ की नोक मेरे गांड के अंदर हल्का-हल्का दबाव डाल रही थी जिससे मेरे पूरे बदन में बिजली सी दौड़ रही थी।
वो कुछ देर तक मेरी गांड को लपलपाकर चाटते रहे, अपनी लार से पूरी तरह गीला करते रहे। फिर उन्होंने अपनी जीभ को नीचे मेरी योनि की तरफ ले जाकर उसकी पूरी लंबाई चाट ली। मेरी योनि से अब लगातार रस निकल रहा था — गर्म, चिकना, और मीठी खुशबू वाला।
तत्पश्चात उन्होंने धीरे से अपनी उंगलियाँ मेरी पैंटी के इलास्टिक में डालीं और धीरे-धीरे उसे नीचे करना शुरू कर दिया। मेरी योनि प्रदेश के घने बाल नज़र आने लगे थे। हवा मेरी गीली योनि को छू रही थी। मैंने अपनी टाँगें फैला दीं जिससे कि उन्हें आसानी हो सके। फिर मैंने अपने एक पैर को ऊपर किया और फिर दूसरा जिससे कि उन्होंने मेरी पैंटी भी उतार दी। अब मेरी योनि पूरी तरह नंगी और खुली हुई उनकी नज़रों के सामने थी।
तब विक्रम को लगा कि उन्होंने अपने कपड़े तो उतारे ही नहीं। सो उन्होंने अपने कुरते और पायजामे को उतार दिया और अंडरवियर पहन कर मेरे ऊपर लेट गए। मेरे स्तन उनके चौड़े और गर्म सीने के नीचे पूरी तरह दबे हुए थे। उनके हाथ मेरे बदन को हर जगह महसूस कर रहे थे। मैं अपनी टाँगों के बीच भारी गीलापन महसूस कर रही थी। उनके कहने पर मैंने अपना हाथ उनके अंडरवियर पर रखा और… और… मैंने उनका कठोर लिंग पकड़ा। मैंने उसे अपनी उंगलियों में लपेट लिया। वो बहुत बड़ा था — कम से कम 7 इंच लंबा और मोटा। मुझे नहीं पता था कि यह मेरे अंदर जा भी पाएगा कि नहीं। उनके हिप्स भी हरकत करने लगे थे। वो खड़े हुए और अपना अंडरवियर उतार दिया। उसके बाद उन्होंने मुझे इस तरह लिटा दिया कि मेरी पीठ उनकी छाती से लग गई। उन्होंने अपने दोनों हाथों में मेरे स्तन दबा लिए। हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे और एक-दूसरे के शरीर को महसूस कर रहे थे।
भाग 4: सुहागरात की पहली चुदाई – कुँवारी चूत में लंड, दर्द और खून
फिर उन्होंने मेरे स्तनों को मसलना शुरू कर दिया। उनके मजबूत हाथों ने मेरे नरम और भरे हुए स्तनों को पूरी तरह अपनी मुट्ठियों में भर लिया। वो उन्हें धीरे-धीरे मसल रहे थे, ऊपर-नीचे दबा रहे थे। कभी वो मेरी निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच पकड़कर हल्का सा उमेठ देते तो कभी पूरे स्तन को ज़ोर से दबाकर निचोड़ते। हर बार जब वे मेरी निप्पल को खींचते, मेरे शरीर में मीठी सी झुरझुरी दौड़ जाती।
उसके बाद मैं सीधी लेट गई और उन्होंने मेरी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। उनकी उंगलियाँ मेरी योनि के ऊपर वाले हिस्से पर घूम रही थीं। उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी चूत के गीले लिप्स के बीच में डाली और धीरे से अंदर डालकर बाहर निकाल ली। फिर उन्होंने मेरी क्लिटोरिस को अपने अंगूठे से रगड़ना शुरू कर दिया। मेरा बुरा हाल था। मेरे मुँह से बार-बार आहें निकल रही थीं।
उन्होंने मुझसे पूछा कि उंगली डालने पर दर्द तो नहीं हो रहा। मैंने मना कर दिया तो उन्होंने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियों को अंदर जाने में कुछ रुकावट आ रही है। उन्होंने ही कहा, “शायद तुम्हारी हाइमन है… जो रोक रही है… कोई बात नहीं।” फिर वो मुझे चूमने लगे और मैंने उनका लिंग फिर से पकड़ लिया। उन्होंने फिर से मेरे गुलाबी निप्पल चूसने शुरू कर दिए।
हम दोनों ही आउट ऑफ कंट्रोल हो चुके थे। और आखिर मैं रह नहीं पाई और मैं बोल पड़ी, “विक्रम, प्लीज़ मुझे प्यार करो।”
“क्या तुम इसके लिए तैयार हो?” उन्होंने पूछा।
“हाँ, मैं पूरी तरह से अब आपकी ही हूँ। मुझे सुहागरात का पूर्ण सुख चाहिए…” मैंने जवाब दिया।
“देखो, हो सकता है कि तुम्हें थोड़ा दर्द हो… पर बाद में अच्छा लगेगा,” उन्होंने कहा।
“मैं जानती हूँ। बस आप मुझे प्यार करो,” मैंने बोला।
वो मुस्कुराए और मेरी टाँगों के बीच में आ गए। उसके बाद उन्होंने एक हाथ पर अपने शरीर को संभालते हुए दूसरे हाथ से मेरी चूत के नम लिप्स सहलाने लगे। और फिर कुछ देर ऐसा करने के बाद, उन्होंने अपने हाथों से अपने लिंग को पकड़ लिया। मैंने देखा कि वो अपने लिंग को मेरी तरफ ला रहे थे, और मैं लिंग के मुंड को अपनी चूत पर महसूस कर पा रही थी। उन्होंने बहुत ही धीरे से उसे ऊपर से नीचे तक रगड़ा, जैसे कि सही जगह ढूँढ़ रहे हों अंदर डालने के लिए। सही जगह का अनुमान होने पर वो रुक गए। धीरे से वो नीचे की ओर झुके और उनके लिंग ने मेरी चूत में प्रवेश किया।
वो मेरी आँखों में देख रहे थे, कि मैं उन्हें संकेत दे सकूँ अगर मुझे दर्द महसूस हो तो। मैंने उनकी छाती पर अपना हाथ फिराना शुरू कर दिया। उन्होंने धीरे-धीरे और अंदर डालना शुरू किया। फिर वो धीरे से थोड़ा पीछे आए और फिर अंदर की ओर बढ़े। मैं अपने अंदर उस गहराई में हो रहे उस अनुभव को लेकर बहुत आश्चर्यचकित थी।
यहाँ तक कि मैं उनके लिंग को मेरी योनि के दीवारों पर महसूस कर रही थी। एक बार फिर वो पीछे हटे और फिर अंदर की ओर दबाव दिया। मेरे अंदर अवरोध महसूस होने लगा था। वो उठे और फिर से धक्का दिया, ज्यादा गहराई तक नहीं पर थोड़ा ज़ोर से।
मुझे पता था कि उनके लिंग को मेरी योनि के रस ने पूरी तरह भिगो दिया था, जिसकी वजह से उनका मोटा और गर्म लिंग आसानी से अंदर और बाहर हो पा रहा था। और अगली बार के धक्के में उन्होंने थोड़ा दबाव बढ़ा दिया। मेरी साँसें जल्दी-जल्दी आ रही थीं। मैंने अपनी बाहें उनके मजबूत कंधों पर लपेट दी थीं और अपने नितंबों को ऊपर की ओर उठा दिया। मैंने एक तीव्र चुभन सी महसूस की। विक्रम का लिंग मेरी हाइमन से टकरा रहा था और जब उसने उसे भेदकर आगे बढ़ना चाहा तो मुझे लगा कि दर्द के मारे मैं मर जाऊँगी।
“ओह माँ…” मेरे मुँह से निकला। मेरे स्तन ऊपर की ओर उठ गए और शरीर ऐंठन में आ गया जैसे ही मेरे पति का गर्म, आकार में बड़ा लिंग पूरी तरह से मेरी गीली हो चुकी योनि में घुस गया। अंदर, और अंदर वो चलता गया। मेरी चूत के लिप्स को पूरी तरह खुला रखते हुए, मेरी क्लिटोरिस को रगड़ता हुआ वो गहराई तक चला गया था। मेरी योनि मेरे पति के लिंग के संपूर्ण स्पर्श को पाकर व्याकुलता से पगला गई थी।
मेरी आँखों से आँसू भी निकल आए थे। मैं अपना कौमार्य खो चुकी थी और लिंग मेरे अंदर था। विक्रम रुका और मेरे आँसुओं पर एक निगाह डाली पर मैं नहीं रुकी, मैं अपने हिप्स ऊपर की ओर उठाकर उनके लिंग को और अंदर तक ले गई।
हम दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपटे हुए थे। हम दोनों एक-दूसरे को गहरे किस किए जा रहे थे और मैंने महसूस किया कि उनके हिप्स आगे-पीछे हो रहे हैं धीरे-धीरे। और फिर अचानक उन्होंने अपने हिप्स और ऊपर किए जिससे लिंग थोड़ा बाहर आया और फिर वो अंदर डालने लगे। इसी तरह उन्होंने एक लय में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। जब-जब उनका लिंग मेरी योनि की दीवारों से टकराता हुआ मेरी गहराइयों में जाता तो उसके स्पर्श मात्र से मेरे पूरे शरीर में सनसनाहट दौड़ जाती।
“मैं ज्यादा देर नहीं रुक सकता… मेरा यह पहला समय है…!” उन्होंने कहा।
“मेरे अंदर ही निकाल दो… मैं भी यही चाहती हूँ,” मैंने जवाब दिया।
उन्होंने अपनी गति बढ़ा दी और बड़ी जल्दी ही उनका वीर्य निकल गया। मैं महसूस कर पा रही थी कि मेरे पति के लिंग में से निकल रहा गर्म वीर्य मेरी योनि को तर कर रहा था। मैं विक्रम से मिलने वाले सुख का पूरा आनंद ले रही थी, मेरा पति, पहली बार… मेरी योनि में अपने वीर्य को उड़ेल रहा था।
भाग 5: वीर्य से भरी चूत, आफ्टरकेयर और सुबह की शर्म
कुछ देर बाद विक्रम ने अपने लिंग को मेरी योनि में से बाहर निकाल दिया। वो खून से लाल हो रखा था। चादर पर भी एक लाल धब्बा सा था और मेरी योनि की दीवारें भी खून से सनी थीं। कुछ मिनटों तक हम दोनों साथ-साथ लेटे रहे। मेरा सर उनके सीने पर था, और मैं उनकी धड़कनें सुन रही थी — तेज़, लेकिन अब धीरे-धीरे शांत हो रही थीं। उन्होंने मुझसे पूछा, “कैसा लगा?” मैंने उन्हें किस किया और कहा, “आप बहुत शरारती हो।”
फिर हम लोग बाथरूम में चले गए। उन्होंने मुझे गोद में उठाकर बाथरूम तक पहुँचाया। हमने अपने आप को साफ किया — गर्म पानी, साबुन, और एक-दूसरे के शरीर पर हाथ फेरते हुए। हमारे इस पहले प्यार की सारी निशानी कमरे में से साफ की। फिर लगभग एक घंटे तक हम दोनों नंगे ही रहे और एक-दूसरे की बाहों में सो गए। मेरा शरीर उनके शरीर से सटा हुआ था, और मैंने कभी इतनी सुरक्षित और प्यार से भरी हुई महसूस नहीं किया था।
अगली सुबह हम उठकर तैयार हुए और बीच-बीच में एक-दूसरे को चूमते भी रहे। हर चुंबन में कल रात की यादें ताज़ा हो रही थीं, और हम दोनों शरमाकर मुस्कुरा रहे थे।
अगली सुबह विक्रम की बहन हम लोगों को उठाने आई। मैं शर्मा रही थी और उनसे आँख नहीं मिला पा रही थी। वो समझ गई और गर्दन हिला कर मुझे चिढ़ाने के अंदाज़ में बोली, “क्यों भाभी? भैया ने ज्यादा परेशान तो नहीं किया न?” मैं कुछ नहीं बोली और शर्मा कर वहाँ से निकल गई। लेकिन मेरे दिल में एक गर्माहट थी — सुहागरात की पहली चुदाई ने मुझे एक लड़की से औरत बना दिया था, और यह सफर दर्दनाक था, लेकिन बेहद खूबसूरत भी। और मैं जानती थी कि यह तो बस शुरुआत थी — हमारी ज़िंदगी के बाकी दिनों में हम एक-दूसरे को और भी गहराई से जानेंगे, और भी प्यार करेंगे।